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एक साथ बेहतर

मेरी, एक अकेली कामकाजी माँ, शायद ही कभी चर्च या बाइबल अध्ययन से चूकती थी l प्रत्येक सप्ताह, वह अपने पांच बच्चों के साथ बस से चर्च आना- जाना करती थी और वहां तैयारी में और सफाई करने में सहायता करती थीI

एक रविवार, पास्टर ने मेरी से कहा कि चर्च के कुछ सदस्यों ने उसके परिवार के लिए उदार उपहार दिए हैं l एक पति-पत्नी ने उस परिवार को कम किराये पर एक घर उपलब्ध कराया l एक और जोड़े ने अपनी कॉफ़ी की दूकान में उसे लाभदायक नौकरी दी l एक युवक ने उसे मरम्मत की हुयी अपनी एक पुरानी कार दी और व्यक्तिगत मैकेनिक के रूप में सेवा देने के लिए प्रतिज्ञा की l मेरी ने परमेश्वर और परस्पर सेवा में समर्पित समुदाय में रहने के आनंद के लिए परमेश्वर को धन्यवाद दिया l 

यद्यपि हम मेरी के चर्च परिवार की तरह उदारता से देने में सक्षम न हों, परन्तु, परमेश्वर के लोगों को परस्पर मदद करने के लिए बनाया गया है l सुसमाचार लेखक लूका यीशु में विश्वासियों का “प्रेरितों से शिक्षा पाने, संगति रखने में . . . लौलीन” रहने का वर्णन करता है (प्रेरितों 2:42) l जब हम सहायता करने के साथ साथ अपने संसाधनों को भी जोड़ देते हैं, तब हम यीशु में होकर, आरंभिक विश्वासियों की तरह ज़रूरतमंदों की सहायता कर सकते हैं (पद.44-45) l जब हम परमेश्वर और एक दूसरे के साथ की निकटता में बढ़ते है, तब हम एक दूसरे की देखभाल कर सकते हैं l परमेश्वर के लोगों के कार्यों द्वारा उसके प्रेम की साक्षी का प्रदर्शन दूसरों को यीशु तक पहुंचा सकता I(46-47) l 

हम एक मुस्कराहट और दयालु कार्य द्वारा दूसरों की सेवा कर सकते हैं l हम वित्तीय उपहार(गिफ्ट मनी) या प्रार्थना की पेशकश कर सकते हैं l जब परमेश्वर हमारे भीतर और हमारे द्वारा कार्य करता है, तो हम सरलता से एक साथ बेहतर होते हैं l 

चमकने के अवसर

शीतल, एक माँ और पत्नी, जो दिल्ली में रहती थीं, उन प्रवासी कामगारों के बारे में चिंतित थीं जो बिना आय और महामारी के दौरान भोजन की कमी के कारण सड़कों पर रहते थे। उनकी दुर्दशा देखकर शीतल ने 10 लोगों के लिए खाना बनाया और बांटा। खबर फैल गई, और कुछ एनजीओ शीतल की मदद के लिए आगे आए, जिसके कारण 'प्रोजेक्ट अन्नपूर्णा' का जन्म हुआ। एक महिला का एक दिन में 10 भोजन परोसने का उद्देश्य 60,000 से अधिक दैनिक वेतन भोगियों की सेवा करने वाले 50 स्वयंसेवकों तक बढ़ गया।

कोरोनावायरस महामारी से उत्पन्न होने वाली जबरदस्त जरूरतों के जवाब में, सेवा में असंभावित भागीदारों को एक साथ लाया गया, और यीशु में विश्वासियों को दूसरों के साथ मसीह के प्रकाश को साझा करने के नए अवसर मिले। अपने पहाड़ी उपदेश में, यीशु ने अपने अनुयायियों को सिखाया कि "तुम्हारा उजियाला मनुष्यों के सामने चमके, कि वे तुम्हारे भले कामों को देखकर" (मत्ती 5:16)। हम मसीह के प्रकाश को चमकाते हैं जब हम आत्मा को प्रेम, दयालु, और अच्छे शब्दों और कार्यों में हमारा मार्गदर्शन करने देते है  (देखें गलातियों 5:22-23)। जब हम यीशु से प्राप्त प्रकाश को अपने दैनिक जीवन में स्पष्ट रूप से चमकने देते हैं, तो हम ".. पिता की, जो स्वर्ग में हैं, बड़ाई " (मत्ती 5:16) करते हैं।

