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Articles by जॉन ब्लैस

सब दे दें जो आपके पास है

अनुमाप परिवर्तन(Scaling) l यह फिटनेस/स्वस्थता की दुनिया में उपयोग किया जाने वाला एक शब्द है जो किसी को भी भाग लेने की अनुमति देता है l यदि विशिष्ट व्यायाम एक पुश-अप है, उदाहरण के लिए, तो शायद आप एक बार में दस कर सकते हैं, लेकिन मैं केवल चार कर सकता हूँ l मेरे लिए प्रशिक्षक का प्रोत्साहन उस समय मेरी फिटनेस के स्केल के अनुसार पुश-अप्स वापस करना होगा l हम सभी एक ही स्तर पर नहीं हैं, लेकिन हम सभी एक ही दिशा में आगे बढ़ सकते हैं l दूसरे शब्दों में, वह कहेगी, “अपनी पूरी ताकत के साथ अपने चार पुश-अप्स करें l किसी और से अपनी तुलना न करें l अब गति को स्केल करें, जो आप कर सकते हैं उसे करते रहें, और आप चकित हो जाएंगे कि उतने ही समय में आप सात कर रहे हैं, और यहाँ तक कि एक दिन में, दस तक कर सकते हैं l”

जब देने की बात आती है, तो प्रेरित पौलुस स्पष्ट था : “परमेश्वर हर्ष से देनेवाले से प्रेम रखता है” (2 कुरिन्थियों 9:7) l  लेकिन कुरिन्थुस के विश्वासियों के लिए और हमारे लिए उसका  प्रोत्साहन स्केलिंग का बदलाव है l “हर एक जन जैसा मन में ठाने वैसा ही दान करे”(पद.7) l हम में से प्रत्येक अपने आप को देने के विभिन्न स्तरों पर देखते हैं, और कभी-कभी वे स्तर समय के साथ बदलते हैं l करुणा फायदेमंद नहीं है, लेकिन रवैया/व्यवहार है l आप जहाँ हैं, उसके आधार पर उदारता से दें (पद.6) l हमारे परमेश्वर ने वादा किया है कि इस तरह के हर्ष से देंनेवाले का अनुशासित अभ्यास हर तरह से एक समृद्ध जीवन के साथ समृद्धि लाता है जिसके परिणामस्वरूप “परमेश्वर का धन्यवाद” (पद.11) होता है l

पिता की राह पर

एक प्राचीन कहानी एक लालची, अमीर ज़मींदार के विषय बतायी गई है जिसने एक गरीब किसान को घर के साथ कुआँ बेचा l अगले दिन जब किसान ने अपने खेतों के लिए पानी खींचना चाहा, तो ज़मींदार ने यह कहते हुए आपत्ति जताई कि उसने केवल कुआँ बेचा है, उसमें का पानी नहीं l व्याकुल होकर, किसान ने राजा अकबर के दरबार में न्याय माँगा l इस अज़ीबोगरीब मामले को सुनने के बाद, राजा ने सलाह के लिए अपने बुद्धिमान मंत्री बीरबल की ओर रुख किया l बीरबल ने ज़मींदार से कहा, “सच है, कुएँ का पानी किसान का नहीं है और  कुआँ तुम्हारा नहीं है l इसलिए यदि तुम किसान के कुएँ में पानी जमा करना चाहते हो तो भला है कि तुम उस जगह के लिए किराए का भुगतान करो l”  तुरंत जमींदार समझ गया कि वह मात खा गया है, और उसने घर और कुएँ पर अपने दावों को छोड़ दिया l

शमूएल ने भी अपने पुत्रों को इस्राएल के ऊपर न्यायी नियुक्त किया, और वे लालच से प्रेरित थे l उसके बेटे “उसकी राह पर न चले” (1 शमूएल 8:3) l शमूएल की ईमानदारी की तुलना में,  उसके बेटे “लालच में आकर घुस लेते और न्याय बिगाड़ते थे” और अपने लाभ के लिए अपने स्थिति का उपयोग करने लगे l इस अन्यायपूर्ण व्यवहार ने इस्राएल के वृद्धों और परमेश्वर को नाराज़ किया, और राजाओं का एक क्रम आरंभ हुआ जिससे पुराना नियम के पन्ने भरे पड़े हैं (पद.4-5) l

