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Articles by लिसा एम समरा

प्रार्थना का सुअवसर

एक अत्यंत व्यक्तिगत अंग्रेजी गीत, जिसका शीर्षक है, “डैडी, अब प्रार्थना नहीं करते हैं(Daddy Doesn’t Pray Anymore),” गीतकार के अपने पिता की प्रार्थनाओं से प्रेरित है । हृदयस्पर्शी गीत से उसके पिता की प्रार्थना समाप्त होने का कारण पता चलता है : मोहभंग या थकावट नहीं, बल्कि उनकी अपनी मृत्यु । वह कल्पना करता है कि अब, प्रार्थना में यीशु के साथ बात करने के बजाय, उसके पिताजी यीशु के साथ चल रहे हैं और आमने-सामने बात कर रहे हैं ।

पिता की प्रार्थनाओं का यह स्मरण एक बाइबिल सम्बन्धी पिता की अपने बेटे के लिए प्रार्थना को ध्यान में रखता है । जब राजा दाऊद का जीवन शक्तिहीन होने लगा, उसने अपने बेटे सुलैमान को इस्राएल के अगले राजा के रूप में पदभार संभालने की तैयारी की ।

सुलैमान का अभिषेक करने के लिए एक साथ राष्ट्र को इकट्ठा करने के बाद, दाऊद ने प्रार्थना में लोगों का नेतृत्व किया, जैसा कि उसने पहले भी कई बार किया था । जब दाऊद ने इस्राएल के प्रति ईश्वर की विश्वासयोग्यता को स्मरण किया, तो उसने लोगों से उसके प्रति विश्वासयोग्य रहने की प्रार्थना की । फिर उसने अपने बेटे के लिए विशेष रूप से एक व्यक्तिगत प्रार्थना को शामिल किया, जिसमें परमेश्वर से कहा गया कि “मेरे पुत्र सुलैमान का मन ऐसा खरा कर दे कि वह तेरी आज्ञाओं, चितौनियों और विधियों को मानता रहे” (1 इतिहास 29:19) ।

हमारे पास उन लोगों के लिए ईमानदारी से प्रार्थना करने का उल्लेखनीय विशेषाधिकार है जिन्हें परमेश्वर ने हमारे जीवन में रखा है । विश्वासयोग्यता का हमारा उदाहरण एक अमिट प्रभाव डाल सकता है जो हमारे चले जाने के बाद भी बना रहेगा । जिस तरह परमेश्वर ने सुलैमान और इस्राएल के लिए दाऊद की प्रार्थना के उत्तरों को जारी रखा था, उसी प्रकार हमारी प्रार्थनाओं का प्रभाव हमारे बाद भी जारी रहता है l

सबसे अच्छी फसल

जब हमने अपना घर खरीदा, तो हमें एक लगी हुई दाखलता विरासत में मिली । बागवानी की नौसिखियों के रूप में, मेरे परिवार ने यह जानने के लिए काफी समय निवेश किया कि किस तरह उसे छांटना, पानी देना, और उसकी देखभाल करना है । जब हमारी पहली फसल आई, तो मैंने लता से एक अंगूर अपने मुँह में डाला - केवल एक अप्रिय, खट्टा स्वाद से निराश होने के लिए ।

मैंने एक दाखलता की कड़ी मेहनत से देखभाल के हताशा को महसूस किया, केवल एक कड़वी फसल के लिए, जो यशायाह 5 के स्वर को प्रतिध्वनित करता है l वहाँ हम इस्राएल राष्ट्र के साथ परमेश्वर के सम्बन्ध का एक रूपक पढ़ते हैं । एक किसान के रूप में चित्रित परमेश्वर ने पहाड़ियों से मलबे को साफ किया था, अच्छी दाखलता लगाए थे, सुरक्षा के लिए एक गुम्मट  बनाया था और अपनी फसल के परिणामों का आनंद लेने के लिए एक कोल्हू बनाया था (यशायाह 5:1-2) । इस्राएल का प्रतीक, दाख की बारी, स्वार्थ, अन्याय और उत्पीड़न के खट्टे अंगूर उत्पन्न कर किसान की निराशा बनी (पद.7) l आखिरकार, परमेश्वर ने अवशेष को बचाते हुए अनिच्छा से दाख की बारी को नष्ट कर दिया कि किसी दिन अच्छी फसल पैदा होगी ।

