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Articles by डेविड रोपर

बादलों पर विचार करें

बहुत वर्ष पहले एक दिन मेरे पुत्र और मैं आंगन में पीठ के बल लेटे हुए बादलों को तैरते हुए देख रहे थे l एक ने पूछा, “पिताजी, बादल क्यों तैरते हैं?” “देखो बेटा,” अपने व्यापक ज्ञान का लाभ देने के विचार से मैं बोलना चाहा, किन्तु शांत हो गया l “मैं नहीं जानता,” मैंने मान लिया, “किन्तु मैं तुमको बताऊंगा l”

मुझे उत्तर मिला, कि सघन नमी, भारीपन के कारण, भूमि से उठते गरम तापमान से मिलती है l उसके बाद नमी वाष्प में बदलकर हवा में ऊपर उठती है l यह घटना की स्वाभाविक व्याख्या है l

किन्तु स्वाभाविक व्याख्या अंतिम उत्तर नहीं है l परमेश्वर ने अपनी बुद्धि में प्राकृतिक नियम को इस तरह निर्देशित किया है कि वह “सर्वज्ञानी के आश्चर्यकर्म” प्रगट करता है (अय्यूब 37:16) l तब बादल एक प्रतिक हो सकता है-सृष्टि में परमेश्वर की भलाई और अनुग्रह का दृश्य और प्रगट चिन्ह l

तो किसी दिन जब आप समय निकालकर बादलों में छवि की कल्पना करें, इसे याद रखें : सब खूबसूरत वस्तुओं का बनानेवाला बादलों को हवा में उड़ाता है l वह ऐसा करके हमें आश्चर्य और आराधना में झुकाता है l आसमान-मेघपुंज, फैले हुए बादल, और हलके सफ़ेद बादल-परमेश्वर की महिमा घोषित करते हैं l

सच्चा मित्र बनना

कवि सैमवेल फ़ॉस ने लिखा, “मुझे सड़क किनारे रहकर मनुष्य का मित्र बनने दें” (“द हाउस बाई द साइड ऑफ़ द रोड”) l मैं ऐसा ही रहना चाहता हूँ-लोगों का मित्र l मैं राह के किनारे थकित यात्रियों का इंतज़ार करना चाहता हूँ l मैं दूसरों द्वारा चोटिन एवं अपकृत लोगों को तलाशना चाहता हूँ, जो घायल और निर्भ्रांत हृदय का बोझ उठाते हैं l उनको उत्साहवर्धक शब्द द्वारा पोषित और तरोताजा करके उनको उनके मार्ग पर आगे भेजने के लिए l मैं शायद उनको या उनकी समस्याओं को “ठीक” नहीं कर पाऊँगा, किन्तु उन तक आशीष पहुंचा सकता हूँ l

शालेम का राजा और याजक, मलिकिसिदक, अब्राम को आशीषित किया जब वह युद्ध से लौट रहा था (उत्प. 14) l एक “आशीष” एक छींक के प्रति विनम्र प्रतिउत्तर से अधिक है l हम उनको आशीष के श्रोत के पास लाकर उन्हें आशीषित करते हैं l मलिकिसिदक ने अब्राम को यह कहकर आशीषित किया, “परमप्रधान ईश्वर की ओर से, जो आकाश और पृथ्वी का अधिकारी है, तू धन्य हो” (पद. 19) l

हम दूसरों के संग प्रार्थना करके उनको आशीषित करते हैं; हम उनको ज़रूरत के समय अनुग्रह के सिंहासन तक ले जाकर सहायता दे सकते हैं (इब्रा. 4:16) l हम शायद उनकी परिस्थिति न बदल सकें, किन्तु उनका परिचय परमेश्वर से करा सकते हैं l एक सच्चा मित्र ऐसा ही करता है l

