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Articles by मार्ट डीहान

सुसमाचार की सामर्थ्य

प्राचीन रोम के पास “सुसमाचार”──अच्छी खबर──का अपना संस्करण था l कवि वर्जिल के अनुसार, देवताओं के राजा ग्युस ने रोमियों के लिए एक राज्य की घोषणा की थी जिसकी सीमाएं अंतहीन थीं l देवताओं ने अगुस्तुस को दिव्य पुत्र और विश्व के उद्धारकर्ता के रूप चुनकर शांति और समृद्धि के सुनहरे युग का आरम्भ किया था l 

हालाँकि, यह सभी के विचार से अच्छी खबर नहीं थी l कई लोगों के लिए यह सम्राट की सेना और जल्लादों की तानाशाही द्वारा लागू एक अप्रिय वास्तविकता थी l साम्राज्य की महिमा उन दास लोगों की ताकत पर बनायी गई  थी, जिन्होंने उन पर शासन करने वाले स्वामी की ख़ुशी में कानूनी व्यक्तित्व या संपत्ति के बिना सेवा की थी l 

यह वह संसार था जिसमें पौलुस ने खुद को मसीह के सेवक के रूप में पेश किया था (रोमियों 1:1) l एक समय कैसे पौलुस──यीशु──इस नाम से नफरत करता था l और कैसे यीशु खुद को यहूदियों का राजा और संसार का उद्धारकर्ता होना स्वीकार करने के कारण दुःख उठाया था l  

यही वह सुसमाचार था जो पौलुस पत्र के अपने बाकी हिस्से में रोमियों को समझानेवाला था l  यह सुसमाचार “हर एक विश्वास करनेवाले के लिए . . . उद्धार के निमित्त परमेश्वर की सामर्थ्य [था]” (पद.16) l ओह, कैसर के आधीन पीड़ित लोगों को इसकी कितनी आवश्यकता थी! यहाँ एक क्रूस पर चढ़ाए गए और पुनारुथित उद्धारकर्ता का समाचार था──छुटकारा देनेवाला जिसने अपने शत्रुओं पर विजय प्राप्त करके दिखाया कि वह उनसे कितना प्यार करता था l 

सबसे बड़ी स्वर समता

जब एक प्रमुख अंग्रेजी पत्रिका ने दुनिया के एक सौ इक्यावन प्रमुख संगीतकारों को बीस की सूची बनाने के लिए कहा, जिन्हें वे अब तक की सबसे बड़ी स्वर-समता(symphony) मानते थे, तो बीथोवन की रचनाएँ शीर्ष पर आ गईं l वह काम जिसके शीर्षक का मतलब है “वीरतापूर्ण/बहादुराना(heroic),” दुनिया भर में राजनितिक अशांति के दौरान लिखा गया था l लेकिन यह बीथोवन के अपने संघर्ष से भी निकला क्योंकि उन्होंने धीरे-धीरे सुनने की शक्ति खो दी थी l यह संगीत भावना की पराकाष्ठ की अस्थिरता का आह्वान करता है जो व्यक्त करता है कि चुनौतियों का सामना करते हुए मानव होने और जीवित रहने का क्या मतलब होता है l आनंद, दुःख, और अंतिम विजय की अविवेचित उतार-चढ़ाव में बीथोवन की तीसरी सिम्फनी/स्वर-समता मानव आत्मा के प्रति अमर उपहार माना जाता है l  

कुरिन्थुस की कलीसिया को लिखी पौलुस की पहली पत्री समान कारणों से हमारे ध्यान के योग्य है l संगीत की गणना/score के बजाय प्रेरित शब्दों के द्वारा वह आशीष में बढ़ता है (1:4-9), आत्मा को कुचलने वाले संघर्ष के दुःख में कम होता है (11:17-22), और वरदान प्राप्त लोगों के सामंजस्य में फिर उठता है जो एक साथ एक दूसरे और प्रभु की महिमा के लिए काम करते है (12:6-7) l 