यूहन्ना के सुसमाचार में, यीशु ने दाख की बारी का चित्रण करते हुए कहा, “मैं दाखलता हूँ : तुम डालियाँ हो l जो मुझ में बना रहता है और मैं उसमें, वह बहुत फल फलता है” (यूहन्ना 15:5) l इस समानांतर कल्पना में, यीशु, उसमें जुड़े रहने वाले विश्वासियों को दाख की शाखाओं के रूप में मुख्य दाखलता जो वह खुद है, से जुड़ा हुआ चित्रित करता है l अब, जब हम यीशु से उसकी आत्मा पर प्रार्थनापूर्ण निर्भरता के माध्यम से जुड़े हुए हैं, हमारे पास आध्यात्मिक पोषण के लिए सीधी पहुंच है जो सभी के लिए सबसे अच्छे फल का उत्पादन करेगा, अर्थात् प्रेम ।

आशा का चुनाव

मैं दुनिया में उन लाखों लोगों में से एक हूं जो SAD (मौसमी आक्रमण विकार/seasonal affective disorder) से पीड़ित हैं, जो कम सर्दी के दिनों में सीमित धूप के साथ स्थानों में आम अवसाद का एक प्रकार है । जब मुझे डर लगने लगता है कि सर्दियों का जमा हुआ कोप कभी खत्म नहीं होगा, तो मैं किसी भी सबूत के लिए उत्सुक हूं कि अब और लम्बे दिन और गर्म तापमान आ रहे हैं ।

वसंत के पहले संकेत - फूल सफलतापूर्वक बर्फ में से अपने तरीके से फूट कर निकल रहे होते हैं - यह भी शक्तिशाली तरीके से मुझे याद दिलाता है कि परमेश्वर की आशा हमारे सबसे अंधकारमय मौसमों में भी दिखाई दे सकती है l भविष्यवक्ता मीका ने एक खौफनाक “सर्दी” को सहन करते हुए भी इस बात को कबूल किया जब इस्राएली परमेश्वर से दूर हो गए । जब  मीका ने धूमिल स्थिति का आंकलन किया, उसने विलाप कर कहा कि “एक भी सीधा जन नहीं रहा”  (मीका 7: 2) ।

फिर भी, भले ही स्थिति गंभीर दिखाई दी, फिर भी भविष्यवक्ता ने आशा छोड़ने से इनकार किया l उसे भरोसा था कि परमेश्वर काम कर रहा है (पद.7) – यद्यपि, तबाही के बीच में भी, जब वह सबूत नहीं देख सकता था l

हमारे अंधेरे और कभी-कभी अंतहीन “सर्दियों” में, जब वसंत आता दिखायी नहीं देता, तो हम मीका के समान संघर्ष का सामना करते हैं । क्या हम निराशा में हार मान लेंगे? या हम  “अपने उद्धारकर्ता परमेश्वर की बाट [जोहते रहेंगे]”? (पद.7) ।

ईश्वर में हमारी आशा कभी व्यर्थ नहीं जाती (रोमियों 5: 5) । वह ऐसा समय ला रहा है जहाँ "सर्दी" कभी न होगी और जिसमें कोई शोक या पीड़ा नहीं है (प्रकाशितवाक्य 21:4) । तब तक, हम कबूल करते हुए विश्राम करें, “मेरी आशा तो तेरी ओर लगी है” (भजन 39:7) l

प्रेम के ताले

मैं कई हजार तालों को देखकर हैरान हुई, जिनमें से कईयों पर प्रेमियों के नाम के प्रथमाक्षर खुदे हुए थे, जो पेरिस के पोंट देस आर्ट्स(Pont des Arts) पुल के हर एक कल्पनीय भाग से जुड़े हुए थे l सीन नदी पर यह पैदल पुल प्यार के इन प्रतीकों के पटा पड़ा था, जो प्रेमियों के “हमेशा” की प्रतिबद्धता की घोषणा थी l 2014 में, प्यार के तालों का अनुमान पचास टन लगाया गया था जो कि बहुत अधिक था और इसने पुल के एक हिस्से को ध्वस्त भी कर दिया था, जिससे तालों को हटाने की ज़रूरत पड़ी l

