Month: सितम्बर 2026

“छोटे” आश्चर्यकर्म

हमारे वेडिंग शॉवर (करीबी रिश्तेदारों और दोस्तों के लिए शादी से पहले मिलने और जश्न मनाने का अवसर) में, हमारा शर्मीला दोस्त डेव एक कोने में एक, टिशू पेपर से लिपटी हुई अंडाकार वस्तु को पकड़कर खड़ा था। जब उसकी उपहार देने की बारी आई तो वह उसे लेकर आया। इवान और मैंने इसे खोला और लकड़ी का एक हाथ से नक्काशीदार लंबाकार टुकड़ा पाया जिसमें उकेरा हुआ था, “परमेश्वर के कुछ आश्चर्यकर्म छोटे भी होते हैं।” यह पट्टिका हमारे घर में पैंतालीस वर्षों से लटकी हुई है, जो हमें बार-बार याद दिलाती है कि परमेश्वर छोटी-छोटी चीजों में भी काम करते हैं। बिल का भुगतान करना हो, या भोजन उपलब्ध कराना हो, या सर्दी और खांसी ठीक करना हो । यह सब परमेश्वर के प्रावधान के प्रभावशाली प्रमाण के सबूत है।

भविष्यवक्ता जकर्याह के द्वारा, यहूदा के हाकिम, जरुब्बाबेल को यरूशलेम और मंदिर के पुनर्निर्माण के संबंध में परमेश्वर से इसी तरह का संदेश मिला था। बेबीलोन की बन्धुवाई से लौटने के बाद, एक धीमी प्रगति का समय चल रहा था, और इस्राएली हतोत्साहित हो गए। लेकिन परमेश्वर ने कहा, “इन छोटी शुरुआतों को तुच्छ मत जानो” (जकर्याह 4:10 )। वह अपनी इच्छाओं को हमारे द्वारा से और कभी-कभी हमारे बावजूद भी पूरा करता है। सर्वशक्तिमान यहोवा का यही वचन है, ‘’न तो बल से और न शक्ति से, परन्तु मेरे आत्मा के द्वारा’’ (पद 6)।

जब हमें ज़ाहिर रूप से परमेश्वर के काम बहुत बड़े पैमाने में नहीं दिखते तो हम थकने लगते है, पर हम याद रखें कि उसके कुछ आश्चर्यकर्म “छोटे” हो सकते हैं। वह अपने बड़े उद्देश्यों को पूरा करने के लिए छोटी चीज़ों का उपयोग करता है। एलिसा मॉर्गन

 

स्वस्थ हृदय

मानव हृदय एक अद्भुत अंग है। मुट्ठी के आकार के इस पंपिंग स्टेशन का वजन 7 से 15 औंस (जो लगभग 198 ग्राम से 425 ग्राम के बीच होता है)। प्रतिदिन यह लगभग 100,000 बार धड़कता है और हमारे शरीर में 60,000 मील लंबी रक्त वाहिकाओं के माध्यम से 2,000 गैलन रक्त पंप करता है! ऐसे रणनीतिक कार्य और भारी काम के बोझ के साथ, यह समझ में आता है कि हृदय का स्वास्थ्य पूरे शरीर की भलाई के लिए क्यों महत्वपूर्ण है। चिकित्सा विज्ञान हमें स्वस्थ आदतें अपनाने के लिए प्रोत्साहित करता है क्योंकि हमारे हृदय की स्थिति और हमारे स्वास्थ्य की गुणवत्ता एक साथ चलती है।

