
परमेश्वर द्वारा पसंद और प्यार किया हुआ
ऐसा आभास होता है जैसे “लाइक”—आप जानते हैं, फेसबुक पर छोटे-छोटे थम्स-अप हमेशा हमारे साथ रहे हैं l लेकिन यह पता चला है कि पुष्टि का यह आभासी प्रतीक केवल 2009 से ही अस्तित्व में है l
“लाइक” का डिज़ाइन बनाने वाला जस्टिन रोसेंस्टीन ने कहा कि वह “एक ऐसा संसार बनाने में सहायता करना चाहते हैं जिसमें लोग एक-दूसरे को नीचा दिखाने के बजाय एक-दूसरे की उन्नति करें l” लेकिन रोसेंस्टीन को इस बात पर अफ़सोस हुआ कि कैसे उनके आविष्कार ने उपयोगकर्ताओं की सोशल मिडिया के प्रति अस्वास्थ्यकर लत को सक्षम कर दिया होगा l
मुझे लगता है कि रोसेंस्टीन की रचना पुष्टि और जुड़ाव की हमारी कठोर आवश्यकता को बताती है l हम जानना चाहते हैं कि दूसरे लोग हमें जानते हैं, हम पर ध्यान देते हैं—और हाँ, हमें पसंद करते हैं l “लाइक” बिलकुल नया है l लेकिन जानने और पहचा ने जाने की हमारी भूख उतनी ही पुरानी है जितनी कि परमेश्वर द्वारा मनुष्य की रचना।
फिर भी, लाइक/like बटन से काम पूरा नहीं होता है, क्या ऐसा होता है? शुक्र है, हम ऐसे परमेश्वर की सेवा करते हैं जिसका प्यार डिजिटल सहमती प्रकट करने से कहीं अधिक गहरा है l यिर्मयाह 1:5 में, हम एक भविष्यवक्ता के साथ उसके गहराई से उद्देश्पूर्ण सम्बन्ध को देखते हैं जिसे उसने अपने पास बुलाया था l “गर्भ में रचने से पहले ही मैं ने तुझ पर चित्त लगाया, और उत्पन्न होने से पहले ही मैं ने तेरा अभिषेक किया l”
परमेश्वर भविष्यवक्ता को उसकी माँ के गर्भ में आने से पहले ही जानता था और उन्हें अर्थ और मिशन के जीवन के लिए बनाया था(पद.8-10) l और वह हमें भी एक उद्देश्यपूर्ण जीवन के लिए आमंत्रित करता है क्योंकि हम हमें करीब से जानने वाले, प्यार करने वाले और पसंद करनेवाले पिता को जानते हैं l एडम आर. होल्ज़

प्यासा और धन्यवादी
मेरे दो मित्र और मैं हमेशा से एक पहाड़ी रास्ते से पैदल यात्रा करना चाहते थे l आरम्भ करने से पूर्व, हमें आश्चर्य हुआ कि क्या हमारे पास पर्याप्त पानी था क्योंकि हमने अपनी पदयात्रा आरम्भ की थी, और पानी तेजी से खत्म हो गया l हमारे पास पानी नहीं बचा था और किनारे तक पहुँचने के लिए अभी भी कोई रास्ता नहीं बचा था l हाँफते हुए, प्रार्थना करते हुए, चलते गए l फिर हमने एक कोने का चक्कर लगाया और एक चमत्कार घटित हुआ l हमने चट्टान की एक दरार में तीन पानी कि बोतलें दबी हुयी देखीं, जिस पर लिखा था: जानता था कि आपको इसकी ज़रूरत होगी l आनंद लें!” हमें अविश्वास से एक-दूसरे को देखा, परमेश्वर को धन्यवाद कहा, कुछ बेहद ज़रूरी घूँट पीये और फिर आखिरी पड़ाव पर निकल पड़े l मैं अपने जीवन में इतना प्यासा और आभारी कभी नहीं हुआ l
भजन संहिताकार के पास पहाड़ी यात्रा का कोई अनुभव नहीं था, लेकिन यह स्पष्ट है कि वह जानता था कि प्यास लगने पर और संभवतः डर लगने पर हरिणी कैसे व्यवहार करती है l हरिणी “हाँफती” है (भजन संहिता 42:1), एक ऐसा शब्द जो प्यास और भूख को मन में लाता है, इस हद तक कि अगर कुछ नहीं बदलता है, तो आप डरते हैं कि आप मर सकते हैं l भजन संहिताकार ने हरिणी की प्यास की डिग्री को परमेश्वर के लिए उसकी इच्छा के बराबर बताया है: “वैसे ही, हे परमेश्वर, मैं तेरे लिए हाँफता हूँ” (पद.1) l
