
घर के परमेश्वर
बाइबल अध्ययन समूह के पुरुष लगभग अस्सी वर्ष के थे, इसलिए मुझे यह जानकार आश्चर्य हुआ कि वे वासना से संघर्ष कर रहे थे l एक लड़ाई जो उनकी युवावस्था में आरम्भ हुयी थी वह अभी भी जारी है l हर दिन वे इस क्षेत्र में यीशु का अनुसरण करने की प्रतिज्ञा करते थे और उन क्षणों के लिए क्षमा मांगते थे जिनमें वे असफल रहे थे l
यह हमें आश्चर्यचकित कर सकता है कि धर्मी लोग अभी भी जीवन के अंतिम चरण में निम्न स्तर के प्रलोभनों के विरुद्ध लड़ते हैं, लेकिन शायद ऐसा नहीं होना चाहिए l मूर्ति वह चीज़ है जो हमारे जीवन में परमेश्वर का स्थान लेने का खतरा उत्पन्न करती है, और ऐसी चीजें तब दिखायी दे सकती हैं जब हम मान लेते हैं कि वे चली गयी हैं l
बाइबल में, याकूब को उसके मामा लाबान और उसके बाई एसाव से बचाया गया था l वह परमेश्वर की उपासना करने और उसके कई आशीषों का जश्न मानाने के लिए बेतेल लौट रहा था, फिर भी उसके परिवार ने अभी भी पराए देवताओं को रखा था जिन्हें याकूब को दफनाना पड़ा था (उत्पत्ति 35:2-4) l यहोशू की पुस्तक के अंत में, जब इस्राएल ने अपने शत्रुओं को हरा दिया था और कनान में बस गए थे, तब भी यहोशू को उनसे आग्रह करना पड़ा था कि “अपने बीच में से पराए देवताओं को दूर करके अपना अपना मन इस्राएल के परमेश्वर यहोवा की ओर लगाओ” (यहोशू 24:23) l और राजा दाऊद की पत्नी मीकल ने प्रत्यक्ष रूप से मूर्तियाँ रखीं, क्योंकि उसने उन सैनिकों को धोखा देने के लिए जो उसे मारने आए थे, उसके बिस्तर पर एक मूर्ति रखी (1 शमूएल 19:11-16) l
मूर्तियाँ जितना हम सोचते हैं उससे कहीं अधिक सामान्य हैं, और परमेश्वर हमसे कहीं अधिक धैर्यवान है l उनकी ओर मुड़ने का प्रलोभन आएगा, लेकिन परमेश्वर की क्षमा अधिक बड़ी है l हम यीशु के लिए अलग किए जा सकते हैं—अपने पापों से फिरकर उनमें क्षमा प्राप्त करें l माइक विटनर

देने का आनंद
जब केरी का छोटा बेटा मस्क्युलर डिस्ट्रॉफी(एक बीमारी) से सम्बंधित एक और सर्जरी से गुजर रहा था, तो वह किसी और के लिए कुछ करके अपने परिवार की स्थिति से अपना ध्यान हटाना चाहती थी l इसलिए उसने अपने बेटे के छोटे हो चुके लेकिन कम उपयोग किए गए जूतों को इकठ्ठा किया और उन्हें एक सेवकाई को दान कर दिया l उसके योगदान ने मित्रों, परिवार के सदस्यों और यहाँ तक कि पड़ोसियों को भी इसमें शामिल होने के लिए प्रेरित किया और जल्द ही दो सौ से अधिक जोड़ी जूते दान कर दिए गए l
हालाँकि जूती मुहीम(shoe drive) चलाने का उद्देश्य दूसरों को आशीष देना था, केरी को लगता है कि उसके परिवार को अधिक आशीष मिली l “पूरे अनुभव ने वास्तव में हमारा उत्साह बढ़ाया और हमें बाहर की ओर ध्यान केन्द्रित करने में मदद की l”
पौलुस समझ गया था कि यीशु के अनुयायियों के लिए उदारतापूर्वक देना कितना विशेष है l यरूशलेम जाते समय प्रेरित पौलुस इफिसुस में रुका l वह जानता था कि यह संभवतः उस चर्च के लोगों के साथ उसकी आखिरी मुलाकात होगी जिसकी स्थापना उसने वहाँ की थी l चर्च के वृद्धों को अपने विदाई भाषण में, उसने उन्हें याद दिलाया कि कैसे उसने परमेश्वर की सेवा में लगन से काम किया था (प्रेरितों 20:17-20) और उन्हें भी ऐसा करने के लिए उत्साहित किया l फिर उसने यीशु के शब्दों के साथ अंत किया: “लेने से देना धन्य है” (पद.35) l
यीशु चाहता है कि हम स्वतंत्र रूप से और विनम्रतापूर्वक अपने आप को दे दें (लूका 6:38) l जब हम उस पर हमारा मार्गदर्शन करने के लिए भरोसा करते हैं, तो वह हमें ऐसा करने के लिए अवसर प्रदान करेगा l केरी के परिवार की तरह, हम भी इसके फलस्वरूप प्राप्त होने वाले आनंद से आश्चर्यचकित हो सकते हैं l एलिसन कीडा

