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Articles by मार्ट डीहान

मैं क्यों?

द बुक ऑफ़ ऑड्स(The Book of Odds) का कहना है कि एक लाख लोगों में से एक पर आकाशीय बिजली गिरती है l वह यह भी कहता है कि 25,000 में से एक को भारी आघात या नुक्सान की स्थिति में “टूटा हृदय सिंड्रोम(broken heart syndrome)” नामक एक चिकित्सीय स्थिति का अनुभव होता है l एक के बाद एक पृष्ठ में विशिष्ठ समस्याओं को अनुभव करने की असंगत बात बिना उत्तर के इकठ्ठा होती हैं : क्या होगा यदि हम ही वह व्यक्ति हैं?
अय्यूब ने सभी बाधाओं को ललकारा l परमेश्वर ने उसके विषय में कहा, “उसके तुल्य खरा और सीधा और मेरा भय माननेवाला और बुराई से दूर रहनेवाला मनुष्य और कोई नहीं है” (अय्यूब 1:8) l फिर भी अय्यूब को उन कई हानियों को सहने के लिए चुना गया जो समस्त असंगतियों को ललकारा l पृथ्वी पर सभी लोगों में से, अय्यूब के पास जवाब मांगने का कारण था l हमारे समझने के लिए उसके हताश संघर्ष एक अध्याय के बाद दूसरे अध्याय में लिखे हुए हैं, “मैं क्यों?”
अय्यूब की कहानी हमें अस्पष्ट पीड़ा और बुराई के रहस्य का जवाब देने का एक तरीका देती हैं l परमेश्वर की भलाई और दया के सबसे अच्छे उदाहरणों में से एक (अध्याय 25) के दुःख और भ्रम का वर्णन करके, हम बोने और काटने के अटल नियम का विकल्प प्राप्त कहते हैं (4:7-8) l शैतानी बेचैनी की पृष्ठभूमि को (अध्याय 1) और परमेश्वर की ओर से एक अंत बताकर (42:7-17) जो एक दिन अपने पुत्र को हमारे पापों को उठाने के लिए अनुमति देगा, अय्यूब की कहानी हमें दृष्टि के बजाए विश्वास से जीने का कारण देती है l

कारण के लिए धीमा

बीबीसी विडियो सीरीज द लाइफ ऑफ़ मैमल्स(The Life of Mammals) में मेज़बान डेविड एटनबरो एक स्लोथ भालू(एक विशेष प्रजाति का भालू) पर एक विनोदी दृष्टि डालने के लिए एक पेड़ पर चढ़े l संसार का सबसे धीमी गति से चलनेवाले स्तनपायी के साथ सामना होने पर, उन्होंने “बू s s!” कहकर उसे बधाई दी l प्रतिक्रिया पाने में नाकाम, वह बताते हैं कि धीमी गति से जाना ही है जो आप करेंगे यदि आप तीन खुर वाले भालू है जो मुख्य रूप से पत्तियाँ खाता है जो आसानी से पचता नहीं है और बहुत पोष्टिक नहीं है l  

इस्राएल के इतिहास के दुहराव में, नहेम्याह हमें धीमी गति से चलने के लिए एक और उदाहरण और वर्णन की याद दिलाता है (9:9-11), लेकिन यह हास्यपूर्ण नहीं है l नहेम्याह के अनुसार, हमारा परमेश्वर धीमी गति से चलने का परम उदाहरण है – जब क्रोध की बात आती है l नहेम्याह ने याद किया कि परमेश्वर ने अपने लोगों की देखभाल कैसे की, उन्हें जीवन देने वाली व्यवस्था के द्वारा निर्देश दिया, उन्हें मिस्र से बाहर उनकी यात्रा में बनाए रखा और उन्हें वादा किया हुआ देश दिया (पद. 9-15) l यद्यपि इस्राएल ने लगातार विद्रोह किया (पद.16), फिर भी परमेश्वर ने उन्हें प्यार करना कभी नहीं छोड़ा l नहेम्याह की व्याख्या? हमारा सृष्टिकर्ता स्वभाव से “अनुग्रहकारी और दयालु, विलम्ब से कोप करनेवाला, और अतिकरुणामय” (पद.17) है l चालीस साल तक वह क्यों अपने लोगों की शिकायत, अविश्वास और बदगुमानी को इतने धीरज से सहा होगा? (पद.21) l इसकी वजह परमेश्वर की “बड़ी दया” (पद.19) थी l

