Month: दिसम्बर 2025

मेरा प्रभु निकट है

मनीला में वॉयस (संगीत) प्रशिक्षक लूर्डेस तीस साल से ज़्यादा समय से छात्रों को आमने-सामने पढ़ाती आ रही हैं। जब उनसे ऑनलाइन क्लास लेने के लिए कहा गया, तो वे चिंतित हो गईं। उन्होंने बताया, "मैं कंप्यूटर चलाने में अच्छी नहीं हूँ।" "मेरा लैपटॉप पुराना है और मैं वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग प्लेटफ़ॉर्म से परिचित नहीं हूँ।" हालाँकि कुछ लोगों को यह छोटी सी बात लग सकती है, लेकिन यह उनके लिए बहुत तनावपूर्ण था।

उन्होंने कहा, "मैं अकेली रहती हूँ, इसलिए मेरी मदद करने वाला कोई नहीं है।" "मुझे चिंता है कि मेरे छात्र पढ़ाई छोड़ देंगे और मुझे आय की ज़रूरत है।" हर क्लास से पहले लूर्डेस अपने लैपटॉप के ठीक से काम करने के लिए प्रार्थना करती थीं। उन्होंने कहा, "फिलिप्पियों 4:5-6 मेरी स्क्रीन पर वॉलपेपर था।" "मैं उन शब्दों से कितनी जुड़ी रही। ।" 

पौलुस हमें प्रोत्साहित करता है कि हम किसी भी बात की चिंता न करें, क्योंकि "प्रभु निकट है" (फिलिप्पियों 4:5)। परमेश्वर की उपस्थिति के वादे को हमें पकड़े रखना है। जब हम उसकी निकटता में आराम करते हैं और प्रार्थना में सब कुछ—बड़ा और छोटा दोनों—उसे सौंप देते हैं उसकी शांति हमारे "हृदय और . . . विचारों को मसीह यीशु में सुरक्षित . . . रखती है” (पद.7)।

लूर्डेस ने कहा, "परमेश्वर ने मुझे कंप्यूटर की गड़बड़ियाँ ठीक करने वाली वेबसाइटों तक पहुंचाया।" “उन्होंने मुझे ऐसे धैर्यवान छात्र भी दिए जो मेरी तकनीकी सीमाओं को समझते थे।” परमेश्वर की उपस्थिति, सहायता और शांति का आनंद लेना हमारे लिए आवश्यक है क्योंकि हम अपने जीवन के सभी दिनों में उसका अनुसरण करना चाहते हैं। हम विश्वास के साथ कह सकते हैं : “प्रभु में सदा आनन्दित रहो; मैं फिर कहता हूँ, आनन्दित रहो!” (पद.4)।

—करेन हुआंग

क्रिसमस दुविधा

डेविड और एंजी को लगा कि उन्हें विदेश जाने के लिए बुलाया गया है, और उसके बाद जो फलदायी मंत्रालय हुआ, उससे यह पुष्टि होती दिखी। लेकिन उनके इस कदम का एक नकारात्मक पहलू भी था। डेविड के बुज़ुर्ग माता-पिता अब क्रिसमस अकेले बिताएंगे। डेविड और एंजी ने क्रिसमस के दिन अपने माता-पिता के अकेलेपन को कम करने के लिए पहले से ही उपहार भेजकर और क्रिसमस की सुबह फोन करके कोशिश की। लेकिन उसके माता-पिता वास्तव में उन्हें चाहते थे। डेविड की आय के कारण वे कभी-कभार ही घर जा पाते थे, तो वे और क्या कर सकते थे? डेविड को बुद्धि की ज़रूरत थी।

नीतिवचन 3 बुद्धि-प्राप्ति का एक क्रैश कोर्स  (तीव्र और गहन अध्ययन)  है, जो हमें यह दिखाता है कि हम अपनी परिस्थितियों को परमेश्वर के पास ले जाकर इसे प्राप्त कैसे करें (पद.5-6), इसके विभिन्न गुणों जैसे प्रेम और विश्वासयोग्यता (पद. 3-4, 7-12), और शांति और दीर्घायु के रूप में इसके लाभ का वर्णन करता है (पद. 13-18)। एक  हृदयस्‍पर्शी (दिल को छू लेने वाला) टिप्पणी में, यह कहा गया है कि परमेश्वर हमें "अपने विश्वास में" लेकर ऐसी बुद्धि देता है (पद. 32)। वह अपना समाधान उन लोगों को धीरे धीरे बोलते हैं जो उसके करीब हैं।

