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सेवा का हृदय

जब मेरे “चाचा” एमरी का निधन हुआ, तो श्रद्धांजलियां अनेक और विविध थीं l फिर भी उन सभी सम्मानों का एक अनुकूल विषय था—एमरी ने दूसरों की सेवा करके परमेश्वर के प्रति अपना प्यार दिखाया था l इसका उदाहरण उनकी द्वितीय विश्व युद्ध की सैन्य सेवा के दौरान प्रकट था, जहाँ उन्होंने एक कॉर्प्समैन(corpsman) के रूप में कार्य किया था—एक चिकित्सक जो बिना हथियार के युद्ध में गया था l उनकी बहादुरी के लिए उन्हें उच्च सैन्य सम्मान मिला, लेकिन एमरी को युद्ध के दौरान और उसके बाद उनकी दयालु सेवा के लिए सबसे अधिक याद किया गया l

एमरी की निस्वार्थता गलातियों के प्रति पौलुस की चुनौती के अनुरूप थी l उसने लिखा, “हे भाइयों (और बहनों), तुम स्वतंत्र होने के लिए बुलाए गए हो; परन्तु ऐसा न हो कि यह स्वतंत्रता शारीरिक कामों के लिए अवसर बने, वरन् प्रेम से एक दूसरे के दास बनो” (गलातियों 5:13) l आखिर कैसे? हमारे टूटेपन में, हम दूसरों के बजाय स्वयं को पहले रखने के लिए दृढ़ हैं तो यह अप्राकृतिक निस्वार्थता कहाँ से आती है?

फिलिप्पियों 2:5 में, पौलुस यह प्रोत्साहन देता है: “जैसा मसीह यीशु का स्वभाव था वैसा ही तुम्हारा भी स्वभाव हो l” पौलुस हमारे प्रति अपने महान प्रेम के कारण क्रूस पर मृत्यु का अनुभव करने की मसीह की इच्छा का वर्णन करता है l जैसे ही उसकी आत्मा हमें मसीह के मन को उत्पन्न करती है, तभी हम अलग होते हैं और दूसरों के लिए बलिदान देने में सक्षम होते हैं—यीशु द्वारा किए गए अंतिम बलिदान को दर्शाते हुए जब उसने हमारे लिए खुद को दे दिया l क्या हम अपने भीतर आत्मा के कार्य के प्रति समर्पण कर सकते हैं l बिल क्रॉवडर

 

दुविधा और गहरा विश्वास

शनिवार की सुबह बाइबल अध्ययन के दौरान, एक पिता हैरान था क्योंकि उसकी प्यारी, मनमौजी बेटी शहर लौट आई थी, लेकिन अपने घर में उसके व्यवहार के कारण वह उससे असहज था l एक अन्य सहभागी अस्वस्थ थी क्योंकि लम्बे समय की बिमारी और उम्र बढ़ने के शारीरिक प्रभावों ने उस पर असर डाला था l कई डॉक्टरों के पास बार-बार जाने से कम से कम प्रगति हुई l वह हतोत्साहित थी l परमेश्वरीय योजना के अनुसार, मरकुस अध्याय 5 बाइबल का वह अंश था जिसका उसने उस दिन अध्ययन किया था l और जब अध्ययन समाप्त हुआ, तो आशा और ख़ुशी स्पष्ट थी l

मरकुस 5:23 में, याईर, एक बीमार का पिता, चिल्लाकर बोला, “मेरी छोटी बेटी मरने पर है l” लड़की से मिलने के लिए जाते समय, यीशु ने एक अनाम स्त्री को उसकी दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्या से ठीक करते हुए कहा, “पुत्री, तेरे विश्वास ने तुझे चंगा किया है” (पद.34) l यीशु में विश्वास से मजबूर होकर याईर और स्त्री ने उसे खोजा और वे निराश नहीं हुए l लेकिन दोनों ही मामलों में, यीशु से मिलने से पहले, चीज़ें बहतर होने से पहले “बुरी से बद्तर” की ओर बढ़ चुकी थीं l

जीवन की दुविधाएं भेदभाव नहीं करती l लिंग या उम्र, नस्ल या वर्ग की परवाह किए बिना, हम सभी ऐसी स्थितियों का सामना करते हैं जो हमें भ्रमित कर देती हैं और हमें उत्तर खोजने के लिए प्रेरित करती हैं l चुनौतियों को हमें यीशु से दूर रखने की अनुमति देने के बजाय, आइये हम उन्हें उस व्यक्ति में गहरे विश्वास के लिए प्रेरित करने का प्रयास करें जो इसे महसूस करता है जब हम उसे छूते हैं(पद.30) और जो हमें ठीक कर सकता है l आर्थर क्रॉवडर