हमारे बारे में क्या है? एक उग्र स्वभाव ठन्डे दिल का संकेत देता है l लेकिन परमेश्वर के हृदय की महानता हमें धीरज से उसके साथ रहने और प्यार करने के लिए जगह देती है l 

पवित्र अग्नि

कई वर्षों के सूखे और जंगल की आग के बाद, दक्षिणी केलिफोर्निया, अमेरिका के कई लोगों ने सोचा कि यह ईश्वर का कृत्य था l जब समाचार सूत्रों ने इसे पवित्र अग्नि उद्धृत करना आरम्भ किया, तो यह विचलित करनेवाली धारणा प्रबल हुयी l हालाँकि बहुतों को यह नहीं पता था कि इस क्षेत्र को “पवित्र जिम घाटी(Canyon) क्षेत्र,” कहा जाता था और इसलिए यह नाम है l 

युहन्ना बप्तिस्मा दाता के “पवित्र आत्मा और आग” का सन्दर्भ भी अपनी कहानी और स्पष्टीकरण (लूका 3:11) के साथ आया था l पीछे मुड़कर देखें, तो वह संभावित रूप से मसीहा(अभिषिक्त) एवं मीका नबी द्वारा परिस्कृत करनेवाली आग के बारे में सोच रहा था (3:1-3; 4:1) लेकिन परमेश्वर की आत्मा के हवा और आग के रूप में यीशु के अनुयायियों पर आने के बाद ही मलाकी और युहन्ना के शब्द साफ़ दिखाई दिए (प्रेरितों 2:1-4) l 

युहन्ना ने जिस आग के विषय भविष्वाणी की थी, वह अपेक्षित नहीं थी l परमेश्वर के सच्चे कार्य के रूप में, यह एक अलग तरह के मसीहा(अभिषिक्त) और पवित्र आग्नि की घोषणा करने के लिए साहस के साथ आया था l यीशु की आत्मा में, इसने हमारे निरर्थक मानवीय प्रयासों को उजागर किया और भस्म किया – प्रेम, आनंद, शांति, धैर्य, अच्छाई, दया, विश्वास, सौम्यता, और पवित्र आत्मा के आत्म-नियंत्रण के लिए जगह बनाते हुए (देखें गलतियों 5:22-23) l वे परमेश्वर के काम हैं जो वह हम में करना चाहता है l 

बड़ा भाई

लेखक हेनरी नावेन रूस के सैंट पीटर्सबर्ग के एक संग्रहालय में अपनी यात्रा को याद करते हैं, जहाँ उन्होंने उड़ाऊ पुत्र के रेम्ब्रांट के चित्रण पर चिंतन करते हुए घंटों बिताए l जैसे-जैसे दिन चढ़ता गया, पास की खिड़की से प्राकृतिक प्रकाश में बदलाव ने नोवें को इस धारणा के साथ छोड़ दिया कि वह कई अलग-अलग चित्रों को देख रहा था जैसे कि प्रकाश के परिवर्तन थे l प्रत्येक एक टूटे हुए बेटे के लिए एक पिता के प्यार के बारे में कुछ बताने की कोशिश कर रहा था l

नोवेन का वर्णन है कि कैसे लगभग चार बजे, पेंटिंग में तीन आकृतियाँ “आगे की ओर” उभर आयीं l पहला बड़ा बेटा था, जिसने अपने पिता की इच्छा में उड़ाऊ छोटे भाई की राजसी वापसी को नापसंद किया l आख़िरकार, क्या उसने परिवार के धन के एक बड़े हिस्से को व्यर्थ खर्च करके, उनके लिए पीड़ा और शर्मिन्दिगी नहीं था? (लूका 15:28-30) l