एक रात अपनी समस्या के बारे में प्रार्थना करते हुए, डेविड को एक विचार आया। अगले क्रिसमस के दिन, उसने और एंजी ने अपने सबसे अच्छे कपड़े पहने, मेज को टिनसेल (चमकीले रंगीन काग़ज़ के लंबे फ़ीते (tinsel)) से सजाया, और भुना हुआ रात्रिभोज लाए। डेविड के माता-पिता ने भी ऐसा ही किया। फिर, प्रत्येक टेबल पर एक लैपटॉप रखकर, उन्होंने वीडियो लिंक के द्वारा एक साथ भोजन किया। लगभग ऐसा महसूस हुआ जैसे वे एक ही कमरे में हैं। तब से यह एक पारिवारिक परंपरा बन गई है।

परमेश्वर ने दाऊद को अपने भरोसे में लिया और उसे बुद्धि दी। वह हमारे समस्याओं का रचनात्मक समाधान फुसफुसा कर सुनाना पसंद करता है।

—शेरिडन वोयसी

मसीह में समुदाय

 बहामास के दक्षिण में भूमि का एक छोटा सा टुकड़ा है जिसे रैग्ड आइलैंड(Ragged Island) कहा जाता है। उन्नीसवीं सदी में यहाँ एक सक्रिय नमक उद्योग था, लेकिन उस उद्योग में गिरावट के कारण, कई लोग पास के द्वीपों में चले गए। 2016 में, जब वहां अस्सी से भी कम लोग रहते थे, द्वीप में तीन धार्मिक संप्रदाय थे, फिर भी सभी लोग प्रत्येक सप्ताह आराधना और संगति के लिए एक स्थान पर एकत्र होते थे। इतने कम निवासियों के साथ, समुदाय की भावना उनके लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण थी।   

आरंभिक कलीसिया के लोगों को भी समुदाय की एक महत्वपूर्ण आवश्यकता और इच्छा महसूस हुई। वे अपने नए विश्वास को लेकर उत्साहित थे जो यीशु की मृत्यु और पुनरुत्थान से संभव हुआ था। लेकिन वे यह भी जानते थे कि वह अब शारीरिक रूप से उनके साथ नहीं हैं, इसलिए उन्हें पता था कि उन्हें एक-दूसरे की ज़रूरत है। उन्होंने खुद को प्रेरितों की शिक्षाओं, संगति और एक साथ भोज साझा करने के लिए समर्पित कर दिया (प्रेरितों के काम 2:42)। “वे प्रार्थना करने और भोजन के लिए घरों में इकट्ठे होते और दूसरों की जरूरतों का ख्याल रखते थे। प्रेरित पौलुस ने कलीसिया का वर्णन इस प्रकार किया : “और विश्वास करनेवालों की मण्डली एक चित्त और एक मन की थी” (4:32)। पवित्र आत्मा से परिपूर्ण, उन्होंने लगातार परमेश्वर की स्तुति की और कलीसिया के जरूरतों को प्रार्थना में उसके पास लाए।  

समुदाय हमारे विकास और सहायता के लिए आवश्यक है। इसे अकेले जीने का प्रयास न करें। जब आप अपने संघर्षों और खुशियों को दूसरों के साथ साझा करेंगे और एक साथ उसके करीब आएंगे तो परमेश्वर समुदाय की भावनाओं को विकसित करेगा।