यीशु की आशा करना

मेरा मित्र पॉल अपने रेफ्रीजरेटर के मरम्मत के लिए तकनीशियन के आने का इंतजार कर रहा था जब उसने अपने फोन पर उपकरण कम्पनी से एक सन्देश देखा l इसमें लिखा था: “जीसस अपने रास्ते पर हैं और लगभग 11.35 बजे उनके पहुँचने की उम्मीद है l” पॉल को जल्द ही पता चला कि तकनीशियन का नाम वास्तव में जीसस था l

लेकिन हम परमेश्वर के पुत्र यीशु के आने की उम्मीद कब कर सकते हैं? जब वह दो हज़ार वर्ष पहले एक मनुष्य के रूप में आया और हमारे पापों का दण्ड भुगता, तो उसने कहा कि वह वापस आएगा—लेकिन केवल पिता ही उसकी वापसी का सटीक “दिन या घड़ी” जानता था (मत्ती 24:36) l यदि हमें पता चल जाए कि हमारा उद्धारकर्ता पृथ्वी पर वापस आ रहा है तो इससे हमारी दिन-प्रतिदिन की प्राथमिकताओं में क्या अंतर आ सकता है? (यूहन्ना 14:1-3)

यीशु हमें उसकी वापसी के लिए तैयार रहने के लिए आगाह किया: “जिस घड़ी के विषय में तुम सोचते भी नहीं हो, उसी घड़ी मनुष्य का पुत्र आ जाएगा l उसने हमें याद दिलाया कि “जागते रहो, क्योंकि तुम नहीं जानते कि तुम्हारा प्रभु किस दिन आएगा” (पद.42) l

यीशु मसीह की वापसी के दिन, हमें सचेत करने के लिए हमारे फोन पर कोई अलर्ट नहीं मिलेगा l तो, हमारे भीतर काम करने वाली आत्मा की सामर्थ्य के द्वारा, आइये प्रत्येक दिन को अनंत काल के सन्दर्भ में जीएं, परमेश्वर की सेवा करें और उसके प्यार और आशा के सन्देश को दूसरों के साथ साझा करने के अवसर का हम लाभ उठाएं l सिन्डी हैस कैस्पर

 

परमेश्वर द्वारा सृजित श्रेष्ठ कृति

हालाँकि तंत्रिका विज्ञान ने यह समझने में काफी प्रगति की है कि मस्तिष्क कैसे काम करता है, वैज्ञानिक मानते हैं कि वे अभी भी इसे समझने के आरंभिक चरण में हैं l वे मस्तिष्क की संरचना, उसके कार्य के कुछ पहलुओं और उन क्षेत्रों को समझते हैं जो पर्यावरण पर प्रतिक्रिया करते हैं, हमारी इन्द्रियों को सक्रीय करते हैं, गति उत्पन्न करते हैं और भावनाओं को थामते हैं l लेकिन वे अभी भी यह पता नहीं लगा पाए हैं कि ये सभी परस्पर क्रिया व्यवहार, धारणा और स्मृति में कैसे योगदान करते हैं l परमेश्वर की अविश्वसनीय रूप से जटिल, बनायीं गयी उत्कृष्ट कृति—मानवता—अभी भी रहस्यमय है l

दाऊद ने मानव शरीर के आश्चर्य को स्वीकार किया l आलंकारिक भाषा का उपयोग करते हुए, उसने परमेश्वर की सामर्थ्य का उत्सव मनाया, जो माता के गर्भ में “रचे [हुए]” होने की सम्पूर्ण प्राकृतिक प्रक्रिया पर उसके संप्रभु नियंत्रण का प्रमाण था l उसने लिखा, “मैं भयानक और अद्भुत रीति से रचा गया हूँ l तेरे काम तो आश्चर्य के हैं” (पद.14) l प्राचीन लोग माँ के गर्भ में बच्चे के विकास को एक महान रहस्य के रूप में देखते थे (सभोपदेशक 11:5 देखें) l मानव शरीर की अद्भुत जटिलताओं के सीमित ज्ञान के बावजूद, दाऊद अभी भी परमेश्वर के अद्भुत कार्य और उपस्थिति के प्रति विस्मय और आश्चर्य में कहा था (भजन संहिता 139:17-18) l

मानव शरीर की आश्चर्यजनक और अद्भुत जटिलता हमारे महान परमेश्वर की सामर्थ्य और संप्रभुता को दर्शाती है l हमारी एकमात्र प्रतिक्रिया प्रशंसा, विस्मय और आश्चर्य हो सकती है! मर्विन विल्लियम्

 

शेबना का कब्र

तमिल राजनेता करुणानिधि चाहते थे कि उन्हें चेन्नई में मरीना समुद्र तट/Marina beach के पास उनके गुरु सीएन अन्नादुरैके बगल में दफनाया जाए, लेकिन वह नहीं चाहते थे कि उनका तर्कवादी(rationalist) विश्वास प्रणाली के अनुसार कोई धार्मिक संस्कार किया जाए l