परमेश्वर को धन्यवाद दें
मेरी सहेली अस्पताल में अपनी तनावपूर्ण नौकरी से यह सोचते हुए जल्दी से निकल गयी, कि उसके पति के समान रूप से कठिन काम से लौटने से पहले वह रात के खाने के लिए क्या तैयार करेगी l उसने रविवार को चिकन बनाया था और सोमवार को बचा हुआ चिकन परोसा था l मंगलवार को उसे फ्रिज में केवल सब्जियां मिलीं, लेकिन वह जानती थी कि शाकाहारी भोजन उसके पति का पसंदीदा नहीं था l जब उसे कुछ और नहीं मिला जिसे वह कुछ ही मिनटों में तैयार कर सकती थी, तो उसने फैसला किया कि उसे सब्जियां बनानी होंगी l
जैसे ही उसने भोजन मेज पर रखा, उसने अपने पति से, जो अभी-अभी घर आया था, क्षमा मांगते हुए कहा: “मुझे पता है कि यह आपका पसंदीदा नहीं है l” उसके पति ने ऊपर देखा और कहा, “प्रिय, मैं बहुत खुश हूँ कि हमारे पास मेज पर खाना है l”
उनका व्यवहार मुझे परमेश्वर से हमारे दैनिक प्रबंधों के लिए धन्यवादी और आभारी होने के महत्त्व की याद दिलाता है—चाहे वे कुछ भी हों l हमारी दैनिक रोटी, या भोजन के लिए धन्यवाद देना, यीशु का उदाहरण प्रस्तुत करता है l जब उसने अपने पुनरुत्थान के बाद दो शिष्यों के साथ भोजन किया, तो मसीह ने “रोटी लेकर धन्यवाद किया और उसे [तोड़ा]”(लूका 24:30) l उसने अपने पिता को धन्यवाद दिया जैसे उसने पहले किया था जब उसने पांच हज़ार लोगों को पांच “रोटियाँ और दो छोटी मछलियाँ” खिलाई थीं (यूहन्ना 6:9)l जब हम अपने दैनिक भोजन और अन्य प्रबंधों के लिए धन्यवाद देते हैं, तो हमारी कृतज्ञता यीशु के तरीकों को दर्शाती हैं और हमारे स्वर्गिक पिता का आदर करती है l आइये आज परमेश्वर को धन्यवाद दें l कटारा पैटन

परमेश्वर द्वारा पसंद और प्यार किया हुआ
ऐसा आभास होता है जैसे “लाइक”—आप जानते हैं, फेसबुक पर छोटे-छोटे थम्स-अप हमेशा हमारे साथ रहे हैं l लेकिन यह पता चला है कि पुष्टि का यह आभासी प्रतीक केवल 2009 से ही अस्तित्व में है l
“लाइक” का डिज़ाइन बनाने वाला जस्टिन रोसेंस्टीन ने कहा कि वह “एक ऐसा संसार बनाने में सहायता करना चाहते हैं जिसमें लोग एक-दूसरे को नीचा दिखाने के बजाय एक-दूसरे की उन्नति करें l” लेकिन रोसेंस्टीन को इस बात पर अफ़सोस हुआ कि कैसे उनके आविष्कार ने उपयोगकर्ताओं की सोशल मिडिया के प्रति अस्वास्थ्यकर लत को सक्षम कर दिया होगा l
मुझे लगता है कि रोसेंस्टीन की रचना पुष्टि और जुड़ाव की हमारी कठोर आवश्यकता को बताती है l हम जानना चाहते हैं कि दूसरे लोग हमें जानते हैं, हम पर ध्यान देते हैं—और हाँ, हमें पसंद करते हैं l “लाइक” बिलकुल नया है l लेकिन जानने और पहचा ने जाने की हमारी भूख उतनी ही पुरानी है जितनी कि परमेश्वर द्वारा मनुष्य की रचना।
फिर भी, लाइक/like बटन से काम पूरा नहीं होता है, क्या ऐसा होता है? शुक्र है, हम ऐसे परमेश्वर की सेवा करते हैं जिसका प्यार डिजिटल सहमती प्रकट करने से कहीं अधिक गहरा है l यिर्मयाह 1:5 में, हम एक भविष्यवक्ता के साथ उसके गहराई से उद्देश्पूर्ण सम्बन्ध को देखते हैं जिसे उसने अपने पास बुलाया था l “गर्भ में रचने से पहले ही मैं ने तुझ पर चित्त लगाया, और उत्पन्न होने से पहले ही मैं ने तेरा अभिषेक किया l”
परमेश्वर भविष्यवक्ता को उसकी माँ के गर्भ में आने से पहले ही जानता था और उन्हें अर्थ और मिशन के जीवन के लिए बनाया था(पद.8-10) l और वह हमें भी एक उद्देश्यपूर्ण जीवन के लिए आमंत्रित करता है क्योंकि हम हमें करीब से जानने वाले, प्यार करने वाले और पसंद करनेवाले पिता को जानते हैं l एडम आर. होल्ज़
