Our Authors

सब कुछ देखें

Articles by डेविड मैकेसलैंड

निदेशक को देखें

विश्व-प्रसिद्ध वायलिन वादक, जोशुआ बेल, चालीस सद्सीय चैम्बर ऑर्केस्ट्रा, अकादमी ऑफ़ सैंट मार्टिन इन द फ़ील्ड्स, का निर्देशन अनोखे तौर से करते हैं l छड़ी से इशारा करने की बजाए वे अपने इतालवी वायलिन को दूसरे वायलिन वादकों के साथ बजाते हुए निर्देशन देते हैं l बेल ने कोलोराडो पब्लिक रेडियो से कहा, “ वायलिन बजाते हुए मैं उस वक्त उनके समझने लायक सब प्रकार के निर्देशन और संकेत दे सकता हूँ l वे मेरे वायलिन के प्रत्येक झुकाव को जानते हैं, या मेरे भौं के ऊपर उठाने को, या जिस तरह मैं अपने को धनुष के रूप में झुकाता हूँ l वे जानते हैं कि मैं पूरे ऑर्केस्ट्रा से कैसी आवाज़ चाहता हूँ l”

जिस तरह ऑर्केस्ट्रा के सदस्य जोशुआ बेल पर ध्यान केन्द्रित करते हैं, बाइबिल हमें हमारे प्रभु यीशु पर अपनी निगाहें रखने को कहती है l इब्रानियों 11 में विश्वास के अनेक नायकों की सूची के बाद, लेखक कहता है, “इस कारण जब कि गवाहों का ऐसा बड़ा बादल हम को घेरे हुए है, तो आओ, हर एक रोकनेवाली वस्तु और उलझानेवाले पाप को दूर करके, वह दौड़ जिसमें हमें दौड़ना है धीरज से दौड़ें, और विश्वास के करता और सिद्ध करनेवाले यीशु की ओर ताकते रहें” (इब्रा.12:1-2) l

यीशु ने प्रतिज्ञा की, “मैं जगत के अंत तक सदा तुम्हारे संग हूँ” (मत्ती 28:20) l क्योंकि वह है, उसके हमारे जीवन के संगीत का निर्देशन करते समय हमारे पास उसकी ओर देखने का अद्भुत सुअवसर है l

थोड़ा ठहरें

तीन सम्बन्धित फिल्मों के सेट द लार्ड ऑफ़ द रिंग्स की चर्चा में, एक किशोर ने कहा कि उसे उसकी कहानियाँ फिल्म की अपेक्षा पुस्तक के रूप में पसंद हैं l कारण पूछे जाने पर, उस युवक ने उत्तर दिया, “मैं अपना समय लेकर पुस्तक को पढ़ सकता हूँ l” एक पुस्तक को पढ़ते रहने के प्रभाव के विषय कुछ कहना होगा, विशेषकर बाइबिल, और उसमें की कहानियों में “ठहरे रहना l”

“विश्वास का अध्याय” इब्रानियों 11, उन्नीस लोगों के नाम बताता है l हर एक कठिनाई और शंका के मार्ग पर चला, फिर भी परमेश्वर के प्रति आज्ञाकारी रहा l “ये सब विश्वास ही की दशा में मरे; और उन्होंने प्रतिज्ञा की हुई वस्तुएं नहीं पाईं, पर उन्हें दूर से देखकर आनन्दित हुए और मान लिया कि हम पृथ्वी पर परदेशी और बाहरी हैं” (पद.13) l

बाइबिल को पढ़ते हुए उसमें वर्णित लोगों और घटनाओं पर विचार किये बगैर पढ़ना कितना सरल है l हमारी खुद की बनाई हुई समय-सारणी हमें परमेश्वर की सच्चाई और हमारे जीवनों के लिए उसकी योजनाओं की गहराइयों में जाने से रोकती है l किन्तु, उसके वचन में ठहरे रहने से, हम खुद को हमारी ही तरह लोगों के वास्तविक जीवन घटनाओं में गिरफ्तार पाते हैं जिन्होंने परमेश्वर की विश्वासयोग्यता पर अपने जीवनों को आधारित किया l  