अन्य दो आकृतियों ने नोवें को उन धार्मिक अगुओं की याद दिलाई जो यीशु के बताए हुए दृष्टान्त में मौजूद थे l वे लोग थे जो पापियों के बारे में पृष्ठभूमि में बुदबुदाते थे जिन्हें यीशु आकर्षित कर रहा था (पद.1-2) l

नोवेन ने खुद को उन सभी में देखा – अपने सबसे छोटे बेटे के बर्बाद जीवन में, बड़े भाई और धार्मिक नेताओं की निंदा करने में, और एक पिता के दिल में जो किसी के लिए और सभी के लिए काफी बड़ा है l

हमारे बारे में क्या है? क्या हम खुद को रेब्रांत की पेंटिंग में कहीं भी देख सकते हैं? किसी तरह, यीशु द्वारा बतायी गयी हर कहानी हमारे बारे में है l

पैरों के लिए खुशखबरी

उस विज्ञापन ने मेरे चेहरे पर मुस्कराहट ला दिया : “पैरों के इतिहास में सबसे आरामदायक मोज़े l” फिर, आगे भी पैरों के लिए अच्छी खबर के अपने दावे का विस्तार करते हुए, विज्ञापनदाता ने कहा कि क्योंकि मोज़े बेघर आश्रयों में सबसे अधिक अनुरोध किये गए कपड़ों की वस्तु बने हुए हैं, इसलिए ख़रीदे गए प्रत्येक जोड़ी मोज़े के लिए कंपनी ज़रुरतमंद किसी व्यक्ति को एक जोड़ो दान करेगी l

उस मुस्कराहट की कल्पना कीजिए, जब यीशु ने एक ऐसे व्यक्ति के पैर ठीक किये, जो अड़तीस साल तक चलने में सक्षम नहीं था (युहन्ना 5:2-8) l अब मंदिर के अधिकारियों के चेहरों पर विपरीत नज़र देखें जो यीशु द्वारा किसी के पैरों या हृदय की चंगाई से जो इतने लम्बे समय तक बिना किसी मदद का था प्रभावित नहीं थे l उन्होंने उस व्यक्ति और यीशु पर एक धार्मिक कानून तोड़ने का आरोप लगाया जो सब्त के दिन काम करने की अनुमति नहीं देता था (पद.9-10, 16-17) l जहाँ यीशु ने करुणा की आवश्यकता देखी उन्होंने नियम को देखा l

इस बिंदु पर वह व्यक्ति भी नहीं जानता था कि किसने उसे नए पैर दिए थे l केवल बाद में वह बोलने में सक्षम होने वाला था कि वह यीशु ही था जिसने उसे चंगा किया था (पद.13-15) – वही यीशु जिसने उस व्यक्ति के लिए – और हम सब के लिए अपने पैरों को काठ पर ठोकने की अनुमति देता – टूटी देह, मन, और हृदयों के इतिहास में सर्वोत्तम खबर l 

नामों में एक नाम

संगीत की दुनिया में अंटोनियो स्ट्राडीवरी(1644- 1737) का नाम प्रसिद्ध है l उसके वायलिन, सल्लोस(एक साज़), और वायोलास(संगीत साज़) अपनी शिल्पकारिता और ध्वनि की स्पष्टता के लिए संजोये जाते हैं कि बहुतों को उनके अपने नाम दिए गए हैं l उदहारण के लिए, उनमें से एक को मेसाया-सलाबू स्ट्राडीवरीयस के रूप में जाना जाता है l वायलिन वादक जोसफ जोआकिम (1831-1907) उसे बजाने के बाद बोले, “स्ट्राड की ध्वनि, वह अद्वितीय ‘मेस्सी,’ अपनी मिठास और भव्यता के साथ मेरे स्मरण में बार-बार आता है l”

