
एक अनर्जित उपहार
हाल ही में जब मेरी सहेली ने मुझे एक उपहार दिया तो मैं हैरान रह गयी। मुझे नहीं लगता था कि मैं उससे इतने अच्छे उपहार पाने की हकदार हूं। मेरे काम के कुछ तनाव के बारे में सुनने के बाद उसने इसे भेजा था। फिर भी वह एक वृद्ध माता-पिता, चुनौतीपूर्ण बच्चों, काम में उथल-पुथल, और अपनी शादी में तनाव के साथ, अगर अधिक नहीं तो उतने ही तनाव से गुजर रही थी। मुझे विश्वास नहीं हो रहा था कि उसने स्वयं के बारे में सोचने से पहले मेरे बारे में सोचा था, और उसके साधारण उपहार ने मेरी आँख में आंसू ला दिए थे।
सच में, हम सभी उस उपहार के प्राप्तकर्ता हैं जिसके हम कभी हकदार नहीं हो सकते। पौलुस ने इसे इस तरह से कहा : "मसीह यीशु पापियों का उद्धार करने के लिये जगत में आया - जिनमें सबसे बड़ा मैं हूँ" (1 तीमुथियुस 1:15) हालाँकि वह “एक समय निन्दा करनेवाला, और सतानेवाला, और क्रूर मनुष्य था, . . . हमारे प्रभु का अनुग्रह [उस पर] बहुतायत से उण्डेला गया” (पद. 13-14) पुनुरुत्थित यीशु ने पौलुस को अनुग्रह के मुफ्त उपहार की गहरी समझ दी। परिणामस्वरूप, उसने सीखा कि उस उपहार का अनर्जित प्राप्तकर्ता होने का क्या मतलब है और वह परमेश्वर के प्रेम का एक शक्तिशाली साधन बन गया और उसने बहुत से लोगों को बताया कि परमेश्वर ने उसके लिए क्या किया है।
यह केवल परमेश्वर के अनुग्रह के द्वारा ही है कि हम निंदा के बदले प्रेम और न्याय के बदले दया प्राप्त करते हैं। आज, आइए उस अनर्जित/अपात्र अनुग्रह का उत्सव मनाएं जो परमेश्वर ने दिया है और दूसरों को उस अनुग्रह को प्रदर्शित करने के तरीकों की तलाश में रहें।

परमेश्वर के घर आओ
एक शाम जब मैं अपने पड़ोस में एक निर्माण स्थल के पास जॉगिंग कर रही थी, तो एक दुबला-पतला, गंदा सा बिल्ली का बच्चा मुझसे म्याऊं-म्याऊं करते हुए मेरे पीछे-पीछे घर आ गया। आज, मिकी एक स्वस्थ, सुंदर वयस्क बिल्ला है, हमारे घर में एक आरामदायक जीवन का आनंद ले रहा है और मेरे परिवार से बहुत प्यार करता है। जब भी मैं उस सड़क पर टहलती हूँ जहाँ मैंने उसे पाया था, मैं अक्सर सोचती हूँ, धन्यवाद, परमेश्वर मिकी को सड़कों पर रहने से बख्शा गया। उसके पास अब एक घर है।
भजन 91 उन लोगों के बारे में बात करता है जो " परमप्रधान के छाए हुए स्थान में बैठा [निवास] रहे " (पद. 1) जो परमेश्वर के साथ अपना घर बना रहे हैं। यहाँ बैठा रहने के लिए इब्रानी शब्द का अर्थ है "रहना, स्थायी रूप से रहना।" जब हम उसमें बने रहते हैं, तो वह हमें उसकी बुद्धि के अनुसार जीने और सबसे बढ़कर उससे प्रेम करने में मदद करता है (पद. 14; यूहन्ना 15:10) परमेश्वर हमें अनंत काल तक उसके साथ रहने के आराम का वादा करता है, साथ ही सांसारिक कष्टों के माध्यम से हमारे साथ रहने की सुरक्षा का वादा करता है। हालाँकि मुसीबतें आ सकती हैं, हम उसकी संप्रभुता, ज्ञान और प्रेम में, और हमें बचाने और छुटकारे के उसके वादों में आराम कर सकते हैं।
जब हम परमेश्वर को अपना शरणस्थान बनाते हैं, तो हम"सर्वशक्तिमान की छाया में" रहते हैं (भजन संहिता 91:1) उनके अनंत ज्ञान और प्रेम की अनुमति के बिना कोई भी परेशानी हमें छू नहीं सकती है। यह हमारे घर के रूप में परमेश्वर की सुरक्षा है।

