परमेश्वर से गिड़गिड़ाना
एक सुबह एक परिवार की प्रार्थना का समय एक आश्चर्यजनक घोषणा के साथ समाप्त हुआ l जैसे ही पिताजी ने कहा, “आमीन,” पाँच वर्षीय कवि ने प्रगट की, “और मैंने जॉन के लिए प्रार्थना की, क्योंकि प्रार्थना के दौरान उसकी आँखें खुली थीं l”
मुझे पूरा यकीन है कि आपके दस वर्षीय भाई के प्रार्थना औचित्य(protocol) के लिए प्रार्थना करना हमारे लिए पवित्रशास्त्र का लक्ष्य नहीं है, जब यह हमें परहित प्रार्थना करने के लिए कहता है, लेकिन कम से कम कवि को एहसास हुआ कि हम दूसरों के लिए प्रार्थना कर सकते हैं l
बाइबल शिक्षक ऑसवॉलल्ड चेम्बर्स ने किसी और के लिए प्रार्थना करने के महत्व पर जोर दिया l उन्होंने कहा कि “मध्यस्थता की प्रार्थना अपने आप को परमेश्वर के स्थान पर रखना है; यह आपके भीतर उसका मन और दृष्टिकोण का होना है l” यह उस प्रकाश में दूसरों के लिए प्रार्थना करना है कि हम परमेश्वर के विषय और हमारे लिए उसके प्रेम के बारे में क्या जानते हैं l
हम दानिय्येल 9 में मध्यस्थता की प्रार्थना का एक बड़ा उदाहरण पाते हैं l नबी ने परमेश्वर के परेशान करने वाले वादे को समझ लिया कि यहूदी बेबीलोन में सत्तर साल के दासत्व में रहेंगे (यिर्मयाह 25:11-12) l यह महसूस करते हुए कि वे वर्ष पूरा होने के करीब थे, दानिय्येल प्रार्थना के भाव में चला गया l उसने परमेश्वर की आज्ञाओं का हवाला दिया (दानिय्येल 9:4-6), खुद को दीन किया (पद.8), परमेश्वर के चरित्र को आदर दिया (पद.9), पाप स्वीकार किया (पद.15), और उसकी दया पर निर्भर हुआ जब वह अपने लोगों के लिए प्रार्थना करता था (पद.18) l और उसे परमेश्वर का तत्काल उत्तर मिला (पद.21) l
इस तरह की नाटकीय प्रतिक्रिया के साथ सभी प्रार्थनाएं समाप्त नहीं होती हैं, लेकिन हम इस बात के लिए प्रोत्साहित हो सकते हैं कि हम दूसरों के लिए परमेश्वर पर विश्वास और निर्भरता के साथ जा सकते हैं l
दृढ़ता से थामे रहें
हैरियट टबमैन उन्नीसवीं सदी के महान अमेरिकी नायकों में से एक थी l जब वह उत्तर संयुक्त राज्य अमेरिका के मुक्त क्षेत्र में प्रवेश करके दासता से बच गई l उल्लेखनीय साहस दिखाते हुए, उसने तीन सौ से अधिक साथी गुलामों को स्वतंत्रता के लिए राह दिखाया केवल अपनी स्वतंत्रता का आनंद लेने से असंतुष्ट, उसने मित्रों, परिजनों, और अजनबियों को स्वतंत्रता के लिए नेतृत्व करने के लिए दास राज्यों में उन्नीस बार लौटने की जोखिम उठाई, कभी-कभी तो कनाडा तक लोंगों को पैदल राह दिखाई l
टबमैन को ऐसी बहादुर कार्य के लिए किसने प्रेरित किया? एक गहरा विश्वास वाली महिला, उसने एक समय यह कहा था : “मैंने हमेशा परमेश्वर से कहा, मैं आपको थामे रहूंगी, और आपको मुझे देखना होगा l” जब वह लोगों को गुलामी से बाहर निकालती थी परमेश्वर के मार्गदर्शन पर उसकी निर्भरता उसकी सफलता की एक बानगी(hallmark) थी l
परमेश्वर को “दृढ़ता से थामने” का क्या अर्थ है? यशायाह की भविष्यवाणी में एक पद हमें यह देखने में मदद कर सकता है कि वास्तव में यह वही है जो हमें अपने हाथों से थाम लेता है l यशायाह ने परमेश्वर को उद्धृत किया, जिसने कहा, “मैं तेरा परमेश्वर यहोवा, तेरा दाहिना हाथ पकड़कर कहूँगा, ‘मत डर, मैं तेरी सहायता करूंगा’” (41:13) l
हेरियट ने परमेश्वर को दृढ़ता से पकड़ रखा था, और उसने उसे पार पहुँचाया l आप किन चुनौतियों का सामना कर रहे हैं? जब वह आपके हाथ और आपके जीवन को “थाम” लेता है परमेश्वर को दृढ़ता से थामे रहेंl “मत डर” वह आपकी मदद करेगा l
सभी सड़कें?