परमेश्वर के तरीकों पर चलने से इनकार करना उन मूल्यों के विकृत होने की अनुमति देता है, और परिणामस्वरूप अन्याय पनपता है l उसके तरीके से चलने का मतलब ईमानदारी और न्याय केवल हमारे शब्दों में ही नहीं बल्कि हमारे कर्मों में भी स्पष्ट रूप से देखा जाता है l वे अच्छे काम कभी अपने आप में अंत नहीं होते, लेकिन हमेशा ऐसे होते है कि दूसरे देखेंगे और हमारे स्वर्गिक पिता की महिमा करेंगे l  

केवल एक चिंगारी

“हम पुस्तकालय में हैं, और ठीक बाहर लपटों को देख सकते हैं!” वह डर गयी थी l हम इसे उसकी आवाज़ में सुन सकते थे l हम उसकी आवाज़ पहचानते हैं - हमारी बेटी की आवाज़ l इसके साथ ही हम जानते थे कि उसका कॉलेज परिसर उसके और उसके लगभग 3,000 साथी विद्यार्थियों के लिए सुरक्षित जगह थी l 2018 में कॉलेज परिसर में किसी की अपेक्षा से कहीं अधिक तेजी से आग फ़ैल गयी – जिसमें अग्नि शामकों की अपेक्षा सबसे कम थी  l अमरीका में इस स्थान में रिकॉर्ड गर्मी और शुष्क परिस्थितियों के साथ निसंदेह छोटी चिंगारियाँ ही थीं जिन्होंने अंततः 97,000 एकड़ को जला डाला, 1,600 से अधिक भवनों को नष्ट कर डाला और जिससे तीन लोगों की मृत्यु हुई l आग के बुझा दिए जाने के बाद ली गयी तस्वीरों में सामान्य हरे-भरे तट चंद्रमा की बंजर सतह सी दिखाई दे रही थी l

याकूब की पुस्तक में, लेखक ने कुछ छोटी लेकिन शक्तिशाली चीजों का नाम लिया है : “घोड़ों के मुँह में लगाम(bit)” और जहाज़ के पतवार(rudder) (3:3-4) l और जब कि परिचित, ये उदाहरण कुछ हद तक हमसे दूर हो गए हैं l लेकिन फिर वह घर के करीब एक नाम लेता है, कुछ छोटी वस्तु जो हर इंसान के पास होती है – एक जीभ l और जब यह अध्याय प्राथमिक  रूप से शिक्षकों को निर्देशित किया जाता है (पद.1), तो इसका लागू किया जाना जल्दी से हम में से प्रत्येक तक विस्तारित होता है l जीभ, जैसा कि छोटा है, विनाशकारी परिणाम पैदा कर सकता है l

हमारी छोटी जीभें शक्तिशाली हैं, परन्तु हमारा बड़ा परमेश्वर अधिक शक्तिशाली है l दैनिक आधार पर उसकी सहायता हमारे शब्दों को रोकने और निर्देशित करने की शक्ति प्रदान करती है l

ठीक सीधे

एक ट्रेक्टर को सीधी कतार में चलाने के लिए एक किसान को एक स्थिर दृष्टि और एक दृढ़ भुजा की ज़रूरत होती थी l लेकिन दिन के अंत में बेहतरीन दृष्टि भी पिछली करारों पर नयी कतार बना देती थीं और सबसे मजबूत भुजाएं भी थक जाते थे l लेकिन अब एक स्वपरिचालन  (autosteer) मौजूद है – एक जी.पी.एस. आधारित तकनीक जो रोपण, खेती और छिड़काव करते समय एक इंच के भीतर सटीकता की अनुमति देता है l यह अविश्वसनीय रूप से कुशल है और इसे हाथों से चलाने की आवश्यकता नहीं होती l बस एक विशाल ट्रेक्टर में बैठने की कल्पना करें और स्टीयरिंग पकड़ने के बजाय, मानों आप चिकन 65(चिकन व्यंजन) के एक टांग को पकड़े हुए होते हैं l एक अद्भुत उपकरण जो आपको सीधे आगे की ओर बढ़ाता जाता है l