अति-आवश्यक जल की तरह, परमेश्वर सदैव उपस्थित रहने वाला सहायता है l हम उसके लिए हाँफते हैं क्योंकि वह हमारे थके हुए जीवन में नयी ताकत और ताज़गी लाता है, हमें दिन भर की तैयारी के लिए सुसज्जित करता है l जॉन ब्लेस

मसीह द्वरा साफ़ किया गया
मेरा पहला थोड़े समय का मिशन, यात्रा ओडिशा के जंगल में नदी के किनारे एक चर्च बनाने में सहायता करने के लिए थी l एक दोपहर, हम उस क्षेत्र के कुछ घरों में से एक में गए जहाँ पानी का फ़िल्टर था l जब हमारे मेजबान ने कुंए का गन्दा पानी फ़िल्टर के ऊपर डाला, तो कुछ ही मिनटों में सारी गन्दगी दूर हो गयी और साफ़. स्वच्छ पीने का पानी दिखाई देने लगा l वहीँ उस आदमी के बैठक कक्ष(living-room) में, मैंने इस बात का आभास हुआ कि मसीह द्वारा शुद्ध किये जाने का क्या अर्थ है l
जब हम पहली बार अपने दोष और शर्म के साथ यीशु के पास आते हैं और उससे हमें क्षमा करने के लिए कहते हैं और हम उन्हें अपने उद्धारकर्ता के रूप में मान लेते हैं, तो वह हमारे पापों से शुद्ध करता है और हमें नया बनाता है l हम ठीक वैसे ही शुद्ध हो जाते हैं जैसे गंदा पानी साफ़ पीने के पानी में बदल गया था l यह जानना कितनी ख़ुशी की बात है कि यीशु के बलिदान के कारण हम परमेश्वर के साथ सही स्थिति में हैं (2 कुरिन्थियों 5:21) और यह जानना कि परमेश्वर हमारे पापों को उतनी ही दूर कर देता है जितना पूर्व पश्चिम से है (भजन संहिता 103:12) l
लेकिन प्रेरित यूहन्ना हमें याद दिलाता है कि इसका अर्थ यह नहीं है कि हम फिर कभी पाप नहीं करेंगे l जब हम पाप करते हैं तो हम पानी के फ़िल्टर की छवि से सुनिश्चित हो सकते हैं और यह जानकर सांत्वना पा सकते हैं कि “यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह हमारे पापों को क्षमा करने और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है” (1 यूहन्ना 1:9) l
आइये यह जानकार आत्मविश्वास से जीएं कि हम लगातार मसीह द्वारा शुद्ध किए जा रहे हैं l नैंसी गेविलेंस
छेददार से पवित्रता तक
बचपन में मेरी बेटी को पनीर के टुकड़ों से खेलना बहुत पसंद था l वह हलके पीले चौकोर टुकड़े को मास्क की तरह अपने चेहरे पर रख कर कहती थी, “देखो माँ,” उसकी चमकदार आँखें पनीर में दो छेदों से बाहर झाँकती थीं l एक युवा माँ के रूप में, उस पनीर मास्क ने मेरे प्रयासों के बारे में मेरी भावनाओं को संक्षेप में प्रस्तुत किया—सचमुच में प्रस्तुत किया, प्यार से पूर्ण, लेकिन बहुत अपूर्ण l छेददार, पवित्र नहीं l
ओह, हम एक पवित्र जीवन जीने के लिए कितने लालायित रहते हैं—एक ऐसा जीवन जो परमेश्वर के लिए अलग किया गया और जो यीशु के समान होने की विशेषता रखता है l लेकिन दिन-ब-दिन पवित्रता पहुँच से बाहर महसूस हो रही है l इसके स्थान पर हमारा “छेददार स्वरूप” बरक़रार है l
2 तीमुथियुस 1:6-7 में, पौलुस अपने शिष्य तीमुथियुस को लिखते हुए, उससे अपने पवित्र बुलाहट के अनुसार जीने का निवेदन करता है l प्रेरित ने तब स्पष्ट किया कि “[परमेश्वर] ने हमें बचाया है और हमें पवित्र जीवन के लिए बुलाया है—हमारे द्वारा किए गए किसी कार्य के कारण नहीं, बल्कि अपने स्वयं के उद्देश्य और अनुग्रह के कारण”(पद.9) l क्या हम परमेश्वर की अनुग्रह को स्वीकार कर सकते हैं और उसके द्वारा प्रदान की जाने वाली सामर्थ्य के मंच से जी सकते हैं?