हमेशा प्रेम किया गया

कोई भी दिन किसी न किसी तरह का अपमान, उपेक्षा और अनादर सहे बिना शायद बिताना असंभव है l कभी-कभी हम खुद के साथ भी ऐसा करते हैं l

दाऊद के शत्रुओं से धमकी देने, डराने और निंदा करने की बू आ रही थी l आत्म-सम्मान और भलाई का उसका भाव अचानक से धराशायी हो गया था (भजन 4:1-2) l उसने अपनी “सकेती” से निकलने के लिए सहायता मांगी l

तब दाऊद ने याद किया, “यह जान रखो कि यहोवा ने भक्त को अपने लिए अलग कर रखा है” (पद.3) l अंग्रेजी के विभिन्न अनुवाद दाऊद के दृढ़ उक्ति का पूर्ण भाव “भक्त” बताते हैं l यहाँ पर इब्रानी शब्द, हेसेद (hesed)  का शब्दशः सन्दर्भ परमेश्वर के प्रेम के वाचा से है और उसका अर्थ हो सकता है “जिनको परमेश्वर हमेशा, हमेशा, हमेशा के लिए प्रेम करेगा l”

यहाँ पर वह बात है जो हमें याद रखना है : उस प्रिय पुत्र की तरह हमसे सदा  प्रेम किया जाता है, हम विशेष रूप से अलग किये गए हैं l उसने हमें अनंतकाल के लिए अपनी संतान होने के लिए बुलाया है l

निराश होने की जगह, हम अपने पिता से प्राप्त प्रेम को याद करें जो हमें मुफ्त में मिला है l हम उसके अति प्रिय बच्चे हैं l अंत निराशा नहीं किन्तु शांति और आनंद है (पद.7-8) l वह हमें त्यागता नहीं, और वह कभी भी हमसे प्रेम करना नहीं छोड़ेगा l

धर्मी मार्ग(Godliman Street)

मेरी पत्नी करोलिन और मैं लन्दन में घूमते समय गॉडलिमैंन मार्ग(Godliman street) नामक सड़क पर पहुंचे l हमें बताया गया कि यहाँ एक धर्मी रहता था जिसके कारण इस सड़क का नामकरण “उस धर्मी जन के नाम” पर किया गया l इससे मुझे पुराने नियम की एक कहानी याद आयी l

शाऊल के पिता ने अपने पुत्र और एक सेवक को उनके खोये हुए गधों को खोजने भेजा l युवक बहुत दिनों तक गधों को खोजते रहे किन्तु नहीं ढूँढ़ पाए l

शाऊल हार कर घर लौटनेवाला था, जब उसके सेवक ने शमूएल का गाँव, रामाह की ओर संकेत करके उत्तर दिया, “सुन, इस नगर में परमेश्वर का एक जन है जिसका बड़ा आदरमान होता है; और जो कुछ वह कहता है वह बिना पूरा हुए नहीं रहता l अब हम उधर चलें, संभव है वह हम को हमारा मार्ग बताए कि किधर जाए” (1 शमू. 9:6) l

अपने सम्पूर्ण जीवन और वृद्धावस्था में, शमूएल परमेश्वर के साथ मित्रता और संगति की, और उसके शब्द वजनी और सत्य थे l लोग उसे परमेश्वर के नबी के तौर पर जानते थे l इसलिए शाऊल और उसका सेवक “उस नगर को चले जहाँ परमेश्वर का जन रहता था” (पद.10) l

काश, हमारे जीवन भी ऐसे ही यीशु को प्रगट करें कि हम अपने पड़ोस पर छाप छोड़ें, और कि हमारी धार्मिकता याद रहे!