हालाँकि, किसी स्ट्राडीवरीयस का नाम और ध्वनि की भी, तुलना किसी और महान मूल से नहीं की जा सकती है l मूसा से यीशु तक, ईश्वरों का परमेश्वर खुद का परिचय सब नामों से श्रेष्ठ नाम द्वारा देता है l हमारे लिए, वह चाहता है कि उसकी बुद्धिमत्ता और उसके हाथों के काम को मान्यता मिले, महत्त्व दिया जाए, संगीत की ध्वनि द्वारा उसका उत्सव मनाया जाए (निर्गमन 6:1; 15:1-2) l    

फिर भी परेशान लोगों की पुकार के प्रतिउत्तर में इस छुटकारे की सामर्थ्य केवल एक शुरुआत थी l किसने इसे कभी देखा था कि क्रूसित हाथों की निर्बलता के द्वारा, वह एक दिन अनंत और असीम महत्त्व की विरासत छोड़ेगा? क्या कोई संगीत के परिणामी आश्चर्य और भव्यता उस व्यक्ति के नाम की प्रशंसा कर सकता था जिसने – हमारे पाप और तिरस्कार को लेकर – यह दिखाने के लिए मृत्यु सही कि वह हमसे कितना प्रेम करता है?

प्रकाश को देखना

लोस एंजेल्स की सड़कों पर, बुरी आदत से संघर्षरत एक बेघर व्यक्ति द मिडनाइट मिशन (मानव सेवा संस्था) मे आकर सहायता मांगी l वहीँ से ब्रायन के आरोग्यता की लम्बी यात्रा आरम्भ हुयी l

आरोग्यता की प्रक्रिया के दौरान ब्रायन ने संगीत के प्रति अपने प्रेम को पुनः ढूढ़ लिया l आखिर में वह स्ट्रीट सिम्फनी (बेघर लोगों के लिए मोह रखनेवाले संगीत पेशेवर) से जुड़ गया l उन्होंनें उससे हैंडल के मसाया से ”द पीपल दैट वाक्ड इन डार्कनेस[The People That Walked in Darkness]”(संकीर्तन) का एकल प्रदर्शन करने को कहा l इस्राएल के इतिहास के तमोयुग के दौरान यशायाह नबी द्वारा लिखित शब्दों में, वह गाया, “जो लोग अंधियारे में चल रहे थे उन्होंने बड़ा उजियाला देखा : और जो लोग घोर अन्धकार से भरे हुए मृत्यु के देश में रहते थे, उन पर ज्योति चमकी” (यशायाह 9:2) l न्यू यॉर्क पत्रिका के लिए एक संगीत आलोचक ने लिखा कि ब्रायन ने “शब्दों को इस प्रकार गाया मानो वे उसके अपने जीवन से लिए गए थे l”

सुसमाचार लेखक मत्ती ने उसी परिच्छेद को उद्धृत किया l अपने ही सह इस्राएलियों को लूटने वाले जीवन से यीशु द्वारा बुलाया गया, मत्ती वर्णन करता है कि किस प्रकार यीशु ने अपने उद्धार को “यर्दन के पार” से “अन्यजातियों[गैर यहूदियों] के गलील” (मत्ती 4:13-15)  तक ले जाकर यशायाह की भविष्यवाणी को पूरा किया l

कैसर का कर लेनेवाला एक ठग (देखें मत्ती 9:9), सड़क पर बुरी लत में फिरनेवाला बेघर ब्रायन, अथवा हमारे समान लोगों पर कौन भरोसा कर सकता था कि हमें हमारे अपने ही जीवन में प्रकाश और अंधकार के बीच अंतर दर्शाने का एक मौका मिलेगा?

आत्मा में गाना

आरम्भिक बीसवीं शताब्दी के वेल्श पुनर्जागरण के दौरान बाइबल के शिक्षक और लेखक जी. कैम्पबैल मॉर्गन ने उसका उल्लेख किया जो उन्होंने देखा था। उन्होंने विश्वास किया कि “पवित्र भजनों की लहरों” पर परमेश्वर के पवित्र आत्मा की उपस्थिति थी। मॉर्गन ने लिखा कि उन्होंने सभाओं में संगीत के एकत्र करने वाले प्रभाव को देखा है, जिसने स्वेच्छा से प्रार्थना करने, अंगीकार करने और स्वैच्छिक गायन करने के लिए प्रोत्साहित करता है। यदि कोई भावनाओं में बह गया और बहुत देर तक प्रार्थना की या उस तरह से बात की जो दूसरों की समझ में नहीं आती है, तो कोई धीमे से गाना शुरू कर देता था। दूसरे लोग धीमे से उसके साथ शामिल हो जाते थे, उस गीत के स्वर तब तक बढ़ते जाते थे, जब तक वे दूसरी अन्य समस्त आवाजों को दबा न दें। 