“राजमार्ग पर नहीं जाइएगा!” ये शब्द मेरी बेटी के थे जब मैं काम से लौटने पर था l राजमार्ग प्रत्यक्ष रूप से पार्किंग स्थल बन चूका था l मैंने वैकल्पिक मार्गों की कोशिश शुरू कर दी, दूसरी सड़कों पर रूकावट का अनुभव करने के बाद, मैंने हार मान ली l इस कारण मैं विपरीत दिशा में एक एथलेटिक प्रतियोगिता में गया जिसमें मेरी नातिनी भाग ले रही थी l
यह जानकार कि कोई भी सड़क मुझे घर नहीं ले जाएगी, मैं ऐसे लोगों के बारे में सोचने को विवश हुआ जो कहते हैं कि सभी सड़कें परमेश्वर के साथ एक शाश्वत संबंध बनाने में अगुवाई करती हैं l कुछ का मानना है कि दयालुता और अच्छे व्यवहार का मार्ग आपको वहां पहुंचाएगा l दूसरे लोग धार्मिक काम करने की राह चुनते हैं l
उन सड़कों पर भरोसा करना, हालांकि, एक बंद गली की ओर जाता है l परमेश्वर की शाश्वत उपस्थिति तक ले जाने वाली केवल एक सड़क है l यीशु ने इसे स्पष्ट किया जब उसने कहा, “मार्ग और सत्य और जीवन मैं ही हूँ; बिना मेरे द्वारा कोई पिता के पास नहीं पहुँच सकता” (यूहन्ना 14:6) l वह प्रकट कर रहा था कि वह हमारे लिए मृत्यु सहने जा रहा था कि पिता के घर में प्रवेश का मार्ग प्रशस्त करें – उसकी उपस्थिति तक और वर्तमान और अनंत काल तक के लिए वास्तविक जीवन l
उन अवरुद्ध राजमार्गों को छोड़ दें जो परमेश्वर की उपस्थिति तक नहीं ले जाते हैं l इसके बजाय, यीशु पर उद्धारकर्ता के रूप में विश्वास करें, क्योंकि “जो पुत्र पर विश्वास करता है, अनंत जीवन उसका है” (3:36) l और जो लोग पहले से ही उस पर विश्वास करते हैं, उस मार्ग में विश्राम करें जिसका उसने प्रबंध किया है l
बच्चे को क्या नाम दिया जाए
यहाँ एक वार्तालाप है जो मरियम को युसूफ के साथ करने की आवश्यकता नहीं थी जब वे उस बच्चे के जन्म की प्रतीक्षा कर रहे थे जिससे वह गर्भवती थी : “युसूफ, हमें बच्चे का नाम क्या रखना चाहिए?” एक जन्म का इंतजार करने वाले अधिकांश लोगों के विपरीत, उनके पास इस बारे में कोई सवाल नहीं था कि वे इस बच्चे को किस नाम से पुकारेंगे l
जो स्वर्गदूत मरियम से और फिर यूसुफ से मिले उन्होंने दोनों को बताया कि बच्चे का नाम यीशु होगा (मत्ती 1: 20–21; ल्यूक 1: 30–31) । युसूफ को दिखाई देनेवाले स्वर्गदूत ने बताया कि यह नाम संकेत करता है कि बालक “अपने लोगों का उनके पापों से उद्धार करेगा l”
उसे “इम्मानुएल” भी पुकारा जाएगा (यशायाह 7:14), जिसका अर्थ है "परमेश्वर हमारे साथ,” क्योंकि वह मानव रूप में ईश्वर होगा – खुदा जो कपड़े में लिपटा हुआ है l नबी यशायाह ने अन्य नामों को प्रगट किया “अद्भुत युक्ति करनेवाला, पराक्रमी परमेश्वर, अनंतकाल का पिता, और शांति का राजकुमार” (9:6), क्योंकि वह सब होगा l
एक नए बच्चे को नाम देना हमेशा रोमांचक होता है l लेकिन किसी अन्य बच्चे का इतना शक्तिशाली, रोमांचक, विश्व-परिवर्तन करने वाला नाम नहीं था जैसा कि "यीशु जिसे मसीहा/Messiah कहा जाता है" (मत्ती 1:16) । हमारे लिए प्रभु यीशु मसीह के नाम को पुकारना” कितना रोमांचक है (1 कुरिन्थियों 1:2)! कोई अन्य नाम नहीं है जो बचाता है (प्रेरितों 4:12) l
आइए यीशु की प्रशंसा करें और सब कुछ पर चिंतन करें जो वह हमारे लिए इस क्रिसमस के मौसम में अर्थ रखता है!