अंधकार में दबी हुई हँसी

वाशिंगटन पोस्ट  अख़बार में “Tech Titans’ Latest Project: मृत्यु को चुनौती दें, नामक एक लेख में अराइना छा ने मानव जीवन को अनिश्चित काल तक बढ़ाने पर पीटर थील और दूसरे तकनिकी बादशाहों के प्रयास बताती है l वे इस परियोजना पर अरबों खर्च करना चाहते हैं l  

उन्होंने थोड़ी देर कर दी l मृत्यु हार चुकी है! यीशु ने कहा, “पुनरुत्थान और जीवन मैं हूँ; जो कोई मुझ पर विश्वास करता है वह यदि मर भी जाए तौभी जीएगा, और जो कोई जीवित है और मुझ पर विश्वास करता है, वह अनंतकाल तक न मरेगा” (यूहन्ना 11:25-26) l यीशु हमें आश्वस्त करता है कि उसमें विश्वास करनेवाले किसी भी परिस्थिति में कभी नहीं मरेंगे l

बात यह है, हमारे शरीर मर जाएंगे-और यह बदला नहीं जा सकता l किन्तु हमारे व्यक्तित्व के रोमांचक हिस्से, सोच, विवेक बुद्धि, स्मरण करना, प्रेम करना, जिसे हम “मुझको, खुद, और मैं” कहते हैं कभी नहीं मरेंगे l

और यहाँ सर्वोत्तम है : यह एक उपहार है! आपको केवल यीशु का उद्धार स्वीकारना है l इस धारणा के विषय सी.एस. ल्युईस अपनी सोच में इसे “अंधकार में दबी हुई हँसी” कहते हैं-अर्थात् उत्तर इतना सरल है l

कुछ लोगों के अनुसार, “यह अत्यधिक  सरल है l” अच्छा, तो मैं कहता हूँ, यदि आपके जन्म से पूर्व परमेश्वर ने आपसे प्रेम किया और उसकी इच्छा है कि आप हमेशा उसके साथ रहें, तो वह इसे कठिन क्यों बनेएगा?

जहाँ आप हैं वहीं से आरम्भ करें

आज मैंने अपने खलिहान में एकलौता फूल देखा-एक छोटा बैगनी फूल “रेतीले स्थान में अपना मिठास बिखेरते हुए” कवि थॉमस ग्रे की खूबसूरत पंक्तियाँ हैं l निश्चित तौर पर इस ख़ास फूल को पहले किसी ने नहीं देखा था, और शायद आगे भी कभी नहीं देखेगा l यह ख़ूबसूरती ऐसी जगह क्यों? मैं विचारा l

प्रकृति बर्बाद नहीं होती l प्रतिदिन यह अपने सृष्टिकर्ता की सच्चाई, भलाई, और सुन्दरता दर्शाती है l प्रतिदिन प्रकृति परमेश्वर की महिमा को नए और निर्मल तरीके से प्रगट करती है l क्या मैं उसको उस खूबसूरती में देखता हूँ, अथवा उस पर सरसरी नज़र डालकर उसको नज़रन्दाज़ कर देता हूँ l

समस्त प्रकृति सृष्टिकर्ता की खूबसूरती फैलाती है l हमारा प्रतिउत्तर उपासना, प्रशंसा, और धन्यवाद हो सकता है-मक्के के फूल की चमक, सूर्योदय के प्रताप, और एक खास वृक्ष की बनावट के लिए l

सी.एस.ल्युईस गर्मी के एक दिन जंगल में टहलने का वर्णन करते हैं l उसने अभी-अभी अपने मित्र को परमेश्वर के प्रति धन्यवादी होना सिखाया था l उसके पैदल साथी ने निकट की एक छोटी नदी में जाकर झरने में अपना चेहरा और हाथ धोकर पुछा, “क्यों न इसी से आरंभ की जाए?” ल्युईस के अनुसार उसने उस क्षण एक महान सिद्धांत सिखा : “जहाँ आप हैं वहीं से आरम्भ करें l”

एक टपकती जलधारा, वृक्षों के मध्य बहती हवा, एक छोटी चिड़िया, एक छोटा फूल l  क्यों नहीं हम इनसे धन्यवाद आरंभ करें?

