अतार्किक भय
इसका कोई तार्किक अर्थ नहीं है, लेकिन जब मेरे माता-पिता तीन महीने की अवधि के भीतर मर गए, तो मुझे डर था कि वे मुझे भूल जाएंगे l बेशक वे अब धरती पर नहीं थे, लेकिन इसने मुझे बड़ी अनिश्चितता के साथ छोड़ दिया l मैं एक युवा, अविवाहित वयस्क थी और सोचता थी कि उनके बिना जीवन को कैसे चलाऊंगी l वास्तव में अविवाहित और अकेला महसूस करते हुए, मैंने परमेश्वर को तलाशा l
एक सुबह मैंने उसे अपने तर्कहीन भय और उसके द्वारा लाई गई उदासी के बारे में बताया (भले ही वह उसे पहले से जानता था) l उस दिन मैंने ध्यान के लिए पवित्रशास्त्र का जो पाठ पढ़ा था, वह यशायाह 49 था : “क्या यह हो सकता है कि कोई माता अपने दूधपीते बच्चे को भूल जाए . . . ? हाँ, वह तो भूल सकती है, परन्तु मैं तुझे नहीं भूल सकता” (पद.15) l परमेश्वर ने यशायाह के द्वारा अपने लोगों को आश्वस्त किया कि वह उन्हें नहीं भूला है और बाद वह अपने पुत्र यीशु को भेजने के द्वारा उन्हें अपने पास पुनर्स्थापित करने का वचन दिया l लेकिन ये शब्द मेरे दिल को भी भा गए l माता या पिता के लिए अपने बच्चे को भूलना दुर्लभ है, फिर भी यह संभव है l लेकिन परमेश्वर? बिल्कुल नहीं l “मैंने तेरा चित्र अपनी हथेलियों पर खोदकर बनाया है,” उसने कहा l
मेरे लिए परमेश्वर का जवाब अधिक भय ला सकता था l लेकिन उसने खुद मुझे याद किया जिससे मुझे शांति मिली, और वह वही था जिसकी मुझे जरूरत थी l यह इस खोज की शुरुआत थी कि परमेश्वर किसी माता-पिता या किसी और से भी अधिक निकट है, और वह हमें हर चीज से मदद करने का तरीका जानता है - यहां तक कि हमारे अतार्किक भय भी l
खुबसूरत इनाम
अमेरिका में एक शिक्षक डोनेलन, हमेशा एक पाठक(Reader) थी, लेकिन एक दिन इसका पूरा लाभ मिला l वह अपनी लंबी बीमा पॉलिसी की समीक्षा कर रही थी जब पृष्ठ 7 पर उसे एक अद्भुत इनाम मिला l उनके “It Pays to Read(पढ़ने से मिलता है)” प्रतियोगिता के हिस्से के रूप में, कंपनी पहले व्यक्ति को उस अनुबंध को इतनी दूर तक पढ़ने के लिए $ 10,000 (लगभग 72 लाख) दे रही थी l उन्होंने बच्चों की साक्षरता के लिए उसके क्षेत्र के स्कूलों को हजारों डॉलर का दान दिया l वह कहती है, “मैं हमेशा वह व्यक्ति रही हूं जो अनुबंध(contract) पढ़ती है l मैं सबसे ज्यादा किसी के बाबत हैरान थी!”
भजनकार चाहता था कि उसकी आँखें परमेश्वर के बारे में “अद्भुत बातें” देखने के लिए खुल जाएँ (भजन 119:18) l उसके पास एक समझ ज़रूर थी कि परमेश्वर चाहता है कि वह जाना जाए, और इसलिए वह उसके(परमेश्वर) साथ गहरी निकटता की चाह रखता था l उसकी इच्छा यह देखने की अधिक थी कि परमेश्वर कौन है, उसने पहले से क्या दिया है, और उसका अनुसरण और अधिक निकटता से कैसे करें (पद.24,98) l उसने लिखा, "आहा! मैं तेरी व्यवस्था से कैसी प्रीति रखता हूँ” (पद.97) l
हमारे पास भी परमेश्वर, उसके चरित्र और उसके प्रावधानों के बारे में विचार करने और उसके बारे में जानने के लिए समय निकालने का विशेषाधिकार है – उसके विषय में जानना और उसके निकटता में उन्नति करना l परमेश्वर चाहता है कि वह हमें निर्देश दे, मार्गदर्शित करे, और वह कौन है के प्रति हमारे हृदयों को खोल दे l जब हम उसे खोजते हैं, तो वह हमें अधिक आश्चर्यचकित करता है कि वह कौन है और उसकी उपस्थिति का आनंद क्या है!