परमेश्वर के वचन को खोलकर यह याद करना अच्छा है कि हम देर तक उसमें ठहर सकते हैं l

एक साल में बाइबिल

2002 में मेरी बहन मार्था और उसके पति, जिम की एक दुर्घटना में मृत्यु के कुछ महीनों बाद एक मित्र ने मुझे हमारे चर्च में “दुःख द्वारा उन्नति” कार्यशाला में बुलाया l मैं अपनी इच्छा के विरुद्ध पहले सत्र में गया किन्तु वापस जाने का मन न था l मैंने परवाह करनेवाले एक सामाजिक समूह को परमेश्वर और दूसरों की सहायता से अपने जीवनों में एक ख़ास हानि का विवेकपूर्ण हल निकालने का प्रयास करते हुए देखकर चकित हुआ l मैं बार-बार परस्पर दुःख बांटने की प्रक्रिया द्वारा स्वीकार किये जाने और शांति के लिए वहाँ गया l 

किसी प्रिय अथवा मित्र की अचानक मृत्यु की तरह, आरंभिक कलीसिया को यीशु के लिए सक्रिय, स्तिफनुस की मृत्यु, द्वारा आघात और दुःख पहुँचा (प्रेरितों 7:57-60) l सताव के मध्य, “भक्तों ने स्तिफनुस को कब्र में रखा और उसके लिए बड़ा विलाप किया” (8:2) l इन्होंने एक साथ दो काम किये : उन्होंने स्तिफनुस को दफ़न किया, जो अंतिम कार्य और हानि थी l और सभों ने विलाप किया, जो दुःख का सामूहिक प्रदर्शन था l

यीशु के अनुयायी के रूप में हमें अपनी हानि के लिए अकेले विलाप नहीं करना है l  हम सच्चाई और प्रेम के साथ दुखित लोगों तक पहुँच सकते हैं और दीनता में हमारे साथ खड़े होनेवालों को स्वीकार सकते हैं l

एक साथ विलाप करते हुए, हम यीशु द्वारा उस समझ और शांति में उन्नति कर सकते हैं जो हमारे गंभीर दुखों से परिचित है l

शांत रहें

हमनें बीते पांच वर्षों के मानव इतिहास में सबसे अधिक सूचनाएँ एकत्रित की हैं, और यह हर समय हमारे पास आ ररही हैं” (द आर्गनाइज्ड माइंड : थिंकिंग स्ट्रेट इन द एज ऑफ़ इन्फोर्मेशन ओवरलोड  के लेखक डेनियल लेविटिन) l लेविटिन कहते हैं, “एक अर्थ में हम अधिक हलचल के आदि हो जाते हैं l” खबर और ज्ञान का निरंतर आक्रमण हमारे दिमाग पर अधिकार कर लेता है l हमारे परिवेश में मीडिया के निरंतर आक्रमण के कारण, शांत रहकर सोचने और प्रार्थना करने हेतु समय निकालना बहुत कठिन हो गया है l

भजन 46:10 कहता है, “चुप हो जाओ, और जान लो कि मैं ही परमेश्वर हूँ l” यह हमें समय निकलकर प्रभु पर केन्द्रित होने की आवश्यकता याद दिलाता है l अनेक लोग मानते हैं कि “मनन का समय” अर्थात् बाइबिल पढ़ना, प्रार्थना करना और परमेश्वर की भलाई  और महानता पर विचार करना हर दिन का एक महत्वपूर्ण भाग है l

भजन 46 के लेखक की तरह जब हम, इस सच्चाई का अनुभव करते हैं कि “परमेश्वर हमारा शरणस्थान और बल है” (पद.1), यह हमारे भय को दूर करता है (पद.2), संसार के कष्ट से हमारा ध्यान हटाकर परमेश्वर की शांति की ओर ले जाकर, शांत भरोसा उत्पन्न करता है कि हमारा परमेश्वर नियंत्रण रखनेवाला है (पद.10) l

चाहे हमारा संसार कितना भी अस्त-व्यस्त हो, हम अपने स्वर्गिक परमेश्वर के प्रेम और सामर्थ्य में शांति और सामर्थ्य प्राप्त कर सकते हैं l

