Month: दिसम्बर 2025

दीवारें दीवारें ढह गईं, एकता मिली

1961 से ही बर्लिन की दीवार ने परिवारों और दोस्तों को अलग कर दिया था। उस साल पूर्वी जर्मन सरकार द्वारा बनाई गई इस दीवार ने अपने नागरिकों को पश्चिम जर्मनी भागने से रोक दिया था। वास्तव में, 1949 से लेकर जिस दिन यह संरचना बनाई गई थी, अनुमान है कि 2.5 मिलियन से अधिक पूर्वी जर्मन पश्चिम की ओर भाग गए थे। 1987 में अमेरिकी राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन दीवार के पास खड़े थे और उन्होंने प्रसिद्ध रूप से कहा, "इस दीवार को गिरा दो।" उनके शब्दों में परिवर्तन की लहर दिखाई दे रही थी, जिसका समापन 1989 में दीवार के ढहने के साथ हुआ - जिसके परिणामस्वरूप जर्मनी का हर्षोल्लासपूर्ण पुनर्मिलन हुआ।

इफिसियों 2:14 में, पौलुस ने यीशु द्वारा गिराई गई “शत्रुता की दीवार” के बारे में लिखा। यह दीवार यहूदियों (परमेश्वर के चुने हुए लोग) और अन्यजातियों (अन्य सभी लोगों) के बीच मौजूद थी। और इसका प्रतीक यरूशलेम में हेरोदेस महान द्वारा बनाए गए प्राचीन धार्मिक स्थान में विभाजनकारी दीवार (सोरेग/soreg ) थी। इसने अन्यजातियों को धार्मिक स्थान के बाहरी आँगन से आगे प्रवेश करने से रोक दिया, हालाँकि वे आंतरिक आँगन को देख सकते थे। लेकिन यीशु ने यहूदियों और अन्यजातियों के बीच और परमेश्वर और सभी लोगों के बीच “शांति” और मेल-मिलाप लाया। उसने ऐसा “उस दीवार को तोड़कर” किया जो हमें अलग करती थी” “क्रूस पर अपनी मृत्यु” ( पद 14, 16 ) के द्वारा। “शांति के शुभ समाचार” ने सभी के लिए मसीह में विश्वास के द्वारा एकजुट होना संभव बनाया ( पद 17–18 )। आज, कई चीजें हमें विभाजित कर सकती हैं। जैसे परमेश्वर हमें वह प्रदान करता है जिसकी हमें आवश्यकता है, वैसे ही आइए हम यीशु में पाई जाने वाली शांति और एकता को जीने का प्रयास करें (पद 19-22)। 

—टॉम फेल्टेन

आशा की किरण

मेरी माँ का चमकीला लाल क्रॉस, कैंसर केयर सेंटर में उनके बिस्तर के बगल में लटका होना चाहिए था। और मुझे उनके निर्धारित उपचारों के बीच छुट्टियों के दौरे की तैयारी करनी चाहिए थी। मैं क्रिसमस पर बस यही चाहता था कि मेरी माँ के साथ एक और दिन बिताऊँ। इसके बजाय, मैं घर पर था... एक नकली पेड़ पर उनका क्रॉस लटका रहा था।

जब मेरे बेटे जेवियर ने लाइटें लगाईं, तो मैंने धीरे से कहा, "धन्यवाद।" उसने कहा, " कोई बात नहीं।" मेरे बेटे को नहीं पता था कि टिमटिमाते बल्बों का उपयोग करके मेरी आँखों को आशा की चिरस्थायी रोशनी—यीशु—की ओर मोड़ने के लिए मैं परमेश्वर को धन्यवाद दे रहा था ।

भजन संहिता 42 के लेखक ने परमेश्वर के प्रति अपनी वास्तविक भावनाओं को व्यक्त किया (पद.1-4) पाठकों को प्रोत्साहित करने से पहले उन्होंने अपनी “निराश” और “अशांत” आत्मा को स्वीकार किया: “ परमेश्वर पर आशा लगाए रह; क्योंकि मैं उसके दर्शन से उद्धार पाकर फिर उसका धन्यवाद करूंगा।” (पद 5)। हालाँकि वह दुःख और पीड़ा की लहरों से अभिभूत था, लेकिन भजनकार की आशा परमेश्वर की पिछली वफ़ादारी की याद के माध्यम से चमक उठी ( पद 6-10)। उन्होंने अपने संदेहों पर सवाल उठाते हुए और अपने परिष्कृत विश्वास की सामर्थ्य; की पुष्टि करते हुए समाप्त किया: “हे मेरे प्राण तू क्यों गिरा जाता है? तू अन्दर ही अन्दर क्यों व्याकुल है? परमेश्वर पर भरोसा रख; क्योंकि वह मेरे मुख की चमक और मेरा परमेश्वर है, मैं फिर उसका धन्यवाद करूंगा। ” ( पद 11)।

हममें से कई लोगों के लिए, क्रिसमस का मौसम खुशी और दुख दोनों को जगाता है। शुक्र है, इन मिश्रित भावनाओं को भी आशा के सच्चे प्रकाश-यीशु के वादों के माध्यम से समेटा  (मेल-मिलाप कराना) और छुड़ाया जा सकता है ।     