दयालुता का आदमी
निराश और अधिक सार्थक जीवन चाहते हुए, लिओन ने वित्त(finance) में अपनी नौकरी छोड़ दी l फिर एक दिन उसने एक बेघर आदमी को एक गली के कोने पर इस चिन्ह को पकडे हुए देखा : “दयालुता सबसे अच्छी औषधि है(KINDNESS IS THE BEST MEDICINE) l” लियोन कहते हैं, “वे शब्द सीधे मेरे अन्दर धुस गए l” यह एक दिव्य प्रकाशन था l
लियोन ने दयालुता को बढ़ावा देने के लिए एक अन्तराष्ट्रीय संगठन बनाकर अपना नया जीवन शुरू करने का फैसला किया l वह दुनिया भर में यात्रा करता है, अजनबियों पर भरोसा करते हुए उन्हें भोजन, गैस और रहने के लिए जगह का प्रबंध करता है l फिर वह अपने संगठन के माध्यम से उन्हें पुरस्कार देता है, अच्छे कार्यों जैसे कि अनाथ बच्चों को खिलाने के लिए या सुविधा से वंचित स्कूल में निर्माण करने के लिए l वे कहते हैं, “यह कभी-कभी नरमदिल होना दिखाई देता है l लेकिन दया एक गंभीर ताकत है l”
परमेश्वर के रूप में मसीह भलाई, इसलिए दया स्वभाविक रूप से उससे बहती है l जब यीशु ने एक विधवा के इकलौते बेटे के अंतिम संस्कार के जुलुस में जो किया (लूका 7:11-17) वह कहानी मुझे बहुत पसंद है l दुखी महिला आर्थिक सहायता के लिए संभवतः अपने बेटे पर निर्भर थी l हम उस कहानी में नहीं पढ़ते कि किसी ने यीशु को हस्तक्षेप करने के लिए कहा था l विशुद्ध रूप से अपने स्वभाव की भलाई से (पद.13), वह चिंतित हुआ और उसके बेटे को पुनः जीवन दान दिया l लोगों ने मसीह के बारे में कहा, “परमेश्वर ने अपने लोगों पर कृपादृष्टि की है” (पद.16) l
स्वर्ग के दृष्टिकोण
जब 1970 के दशक में पीटर वेल्च एक युवा लड़का था, तो मेटल डिटेक्टर का उपयोग केवल एक शौक था l लेकिन 1990 के बाद से, वह मेटल डिटेक्टिंग अभियान पर दुनिया भर के लोगों का नेतृत्व कर रहा है l उन्होंने हज़ारों खोजें की हैं – तलवारें, प्राचीन गहने, सिक्के l “गूगल अर्थ,” एक कंप्यूटर प्रोग्राम जो उपग्रह इमेजरी(चित्र) पर आधारित है का उपयोग करते हुए, वे यूनाइटेड किंगडम में खेतों के भूदृश्य में आकृतियों(patterns) की तलाश करते हैं l यह उन्हें दिखाता है कि सदियों पहले कहाँ पर सड़कें, इमारतें और अन्य संरचनाएं थीं l पीटर कहते हैं, “ऊपर से एक परिप्रेक्ष्य में एक पूरी नयी दुनिया खुलती है l”