सबके लिए उपलब्ध

वर्तमान के कीर्ति-आसक्त संस्कृति में, यह आश्चर्यजनक नहीं कि उद्यमी “मशहूर लोगों को उत्पाद की तरह बेचते हुए ... उन्हें अपना व्यक्तिगत समय और आदर-सत्कार बेचने की अनुमति देते हैं l” द न्यू यॉकर  में वोव्हिनी वारा का लेख कहता है कि 15,000 डॉलर में, आप गायिका शकीरा के साथ व्यक्तिगत मुलाकर कर सकते हैं, जबकि 12,000 डॉलर आपके साथ 11 अतिथियों को मशहूर शेफ(रसोइया) माइकल चियारेलो के साथ उसके ही घर में भोजन करने का अवसर दे सकता है l

     अनेक लोगों ने यीशु को ख्यातिप्राप्त व्यक्ति मानकर जगह-जगह उसका अनुसरण करते हुए, उसकी शिक्षा को सुना, उसके आश्चर्यकर्मों पर ध्यान दिया, और उसके स्पर्श से चंगाई पाने की कोशिश की l फिर भी यीशु अभिमानी अथवा अलग रहनेवाला व्यक्ति न होकर, सबके लिए उपलब्ध था l जब उसके अनुयायी याकूब और यूहन्ना व्यक्तिगत रूप से  चतुराई से उसके आनेवाले राज्य में पद पाने का प्रयास कर रहे थे, यीशु ने अपने शिष्यों को याद दिलाया, “जो कोई तुम में बड़ा होना चाहे वह तुम्हारा सेवक बने; और जो कोई तुममें प्रधान होना चाहे, वह सब का दास बने” (मरकुस 10:43-44) l

     यीशु के यह कहने के शीघ्र बाद, उसने लोगों के एक भीड़ से रुककर एक अंधे भिखारी से पूछने को कहा, “तू क्या चाहता है कि मैं तेरे लिए करूँ?” (पद.51) l “हे रब्बी, यह कि मैं देखने लगूं,” उस व्यक्ति ने उत्तर दिया l” वह तुरंत चंगा होकर यीशु के पीछे चल पड़ा(पद.52) l

     हमारा प्रभु “इसलिए नहीं आया कि उसकी सेवा टहल की जाए, पर इसलिए आया कि आप सेवा टहल करे, और बहुतों की छुड़ौती के लिए अपना प्राण दे” (पद.45) l काश हम भी आज उसकी तरह, करुणामयी और सबके लिए उपलब्ध रहें l

अनुग्रह दिखाना

युएस मास्टर्स गोल्फ प्रतियोगिता 1934 में आरंभ हुआ, और उस समय से केवल तीन खिलाड़ियों ने ही लगातार दो बार प्रतियोगिता जीता है l अप्रैल 10, 2016 में, ऐसा प्रतीत हुआ कि 22 वर्षीय जॉर्डन स्पिथ चौथे व्यक्ति होंगे l किन्तु अंत में वे चुक गए और दूसरे के साथ दूसरे स्थान को साझा किया l निराशाजनक हार के बावजूद, स्पिथ प्रतियोगिता के विजेता डैनी विलेथ के प्रति दयालु थे, और “गोल्फ से कुछ अधिक विशेष” उनकी जीत और उनके पहले बच्चे के जन्म पर उनको शुभकामनाएं दीं l

केरेन क्राउस ने द न्यू यॉर्क  टाइम्स  में लिखा, “एक इनाम(ट्राफी) समारोह में बैठकर किसी और की तस्वीर खीँचते हुए देखने के शीर्घ बाद एक बड़े दृश्य को देखने के लिए अनुग्रह चाहिए l क्राउस ने आगे कहा, “स्पिथ पूरा सप्ताह बॉल को निशाने पर मार न सके, किन्तु उसका चरित्र सुरक्षित था l”

पौलुस ने कुलुस्से में यीशु के अनुयायियों से निवेदन किया ,” बाहरवालों के साथ बुद्धिमानी से व्यवहार करो l तुम्हारा वचन सदा अनुग्रह सहित और सलोना हो कि तुम्हें हर मनुष्य को उचित रीति से उत्तर देना आ जाए” (कुलु. 4:5-6) l