आप योशिय्याह का नाम याद करते होंगे l जब वह केवल “आठ वर्ष का था” (2 राजा 22:1) तो उसे राजा बनाया गया था l सालों बाद, अपने चौबीस से छब्बीस साल की उम्र में, मंदिर का महायाजक हिलकिय्याह को “व्यवस्था की पुस्तक” मिली (पद.8) l उसके बाद यह युवा राजा के समक्ष पढ़ा गया, जिसने परमेश्वर के प्रति अपने पूर्वजों की अवज्ञा से दुखित होकर अपने वस्त्र फाड़े l योशिय्याह ने वह करने की ठान ली जो “यहोवा की दृष्टि में थी है” (पद.2) l यह पुस्तक लोगों का मार्गदर्शन करने का उपकरण बन गयी, ताकि दायें या बाएं मुड़ना न हो l परमेश्वर के निर्देश चीजों को सही करने के लिए थे l

दिन-ब-दिन हमें मार्गदर्शन करने के लिए पवित्रशास्त्र को अनुमति देना हमारे जीवन को परमेश्वर और उसकी इच्छा को जानने के अनुरूप रखता है l बाइबल एक अद्भुत हथियार है, जिसका अगर पालन किया जाए, तो हम सीधे आगे बढ़ते रहते हैं l

मेरे पिता की सन्तान

उन्होंने धुंधली तस्वीर को देखा, फिर मुझे देखा, फिर मेरे पिता की ओर देखा, फिर से मेरी ओर देखा, और उसके बाद फिर से मेरे पिता की ओर l उनकी आँखें विस्मय के साथ पूरी तौर से खुल गयीं l “पापा, आप बिलकुल दादा के समान दिखते हो जब वे जवान थे!” मेरे पिता और मैं दांत दिखाते हुए मुस्कुराए क्योंकि यह कुछ ऐसा था जिसे हम लम्बे समय से जानते थे, लेकिन यह हाल ही तक ज्ञात नहीं था जब तक कि मेरे बच्चों को यह पता नहीं चला l जबकि मेरे पिता और मैं अलग-अलग लोग हैं, मुझे देखने के लिए एक बहुत ही वास्तविक अर्थ में मेरे पिता को एक छोटे आदमी के रूप में देखना है : लम्बी दुबली पतली बनावट; काले बालों का पूरा सिर; बाहर की ओर निकली हुई नाक, और अपेक्षा से बड़े कान l नहीं, मैं मेरा पिता नहीं हूँ, परन्तु मैं निश्चित रूप में अपने पिता का बेटा हूँ l

यीशु के एक शिष्य, फिलिप्पुस ने एक बार पुछा, “हे प्रभु, पिता को हमें दिखा दे” (यूहन्ना 14:8) l और जब कि यह पहली बार नहीं था जब यीशु ने संकेत दिया था, उसकी प्रतिक्रिया अभी भी उसके ठहरने का कारण थी : “जिसने मुझे देखा है उसने पिता को देखा है” (यूहन्ना 14:9) l अपने पिता और मेरे बीच शारीरिक समानता के विपरीत, जो यीशु यहाँ कहता है वह क्रांतिकारी है : “क्या तू विश्वास नहीं करता कि मैं पिता में हूँ और पिता मुझ में है?” (पद.10) l उसका बिलकुल वही तत्व और चरित्र उसके पिता के समान ही था l

उस क्षण यीशु अपने प्रिय शिष्यों और हम सब से बहुत ही स्पष्ट बोल रहा था : यदि तुम जानना चाहते हैं कि परमेश्वर कैसा है, मुझे देखो l

