जब लोग मर रहे होते हैं तो एक आदमीं को काम पर रखते हैं, जो उसे उनके अंतिम संस्कार में आने और उन रहस्यों को उजागर करने के लिए भुगतान करते हैं जो उन्होंने जीवित रहते हुए कभी साझा नहीं किये थे l उस आदमी ने प्रशंसा/गुणानुवाद में बाधा डाली है l जब स्तब्ध अधिकारियों ने आपत्ति जतानी शुरू की तो वह उनको बैठने के लिए कहा l वह एक बार यह समझाने के लिए खड़ा हुआ था  कि कैसे ताबूत में मौजूद व्यक्ति ने लाटरी(lotto) जीत लिया था, लेकिन कभी किसी को कुछ नहीं बताया और दशकों तक एक सफल व्यवसायी होने का दिखावा किया l कई बार किराए पर लाये गए  व्यक्ति ने एक विधवा पत्नी के प्रति बेवफाई स्वीकार कि है l कोई यह सवाल कर सकता है कि क्या ये कार्य शोषणकारी थे या अच्छे विश्वास/भरोसे में किय गए थे, लेकिन जो स्पष्ट है वह लोगों की पिछले पापों से मुक्ति पाने कि भूख थी l 

किसी और से हमारे बारे में स्वीकार करवाना (खासकर हमारे मरने के बाद) रहस्यों से निपटने का एक निरर्थक और जोखिम भरा तरिका है l हालाँकि, ये कहानियाँ एक गहरी सच्चाई को उजागर करती हैं : हमें स्वीकार करने की, खुद को बोझ से मुक्त करने की जरुरत है l स्वीकारोक्ति हमें उन चीजों से शुद्ध करती है जिन्हें हमने छुपाया है और पनपने दिया है l याकूब कहता है, “तुम आपस में एक दूसरे के सामने अपने-अपने पापों को मान लो और एक दूसरे के लिए प्रार्थना करो, जिस से चंगे हो जाओ” ( 5:16) l स्वीकारोक्ति हमें उन बोझों से मुक्त करती है जो हमें बांधते हैं, हमें ईश्वर के साथ संवाद करने के लिए मुक्त करते हैं—उनके और हमारे विश्वास समुदाय के लिए खुले दिल से प्रार्थना करना l स्वीकारोक्ति उपचार का कार्य करती है l 

याकूब हमें एक खुला जीवन जीने के लिए आमंत्रित करता है, ईश्वर और अपने निकटम लोगों के सामने उन पीड़ाओं और असफलताओं को स्वीकार करना जिन्हें हम दफनाने के लिए प्रलोभित होते हैं l हमें ऐसे बोझ अकेले नहीं उठाना है l स्वीकारोक्ति हमारे लिए एक उपहार है l परमेश्वर इसका उपयोग हमारे हृदय को शुद्ध करने और हमें स्वतंत्र करने के लिए करता है l