अपनी भूमिका निभाना
जब मेरी दो पोतियों ने एलिस इन वंडरलैंड जूनियर में भूमिका के लिए कोशिश की जो कि बच्चों की एक अग्रेजी पुस्तक पर आधारित है, तो उनके मन में था कि उन्हें अग्रणी भूमिका मिल जाए l लेकिन उन्हें फूल बनने के लिए चुना गया था । पूरी तरह से बड़ी भूमिका नहीं l
फिर भी मेरी बेटी ने कहा कि वे अपने दोस्तों के लिए उत्साहित थीं जिन्हें [प्रमुख भूमिकाएँ] मिलीं । उनका आनंद उनके दोस्तों के लिए अधिक उत्साहजनक और उनके उत्साह में साझेदारी थी ।”
मसीह के शरीर में हमारी एक-दूसरे के साथ बातचीत कैसी होनी चाहिए, इसकी एक बेहतरीन तस्वीर! प्रत्येक स्थानीय चर्च के पास वह है जिन्हें प्रमुख भूमिकाएं मानी जा सकती हैं । लेकिन इसमें फूलों की भी जरूरत होती है - जो महत्वपूर्ण कार्य करते हैं लेकिन उच्च-प्रोफ़ाइल कार्य नहीं करते हैं । यदि दूसरों को वे भूमिकाएँ मिलती हैं जो हमारी इच्छा थी, तो हम उन्हें प्रोत्साहित करने का विकल्प चुन सकते हैं, जब हम ईश्वर द्वारा हमें दी गई भूमिकाओं को पूरी लगन से पूरा करते हैं ।
वास्तव में, दूसरों की मदद करना और उन्हें प्रोत्साहित करना उसके(यीशु) लिए प्यार दिखाने का एक तरीका है । इब्रानियों 6:10 कहता है, “परमेश्वर अन्यायी नहीं कि तुम्हारे काम और उस प्रेम को भूल जाए, जो तुम ने उसके नाम के लिए इस रीति से दिखाया, कि पवित्र लोगों की सेवा की l” और उनके हाथ से कोई उपहार महत्वहीन नहीं है : “जिसको जो वरदान मिला है, वह उसे परमेश्वर के नाना प्रकार के अनुग्रह के भले भंडारियों के समान एक दूसरे की सेवा में लगाए” (1 पतरस 4:10) ।
महज एक प्रोत्साहित करनेवाली कलीसिया की कल्पना करें जो अपने ईश्वर प्रदत्त उपहारों को परिश्रम के साथ उसके सम्मान के लिए उपयोग करती है (इब्रानियों 6:10) l अब यह खुशी और उत्साह का सृजक है l
प्रचार करना या हल जोतना
परिवार की दंतकथा के अनुसार, दो भाई, एक का नाम बिली और दूसरा मेल्विन एक दिन परिवार के डेयरी फार्म में खड़े थे, जब उन्होंने एक हवाई जहाज को कुछ धूम्र लेख(sky writing) करते देखा । लड़कों ने देखा कि विमान ने ऊपर “GP” अक्षर लिख दिया l
दोनों भाइयों ने फैसला किया कि उन्होंने जो देखा, वह उनके लिए मायने रखता था । एक ने सोचा कि इसका मतलब है “(जाओ प्रचार करो Go Preach l” दूसरे ने इसे “जाओ हल चलाओ Go Plow” पढ़ा l बाद में, लड़कों में से एक बिली ग्राहम ने सुसमाचार प्रचार के लिए खुद को समर्पित किया, जो सुसमाचार प्रचार का प्रतीक बन गया । उनके भाई मेल्विन ने कई वर्षों तक परिवार के डेयरी फार्म को ईमानदारी से चलाया ।
स्काई राइटिंग एक ओर संकेत करता है, अगर परमेश्वर ने बिली को उपदेश देने के लिए बुलाया और मेल्विन को हल चलाने के लिए, जैसी कि स्थिति लगती है, वे दोनों ने अपने कार्यों के द्वारा परमेश्वर को सम्मानित किया । जबकि बिली का लंबे समय तक प्रचार रहा, उनकी सफलता का मतलब यह नहीं है कि उनके भाई को हल चलाने के लिए बुलाने की आज्ञा का पालन करना कम महत्वपूर्ण था ।