—ऐनी सीटास

परमेश्वर के सामने बराबर

छुट्टियों के दौरान, मेरी पत्नी और मैंने सुबह-सुबह बाइक की सवारी का आनंद लिया। एक रास्ता हमें करोड़ों डॉलर के घरों के बगल से ले गया। हमने विभिन्न प्रकार के लोगों को देखा--निवासियों को अपने कुत्तों को घुमाते हुए, साथी बाइक सवारों को, और कई श्रमिकों को नए घर बनाते हुए या अच्छी तरह से बनाए गए परिदृश्यों की देखभाल करते हुए। यह जीवन के सारे सामाजिक समूह के लोगों का मिश्रण था और मुझे एक महत्वपूर्ण वास्तविकता की याद आयी। हमारे बीच कोई वास्तविक भेदभाव नहीं था। अमीर या गरीब। धनवान या श्रमिक वर्ग। ज्ञात या अज्ञात। उस सुबह उस सड़क पर हम सब लोग एक जैसे थे। “धनी और निर्धन दोनों में यह समानता होती है; यहोवा उन दोनों का कर्त्ता है” (नीतिवचन 22:2) l मतभेदों के बावजूद, हम सब परमेश्वर के स्वरूप में बनाये गये हैं (उत्पत्ति 1:27)।

 लेकिन और भी बहुत कुछ है। परमेश्वर के समक्ष समान होने का अर्थ भी है: भले ही हमारा आर्थिक, सामाजिक, या जातीय स्थिति कुछ भी हो, हम सब पाप स्थिति के साथ पैदा हुए हैं: “सब ने पाप किया है और परमेश्‍वर की महिमा से रहित हैं” (रोमियों 3:23)। हम सब उसके सामने अवज्ञाकारी और समान रूप से दोषी हैं, और हमें यीशु की ज़रूरत है।

हम अक्सर कई कारणों से लोगों को समूहों में बांट देते हैं। लेकिन, वास्तव में, हम सब मानव जाति के हिस्से हैं। और यद्यपि हम सब एक ही स्थिति में हैं—पापियों को एक उद्धारकर्ता की आवश्यकता है—हम उसके अनुग्रह से “सेंत-मेंत धर्मी ठहराए जाकर” (पद.24) (परमेश्वर के साथ सही बनाए जा सकते हैं।)

—डेव ब्रैनन

 

ध्यान भटकाने की इच्छा

 

मैंने अपना फ़ोन रख दिया, मैं उस छोटी सी स्क्रीन पर लगातार आने वाली छवियों, विचारों और सूचनाओं की बमबारी से थक गया था। फिर, मैंने उसे उठाया और फिर से चालू किया। क्यों? अपनी पुस्तक द शैलोज़ में, निकोलस कैर ने बताया है कि इंटरनेट ने शांति के साथ हमारे रिश्ते को कैसे आकार दिया है: "नेट जो कर रहा है वह मेरी एकाग्रता और चिंतन की क्षमता को कम कर रहा है। चाहे मैं ऑनलाइन हूँ या नहीं, मेरा दिमाग अब जानकारी को उसी तरह लेने की उम्मीद करता है जिस तरह से नेट इसे वितरित करता है: कणों की एक तेज़ गति से चलने वाली धारा में। एक बार मैं शब्दों के समुद्र में एक स्कूबा गोताखोर था। अब मैं जेट स्की पर सवार एक आदमी की तरह सतह पर तैरता हूँ।"

मानसिक जेट स्की पर जीवन जीना स्वस्थ नहीं लगता। लेकिन हम कैसे धीमा होना शुरू करें, शांत आत्मिक जल में गहराई से गोता लगाने के लिए ?

भजन संहिता 131 में, दाऊद लिखता हैं, “मैंने अपने मन को शान्त और चुप कर दिया है” (पद.2) l दाऊद के शब्द मुझे याद दिलाते हैं कि मेरे पास जिम्मेदारी है। आदत बदलने की शुरुआत मेरे शांत रहने के चुनाव से होता है—भले ही मुझे वह चुनाव बार-बार करना पड़े। हालाँकि, धीरे-धीरे, हम परमेश्वर के संतुष्टिदायक भलाई का अनुभव करते हैं। एक छोटे बच्चे की तरह, हम संतोष में आराम करते हैं, यह याद रखते हुए कि वह ही अकेले आशा प्रदान करता है (पद.3)—आत्मिक संतुष्टि जिसे कोई स्मार्टफोन ऐप नहीं छू सकता है और कोई सोशल मीडिया साइट प्रदान नहीं कर सकता।

—एडम आर. होल्ज़