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Articles by डेविड रोपर

प्रकृति देखभाल

बड़ी भूरी ट्राउट मछलियाँ शरद ऋतू की अपनी क्रियापद्धति अनुसार ओविही नदी में अंडे दे रही हैं l आप उन्हें छिछले कंकरीले जल में अपना घोंसला बनाते देख सकते हैं l

बुद्धिमान मछुए यह जानकार कि मछलियाँ अंडे पर हैं उन्हें परेशान नहीं करते l अंडे न दब जाएँ, वे कंकरीली जगहों पर पाँव नहीं रखते अथवा अण्डों के स्थान से धारा के प्रतिकूल नहीं जाते जहाँ पथरीले टुकड़े बिखरकर अण्डों को दबा न दें l और मछली पकड़ने के प्रलोभन के बावजूद, वे घोंसलों के निकट ट्राउट मछलियों का शिकार नहीं करते हैं l

ये बचाव जिम्मेदार मछली पकड़ने की नियम नीतियाँ हैं l किन्तु और गंभीर और बेहतर कारण भी हैं l

वचन कहता है कि परमेश्वर ने हमें पृथ्वी दी है (उत्पत्ति 1:28-30) l यह हमारे उपयोग के लिए है, किन्तु हम इससे प्रेम करनेवाले की तरह इसका उपयोग करें l

मैं परमेश्वर के हाथों के कार्यों पर विचार करता हूँ : एक तीतर का घटी में बोलना, एक बारहसिंघा का लड़ाई आरंभ करना, दूर एक हिरन का झुण्ड, एक ट्राउट मछली और रंग बदलते उसके गुलाबी बच्चे, झरने में अपने बच्चों के साथ खेलती हुई एक माता उदबिलाऊ -मैं इनको पसंद करता हूँ, क्योंकि मेरे पिता ने अपने महान प्रेम में इन्हें मेरे आनंद के लिए मुझे दिए हैं l

और जिनसे मैं प्रेम करता हूँ, उनकी सुरक्षा भी करता हूँ l

परमेश्वर को देखना

लेखक और पासवान इरविन लूज़र एक टेलेविज़न कार्यक्रम में मेज़बान आर्ट लिंकलेटर और एक छोटे बच्चे की परमेश्वर की तस्वीर बनाने की कहानी बताते हैं l लिंकलेटर, खुश होकर, बोले, “तुम नहीं बना पाओगे क्योंकि कोई नहीं जानता कि परमेश्वर कैसा है l”

“मेरे बनाने के बाद वे जान जाएंगे!” बच्चे ने कहा l

हम सोच सकते हैं, परमेश्वर कैसा है? क्या वह अच्छा है, दयालु है, चिंता करता है?  फिलिप्पुस के निवेदन पर यीशु का प्रतिउत्तर इसका उत्तर था : “हे प्रभु, पिता को हमें दिखा दे l” यीशु ने उत्तर दिया, “हे फिलिप्पुस, मैं इतने दिन से तुम्हारे साथ हूँ, और क्या तू मुझे नहीं जानता? जिसने मुझे देखा है उसने पिता को देखा है” (यूहन्ना 14:8-9) l

परमेश्वर को देखने की कभी इच्छा हो तो यीशु को देखें l “वह तो अदृश्य परमेश्वर का प्रतिरूप है,” पौलुस ने कहा (कुलुस्सियों 1:15) l मत्ती, मरकुस, लूका, और यूहन्ना, चारों सुसमाचार पढ़कर यीशु के कार्य और वचन पर ध्यान दें l “पढ़ते समय अपने परमेश्वर का दिमागी चित्र “बनाएं l” पूरा पढ़ने के बाद, वह कैसा है, आप बहुत कुछ जान जाएंगे l

एक बार मेरे एक मित्र ने मुझसे कहा कि यीशु में दिखाई देनेवाले एकमात्र परमेश्वर में ही वह विश्वास करता है l निकट से देखने पर आप भी मानेंगे l उसके विषय पढ़ने पर आपका हृदय बहुत खुश होगा, क्योंकि यद्यपि आप जानते नहीं, यीशु ही वह परमेश्वर है जिसे आप सम्पूर्ण जीवन खोज रहें हैं l