यशायाह के दिनों में परमेश्वर के लोगों को “ऊपर से एक परिप्रेक्ष्य” की आवश्यकता थी l वे उसके लोग होने पर गर्व करते थे, फिर भी वे अवज्ञाकारी थे और अपने मूर्तियों को त्यागने से इनकार के दिए l परमेश्वर के पास एक और दृष्टिकोण था l उनके विद्रोह के बावजूद, वह उन्हें बाबुल के दासत्व से छुड़ाने वाला था l क्यों? “अपने निमित्त . . . अपनी महिमा मैं दूसरे को नहीं दूंगा” (यशायाह 48:11) l ऊपर से परमेश्वर का दृष्टिकोण है कि जीवन उसकी महिमा और उद्देश्य के लिए है – हमारा नहीं l हमारा ध्यान उस पर और उसकी योजनाओं पर होना चाहिये और दूसरों को भी बताएँ कि वे भी उसकी प्रशंसा करें l
हमारे अपने जीवन के परिप्रेक्ष्य के रूप में परमेश्वर की महिमा एक पूरी नयी दुनिया को खोलता है l केवल वह जानता है कि हम उसके बारे में क्या खोज करेंगे और वह हमारे लिए क्या है l परमेश्वर हमें सिखाएगा कि हमारे लिए अच्छा क्या है और हमें उन रास्तों पर चलाएगा जिनका हमें अनुसरण करना चाहिये (पद.17) l
खुली बाहें
सैम्युएल और उसके परिवार के पास “खुली बाहें और खुला घर” वाला दर्शन है। उसका कहना है कि उसके घर में हमेशा लोगों का स्वागत है, “विशेषकर जो लोग परेशानी में हैं।” लाइबीरिया में अपने नौ भाई बहनों के साथ उसके पास इसी प्रकार का घर था जहां उसका पालन पोषण हुआ था। उसके माता-पिता ने हमेशा अपने परिवार में दूसरों का स्वागत किया। वह कहता है, “हम एक समुदाय के रूप में बड़े हुए हैं। हम एक दूसरे से प्यार करते थे। सभी लोग सभी के लिए जिम्मेदार थे। मेरे पिता ने हमें एक दूसरे से प्यार करना, एक दूसरे की देखभाल करना, एक दूसरे की सुरक्षा करना सिखाया।”
जब राजा दाऊद ज़रूरत में था, तब उसने परमेश्वर में इसी प्रकार की देखभाल को प्राप्त किया। 2 शमूएल 22 (और भजन 18) उन्हीं तरीकों के लिए परमेश्वर के लिए अपनी प्रशंसा के गीत रिकॉर्ड करता है जैसे वह उसके सम्पूर्ण जीवन में उसका शरणस्थान रहा था। उसने याद किया, “अपने संकट में मैं ने यहोवा को पुकारा, और अपने परमेश्वर के सम्मुख चिल्लाया। उसने मेरी बात को अपने मंदिर में से सुन लिया, और मेरी दोहाई उसके कानों में पहुँची” (2 शमूएल 22:7) l परमेश्वर ने अनेक बार, उसे राजा शाऊल समेत, उसके शत्रुओं से छुड़ाया था। उसने परमेश्वर को उसका गढ़ और छुटकारा देनेवाला होने के लिए उसकी प्रशंसा की जिसमें उसने शरण लिया था (पद.2-3) l
जबकि हमारी परेशानियां दाऊद की तुलना में छोटी हो सकती हैं, परमेश्वर चाहता है कि हम उसकी ओर दौड़ कर उस आश्रय को प्राप्त करें जिसकी हम इच्छा करते हैं l उसकी बाहें हमेशा खुली हैं l इसलिए हम “[तेरे] नाम का भजन [गाते हैं]” (पद.50) l
देखभाल