जहाँ चिकित्सा विज्ञान हमारे शारीरिक हृदयों के बारे में आधिकारिक रूप से बात करता है, परमेश्वर एक अलग प्रकार के “हृदय” के बारे में कही अधिक अधिकार के साथ बात करते है । वह हमारे अस्तित्व के मानसिक, भावनात्मक, आत्मिक और धार्मिक “केंद्र” को संबोधित करते हैं। क्योंकि हृदय जीवन की केंद्रीय संसाधन इकाई है, इसे सुरक्षित रखना अनिवार्य है: “सब से अधिक अपने हृदय की रक्षा कर; क्योंकि जीवन का मूल स्रोत वही है” (नीतिवचन 4:23)। अपने हृदयों की रक्षा करने से हमें अपनी बोली में सहायता मिलेगी (पद 24), हमारी आंखें साम्हने ही की ओर लगी रहेंगे (पद 25), और हमारे पांव बुराई के मार्ग से बचेंगे (पद 27)। उम्र या जीवन की अवस्था की परवाह किए बिना, जब हमारे हृदयों की चौकसी की जाती है, तो हमारे जीवन की रक्षा होती है, हमारे रिश्तों की रक्षा होती है, और परमेश्वर को आदर मिलता है। आर्थर जैक्सन

 

खोज और बचाव

कुछ दोस्त इंग्लिश चैनल (अटलांटिक महासागर की एक शाखा) में नौका विहार करने गए, इस उम्मीद में कि तूफानी मौसम का जो अनुमान लगाया गया था वो बदल जाएगा। लेकिन हवाएँ तेज़ हो गईं और लहरें भी अशांत होने लगी, जिससे उनके जहाज की सुरक्षा खतरे में पड़ गई, इसलिए उन्होंने मदद के लिए आर.एन.एल.आई (रॉयल नेशनल लाइफबोट इंस्टीट्यूशन) को रेडियो संदेश भेजा। कुछ तनावपूर्ण क्षणों के बाद, उन्होंने दूर से अपने बचावकर्ताओं को देखा और राहत महसूस की कि वे जल्द ही सुरक्षित हो जाएंगे। जैसा कि मेरे मित्र ने बाद में कृतज्ञतापूर्वक इस बात को कहा, “चाहे लोग समुद्र के नियमों की उपेक्षा करें या नहीं, आर.एन.एल.आई फिर भी बचाव के लिए आता है।”

जब वह यह कहानी सुना रहे थे, तो मैं यीशु के बारे में सोचने लगी कि कैसे उन्होंने परमेश्वर के खोज-और-बचाव मिशन का संचालन किया। वह मनुष्य के रूप में इस पृथ्वी पर आ गए, हम में से एक के समान ही जिए। अपनी मृत्यु और पुनरुत्थान के द्वारा, उन्होंने हमें एक बचाव योजना प्रदान की जब हमारे पाप और आज्ञा ना मानने के कारण हम परमेश्वर से अलग किए हुए थे। इस सत्य पर पौलुस द्वारा ज़ोर दिया गया है जब वह गलातिया की कलीसिया को लिखता है: “प्रभु यीशु मसीह . . . हमें वर्तमान बुरे संसार से बचाने के लिये हमारे पापों के लिये अपने आप को दे दिया” (गलातियों 1:3-4)। पौलुस गलातियों को याद दिलाता है कि कैसे उन्हें यीशु की मृत्यु के द्वारा नए जीवन का वरदान मिला है ताकि वे दिन-प्रतिदिन परमेश्वर का आदर करें। यीशु, हमारा बचानेवाला, उसने स्वेच्छा से हमारे लिए अपनी जान दी ताकि हम न खोए। उनके द्वारा ऐसा करने से, हमारे पास परमेश्वर के राज्य में जीवन है, और हम कृतज्ञ होकर इस जीवन- बचाने वाली खबर को अपने आस-पास के लोगों के साथ साझा कर सकते हैं। एमी बाउचर पाइ

 