मुझे एक कहानी सुनाइये

एक समय की बात है l ये पांच शब्द सम्पूर्ण संसार में शायद सबसे शक्तिशाली शब्दों में से हैं l एक लड़के के रूप में मेरी कुछ आरंभिक यादों में उस प्रबल वाक्यांश में भिन्नता है l मेरी माँ एक दिन बाइबल की कहानियों की एक बड़े, हार्ड कवर वाले सचित्र संस्करण [पुस्तक] के साथ आयी  - माई गुड शेफर्ड बाइबल स्टोरी बुक l बत्तियाँ बुझने से पहले, प्रत्येक शाम के समय, मेरा भाई और मैं उम्मीद के साथ बैठते थे जब वह बहुत समय पहले के एक काल के विषय पढ़कर सुनाती थी जो रोचक लोगों और उनसे प्रेम करनेवाले परमेश्वर के विषय होता था l वे कहानियाँ एक लेंस बन गयीं कि हम इस बड़े महान संसार को कैसे देखते हैं l
निर्विवाद रूप से महानतम कथाकार? नासरत का यीशु l वह जानता था कि हममें से हर के भीतर कहानियों के प्रति एक गहरा लगाव है, इसलिए उसने लगातार अपने सुसमाचार को संप्रेषित करने के लिए उसको माध्यम के रूप में उपयोग किया : एक समय की बात है एक व्यक्ति था जो “भूमि पर बीज छींटे” (मरकुस 4:26) l एक समय की बात है “एक राई का दाना था” (पद.31), और एक के बाद एक कहानी l मरकुस का सुसमाचार स्पष्टता से संकेत करता है कि यीशु ने साधारण लोगों के साथ अपने संवाद में संसार को और स्पष्टता से देखने में और उनसे प्रेम करनेवाले परमेश्वर को अधिक गहराई से समझने के लिए उनकी मदद करने में कहानियों का उपयोग किया (पद.34) l
परमेश्वर की दया और कृपा का सुसमाचार दूसरों के साथ साझा करने की इच्छा रखने के लिए यह समझदारी है l कहानी के उपयोग का विरोध करना लगभग असंभव है l

हर्ष से देनेवाले

कई साल पहले, मेरी पत्नी को खरीदी गयी किसी चीज़ से थोड़ी छूट मिली थी l यह कुछ ऐसा नहीं था जिसकी उसने अपेक्षा की थी यह सिर्फ ई-मेल में दिखा था l लगभग उसी समय, एक अच्छे मित्र ने उसके साथ दूसरे देश में अपार आवश्यकताओं के साथमहिलाओं के विषय साझा किया, उद्यमी-दिमाग वाली महिलाएँ जो शिक्षा और व्यवसाय के माध्यम से बेहतर बनाने की कोशिश कर रहीं थीं l हालाँकि, जैसा कि अक्सर होता है, उनका पहला अवरोध वित्तीय था l 

मेरी पत्नी ने उस छूट को लिया और इन महिलाओं की मदद के लिए समर्पित सेवा को एक लघु-ऋण दिया l ऋण के चुका देने के बाद, उसने फिर से बार-बार ऋण दिया, और अब तक इस तरह के सत्ताईस निवेश कर चुकी है l मेरी पत्नी कई चीजों का आनंद लेती है, परन्तुउन महिलाओं के जीवनों में जिनसे उसकी मुलाकात कभी नहीं हुयी है, खुशहाली के विषय अपडेट प्राप्त करने जैसी मुस्कराहट शायद ही उसके चेहरे पे दिखाई देती है l 

हमें अक्सर इस वाक्याँश के अंतिम शब्दों पर जोर दिया जाना सुनाई देता है – “परमेश्वर हर्ष से देनेवाले से प्रेम करता है” (2 कुरिन्थियों 9:7) – और सही भी है l लेकिन हमारे देने के बारे में एक विशिष्ट गुण है – यह “अनिच्छा से या मज़बूरी के तहत” नहीं किया जाना चाहिए, और हमें “किफ़ायत” से बोने के लिए नहीं बुलाया गया है (पद.6-7) l एक शब्द में, हमारा देना “हर्ष से” होना चाहिए l और जबकि हम में से प्रत्येक थोड़ा अलग तरीके से देगा, हमारे चेहरे हमारे हर्ष के सबूत बताने के स्थान हैं l 

