ध्यान देना
जॉन न्यूटन लिखता है, “यदि, घर जाते समय, एक बच्चे ने एक छोटा सिक्का खो दिया है, और यदि, मैं उसे दूसरा दे देता हूँ, मैं उसके आँसू पोंछ सकता हूँ, मैं अनुभव करता हूँ कि मैंने कुछ किया है l मुझे उससे बड़े काम करने चाहिए, किन्तु मैं यह काम नहीं छोडूंगा l”
इन दिनों में, ऐसे लोगों को ढूँढना सरल है जिन्हें आराम चाहिए l एक किराने की दूकान में एक थका हुआ खजांची जो अपनी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए दो नौकरियाँ करता है; एक शरणार्थी जो घर वापस जाने की लालसा करता है; एक अकेली माँ जिसने अत्यधिक चिंता के कारण सारी आशा खो दी है; एक बूढ़ा व्यक्ति जिसे डर है कि उसने बहुत वर्षों तक बेकारी का जीवन जी लिया है l
किन्तु हमें क्या करना चाहिए? दाऊद ने लिखा, “क्या ही धन्य है वह, जो कंगाल की सुधि रखता है” (भजन 41:1) l यद्यपि, हम उन लोगों की गरीबी समाप्त नहीं कर सकते हैं जिनसे हमारी मुलाकात होती है हम उनपर विचार कर सकते हैं अर्थात् उनपर “ध्यान दे सकते हैं l”
हम लोगों को बता सकते हैं कि हम उनकी चिंता करते हैं l हम उनके साथ नम्रता और आदर दिखा सकते हैं यद्यपि उनमें चिड़चिड़ापन अथवा थकान दिखाई देता हो l हम रूचि दिखाकर उनकी कहानी सुन सकते हैं l और हम उनके लिए और उनके साथ प्रार्थना कर सकते हैं जो सबसे अधिक सहायक और चंगा करनेवाला कार्य है l
यीशु का वह पुराना विरोधोक्ति न भूलें जो उसने हमसे कहा था, “लेने से देना धन्य है” (प्रेरितों 20:35) l ध्यान देना सफल काम है, क्योंकि हम उस समय सबसे खुश होते हैं जब हम खुद को देते हैं l कंगालों पर ध्यान दें l
आप मूल हैं
परमेश्वर ने हममें से हर एक को मूल रूप में बनाया है l कोई भी पुरुष अथवा महिला खुद के द्वारा बनाए नहीं गए l कोई भी स्वयं से गुणवान, जानकार, या बुद्धिमान नहीं बनता l परमेश्वर ने ही हममें से हर एक को बनाया l उसने हमारे विषय सोचा और हमें अपने असीम प्रेम के कारण बनाया l
परमेश्वर ने आपका शरीर, दिमाग, और आत्मा बनाया l और वह अभी भी आप में अपना कार्य कर रहा है l वह अभी भी आपको बना रहा है l हमारी परिपक्वता ही उसका एकमात्र उद्देश्य है : “जिसने तुम में अच्छा काम आरम्भ किये हैं, वही उसे यीशु मसीह के दिन तक पूरा करेगा” (फ़िलि. 1:6) l परमेश्वर आपको और सामर्थी, ताकतवर, पवित्र, और शांतिमय, और प्रेमी, कम स्वार्थी अर्थात् जैसा आप बनना चाहते थे वैसा ही बना रहा है l
“[परमेश्वर की] सच्चाई पीढ़ी से पीढ़ी तक बनी रहती है” (भजन 100:5) l परमेश्वर ने हमेशा आपसे प्रेम किया है (“हमेशा” दोनों ओर), और वह आपके साथ अंत तक विश्वासयोग्य रहेगा l
आपको ऐसा प्रेम मिला है जो सर्वदा तक रहेगा और एक परमेश्वर जो आपको कभी नहीं छोड़ेगा l यही आनंद करने का अच्छा कारण है और “जयजयकार के साथ उसके सम्मुख [आने का कारण भी]!” (पद 2) l
यदि आप गा नहीं सकते, केवल उसे ऊंची आवाज़ में पुकारें : “यहोवा का जयजयकार करो” (पद.1) l
हमारे पिता का चेहरा
