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Articles by सोचितल डिक्सॉन

परमेश्वर के साथ कार्य करना

अपनी 1962 की मैक्सिको यात्रा के दौरान,  बिल ऐश ने एक अनाथालय में पवनचक्की हैंड पंप(windmill hand pump) को ठीक करने में मदद की l पंद्रह साल बाद,  जरूरतमंद गांवों को साफ पानी उपलब्ध कराने में मदद करके ईश्वर की सेवा करने की गहरी इच्छा से प्रेरित होकर बिल ने एक गैर-लाभकारी संगठन की स्थापना की l उन्होंने कहा, गाँव के गरीबों के लिए सुरक्षित पेयजल लाने की इच्छा वाले दूसरों को खोजने के लिए “परमेश्वर ने मुझे ‘समय का अधिकतम लाभ उठाने के लिए’  जगाया l” बाद में, 100 से अधिक देशों के हजारों पास्टर और सुसमाचार प्रचारकों के अनुरोध के माध्यम से सुरक्षित पानी की वैश्विक आवश्यकता के बारे में जानने के बाद,  बिल ने दूसरों को सेवा के प्रयासों में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया l

परमेश्‍वर हमें विभिन्न तरीकों से उसके और दूसरों के साथ सेवा करने के लिए स्वागत करता है l जब कुरिन्थुस के लोगों ने तर्क दिया कि वे किन शिक्षकों को पसंद करते हैं,  तो प्रेरित पौलुस  ने यीशु के सेवक और अपुल्लोस, के एक सहयोगी के रूप में अपनी भूमिका की पुष्टि की,  जो आध्यात्मिक विकास के लिए पूरी तरह से परमेश्वर पर निर्भर था (1 कुरिन्थियों 3: 1-7) l वह हमें याद दिलाता है कि सभी कार्यों में ईश्वर प्रदत्त मूल्य है (पद. 8) l उसकी सेवा करते हुए दूसरों के साथ काम करने के विशेषाधिकार को स्वीकार करते हुए, पौलुस  हमें एक दूसरे का निर्माण करने के लिए प्रोत्साहित करता है जब वह हमें प्यार में बदलता है (पद.9) l

यद्यपि हमारे पराक्रमी पिता को अपने महान कार्यों को पूरा करने के लिए हमारी सहायता की आवश्यकता नहीं है, फिर भी वह हमें समर्थ करता है और अपने साथ साझेदारी करने के लिए आमंत्रित करता है l

काम में परमेश्वर की करुणा

मेरा क्रोध तब तेज़ हो गया जब एक महिला ने मेरे साथ बदसलूकी की, मुझे दोषी ठहराया और मेरे बारे में बकवास की l मैं चाहती थी कि हर कोई यह जान जाए कि उसने क्या किया है – मैं चाहती थी कि उसको भी तकलीफ हो जैसे उसके व्यवहार के कारण मुझे तकलीफ हुई थी l मैं तब तक आक्रोष में डूबी रही, जब तक कि मेरी कनपटी में दर्द नहीं हुआ l लेकिन जैसा कि मैंने अपने दर्द के दूर होने के लिए प्रार्थना करना शुरू किया, पवित्र आत्मा ने मुझे दोषी ठहराया l राहत के लिए परमेश्वर से भीख मांगते हुए मैं कैसे बदला लेने की योजना बना सकती? अगर मुझे भरोसा है कि वह मेरी देखभाल करेगा, तो मैं इस स्थिति को संभालने के लिए उस पर भरोसा क्यों नहीं कर सकती थी? यह जानते हुए कि जो लोग आहत हैं, वे अक्सर दूसरे लोगों को आहत करते हैं, मैंने परमेश्वर से कहा कि वह मुझे उस स्त्री को माफ़ करने और सुलह की दिशा में काम करने में मदद करे l

भजनकार दाऊद ने अनुचित व्यवहार को सहन करते हुए परमेश्वर पर भरोसा करने की कठिनाई को समझा l हालाँकि दाऊद ने एक प्यार करने वाले सेवक होने की पूरी कोशिश की, राजा शाऊल ने ईर्ष्या के आगे घुटने टेक दिए और उसकी हत्या करना चाहा (1 शमूएल 24:1-2) l दाऊद को तब तक तकलीफ झेलनी पड़ी जब परमेश्वर ने बातों को हल किया और उसे सिंहासन लेने के लिए तैयार किया, लेकिन फिर भी उसने बदला लेने की बजाय परमेश्वर का आदर करने का चुनाव किया (पद.3-7) l उसने शाऊल के साथ सामंजस्य स्थापित करने के लिए अपनी जिम्मेदारी पूरी की और परिणाम परमेश्वर के हाथों में छोड़ दिया (पद.8-22) l

