एक ब्रिटिश अखबार का दावा है, “औसत व्यक्ति अपने जीवनकाल में 7,73,618 निर्णय लेगा,” आगे उनका दृढ़ता से कहना है कि हमें “उनमें से 1,43,262 पर पछतावा होगा।” मुझे नहीं पता कि अख़बार इन संख्याओं तक कैसे पहुंचा, लेकिन यह स्पष्ट है कि हम अपने पूरे जीवनकाल में अनगिनत निर्णयों का सामना करते हैं। उनकी वास्तविक मात्रा हमें पंगु बना सकती है, खासकर जब हम मानते हैं कि हमारे सभी विकल्पों के परिणाम होते हैं, कुछ दूसरों की तुलना में कहीं अधिक महत्वपूर्ण होते हैं।
चालीस वर्षों तक जंगल में भटकने के बाद, इस्राएल के लोग अपनी नई मातृभूमि की दहलीज(threshold) पर खड़े थे। बाद में, देश में प्रवेश करने के बाद, उनके अगुवे यहोशू ने उन्हें एक चुनौतीपूर्ण विकल्प दिया : “यहोवा का भय मानकर उसकी सेवा खराई और सच्चाई से करो; और जिन देवताओं की सेवा तुम्हारे पुरखा . . . करते थे, उन्हें दूर करके यहोवा की सेवा करो” (यहोशू 24:14)। यहोशू ने उनसे कहा, “यदि यहोवा की सेवा करनी तुम्हें बुरी लगे, तो आज चुन लो कि तुम किस की सेवा करोगे . . . परन्तु मैं तो अपने घराने समेत यहोवा की सेवा नित करूंगा” (पद.15) ।
जैसे-जैसे हम प्रत्येक नए दिन की शुरुआत करते हैं, संभावनाएं हमारे सामने बढ़ती हैं, जिससे अनेक निर्णय लेने पड़ते हैं, जो अनेक निर्णयों की ओर अग्रसर होते हैं ।परमेश्वर से हमारा मार्गदर्शन करने के लिए समय निकालने से हमारे द्वारा चुने गए विकल्पों पर प्रभाव पड़ेगा। आत्मा की शक्ति से, हम हर दिन उसका अनुसरण करना चुन सकते हैं। बिल क्राउडर
आपको कौन से विकल्प चुनने पर पछतावा हुआ है? आपने उन
स्थितियों को अधिक समझदारी से कैसे संभाल सकते थे?
पिता, कभी-कभी जीवन अभिभूत करने वाला महसूस हो सकता है—और इसी तरह मेरे सामने आने वाले कई विकल्प भी भारी पड़ सकते हैं। कृपया मेरे कदमों और मेरे निर्णय लेने में मार्गदर्शन करें ताकि मैं जो भी चुनाव करूं उसमें आपका सम्मान करूं।