मैं अपने पिता का चेहरा याद करता हूँ l उन्हें पहचानना कठिन था l वह दयालु व्यक्ति थे, किन्तु वैरागी और संयमी थे l बचपन में, मैं उनके चेहरे पर मुस्कराहट अथवा स्नेह खोजता था l चेहरा हमें प्रगट करते हैं l भौं चढ़ाना, रुखा निगाह, एक मुस्कराहट, और झुर्रीदार आखें दूसरों के बारे में हमारे विचार प्रगट करते हैं l हमारे चेहरे हमारी “पहचान” हैं l
भजन 80 का लेखक, आसाप, परेशान था और प्रभु का चेहरा देखना चाहता था l उसने यरूशलेम में रहकर अपने नज़रिए से उत्तर की ओर देखा, और यहूदा के सहयोगी राज्य, इस्राएल को असीरिया साम्राज्य द्वारा पराजित होते देखा l अपने मध्यवर्ती राज्य को जाते देख, यहूदा चारों ओर के आक्रमण से खुद को असुरक्षित पाया – उत्तर में असीरिया, दक्षिण में मिस्र, और पूरब में अरबी राज्य l सब उससे अधिक और बेहतर थे l
आसाप ने प्रार्थना में अपना भय तीन बार दोहराया (80:7,19), “अपना मुख का प्रकाश चमका, तह हमारा उद्धार हो जाएगा l” (अथवा, अन्य शब्दों में, मुझे अपनी मुस्कराहट दिखा.)
अपने भय से नज़र हटाकर स्वर्गिक पिता का चेहरा देखना अच्छा है l क्रूस की ओर देखकर हम परमेश्वर का चेहरा सर्वोत्तम तरीके से देख सकते हैं l क्रूस ही उसकी “पहचान है” (यूहन्ना 3:16) l
इसलिए यह जानिये : जब आपका पिता आपकी ओर देखता है, उसके चेहरे पर एक बड़ी मुस्कराहट होती है l आप बहुत सुरक्षित हैं!
क्षमा!
कार्य से घर लौटकर मेरा मित्र नॉर्म कुक कभी-कभी अपने परिवार को आश्चर्य देता था l वह घर में आकर चिल्लाता, “तुम क्षमा किये गए हो!” परिजनों ने उसकी हानि नहीं की थी इसलिए उनको उनकी क्षमा चाहिए थी l यह ताकीद थी कि बेशक दिन भर पाप करने पर भी, उन्हें परमेश्वर के अनुग्रह से पूर्णरूपेण क्षमा मिल गई थी l
प्रेरित यूहन्ना अनुग्रह के विषय कहता है : “यदि जैसा वह ज्योति में है, वैसे ही हम भी ज्योति में चलें, तो एक दूसरे से सहभागिता रखते हैं, और उसके पुत्र यीशु का लहू हमें सब पापों से शुद्ध करता है l यदि हम कहें कि हममें कुछ भी पाप नहीं [पाप के प्रति कोई झुकाव नहीं], तो अपने आप को धोखा देते हैं, और हम में सत्य नहीं l यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह ... हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है” (1 यूहन्ना 1:7-9) l
“ज्योति में चलें” यीशु के अनुसरण का एक अलंकार है l यूहन्ना अनुसार, आत्मा द्वारा यीशु का अनुकरण, विश्वास की संगति में प्रेरितों के साथ जुड़ जाने का संकेत है l हम असली मसीही हैं l किन्तु, वह आगे कहता है, हम धोखा न खाएं : हम कभी-कभी गलत चुनाव करेंगे l तथापि, अनुग्रह भरपूर है l हमें आवश्यकतानुसार क्षमा मिलेगी l
सिद्ध नहीं, केवल यीशु द्वारा क्षमा! आज के लिए यह अच्छा शब्द है l
बादलों पर विचार करें
बहुत वर्ष पहले एक दिन मेरे पुत्र और मैं आंगन में पीठ के बल लेटे हुए बादलों को तैरते हुए देख रहे थे l एक ने पूछा, “पिताजी, बादल क्यों तैरते हैं?” “देखो बेटा,” अपने व्यापक ज्ञान का लाभ देने के विचार से मैं बोलना चाहा, किन्तु शांत हो गया l “मैं नहीं जानता,” मैंने मान लिया, “किन्तु मैं तुमको बताऊंगा l”