इतने सारे प्रेम के तालों की मौजूदगी इस बात की ओर इशारा करती है कि इंसान होने के कारण  हम आश्वासन चाहते हैं कि प्यार सुरक्षित है l पुराना नियम की एक किताब, श्रेष्ठगीत में, दो प्रेमियों के बीच एक संवाद को दर्शाया गया है, स्त्री अपने प्रिय से उसे "नगीने के समान अपने हृदय पर लगा [ने], और ताबीज के समान अपनी बाँह पर [बाँधने] (गीत 8: 6) की इच्छा व्यक्त कर सुरक्षित प्यार की अभिलाषा करती है । उसकी लालसा उसके प्रेम में महफूज़ और सुरक्षित होना था जैसे एक मुहर हृदय पर लगी हो या उसकी ऊँगली में एक अंगूठी l 

रोमांटिक/अद्भुत प्रेम की लालसा जो श्रेष्ठगीत में व्यक्त किया गया है इफिसियों में नए नियम के सत्य की ओर इशारा करती है कि हम परमेश्वर की आत्मा की "मुहर" (1:13) से चिह्नित किये गए हैं। जबकि मानव प्रेम चंचल हो सकता है, और एक पुल से ताले को हटाया जा सकता है, मसीह की आत्मा का हममें निवास परमेश्वर के कभी न खत्म होने वाले, अपने प्रत्येक बच्चे के लिए प्रतिबद्ध प्रेम का प्रदर्शन करने वाली एक स्थायी मुहर है ।

परमेश्वर द्वारा नामित

नटखट l मीठी l मोटे l ये कुछ 'उपनाम' हैं जिन्हें हम अपने बच्चों को देते हैं l इन नामों में से अधिकांश उनके चरित्र, उनकी शारीरिक रूप का वर्णन करने के लिए बनाए गए हैं, या वे प्रीतिकर होने के लिए होते हैं l

उपनाम केवल बच्चों तक ही सीमित नहीं हैं - हम उन्हें बाइबिल में भी इस्तेमाल होते हुए पाते हैं l उदाहरण के लिए, यीशु ने प्रेरित याकूब और यूहन्ना को "गर्जन के पुत्र" कहा (मरकुस 3:17) l किसी के द्वारा खुद को उपनाम देना पवित्रशास्त्र में दुर्लभ है, फिर भी ऐसा तब होता है जब नाओमी नाम की एक महिला लोगों से उसे "मारा" पुकारने को कहती है, जिसका अर्थ है "कड़वाहट" (रूत 1:20), क्योंकि उसके पति और दो बेटों की मृत्यु हो गई थी l उसने महसूस किया कि ईश्वर ने उसके जीवन को कड़वा बना दिया है (पद. 21) l

खुद को दिया गया नया नाम नाओमी उसके साथ न रह सका,  हालांकि, वे विनाशकारी नुकसान उसकी कहानी का अंत नहीं थे l उसके दुःख के बीच में, परमेश्वर ने उसे रूत के रूप में, एक युवा बहु से आशीषित किया था,  जिसने अंततः पुनर्विवाह किया और एक पुत्र को जन्म दिया, जिससे नाओमी को फिर से एक परिवार मिला l

यद्यपि उन कठिनाइयों के आधार पर जिन्हें हमने अनुभव किये हैं या जो गलतियाँ हमने की हैं, हम  कभी-कभी अपने आप को “असफल” या “अप्रिय” जैसे कड़वे उपनाम देने के लिए लुभाए जा सकते हैं,  वे नाम हमारी कहानियों का अंत नहीं है l हम उन उपनामों के स्थान पर हमें परमेश्वर द्वारा दिया गया नाम, “प्रिया” दे सकते हैं (रोमियों 9:25), और उन तरीकों की तलाश कर सकते हैं , जिसके द्वारा वह हमारे लिए सबसे चुनौतीपूर्ण समय में भी प्रबंध करता है l

धोखा दिया

2019 में, दुनिया भर के कला प्रदर्शनियों ने लियोनार्डो डा विन्ची(Leonardo da Vinchi) का 500वाँ वर्षगाँठ मनाया l जबकि उनके कई चित्रों और वैज्ञानिक खोजों का प्रदर्शन किया गया था, सार्जनिक रूप से द लास्ट सपर(The Last Supper) सहित केवल पांच सौ पेंटिंग्स के लिए ही डा विन्ची को श्रेय दिया गया l