परिचित जल

परमेश्वर की प्रेरणा को महसूस करते हुए, मैंने एक लेखक के रूप में उसके पीछे चलने के लिए एक कॉर्पोरेट नौकरी छोड़ दी। फिर भी, मुझे तत्काल परिणाम नहीं दिखे। इस परिवर्तन के लगभग तीन साल बाद, मुझे एक प्रकाशक से एक ईमेल मिला जो अस्वीकृति जैसा लग रहा था। पूरी तरह से निराश होकर, मैंने सोचा, “परमेश्वर ने मुझे क्यों बुलाया है?” मैंने उस नौकरी पर वापस जाने के बारे में सोचा जिसे मैंने छोड़ दी थी। तभी मुझे एक और ईमेल मिला जिसमें कहा गया था कि वे मेरी किताब प्रकाशित करने में प्रसन्न होंगे और मुझे इसे आगे बढ़ाना चाहिए और लिखना चाहिए। तब से, परमेश्वर मुझे उन तरीकों से उपयोग कर रहा है जिसकी मैंने कभी कल्पना भी नहीं की थी।

मेरी यात्रा मुझे पतरस की याद दिलाती है। मछुआरे के रूप में अपना व्यवसाय छोड़ने और यीशु का अनुसरण करने के तीन साल बाद, उसने उसे जानने से भी इनकार कर दिया (मत्ती 26:69-75)। उसे खुद में पूरी तरह से निराशा महसूस हुई होगी (पद.75)। यीशु की मृत्यु और पुनरुत्थान के बाद, शायद खुद का ध्यान भटकाने के लिए, पतरस——अपने साथियों के साथ—फिर से मछली पकड़ने के लिए परिचित पानी में जल (यूहन्ना 21:3)। सुबह तक उन्होंने कुछ भी नहीं पकड़ा था (पद.3)। इसके बजाय, उन्होंने यीशु को किनारे पर देखा (पद.4)। यीशु ने उन्हें बताया कि उन्हें अपने जाल कहाँ डालने हैं और उन्हें नाश्ते के लिए आमंत्रित किया (पद.6-13)। यीशु ने पतरस को वापस जाने के लिए दोषी नहीं ठहराया, इसके बजाय उसने पतरस को यह कहते हुए फिर से बुलाया, “मेरे मेमनों को चरा” (पद.15)।

जब परमेश्वर हमें बुलाता है, तो हो सकता है कि चीजें तुरंत काम न करें। हम खुद से निराश हो सकते हैं और परिणाम के बारे में संदेह कर सकते हैं। लेकिन परमेश्वर उस समय का उपयोग हमें प्रशिक्षित करने और छाँटने के लिए कर सकता है ताकि वह हमें अपनी महिमा के लिए उपयोग कर सके (यूहन्ना 15:2)। इसलिए, जब हमें परिणाम नहीं दिखते हैं, तो हार मानने और परिचित जल (जीवनशैली) वापस जाने के बजाय, आइए धैर्यपूर्वक प्रतीक्षा करें, परमेश्वर के समय पर भरोसा करें। —ऍन हरिकीर्तन

 

“कैसा अद्भुत मित्र!”

मेरी माँ और हमारी पड़ोसी, घर के पीछे के आंगन के एक दूसरे के पसंदीदा पड़ोसी थे। दोनों मित्रतापूर्ण प्रतिद्वन्द्वी भी बन गये । दोनों हर सोमवार को अपने घर के बाहर कपड़े की तार पर अपने ताजे धुले कपड़े टांगने वाले पहले व्यक्ति बनने के लिए प्रतिस्पर्धा करते थे। “उसने मुझे फिर हरा दिया !” मेरी माँ कहती। लेकिन अगले सप्ताह, माँ शायद प्रथम आ जाती —दोनों अपनी दोस्ताना साप्ताहिक प्रतियोगिता का आनंद लेतीं। दस वर्षों तक घर के पीछे के आंगन की गली साझा करने के दौरान, दोनों ने एक-दूसरे की बुद्धि, कहानियाँ और आशा को भी साझा किया।