फर्क यहाँ यह है कि हम अपने मनुष्य की आत्मा की जीत को परमेश्वर की आत्मा के प्रति  श्रद्धांजलि के रूप में देखते हैं l जैसे पौलुस हमसे मिलकर खुद को पिता के द्वारा एक साथ बुलाया हुआ, पुत्र के द्वारा अगुआई प्राप्त, और उसके आत्मा के द्वारा प्रेरित──शोर के लिए नहीं, परन्तु हमारी सबसे बड़ी सिम्फनी/समस्वरता में योगदान देने के लिए एक साथ मसीह के अवर्णित प्रेम, का अनुभव करने के लिए आग्रह करता है ।

अनदेखा आश्चर्य

उनके आखरी वर्षों में, श्रीमती गुडरिच की चुनौती पूर्ण और अनुग्रह भरे जीवन की यादों के साथ उनके विचार ध्यान में आए और गये । एक खिड़की के पास बैठी खाड़ी के जल के ऊपर से देखती हुयी, उन्होंने अपना नोटपैड उठाया l उन शब्दों में जिन्हें शीघ्र वह खुद ही  पहचान नहीं पाती उन्होंने लिखा : “यहाँ मैं अपने पसंदीदा कुर्सी पर बैठी हूँ, मेरे पैर देहलीज पर, और मेरा हृदय हवा में । सूर्य से प्रभावित लहरें नीचे जल पर, निरंतर गतिशील──कहाँ जाती हुयी मुझे ज्ञात नहीं l लेकिन आपको धन्यवाद──प्रिय स्वर्गिक पिता──आपके अनगिनत उपहार के लिए और आपके अमर प्रेम के लिए! यह मुझे हमेशा अचंभे में डालता है──यह कैसे हो सकता है? कि मैं उसके साथ प्यार में हूँ जिसे मैं देख नहीं सकती l”

प्रेरित पतरस ने इस तरह का आश्चर्य स्वीकार किया । उसने यीशु को अपनी आँखों से देखा था, लेकिन जो इस पत्री को पढ़नेवाले थे उन्होंने नहीं देखा था l “उस पर [तुम] बिन देखे . . . विश्वास करके ऐसे आनंदित और मगन होते हो जो वर्णन से बाहर और महिमा से भरा हुआ है” (1 पतरस 1:8) । हम यीशु से इसलिए नहीं प्रेम करते है कि हमें आज्ञा मिली है,  परन्तु आत्मा की मदद से (पद.11) हम देखना शुरू कर दते हैं कि वह हमसे कितना प्रेम करता है ।

यह सुनने से ज्यादा है कि वह हम जैसे लोगों की देखभाल करता है । जीवन की हर अवस्था में उसकी अनदेखी उपस्थिति और आत्मा के आश्चर्य को हमारे लिए वास्तविक बनाने के लिए मसीह के वादे को अपने लिए अनुभव करना है l

मानव होना

“मिस्टर सिंगरमैन, आप क्यों रो रहे हैं?” बारह साल के अल्बर्ट से पूछा जब उसने मास्टर कारीगर को लकड़ी के एक बक्से को बनाते हुए देखा l
“मैं रोता हूँ,” उन्होंने कहा, “"क्योंकि मेरे पिता रोए थे, और क्योंकि मेरे दादा रोए थे l” बढ़ई का अपने युवा शिक्षार्थी को उत्तर देना लिटिल हाउस ऑन द प्रेयरी (Little House on the Prairie) के एक एपिसोड में एक कोमल क्षण प्रदान करता है l “आंसू,” मिस्टर सिंगरमैन ने समझाया, “एक ताबूत बनाते समय आ जाते हैं l”
“कुछ लोग रोते नहीं हैं क्योंकि उन्हें आशंका है कि यह कमजोरी का संकेत है,” उन्होंने कहा l “मुझे सिखाया गया था कि एक मनुष्य एक मनुष्य है क्योंकि वह रो सकता है l”
यीशु की आँखों में भावनाएँ उमड़ गयी होंगी क्योंकि उसने यरूशलेम के लिए अपनी चिंता की तुलना एक माँ मुर्गी का अपने बच्चों की देखभाल से की (मत्ती 23:37) l उसके शिष्य अक्सर उसकी आँखों में देखी बातों या उसकी कहानियों को सुनकर भ्रमित हो जाते थे l मजबूत होने का मतलब क्या था इस सम्बन्ध में उसका विचार अलग था l मंदिर से बाहर आते समय उसके साथ चलते हुए यह फिर हुआ l पत्थर की विशाल दीवारों और उनके आराधना स्थल की शानदार अलंकरण की ओर अपने शिष्यों का ध्यानाकर्षित करते समय (24:1), शिष्यों ने मानव उपलब्धि की ताकत पर ध्यान दिया l यीशु ने एक मंदिर देखा जो 70 ई.स्. में समतल किया जानेवाला था l
मसीह हमें दिखाता है कि स्वस्थ लोग जानते हैं कि कब रोना है और क्यों l वह रोया क्योंकि उसके पिता को परवाह है और उसकी आत्मा उन बच्चों के लिए कराहती है जो अभी तक नहीं देख पाए हैं कि उसका दिल किससे टूटता है l