—सोचिल डिक्सन

क्षमा और भूलना

 

जिल प्राइस हाइपरथाइमेसिया की स्थिति के साथ पैदा हुई थी: अतीत में उसके साथ हुई हर घटना को असाधारण विस्तार से याद रखने की क्षमता। वह अपने दिमाग में अपने जीवनकाल में हुई किसी भी घटना की सटीक घटना को दोहरा सकती है।

टीवी शो अनफॉरगेटेबल, हाइपरथाइमेसिया से पीड़ित एक महिला पुलिस अधिकारी पर आधारित था - जो उसे सामान्य ज्ञान के खेल और अपराधों को सुलझाने में बहुत मदद करता है। हालाँकि, जिल प्राइस के लिए यह स्थिति इतनी मज़ेदार नहीं है। वह जीवन के उन पलों को नहीं भूल सकती जब उसकी आलोचना की गई थी, नुकसान का अनुभव किया था, या उसने कुछ ऐसा किया था जिसका उसे बहुत पछतावा था। वह अपने दिमाग में उन दृश्यों को बार-बार दोहराती है। 

हमारा परमेश्वर सर्वज्ञानी है (संभवतः एक प्रकार का ईश्वरीय हाइपरथिमेसिया) : बाइबल हमें बताती है कि उसके समझ की कोई सीमा नहीं है। और फिर भी हम यशायाह में एक अत्यंत आश्वस्त करने वाली बात पाते हैं : "मैं वही हूँ जो . . . तेरे अपराधों को मिटा देता हूँ और तेरे पापों को स्मरण न करूँगा। इब्रानियों की पुस्तक इसको पुष्ट करता है: “हम यीशु मसीह . . . के द्वारा पवित्र किए गए हैं . . . [और हमारे] . . . पापों को और . . . अधर्म के कामों को [परमेश्वर] फिर कभी स्मरण न [करेगा]” (इब्रानियों 10:10, 17)।  

जब हम अपने पापों को परमेश्वर के सामने स्वीकार करते हैं, हम उन्हें अपने मन में बार-बार दोहराना बंद कर सकते हैं। हमें उन्हें भूलना चाहिए, जैसा वह करता है: “अब बीती हुई घटनाओं का स्मरण मत करो, न प्राचीनकाल की बातों पर मन लगाओ” (यशायाह 43:18) l अपने अपार प्रेम में, परमेश्वर हमारे विरुद्ध हमारे पापों को याद नहीं रखना चाहता। आइए इसे याद रखें।

—केनेथ पीटरसन

दाग़ से सीखना

फेय ने अपने पेट पर निशानों को छुआ। उसने एसोफैजियल-पेट कैंसर को हटाने के लिए एक और सर्जरी करवाई थी। इस बार डॉक्टरों ने उसके पेट का एक हिस्सा निकाला था और एक दांतेदार निशान छोड़ दिया था, जिससे उनके काम की हद का पता चलता है। उसने अपने पति से कहा, "निशान या तो कैंसर के दर्द या उपचार की शुरुआत को प्रदर्शित करता हैं । मैं अपने निशानों को उपचार के प्रतीक के रूप में चुनती हूँ।"

याकूब को परमेश्वर के साथ पूरी रात कुश्ती लड़ने के बाद इसी तरह के विकल्प का सामना करना पड़ा। ईश्वरीय हमलावर ने याकूब के कूल्हे को मोड़ दिया, जिससे याकूब थक गया और उसे लंगड़ाहट महसूस होने लगी। महीनों बाद, जब याकूब ने अपने निर्बल कूल्हे की मालिश की, तो मुझे आश्चर्य हुआ कि उसने क्या सोचा? क्या वह अपने उन वर्षों के धोखे के लिए पछता रहा था, जिसने उसे इस दुर्भाग्यपूर्ण युद्ध के लिए मजबूर किया?  

ईश्वरीय दूत ने उससे सत्य उगलवा लिया था, और उसे तब तक आशीष देने से इनकार किया जब तक याकूब ने उसे स्वीकार नहीं किया कि वह कौन है। उसने यह स्वीकार किया कि वह याकूब था, "एड़ी पकड़ने वाला" (उत्पत्ति 25:26 देखें)। उसने लाभ प्राप्त करने के लिए अपने भाई एसाव और ससुर लाबान के साथ छल किया और उन्हें धोखा दिया। ईश्वरीय मल्लयोद्धा ने कहा कि याकूब का नया नाम "इस्राएल होगा, क्योंकि तू परमेश्‍वर से और मनुष्यों से भी युद्ध करके प्रबल हुआ है।" (पद.28)।   

याकूब का लंगड़ाना उसके धोखे के पुराने जीवन की मृत्यु, और परमेश्वर के साथ उसके नए जीवन की शुरुआत को दर्शाता है। याकूब का अंत और इस्राएल का आरंभ। उसके लंगड़ाहट ने उसे परमेश्वर पर निर्भर होने के लिए प्रेरित किया, जो अब उसके अंदर और उसके द्वारा शक्तिशाली रूप से आगे बढ़ रहा था।

—माइक विट्मर