गर्जन और बिजली

कई वर्ष पूर्व मेरा मित्र और मैं ऊदबिलाव वाले तालाब में लगातार मछली पकड़ रहे थे जब बारिश शुरू हुई l हम निकट के सफ़ेद पीपल के पेड़ के जंगल में छिपने गए किन्तु बारिश होती रही l उन पेड़ों के हिलते पत्ते आवाज़ कर रहे थे l इसलिए हम उस स्थान को छोड़कर गुज़रते ट्रक को पुकारा l ट्रक का दरवाजा खोलते समय, आवाज़ के साथ बिजली उन पेड़ों पर गिरी जिससे उनके पत्ते और छाल निकल गए, और कुछेक डालियाँ सुलगती रहीं l और  तब शांति हो गई l

हम विचलित हुए और डर गए l

हमारे आइडहो घाटी में बिजली चमकती है और गर्जना होता है l बाल-बाल बचने पर भी- मुझे पसंद है l मुझे यह प्राकृतिक शक्ति पसंद है l वोल्टेज! टकराव! आश्चर्य और विस्मय! पृथ्वी और जो कुछ उसमें है थरथराती है और कांपती है l और फिर शांति l

मुझे बिजली और गर्जन पसंद है क्योंकि ये परमेश्वर की आवाज़ के संकेत हैं (अय्यूब 37:4), वचन द्वारा विस्मयकारक, प्रबल आवाज़ में बोलना l “यहोवा की वाणी आग की लपटों को चीरती है ... यहोवा अपने प्रजा को बल देगा; यहोवा अपनी प्रजा को शांति की आशीष देगा” भजन 29:7,11) l वह हमें सहने की, धीरज धरने की, दयालुता की, शांत रहने की, उठकर जाने की, और कुछ हानि नहीं करने की शक्ति देगा l

शांति का परमेश्वर आपके साथ हो l

यों ही दयालुता के कार्य

कुछ लोगों के अनुसार अमरीकी लेखिका ऐन हर्बर्ट ने 1982 में एक रेस्टोरेंट में मेजपोश पर यों ही यह वाक्यांश लिख दी “यों ही भलाई और खूबसूरती के अर्थहीन काम करें l” उस समय से यह मनोभाव फिल्म और साहित्य द्वारा लोकप्रिय बनाया गया है और हमारे शब्दावली का हिस्सा बन गया है  l

प्रश्न उठता है “क्यों?” हम दया क्यों दिखाएं? यीशु के अनुयायियों के लिए, उत्तर स्पष्ट है : परमेश्वर की करुणा और दयालुता प्रकट करने हेतु l

यह सिद्धांत पुराने नियम की मोआब की एक प्रवासिन, रूत, की कहानी में है l वह विदेशी एक अपरिचित देश में रहती थी जिसकी भाषा और संस्कृति उस से परे थी l इसके अतिरिक्त, वह बहुत निर्धन थी, लोगों के दान पर निर्भर जो उसकी सुधि कम ही लेते थे l

हालाँकि, एक इस्राएली ने रूत पर अनुग्रह करके उसके हृदय को छुआ (रूत 2:13) l वह उसे अपने खेत में अनाज बीनने दिया, किन्तु सरल उपकार से बढ़कर, उसने अपनी सहानुभूति द्वारा परमेश्वर की कोमल करुणा प्रकट की, जिसकी छाया में वह आश्रय पा सकती थी l वह बोअज की दुल्हन बनी, परमेश्वर के परिवार का हिस्सा, और उस वंसज का एक भाग जिससे यीशु था, जो संसार के लिए उद्धार लेकर आया (देखें मत्ती 1:1-16) l