मुझे उत्तर मिला, कि सघन नमी, भारीपन के कारण, भूमि से उठते गरम तापमान से मिलती है l उसके बाद नमी वाष्प में बदलकर हवा में ऊपर उठती है l यह घटना की स्वाभाविक व्याख्या है l
किन्तु स्वाभाविक व्याख्या अंतिम उत्तर नहीं है l परमेश्वर ने अपनी बुद्धि में प्राकृतिक नियम को इस तरह निर्देशित किया है कि वह “सर्वज्ञानी के आश्चर्यकर्म” प्रगट करता है (अय्यूब 37:16) l तब बादल एक प्रतिक हो सकता है-सृष्टि में परमेश्वर की भलाई और अनुग्रह का दृश्य और प्रगट चिन्ह l
तो किसी दिन जब आप समय निकालकर बादलों में छवि की कल्पना करें, इसे याद रखें : सब खूबसूरत वस्तुओं का बनानेवाला बादलों को हवा में उड़ाता है l वह ऐसा करके हमें आश्चर्य और आराधना में झुकाता है l आसमान-मेघपुंज, फैले हुए बादल, और हलके सफ़ेद बादल-परमेश्वर की महिमा घोषित करते हैं l
सच्चा मित्र बनना
कवि सैमवेल फ़ॉस ने लिखा, “मुझे सड़क किनारे रहकर मनुष्य का मित्र बनने दें” (“द हाउस बाई द साइड ऑफ़ द रोड”) l मैं ऐसा ही रहना चाहता हूँ-लोगों का मित्र l मैं राह के किनारे थकित यात्रियों का इंतज़ार करना चाहता हूँ l मैं दूसरों द्वारा चोटिन एवं अपकृत लोगों को तलाशना चाहता हूँ, जो घायल और निर्भ्रांत हृदय का बोझ उठाते हैं l उनको उत्साहवर्धक शब्द द्वारा पोषित और तरोताजा करके उनको उनके मार्ग पर आगे भेजने के लिए l मैं शायद उनको या उनकी समस्याओं को “ठीक” नहीं कर पाऊँगा, किन्तु उन तक आशीष पहुंचा सकता हूँ l
शालेम का राजा और याजक, मलिकिसिदक, अब्राम को आशीषित किया जब वह युद्ध से लौट रहा था (उत्प. 14) l एक “आशीष” एक छींक के प्रति विनम्र प्रतिउत्तर से अधिक है l हम उनको आशीष के श्रोत के पास लाकर उन्हें आशीषित करते हैं l मलिकिसिदक ने अब्राम को यह कहकर आशीषित किया, “परमप्रधान ईश्वर की ओर से, जो आकाश और पृथ्वी का अधिकारी है, तू धन्य हो” (पद. 19) l
हम दूसरों के संग प्रार्थना करके उनको आशीषित करते हैं; हम उनको ज़रूरत के समय अनुग्रह के सिंहासन तक ले जाकर सहायता दे सकते हैं (इब्रा. 4:16) l हम शायद उनकी परिस्थिति न बदल सकें, किन्तु उनका परिचय परमेश्वर से करा सकते हैं l एक सच्चा मित्र ऐसा ही करता है l
हमेशा प्रेम किया गया
कोई भी दिन किसी न किसी तरह का अपमान, उपेक्षा और अनादर सहे बिना शायद बिताना असंभव है l कभी-कभी हम खुद के साथ भी ऐसा करते हैं l
दाऊद के शत्रुओं से धमकी देने, डराने और निंदा करने की बू आ रही थी l आत्म-सम्मान और भलाई का उसका भाव अचानक से धराशायी हो गया था (भजन 4:1-2) l उसने अपनी “सकेती” से निकलने के लिए सहायता मांगी l
तब दाऊद ने याद किया, “यह जान रखो कि यहोवा ने भक्त को अपने लिए अलग कर रखा है” (पद.3) l अंग्रेजी के विभिन्न अनुवाद दाऊद के दृढ़ उक्ति का पूर्ण भाव “भक्त” बताते हैं l यहाँ पर इब्रानी शब्द, हेसेद (hesed) का शब्दशः सन्दर्भ परमेश्वर के प्रेम के वाचा से है और उसका अर्थ हो सकता है “जिनको परमेश्वर हमेशा, हमेशा, हमेशा के लिए प्रेम करेगा l”