जिस गीत के नया किए जाने का उल्लेख मॉर्गन करते हैं, उसकी पवित्रशास्त्र में एक कहानी है, जिसमें संगीत एक मुख्य भूमिका निभाता है। संगीत का प्रयोग विजय का आनन्द मनाने (निर्गमन 15:1–21); मन्दिर के आराधनामय समर्पण में (2 इतिहास 5:12–14); और सैन्य रणनीति बनाने के एक हिस्से के लिए किया जाता था (20:21–23)। बाइबल के मध्य में हम एक पुस्तक को पाते हैं (भजन संहिता 1–150)। और पौलुस के इफिसियों के लिए नया नियम के पत्र में हम आत्मा में जीवन के उल्लेख को पढ़ते हैं : “और आपस में भजन और स्तुतिगान और आत्मिक गीत गाया करो” (इफिसियों 5:19)।

इसके विपरीत, आराधना में, सम्पूर्ण जीवन में, हमारे विश्वास का संगीत हमारी आवाज़ को खोजने में सहायता कर सकता है। पुरानी और नई धुनों से हम बार-बार नए किए जाते हैं, न तो बल से और न ही शक्ति से परन्तु हमारे परमेश्वर के आत्मा और गीतों के द्वारा।

हृदय के बदलाव

यूएस के जनगणना विभाग के अनुसार अपने सम्पूर्ण जीवनकाल के दौरान अमेरीकी औसतन ग्यारह से बारह बार एक पते से दूसरे पते पर चले जाते हैं। हालही के वर्ष में 28 लाख लोगों ने एक स्थान से अपना सामान बाँध कर एक दूसरी छत के नीचे उसे खोला।

बीहणों में इस्राएल के चालीस वर्षों के दौरान परमेश्वर की उपस्थिति के बादल ने सम्पूर्ण राष्ट्र का एक नए गृहनगर की आशा में एक स्थान से दूसरे स्थान पर जाने में मार्गदर्शन किया। यह लेख इतनी बार दोहराया गया है कि यह लगभग एक मजाक जैसा लगने लगता है। इस विशाल परिवार ने बार-बार अ केवल अपनी चीज़ों को खोला और बांधा बल्कि परमेश्वर के मिलाप के तम्बू, जहाँ बादल के परमेश्वर की मूसा से भेंट हुई थी, और उसकी चीज़ों को भी खोला और बांधा (देखें निर्गमन 25:22)।  

अनेक वर्षों के पश्चात,  यीशु इस्राएल की स्थानान्तरण की कहानी को एक सम्मपूर्ण अर्थ प्रदान करेगा। बादल से मार्गदर्शन करने के स्थान पर वह एक व्यक्ति के रूप में ही आ गया। जब उसने कहा, “मेरे पीछे हो लो (मत्ती 4:19), उसने यह दर्शाना आरम्भ कर दिया कि पते के बदलने के महत्वपूर्ण बदलाव हृदय रूपी मार्ग पर होते हैं। शत्रु और मित्रों, दोनों को रोमी क्रूस तले ले जाते हुए उसने यह दर्शाया कि बादल का परमेश्वर और मिलाप का तम्बू हमें बचाने के लिए किस हद तक जा सकते हैं।

पते को बदलने के समान हृदय के बदलाव भी बेचैन कर देने वाले होते हैं। परन्तु एक दिन पिता के घर की खिड़की से हम देखेंगे कि इन सब में यीशु ने सम्पूर्ण मार्ग में हमारा मार्गदर्शन किया।