सभी यीशु के लिए
जब जेफ़ चौदह वर्ष के थे, तब उनकी माँ उन्हें एक प्रसिद्ध गायक के पास ले गईं। अपने युग के कई संगीतकारों की तरह, बी जे थॉमस, एक अमेरिकी पॉप और देशी गायक, संगीत पर्यटन के दौरान आत्म-विनाशकारी जीवन शैली में फंस गए थे। लेकिन वह और उसकी पत्नी, यीशु से मिलने के पहले कि यह बाते थी। जब वे मसीह में विश्वास करने लगे तो उनका जीवन मौलिक रूप से बदल गया।
संगीत कार्यक्रम की रात, गायक ने उत्साही भीड़ का मनोरंजन करना शुरू कर दिया। लेकिन अपने कुछ प्रसिद्ध गीतों का प्रदर्शन करने के बाद, एक व्यक्ति श्रोताओं में से चिल्लाया, "हे, यीशु के लिए एक गाना गाओ!" बिना किसी हिचकिचाहट के, बीजे ने जवाब दिया, "मैंने अभी यीशु के लिए चार गाने गाए हैं।"
तब से कुछ दशक हो गए हैं, लेकिन जेफ को अभी भी वह पल याद है जब उन्हें एहसास हुआ कि हम जो कुछ भी करते हैं वह यीशु के लिए होना चाहिए - यहां तक कि ऐसी चीजें जिन्हें कुछ लोग "गैर-धार्मिक" मान सकते हैं।
हम कभी-कभी जीवन में जो कुछ करते हैं उसे विभाजित करने के लिए लुभाते हैं। बाइबल पढ़ें। विश्वास में आने की हमारी कहानी साझा करें। एक भजन गाओ। पवित्र सामान। लॉन की घास काटो। एक दौड़ के लिए जाना। एक देश गीत गाओ। धर्मनिरपेक्ष सामान।
कुलुस्सियों 3:16 हमें याद दिलाता है कि मसीह का संदेश हमें सिखाने, गाने और धन्यवाद देने जैसी गतिविधियों में वास करता है, लेकिन पद 17 और भी आगे जाता है। यह इस बात पर बल देता है कि परमेश्वर की सन्तान के रूप में, "वचन या कर्म से जो कुछ [हम] करते हैं, [हम] वह सब प्रभु यीशु के नाम में करते हैं।"
हम यह सब उसके लिए करते हैं।
मेरी ड्राइविंग कैसी है?
कभी-कभी, पुराने दर्द और थकान के साथ रहने से घर में अलग-थलग और अकेलापन महसूस होता है। मैंने अक्सर महसूस किया है कि परमेश्वर और दूसरों ने मुझे अनदेखा किया है। अपने सेवा-कुत्ते के साथ सुबह-सुबह प्रार्थना-चलने के दौरान, मैं इन भावनाओं से जूझ रहा था। मैंने दूर से एक गर्म हवा का गुब्बारा देखा। इसकी टोकरी के लोग हमारे शांत पड़ोस के सारे दृश्य का आनंद ले सकते थे, लेकिन वे वास्तव में मुझे नहीं देख पा रहे थें । जैसे-जैसे मैं अपने पड़ोसियों के घरों के पास से गुज़र रहा था, मैंने आह भरी। उन बंद दरवाजों के पीछे कितने लोग अनदेखी और महत्वहीन महसूस करते हैं? जैसे ही मैंने अपना चलना समाप्त किया, मैंने परमेश्वर से अपने पड़ोसियों को यह बताने के अवसर देने के लिए कहा कि मैं उन्हें देखता हूँ और उनकी देखभाल करता हूँ, और वह भी करता है।
परमेश्वर ने तारों की ठीक-ठीक संख्या निर्धारित की, जिनसे उसने अस्तित्व में आने की बात कही। उसने प्रत्येक तारे को एक नाम से पहचाना (भजन संहिता 147:4), एक अंतरंग कार्य जो उसके ध्यान को सबसे छोटे विवरण पर प्रदर्शित करता है। उसकी शक्ति - अंतर्दृष्टि, विवेक, और ज्ञान - की भूत, वर्तमान, या भविष्य में "कोई सीमा नहीं" है (पद. 5)।
