
मुझे उपयोग करें
जेम्स मॉरिस को एक बार “एक अनपढ़ लेकिन दयालु साधारण आदमी” के रूप में वर्णित किया गया था, लेकिन परमेश्वर ने उनका उपयोग ऑगस्टस टॉपलेडी को यीशु मसीह में विश्वास लाने के लिए किया l अठारहवीं शताब्दी का पुराना न होने वाला भजन “अबदी चट्टान मुझे” के लेखक, टॉपलेडी, ने मॉरिस को उपदेश देते हुए सुना : “यह अजीब है कि मुझे . . . उन मुट्ठी भर लोगों के बीच में परमेश्वर के पास लाया गया जो एक खलिहान में एक ऐसे व्यक्ति की सेवकाई के अंतर्गत इकठ्ठा थे जो कठिनाई से अपना नाम उच्चारित कर सकता था और लिख सकता था l निश्चय ही यह परमेश्वर का काम है और अद्भुत है l”
वास्तव में, परमेश्वर अप्रत्याशित स्थानों पर और उन लोगों के द्वारा अद्भुत चीजें करता है जिन्हें हम “अयोग्य” या साधारण मान सकते हैं। 1 कुरिन्थियों 1 में, पौलुस ने यीशु में विश्वासियों को याद दिलाया कि वे एक अप्रभावी समूह थे। “अपने बुलाए जाने को तो सोचों कि न शरीर के अनुसार बहुत ज्ञानवान, और न बहुत सामर्थी, और न बहुत कुलीन बुलाए गए” (पद 26)। यद्यपि कुरिन्थुस के विश्वासी काफी साधारण थे, लेकिन परमेश्वर के अनुग्रह से उनमें वरदान और उपयोगिता की कमी नहीं थी (देखें पद 7)। और परमेश्वर—जो घमंडियों को उनकी जगह पर रखना जानता है (पद 27-29)—उनके बीच और उनके द्वारा काम कर रहा था।
क्या आप खुद को “सरल,” “साधारण” या “कमतर” मानते हैं? परेशान न हों। यदि आपके पास यीशु है और आप उसके द्वारा उपयोग किए जाने के लिए तैयार हैं, तो आपके पास पर्याप्त है। आपके हृदय की प्रार्थना हो, “हे परमेश्वर, मेरा उपयोग कर!l आर्थर जैक्सन

नया और निश्चित
तीन वर्ष तक, घरेलु ज़रूरतों के अलावा, सुज़न ने अपने लिए कुछ भी नहीं ख़रीदा l कोविड-19 महामारी ने मेरे मित्र की आय को प्रभावित किया और उसने एक साधारण जीवन शैली अपना ली l उसने बताया, “एक दिन, अपने अपार्टमेन्ट की सफाई करते समय, मैंने देखा कि मेरी चीज़ें कितनी जर्जर और फीकी दिख रही थीं l” “तभी मुझे नयी चीज़ों की कमी महसूस होने लगी—ताज़गी और उत्साह की अनुभूति l मेरा परिवेश थका हुआ और नीरस लग रहा था l मुझे ऐसा लगा जैसे आगे देखने के लिए कुछ भी नहीं है l”
सुज़न को बाइबल की एक अविश्वसनीय पुस्तक में प्रोत्साहन मिला l यरूशलेम के बेबीलोन के कब्जे में आने के बाद यिर्मयाह द्वारा लिखित, विलापगीत भविष्यवक्ता और लोगों द्वारा सहे गए दुःख के खुले घाव का वर्णन करता है l हालाँकि, दुःख की निराशा के बीच, आशा के लिए निश्चित आधार है—परमेश्वर का प्रेम l यिर्मयाह ने लिखा, “उसकी दया अमर है l प्रति भोर वह नयी होती रहती है”(3:22-23) l
सुज़न को स्मरण आया कि परमेश्वर का गहरा प्यार हर दिन नए सिरे से आता है l जब परिस्थितियाँ हमें यह महसूस कराती हैं कि अब आगे देखने के लिए कुछ नहीं है, तो हम उसकी विश्वासयोग्यता को स्मरण कर सकते हैं और आशा कर सकते हैं कि वह हमारे लिए कैसे प्रबंध/प्रदान करेगा l हम विश्वास के साथ परमेश्वर पर आशा रख सकते हैं, यह जानते हुए कि हमारी आशा कभी व्यर्थ नहीं जाती(पद.24-25) क्योंकि यह उसे दृढ़ प्रेम और करुणा में सुरक्षित है l
सुज़न कहती है, “परमेश्वर का प्यार मेरे लिए हर दिन कुछ नया है l” “मैं आशा के साथ आगे देख सकती हूँ l” केरेन हुआंग