जब ऐसा लगता है कि दूसरे लोग गलत कामों के परिणाम से बच रहे हैं, हम अन्याय के साथ संघर्ष करते हैं l लेकिन हमारे दिलों और दूसरों के दिलों में परमेश्वर की करुणा के काम के साथ, हम क्षमा कर सकते हैं जैसे उसने हमें माफ़ कर दिया है और वह आशीष प्राप्त कर सकते हैं जो उसने हमारे लिए तैयार किया है l

अन्धकार में प्रकाश

एक प्रचंड आँधी हमारे नये शहर से होकर गुजरी, परिणामस्वरूप जो उमस और अँधकारमय आसमान छोड़ गयी l मैं अपने कुत्ते, जिमी को टहलाने ले गयी l मेरे परिवार का देश के एक हिस्से से विपरीत दिशा में दूसरे हिस्से में जाने की बढती चुनौतियाँ मेरे मन में भारी होती जा रही थी l अनगिनत तरीकों से निराश होकर चीजें हमारी उच्च आशाओं और अपेक्षाओं से बहुत दूर चली गई थीं l मैंने जिमी को घास का गंध लेने के लिए धीमा कर दिया l मैंने उस नाले की बात सुनी जो हमारे घर के पास बहता है l नाले के किनारे पर जंगली फूलों के बढ़ते हुए भागों पर छोटी-छोटी ज्योतियाँ चमक जाती थीं l जुगनू l

प्रभु ने मुझे शांति में लपेट लिया जब मैंने टिमटिमाती हुई रोशनी को अँधेरे को चीरते हुए देखा l मैंने भजनकार दाऊद को गाते हुए कल्पना की, “तू ही मेरे दीपक को जलाता है” (भजन 18:28) l यह घोषणा करते हुए कि परमेश्वर अपने अंधकार को प्रकाश में बदल देता है, दाऊद ने प्रभु के प्रावधान और सुरक्षा में विश्वास का प्रदर्शन किया (पद.29-30) l जीवित परमेश्वर पर सभी परिस्थितियों में उसके साथ रहने का विशवास करते हुए, दाऊद ने राष्ट्रों एक बीच उसकी प्रशंसा करने का वादा किया (पद.36-49) l

चाहे हम जीवन में अप्रत्याशित तूफानों को सहन कर रहे हों या बारिश के बीत जाने के बाद की शांति का आनंद ले रहे हों, परमेश्वर की निरंतर उपस्थिति की शांति हमारे रास्ते को अँधेरे में रोशन करती है l हमारा जीवित परमेश्वर हमेशा हमारी शक्ति, हमारा आश्रय, हमारा संभालनेवाला और हमारा उद्धारकर्ता रहेगा l

जड़वत विश्वास

कई बड़े पेड़ हैं जो 500 साल या उससे अधिक पुराने हैं l उनकी जवानी में, उनकी घुमावदार शाखाएं ऊंची और फैली हुयीं थीं l ठंडी हवा उनकी हरी पत्तियों से खड़खड़ाहट की आवाज़ निकालती है, और पत्तियों के बीच में हवा से बनी जगह से सूरज झांकता है, जिससे पत्तियों की छतरियों के नीचे छाया में प्रकाश की नृत्य करने वाली झलक दिखाई देती है l लेकिन भूमि की सतह के नीचे उनकी असली भव्यता है – उनकी जड़ प्रणाली l पेड़ की मुख्य जड़ लम्बवत बढ़ती है, जो पोषण की एक भरोसेमंद आपूर्ति हासिल करती है l उस मूसला जड़ से, जड़ों की एक बड़ी संख्या क्षितिज के सामानांतर दिशा में फैलकर पेड़ों को आजीवन नमी और पोषक तत्व आपूर्ति करते हैं l यह जटिल जड़ प्रणाली अक्सर पेड़ की तुलना में अधिक बड़े पैमाने पर बढ़ती है, और यह धड़ को स्थिर करने के लिए एक जीवन रेखा और एक लंगर के रूप में समर्थन और सेवा करती है l