चाहे पालन-पोषण हो, विवाह हो, काम हो, या अपने पड़ोसी से प्यार करना हो, परमेश्वर हमें एक पवित्र जीवन के लिए बुलाता है—यह हमारे सिद्ध होने के प्रयासों के कारण नहीं बल्कि उसके अनुग्रह के कारण संभव हुआ है l एलिसा मॉर्गन

उदारतापूर्वक दिया गया एवं साझा किया गया
जब मेरी पत्नी और मैंने अपनी उच्च शिक्षा पूरी की, हम पर बहुत अधिक कर्ज था जिसे हमें कम ब्याज दर के साथ देना ज़रूरी था l हमने स्थानीय बैंक में ऋण के लिए आवेदन किया था लेकिन हमें अस्वीकार कर दिया गया क्योंकि हम लम्बे समय से उस शहर में नहीं रहे थे या काम नहीं किये थे l कुछ दिनों बाद, जो कुछ मेरे साथ हुआ था मैंने अपने मित्र के साथ साझा किया जो हमारे चर्च में एक वृद्ध व्यक्ति था l “मैं यह बात अपनी पत्नी से कहना चाहूँगा,” उसने कहा l
कुछ घंटो बाद फोन की घंटी बजी l यह मेरा मित्र था: “मेरी पत्नी और मैं आपको व्याज मुक्त, आपकी ज़रूरत का पैसा उधार देना चाहेंगे,” उन्होंने प्रस्ताव रखा l मुझे नहीं पता था कि क्या कहूँ, इसलिए मैंने उत्तर दिया, “मैं आपसे यह नहीं मांग सकता l” “आप नहीं मांग रहे हैं!” मेरे मित्र ने ख़ुशी से उत्तर दिया l उन्होंने सहजता से हमें ऋण दिया, और मैंने और मेरी पत्नी ने जितनी जल्दी हो सकता था उसे वापस कर दिया l
मेरा मानना है कि ये मित्र परमेश्वर के प्रति अपने प्रेम के कारण उदार थे l जैसा कि पवित्रशास्त्र हमें बताता है, “जो पुरुष अनुग्रह करता और उधार देता है, उसका कल्याण होता है, वह न्याय में अपने मुकदमे को जीतेगा” (भजन संहिता 112:5) l जो लोग परमेश्वर पर भरोसा करते हैं उनके पास “भरोसा रखने वाला” और “संभला हुआ” हृदय होता है (पद.7-8), यह समझते हुए कि वह उनके जीवन में हर अच्छी चीज़ का श्रोत है l
परमेश्वर हमारे प्रति उदार रहा है, उसने हमें जीवन और क्षमा दी है l आइये ज़रूरतमंद लोगों के साथ उनके प्यार और हमारे संसाधनों को साझा करने में उदार बने l जेम्स बैंक्स