इस घर को ढा दो

अमेरिका में, एक गिराव कंपनी(demolition company) ने गलत इमारत को बुलडोज़र से गिरा  दिया । जांचकर्ताओं का मानना ​​है कि गिराए जाने वाले घर के मालिक ने विध्वंस से बचने के लिए पड़ोसी के घर पर अपने स्वयं के घर की संख्या लगा दी थी l

यीशु ने इसके विपरीत किया । वह अपने "घर" को दूसरों की खातिर ढाने के लिए एक मिशन पर था । दृश्य की कल्पना करें और यीशु के अपने शिष्यों सहित हर कोई कितना भ्रमित हुआ होगा । उन्हें एक दूसरे पर नज़र रखते हुए कल्पना कीजिये क्योंकि उसने धर्म के अगुओं को चुनौती दी थी : “इस मंदिर को ढा दो,” मसीह ने कहा, “और मैं इसे तीन दिन में खड़ा कर दूंगा” (यूहन्ना 2:19) l अगुओं ने नाराजगी जताते हुए कहा, “इस मंदिर के बनाने में छियालीस वर्ष लगे हैं, और क्या तू उसे तीन दिन में खड़ा कर देगा?” (पद.20) l परन्तु यीशु जानता था कि वह अपने शरीर के मंदिर का उल्लेख कर रहा था (पद.21) l वे नहीं जानते थे l

उन्होंने यह नहीं समझा कि वह यह दिखाने के लिए आया है कि हम खुद को और एक दूसरे को जो नुकसान पहुंचाते हैं, वह अंततः वही उठाएगा l वह इसके लिए प्रायश्चित करेगा ।

परमेश्वर हमेशा हमारे दिलों को हमसे बेहतर जानता है l इसलिए उसने अपनी योजनाओं की पूर्णता उन लोगों को भी नहीं दी, जिन्होंने उसके आश्चर्यकर्मों को देखा था और उसमें विश्वास किया था (पद. 23-25) । फिर जैसा कि अब वह धीरे-धीरे यीशु के शब्दों में प्यार और अच्छाई को प्रकट कर रहा था, जो हम समझ नही सकते थे, यदि वह हमें बता भी देता l

अच्छा दृश्य

जब वॉल्ट डिज़्नी की बैम्बी (हिरनी के एक बच्चे के विषय एक एनिमेटेड अंग्रेजी फिल्म) फिर से रिलीज़ हुई, तो माता-पिता ने अपने बेटे और बेटियों के साथ बचपन की यादों को ताजा किया । एक युवा माँ, जिसका पति आउटडोर खेलों में रूचि लेने वाला एक उत्साहित व्यक्ति था, और जिसके पास एक चिताकर्षी ट्रॉफी रूम था, उन माता-पिता में से एक था । अपने छोटे बच्चों के साथ, उसने उनके उस क्षण के हांफने और कराहने का अनुभव किया जब बैम्बी ने अपनी मां को एक शिकारी के कारण खो दिया l आज तक उसे पारिवारिक समारोहों में उसकी शर्मिंदगी की याद आती है, जब पूरी मासूमियत में, उसके छोटे लड़के ने थिएटर/सिनेमा हॉल में चिल्लाया, "अच्छा शॉट!"