अत्यधिक विशेषता होना

मशीन ऑपरेटर्स के पास एक सामान्य खतरा होता है जो उनके विभाग के जुड़ा होता है – दुर्घटनाओं का खतरा l एक सामान्य चोट उँगलियों का भारी मशीनों के पहियों के बीच आ जाना होता है; खासतौर पर अंगूठे की हानि बहुत कठिन हो सकती है l यह जीविका का अंत करने वाली चोट नहीं है, परन्तु अंगूठे का नहीं होना चीजों को बदल देती है l अपने अंगूठे का उपयोग किये बिना, अपने दांतों को ब्रश करने या शर्ट का बटन लगाने या अपने बालों को कंघी करने या अपने जूते बाधने या यहाँ तक कि खाने की कोशिश करें l आपके शरीर के उस छोटे से अनदेखे सदस्य की महत्वपूर्ण भूमिका होती है l

प्रेरित पौलुस चर्च में एक समान परिदृश्य को इंगित करता है l जो अक्सर कम दिखाई देते हैं और अक्सर कम मुखर सदस्य कभी-कभी दूसरों से “मुझे आपकी ज़रूरत नहीं है” की प्रतिक्रिया अनुभव करते हैं (1 कुरिन्थियों `12:21) l आमतौर पर यह अव्यक्त होता है, परन्तु कई बार ऐसा प्रगट रूप में कहा जाता है l 

परमेश्वर हमें एक दूसरे के लिए समान चिंता और सम्मान करने के लिए कहता है (पद.25) l  हम में से हर एक मसीह के शरीर का अंग है (पद.27), प्राप्त वरदान के बावजूद, और हमें एक दूसरे की ज़रूरत है l एक प्रकार से हम में से कुछ आखें और कान हैं, और हम में से कुछ अंगूठे हैं l लेकिन हम में से प्रत्येक मसीह की देह में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, कभी-कभी जो आँखों से जितना दिखाई देता है उससे कहीं अधिक l 

हम मिट्टी हैं

युवा पिता थक चुका था l आइसक्रीम! आइसक्रीम! उसका छोटा बच्चा चिल्लाया l भीड़-भाड़ वाले मॉल के बीच में संकट ने आसपास के दुकानदारों का ध्यान खींचना शुरू कर दिया l “ठीक है, लेकिन हमें पहले मम्मी के लिए कुछ करने की ज़रूरत है, ठीक?” पिता ने कहा l “नहीं! आइसक्रीम!” और फिर वह उनके पास आई : एक छोटी, अच्छी पोषक वाली महिला जिसकी जूती और हैंडबैग मैच कर रहे थे l पिता ने कहा, “वह बहुत तड़क रहा है l” महिला ने मुस्कुराते हुए उत्तर दिया, “वास्तव में, ऐसा प्रतीत हो रहा है कि आपका बेटा इस बड़े तड़क का सामना कर रहा है l वह इतना छोटा है न भूलें l उसको आपके धैर्य और आपकी निकटता की ज़रूरत है l” स्थिति ने जादुई तरीके से अपना हल नहीं निकाली, लेकिन पिता और बेटे को एक ख़ास ठहराव की ज़रूरत थी, जो इस समय ज़रूरी था l 

भजन 103 में उस बुद्धिमान स्त्री के शब्दों की गूंज सुनाई देती है l दाऊद हमारे परमेश्वर के बारे में लिखता है, जो “दयालु, और अनुग्रहकारी, विलम्ब से कोप करनेवाला और अति करुणामय है” (पद.8) l वह तब एक सांसारिक पिता की छवि का आह्वान करते हुए आगे कहता है, जो “अपने बालकों पर दया करता है,” और इससे भी अधिक “यहोवा अपने डरवैयों पर दया करता है” (पद.13) l हमारा परमेश्वर पिता “हमारी सृष्टि जानता है; और उसको स्मरण रहता है कि मनुष्य मिट्टी ही है” (पद.14) l वह जानता है कि हम छोटे और नाजुक हैं l 

हम अक्सर असफल होते हैं और यह बड़ा संसार जो हमें देता है उससे अभिभूत होते है l परमेश्वर का धीरजवंत, सर्वदा उपस्थित, प्रचुर प्रेम को जानना अद्भुत निश्चयता है l