Month: जून 2017

कोई भरोसेमंद व्यक्ति

मेरी सहेली आँसुओं से बोली, “कोई भरोसेमंद नहीं है l भरोसा करने पर, वे हर समय मुझे दुःख देते हैं l” मैं उसकी कहानी से क्रोधित हुयी-एक भरोसेमंद पूर्व मित्र, ने उनके बीच सम्बन्ध टूटने पर अफ़वाहें फैलाने लगा l पीड़ादायक बचपन के बाद पुनः भरोसा करने हेतु प्रयासरत, यह धोखा मात्र एक और पुष्टिकरण था कि लोग भरोसेमंद नहीं हैं l

मुझे सुखकर शब्द नहीं मिला l एक बात मैं न  कह सकी कि उसका यह ख्याल गलत था कि पूर्ण भरोसेमंद व्यक्ति खोजना कठिन है, अर्थात् अधिकतर लोग पूर्ण दयालु और भरोसेमंद हैं l उसकी कहानी दर्दनाक थी, और मैंने अपने जीवन में अनपेक्षित धोखे के क्षण याद किये l वस्तुतः, वचन मानवीय स्वभाव के विषय बहुत निष्पक्ष है l नीतिवचन 20:6 में, लेखक भी मेरी सहेली की तरह धोखे के दर्द को हमेशा याद करके विलाप करता है l

मैं यह कह सकती हूँ कि  दूसरों की क्रूरता कहानी का केवल एक हिस्सा है l यद्यपि दूसरों का दिया हुआ घाव वास्तविक और पीड़ादायक है, यीशु ने सच्चा प्रेम सम्भव किया है l यूहन्ना 13:35 में, यीशु ने अपने शिष्यों से कहा कि संसार उनके प्रेम से जानेगा कि वह उसके शिष्य हैं l यद्यपि कुछ लोग हमें दुःख देंगे, यीशु के कारण हमेशा ऐसे लोग होंगे जो, खुलकर उसका प्रेम बाँटकर, हमें शर्तहीन सहयोग देकर देखभाल करेंगे l उसके अक्षय प्रेम में विश्राम करते हुए, चंगाई, संगति, और उसकी तरह प्रेम करने का साहस प्राप्त करें l

टेबल रॉक

मेरे शहर के सामने एक चट्टानी पहाड़ी मैदान, टेबल रॉक पर एक बड़ा, चमकदार क्रूस, खड़ा है l निकट की भूमि पर अनेक घर बनाए गए, किन्तु हाल ही में सुरक्षा कारणों से मालिकों से वहाँ से हटने को बोला गया है l टेबल रॉक के सुदृढ़ आधार पर होने के बावजूद, ये मकान सुरक्षित नहीं हैं l वे अपनी नींव के ऊपर से सरक रहे हैं-करीब तीन इंच प्रतिदिन-जिससे जल पाइपलाइन के टूटने का जोखिम उत्पन्न है, जो सरकन को और बढ़ाएँगी l

यीशु उसके शब्दों को सुनकर उस पर चलनेवालों को चट्टान पर घर बनानेवालों से तुलना करता है (लूका 6:47-48) l उनके घर आंधियों में भी टिके रहते हैं l तुलनात्मक तौर पर, वह कहता है कि जिस घर का नींव सुदृढ़ नहीं है-उसके वचन पर नहीं चलनेवालों की तरह-आंधियों का सामना नहीं कर पाएंगे l

कई अवसर पर, मैं अपने विवेक की बातें नहीं सुनने की परीक्षा में पड़ा हूँ जब परमेश्वर ने मेरे देने से अधिक मुझ से मांगी है, और मेरी सोच थी कि मेरा प्रतिउत्तर “काफी निकट” था l फिर भी सरकती पहाड़ी पर के घरों ने दर्शाया है कि उसके प्रति आज्ञाकारिता की तुलना में “निकटता” महत्वहीन है l उन लोगों की तरह जिन्होंने दृढ़ नींव पर अपने घर बनाए और अक्सर आक्रमण करती जीवन की आंधियाँ सहते हैं, हमें भी अपने प्रभु की बातें पूरी तरह मानना होगा l

जो कुछ हमें चाहिए

मैं अक्सर खुद को अपने कामों में पूर्ण अयोग्य पाता हूँ l सन्डे स्कूल पढ़ाना, किसी मित्र को सलाह, अथवा किसी प्रकाशन में लेख लिखना, चुनौती मेरी योग्यता से बड़ी लगती है l मुझे पतरस की तरह, बहुत सीखना है l

नया नियम प्रभु के पीछे चलने को प्रयासरत पतरस की कई कमजोरियाँ दर्शाता है l पतरस यीशु की ओर पानी पर चलते समय, डूबने लगा (मत्ती 14:25-31) l यीशु की गिरफ्तारी बाद, पतरस ने शपथ खाकर उसका इनकार किया l (मरकुस 14:66-72) l किन्तु पुनरुत्थित मसीह से सामना और पवित्र आत्मा की सामर्थ्य ने उसको बदल दिया l

पतरस ने समझा कि परमेश्वर की “ईश्वरीय सामर्थ्य ने सब कुछ जो जीवन और भक्ति से सम्बन्ध रखता है, हमें उसी की पहचान के द्वारा दिया है, जिसने हमें अपनी ही महिमा और सद्गुण के अनुसार बुलाया है” (2 पतरस 1:3) l एक कमज़ोर व्यक्ति की अद्भुत उक्तियाँ!

“[परमेश्वर ने] हमें बहुमूल्य और बहुत ही बड़ी प्रतिज्ञाएं दी हैं : ताकि इनके द्वारा तुम उस सड़ाहट से छूटकर, जो संसार में बुरी अभिलाषाओं से होती है, ईश्वरीय स्वभाव के समभागी हो जाओ” (पद.4) l

मसीह यीशु के साथ हमारा सम्बन्ध बुद्धिमत्ता, धीरज, और सामर्थ्य का श्रोत है जो परमेश्वर की महिमा, दूसरों की मदद, और आज की चुनौतियों का सामना करने में हमें चाहिए l जिससे, हम हिचकिचाहट और अयोग्यता पर जय पाएंगे l

प्रत्येक स्थिति में, उसने हमें उसकी सेवा और महिमा हेतु सब कुछ दिये हैं l