समय के साथ, हम अपने बच्चों की शर्मनाक बातों पर हंसते हैं । लेकिन जब भजन 136 के लोग कुछ ऐसा ही करते हैं, तो हम क्या कहेंगे? ईश्वर के चुने हुए और बचाए गए लोग, इस्राएल, प्यार का एक जश्न मनाते हैं जो समस्त सृष्टि और खुद के लिए चलता है - लेकिन उनके दुश्मनों के लिए नहीं । भजन उसकी प्रशंसा के गीत गाता है जिसने “मिस्रियों के पहिलौठों को मारा” (पद.10; निर्गमन 12: 29–30 भी देखें) ।

क्या वह किसी और की माँ, बहन, पिता, भाई की कीमत पर "अच्छे शॉट" के चिल्लाने जैसा नहीं है?

इसलिए हमें शेष कहानी की आवश्यकता है l केवल जब यीशु के पुनरुत्थान में रोशनी आती है, तो पूरे विश्व को एक परिवार की कहानियों, आंसुओं और हंसी की खुशी में आमंत्रित किया जा सकता है । केवल जब हम यीशु को अपने उद्धारकर्ता के रूप में स्वीकार करते हैं और उसी में जीवित किये जाते हैं, तो हम एक परमेश्वर के आश्चर्य को साझा कर सकते हैं, जो हर किसी से प्यार करता है – अपनी कीमत पर ।

मैं क्यों?

द बुक ऑफ़ ऑड्स(The Book of Odds) का कहना है कि एक लाख लोगों में से एक पर आकाशीय बिजली गिरती है l वह यह भी कहता है कि 25,000 में से एक को भारी आघात या नुक्सान की स्थिति में “टूटा हृदय सिंड्रोम(broken heart syndrome)” नामक एक चिकित्सीय स्थिति का अनुभव होता है l एक के बाद एक पृष्ठ में विशिष्ठ समस्याओं को अनुभव करने की असंगत बात बिना उत्तर के इकठ्ठा होती हैं : क्या होगा यदि हम ही वह व्यक्ति हैं?
अय्यूब ने सभी बाधाओं को ललकारा l परमेश्वर ने उसके विषय में कहा, “उसके तुल्य खरा और सीधा और मेरा भय माननेवाला और बुराई से दूर रहनेवाला मनुष्य और कोई नहीं है” (अय्यूब 1:8) l फिर भी अय्यूब को उन कई हानियों को सहने के लिए चुना गया जो समस्त असंगतियों को ललकारा l पृथ्वी पर सभी लोगों में से, अय्यूब के पास जवाब मांगने का कारण था l हमारे समझने के लिए उसके हताश संघर्ष एक अध्याय के बाद दूसरे अध्याय में लिखे हुए हैं, “मैं क्यों?”
अय्यूब की कहानी हमें अस्पष्ट पीड़ा और बुराई के रहस्य का जवाब देने का एक तरीका देती हैं l परमेश्वर की भलाई और दया के सबसे अच्छे उदाहरणों में से एक (अध्याय 25) के दुःख और भ्रम का वर्णन करके, हम बोने और काटने के अटल नियम का विकल्प प्राप्त कहते हैं (4:7-8) l शैतानी बेचैनी की पृष्ठभूमि को (अध्याय 1) और परमेश्वर की ओर से एक अंत बताकर (42:7-17) जो एक दिन अपने पुत्र को हमारे पापों को उठाने के लिए अनुमति देगा, अय्यूब की कहानी हमें दृष्टि के बजाए विश्वास से जीने का कारण देती है l

कारण के लिए धीमा

बीबीसी विडियो सीरीज द लाइफ ऑफ़ मैमल्स(The Life of Mammals) में मेज़बान डेविड एटनबरो एक स्लोथ भालू(एक विशेष प्रजाति का भालू) पर एक विनोदी दृष्टि डालने के लिए एक पेड़ पर चढ़े l संसार का सबसे धीमी गति से चलनेवाले स्तनपायी के साथ सामना होने पर, उन्होंने “बू s s!” कहकर उसे बधाई दी l प्रतिक्रिया पाने में नाकाम, वह बताते हैं कि धीमी गति से जाना ही है जो आप करेंगे यदि आप तीन खुर वाले भालू है जो मुख्य रूप से पत्तियाँ खाता है जो आसानी से पचता नहीं है और बहुत पोष्टिक नहीं है l  