यह जटिल भित्ति-चित्र यूहन्ना के सुसमाचार में वर्णित अंतिम भोज को दर्शाता है जो यीशु ने  अपने शिष्यों के साथ खाया l पेंटिंग यीशु के कथन पर शिष्यों के भ्रम को अधिकार में लेती है, “तुम में से एक मुझे पकड़वाएगा” (यूहन्ना 13:21) l हैरान, शिष्यों ने चर्चा की कि विश्वासघात करने वाला कौन हो सकता है – जबकि यहूदा चुपचाप रात में अपने शिक्षक और मित्र के ठिकाने के विषय अधिकारियों को सचेत करने के लिए बाहर चला गया l

धोखा दिया l यहूदा के विशवासघात का दर्द यीशु के शब्दों में स्पष्ट है, “जो मेरी रोटी खाता है, उसने मुझ पर लात उठाई” (पद.18) l एक निकट मित्र जो भोजन को साझा करता था ने इस सम्बन्ध का उपयोग यीशु को हानि पहुँचाने के लिए किया l 

हममें से प्रत्येक ने एक मित्र के विश्वासघात का अनुभव किया है l हम इस तरह के दर्द का जबाब कैसे दे सकते हैं? भजन 41:9, जिसका उपयोग यीशु ने साझा भोजन (यूहन्ना 13:18) के समय विश्वासघात करनेवाले की उपस्थिति को इंगित करने के लिए उद्धृत किया था, आशा प्रदान करता है l दाऊद ने एक करीबी दोस्त के छल पर अपनी पीड़ा व्यक्त करने के बाद, उसने परमेश्वर के प्यार और उपस्थिति में ढाढ़स प्राप्त किया जो उसे हमेशा परमेश्वर की उपस्थिति में बनाए रखनेवाला था और उसे स्थापित करने वाला था (भजन 41:11-12) l 

जब मित्र निरास करते हैं, तो हम परमेश्वर के निरंतर प्यार को जानकार आराम पा सकते हैं और उनकी सशक्त उपस्थिति हमारे साथ होगी जो हमें सबसे विनाशकारी दर्द को भी सहन करने में मदद करेगी l

किनारों पर

एक मोटरसाइकिल प्रदर्शन में जहाँ मोटरसाइकिल चलानेवालों ने असाधारण करतब दिखाए, तो देखने के लिए मुझे अपने पंजों के बल खड़ा होना पड़ा l चचारों ओर घूमकर, मैंने देखा कि तीन बच्चे पास के पेड़ पर बैठे थे, जाहिर है क्योंकि वे भी करतब को देखने के लिए भीड़ के सामने नहीं आ सकते थे l

बच्चों को अपने ऊंचे स्थान से ताकते हुए देखकर, मैं जक्कई के विषय सोचने को मजबूर हुआ, जिसे लूका एक धनी चुंगी लेनेवाले के रूप में बताता है (लूका 19:2) l यहूदी अक्सर चुंगी लेनेवालों को देशद्रोही के रूप में देखते थे क्योंकि वे रोमी सरकार के लिए साथी इस्राएलियों से कर वसूलने, के साथ अपने व्यक्तिगत बैंक खातों को भरने के लिए अक्सर अतिरिक्त धन की मांग करते थे l इसलिए शायद जक्कई को उसके समुदाय से निकाल दिया गया था l

जब यीशु यरीहो से गुज़रा, जक्कई उसे देखना चाहता था परन्तु भीड़ के कारण उसे देखने में असफल था l इसलिए, शायद निराश और अकेला महसूस करते हुए, गूलर के पेड़ पर चढ़कर उसने उसकी एक झलक पाने की कोशिश की (पद.3-4) l और वहां पर, भीड़ के किनारे, यीशु ने उसे खोज निकाला और उसके घर पर एक अतिथि होने की घोषणा की (पद.5) l

जक्कई की कहानी हमें स्मरण दिलाती है कि यीशु अपनी मित्रता और उद्धार का उपहार पेश करते हुए “खोए हुओं को ढूँढने और उनका उद्धार करने आया” (पद.9-10) l यहाँ तक कि यदि हम अपने को अपने समुदायों के किनारों पर महसूस करते हैं, “भीड़ के पीछे धकेल दिए जाते हैं,” हम आश्वस्त रहें कि, वहां भी, यीशु हमें खोज लेता है l

