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भार हल्का करें

जब हमारे नवगठित बाइबल अध्ययन में जुड़ी महिलाएँ कई त्रासदियों का सामना कर रही थी, हमने अचानक खुद को गहरे व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए पाया। पिता के खोने का सामना, तलाक के बाद शादी की सालगिरह का दर्द, पूरी तरह से बहरे बच्चे का जन्म, आपातकालीन कक्ष में बच्चे को लाने के लिए दौड़ का अनुभव-यह अकेले उठाना किसी के लिए भी बहुत ज्यादा था। प्रत्येक व्यक्ति की भेद्यता के कारण अधिक पारदर्शिता आई। हम एक साथ रोये और प्रार्थना की, और जो अजनबियों के समूह के रूप में शुरू हुआ था कुछ ही हफ्तों में करीबी मित्रों का एक समूह हो गया.. 

कलीसिया के देह के अंग के रूप में, यीशु में विश्वासी लोगों के पास उनकी पीड़ा में गहरे और व्यक्तिगत रूप से आने में सक्षम हैं। संबंधपरक संबंध जो मसीह में भाइयों और बहनों को एक साथ बांधता है इस बात पर निर्भर नहीं हैं कि हममें क्या समानताएं है या हम एक-दूसरे को कितने समय से जानते हैं। इसके बदले हम वह करते हैं, जिसे पौलुस “तुम एक दूसरे का भार उठाओ” (v. 2) कहता है। परमेश्वर की सामर्थ्य पर भरोसा करते हुए, हम सुनते, सहानुभूति रखते, जहां हम मदद कर सकते हैं करते हैं, और हम प्रार्थना करते हैं। हम “इसलिये जहाँ तक अवसर मिले हम सब के साथ भलाई करें, विशेष करके विश्‍वासी भाइयों के साथ” (v.10) के तरीके ढूंढ सकते हैं। पौलुस कहता है कि जब हम ऐसा करते हैं, तो हम मसीह की व्यवस्था को पूरा करते हैं (v.2): परमेश्वर से और अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रखने के लिए। जिन्दगी का बोझ भारी हो सकता है, लेकिन उन्होंने हमें उस बोझ को हल्का करने के लिए हमारे कलीसिया का  परिवार दिया है।

फास्ट-फूड प्रोत्साहन

मारीया अपने फ़ास्ट फ़ूड खाने को लेकर एक खाली टेबल पर गई। जैसे ही उसने अपने बर्गर को खाया, उसकी निगाह कई टेबलों दूर बैठे एक युवक पर गई। उसके कपड़े गंदे, उसके बाल ढीले लटके हुए, और वह एक खाली कागज़ के कप को पकड़े हुए था। स्पष्ट रूप से वह भूखा था। वह मदद कैसे करती? पैसे का दान देना बुद्धिमानी नहीं लग रही थी। यदि वह भोजन लाकर उसे देती, हो सकता है वह शर्मिंदा हो जाता?

तभी मारिया को रूत की कहानी याद आई, जिसमें बोअज़, एक धनी जमींदार, गरीब अप्रवासी विधवा को अपने खेतों से बीनने के लिए आमंत्रित करता है। उसने “अपने जवानों को आज्ञा दी,... “उसको पूलों के बीच बीच में भी बीनने दो, और दोष मत लगाओ। वरन् मुट्ठी भर जाने पर कुछ कुछ निकाल कर गिरा भी दिया करो, और उसके बीनने के लिये छोड़ दो, और उसे घुड़को मत।” (2:15-16)। एक ऐसी संस्कृति में जहां महिलाएं जीविका के लिए अपने संबंधित पुरुषों पर पूरी रीति से निर्भर थीं, बोअज़ ने परमेश्‍वर के प्रेममय प्रबन्ध को प्रदर्शित किया। आखिरकार, बोअज़ ने रूत से शादी कर ली, उसे उसकी गंभीर ज़रूरत से छुड़ाया (4:9-10)। जैसे मारिया जाने के लिए खड़ी हुई, उसने युवक से निगाहे मिलाते हुए, पास की टेबल पर अपने फ्राई का अनछुए पैकेट रख दिए। अगर वह भूखा था, तो वह उसके “फ़ास्ट-फ़ूड के खेत” में से कुछ बटोर सकता था। पवित्रशास्त्र की कहानियों में परमेश्वर का हृदय प्रकट होता है क्योंकि वे प्रोत्साहित करने के लिए रचनात्मक समाधानों का वर्णन करती हैं।