इस्राएल के इतिहास के दुहराव में, नहेम्याह हमें धीमी गति से चलने के लिए एक और उदाहरण और वर्णन की याद दिलाता है (9:9-11), लेकिन यह हास्यपूर्ण नहीं है l नहेम्याह के अनुसार, हमारा परमेश्वर धीमी गति से चलने का परम उदाहरण है – जब क्रोध की बात आती है l नहेम्याह ने याद किया कि परमेश्वर ने अपने लोगों की देखभाल कैसे की, उन्हें जीवन देने वाली व्यवस्था के द्वारा निर्देश दिया, उन्हें मिस्र से बाहर उनकी यात्रा में बनाए रखा और उन्हें वादा किया हुआ देश दिया (पद. 9-15) l यद्यपि इस्राएल ने लगातार विद्रोह किया (पद.16), फिर भी परमेश्वर ने उन्हें प्यार करना कभी नहीं छोड़ा l नहेम्याह की व्याख्या? हमारा सृष्टिकर्ता स्वभाव से “अनुग्रहकारी और दयालु, विलम्ब से कोप करनेवाला, और अतिकरुणामय” (पद.17) है l चालीस साल तक वह क्यों अपने लोगों की शिकायत, अविश्वास और बदगुमानी को इतने धीरज से सहा होगा? (पद.21) l इसकी वजह परमेश्वर की “बड़ी दया” (पद.19) थी l

हमारे बारे में क्या है? एक उग्र स्वभाव ठन्डे दिल का संकेत देता है l लेकिन परमेश्वर के हृदय की महानता हमें धीरज से उसके साथ रहने और प्यार करने के लिए जगह देती है l 

पवित्र अग्नि

कई वर्षों के सूखे और जंगल की आग के बाद, दक्षिणी केलिफोर्निया, अमेरिका के कई लोगों ने सोचा कि यह ईश्वर का कृत्य था l जब समाचार सूत्रों ने इसे पवित्र अग्नि उद्धृत करना आरम्भ किया, तो यह विचलित करनेवाली धारणा प्रबल हुयी l हालाँकि बहुतों को यह नहीं पता था कि इस क्षेत्र को “पवित्र जिम घाटी(Canyon) क्षेत्र,” कहा जाता था और इसलिए यह नाम है l 

युहन्ना बप्तिस्मा दाता के “पवित्र आत्मा और आग” का सन्दर्भ भी अपनी कहानी और स्पष्टीकरण (लूका 3:11) के साथ आया था l पीछे मुड़कर देखें, तो वह संभावित रूप से मसीहा(अभिषिक्त) एवं मीका नबी द्वारा परिस्कृत करनेवाली आग के बारे में सोच रहा था (3:1-3; 4:1) लेकिन परमेश्वर की आत्मा के हवा और आग के रूप में यीशु के अनुयायियों पर आने के बाद ही मलाकी और युहन्ना के शब्द साफ़ दिखाई दिए (प्रेरितों 2:1-4) l 

युहन्ना ने जिस आग के विषय भविष्वाणी की थी, वह अपेक्षित नहीं थी l परमेश्वर के सच्चे कार्य के रूप में, यह एक अलग तरह के मसीहा(अभिषिक्त) और पवित्र आग्नि की घोषणा करने के लिए साहस के साथ आया था l यीशु की आत्मा में, इसने हमारे निरर्थक मानवीय प्रयासों को उजागर किया और भस्म किया – प्रेम, आनंद, शांति, धैर्य, अच्छाई, दया, विश्वास, सौम्यता, और पवित्र आत्मा के आत्म-नियंत्रण के लिए जगह बनाते हुए (देखें गलतियों 5:22-23) l वे परमेश्वर के काम हैं जो वह हम में करना चाहता है l