जब कि परमेश्वर कुछ को उस सेवा में बुलाता है जिसे हम पूर्ण-कालिक सेवा (इफिसियों 4:11-12) कहते हैं, तो इसका मतलब यह नहीं है कि अन्य नौकरियों और भूमिकाओं में जो हैं वह महत्वपूर्ण नहीं कर रहे हैं l दोनों ही मामलों में, जैसा कि पौलुस ने कहा, “हर एक अंग के ठीक-ठीक कार्य करने” की ज़रूरत है” (पद.16) l इसका मतलब है कि यीशु द्वारा हमें दिए गए उपहारों का ईमानदारी से उपयोग करके उसका सम्मान करना l जब हम ऐसा करते हैं, चाहे हम "प्रचार करते हैं" या "हल चलाते हैं,” तो हम यीशु के लिए जहाँ हम सेवा करते हैं या काम करते हैं, वहाँ परिवर्तन ला सकते हैं ।
अभी, फिर अगला
मैं हाल ही में एक कॉलेज के दीक्षान्त में भाग लिया, जिसके दौरान वक्ता ने अपनी स्नातक डिग्री की प्रतीक्षा कर रहे युवा वयस्कों के लिए एक आवश्यक चुनौती प्रदान की l उन्होंने उल्लेख किया कि यह उनके जीवन का एक समय है जब हर कोई उनसे पूछ रहा है, “आगे क्या है?” वे आगे किस कैरियर/जीविका का पीछा करेंगे? वे आगे पढ़ाई कहाँ करेंगे या भविष्य में काम कहाँ करेंगे? तब उन्होंने कहा कि अधिक महत्वपूर्ण सवाल यह था कि वे अभी क्या कर रहे थे?
अपनी विश्वास यात्रा के संदर्भ में, वे कौन से दैनिक निर्णय ले रहे होंगे जो उन्हें यीशु के लिए जीने के लिए मार्गदर्शन करेंगे और खुद के लिए नहीं?
उनके शब्दों ने मुझे नीतिवचन की किताब की याद दिला दी, जो बताती है कि अब कैसे जीना है l उदाहरण के लिए : वर्तमान में, ईमानदारी का अभ्यास(11:1); वर्तमान में, सही मित्रों का चयन (12:26); वर्तमान में, ईमानदारी से जीना(13:6); वर्तमान में, अच्छा निर्णय लेना(13:15); वर्तमान में, समझदारी से बोलना(14: 3) l
वर्तमान में परमेश्वर के लिए पवित्र आत्मा की अगुवाई में जीना, आगे के लिए निर्णय लेना सरल बना देता है l “बुद्धि यहोवा ही देता है; . . . वह सीधे लोगों के लिए खरी बुद्धि रख छोड़ता है . . . जो खराई से चलते हैं, उनके लिए वह ढाल ठहरता है . . . और अपने भक्तों के मार्ग की रक्षा करता है” (2:6-8) l परमेश्वर वर्तमान में उसके दिशानिर्देशों के अनुकूल जीवन जीने के लिए हमारे ज़रूरतों का प्रबंध करे, और आगे उसके आदर के लिए क्या है में हमारा मार्गदर्शन करें l
स्व-जांच
हाल ही में मैंने द्वितीय विश्व-युद्ध के पत्रों के ढेर में से पढ़ा, जो मेरे पिताजी ने मेरी माँ को भेजे थे l वह उत्तरी अफ्रीका में थे और वह अमेरिका में थी l पिताजी, जो अमेरिकी सेना में सेकेण्ड लेफ्टिनेंट थे, को सैनिकों की चिट्ठियों को जांचने का काम सौंपा गया था - दुश्मन की आँखों से संवेदनशील जानकारी गुप्त रखते हुए l इसलिए यह देखना मज़ेदार था - अपनी पत्नी को लिखे पत्रों के बाहर - एक मोहर लगा होता था जिसमें लिखा होता था, “2nd लेफ्टिनेंट जॉन ब्रैन (मेरे पिता का नाम) द्वारा सेंसर/निरीक्षण किया हुआ l” वास्तव में, उन्होंने अपने पत्रों से लाइनें काट दी थीं!