ध्यान देना

जॉन न्यूटन लिखता है, “यदि, घर जाते समय, एक बच्चे ने एक छोटा सिक्का खो दिया है, और यदि, मैं उसे दूसरा दे देता हूँ, मैं उसके आँसू पोंछ सकता हूँ, मैं अनुभव करता हूँ कि मैंने कुछ किया है l मुझे उससे बड़े काम करने चाहिए, किन्तु मैं यह काम नहीं छोडूंगा l”

इन दिनों में, ऐसे लोगों को ढूँढना सरल है जिन्हें आराम चाहिए l एक किराने की दूकान में एक थका हुआ खजांची जो अपनी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए दो नौकरियाँ करता है; एक शरणार्थी जो घर वापस जाने की लालसा करता है; एक अकेली माँ जिसने अत्यधिक चिंता के कारण सारी आशा खो दी है; एक बूढ़ा व्यक्ति जिसे डर है कि उसने बहुत वर्षों तक बेकारी का जीवन जी लिया है l

किन्तु हमें क्या करना चाहिए? दाऊद ने लिखा, “क्या ही धन्य है वह, जो कंगाल की सुधि रखता है” (भजन 41:1) l यद्यपि, हम उन लोगों की गरीबी समाप्त नहीं कर सकते हैं जिनसे हमारी मुलाकात होती है हम उनपर विचार  कर सकते हैं अर्थात् उनपर “ध्यान दे सकते हैं l”

हम लोगों को बता सकते हैं कि हम उनकी चिंता करते हैं l हम उनके साथ नम्रता और आदर दिखा सकते हैं यद्यपि उनमें चिड़चिड़ापन अथवा थकान दिखाई देता हो l हम रूचि दिखाकर उनकी कहानी सुन सकते हैं l और हम उनके लिए और उनके साथ प्रार्थना कर सकते हैं जो सबसे अधिक सहायक और चंगा करनेवाला कार्य है l

     यीशु का वह पुराना विरोधोक्ति न भूलें जो उसने हमसे कहा था, “लेने से देना धन्य है” (प्रेरितों 20:35) l ध्यान देना सफल काम है, क्योंकि हम उस समय सबसे खुश होते हैं जब हम खुद को देते हैं l कंगालों पर ध्यान दें l

आप मूल हैं

परमेश्वर ने हममें से हर एक को मूल रूप में बनाया है l कोई भी पुरुष अथवा महिला खुद के द्वारा बनाए नहीं गए l कोई भी स्वयं से गुणवान, जानकार, या बुद्धिमान नहीं बनता l परमेश्वर ने ही हममें से हर एक को बनाया l उसने हमारे विषय सोचा और हमें अपने असीम प्रेम के कारण बनाया l

परमेश्वर ने आपका शरीर, दिमाग, और आत्मा बनाया l और वह अभी भी आप में अपना कार्य कर रहा है l वह अभी भी आपको बना रहा है l हमारी परिपक्वता ही उसका एकमात्र उद्देश्य है : “जिसने तुम में अच्छा काम आरम्भ किये हैं, वही उसे यीशु मसीह के दिन तक पूरा करेगा” (फ़िलि. 1:6) l परमेश्वर आपको और सामर्थी, ताकतवर, पवित्र, और शांतिमय, और प्रेमी, कम स्वार्थी अर्थात् जैसा आप बनना चाहते थे वैसा ही बना रहा है l

“[परमेश्वर की] सच्चाई पीढ़ी से पीढ़ी तक बनी रहती है” (भजन 100:5) l परमेश्वर ने हमेशा आपसे प्रेम किया है (“हमेशा” दोनों ओर), और वह आपके साथ अंत तक विश्वासयोग्य रहेगा l

आपको ऐसा प्रेम मिला है जो सर्वदा तक रहेगा और एक परमेश्वर जो आपको कभी नहीं छोड़ेगा l यही आनंद करने का अच्छा कारण है और “जयजयकार के साथ उसके सम्मुख [आने का कारण भी]!” (पद 2) l