इन विशाल पेड़ों की तरह, हमारे जीवन का अधिकाँश विकास सतह के नीचे होता है l जब यीशु ने अपने चेलों को बीज बोने वाले के दृष्टान्त के बारे में बताया, तो उसने पिता के साथ एक निजी रिश्ते में मजबूती से लगाए जाने के महत्व पर ज़ोर दिया l जब हम परमेश्वर के ज्ञान में बढ़ते हैं, जैसे कि शास्त्रों के माध्यम से पता चलता है, हमारे विश्वास की जड़ें उसकी आत्मा द्वारा जीवित रखी जाती हैं l परमेश्वर अपने अनुयायियों को हमेशा बदलने वाली परिस्थितियों, परीक्षाओं, सताव और चिंता में भी उन्नति करने में मदद करता है (मत्ती 13:18-23) l

हमारा प्रेमी पिता अपने वचन से हमारे हृदयों को पोषण देता है l जैसा कि उसकी आत्मा हमारे चरित्र को बदल देती है, वह सुनिश्चित करता है कि हमारे गहरे विश्वास का फल हमारे आसपास के लोगों के लिए जाहिर जो जाए l

आनंद के लिए हमारा कारण

जब स्कूल का साल शुरू हुआ, चौदह वर्षीय संदीप हर दोपहर बस से कूदकर उतर जाता और अपने घर की सड़क पर नाचता हुआ जाता l उसकी माँ ने संदीप के स्कूल के बाद के रॉक संगीत के समय का विडियो बनाया और साझा किया l वह नाचता था क्योंकि वह जीवन का आनंद लेता था और हर कदम के साथ “लोगों को खुश करता था l” एक दिन, दो कचरा बीनने वालों ने अपने व्यस्त दिनचर्या में से समय निकालकर उस जवान बच्चे के साथ जो दूसरों को अपने साथ नाचने के लिए प्रेरित करता था, पैर घसीट कर चले, पैरों पर तेजी से घूमें और झूमे l यह तिकड़ी ईमानदार और फैलने वाले आनंद की शक्ति को दर्शाती है l

भजन 149 का लिखने वाला स्थायी और शर्तहीन आनंद का श्रोत – परमेश्वर  - का वर्णन करता हैं l भजनकार परमेश्वर के लोगों से एक साथ मिलकर “यहोवा के लिए एक नया गीत गाने” को कहता है (पद.1) l वह इस्राएल से “अपने कर्ता के कारण आनंदित” होने और “अपने राजा के कारण मगन” होने के लिए आमंत्रित करता है (पद.2) l वह हमें उसके साथ नाचते हुए उसके नाम की स्तुति करने को कहता है (पद.1-3) l क्यों? क्योंकि “यहोवा अपनी प्रजा से प्रसन्न रहता है; वह नम्र लोगों का उद्धार करके उन्हें शोभायमान करेगा” (पद.4) l

हमारे प्रेममय पिता ने हमें बनाया और इस सृष्टि को संभालता है l वह हममें सिर्फ इसलिए प्रसन्न रहता है क्योंकि हम उसके प्यारे बच्चे हैं l उसने हमें बनाया, हमें जानता है, और हमें अपने साथ व्यक्तिगत सम्बन्ध बनाने के लिए आमंत्रित करता है l कितना बड़ा सम्मान है! हमारा प्रेमी और जीवित परमेश्वर ही हमारे सदा के आनंद का कारण है l हम उसकी निरंतर उपस्थिति के उपहार में आनंदित हो सकते हैं और हमारे सृष्टिकर्ता द्वारा हमें दिए गए हर दिन के लिए आभारी हो सकते हैं l  