बुरी नज़र को पराजित करना
जब भी मालती घर से बाहर निकलती, खास तौर पर जब वह किसी खास अवसर पर तैयार होकर जाती, तो उसकी माँ उसे लेकर चिंतित रहती, घबराती और उसके चेहरे पर कहीं एक काला धब्बा बना देती। उसकी माँ लगातार उस पर नज़र रखती और “बुरी नज़र” से बचने के लिए अनुष्ठान करती। तमिल में दृष्टि या हिंदी में नज़र कही जाने वाली “बुरी नज़र” से भारत और दुनिया के कई हिस्सों में डर लगता है। मालती की माँ की तरह, कई लोगों को डर है कि जब भी कोई उन्हें ईर्ष्या से देखता है, तो उन्हें किसी तरह का नुकसान पहुँच सकता है।
जब अज्ञात का डर हमें पंगु बना देता है, तो हम क्विक-फिक्स समाधान ढूँढ़ सकते हैं, जो अंधविश्वास पर आधारित हो सकते हैं। लेकिन, तीमुथियुस को लिखने वाला कहता है कि ये दुष्ट द्वारा उकसाए गए हैं (पद.1)। लेखक विश्वासियों को सावधान करता है कि “अशुद्ध और बूढ़ियों की सी कहानियों से अलग रह” (पद.7)। ये चीज़ें जो हमें डराती हैं, जैसे अंधविश्वासी कहानियाँ और विश्वास, हमें उन लोगों का हिस्सा नहीं होना चाहिए जो यीशु में विश्वास करते हैं (पद.3-7)। इसके बजाय, हमें अपने को पवित्र बनने और परमेश्वर पर निर्भर रहने के लिए प्रशिक्षित करना चाहिए (पद..7)। क्योंकि, जब मसीह ने अपनी मृत्यु और पुनरुत्थान के द्वारा शैतान पर विजय प्राप्त की, तो उसने अंधकार की शक्तियों को हमेशा के लिए हरा दिया। हमें डरने की ज़रूरत नहीं है क्योंकि “हमारी आशा उस जीवते परमेश्वर पर है, जो सब मनुष्यों का और निज करके विश्वासियों का उद्धारकर्ता है” (पद..10)।
इसलिए, जैसा कि इफिसियों में पौलुस कहता है, आइए हम परमेश्वर के सारे हथियार (इफिसियों 6:14-17) बाँध लें, जिसमें विश्वास की ढाल भी शामिल है जो हमें दुष्ट के जलते तीरों से बचाती है। दुश्मन हम पर विजय नहीं पा सकता है, और हमें अनिश्चित भविष्य से डरने की ज़रूरत नहीं है क्योंकि यीशु जिसने दुश्मन पर विजय प्राप्त की है, वह विजेता है (1 यूहन्ना 5:18)। मिनी अब्राहम

रस्सा-कशी
हममें से ज़्यादातर लोग रस्साकशी के खेल से परिचित होंगे। इसमें एक लंबी रस्सी होती है और लोगों की दो टीमें रस्सी को दोनों ओर से तब तक खींचती हैं जब तक कि एक टीम दूसरे को बीच की रेखा पर पार न कर ले। इसे और मज़ेदार बनाने के लिए, कभी-कभी बीच में मिट्टी का गड्ढा या ठंडे पानी का टब होता है ताकि हारने वाली टीम उसमें गिर जाए। जीतने के लिए सिर्फ़ शारीरिक ताकत की ज़रूरत नहीं होती। इसके लिए ध्यान, दृढ़ संकल्प और कौशल की भी ज़रूरत होती है।
पौलुस हमें बताता है कि हम रस्साकशी में हैं। लेकिन हम जो खेल मज़े के लिए खेलते हैं, उससे अलग, हमारा संघर्ष “प्रधानों से, और अधिकारियों से, और इस संसार के अंधकार के हाकिमों से और उस दुष्ट की आत्मिक सेनाओं से है जो आकाश में हैं” (पद.12)। हम एक आध्यात्मिक रस्साकशी में हैं और हमारे विरोधी हमें हराना चाहते हैं और हमें पाप की गंदगी में गिराना चाहते हैं। पौलुस हमें इस आध्यात्मिक रस्साकशी के लिए “परमेश्वर के सारे हथियार बाँधकर” (पद.13) इस आश्वासन के साथ कि मसीह ने क्रूस पर दुष्ट को पहले ही हरा दिया है, तैयार होने के लिए कहता है । मजबूत बने रहने और जीतने के लिए, हमें मानवीय ताकत या अच्छे इरादों से कहीं ज़्यादा की ज़रूरत है। हमें परमेश्वर का अनुसरण और उस पर निर्भर रहने की ज़रूरत है। जैसा कि पौलुस कहता है, हमें “प्रभु में और उसकी शक्ति के प्रभाव में बलवंत बनना” है (पद.10)।
“शैतान की युक्तियों” और उसके “जलते हुए तीरों” को खुद से संभालना मुश्किल है (पद.11-16)। धन्यवाद हो, हमें ऐसा करने की ज़रूरत नहीं है। हम परमेश्वर द्वारा दी गई ताकत और रणनीति का लाभ उठा सकते हैं (पद.11)। जब हम उसके पास जाते हैं, तो वह हमें “सत्य” का कवच देता है। हमारे पैरों में “शांति का सुसमाचार” फिट होता है। और हम “विश्वास” से सुरक्षित रहते हैं। वास्तव में, उसका वचन हमें आध्यात्मिक रस्साकशी के दौरान दृढ़ रहने में मदद करता है (पद.14-17)। रवि एस. रात्रे