गृह सफाई सेवा की मालकिन, डेबी, निरंतर अपने व्यवसाय को बढ़ाने के लिए अधिक ग्राहकों की तलाश करती रहती है l एक बुलावे पर उसने एक महिला से बात की जिसका जबाब था, “मैं अभी इतना कैंसर का रोगी वंचित नहीं होगा l उन्हें मुफ्त गृह सफाई सेवा दी जाएगी l” इसलिए 2005 में उसने एक गैपैसा नहीं दे पाऊंगी; मैं कैंसर का इलाज ले रही हूँ l” उसी समय डेबी ने फैसला किया कि “कोई भी र-लाभकारी संस्था शुरू किया, जहां कंपनियों ने कैंसर से जूझ रही महिलाओं को अपनी सफाई सेवाएँ उपहार स्वरुप प्रदान की l ऐसी ही एक महिला ने तीव्र भरोसा महसूस की जब वह एक साफ़ घर में लौटी l उसने कहा, “पहली बार, मुझे वास्तव में विश्वास था कि मैं कैंसर को हरा सकती थी l”
जब हम चुनौती का सामना कर रहे होते हैं, तो देखभाल और समर्थन की भावना हमें बनाए रखने में मदद कर सकती है l परमेश्वर की उपस्थिति और समर्थन के बारे में जागरूकता विशेष रूप से हमारी भावना को प्रोत्साहित करने के लिए आशा ला सकती है l भजन 46, जो परीक्षाओं के बीच से गुज़र रहे लोगों का पसंदीदा भजन है हमें याद दिलाता है : “परमेश्वर हमारा शरणस्थान और बल है, संकट में अति सहज से मिलनेवाला सहायक l चुप हो जाओ, और जान लो कि मैं ही परमेश्वर हूँ . . . मैं पृथ्वी भर में महान् हूँ l सेनाओं का यहोवा हमारे संग है” (पद.1,10-11) l
अपने आप को परमेश्वर के वादों की याद दिलाना और हमारे साथ उसकी उपस्थिति हमारे दिलों को नवीनीकृत करने में मदद करने का एक साधन हो सकती है और हमें कठिन समय में जाने का साहस और आत्मविश्वास प्रदान कर सकती है l
पूर्ण संतोष
आप जानते होंगे कि यह कैसा है l एक चिकित्सा प्रक्रिया के बाद बिल आते रहते हैं – निश्चेतक से, शल्यचिकित्सक से, लैब से, चिकित्सालय से l रोहन ने आपातकालीन सर्जरी के बाद इसका अनुभव किया l उसने शिकायत की, “हम बीमा के बाद हज़ारों रुपयों के देनदार होते हैं l यदि केवल हम इन बिलों का भुगतान कर सकते हैं, तो जीवन अच्छा होगा और मुझे संतोष होगा! फिलहाल, मुझे ऐसा लग रहा है कि बेतरतीब क्रिकेट की गेंदों से मुझ पर प्रहार हो रहा है, जिसके कारण मुझे पार्क से बाहर जाना पड़ता है l
जीवन उसी प्रकार कभी-कभी हमारे पास आता है l प्रेरित पौलुस निश्चित रूप से हमदर्दी रख सकता था l उसने कहा, “मैं दीन होना भी जानता हूँ,” फिर भी उसने “सब दशाओं में . . तृप्त होना” सीख लिया था (फिलिप्पियों 4:12) l उसका रहस्य? जो मुझे सामर्थ्य देता है उसमें मैं सब कुछ कर सकता हूँ” (पद.13) l जब मैं ख़ास तौर पर असंतुष्ट समय से निकल रहा था, तो मैं एक बधाई पत्र पर इसे पढ़ा : “यदि यह यहाँ नहीं है, तो यह कहाँ है?” यह एक शक्तिशाली अनुस्मारक था कि अगर मैं यहाँ और अभी संतुष्ट नहीं हूँ, तो कौन सी बात मुझे सोचने को विवश करती है कि यदि मैं किसी दूसरी स्थिति में होता तो मैं संतुष्ट होता?