परमेश्वर प्रत्येक हताश पुकार को सुनता है और प्रत्येक मौन आंसू को उसी तरह स्पष्ट रूप से देखता है जैसे वह संतोष और पेट की हंसी की प्रत्येक श्वास को देखता है। वह देखता है कि कब हम ठोकर खा रहे होते हैं और कब हम विजयी होकर खड़े होते हैं। वह हमारे गहरे भय, हमारे अंतरतम विचारों और हमारे बेतहाशा सपनों को समझता है। वह जानता है कि हम कहाँ थे और हम कहाँ जा रहे हैं। जैसे परमेश्वर हमें अपने पड़ोसियों को देखने, सुनने और प्यार करने में मदद करता है, हम उसे देखने, समझने और हमारी देखभाल करने के लिए उस पर भरोसा कर सकते हैं।
जंगली घास को पानी देना
इस वसंत में, जंगली घास ने हमारे पीछे के आँगन में ऐसे हमला किया जैसे कुछ जुरासिक पार्क जैसा हो। एक इतनी बड़ी होगयी कि जब मैंने उसे बाहर निकालने की कोशिश की, तो मुझे डर लगा कि कहीं मैं खुद को चोट न पहुँचा दूँ। इससे पहले कि मैं उसे कुदाल से मारता, मैंने देखा कि मेरी बेटी वास्तव में उस पर पानी डाल रही थी। "तुम जंगली घास को पानी क्यों दे रही हो?" मैंने कहा। "मैं देखना चाहती हूं कि यह कितना बड़ा हो जाएगा!" उसने एक उग्र मुस्कराहट के साथ उत्तर दिया।
जंगली घास कोई ऐसी चीज नहीं है जिसे हम जानबूझकर पोषित करते हैं। लेकिन जैसा कि मैंने इसके बारे में सोचा, मुझे एहसास हुआ कि कभी-कभी हम अपने आत्मिक जीवन में "जंगली घास" को पानी देते हैं, इच्छाओं को खिलाते हैं जो हमारे विकास को रोकती हैं।
पौलुस इसके बारे में गलातियों 5:13-26 में लिखता है, जहाँ वह शरीर के द्वारा जीने और आत्मा के द्वारा जीने का अंतर बताता है। वह कहता है कि अकेले नियमों का पालन करने की कोशिश करने से हम "जंगली घास -मुक्त" जीवन की स्थापना नहीं कर पाएंगे। इसके बजाय, जंगली पौधों को सींचने से बचने के लिए, वह हमें “आत्मा के अनुसार चलने” का निर्देश देता है। वह आगे कहते हैं कि परमेश्वर के साथ प्रतिदिन चलना ही हमें "शरीर की लालसाओं को तृप्त करने" के आवेग से मुक्त करता है (पद. 16)।
पौलुस की शिक्षा को पूरी तरह से समझने की यह एक आजीवन प्रक्रिया है। लेकिन मुझे उनके मार्गदर्शन की सरलता पसंद है: अपनी आत्म-केंद्रित इच्छाओं को पोषित करके कुछ अवांछित बढ़ने के बजाय, जब हम परमेश्वर के साथ अपने संबंध विकसित कर रहे होते हैं, हम फल उगाते हैं और एक ईश्वरीय जीवन की फसल काटते हैं (पद. 22-25) ।
अशांति के बीच अनुग्रह
मैं झपकी ले रहा था, जब उसने मुझे उठा दिया। तहखाने से, मेरे बेटे ने अपने इलेक्ट्रिक गिटार के तार पर मारा। दीवारें गूंज उठीं। कोई शांति नहीं। कोई ख़ामोशी नहीं। कोई झपकी नहीं। क्षणों बाद, प्रतिस्पर्धी संगीत ने मेरे कानों को अभिवादित किया: मेरी बेटी पियानो पर “अमेजिंग ग्रेस” बजा रही है।
आम तौर पर, मुझे अपने बेटे का गिटार बजाना बहुत पसंद है। लेकिन उस पल में, इसने मुझे झकझोर कर रख दिया था। उतनी ही जल्दी, जॉन न्यूटन का परिचित भजन ने मुझे याद दिलाया कि अराजकता के बीच अनुग्रह पनपता है। जीवन के तूफान चाहे कितने भी तेज़, अवांछित या विचलित करने वाले क्यों न हों, परमेश्वर के अनुग्रह के भजन स्पष्ट और सच्चे हैं, जो हमें उसकी सतर्क देखभाल की याद दिलाते हैं।