यदि आप गा नहीं सकते, केवल उसे ऊंची आवाज़ में पुकारें : “यहोवा का जयजयकार करो” (पद.1) l

हमारे पिता का चेहरा

मैं अपने पिता का चेहरा याद करता हूँ l उन्हें पहचानना कठिन था l वह दयालु व्यक्ति थे, किन्तु वैरागी और संयमी थे l बचपन में, मैं उनके चेहरे पर मुस्कराहट अथवा स्नेह खोजता था l चेहरा हमें प्रगट करते हैं l भौं चढ़ाना, रुखा निगाह, एक मुस्कराहट, और झुर्रीदार आखें दूसरों के बारे में हमारे विचार प्रगट करते हैं l हमारे चेहरे हमारी “पहचान” हैं l

भजन 80 का लेखक, आसाप, परेशान था और प्रभु का चेहरा देखना चाहता था l उसने यरूशलेम में रहकर अपने नज़रिए से उत्तर की ओर देखा, और यहूदा के सहयोगी राज्य, इस्राएल को असीरिया साम्राज्य द्वारा पराजित होते देखा l अपने मध्यवर्ती राज्य को जाते देख, यहूदा चारों ओर के आक्रमण से खुद को असुरक्षित पाया – उत्तर में असीरिया, दक्षिण में मिस्र, और पूरब में अरबी राज्य l सब उससे अधिक और बेहतर थे l

आसाप ने प्रार्थना में अपना भय तीन बार दोहराया (80:7,19), “अपना मुख का प्रकाश चमका, तह हमारा उद्धार हो जाएगा l” (अथवा, अन्य शब्दों में, मुझे अपनी मुस्कराहट दिखा.)

अपने भय से नज़र हटाकर स्वर्गिक पिता का चेहरा देखना अच्छा है l क्रूस की ओर देखकर हम परमेश्वर का चेहरा सर्वोत्तम तरीके से देख सकते हैं l क्रूस ही उसकी “पहचान है” (यूहन्ना 3:16) l

इसलिए यह जानिये : जब आपका पिता आपकी ओर देखता है, उसके चेहरे पर एक बड़ी मुस्कराहट होती है l आप बहुत सुरक्षित हैं!

क्षमा!

कार्य से घर लौटकर मेरा मित्र नॉर्म कुक कभी-कभी अपने परिवार को आश्चर्य देता था l वह घर में आकर चिल्लाता, “तुम क्षमा किये गए हो!” परिजनों ने उसकी हानि नहीं की थी इसलिए उनको उनकी  क्षमा चाहिए थी l यह ताकीद थी कि बेशक दिन भर पाप करने पर भी, उन्हें परमेश्वर के अनुग्रह से पूर्णरूपेण क्षमा मिल गई थी l  

प्रेरित यूहन्ना अनुग्रह के विषय कहता है : “यदि जैसा वह ज्योति में है, वैसे ही हम भी ज्योति में चलें, तो एक दूसरे से सहभागिता रखते हैं, और उसके पुत्र यीशु का लहू हमें सब पापों से शुद्ध करता है l यदि हम कहें कि हममें कुछ भी पाप नहीं [पाप के प्रति कोई झुकाव नहीं], तो अपने आप को धोखा देते हैं, और हम में सत्य नहीं l यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह ... हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है” (1 यूहन्ना 1:7-9) l

“ज्योति में चलें” यीशु के अनुसरण का एक अलंकार है l यूहन्ना अनुसार, आत्मा द्वारा यीशु का अनुकरण, विश्वास की संगति में प्रेरितों के साथ जुड़ जाने का संकेत है l हम असली मसीही हैं l किन्तु, वह आगे कहता है, हम धोखा न खाएं : हम कभी-कभी गलत चुनाव करेंगे l तथापि, अनुग्रह भरपूर है l हमें आवश्यकतानुसार क्षमा मिलेगी l  