बाइबल ऐसी मित्रता के गुण के बारे में बड़ी गर्मजोशी (उत्साह) से बात करती है। सुलैमान ने कहा “मित्र सब समयों में प्रेम रखता है” (नीतिवचन 17:17)। उसने यह भी कहा, “मित्र के हृदय की मनोहर सम्मति से मन आनन्दित होता है” (27:9)। हमारा महान मित्र निश्चित रूप से यीशु है। अपने शिष्यों से प्रेमपूर्ण मित्रता का आग्रह करते हुए, उन्होंने उन्हें सिखाया, “इससे बड़ा प्रेम किसी का नहीं, कि कोई अपने मित्रों के लिये अपना प्राण दे।” (यूहन्ना 15:13)। अगले ही दिन, वह क्रूस पर वैसा ही करने वाले थे। उन्होंने उनसे यह भी कहा, “मैं ने तुम्हें मित्र कहा है, क्योंकि मैं ने जो बातें अपने पिता से सुनीं, वे सब तुम्हें बता दीं” (पद 15)। फिर उन्होंने कहा, “यह मेरी आज्ञा है: एक दूसरे से प्रेम रखो” (पद 17)।

ऐसे शब्दों से, यीशु “अपने सुनने वालों को उन्नत कर रहे हैं,” जैसा कि दार्शनिक निकोलस वॉल्टरस्टॉर्फ ने कहा, उन्हें निम्न मनुष्यों से अपना साथी और विश्वास पात्र में बदल दिया। मसीह में, हम दूसरों से मित्रता करना सीखते हैं। कैसा दोस्त है जो हमें ऐसा प्रेम सिखाता है! पैट्रिशिया रेबॉन

 

अद्भुत शिक्षा

सोफिया रॉबर्ट्स ने पहली बार ओपन हार्ट सर्जरी देखी जब वह लगभग ग्यारह वर्ष की थीं। हालाँकि ऐसी चिकित्सा प्रक्रिया को देखने के लिए उसकी उम्र थोड़ी कम लग सकती है , लेकिन आपको यह बताना आवश्यक है कि उसके पिता, डॉ. हेरोल्ड रॉबर्ट्स जूनियर, एक हृदय सर्जन हैं। 2022 में, सोफिया - जो अब तीस साल की है और एक सर्जरी रेज़िडेंट चिकित्सक है - उसने अपने पिता के साथ मिलकर एक सफल महाधमनी एओर्टिक वाल् बदलाव किया। हेरोल्ड ने कहा, “इससे बेहतर क्या हो सकता है? मैंने जिस बच्ची को साइकिल चलाना सिखाया . . . अब, उसे यह सिखाना कि मानव हृदय का ऑपरेशन कैसे किया जाता है, बहुत ही अद्भुत बात है।”

हम में से कुछ ही होंगे जो बच्चे को सर्जरी करना सिखाए, पर सुलैमान आने वाली पीढ़ी को कुछ और सिखाने के महत्व का वर्णन करता है - परमेश्वर और उसके मार्गों का आदर करना। बुद्धिमान राजा ने बड़े उत्साह से अपने पुत्र के साथ वो सब बांटा जो उसने परमेश्वर के साथ उसके रिश्ते में सीखा: “मेरे बेटे, . . .अपने सम्पूर्ण मन से यहोवा पर भरोसा रखना” (नीतिवचन 3:1, 5), “यहोवा का भय मानना” (पद 7), “यहोवा का आदर करना” (पद 9), और “यहोवा के अनुशासन का तिरस्कार मत करना” ( पद 11). सुलैमान जानता था कि परमेश्वर अपने बच्चों से “प्रेम करता है” और “प्रसन्न” होता है जो स्वेच्छा से उसका सुधार और मार्गदर्शन ग्रहण करते हैं (पद 12)।