हम उस वास्तविकता को पवित्रशास्त्र में देखते हैं। भजन संहिता 107:23-32 में, नाविकों को एक ऐसे भंवर के खिलाफ संघर्ष करना पड़ता है जो उन्हें आसानी से उड़ा सकता है। “और क्लेश के मारे उनके जी में जी नहीं रहता;” (पद 26)। फिर भी वे निराश नहीं हुए लेकिन “तब वे संकट में यहोवा की दोहाई देते हैं, और वह उनको सकेती से निकालता है।” (पद 28)। अंत में, हम पढ़ते हैं: “तब वे उनके बैठने से आनन्दित होते हैं, और वह उनको मन चाहे बन्दरगाह में पहुँचा देता है”।
अराजक क्षणों में, चाहे वे जानलेवा हों या केवल नींद के लिए खतरा हों, शोर और भय की बौछार हमारी आत्मा को झकझोर सकती है। लेकिन जब हम परमेश्वर पर भरोसा करते और उनसे प्रार्थना करते हैं, तो हम उनके अटल प्रेम का आश्रय स्थल-उनकी उपस्थिति और प्रावधान के अनुग्रह का अनुभव करते हैं।
दौड़ दौड़ना
अपनी पत्नी, पुत्र और पुत्री को खोने की त्रासदियों की एक श्रृंखला के बाद, 89 की उम्र में फौजा सिंह ने दौड़ने के अपने जूनून पर ध्यान केन्द्रित करने का फैसला किया l सिंह, पंजाबी भारतीय मूल के ब्रिटेन के सौ वर्ष के इस व्यक्ति ने, टोरंटो वाटरफ्रंट लम्बी दौड़(मैराथन) खत्म करने वाले पहले 100 वर्षीय व्यक्ति बने l शायद उनके स्वस्थ आहार, और शारीरिक और मानसिक अनुशासन ने उन्हें अपने प्रतिस्पर्धा में बढ़त हासिल करने में सक्षम बनाया l सिंह अपने कमज़ोर पैरों के कारण 5 साल की उम्र तक चलने में असमर्थ थे l हालाँकि उन्हें अक्सर चिढ़ाया जाता था और उन्हें “छड़ी” कह कर पुकारा जाता था, सिंह अपनी उपलब्धियों के कारण अब “पगड़ी वाला तूफ़ान” /(Turbaned Tornedo/ टरबंड टोरनाडो) के रूप में लोकप्रिय हैंl
प्रेरित पौलुस ने अपने दिनों में उसी प्रकार का अनुशासन प्रदर्शित करनेवाले एथलीटों को मान्यता दी (1 कुरिन्थियों 9:24) l लेकिन उसने यह भी माना कि चाहे उन्होंने कितना भी प्रशिक्षण लिया हो, अंततः उनका वैभव फीका पड़ जाता है l इसके विपरीत, उसने कहा, हमारे पास यीशु के लिए इस तरह जीने का अवसर है जो अनंतकाल को प्रभावित करता है l “एक मुकुट तो हमेशा के लिए रहेगा” (पद.25) पौलुस का तात्पर्य है,यदि क्षणिक वैभव के लिए प्रयास करनेवाले एथलीट इसके लिए इतना परिश्रम कर सकते हैं, तो के लिए जीने वालों का कितना अधिक होना चाहिए l
हम उद्धार कमाने के लिए प्रशिक्षण नहीं लेते हैं l बल्कि, इसके बिलकुल विपरीत; जब हम मानते हैं कि हमारा उद्धार वास्तव में कितना अद्भुत है, वह हमारी प्राथमिकताओं, हमारे दृष्टिकोण, और वे चीजें जिनके लिए हम जीते हैं उनको पुनः आकार देता है जब हम परमेश्वर की सामर्थ्य में विश्वासयोग्यता से अपने विश्वास की दौड़ दौड़ते हैं l
इसे अपना बनाएं, दोस्त
11 जून 2002 को गायन प्रतियोगिता अमेरिकन आइडल की शुरुआत हुई। हर हफ्ते, आशावादियों ने लोकप्रिय गीतों के अपने संस्करणों का प्रदर्शन किया, और दर्शकों ने मतदान किया कि प्रतियोगिता के अगले दौर में कौन आगे बढ़ेगा।
शो में पैनल जजों में से एक, रैंडी जैक्सन की सिग्नेचर फीडबैक यह तीखी टिप्पणी थी, “आपने उस गाने को अपना बना लिया दोस्त”। उन्होंने उस प्रशंसा की सराहना उस समय करी जब एक गायक ने एक परिचित धुन ली, इसे पूरी तरह से सीखा, और फिर इसे एक नए तरीके से प्रदर्शित किया जिसने इसे एक अद्वितीय, व्यक्तिगत रूप दिया। इसे अपना बनाना इसका पूरी तरह से और रचनात्मक रूप से स्वामित्व करना (अपनाना) था, और फिर इसे दुनिया को मंच पर पेश करना था।