सिद्ध नहीं, केवल यीशु द्वारा क्षमा! आज के लिए यह अच्छा शब्द है l

बादलों पर विचार करें

बहुत वर्ष पहले एक दिन मेरे पुत्र और मैं आंगन में पीठ के बल लेटे हुए बादलों को तैरते हुए देख रहे थे l एक ने पूछा, “पिताजी, बादल क्यों तैरते हैं?” “देखो बेटा,” अपने व्यापक ज्ञान का लाभ देने के विचार से मैं बोलना चाहा, किन्तु शांत हो गया l “मैं नहीं जानता,” मैंने मान लिया, “किन्तु मैं तुमको बताऊंगा l”

मुझे उत्तर मिला, कि सघन नमी, भारीपन के कारण, भूमि से उठते गरम तापमान से मिलती है l उसके बाद नमी वाष्प में बदलकर हवा में ऊपर उठती है l यह घटना की स्वाभाविक व्याख्या है l

किन्तु स्वाभाविक व्याख्या अंतिम उत्तर नहीं है l परमेश्वर ने अपनी बुद्धि में प्राकृतिक नियम को इस तरह निर्देशित किया है कि वह “सर्वज्ञानी के आश्चर्यकर्म” प्रगट करता है (अय्यूब 37:16) l तब बादल एक प्रतिक हो सकता है-सृष्टि में परमेश्वर की भलाई और अनुग्रह का दृश्य और प्रगट चिन्ह l

तो किसी दिन जब आप समय निकालकर बादलों में छवि की कल्पना करें, इसे याद रखें : सब खूबसूरत वस्तुओं का बनानेवाला बादलों को हवा में उड़ाता है l वह ऐसा करके हमें आश्चर्य और आराधना में झुकाता है l आसमान-मेघपुंज, फैले हुए बादल, और हलके सफ़ेद बादल-परमेश्वर की महिमा घोषित करते हैं l

सच्चा मित्र बनना

कवि सैमवेल फ़ॉस ने लिखा, “मुझे सड़क किनारे रहकर मनुष्य का मित्र बनने दें” (“द हाउस बाई द साइड ऑफ़ द रोड”) l मैं ऐसा ही रहना चाहता हूँ-लोगों का मित्र l मैं राह के किनारे थकित यात्रियों का इंतज़ार करना चाहता हूँ l मैं दूसरों द्वारा चोटिन एवं अपकृत लोगों को तलाशना चाहता हूँ, जो घायल और निर्भ्रांत हृदय का बोझ उठाते हैं l उनको उत्साहवर्धक शब्द द्वारा पोषित और तरोताजा करके उनको उनके मार्ग पर आगे भेजने के लिए l मैं शायद उनको या उनकी समस्याओं को “ठीक” नहीं कर पाऊँगा, किन्तु उन तक आशीष पहुंचा सकता हूँ l

शालेम का राजा और याजक, मलिकिसिदक, अब्राम को आशीषित किया जब वह युद्ध से लौट रहा था (उत्प. 14) l एक “आशीष” एक छींक के प्रति विनम्र प्रतिउत्तर से अधिक है l हम उनको आशीष के श्रोत के पास लाकर उन्हें आशीषित करते हैं l मलिकिसिदक ने अब्राम को यह कहकर आशीषित किया, “परमप्रधान ईश्वर की ओर से, जो आकाश और पृथ्वी का अधिकारी है, तू धन्य हो” (पद. 19) l

हम दूसरों के संग प्रार्थना करके उनको आशीषित करते हैं; हम उनको ज़रूरत के समय अनुग्रह के सिंहासन तक ले जाकर सहायता दे सकते हैं (इब्रा. 4:16) l हम शायद उनकी परिस्थिति न बदल सकें, किन्तु उनका परिचय परमेश्वर से करा सकते हैं l एक सच्चा मित्र ऐसा ही करता है l

हमेशा प्रेम किया गया

कोई भी दिन किसी न किसी तरह का अपमान, उपेक्षा और अनादर सहे बिना शायद बिताना असंभव है l कभी-कभी हम खुद के साथ भी ऐसा करते हैं l

