क्षण मायने रखता है
जब अप्रैल 1912 में टाइटैनिक एक हिमखंड से टकराया, तो पास्टर जॉन हार्पर ने सिमित संख्या में उपस्थित लाइफबोट में से एक में अपनी छह वर्षीय बेटी के लिए जगह सुरक्षित कर ली l उन्होंने एक सहयात्री को अपना जीवन-रक्षक(life-vest) वस्त्र दिया और जो कोई भी सुनना चाहता था, उनके साथ सुसमाचार साझा किया l जब जहाज डूब रहा था और सैकड़ों लोग अप्रत्याशित बचाव की प्रतीक्षा कर रहे थे, हार्पर एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के पास तैरकर गया और कहा, “प्रभु यीशु मसीह पर विश्वास करें, और आप बच जाएंगे” (प्रेरितों 16:31) l
कनाडा के ओंटारियो में टाइटैनिक के जीवित बचे लोगों के लिए एक बैठक के दौरान, एक व्यक्ति ने खुद को “जॉन हार्पर का अंतिम विश्वासी बताया l हार्पर के पहले निमंत्रण को अस्वीकार करने के बाद, जब उपदेशक ने उससे दोबारा पूछा तो उस व्यक्ति ने मसीह को स्वीकार कर लिया l उन्होंने देखा कि हैपोथर्मिया(एक बीमारी) का शिकार होने और बर्फीले पानी में डूबने से पहले हार्पर ने अपने जीवन के अंतिम क्षणों को यीशु के साथ साझा करने के लिए समर्पित कर दिया था l
तीमुथियुस को दिए गए अपने निर्देश में, प्रेरित पौलुस निःस्वार्थ प्रचार के लिए समान तत्परता और समर्पण को प्रोत्साहित करता है l परमेश्वर की निरंतर उपस्थिति और यीशु की निश्चित वापसी की पुष्टि करते हुए, पौलुस ने तीमुथियुस पर धीरज और सटीकता के साथ प्रचार करने का निर्देश दिया (2 तीमुथियुस 4:1-2) l प्रेरित युवा उपदेशक को ध्यान केन्द्रित रखने की याद दिलाता है, हालाँकि कुछ लोग यीशु को अस्वीकार कर देंगे (पद.3-5) l
हमारे दिन सिमित हैं, इसलिए हर पल मायने रखता है l हम भरोसा रख सकते हैं, कि हमारे पिता ने स्वर्ग में हमारा स्थान सुरक्षित कर दिया है जब हम घोषणा करते हैं, “यीशु बचाता है!” सोचितल डिक्सॉन
बड़े दिल(उदारता) से देना
स्कूल के बाद के बाइबल क्लब में, जहां मेरी पत्नी सू(Sue) सप्ताह में एक बार सेवा करती है, बच्चों को यूक्रेन के युद्धग्रस्त देश में बच्चों की सहायता के लिए पैसे दान करने के लिए कहा गया था l सू(Sue) द्वारा हमारी ग्यारह वर्षीय पोती मैगी को योजना के बारे में बताने के लघभग एक सप्ताह बाद, हमें डाक(mail) में उससे एक लिफाफा मिला l इसमें 3.45 डॉलर(लगभग 250 रूपये) थे, साथ में एक नोट(पर्ची) भी था: “यूक्रेन में बच्चों के लिए मेरे पास बस इतना ही है l मैं बाद में और भेजूंगी l
सू(Sue) ने मैगी को यह सुझाव नहीं दिया था कि उसे मदद करनी चाहिए, लेकिन शायद आत्मा ने उसे प्रेरित किया l और मैगी ने किया, जो यीशु से प्यार करती है और उसके लिए जीना चाहती है l
जब हम बड़े/उदार दिल से इस छोटे से उपहार के बारे में सोचते हैं तो हम बहुत कुछ सीख सकते हैं l यह 2 कुरिन्थियों 9 में पौलुस द्वारा दिए गए दान के बारे में कुछ निर्देशों को दर्शाता "करता" है l सबसे पहले, प्रेरित ने सुझाव दिया कि हमें “उदारता से” बोना चाहिए(पद.6) l “मेरे पास जो कुछ भी है” वह उपहार निश्चित रूप से एक उदार उपहार है l पौलुस ने यह भी लिखा कि हमारे उपहार ख़ुशी-ख़ुशी दिए जाने चाहिए जैसे कि परमेश्वर मार्गदर्शन करता है और जैसा हम सक्षम हैं, इसलिए नहीं कि हम “कुढ़-कुढ़” कर दें (पद.7) l और उसने भजन संहिता 112:9 का सन्दर्भ देते हुए “दरिद्रों को दान”(पद.9) के मूल्य का उल्लेख किया l
