Our Authors

सब कुछ देखें

Articles by ग्लेन पैकियम

परमेश्वर के संसार को उन्नत करना

“पापा, आपको काम पर क्यों जाना है?” मेरी किशोरी पुत्री का सवाल मेरे साथ उसके खेलने की उसकी इच्छा से प्रेरित था l मैं काम को छोड़कर उसके साथ समय बिताना पसंद करता, लेकिन काम की लम्बी बढ़ती सूची थी जिन पर मुझे ध्यान देना ज़रूरी था l सवाल, फिर भी, अच्छा है l हम काम क्यों करते हैं? क्या ये केवल अपने लिए और अपने प्रियजनों के लिए प्रबंध करना है? उस श्रम के विषय क्या जो अवैतनिक है  – हम ऐसा क्यों करते हैं?

उत्पत्ति 2 हमें बताता है कि परमेश्वर ने पहले मानव को वाटिका में इसलिए रखा कि वह “उसमें काम करे और उसकी रक्षा करे” (पद.15) l मेरे ससुर एक किसान हैं, और वह अक्सर मुझसे भूमि और पशुधन के प्रति अपने सच्चे प्यार के विषय बताते हैं l यह सुन्दर है, लेकिन यह उनके लिए अनवरत सवाल छोड़ देता है जो अपने काम से प्यार नहीं करते हैं l क्यों परमेश्वर ने हमें एक ख़ास स्थान पर एक ख़ास काम के साथ रखा है?

उत्पत्ति 1 हमें उत्तर देता है l हमें परमेश्वर के स्वरुप में रचा गया है कि हम उसके द्वारा बनाए गयी सृष्टि की सावधानी से रखवाली करें (पद.26) l सृष्टि की रचना की गैर-मसीही कहानियाँ बताती हैं कि ‘कथित ईश्वरों” ने मनुष्यों को अपने दास होने के लिए बनाया है l उत्पत्ति घोषणा करती है कि एकमात्र सच्चे परमेश्वर ने मनुष्यों को अपना प्रतिनिधि बनाया है – उसके पक्ष में उसकी सृष्टि की देखभाल करने के लिए l काश हम सब उसकी बुद्धिमान और प्रेमी व्यवस्था को इस संसार में प्रतिबिंबित करें l काम परमेश्वर के संसार में उसकी महिमा के लिए उसे उन्नत करने की एक बुलाहट है l

कीमती आनंद

डिजिटल स्वर की मधुरता पर, हम सभी छह जन हरकत में आ गए l कुछ ने जूते पहन लिए, दूसरे नंगे पाँव दरवाजे की ओर दौड़े l पल भर में हम सभी तेजी से नीचे दौड़ते हुए सड़क पर आइसक्रीम के ट्रक का पीछा कर रहे थे l यह गर्मी के मौसम का पहला गर्म दिन था, और ठन्डे, मीठे दावत(treat) के साथ जश्न मनाने का इससे अच्छा तरीका नहीं था! ऐसे चीजें हैं जो हम आनंद के कारण करते हैं, अनुशासन या दायित्व के कारण नहीं  l

मत्ती 13:44-46 में पाए गए दृष्टान्तों की जोड़ी में, कुछ पाने के लिए सब कुछ बेचने पर बल दिया गया है l हम सोचते होंगे कि ये कहानियां त्याग के विषय है l लेकिन वह बात नहीं है l वास्तव में, पहली कहानी यह घोषणा करती है कि यह “आनंद” था जिसके कारण उस आदमी को सब कुछ बेचकर खेत खरीदना पड़ा l आनंद परिवर्तन लाता है – अपराध बोध या फ़र्ज़ नहीं l

यीशु हमारे जीवनों का एक खण्ड नहीं है; उसका पूरा दावा हम पर है l कहानियों में दोनों पुरुषों ने “सब कुछ” बेच दिया (पद.44) l लेकिन यहाँ पर सबसे अच्छा हिस्सा है : सब कुछ बेचने का वास्तविक परिणाम लाभ है l शायद हमने अनुमान नहीं लगाया होगा l क्या मसीही जीवन क्रूस उठाने के विषय नहीं है? हाँ l यह है l लेकिन जब हमारी मृत्यु होती है, हम जीते हैं ; जब हम अपना जीवन खो देते हैं, तो हम इसे पा लेते हैं l जब हम “सब कुछ बेच देते है,” हम सबसे बड़ा धन पाते हैं : यीशु! आनंद ही कारण है; समर्पण प्रत्युत्तर है l