दाऊद के शत्रुओं से धमकी देने, डराने और निंदा करने की बू आ रही थी l आत्म-सम्मान और भलाई का उसका भाव अचानक से धराशायी हो गया था (भजन 4:1-2) l उसने अपनी “सकेती” से निकलने के लिए सहायता मांगी l

तब दाऊद ने याद किया, “यह जान रखो कि यहोवा ने भक्त को अपने लिए अलग कर रखा है” (पद.3) l अंग्रेजी के विभिन्न अनुवाद दाऊद के दृढ़ उक्ति का पूर्ण भाव “भक्त” बताते हैं l यहाँ पर इब्रानी शब्द, हेसेद (hesed)  का शब्दशः सन्दर्भ परमेश्वर के प्रेम के वाचा से है और उसका अर्थ हो सकता है “जिनको परमेश्वर हमेशा, हमेशा, हमेशा के लिए प्रेम करेगा l”

यहाँ पर वह बात है जो हमें याद रखना है : उस प्रिय पुत्र की तरह हमसे सदा  प्रेम किया जाता है, हम विशेष रूप से अलग किये गए हैं l उसने हमें अनंतकाल के लिए अपनी संतान होने के लिए बुलाया है l

निराश होने की जगह, हम अपने पिता से प्राप्त प्रेम को याद करें जो हमें मुफ्त में मिला है l हम उसके अति प्रिय बच्चे हैं l अंत निराशा नहीं किन्तु शांति और आनंद है (पद.7-8) l वह हमें त्यागता नहीं, और वह कभी भी हमसे प्रेम करना नहीं छोड़ेगा l

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आपका सुरक्षित स्थान

मेरी बेटी और मैं एक बड़े पारिवारिक उत्सव के लिए तैयारी कर रहे थे l इसलिए कि वह उत्सव के विषय घबरायी हुई थी मैंने कहा कि मैं गाड़ी ड्राइव करुँगी l “ठीक है l किन्तु मैं अपनी कार में सुरक्षित महसूस करती हूँ l क्या आप चलाएंगी?” उसने पुछा l यह महसूस करके कि उसे मेरी गाड़ी छोटी लगती है, मैंने पूछा कि क्या मेरी गाड़ी बहुत छोटी थी l उसका उत्तर था, “नहीं, बस मेरी गाड़ी मुझे सुरक्षित लगती है l पता नहीं क्यों, मैं अपनी गाड़ी में आरामदायक महसूस करती हूँ l”

उसकी टिप्पणी ने मुझे मेरे “सुरक्षित स्थान” के सम्बन्ध में मुझे सोचने की चुनौती दी l तुरंत ही मैंने नीतिवचन 18:10 के विषय सोची, “यहोवा का नाम दृढ़ गढ़ है, धर्मी उसमें भागकर सब दुर्घटनाओं से बचता है l” पुराने नियम के काल में, दीवारें और पहरे की मीनार लोगों को बाहरी खतरों की चेतावनी के साथ-साथ उनकी रक्षा भी करती थीं l लेखक बताना चाहता है कि परमेश्वर का नाम, जो उसका चरित्र है, व्यक्तित्व और सब कुछ है जो वह है, उसके लोगों को वास्तविक सुरक्षा देती है l

ख़ास भौतिक स्थान खतरनाक क्षणों में इच्छित सुरक्षा देने का वादा करते हैं l तूफ़ान के मध्य एक मजबूत छत l चिकित्सीय सहायता देनेवाला एक हॉस्पिटल l एक प्रिय का गले लगाना l

आपका “सुरक्षित स्थान” क्या है? हम जहाँ भी सुरक्षा खोजते हैं, उस स्थान पर हमारे साथ परमेश्वर की उपस्थिति ही है जो हमारी ज़रूरत में हमें ताकत और सुरक्षा देती है l

जब खूबसूरती ख़त्म नहीं होती

मुझे ग्रैंड घाटी देखना पसंद है l जब मैं घाटी के किनारे खड़ा होता हूँ, मैं परमेश्वर की चौंकानेवाली कृति देखता हूँ l 