हमें नहीं मालुम कि यीशु के नाम में दया के एक कार्य का क्या परिणाम हो सकता है l

अल्प निद्रा

एक अन्य युग के स्कॉटलैंड के पास्टर, हेनरी दर्बनविले, स्कॉटलैंड के एक सुदूर इलाके में रहनेवाली अपनी ही कलीसिया की एक वृद्ध महिला के विषय बताते हैं l वह एडिनबर्ग शहर देखना चाहती थी, किन्तु उस लम्बे, अँधेरे  सुरंग से भय खाती थी जिसमें से होकर ट्रेन जाती थी l  

एक दिन, हालाँकि, अवस्था ने उसे एडिनबर्ग जाने को मजबूर किया, और ट्रेन तेज गति से शहर की ओर चली जिससे उसकी घबराहट बढ़ गई l किन्तु ट्रेन के सुरंग में पहुँचने से पूर्व उसकी आँख लग गई और वह गहरी नींद में सो गई l जागने पर उसने खुद को शहर में पाया!

यह संभव है कि हम सब मृत्यु का अनुभव नहीं करेंगे l यीशु के लौटने पर यदि हम जीवित रहेंगे, हम “हवा में प्रभु से [मिलेंगे]” (1 थिस्स. 4:13-18) l किन्तु हममें से अनेक मृत्यु द्वारा प्रभु से मिलेंगे और यह विचार बहुत घबराहट पैदा करती है l हमारी चिंता है कि मृत्यु की प्रक्रिया सहना बहुत कठिन है l

अपने उद्धारकर्ता यीशु के आश्वासन द्वारा हमें भरोसा है कि पृथ्वी पर अपनी आँखें बंद करके मृत्यु से गुजरने पर हम परमेश्वर की उपस्थिति में अपनी आँखें खोलेंगे l “हमारी अल्प निद्रा पश्चात हम अनंत में जागेंगे,” जॉन डॉन कहते हैं l

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ख़ामोशी

सहायता ट्रकों के गाँव की टूटी झोपड़ियां हटाते समय चूज़े भागने लगे l नंगे पाँव बच्चे घूरते रहे l बारिश से उजड़ी “सड़क” पर यातायात कम थी l

अचानक, काफिले ने दीवारों से घिरी मेयर का बड़ा मकान देखा जो खाली था l लोगों के पास बुनियादी ज़रूरतें नहीं थीं जबकि वह दूर शहर में आलिशान मकान में रहता था l

ऐसा अन्याय हमें क्रोधित करता है, जिससे परमेश्वर का नबी भी क्रोधित हुआ l व्यापक शोषण देखकर हबक्कूक ने कहा, “हे यहोवा, मैं कब तक तेरी दोहाई देता रहूँगा, और तू न सुनेगा?” (हबक्कूक 1:2) l किन्तु परमेश्वर ने ध्यान  देकर कहा, “हाय उस पर जो पराया धन छीन छीनकर धनवान हो जाता है? ... जो अपने घर के लिए अन्याय के लाभ का लोभी है” (2:6, 9) l न्याय निकट है!

हम दूसरों पर परमेश्वर का न्याय चाहते हैं, किन्तु हबक्कूक की एक मुख्य बात हमें रोकती है : “यहोवा अपने पवित्र मंदिर में है; समस्त पृथ्वी उसके सामने शांत रहे” (2:20) l समस्त  पृथ्वी l शोषित और उत्पीड़क l कभी-कभी परमेश्वर की प्रत्यक्ष खामोशी का उचित प्रतिउत्तर ... ख़ामोशी है!