हालाँकि एक विशाल स्मारक उनके विश्राम स्थल को चिह्हित करता है, लेकिन उनकी विश्वास प्रणाली ने उन्हें मानव अस्तित्व की सच्चाइयों से सीमित नहीं किया, जो कि जीवन और मृत्यु सच्चाई है l गंभीर सच्चाई यह है कि जीवन हमारे बिन, हमारे जाने के प्रति उदासीन होकर चलता रहता है l

यहूदा के इतिहास में एक कठिन समय के दौरान, शेबना, “राजघराने के पद पर नियुक्त भंडारी” ने मृत्यु के बाद अपनी विरासत सुनिश्चित करने के लिए अपने लिए एक कब्र बनवाई l परन्तु परमेश्वर ने, अपने नबी यशायाह के द्वारा, उससे कहा, “यहाँ तेरा कौन है कि तू ने अपनी कबर यहाँ खुदवायी है? तू अपनी कबर ऊंचे स्थान में खुदवाता और अपने रहने का स्थान चट्टान में खुदवाता है?(यशायाह 22:16) l नबी ने उससे कहा, “[परमेश्वर] तुझे मरोड़कर गेंद के समान लम्बे चौड़े देश में फेंक देगा . . . वहाँ तू मरेगा”(पद.18) l

शेबना बात से चूक गया था l मायने यह नहीं रखता कि हमें कहाँ दफनाया जाएगा; महत्वपूर्ण यह है कि हम किसकी सेवा करते हैं l जो लोग यीशु की सेवा करते हैं उन्हें यह असीम सांत्वना मिलती है: “जो मृतक प्रभु में मरते हैं, वे अब से धन्य हैं” (प्रकाशितवाक्य 14:13) l हम ऐसे परमेश्वर की सेवा करते हैं जो हमारे “प्रस्थान/मृत्यु” के प्रति कभी उदासीन नहीं रहता है l वह हमारे आगमन की आशा करता है और घर में हमारा स्वागत करता है! टिम गस्टफसन

क्षण मायने रखता है

जब अप्रैल 1912 में टाइटैनिक एक हिमखंड से टकराया, तो पास्टर जॉन हार्पर ने सिमित संख्या में उपस्थित लाइफबोट में से एक में अपनी छह वर्षीय बेटी के लिए जगह सुरक्षित कर ली l उन्होंने एक सहयात्री को अपना जीवन-रक्षक(life-vest) वस्त्र दिया और जो कोई भी सुनना चाहता था, उनके साथ सुसमाचार साझा किया l जब जहाज डूब रहा था और सैकड़ों लोग अप्रत्याशित बचाव की प्रतीक्षा कर रहे थे, हार्पर एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के पास तैरकर गया और कहा, “प्रभु यीशु मसीह पर विश्वास करें, और आप बच जाएंगे” (प्रेरितों 16:31) l

कनाडा के ओंटारियो में टाइटैनिक के जीवित बचे लोगों के लिए एक बैठक के दौरान, एक व्यक्ति ने खुद को “जॉन हार्पर का अंतिम विश्वासी बताया l हार्पर के पहले निमंत्रण को अस्वीकार करने के बाद, जब उपदेशक ने उससे दोबारा पूछा तो उस व्यक्ति ने मसीह को स्वीकार कर लिया l उन्होंने देखा कि हैपोथर्मिया(एक बीमारी) का शिकार होने और बर्फीले पानी में डूबने से पहले हार्पर ने अपने जीवन के अंतिम क्षणों को यीशु के साथ साझा करने के लिए समर्पित कर दिया था l

तीमुथियुस को दिए गए अपने निर्देश में, प्रेरित पौलुस निःस्वार्थ प्रचार के लिए समान तत्परता और समर्पण को प्रोत्साहित करता है l परमेश्वर की निरंतर उपस्थिति और यीशु की निश्चित वापसी की पुष्टि करते हुए, पौलुस ने तीमुथियुस पर धीरज और सटीकता के साथ प्रचार करने का निर्देश दिया (2 तीमुथियुस 4:1-2) l प्रेरित युवा उपदेशक को ध्यान केन्द्रित रखने की याद दिलाता है, हालाँकि कुछ लोग यीशु को अस्वीकार कर देंगे (पद.3-5) l

हमारे दिन सिमित हैं, इसलिए हर पल मायने रखता है l हम भरोसा रख सकते हैं, कि हमारे पिता ने स्वर्ग में हमारा स्थान सुरक्षित कर दिया है जब हम घोषणा करते हैं, “यीशु बचाता है!” सोचितल डिक्सॉन