इस दिन और हर दिन हम मसीह के लिए चमकें, क्योंकि वह हमें इस संसार में नमक और प्रकाश बनने में मदद करता है जिसे उसकी सख्त जरूरत है।

परमेश्वर में आशा

जैसे-जैसे छुट्टियों का मौसम नजदीक आता गया, ऑनलाइन ऑर्डर की अभूतपूर्व बाढ़ के कारण पैकेज शिपमेंट में देरी हुई। मुझे एक समय याद है जब मेरे परिवार ने दूकान पर जाकर सामान खरीदना पसंद था क्योंकि हम जानते थे कि मेल डिलीवरी की गति पर हमारा बहुत कम नियंत्रण था। हालाँकि, जब मेरी माँ ने एक ऐसे खाते के लिए नाम दर्ज़ किया जिसमें शीघ्र शिपिंग शामिल थी, तो यह अपेक्षा बदल गई। अब दो दिन की गारंटीकृत डिलीवरी के साथ, हम जल्दी से चीजें प्राप्त करने के आदी हैं, और हम देरी से निराश हो जाते हैं।

हम एक ऐसी दुनिया में रहते हैं जो तत्काल संतुष्टि के आदी हैं, और प्रतीक्षा करना मुश्किल हो सकता है। लेकिन आत्मिक क्षेत्र में, धैर्य को प्रतिफल दिया जाता है। जब विलापगीत की पुस्तक लिखी गई, तब इस्राएली बेबीलोन की सेना द्वारा यरूशलेम के विनाश का शोक मना रहे थे, और उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। हालाँकि, अराजकता के बीच, लेखक ने साहसपूर्वक कहता है की कि क्योंकि उसे विश्वास था कि परमेश्वर उसकी आवश्यकताओं को पूरा करेगा, वह उसकी प्रतीक्षा करेगा (विलापगीत 3:24)। परमेश्वर जानता है कि जब हमारी प्रार्थनाओं के उत्तर में देरी होती है तो हम चिंतित हो जाते हैं। पवित्रशास्त्र हमें परमेश्वर की प्रतीक्षा करने की याद दिलाने के द्वारा प्रोत्साहित करता है। हमें भस्म होने या चिंतित होने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि "उसकी करुणा कभी विफल नहीं होती" (पद 22)। इसके बजाय, परमेश्‍वर की मदद से हम “..चुपचाप रह, और धीरज से उसकी प्रतीक्षा कर" सकते हैं (भजन संहिता ३७:७)। जब हम लालसाओं और अनुत्तरित प्रार्थनाओं के साथ संघर्ष करते हैं, तब भी हम परमेश्वर की प्रतीक्षा करें, उसके प्रेम और विश्वासयोग्यता पर भरोसा करें।

जब कमजोरी ताकत होती है

ड्रू को दो साल के लिए कैद में डाला गया क्योंकि वह यीशु की सेवकाई कर रहा था । वह उन मिशनरियों की कहानियाँ पढ़ता था जो अपने कारावास के दौरान निरंतर आनंद महसूस करते थे, लेकिन उसने स्वीकार किया कि यह उसका अनुभव नहीं था। उसने अपनी पत्नी से कहा कि परमेश्वर ने गलत आदमी को उसके लिए दुःख उठाने के लिए चुना है। उसकी पत्नी ने जवाब दिया, "नहीं। मुझे लगता है कि शायद उसने सही आदमी को चुना है। यह कोई संयोग की बात नहीं है।"