ग्रहण

मैं आँखों की सुरक्षा, देखने का एक आदर्श स्थान, और घर के बने अल्पाहार के साथ तैयार था। लाखों लोगों के साथ मेरा परिवार और मैंने पूर्ण सूर्यग्रहण की पूरी घटना को देखा - चाँद द्वारा पूरे सूर्य को ढक देना। 
ग्रहण ने गर्मी के एक सामान्य उज्जवल दोपहर को असामान्य अँधेरे से ढक दिया। हालाँकि हमारे लिए यह ग्रहण एक मजेदार उत्सव और सृष्टि पर परमेश्वर की अविश्वसनीय शक्ति का स्मरण था (भजन 135:6-7), पूरे इतिहास में दिन में अँधेरा असामान्य और पूर्वाभास/अनिष्ट दर्शन के रूप में देखा गया है (निर्गमन 10:21); मत्ती 27:45), एक संकेत है कि सब कुछ वैसा नहीं है जैसा होना चाहिये।
प्राचीन इस्राएल में विभाजित राज्य के समय नबी, आमोस के लिए यह अँधेरा यही दर्शाता है। आमोस ने उत्तरी राज्य को चेतावनी दी कि यदि वे परमेश्वर से दूर होते रहे तो विनाश होगा। एक संकेत के रूप में, परमेश्वर “सूर्य को दोपहर के समय अस्त [करेगा], और इस देश को दिन दुपहरी अँधियारा कर [देगा]” (आमोस 8:9) l
लेकिन परमेश्वर की अंतिम इच्छा और उद्देश्य था – और है भी - सभी चीजों को सही बनाना। यहाँ तक कि जब लोगों को निर्वासन में ले जाया गया था, तब परमेश्वर ने एक दिन यरूशलेम, में लोगों  के एक बचे हुए भाग को लाने का और “गिरी हुई झोपड़ी को खड़ा [करने], और उसके बाड़े के नाकों को [सुधारने], और उसके खंडहरों को फिर [बनाने]” वादा किया (आमोस 9:11)।
यहाँ तक कि जब जीवन अपने सबसे अँधेरे में हो, तो इस्राएल की तरह, हम यह जानने में आराम पा सकते हैं कि परमेश्वर – सभी लोगों के लिए – ज्योति और आशा वापस लाने का कार्य कर रहा है (प्रेरितों 15:14-18) l

पर्दा डालना

जब मेरी उड़ान सामान्य गति पर पहुँची, उड़ान परिचारक ने प्रथम श्रेणी को अलग करनेवाला पर्दा हटा दिया, और मुझे हवाई जहाज़ पर क्षेत्रों के बीच के मतभेदों की एक चौंकानेवाली याद दिला दी l कुछ यात्रियों को पहले प्रवेश मिलता है, बैठने के लिए पर्याप्त स्थान के साथ पैरों को रखने के लिए अतिरिक्त स्थान और व्यक्तिगत सेवा का आनंद मिलता है l पर्दा उन अनुलाभों(Perks) से मेरे अलगाव का नम्र याद दिलाता है l 

लोगों के समूहों के बीच बहिष्करण अंतर पूरे इतिहास में दिखाई देता है, जिसमें एक तरह से, यहाँ तक कि यरूशलेम में परमेश्वर का मंदिर भी शामिल है, यद्यपि अधिक भुगतान करने की क्षमता के कारण नहीं l गैर-यहूदियों को केवल बाहरी आँगन में आराधना करने की अनुमति थी l इसके बाद महिलाओं का आँगन, और उससे और निकट, पुरुषों के लिए निर्धारित क्षेत्र l आखिर में, महा पवित्र स्थान, जिसे एक परदे के पीछे छिपाया गया था, उस स्थान के रूप में देखा जाता था जहाँ परमेश्वर स्वयं को विशिष्ट रूप से प्रकट करता था, और प्रत्येक वर्ष केवल एक अभिषिक्त याजक उसमें प्रवेश कर सकता था (इब्रानियों 9:1-10) l 

लेकिन, आश्चर्यजनक रूप से, यह अलगाव अब मौजूद नहीं है l यीशु ने उन सभी अवरोधों को पूरी तरह से समाप्त कर दिया, जो किसी को भी परमेश्वर तक पहुँचने में बाधा डाल सकती है – यहाँ तक कि हमारे पाप भी (10:17) l जिस तरह मसीह की मृत्यु के समय मंदिर का पर्दा दो भागों में फटा था (मत्ती 2:50-51), उसके क्रूस पर चढ़े शरीर ने परमेश्वर की उपस्थिति के लिए सभी अवरोधों को दूर कर दिया l ऐसा कोई अवरोध नहीं है जो किसी भी विश्वासी को जीवित परमेश्वर की महिमा और प्रेम का अनुभव करने के लिए अलग करने की आवश्यकता हो l