स्व-जाँच(Self-censoring) वास्तव में हम सभी के लिए एक अच्छा विचार है l पवित्रशास्त्र में कई बार, लेखक यह जानने के लिए कि क्या सही नहीं है, जिससे परमेश्वर को सम्मान नहीं मिल रहा है, खुद पर एक अच्छा नज़र रखने के महत्व का उल्लेख करता है l उदाहरण के लिए, भजनकार ने प्रार्थना की, “मुझे जांच कर जान ले . . . और देख कि मुझ में कोई बुरी चाल है कि नहीं” (भजन :23-24) l देखें कि क्या मुझमें कोई अपमानजनक मार्ग है ”(भजन 139:23–24) l यिर्मयाह ने इसे इस तरह लिखा : “हम अपने चालचलन को ध्यान से परखें, और यहोवा की ओर फिरें” (विलापगीत 3:23) l और पौलुस ने प्रभु भोज के समय हमारे हृदयों की स्थिति के विषय लिखते हुए, कहा, “मनुष्य अपने आप को जांच ले” (1 कुरिन्थियों 11:28) l
पवित्र आत्मा हमें किसी भी दृष्टिकोण या कार्यों से फिरने में मदद कर सकता है जो परमेश्वर को खुश नहीं करते हैं l इससे पहले कि हम आज दुनिया में प्रवेश करें, आइये हम रुकें और स्व-जाँच करने के लिए आत्मा की मदद प्राप्त करें ताकि हम उसके साथ संगति में “प्रभु के पास लौट सकें l”
जब वैभव चला जाए
मैं उस वैभव को फिर से प्राप्त नहीं कर सकता जो हमारी बेटी मेल्लिसा थी l मेरी स्मरण से लुप्त होता वह अद्भुत समय हैं जब हमने उसे ख़ुशी से हाई स्कूल वॉलीबॉल खेलते देखा था l और कभी-कभी संतुष्टता की संकोची मुस्कराहट जो उसके चेहरे पर होती थी जब हम पारिवारिक गतिविधियाँ करते थे को कभी-कभी स्मरण करना कठिन है l सत्रह साल की उम्र में उसकी मृत्यु ने उसकी उपस्थिति की ख़ुशी पर एक पर्दा डाल दिया l
विलापगीत की किताब में, यिर्मयाह के शब्द दर्शाते हैं कि उसने समझ लिया था कि हृदय भी बेधा जा सकता है l “मेरा सुख समाप्त हो गया,” वह कहता है, “ मेरी आशा, जो प्रभु से मैंने की थी, उसका अंत हो गया” (3:18 हिंदी - CL) l उसकी परिस्थिति हमलोगों से बहुत भिन्न थी l उसने परमेश्वर के न्याय का प्रचार किया था, और उसने यरूशलेम को पराजित देखा l वह भव्यता चली गयी थी क्योंकि उसने पराजय (पद.12), अकेला (पद.14), और परमेश्वर द्वारा परित्यक्त महसूस किया (पद.15-20) l
परन्तु उसकी कहानी का अंत यह नहीं है l उसमें से प्रकाश चमक रहा था l यिर्मयाह, जो बोझिल और टूटा हुआ था, हकलाते हुए बोल उठा “मुझे आशा है” (पद.21) – आशा जो यह जानने से आती है कि “हम मिट नहीं गए; यह यहोवा की महकरुणा का फल है” (पद.22) l और यहाँ पर एक बात है जो हमें याद रखना है कि जब वैभव समाप्त हो जाए : “उसकी दया अमर है l प्रति भोर वह नई होती रहती है” (पद.22-23) l
हमारे सबसे अंधकारमय दिनों में भी, परमेश्वर की महान विश्वासयोग्यता उसमें से चमकती है l