चाँद को रचनेवाला

अन्तरिक्ष यात्रियों द्वारा ईगल(Eagle) अन्तरिक्ष यान को सी ऑफ़ ट्रैनक्वीलिटी(Sea of Tranquility- चन्द्रमा पर एक ख़ास स्थान) पर उतारने के बाद, नील आर्मस्ट्रांग(अन्तरिक्ष यात्री) ने कहा, “यह मानव के लिए एक कदम है, मानवता के लिए एक भीमकाय छलांग l” वह चंद्रमा के सतह पर कदम रखने वाला पहला मनुष्य था l दूसरे अंतरिक्ष यात्री भी गए, जिसमें अंतिम अपोलो अभियान के कमांडर जेने सेरनन शामिल थे l “वहां(चंद्रमा पर) मैं था, और वहां अर्थात्  पृथ्वी पर आप हैं, उर्जस्वी(dynamic), अभिभूत करनेवाला, और मैंने अनुभव किया . . . अचानक यह जो हुआ बहुत ही खुबसूरत है,” सेरनन ने कहा, “आप से बड़ा और मुझसे बड़ा ज़रूर कोई है l” गहरे अन्तरिक्ष में अपनी अद्वितीय दृष्टि से भी, इन लोगों ने कायनात/सृष्टि की विशालता की तुलना में अपनी लघुता को समझा l
नबी यिर्मयाह ने भी पृथ्वी और उससे परे के सृष्टिकर्ता और संभालनेवाला के रूप में परमेश्वर की विशालता पर विचार किया l सभी के सृष्टिकर्ता ने घनिष्टता से खुद को प्रकट करने का वादा किया क्योंकि उसने अपने लोगों को प्यार, क्षमा और आशा की पेशकश की (यिर्मयाह 31:33-34) l यिर्मयाह परमेश्वर की विशालता की पुष्टि करता है कि यह वही है “जिसने दिन में प्रकाश देने के लिए सूर्य को और रात में प्रकाश देने के लिए चंद्रमा और तारागन के नियम ठहराए हैं” (पद.35) l हमारा सृष्टिकर्ता और सर्वशक्तिमान प्रभु सब के ऊपर राज्य करेगा जब वह अपने सभी लोगों को छुड़ाने का काम कर रहा है (पद.36-37) l
हम आकाश की अथाह विशालता और पृथ्वी की नींव की गहराई की खोज कभी भी कर पाएंगे l लेकिन हम सृष्टि की जटिलता पर विस्मय से देखेंगे और चन्द्रमा – और बाकी सब कुछ को बनानेवाले पर भरोसा करेंगे l

सदैव का प्यार

वर्षों पहले, मेरे चार साल के बेटे ने मुझे एक धातु की प्लेट पर रखा हुआ एक लकड़ी का बना हुआ दिल दिया था, जिसके बीच में पेंट से शब्द हमेशाअंकित था l “माँ, मैं हमेशा आपसे प्यार करता हूँ,” उसने कहा।
मैंने गले लगाकर उसे धन्यवाद दिया। “मैं तुमसे और अधिक प्यार करती हूँ।”
वह बहुमूल्य उपहार अब भी मुझे मेरे बेटे के कभी न ख़त्म होनेवाले प्यार का विशवास दिलाता है। कठिन दिनों में, परमेश्वर उस मधुर उपहार का उपयोग आराम देने और प्रोत्साहित करने के लिए करता है क्योंकि वह मुझे आश्वास्त करता है कि मुझे गहराई से प्यार किया जाता है।
वह फ्रेम मुझे परमेश्वर के हमेशा के प्यार के उपहार की भी याद दिलाता है, जैसा कि उसके सम्पूर्ण वचन में व्यक्त किया गया है और उसकी आत्मा द्वारा पुष्टि की गयी है। हम परमेश्वर की अपरिवर्तनीय भलाई पर भरोसा कर सकते हैं और भजन गा सकते हैं, जो उसके स्थाई प्रेम की पुष्टि करता है, जैसे कि भजनकार करता है (भजन 136:1)। हम प्रभु को सबसे महान और सबसे ऊंचा मान कर महिमान्वित कर सकते हैं (पद.2-3), जब हम उसके न ख़त्म होने वाले आश्चर्य कर्मों और असीमित समझ पर विचार करते हैं। परमेश्वर जो हमें हमेशा  प्यार करता है, वह आकाश और पृथ्वी को जागरूक और देखभाल करनेवाला निर्माता है, जो समय के नियंत्रण को बनाए रखता है (पद.6-9)।
हम आनंदित हो सकते हैं क्योंकि जिस चिरस्थायी प्रेम के बारे में भजन कार ने गाया वही निरंतर प्रेम हमारे सर्वशक्तिमान रचनाकार और संभालनेवाला आज अपने बच्चों के जीवन में उंडेलता है। कोई फर्क नहीं पड़ता कि हम किसका सामना कर रहे हैं, जिसने हमें बनाया है और हमारे साथ रहता है हमसे शर्तहीन और पूर्ण प्यार करके निश्चित करते हुए हमें दृढ़ करता है। परमेश्वर, आपके अंतहीन और जीवन-परिवर्तन करने वाले प्रेम के अनगिनित ताकीद के लिए, धन्यवाद!

आइये स्तुति करें!