यद्यपि वह भूमि में एक (बहुत बड़ा) “गड्ढा” है, ग्रैंड घाटी मुझे स्वर्ग पर विचार करने हेतु विवश करता है l एक बारह वर्षीय ईमानदार युवक ने एक बार मुझ से पूछा, “क्या स्वर्ग अरुचिकर नहीं होगा? क्या आप नहीं सोचते कि हम हमेशा परमेश्वर की प्रशंसा करते हुए थक जाएंगे?” किन्तु यदि भूमि में एक “गड्ढा” इतना जबरदस्त खुबसूरत है और हम उसे देखते नहीं थकते हैं, हम खूबसूरती के श्रोत-हमारे प्रेमी सृष्टिकर्ता-को नयी सृष्टि के सम्पूर्ण असली आश्चर्य में एक दिन देखने की कल्पना ही कर सकते हैं l

“एक वर मैंने यहोवा से माँगा है, उसी के यत्न में लगा रहूँगा; कि मैं जीवन भर यहोवा के भवन में रहने पाऊं, जिससे यहोवा की मनोहरता पर दृष्टि लगाए रहूँ,” (भजन 27:4) दाऊद ने इन शब्दों को लिखते हुए यह इच्छा प्रगट की l परमेश्वर की उपस्थिति से सुन्दर कुछ नहीं, जो इस पृथ्वी पर हमारे निकट आती है जब हम भविष्य में उसका चेहरा आमने-सामने देखने की चाह में उसे विश्वास से खोजते हैं l

उस दिन हम अपने अद्भुत प्रभु की प्रशंसा करते हुए नहीं थकेंगे, क्योंकि हम उसकी उत्तम भलाई और उसके हाथों के कार्य के आश्चर्य की तरोताज़गी, और नयी खोज के अंत में कभी नहीं पहुंचेंगे l उसकी उपस्थिति उसकी खूबसूरती और उसके प्रेम का असाधारण प्रकाशन प्रगट करेगी l

हमारे पास सामर्थ्य है

कड़कड़ाहट की आवाज़ ने मुझे चौंका दिया l मैं आवाज़ को पहचानकर रसोई की ओर भागी l मैंने भूल से कॉफ़ी बनाने वाला बिजली का उपकरण ऑन कर दिया था l मैंने उपकरण का प्लग हटाकर, उसके तले को छूकर देखना चाही कि टाइल का काउंटर पैर रखने लायक बहुत गर्म तो नहीं है l उसके चिकने भाग से मेरी उंगलियाँ जल गयीं, और मेरे कोमल पैरों में छाले हो गए l

मेरे पति द्वारा मेरे घाव में दावा लगाते समय मैंने अपना सिर हिलाया l मैं जानती थी कि कांच गरम होगा l “मैं ईमानदारी से कहती हूँ, मुझे नहीं मालुम मैंने उसे क्यों छू दिया,” मैं बोली l

मेरी गलती ने मुझे वचन में एक गंभीर विषय, पाप के स्वभाव के विषय पौलुस का प्रतिउत्तर याद दिलाया l

प्रेरित स्वीकारता है कि जो वह करता है उस को नहीं जानता; क्योंकि जो वह चाहता है वह नहीं करता (रोमि. 7:15) l स्वीकार करते हुए कि वचन सही और गलत को निश्चित करता है (पद.7), वह पाप के विरुद्ध शरीर और आत्मा के बीच निरंतर चलनेवाली जटिल और वास्तविक युद्ध को पहचानता है (पद.15-23) l वह अपनी दुर्बलता स्वीकारते हुए, वर्तमान और सर्वदा की विजय की आशा प्रस्तुत करता है (पद.24-25) l

जब हम मसीह को अपना जीवन समर्पित करते हैं, वह हमें पवित्र आत्मा देता है जो हमें सही करने के लिए सामर्थी बनाता है (8:8-10) l जब वह हमें परमेश्वर का वचन मानने के लिए आज्ञाकारी बनाता है, हम झुलसाने वाले पाप से दूर हो सकते हैं जो हमें उस बहुतायत के जीवन से दूर करता है जो परमेश्वर अपने प्रेम करनेवाले को देने की प्रतिज्ञा की है l