परमेश्वर का अनुग्रह बिना मूल्य प्राप्त करनेवालों के रूप में, हमारे लिए अवसर और बुलाहट है कि हम जीतें अथवा हारें, जीवन की हर स्थिति में उसे प्रगट करें l

सब पीढ़ीयाँ

1933 के महामंदी में मेरे माता-पिता ने शादी की l मेरी पत्नी और मैं द्वितीय विश्वयुद्ध पश्चात जन्म दर में नाटकीय वृद्धि के समय  बच्चा जन्म दर वृद्धि काल में जन्में l 70 और 80 के दशक में जन्मीं हमारी चार बेटियाँ, पीढ़ी X और Y की हैं l इन भिन्न समयों में बढ़ने के कारण अनेक बातों में परस्पर मतभिन्नता चकित करनेवाली बात नहीं!

          पीढ़ियाँ अपने जीवन अनुभवों और मान्यताओं में बेहद भिन्न होती हैं l और यह मसीह के अनुगामियों में सच है l किन्तु हमारी भिन्नताओं के बावजूद, हमारा आत्मिक संपर्क सुदृढ़ है l

          परमेश्वर का स्तुति गीत, भजन 145, हमारा विश्वास बंध घोषित करता है l “तेरे कामों की प्रशंसा और तेरे पराक्रम के कामों का वर्णन, पीढ़ी पीढ़ी होता चला जाएगा  ... लोग तेरी बड़ी भलाई [की] ... चर्चा करेंगे” (पद.4,7) l उम्र और अनुभव की बड़ी भिन्नता में, हम प्रभु का आदर करते हैं l वे तेरे राज्य की महिमा ... और तेरे पराक्रम के विषय में बातें करेंगे” (पद.11) l

          जबकि भिन्नता और प्राथमिकताएँ हमें विभाजित करेंगी, यीशु मसीह में सहभाजी विश्वास हमें आपसी भरोसा, उत्साह, और प्रशंसा में एक करेगा l हमारी उम्र और दृष्टिकोण कुछ भी हो, हमें परस्पर ज़रूरत है l हम किसी भी पीढ़ी के हों, हम परस्पर सीखकर प्रभु का आदर करते हैं-“कि वे आदमियों पर तेरे पराक्रम के काम और तेरे राज्य के प्रताप की महिमा प्रगट करें” (पद.12) l

जो हम वापस लाते हैं

जॉन एफ. बर्न्स विश्व घटनाओं पर 40 वर्षों तक द न्यू यॉर्क टाइम्स  के लिए लिखते रहे l 2015 में बर्न्स सेवानिवृति पश्चात् एक लेख में, कैंसर पीड़ित घनिष्ठ मित्र और संगी-पत्रकार के शब्द याद किये l “कभी न भूलना,” सहकर्मी ने कहा, “यह महत्वपूर्ण नहीं आपने कितनी लम्बी यात्रा की है; आप क्या वापस लाए हैं महत्वपूर्ण है l”

भजन 37 दाऊद की चरवाहा से सैनिक से राजा तक की जीवन यात्रा से “वापस लायी हुई बातों” की सूची हो सकती है l भजन 37 दुष्ट का धर्मी से तुलना, और प्रभु में भरोसा करनेवालों की पुष्टि करनेवाले दोहा श्रृंखला है l

“कुकर्मियों से मत कुढ़, कुटिल काम करनेवालों के विषय डाह न कर ! क्योंकि वे घास के समान ... मुरझा जाएँगे” (पद.1-2) l

“मनुष्य की गति यहोवा की ओर से दृढ़ होती है, ... चाहे वह गिरे तौभी पड़ा न रह जाएगा, क्योंकि यहोवा उसका हाथ थामे रहता है” (पद.23-24) l

“मैं लड़कपन से लेकर बुढ़ापे तक देखता आया हूँ; परन्तु न तो कभी धर्मी को त्यागा हुआ, और न उसके वंश को टुकड़े माँगते देखा है” (पद.25) l

परमेश्वर ने हमें, हमारे जीवन के अनुभवों से क्या सिखाया है? हमने कैसे उसकी विश्वासयोग्यता और प्रेम का अनुभव् किया है? किस तरह परमेश्वर के प्रेम ने हमारे जीवनों को गढ़ा है?