आइए अगली पीढ़ी को सिखाएं कि हमारे अद्भुत, महिमामय परमेश्वर पर भरोसा रखना, उनका भय मानना, उनका आदर करना और विनम्रतापूर्वक उनके अनुरूप ढलने का क्या मतलब है। ऐसा करने में उसके साथ साझेदार होना एक अत्याधिक सौभाग्य है और हाँ , बहुत ही अद्भुत भी! टॉम फेल्टेन

 

महानतम सम्मान

1998 की डिज़्नी फिल्म, डिज़्नी, एक लड़की की कहानी दिखाती है जो रात में चुपके से भाग जाती है और सम्राट की सेना में अपने घायल पिता की जगह लेने के लिए एक पुरुष होने का नाटक करती है। जब उसके परिवार को उसके कारनामों का पता चलता है, तो मुलान का परिवार चुप रहता है, उन्हें डर है कि अधिकारियों को बताने से उसकी जान को खतरा हो सकता है। वे आशा करते हैं और प्रार्थना करते हैं कि वह जीवित वापस लौट आए। युद्ध समाप्त होने और साम्राज्य के बच जाने के बाद, मुलान घर लौटती है। वह अपने पिता को वह स्मृति चिन्ह भेंट करती है जो सम्राट ने उसे उसकी बहादुरी के लिए दिया था। वह कहती है, “वे हमारे परिवार के सम्मान के लिए उपहार हैं।” उसके पिता उपहारों को एक तरफ रख देते हैं, उसे गले लगाते हैं और जवाब देते हैं, “सबसे बड़ा उपहार और सम्मान तुम्हें एक बेटी के रूप में पाना है।”

मुलान की तरह, यीशु के शिष्य भी परमेश्वर के लिए जो कुछ भी कर सकते थे, उसके बारे में उत्साहित थे। उन्होंने खुशी से कहा, “तेरे नाम से दुष्टात्माएँ भी हमारे वश में हैं” (पद.17)। यीशु ने उनकी सफलता को स्वीकार किया, लेकिन जल्दी से उनका ध्यान फिर से केंद्रित कर दिया। “इससे आनंदित मत हो कि आत्मा तुम्हारे वश में हैं, परन्तु इस से आनंदित हो कि तुम्हारे नाम स्वर्ग पर लिखे हैं l” (पद.20)। यीशु के लिए, अनंत जीवन का आश्वासन दुष्टात्माओं पर “अधिकार” का प्रयोग करने से कहीं अधिक उत्सव मनाने का कारण था (पद.19-20)। जबकि संसार शक्ति का प्रयोग करने में गर्व महसूस करता है, परमेश्वर के लोग अनंत जीवन के आश्वासन को संजोते हैं।

कभी-कभी हमें ऐसा लग सकता है कि हम परमेश्वर द्वारा दिए गए वरदानों और संसाधनों के कारण शक्तिशाली हैं। लेकिन हमारे आनन्दित होने का कारण यह नहीं होना चाहिए कि हमारे पास पृथ्वी पर शक्ति या वरदान हैं। सबसे बड़ा वरदान और सम्मान यह है कि यीशु की मृत्यु और पुनरुत्थान के कारण, हमारा जीवन यहाँ समाप्त नहीं होता है। हमारे नाम स्वर्ग में लिखे गए हैं और हमारे पास अनंत जीवन है। —ऍन हरिकीर्तन

अब से हम विदेशी नहीं

“तुम यहाँ की नहीं हो।” इन शब्दों ने एक आठ साल की बच्ची के दिल को गहरा दुख पहुंचाया और यह दुख उसके साथ बना रहा । उसका परिवार युद्धग्रस्त देश के एक शरणार्थी शिविर से एक नए देश में पहुँचा था, और उसके आप्रवास कार्ड ( किसी दूसरे देश में रहने के लिए आना) पर विदेशी शब्द अंकित था। उसे महसूस हुआ जैसे वह अलग की हुई है।