यीशु को जानना इनाम है l

खुद को कम आंकना

वह युवा अपनी टीम का कप्तान बन गया l पेशेवर स्पोर्ट्स दल का नेतृत्व अब मृदुल-शिष्ट युवा कर रहा था, जिसे शायद ही दाढ़ी बनाने की ज़रूरत थी l उसकी पहली प्रेस कांफ्रेंस प्रभावशाली नहीं थी l वह अपने कोच और अपने साथियों की ओर झुका रहा, और वह अपनी जिम्मेदारी पूरी कर रहा है के विषय घिसा पिटा उत्तर बुदबुदाता रहा l टीम ने उस मौसम में खराब प्रदर्शन किया, और इसके अंत तक युवा कप्तान बदल दिया गया l वह यह नहीं समझ पाया कि नेतृत्व करने का अधिकार उसे सौंपा गया है, या शायद उसे कभी विश्वास नहीं हुआ कि वह ऐसा कर सकता है l

अपनी विफलताओं के कारण, शाऊल “अपनी [ही] दृष्टि में छोटा था” (1 शमूएल 15:17) – जो एक आदमी के बारे में कहने के लिए एक मजेदार बात है जिसे लम्बा बताया गया है l वह वास्तव में उल्लेखनीय रूप से बाकी लोगों से बेहतर था (9:2) l फिर भी वह उस तरीके से अपने को नहीं देखता था l वास्तव में, उस अध्याय में उसके कार्यों ने उसे लोगों की स्वीकृति जीतने की कोशिश करते हुए दिखाया है l वह पूरी तरह से समझ नहीं पाया था कि परमेश्वर ने – लोगों ने नहीं -  उसे चुना था और उसे एक मिशन(उद्देश्य) दिया था l

लेकिन शाऊल की गलती हर इंसान की विफलता की एक तस्वीर है : हम भूल सकते हैं कि उसके राज्य को प्रतिबिंबित करने के लिए हम परमेश्वर के स्वरुप में बनाए गए हैं, और ऐसा न हो कि हम अपने अधिकार का दुरुपयोग करते हुए अंत करें अर्थात् संसार में विनाश l इसे पूर्ववत करने के लिए, हमें परमेश्वर की ओर लौटने की आवशयकता है : पिता को हमें अपने प्रेम से परिभाषित करने दें, उसे हमें अपनी आत्मा से भरने दें, और यीशु को हमें दुनिया में भेजने दें l  

जहां चुनाव ले जाता है

किसी भी मोबाइल सेवा और मार्ग नक़्शे के बिना, हम आरम्भ से ही एक निश्चित नक़्शे की याद रखकर उसी के मार्गदर्शन में चल रहे थे l एक घंटे से अधिक समय के बाद, हम जंगल में से पार्किंग स्थल में पहुँच गए l मोड़ को भूलने पर जिससे हम आधी मील के भीतर यात्रा पूरी कर लेते, हमें कहीं अधिक लम्बी पैदल यात्रा करनी पड़ी l
जीवन ऐसा हो सकता है : हमें सरलता से यह नहीं पूछना है कि क्या कुछ सही है या गलत, परन्तु यह कहाँ ले जाएगा l भजन 1 जीवन जीने के दो तरीकों की तुलता करता है – धर्मी का (वे जो परमेशवर से प्यार करते हैं) और दुष्ट का (परमेश्वर से प्रेम करनेवालों के शत्रु) l धर्मी वृक्ष के समान फलते-फूलते हैं, परन्तु दुष्ट भूसी के समान उड़ जाते हैं (पद.3-4) l यह भजन प्रगट करता है कि फलना फूलना वास्तव में कैसा होता है l जो ऐसा जीवन जीता है वह नवीनीकरण और जीवन के लिए परमेश्वर पर निर्भर रहता है l
इसलिए हम किस प्रकार इस प्रकार का व्यक्ति बन सकते हैं? दूसरी चीजों में, भजन 1 हमसे विनाशकारी संबंधों और अस्वास्थ्यकर आदतों से अलग रहने और परमेश्वर के निर्देशों में आनंदित रहने का आग्रह करता है (पद.2) l आखिरकार, हमारे फलने फूलने का कारण परमेश्वर का हम पर ध्यान देना है : “यहोवा धर्मियों का मार्ग जानता है” (पद.6) l
अपने सारे मार्ग परमेश्वर पर डाल दो
,
उसे पुराने नमूनों से आपको पुनः निर्दिष्ट(
re-direct)
करने दें जो व्यर्थ की ओर ले जाते हैं और पवित्र वचन को दरिया बनने दें जो आपके हृदय की जड़ प्रणाली को पोषित करता है
l