महत्वपूर्ण यह नहीं हम जीवन में कितनी दूर चले हैं, किन्तु जो हम वापस लेकर आये हैं l

उपनाम से परे

मेरे शहर के एक चर्च में अद्वितीय स्वागत कार्ड सभी के लिए परमेश्वर का प्रेम और अनुग्रह दर्शाता है l उस पर लिखा है, “यदि आप एक . . . संत, पापी, पराजित, विजयी” – संघर्षरत लोगों के लिए अन्य शब्द – “शराबी, पाखंडी, धोखेबाज, भयभीत, बेमेल . . . . हैं, तो आपका स्वागत है l” एक पासबान ने कहा, “हम इस कार्ड को रविवारीय आराधना में ऊँची आवाज़ में मिलकर दोहराते हैं l”

कितनी बार हम खुद को परिभाषित करनेवाले उपनाम चुन लेते हैं l और हम कितनी सरलता से दूसरों को इनसे संबोधित करते हैं l किन्तु परमेश्वर का अनुग्रह उपनामों को चुनौती देता है क्योंकि वह हमारे आत्म-बोध में नहीं, उसके प्रेम में जड़वत है l  चाहे हम खुद को उत्कृष्ट या भयंकर, योग्य या अयोग्य महसूस करें, हम उससे अनंत जीवन का पुरस्कार प्राप्त कर सकते हैं l प्रेरित पौलुस ने रोम के विश्वासियों को स्मरण दिलाया कि “जब हम निर्बल ही थे, तो मसीह ठीक समय पर भक्तिहीनों के लिए मारा” (रोमि. 5:6) l

परमेश्वर नहीं चाहता कि हम अपनी सामर्थ्य से बदलें l इसके बदले वह हमें हमारी यथास्थिति में आशा, चंगाई और स्वतंत्रता हेतु बुलाता है l “परन्तु परमेश्वर हम पर अपने प्रेम की भलाई इस रीति से प्रगट करता है कि जब हम पापी ही थे तभी मसीह हमारे लिए मरा” (पद.8) l प्रभु हमें हमारी यथास्थिति में स्वीकारने हेतु तैयार है l

सम्बन्धित शीर्षक

> odb

दैनिक प्रार्थना

गायक/गीतकार रोबर्ट हैमलेट ने “लेडी हु प्रेज़ फॉर मी” गीत अपनी माँ के सम्मान में लिखी जिन्होंने प्रति भोर अपने बेटों के बस स्टॉप जाने से पूर्व उनके लिए प्रार्थना की l हैमलेट की युवा माँ ने उसका गीत सुनकर, उसके साथ प्रार्थना करने का निश्चय किया l परिणाम आनंदित करने वाला था! उस बेटे के बाहर जाने से पूर्व, उसकी माँ ने उसके लिए प्रार्थना की l पाँच मिनट बाद वह अपने साथ कुछ और बच्चों को लेकर लौटा! उसकी माँ ने चकित होकर उससे पूछा कि क्या बात है l बेटे का उत्तर था, “इनकी माताएँ इनके लिए प्रार्थना नहीं करती हैं l”

इफिसियों की पत्री में, पौलुस “हर समय और हर प्रकार से ... प्रार्थना” करने को कहता है  (6:18) l परिवार में सबको परमेश्वर पर दैनिक भरोसा प्रगट करना चाहिए क्योंकि बच्चे अपने निकट के लोगों को विश्वास करते देखकर ही परमेश्वर पर भरोसा करना सीखते हैं (2 तीमु. 1:5) l बच्चों के लिए  और उनके साथ  प्रार्थना करना ही उनको प्रार्थना का परम महत्त्व सिखाने का अहम् तरीका है l यह उनके लिए विश्वास से परमेश्वर के पास व्यक्तिगत रूप से जाने का ज़रूरी कारण समझने का एक तरीका है l

जब हम परमेश्वर में “असली विश्वास” की शिक्षा प्रगट रूप से “[बच्चों] को ... देना आरम्भ करते हैं” (निति. 22:6; 2 तीमु. 1:5), हम उनको एक विशेष इनाम, भरोसे से देते हैं कि परमेश्वर हमारे जीवनों में हमेशा उपस्थित रहकर निरंतर प्रेम, मार्गदर्शन, और सुरक्षा देता है l

