बहुत मुश्किल से, एक मेडिकल छात्रा, कृपा ने एक गाँव की एक बूढ़ी महिला को मेडिकल कैंप में आने के लिए मनाया, जिसकी उँगलियाँ विकृत थीं। वहाँ एक वरिष्ठ डॉक्टर ने उसे देखा, कुछ दवाइयाँ लिखीं और उसे भेज दिया। फिर उसने कृपा को एक तरफ़ बुलाया और कहा, “उसकी विकृतियाँ इतनी गंभीर हैं कि हम कुछ नहीं कर सकते। कृपया लोगों को उम्मीद देने से पहले यह निश्चित कर लें कि कुछ किया जा सकता है।” कृपा ने कठिन तरीके से सीखा कि हमेशा दवा से ही ठीक होने की उम्मीद नहीं होती। लेकिन इस निराशा के बीच भी, परमेश्वर के अनुग्रह में अभी भी आशा है जो चीज़ों के प्राकृतिक व्यवस्था से परे है।

आमोस ने इस्राएल के लिए भविष्यवाणी की जब वह आध्यात्मिक बीमारी की निराशाजनक स्थिति में था। उसने कहा कि इस्राएल नष्ट हो जाएगा और लोग दासत्व में चले जाएंगे क्योंकि उन्होंने निर्दोषों पर अत्याचार किया, रिश्वत ली और न्याय से इनकार किया (पद.12)। आमोस की भविष्यवाणी 722 ईसा पूर्व में पूरी हुई जब इस्राएल के लोग असीरिया में निर्वासित कर दिए गए (2 राजा 17:6)। हालाँकि, जब आमोस ने विनाश की भविष्यवाणी की, उसने आशा भी दी। उसने कहा, “यहोवा की खोज करो, तब जीवित रहोगे” (पद.6) l यह समझाते हुए कैसे, वह आगे कहता है, “बुराई से बैर और भलाई से प्रीति रखो, और फाटक में न्याय को स्थिर करो” (पद.15)। अगर वे ऐसा करते, तो आमोस ने कहा, वे जीवित रहेंगे, उनके साथ परमेश्वर की उपस्थिति होगी और वे परमेश्वर की दया का अनुभव करेंगे (पद.15-16)।

जैसा कि आमोस इस्राएल के लोगों से कहता है, आइए हम भी परमेश्वर पर भरोसा करें, उसकी खोज करें और जो अच्छा है वह करें ताकि हम भी उसकी भलाई का अनुभव कर सकें। जब हम उसकी आज्ञा मानते हैं और अच्छा करते हैं, तो वह हमारी सबसे निराशाजनक परिस्थितियों को भी कुछ खूबसूरत में बदल सकता है (उत्पत्ति 50:20)। आपके जीवन में जो भी चल रहा हो, याद रखें: परमेश्वर में अभी भी आशा है। ऍन हरिकीर्तन