ख़ामोशी क्यों? क्योंकि हम अपनी आत्मिक दरिद्रता नहीं देखते l हम ख़ामोशी में पवित्र परमेश्वर के सामने अपने पाप देख सकेंगे l   

हबक्कूक की तरह हम भी परमेश्वर पर भरोसा सीखें l हम उसके सब मार्ग नहीं जानते, किन्तु जानते हैं कि वह भला है l सब कुछ उसके नियंत्रण और समय में है l  

थोड़ा सुख बांटना

एक सहेली ने घर में बने मिट्टी के बर्तन भेजे l आते समय बहुमूल्य चीजें टूट गईं l एक कप के कुछ बड़े टुकड़े, और टुकड़े और मिट्टी की ढेर l

मेरे पति ने टुकड़ों को जोड़ दिया l मैंने इस जुड़े हुए खूबसूरत कप को सजा दिया l इस छिद्रित-जोड़े हुए मिट्टी के बर्तन समान, मेरे दाग़ भी प्रमाण हैं कि परमेश्वर मुझे कठिन समय से निकाला है, फिर भी मैं मजबूती से खड़ी हो सकती हूँ l सुख का वह प्याला याद दिलाता है कि मेरे जीवन में और मेरे जीवन के द्वारा परमेश्वर का काम दूसरों को उनके दुःख में सहायता पहुँचाती है l 

प्रेरित पौलुस परमेश्वर की प्रशंसा करता हैं क्योंकि वह “दया का पिता और सब प्रकार की शांति का परमेश्वर है” (2 कुरिं. 1:3) l प्रभु हमारे आजमाइशों और दुखों का उपयोग हमें अपने समान बनाने के लिए करता है l हमारे दुखों में उसकी सांत्वना से हम दूसरों को बताते हैं कि उसने हमारी ज़रूरतें कैसे पूरी की हैं (पद.4) l

मसीह के दुखों पर विचार करके, हम अपने दुखों में दृढ़ रहकर, भरोसेमंद हैं कि परमेश्वर हमारे अनुभवों से हमें और दूसरों को धीरजवंत धैर हेतु सामर्थी बनाता है (पद.5-7) l पौलुस की तरह, हम सुख पाते हैं कि प्रभु हमारे संघर्षों को अपनी महिमा के लिए उपयोग करता है l हम उसकी सांत्वना के भागीदार होकर पीड़ितों के लिए आश्वासन भरी आशा ला सकते हैं l

मुस्कराने का कारण

कार्यस्थल में उत्साहवर्धक शब्द अर्थपूर्ण होते हैं l कार्यकर्ताओं का परस्पर संवाद ग्राहक की संतुष्टि, कंपनी का लाभ, और सहकर्मी के मुल्यांकन को प्रभावित करता है l अध्ययन अनुसार  सबसे प्रभावशाली कार्य समूहों के सदस्य एक दूसरे को अस्वीकृति, असहमति, अथवा कटाक्ष के बदले छः गुना अधिक समर्थन देते हैं l

पौलुस ने अनुभव से संबंधों और परिणामों को आकार देने में शब्दों के महत्त्व को सीखा l दमिश्क के मार्ग पर मसीह से मुलाकात से पहले, उसके शब्द और कार्य यीशु के अनुयायियों को आतंकित करते थे l किन्तु थिस्सलुनीकियों को पत्री लिखने तक, उसके हृदय में परमेश्वर के काम से वह महान उत्साहित करनेवाला बन गया था l अब वह अपने नमूने से अपने पाठकों को परस्पर उत्साहित करने का आग्रह किया l चापलूसी से सावधान रहते हुए, उसने दूसरों को स्वीकार करने और मसीह की आत्मा को प्रतिबिंबित करना दिखाया l  

इस प्रक्रिया में, पौलुस अपने पाठकों को उत्साहवर्धन का श्रोत बताता है l उसने पाया कि अपने को परमेश्वर को सौंपने से, जो हमसे प्रयाप्त प्रेम करके क्रूस पर मरकर, हमें सुख देने, क्षमा करने और प्रेरित करने, और परस्पर प्रेम भरी चुनौती देने का कारण देता है (1 थिस्स. 5:10-11) l

पौलुस हमें बताता है कि परस्पर उत्साहित करना परस्पर परमेश्वर का धीरज और भलाई का स्वाद चखने का एक मार्ग है l