पूरी दौड़

2016 के रिओ ओलंपिक्स में, 5,000 मीटर दौड़ में दो धावकों ने संसार का ध्यान आकर्षित किया l 3,200 मीटर दौड़ के बाद, न्यूज़ीलैण्ड की निक्की हैम्बलिन और अमरीका की एबे डीऔगुस्तटिनो आपस में टकराकर गिर गयीं l एबे तुरन्त खड़ी हो गयी, किन्तु निक्की की मदद करने ठहर गयी l क्षण भर बाद दोनों धावक दौड़ने लगे, और एबे गिरने के कारण दायीं पैर में चोट से लड़खड़ाने लगी l अब निक्की की बारी थी कि दौड़ पूरी करने के लिए ठहर कर सह-धावक को उत्साहित करे l एबे के लड़खड़ाने के बाद, निक्की समापन रेखा पर आख़िरकार, उसे गले लगाने के लिए खड़ी थी l आपसी उत्साह का कितना सुन्दर तस्वीर!

यह मुझे बाइबिल का एक परिच्छेद याद दिलाता है : “एक से दो अच्छे हैं .... यदि उनमें से एक गिरे, तो दूसरा उसको उठाएगा; परन्तु हाय उस पर जो अकेला होकर गिरे और उसका कोई उठानेवाला न हो” (सभो. 4:9-10) l आत्मिक दौड़ में धावक होकर, हमें परस्पर सहायता चाहिए-शायद और अधिक, क्योंकि हम दौड़ प्रतियोगिता में नहीं हैं किन्तु एक ही टीम के सदस्य हैं l गिरने के क्षण होंगे जहाँ उठने में किसी की मदद चाहिए; दूसरे क्षणों में किसी को प्रार्थना और उपस्थिति द्वारा उत्साह की आवश्यकता होगी l

आत्मिक दौड़ में अकेला नहीं दौड़ा जाता l क्या परमेश्वर आपको किसी के जीवन में निक्की या एबे बना रहा है? आज ही तुरंत मदद देकर, दौड़ पूरी करें!

सर्वोत्तम भाग

“उसका टुकड़ा मेरे से बड़ा है!”

बचपन में घर में बनी मिठाई के टुकड़े माँ से मिलने पर हम भाई एक दूसरे से लड़ते थे l एक दिन पिता ने अपनी भौंवें चढ़ाकर हमारे हरकत देखे, और अपना प्लेट उठाकर माँ को देखकर मुस्कराए : “कृपया मुझे अपने हृदय के बराबर टुकड़ा दो l” हम दोने भाई हैरान होकर  माँ को हँसते हुए उनको सबसे बड़ा टुकड़ा देते हुए देखा l

परायी सम्पत्ति पर ध्यान देने से बहुत बार ईर्ष्या होती है l फिर भी परमेश्वर का वचन हमारे ध्यान को सांसारिक सम्पत्ति से कुछ अधिक मूल्यवान पर ले जाता है l भजनकार लिखता है, “यहोवा मेरा भाग है; मैंने तेरे वचनों के अनुसार चलने का निश्चय किया है l मैं ने पूरे मन से तुझे मनाया है” (भजन 119:57-58) l पवित्र आत्मा से प्रेरित होकर लेखक ने सच्चाई बतायी कि परमेश्वर के निकट रहना सबसे महत्वपूर्ण है l    

हमारे प्रेमी और असीम सृष्टिकर्ता से अधिक हमारा बेहतर भाग और क्या हो सकता है? संसार की किसी वस्तु से उसकी तुलना नहीं, और कुछ भी उसे हमसे छीन नहीं सकता l मानवीय इच्छा बड़ा खालीपन है; किसी के पास संसार का “सब कुछ” हो सकता है  और फिर भी अभागा l किन्तु जब परमेश्वर हमारा आनंद है, हम वास्तव में संतुष्ट हैं l हमारे अन्दर एक खाली स्थान है जिसे केवल परमेश्वर ही भर सकता है l वही हमारे हृदयों में अनुकूल शांति दे सकता है l