अर्नेस्ट हेमिंग्वे के पहले समपूर्ण उपन्यास में अत्यधिक शराब पीने वाले दोस्तों को दिखाया गया है, जिन्होंने हाल ही में प्रथम विश्व युद्ध को झेला है। उनमें युद्ध की तबाही के शाब्दिक और लाक्षणिक रूप से घावों के निशान हैं जिसे वे सहन करते हैं और पार्टियों, भव्य साहसिक कार्यों और आसपास सोने के द्वारा इसका सामना करने की कोशिश करते हैं। दर्द के असर को कम करने के लिए हमेशा शराब होती है। कोई भी खुश नहीं है।

हेमिंग्वे की पुस्तक द सन आल्सो राइजेज का शीर्षक सीधे सभोपदेशक 1:5 से आता है। सभोपदेशक में, राजा सुलैमान स्वयं को “शिक्षक” (पद.1) के रूप में संदर्भित करता है। वह देखता है, “सब कुछ व्यर्थ है” (पद. 2) और पूछता है, “उन सब परिशम से जिसे मनुष्य धरती पर करता है, उसको क्या लाभ प्राप्त होता है?” (पद.3) l सुलैमान ने देखा कि सूर्य कैसे उगता और डूबता है, हवा इधर-उधर बहती है, नदियाँ कभी संतुष्ट न होने वाले समुद्र में बहती रहती हैं (पद.5-7)। अंततः, सब कुछ भुला दिया जाता है (पद.11)।

हेमिंग्वे और सभोपदेशक दोनों ही हमें केवल इस जीवन के लिए जीने की व्यर्थता से सामना कराते हैं। हालाँकि, सुलैमान ने अपनी पुस्तक में दिव्य के उज्ज्वल संकेत बुने हैं। वहाँ स्थिरता है—और वास्तविक आशा है। सभोपदेशक हमें वैसे ही दिखाता है जैसे हम वास्तव में हैं, लेकिन यह परमेश्व को भी वैसा ही दिखाता है जैसा वह है। सुलैमान ने कहा, “जो कुछ परमेश्वर करता है वह सदा स्थिर रहेगा” (3:14) और इसमें हमारी बड़ी आशा है। क्योंकि परमेश्वर ने हमें अपने पुत्र, यीशु का उपहार दिया है।

परमेश्वर के बिना, हम एक अंतहीन, कभी संतुष्ट न होने वाले समुद्र में बह रहे हैं। उसके उदित पुत्र, यीशु के द्वारा, हमारा उसके साथ मेल हो गया है, और हमें अपना अर्थ, मूल्य और उद्देश्य पता चलता है।

टिम गुस्ताफसन