यहाँ पर वह बात है जो हमें याद रखना है : उस प्रिय पुत्र की तरह हमसे सदा प्रेम किया जाता है, हम विशेष रूप से अलग किये गए हैं l उसने हमें अनंतकाल के लिए अपनी संतान होने के लिए बुलाया है l
निराश होने की जगह, हम अपने पिता से प्राप्त प्रेम को याद करें जो हमें मुफ्त में मिला है l हम उसके अति प्रिय बच्चे हैं l अंत निराशा नहीं किन्तु शांति और आनंद है (पद.7-8) l वह हमें त्यागता नहीं, और वह कभी भी हमसे प्रेम करना नहीं छोड़ेगा l
धर्मी मार्ग(Godliman Street)
मेरी पत्नी करोलिन और मैं लन्दन में घूमते समय गॉडलिमैंन मार्ग(Godliman street) नामक सड़क पर पहुंचे l हमें बताया गया कि यहाँ एक धर्मी रहता था जिसके कारण इस सड़क का नामकरण “उस धर्मी जन के नाम” पर किया गया l इससे मुझे पुराने नियम की एक कहानी याद आयी l
शाऊल के पिता ने अपने पुत्र और एक सेवक को उनके खोये हुए गधों को खोजने भेजा l युवक बहुत दिनों तक गधों को खोजते रहे किन्तु नहीं ढूँढ़ पाए l
शाऊल हार कर घर लौटनेवाला था, जब उसके सेवक ने शमूएल का गाँव, रामाह की ओर संकेत करके उत्तर दिया, “सुन, इस नगर में परमेश्वर का एक जन है जिसका बड़ा आदरमान होता है; और जो कुछ वह कहता है वह बिना पूरा हुए नहीं रहता l अब हम उधर चलें, संभव है वह हम को हमारा मार्ग बताए कि किधर जाए” (1 शमू. 9:6) l
अपने सम्पूर्ण जीवन और वृद्धावस्था में, शमूएल परमेश्वर के साथ मित्रता और संगति की, और उसके शब्द वजनी और सत्य थे l लोग उसे परमेश्वर के नबी के तौर पर जानते थे l इसलिए शाऊल और उसका सेवक “उस नगर को चले जहाँ परमेश्वर का जन रहता था” (पद.10) l
काश, हमारे जीवन भी ऐसे ही यीशु को प्रगट करें कि हम अपने पड़ोस पर छाप छोड़ें, और कि हमारी धार्मिकता याद रहे!
अंधकार में दबी हुई हँसी
वाशिंगटन पोस्ट अख़बार में “Tech Titans’ Latest Project: मृत्यु को चुनौती दें, नामक एक लेख में अराइना छा ने मानव जीवन को अनिश्चित काल तक बढ़ाने पर पीटर थील और दूसरे तकनिकी बादशाहों के प्रयास बताती है l वे इस परियोजना पर अरबों खर्च करना चाहते हैं l
उन्होंने थोड़ी देर कर दी l मृत्यु हार चुकी है! यीशु ने कहा, “पुनरुत्थान और जीवन मैं हूँ; जो कोई मुझ पर विश्वास करता है वह यदि मर भी जाए तौभी जीएगा, और जो कोई जीवित है और मुझ पर विश्वास करता है, वह अनंतकाल तक न मरेगा” (यूहन्ना 11:25-26) l यीशु हमें आश्वस्त करता है कि उसमें विश्वास करनेवाले किसी भी परिस्थिति में कभी नहीं मरेंगे l
बात यह है, हमारे शरीर मर जाएंगे-और यह बदला नहीं जा सकता l किन्तु हमारे व्यक्तित्व के रोमांचक हिस्से, सोच, विवेक बुद्धि, स्मरण करना, प्रेम करना, जिसे हम “मुझको, खुद, और मैं” कहते हैं कभी नहीं मरेंगे l
और यहाँ सर्वोत्तम है : यह एक उपहार है! आपको केवल यीशु का उद्धार स्वीकारना है l इस धारणा के विषय सी.एस. ल्युईस अपनी सोच में इसे “अंधकार में दबी हुई हँसी” कहते हैं-अर्थात् उत्तर इतना सरल है l
कुछ लोगों के अनुसार, “यह अत्यधिक सरल है l” अच्छा, तो मैं कहता हूँ, यदि आपके जन्म से पूर्व परमेश्वर ने आपसे प्रेम किया और उसकी इच्छा है कि आप हमेशा उसके साथ रहें, तो वह इसे कठिन क्यों बनेएगा?