यीशु को देखना
चार महीने की उम्र तक लिओ ने अपने माता-पिता को कभी नहीं देखा था। वह एक असाधारण स्थिति के साथ पैदा हुआ था जिससे उसकी दृष्टि धुंधली हो गई थी। उसके लिए यह घने कोहरे में जीने जैसा था। लेकिन फिर आंखों के डॉक्टर ने उसे एक ख़ास तरह का चश्मा पहनने को दिया।
लिओ के पिता ने एक विडिओ पोस्ट किया जिसमे लिओ की माँ उसे पहली बार चश्मा पहना रही थीI हम देखते हैं जैसे लिओ की आंखें धीरे-धीरे ध्यान केंद्रित करती हैं। जब वह पहली बार अपनी मां को देखता है तो उसके चेहरे पर मुस्कान फैल जाती है। अमूल्य! उस पल में, नन्हा लिओ स्पष्ट देख सकता था।
यूहन्ना यीशु के अपने शिष्यों के साथ हुई बातचीत के बारे में बताता है। फिलिप्पुस ने उससे पूछा, ''पिता को हमें दिखा'' (यूहन्ना 14:8) इतने समय तक एक साथ रहने के बाद भी, यीशु के शिष्य यह नहीं पहचान सके कि उनके ठीक सामने कौन था। उसने उत्तर दिया, “क्या तू विश्वास नहीं करता, कि मैं पिता में हूँ, और पिता मुझ में है?” (पद. 10) पहले यीशु ने कहा था, "मार्ग और सत्य और जीवन मैं ही हूं" (पद. 6) यीशु के साथ "मैं हूँ" कथनों में से यह छठा है। वह हमें इस "मैं हूँ" के कथन को चश्मा के माध्यम से देखने के लिए कह रहा है ताकि हम यह देख सके कि वास्तव में वह कौन है—स्वयं परमेश्वर।
हम अधिकतर शिष्यों के समान है। कठिन समय में, हम संघर्ष करते हैं और धुंधली दृष्टि विकसित करते हैं। हम इस बात पर ध्यान केन्द्रित करने में विफल रहते हैं कि परमेश्वर ने क्या किया है और क्या कर सकता है। जब छोटे लिओ ने विशेष चश्मा पहना, तो वह अपने माता-पिता को स्पष्ट रूप से देख सकता था। शायद हमें अपना ईश्वरीय -चश्मा पहनने की आवश्यकता है ताकि हम स्पष्ट रूप से देख सकें कि यीशु वास्तव में कौन है।

परमेश्वर की बाँहे खुली हैं
मैंने घृणा से अपने सेलफोन (मोबाइल फ़ोन) को देखा और आहें भरी। चिंता ने मेरे माथे पर शिकन डाल दी। एक मित्र और मेरे बीच में हमारे बच्चों को लेकर एक मुद्दे पर गंभीर असहमति थी, और मुझे पता था कि मुझे उसे फोन करने और क्षमा माँगने की ज़रूरत है। मैं ऐसा नहीं करना चाहती थी क्योंकि हमारे दृष्टिकोण अभी भी संघर्ष में थे, इस पर मैं यह भी जानती थी कि पिछली बार जब हमने इस मामले पर चर्चा की थी तो मैं दयालु या विनम्र नहीं थी।
फ़ोन कॉल (करने)का अनुमान लगाते हुए, मैंने सोचा, क्या होगा अगर उसने मुझे माफ़ नहीं किया? क्या होगाI अगर वह हमारी मित्रता को जारी नहीं रखना चाहती है? तभी, एक गीत के बोल मेरे मस्तिष्क में आए और मुझे उस क्षण में वापस ले गए जब मैंने परमेश्वर के सामने एक परिस्तिथि में अपना पाप स्वीकार किया था। मुझे राहत महसूस हुई क्योंकि मैं जानती थी कि परमेश्वर ने मुझे क्षमा कर दिया है और मुझे अपराधबोध से मुक्त कर दिया है।
हम यह नियंत्रित नहीं कर सकते कि जब हम संबंधपरक समस्याओं को हल करने का प्रयास करेंगे तो लोग हमें कैसी प्रतिक्रिया देंगे। जब तक हम अपने हिस्से को स्वीकार करते हैं, विनम्रतापूर्वक क्षमा मांगते हैं, और आवश्यक परिवर्तन करते हैं, हम परमेश्वर के हाथों में बहाली/चंगाई सौंप सकते है। भले ही हमें अनसुलझे "लोगों की समस्याओं" का दर्द सहना पड़े, उसके साथ भी शांति हमेशा संभव है। परमेश्वर की बाहें खुली हुई हैं, और वह हमें वह अनुग्रह और दया दिखाने के लिए प्रतीक्षा कर रहा है जिसकी हमें आवश्यकता है। " यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह हमारे पापों को क्षमा करने ,और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है" (1 यूहन्ना 1:9)