जब एसतर के फोन का अलार्म हर दिन दोपहर 3.16 बजे बंद हो जाता है, तो वह एक प्रशंसा अवकाश लेती है l वह परमेश्वर का धन्यवाद करती है और उसकी भलाई को स्वीकार करती है l यद्यपि वह दिन भर परमेश्वर के साथ बातचीत करती है, एसतर को यह अवकाश लेना बहुत पसंद है क्योंकि यह उसके साथ उसके अन्तरंग संबंधों को मनाने में मदद करता है l 

उसकी आनंदमयी भक्ति से प्रेरित होकर, मैंने क्रूस पर उसके बलिदान के लिए मसीह का धन्यवाद करने और उन लोगों के लिए प्रार्थना करने के लिए प्रत्येक दिन एक विशिष्ट समय निर्धारित करने का फैसला किया, जिन्हें अभी तक बचाया जाना है l मुझे आश्चर्य करता हूँ कि ऐसा क्या होगा यदि यीशु में सभी विश्वासी अपने तरीके से उसकी प्रशंसा करना बंद कर दें और हर दिन दूसरों के लिए प्रार्थना करें l 

पृथ्वी के छोर तक पहुँचने वाली उपासना की खुबसूरत लहर की छवि भजन 67 में प्रतिध्वनित होती है l भजनकार परमेश्वर के अनुग्रह के लिए अनुनय करता है, समस्त राष्ट्रों में उसके नाम को महान करने की अपनी इच्छा की घोषणा करता है (पद.1-2) l वह गाता है, “देश देश के लोग तेरा धन्यवाद करें; देश देश के सब लोग तेरा धन्यवाद करें (पद..3) l 

वह उसके श्रेष्ठ प्रभुता और विश्वासयोग्य मार्गदर्शन का उत्सव मनाता है (पद.4) l परमेश्वर के महान प्रेम और बहुतायत की आशीषों की जीवित साक्षी के रूप में, भजनकार परमेश्वर के लोगों को प्रफुल्लित प्रशंसा में अगुवाई करता है (पद.5-6) l 

परमेश्वर का अपने अति प्रिय बच्चों के प्रति उसकी निरंतर विश्वासयोग्यता उसे मानने में हमें प्रेरित करती है l जब हम ऐसा करते हैं, दूसरे उसमें भरोसा, उसका आदर, अनुसरण, करने में और उसे प्रभु स्वीकार करने में हमारे साथ मिल जा सकते हैं l 

परमेश्वर और बहुमूल्य है

पिछले दिनों में यीशु के विश्वासियों द्वारा आहात होने के बाद, मेरी माँ ने क्रोध में जवाब दिया जब मैंने अपना जीवन उसे समर्पित किया l “तो, अब आप मेरा न्याय करने जा रहीं हैं?” मैं ऐसा नहीं सोचती हूँ l” उन्होंने फोन रख दिया और पूरे एक वर्ष तक मुझसे बात करने से मना कर दिया l मैं दुखित हुयी, लेकिन अंततः अहसास हुआ कि परमेश्वर के साथ एक रिश्ता मेरे सबसे कीमती रिश्तों में से एक से भी अधिक महत्वपर्ण था l मैंने हर बार उनके लिए प्रार्थना की जब उन्होंने मेरे कॉल्स को अस्वीकार किया और परमेश्वर से आग्रह किया कि मेरी माँ से अधिक प्रेम करने में वह मेरी मदद करे l

अंततः, हमने सुलह कर ली l कुछ महीने बाद उन्होंने कहा, “तुम बदल गयी हो l मुझे लगता है कि मैं यीशु के बारे में अधिक सुनने के लिए तैयार हूँ l” इसके तुरंत बाद, उन्होंने मसीह को स्वीकार कर लिया और अपने बाकी दिनों में परमेश्वर और दूसरों से प्रेम किया l 

उस व्यक्ति की तरह, जो यीशु के पास यह पूछने गया था कि वह अनंत जीवन कैसे प्राप्त कर सकता था, लेकिन उदास होकर लौट गया क्योंकि वह अपनी धन से अलग नहीं होना चाहता था (मरकुस 10:17-22), मैंने उसका अनुसरण करने के लिए सब कुछ त्यागने के विचार के साथ संघर्ष किया l 

चीजों या लोगों को त्यागना सरल नहीं है जिन पर हम परमेश्वर से अधिक भरोसा रखने का विचार रखते हैं (पद.23-25) l लेकिन हम इस संसार में जो कुछ भी त्यागते हैं या खो देते हैं उसका मूल्य यीशु के साथ अनंत जीवन के उपहार से अधिक नहीं होगा l हमारे प्रेमी परमेश्वर ने सभी लोगों को बचाने के लिए स्वेच्छा से खुद को बलिदान किया l वह हमें शांति से ढकता है और हमें अनमोल और सतत प्यार से प्रेम करता है l