ड्रू संभवतः भविष्यवक्ता यिर्मयाह से अपने आप को जोड़ सकता है, जिसने यहूदा को चेतावनी देकर कि परमेश्वर उनके पापों के लिए उन्हें दंड देगा, ईमानदारी से परमेश्वर की सेवा की थी। परन्तु परमेश्वर का न्याय अभी तक नहीं आया था, और यहूदा के अगुवों ने यिर्मयाह को पीटा और उसे काठ में डाल दिया। यिर्मयाह ने परमेश्वर को दोष दिया: "हे यहोवा, तू ने मुझे धोखा दिया" (पद 7)। भविष्यवक्ता का मानना ​​था कि परमेश्वर उसे छुड़ाने में विफल रहे हैं। उसके वचन केवल "दिन भर [उसके लिये] निंदा और ठट्ठा" (पद 8)। "स्रापित हो वह दिन जिसमें मैं उत्पन्न हुआ!" यिर्मयाह ने कहा। " मैं क्यों उत्पात और शोक भोगने के लिए जन्मा और की अपने जीवन में परिश्रम और दुःख देखूँ, और अपने दिन नामधराई में व्यतीत करूं?" (पद 14,18)।

अंततः ड्रू को रिहा कर दिया गया, लेकिन अपनी परीक्षा के माध्यम से वह समझने लगा कि शायद परमेश्वर ने उसे चुना है - ठीक उसी तरह जैसे उसने यिर्मयाह को चुना था - क्योंकि वह कमजोर था। यदि वह और यिर्मयाह स्वाभाविक रूप से मजबूत होते, तो शायद उन्हें अपनी सफलता के लिए कुछ प्रशंसा मिली होती। परन्तु यदि वे स्वाभाविक रूप से निर्बल होते, तो उनके धीरज की सारी महिमा परमेश्वर के पास जाती (1 कुरिन्थियों 1:26-31)। उसकी कमज़ोरी ने उसे यीशु के इस्तेमाल के लिए एकदम सही इंसान बना दिया।

सुसमाचार की खातिर

वर्ष 1916  था और नेल्सन ने अमेरिका में मेडिकल स्कूल से स्नातक की उपाधि प्राप्त की थी उस वर्ष बाद में, वह और उनकी छह महीने की दुल्हन चीन पहुंचे। बाईस साल की उम्र में वह एक चीनी अस्पताल में सर्जन बन गए, जो कम से कम दो मिलियन चीनी निवासियों के क्षेत्र में एकमात्र अस्पताल था। नेल्सन, अपने परिवार के साथ, चौबीस वर्षों तक इस क्षेत्र में रहे, अस्पताल चलाते रहे, सर्जरी करते रहे, और हजारों लोगों के साथ सुसमाचार साझा करते रहे। एक समय पर विदेशियों पर अविश्वास करने वालों द्वारा "विदेशी शैतान" कहे जाने के बाद, नेल्सन बेल को बाद में "बेल जो चीनी लोगों का प्रेमी है" के रूप में जाना गया। आगे जाकर उनकी बेटी रूथ की शादी सुसमाचार प्रचारक बिली ग्रैहम से हुई।

हालांकि नेल्सन एक शानदार सर्जन और बाइबल शिक्षक थे, लेकिन यह उनका कौशल नहीं था जो कई लोगों को यीशु की ओर आकर्षित करता था, यह उनका चरित्र था और जिस तरह से वह सुसमाचार को जीते थे। तीतुस को लिखे पत्र में, एक युवा अन्यजाति नेता, जो क्रेते की कलीसिया की देखभाल कर रहा था, प्रेरित ने कहा कि मसीह की तरह जीना महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सुसमाचार को "आकर्षक" बनाता है (तीतुस 2:10)। फिर भी हम यह अपनी सामर्थ्य से नहीं कर सकते। परमेश्वर का अनुग्रह हमें "संयम और धर्म और भक्ति.. जीवन" जीने में मदद करता है (पद 12), जो हमारे विश्वास की सच्चाई को दर्शाता है (पद 1)।

हमारे आस-पास बहुत से लोग अभी भी मसीह के सुसमाचार को  नहीं जानते हैं, लेकिन वे हमें जानते हैं। वह हमारी सहायता करें कि उसके सन्देश को आकर्षित तरीकों से प्रकट और प्रकाशित करें।