परमेश्वर का पक्का पीछा

कुछ वर्ष पहले, एक व्यक्ति मुझसे लगभग एक ब्लॉक आगे चल रहा था। मैं स्पष्ट रूप से देख सकता था कि उसकी बाहें सामान से भरी थीं। अचानक, वह सब कुछ गिराते हुए फिसल गया। कुछ लोगों ने, जो उसने गिराया उसे इकट्ठा करने, और उसे उसके पैरों पर खड़े होने में उसकी मदद की, लेकिन उन लोगों से कुछ रह गया —उसका बटुआ। मैंने उसे उठाया और, उस महत्वपूर्ण चीज को लौटाने की आशा करते हुए उस अजनबी का पीछा करने लगा। मैं चिल्लाया “सर, सर!” और अंत में उसका ध्यान खींचा। जैसे ही मैं उसके पास पहुँचा वह मुड़ा। जैसे ही मैंने बटुआ निकाला, मैं उसके आश्चर्यजनक राहत और अपार कृतज्ञता के उसके रूप को कभी नहीं भूलूंगा। 

उस व्यक्ति का पीछा करना जिस रूप में शुरु हुआ था वह आगे कुछ अलग ही रूप में बदल गया। अधिकांश अंग्रेजी अनुवाद भजन 23 के अंतिम पद में साथ बनी रहेंगी शब्द का उपयोग्य करते है-“ निश्‍चय भलाई और करुणा जीवन भर मेरे साथ साथ बनी रहेंगी;” (6)। और जबकि “साथ बनी रहेंगी” सही बैठता है, वास्तविक इब्रानी शब्द अधिक शक्तिशाली, आक्रामक भी है। इस शब्द का शाब्दिक अर्थ है “पीछा करना”, जिस तरह एक शिकारी अपने शिकार का पीछा करता है (एक भेड़िया को भेड़ का पीछा करते हुए कल्पना करें)। 

परमेश्वर की कृपा और भलाई हमारा पीछा किसी ढीली गति या इस तरह कि वास्तव में कोई जल्दी न हो नहीं करती, जैसे एक पालतू जानवर इत्मीनान से घर तक आपका पीछा कर सकता है। नहीं, "निश्चित रूप से" हमारा पीछा किया जा रहा है - उदेश्य के साथ। बहुत हद तक इस तरह कि एक व्यक्ति को उसका बटुआ लौटाने के लिए उसका पीछा करना, हमारा पीछा भी उस अच्छे चरवाहे के द्वारा किया जा रहा है जो हमसे अनंत प्रेम से प्रेम करते है (1,6)।

बड़ी अपेक्षाएं

क्रिसमस से पहले एक व्यस्त दिन, एक बूढ़ी औरत मेरे भीड़-भाड़ वाले पड़ोस के डाकघर के मेल काउंटर पर पहुंची। उसकी धीमी गति को देखकर, धैर्यवान डाक क्लर्क ने उसका अभिवादन किया, “अच्छा नमस्ते, जवान महिला!” उसका शब्द मित्रवत था, लेकिन कुछ लोग उन्हें इस तरह सुन सकते हैं कि “युवा होना” बेहतर है।

बाइबल हमें यह देखने के लिए प्रेरित करती है कि उन्नत आयु हमारी आशा को प्रेरित कर सकता है। शिशु यीशु को जब पवित्र ठहराने के लिए युसूफ और मरियम के द्वारा मन्दिर में लाया जाता है(लुका 2:23; देखें निर्गमन 13:2, 12), दो बुज़ुर्ग विश्वासी बीच में अचानक अहम् स्थान लेते है। 

पहला, सिमोन—जो वर्षों से मसीहा को देखने का इंतजार कर रहा था-“ .. उसे अपनी गोद में लिया और परमेश्वर का धन्यवाद करके कहा : “हे स्वामी, अब तू अपने दास को अपने वचन के अनुसार शान्ति से विदा करता है, क्योंकि मेरी आँखों ने तेरे उद्धार को देख लिया है, जिसे तू ने सब देशों के लोगों के सामने तैयार किया है,”

फिर जैसे शिमोन मरियम और यूसुफ से बातें कर रहा था हन्नाह, एक “बहुत बूढ़ी” भविष्यद्वक्‍तिन आती है (v.36)। एक विधवा जो सिर्फ सात साल विवाहित रही, वह चौरासी साल की उम्र तक मंदिर में ही थी, मंदिर को कभी नहीं छोड़ा, वह “उपवास और प्रार्थना कर करके रात–दिन उपासना किया करती थी।” जब उसने यीशु को देखा, वह “उन सभों से, जो यरूशलेम के छुटकारे की बाट जोहते थे, उस बालक के विषय में बातें करने लगी।” (vv.37-38) और प्रभु की स्तुति करने लगी। 

ये दो आशा से भरपूर दास हमें याद दिलाते है की हमें बड़ी आशा के साथ- परमेश्वर की प्रतीक्षा करना कभी बंद नहीं करनी चाहिए- भले ही हमारी उम्र कुछ भी क्यों न हो।

खुली दृष्टि - दिन 1

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अब मैं तुम्हें उन की आंखें खोलने के लिये भेजता हूं... कि वे पापों की क्षमा पाएं...
प्रेरितों के काम…