जब स्वयं उपहार देने का अवसर आता है, तो आइये पूछें कि परमेश्वर हमसे क्या प्रतिक्रिया चाहता है l जब हम अपने उपहारों को आवश्यकतामंदों तक पहुँचाने में उदार और प्रसन्न होते हैं, जैसे वह हमारा नेतृत्व करता है, तो हम इस तरह से देते हैं कि “परमेश्वर को धन्यवाद” प्राप्त होगा(2 कुरिन्थियों 9:11) l यह बड़े दिल वाला/उदार दान है l डेव ब्रेनन

घर के परमेश्वर
बाइबल अध्ययन समूह के पुरुष लगभग अस्सी वर्ष के थे, इसलिए मुझे यह जानकार आश्चर्य हुआ कि वे वासना से संघर्ष कर रहे थे l एक लड़ाई जो उनकी युवावस्था में आरम्भ हुयी थी वह अभी भी जारी है l हर दिन वे इस क्षेत्र में यीशु का अनुसरण करने की प्रतिज्ञा करते थे और उन क्षणों के लिए क्षमा मांगते थे जिनमें वे असफल रहे थे l
यह हमें आश्चर्यचकित कर सकता है कि धर्मी लोग अभी भी जीवन के अंतिम चरण में निम्न स्तर के प्रलोभनों के विरुद्ध लड़ते हैं, लेकिन शायद ऐसा नहीं होना चाहिए l मूर्ति वह चीज़ है जो हमारे जीवन में परमेश्वर का स्थान लेने का खतरा उत्पन्न करती है, और ऐसी चीजें तब दिखायी दे सकती हैं जब हम मान लेते हैं कि वे चली गयी हैं l
बाइबल में, याकूब को उसके मामा लाबान और उसके बाई एसाव से बचाया गया था l वह परमेश्वर की उपासना करने और उसके कई आशीषों का जश्न मानाने के लिए बेतेल लौट रहा था, फिर भी उसके परिवार ने अभी भी पराए देवताओं को रखा था जिन्हें याकूब को दफनाना पड़ा था (उत्पत्ति 35:2-4) l यहोशू की पुस्तक के अंत में, जब इस्राएल ने अपने शत्रुओं को हरा दिया था और कनान में बस गए थे, तब भी यहोशू को उनसे आग्रह करना पड़ा था कि “अपने बीच में से पराए देवताओं को दूर करके अपना अपना मन इस्राएल के परमेश्वर यहोवा की ओर लगाओ” (यहोशू 24:23) l और राजा दाऊद की पत्नी मीकल ने प्रत्यक्ष रूप से मूर्तियाँ रखीं, क्योंकि उसने उन सैनिकों को धोखा देने के लिए जो उसे मारने आए थे, उसके बिस्तर पर एक मूर्ति रखी (1 शमूएल 19:11-16) l
मूर्तियाँ जितना हम सोचते हैं उससे कहीं अधिक सामान्य हैं, और परमेश्वर हमसे कहीं अधिक धैर्यवान है l उनकी ओर मुड़ने का प्रलोभन आएगा, लेकिन परमेश्वर की क्षमा अधिक बड़ी है l हम यीशु के लिए अलग किए जा सकते हैं—अपने पापों से फिरकर उनमें क्षमा प्राप्त करें l माइक विटनर

देने का आनंद
जब केरी का छोटा बेटा मस्क्युलर डिस्ट्रॉफी(एक बीमारी) से सम्बंधित एक और सर्जरी से गुजर रहा था, तो वह किसी और के लिए कुछ करके अपने परिवार की स्थिति से अपना ध्यान हटाना चाहती थी l इसलिए उसने अपने बेटे के छोटे हो चुके लेकिन कम उपयोग किए गए जूतों को इकठ्ठा किया और उन्हें एक सेवकाई को दान कर दिया l उसके योगदान ने मित्रों, परिवार के सदस्यों और यहाँ तक कि पड़ोसियों को भी इसमें शामिल होने के लिए प्रेरित किया और जल्द ही दो सौ से अधिक जोड़ी जूते दान कर दिए गए l