पौलुस भी हमें कुछ ऐसा करने के लिए आमंत्रित करता है जो हमारे विश्वास और हमारी अभिव्यक्ति पर भी विश्वास करने के लिये है । फिलिप्पियों 3 में, वह परमेश्वर के सामने सही स्थिति में खड़े रहने के प्रयासों को अस्वीकार करता है (पद 7, 8)। इसके बजाय, वह हमें विश्वास के आधार पर परमेश्वर की ओर से आने वाली धार्मिकता को अपनाना सिखाता है (पद 9)। क्षमा और छुटकारे का वरदान हमारी प्रेरणा और लक्ष्यों को बदल देता है, “मैं उस उपलब्धि को पा लेने के लिये निरन्तर यत्न कर रहा हूँ जिसके लिये मसीह यीशु ने मुझे अपना बधुँआ बनाया था” (पद 12)।
यीशु ने हमारी विजय सुरक्षित कर ली है। अब हमारा काम क्या है? उस सत्य को पकड़ने के लिए, परमेश्वर के सुसमाचार के उपहार को आंतरिक रूप देना और उसके साथ हमारी टूटी हुई दुनिया के बीच जीना। दूसरे शब्दों में, हमें अपने विश्वास को अपना बनाना है और ऐसा करने में जो हम पहले ही प्राप्त कर चुके हैं उस पर खरा उतरना है (पद 16)।
परमेश्वर केंद्रित
जब मैं सगाई की अंगूठियों की खरीदारी कर रहा था, तो मैंने बिल्कुल सही हीरे की तलाश में कई घंटे बिताए। मैं इस विचार से त्रस्त था, क्या होगा अगर मैं सबसे उत्तम पाने से चूक गया?
आर्थिक मनोवैज्ञानिक बैरी श्वार्ट्ज के अनुसार, मेरा ज़्यादातर अनिर्णय होना इशारा करता है कि मैं वह हूं जिसे वह "संतोषकर्ता" के विपरीत "अधिकतम" कहता है। एक संतोष करने वाला व्यक्ति इस आधार पर चुनाव करता है कि उसकी जरूरतों के लिए कुछ पर्याप्त है या नहीं। अधिकतमकर्ता? हमारी ज़रूरत हमेशा उत्तम चुनाव करने की रहती है (दोषी!)। हमारे सामने कई विकल्पों के कारण अनिर्णय का संभावित परिणाम? चिंता, अवसाद और असंतोष। वास्तव में, समाजशास्त्रियों ने इस घटना के लिए एक और वाक्यांश गढ़ा है: चूक जाने का डर।
हमें निश्चित रूप से पवित्रशास्त्र में अधिकतमकर्ता या संतोषकर्त्ता शब्द नहीं मिलेंगे। लेकिन हम इसी प्रकार का विचार ज़रूर पाते है। 1 तीमुथियुस में, पौलुस ने तीमुथियुस को चुनौती दी कि वह इस दुनिया की वस्तुओं के विपरीत परमेश्वर में मूल्य खोजें। दुनिया द्वारा पूरे होने के लिए किए गए वादे कभी भी भरपूरी से पूरे नहीं हो सकते। पौलुस चाहता था कि तीमुथियुस इसके बजाय अपनी पहचान को परमेश्वर में बढ्ने दे: "संतोष सहित भक्ति बड़ी कमाई है" (6:6)। पौलुस एक संतुष्ट व्यक्ति की तरह लगता है जब वह आगे कहता है, "यदि हमारे पास खाने और पहिनने को हो, तो इन्हीं पर संतोष करना चाहिए" (पद 8)।
जब मैं उन असंख्य तरीकों के बारे में सोचता हूं, जिन्हें दुनिया पूरा करने का वादा करती है, तो मैं आमतौर पर बेचैन और असंतुष्ट हो जाता हूं। लेकिन जब मैं परमेश्वर पर ध्यान केंद्रित करता हूं और अधिकतम करने के लिए अपने बलपूर्वक आग्रह को त्याग देता हूं, तो मेरी आत्मा वास्तविक संतोष और शांति की ओर बढ़ती है।
परमेश्वर केंद्रित
जब मैं सगाई की अंगूठियों की खरीदारी कर रहा था, तो मैंने बिल्कुल सही हीरे की तलाश में कई घंटे बिताए। मैं इस विचार से त्रस्त था, क्या होगा अगर मैं सबसे उत्तम पाने से चूक गया?