धन्य रोटी

जब हमारी सबसे बड़ी बेटी किशोरी हो गयी, मेरी पत्नी और मैंने उसे एक दैनिकी दी जो हम उसके जन्म से अभी तक लिख रहे थे l हमने उसके पसंद और नापसंद, विशिष्टताएँ और यादगार एक पंक्ति चुटकुले लिखे थे l कहीं-कहीं पर प्रविष्ठियां पत्र की तरह हो गए थे, जिसमें यह वर्णन था कि हम उसमें क्या देखते हैं और किस प्रकार हम परमेश्वर को उसमें काम करते देखते हैं l जब हमने उस दैनिकी को उसे तेरह साल की उम्र में दिया, वह मंत्रमुग्ध हो गयी l उसे अपनी पहचान के मूल भाग का एक महत्वपूर्ण हिस्सा जानने का उपहार दिया गया था l 

रोटी के रूप में कुछ सामान्य वस्तु को आशीष देने में, यीशु उसकी पहचान प्रकट कर रहा था l यह – समस्त सृष्टि के साथ – किस बात को प्रतिबिंबित करने के लिए बनाया गया था : परमेश्वर की महिमा l मैं मानना हूँ कि यीशु भौतिक संसार के भविष्य की ओर भी इशारा कर रहा था l सारी सृष्टि एक दिन परमेश्वर की महिमा से भर जाएगी l इसलिए रोटी पर आशीष देने में (मत्ती 26:26), यीशु सृष्टि के आरम्भ और नियति की ओर संकेत कर रहा था (रोमियों 8:21-22) l 

हो सकता है कि आपकी कहानी का “आरम्भ” गड़बड़ हो l शायद आपको नहीं लगता कि भविष्य में बहुत कुछ है l लेकिन एक बड़ी कहानी है l यह एक ऐसे परमेश्वर की कहानी है जिसने आपको उद्देश्य पर और एक उद्देश्य के लिए बनाया, जिसने आप में आनंद लिया l यह एक ऐसे परमेश्वर की कहानी है जो आपको बचाने के लिए आया (मत्ती 26:28); एक परमेश्वर जिसने आपको नूतन बनाने के लिए और आपकी पहचान लौटने के लिए अपनी आत्मा आपमें डाल दी l यह एक ऐसे परमेश्वर की कहानी है जो आपको आशीष देना चाहता है l

साझा करने के लिए तोड़ा गया

एक कार दुर्घटना में पत्नी की मृत्यु के बाद वो और मैं प्रत्येक गुरुवार को मुलाकात करते थे l कभी-कभी उसके पास ऐसे प्रश्न होते थे जिसके उत्तर मौजूद नहीं हैं; कभी-कभी वह यादों के साथ होता था जिनके साथ वह फिर से जीना चाहता था l समय के साथ, उसने स्वीकार किया कि भले ही दुर्घटना हमारे टूटे संसार का एक परिणाम था, परमेश्वर इसके मध्य काम कर सकता था l कुछ साल बाद, उसने हमारे चर्च में दुःख और कैसे अच्छी तरह विलाप किया जा सकता है, के बारे में एक कक्षा को पढ़ाया l जल्द ही, वह नुक्सान का अनुभव कर रहे लोगों के लिए हमारा भरोसेमंद मार्गदर्शक बन गया l कभी-कभी जब हमें ऐसा महसूस नहीं होता है कि हमारे पास देने के लिए कुछ है तो परमेश्वर हमारे “अप्रयाप्त” को लेकर “पर्याप्त से अधिक” बना देता है l

यीशु ने अपने शिष्यों से कहा कि वे लोगों को कुछ खाने के लिए दें l उन्होंने विरोध किया कि देने के लिए कुछ नहीं था; यीशु ने उनकी आपूर्ति को गुणित किया और फिर चेलों की ओर मुड़कर उन्हें वह रोटी दिया जैसे कि यह कहना हो, “तुम ही उन्हें खाने को दो” (लूका 9:13) l मसीह आश्चर्यक्रम करेगा, लेकिन वह अक्सर हमें शामिल करने का विकल्प चुनता है l 

यीशु हमसे कहते है, “तुम खुद को और जो तुम्हारे पास है मेरे हाथों में सौंप दो l अपना टूटा हुआ जीवन l अपनी कहानी l अपनी दुर्बलता और अपनी विफलता, अपने पीड़ा और अपना दुःख l मेरे हाथों में सौंप दो l तुम आश्चर्यचकित होगे कि मैं इसके साथ क्या कर सकता हूँ l” यीशु जानता है कि हमारी शुन्यता से बाहर, वह पूर्णता ला सकता है l हमारी कमजोरी से, वह अपनी ताकत को प्रकट कर सकता है l