हालाँकि जूती मुहीम(shoe drive) चलाने का उद्देश्य दूसरों को आशीष देना था, केरी को लगता है कि उसके परिवार को अधिक आशीष मिली l “पूरे अनुभव ने वास्तव में हमारा उत्साह बढ़ाया और हमें बाहर की ओर ध्यान केन्द्रित करने में मदद की l”
पौलुस समझ गया था कि यीशु के अनुयायियों के लिए उदारतापूर्वक देना कितना विशेष है l यरूशलेम जाते समय प्रेरित पौलुस इफिसुस में रुका l वह जानता था कि यह संभवतः उस चर्च के लोगों के साथ उसकी आखिरी मुलाकात होगी जिसकी स्थापना उसने वहाँ की थी l चर्च के वृद्धों को अपने विदाई भाषण में, उसने उन्हें याद दिलाया कि कैसे उसने परमेश्वर की सेवा में लगन से काम किया था (प्रेरितों 20:17-20) और उन्हें भी ऐसा करने के लिए उत्साहित किया l फिर उसने यीशु के शब्दों के साथ अंत किया: “लेने से देना धन्य है” (पद.35) l
यीशु चाहता है कि हम स्वतंत्र रूप से और विनम्रतापूर्वक अपने आप को दे दें (लूका 6:38) l जब हम उस पर हमारा मार्गदर्शन करने के लिए भरोसा करते हैं, तो वह हमें ऐसा करने के लिए अवसर प्रदान करेगा l केरी के परिवार की तरह, हम भी इसके फलस्वरूप प्राप्त होने वाले आनंद से आश्चर्यचकित हो सकते हैं l एलिसन कीडा

परमेश्वर को धन्यवाद दें
मेरी सहेली अस्पताल में अपनी तनावपूर्ण नौकरी से यह सोचते हुए जल्दी से निकल गयी, कि उसके पति के समान रूप से कठिन काम से लौटने से पहले वह रात के खाने के लिए क्या तैयार करेगी l उसने रविवार को चिकन बनाया था और सोमवार को बचा हुआ चिकन परोसा था l मंगलवार को उसे फ्रिज में केवल सब्जियां मिलीं, लेकिन वह जानती थी कि शाकाहारी भोजन उसके पति का पसंदीदा नहीं था l जब उसे कुछ और नहीं मिला जिसे वह कुछ ही मिनटों में तैयार कर सकती थी, तो उसने फैसला किया कि उसे सब्जियां बनानी होंगी l
जैसे ही उसने भोजन मेज पर रखा, उसने अपने पति से, जो अभी-अभी घर आया था, क्षमा मांगते हुए कहा: “मुझे पता है कि यह आपका पसंदीदा नहीं है l” उसके पति ने ऊपर देखा और कहा, “प्रिय, मैं बहुत खुश हूँ कि हमारे पास मेज पर खाना है l”
उनका व्यवहार मुझे परमेश्वर से हमारे दैनिक प्रबंधों के लिए धन्यवादी और आभारी होने के महत्त्व की याद दिलाता है—चाहे वे कुछ भी हों l हमारी दैनिक रोटी, या भोजन के लिए धन्यवाद देना, यीशु का उदाहरण प्रस्तुत करता है l जब उसने अपने पुनरुत्थान के बाद दो शिष्यों के साथ भोजन किया, तो मसीह ने “रोटी लेकर धन्यवाद किया और उसे [तोड़ा]”(लूका 24:30) l उसने अपने पिता को धन्यवाद दिया जैसे उसने पहले किया था जब उसने पांच हज़ार लोगों को पांच “रोटियाँ और दो छोटी मछलियाँ” खिलाई थीं (यूहन्ना 6:9)l जब हम अपने दैनिक भोजन और अन्य प्रबंधों के लिए धन्यवाद देते हैं, तो हमारी कृतज्ञता यीशु के तरीकों को दर्शाती हैं और हमारे स्वर्गिक पिता का आदर करती है l आइये आज परमेश्वर को धन्यवाद दें l कटारा पैटन