आर्थिक मनोवैज्ञानिक बैरी श्वार्ट्ज के अनुसार, मेरा ज़्यादातर अनिर्णय होना इशारा करता है कि मैं वह हूं जिसे वह "संतोषकर्ता" के विपरीत "अधिकतम" कहता है। एक संतोष करने वाला व्यक्ति इस आधार पर चुनाव करता है कि उसकी जरूरतों के लिए कुछ पर्याप्त है या नहीं। अधिकतमकर्ता? हमारी ज़रूरत हमेशा उत्तम चुनाव करने की रहती है (दोषी!)। हमारे सामने कई विकल्पों के कारण अनिर्णय का संभावित परिणाम? चिंता, अवसाद और असंतोष। वास्तव में, समाजशास्त्रियों ने इस घटना के लिए एक और वाक्यांश गढ़ा है: चूक जाने का डर।
हमें निश्चित रूप से पवित्रशास्त्र में अधिकतमकर्ता या संतोषकर्त्ता शब्द नहीं मिलेंगे। लेकिन हम इसी प्रकार का विचार ज़रूर पाते है। 1 तीमुथियुस में, पौलुस ने तीमुथियुस को चुनौती दी कि वह इस दुनिया की वस्तुओं के विपरीत परमेश्वर में मूल्य खोजें। दुनिया द्वारा पूरे होने के लिए किए गए वादे कभी भी भरपूरी से पूरे नहीं हो सकते। पौलुस चाहता था कि तीमुथियुस इसके बजाय अपनी पहचान को परमेश्वर में बढ्ने दे: "संतोष सहित भक्ति बड़ी कमाई है" (6:6)। पौलुस एक संतुष्ट व्यक्ति की तरह लगता है जब वह आगे कहता है, "यदि हमारे पास खाने और पहिनने को हो, तो इन्हीं पर संतोष करना चाहिए" (पद 8)।
जब मैं उन असंख्य तरीकों के बारे में सोचता हूं, जिन्हें दुनिया पूरा करने का वादा करती है, तो मैं आमतौर पर बेचैन और असंतुष्ट हो जाता हूं। लेकिन जब मैं परमेश्वर पर ध्यान केंद्रित करता हूं और अधिकतम करने के लिए अपने बलपूर्वक आग्रह को त्याग देता हूं, तो मेरी आत्मा वास्तविक संतोष और शांति की ओर बढ़ती है।
हमारे लिए जगह तैयार करना
हमारा परिवार एक पिल्ला लाने की योजना बना रहा था, इसलिए मेरी ग्यारह वर्ष की बेटी ने महीनों तक खोज की। वह जानती थी कि कुत्ते को क्या खाना चाहिए और उसे एक नए घर में कैसे परिचित कराना है─असंख्य अन्य विवरणों के साथ।
उसने मुझसे कहा, पिल्लों को सबसे अच्छा लगता है अगर उन्हें एक समय में एक कमरे से परिचित किया जाए। इसलिए हमने सावधानी से एक अतिरिक्त कमरा तैयार किया। मुझे यकीन है कि हमारे नए पिल्ले को पालते हुए अन्य और आश्चर्य होंगे, लेकिन मेरी बेटी की खुशी से भरी तैयारी इससे अधिक गहन नहीं हो सकती थी।
जिस तरह से मेरी बेटी ने पिल्ले की आने की उत्सुकता अपनी प्रेम भरी तैयारी करके दिखाई, उसने मुझे मसीह की अपने लोगों के साथ जीवन साझा करने की लालसा और उनके लिए एक घर तैयार करने के उनके वादे की याद दिला दी। अपनी सांसारिक सेवकाई के अंत के निकट, यीशु ने अपने चेलों से उस पर भरोसा करने का आग्रह करते हुए कहा, "तुम परमेश्वर में विश्वास करते हो; मुझ पर भी विश्वास करो" (यूहन्ना 14:1)। फिर उसने वादा किया कि “[उनके] लिए जगह तैयार करेंगे . . . कि [वे] भी वहीं हों जहां [वह है]” (पद.3)।
चेलों को जल्द ही संकट का सामना करना था। लेकिन यीशु चाहता था कि वे जानें कि वह उन्हें अपने घर लाने के लिए काम पर लगा है।
मैं और कुछ तो नहीं पर अपनी बेटी की सचेत इरादे से भर कर हमारे नए पिल्ले के लिए तैयारियों में आनंद कर सकता था। लेकिन मैं केवल कल्पना कर सकता हूं कि हमारा उद्धारकर्ता अपने प्रत्येक जन के लिए जो उसके साथ अनन्त जीवन बिताएंगे अपनी विस्तृत तैयारी में कितना अधिक प्रसन्न होगा (पद.2)।