हम यीशु में संतुष्ट होना कैसे सीखते हैं? शायद यह ध्यान देने की बात है l आनंद और अच्छे के लिए आभारी होने के विषय l एक वफादार पिता के बारे में अधिक जानने के लिए l विश्वास और धैर्य में बढ़ने में l यह पहचानने में कि जीवन परमेश्वर के बारे में है और मेरे बारे में नहीं है l उसमें निहित संतुष्टता मुझे सिखाने का आग्रह करना l
अपनापन का स्थान
अपने पहले जीवनसाथी के दुखद मृत्यु के कुछ साल बाद, राहुल और समीरा ने शादी कर ली और अपने दोनों परिवारों को मिला लिया l उन्होंने एक नया घर बनाया और उसका नाम हविला रखा (एक इब्री शब्द जिसका अर्थ है “दर्द में छटपटाना” और “उत्पन्न करना”) l यह दर्द के द्वारा कुछ सुन्दर बनाने का संकेत देता है l इस दंपति का कहना है कि उन्होंने अपने अतीत को भूलने के लिए घर नहीं बनाया, लेकिन “राख से जीवन उत्पन्न करने के लिए, आशा का उत्सव मनाने के लिए l” उनके लिए, “यह अपनापन का स्थान है, जीवन को मनाने की जगह है और जहाँ हम सभी भविष्य के वादे से जुड़ते हैं l”
यह यीशु में हमारे जीवन की एक सुन्दर तस्वीर है l वह हमारे जीवनों को राख से बाहर निकालता है और हमारे लिए अपनापन का स्थान बन जाता है l जब हम उसे ग्रहण करते हैं, तो वह हमारे दिलों में अपना घर बनाता है (इफिसियों 3:17) l परमेश्वर हमें यीशु के द्वारा अपने परिवार में अपनाता है ताकि हम उससे सम्बद्ध हो जाएँ (1:5-6) l यद्यपि हम पीड़ादायक समय से गुज़रते हैं, वह हमारे जीवनों में अच्छे उद्देश्यों को लाने के लिए भी उपयोग करता है l
हमारे पास प्रतिदिन परमेश्वर की समझ में बढ़ने का अवसर है जब हम उसके प्रेम का आनंद लेते हैं और उसके प्रावधानों का आनंद लेते हैं l उसी में, जीवन की पूर्णता है जिसे हमें उसके बिना (3:19) नहीं मिल सकती थी l और हमारे पास उसका वादा है कि यह सम्बन्ध हमेशा के लिए रहेगा l यीशु हमारा अपनापन का स्थान है, हमारे जीवन का उत्सव मनाने का कारण है, और हमेशा के लिए हमारी आशा l
एकमात्र राजा
जब पांच वर्षीय एलिजा अपने पास्टर से यीशु के स्वर्ग छोड़ने और पृथ्वी पर आने के विषय सुन रहा था, उसने गहरी साँस ली जब पास्टर ने प्रार्थना में उसे हमारे पापों के लिए मारे जाने के लिए धन्यवाद दिया l “अरे! वह मर गया?” लड़का चकित होकर बोला l
पृथ्वी पर मसीह के जीवन के आरम्भ से ही, ऐसे लोग थे जो उसे मृत चाहते थे l राजा हेरोदेस के राज्य में बुद्धिमान लोग यरूशलेम आकर पूछने लगे, “यहूदियों का राजा जिसका जन्म हुआ है, कहाँ है? क्योकि हमने पूर्व में उसका तारा देखा है और उसको प्रणाम करने आए हैं” (मत्ती 2:2) l राजा यह सुनकर भयभीत हुआ कि एक दिन वह यीशु के हाथों अपना पद खो देगा l इसलिए उसने बैतलहम के आसपास के सभी लड़कों को जो दो साल और उससे छोटे थे को मारने के लिए सैनिक भेजे l लेकिन परमेश्वर ने अपने पुत्र की रक्षा की और एक स्वर्गदूत भेजकर उसके माता-पिता को वह क्षेत्र छोड़ने के लिए चेतावनी दी l वे वहाँ से चले गए, और वह बचा लिया गया (पद.13-18) l
जब यीशु ने अपनी सेवा पूरी की, उसे संसार के पापों के लिए क्रूस पर चढ़ाया गया l उसके क्रूस पर लगाए गए संकेत पर लिखा था, “यह यहूदियों का राजा यीशु है” यद्यपि मजाक था l फिर भी तीन दिनों के बाद वह कब्र से जी उठकर विजयी हुआ l स्वर्गारोहण के बाद, वह राजाओं का राजा और प्रभुओं का प्रभु होकर सिंहासन पर बैठ गया (फिलिप्पियों 2:8-11) l
हमारा राजा – तुम्हारे, मेरे, और एलिजा के पापों के लिए मरा l उसे अपने हृदयों में राज्य करने दें l