एक गर्मी की रात, हमारे घर के पास पक्षी अचानक गड़बड़ी और शोर वाली आवाजें करने लगे। उनकी चीख.पुकार तेज हो गई जब गानेवाले पक्षियों ने पेड़ों से भेदने वाली आवाजें करीं । आख़िरकार हमें एहसास हुआ कि ऐसा क्यों हो रहा है। जैसे ही सूरज डूबा, एक बड़े बाज़ ने पेड़ की चोटी से झपट्टा मारा, जिससे पक्षी चीखते हुए तितर-बितर हो गए, और उड़ते हुए उन्होंने खतरे की चेतावनी भी दी।

हमारे जीवनों में, आत्मिक चेतावनियाँ पूरी बाइबल में सुनी जा सकती हैं—उदाहरण के लिए, झूठी शिक्षाओं के प्रति चेतावनियाँ। हमें संदेह हो सकता है कि हम यही सुन रहे हैं। हालाँकि, हमारे प्रति उसके प्रेम के कारण, हमारे स्वर्गीय पिता हमें ऐसे आत्मिक खतरों को स्पष्ट करने के लिए बाइबल की स्पष्टता प्रदान करते हैं।

यीशु ने सिखाया, “झूठे भविष्यद्वक्ताओं से सावधान रहो, जो भेड़ों के भेष में तुम्हारे पास आते हैं, परन्तु अन्दर में वे फाड़नेवाले भेड़िए हैं” (मत्ती7:15)। उसने आगे कहा, “उनके फलों से तुम उन्हें पहचान लोगे . . . हर अच्छा पेड़ अच्छा फल लाता है, और निकम्मा पेड़ बुरा फल लाता है।” फिर उसने हमें चेतावनी दी, “उनके फलों से तुम उन्हें पहचान लोगे” (पद.16-17; 20)।

नीतिवचन 22:3 हमें याद दिलाता है, “चतुर मनुष्य विपत्ति को आते देखकर छिप जाता है; परन्तु भोले लोग आगे बढ़कर दण्ड भोगते हैं।” ऐसी चेतावनियों में परमेश्वर का सुरक्षात्मक प्रेम निहित है, जो हमारे लिए उसके शब्दों में प्रकट होता है।

जैसे पक्षियों ने एक-दूसरे को शारीरिक खतरे के बारे में चेतावनी दी, क्या हम आत्मिक खतरे से बचने और परमेश्वर की शरण में जाने के लिए बाइबल की चेतावनियों पर ध्यान दे सकते हैं। पैट्रिशिया रेबॉन