एक वयस्क के रूप में, हालाँकि उसने यीशु में अपना विश्वास रखा, फिर भी वह अलग-थलग महसूस कर रही थी - इस भावना से आहत थी कि वह एक अप्रिय विदेशी थी। अपनी बाइबल पढ़ते समय, उसने इफिसियों 2 में लिखे वादों को पाया। पद 12 में, उसने उस पुराने, परेशान करने वाले शब्द “अलग” को देखा। “तुम लोग उस समय मसीह से अलग और इस्त्राएल की प्रजा के पद से अलग किए हुए, और प्रतिज्ञा की वाचाओं के भागी न थे, और आशाहीन और जगत में परमेश्वर रहित थे।” लेकिन जैसे-जैसे वह पढ़ती रही, उसने देखा कि कैसे मसीह के बलिदान ने उसकी स्थिति बदल दी थी। उसे पद 19 मिला, जिसने उससे कहा, “तुम अब विदेशी और मुसाफिर नहीं रहे परन्तु पवित्र लोगों के संगी स्वदेशी और परमेश्वर के घराने के हो गए।” वह परमेश्वर के लोगों की “साथी नागरिक” थी। यह जानकर कि उसकी नागरिकता स्वर्ग की है, वह आनंद से भर गई। अब वह फिर कभी विदेशी नहीं कहलाएगी। परमेश्वर ने उसे अपने राज्य में बुला लिया हैं और उसे स्वीकार किया है।

हमारे पाप के कारण, हम परमेश्वर से बहुत दूर थे। लेकिन अब हमें उसी दशा में नहीं रहना। यीशु उन सभी के लिए शांति लाया जो “दूर” थे (पद 17), उन सभी को जो उस पर भरोसा करते है, अपने अनंतकाल के राज्य का साथी नागरिक बना दिया - जो मसीह की देह के रूप में अब एकजुट हो गए हैं। डेव ब्रैनन

 

राजसी पुनरागमन

दुनिया भर में अरबों दर्शकों की संख्या के साथ, महारानी एलिजाबेथ द्वितीय का अंतिम संस्कार संभवतः इतिहास में सबसे ज्यादा देखा जाने वाला प्रसारण था। उस दिन दस लाख लोग लंदन की सड़कों पर खड़े थे, और 250,000 लोग उस सप्ताह रानी के शव-पेटिका को देखने के लिए घंटों कतार में खड़े थे। ऐतिहासिक रूप से पाँच सौ राजा, रानियाँ, राष्ट्रपति और अन्य राष्ट्राध्यक्ष, अपनी ताकत और चरित्र के लिए जानी जाने वाली महिला को श्रद्धांजलि देने आए।

जहाँ दुनिया ने ग्रेट ब्रिटेन और उसकी दिवंगत रानी की ओर अपनी नज़रे जमा रखी थी, मेरे विचार किसी और घटना की ओर चले गए - एक राजसी पुनरागमन। हमें बताया गया है कि एक दिन आ रहा है, जब राष्ट्र कहीं अधिक महान राजा को पहचानने के लिए एकत्रित होंगे (यशायाह 45:20-22)। ताकत और चरित्र का अगुवा (पद 24), उसके सम्मुख “हर घुटना झुकेगा” और” (पद 23), (प्रकाशितवाक्य 21:24, 26)। हालांकि हर कोई इस राजा के आगमन का स्वागत नहीं करेंगे, लेकिन जो लोग ऐसा करेंगे वे हमेशा के लिए उसके शासनकाल का आनंद लेंगे (यशायाह 45:24-25)।

जिस तरह दुनिया एक रानी को जाते हुए देखने के लिए इकट्ठा हुई, उसी तरह एक दिन वह अपने परम राजा को वापस आते हुए देखेगी। वह कैसा दिन होगा - जब स्वर्ग और पृथ्वी पर सभी लोग यीशु मसीह के सामने झुकेंगे और उसे प्रभु के रूप में पहचानेंगे (फिलिप्पियों 2:10-11)। शेरिडेन वोयसी