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भजन संहिता संहिता 72 नेता

जुलाई 2022 में, ब्रिटेन के प्रधान मंत्री को पद छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा क्योंकि कई लोगों को लगा कि ईमानदारी में बहुत कमी हैं (नव नियुक्त प्रधान मंत्री ने कुछ ही महीनों बाद पद छोड़ दिया!)। यह घटना तब शुरू हुई जब देश के स्वास्थ्य मंत्री ने वार्षिक संसदीय प्रार्थना नाश्ते में भाग लिया, सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी की आवश्यकता के बारे में दोषी महसूस किया और इस्तीफा दे दिया। जब अन्य मंत्रियों ने भी इस्तीफा दे दिया, तो प्रधान मंत्री को एहसास हुआ कि उन्हें जाना होगा। यह एक उल्लेखनीय क्षण था, जो एक शांतिपूर्ण प्रार्थना सभा से आरंभ हुआ था।

यीशु में विश्वासियों को अपने राजनीतिक नेताओं के लिए प्रार्थना करने के लिए कहा गया है (1 तीमुथियुस 2:1-2), और भजन संहिता संहिता 72 ऐसा करने के लिए एक अच्छा मार्गदर्शक है, जो एक शासक के कार्य का विवरण और उसे प्राप्त करने में उनकी मदद करने के लिए प्रार्थना दोनों है। यह आदर्श नेता को न्यायप्रिय और सत्यनिष्ठ व्यक्ति के रूप में वर्णित करता है (पद 1-2), जो कमजोरों की रक्षा करता है (पद 4), जरूरतमंदों की सेवा करता है (पद 12-13), और उत्पीड़न के खिलाफ खड़ा होता है (पद 14)। कार्यालय में उनका समय “पृथ्वी को सींचने वाली वर्षा” (पद 6) की तरह है, जो भूमि में समृद्धि लाती है (पद 3, 7, 16)। जबकि केवल मसीहा ही ऐसी भूमिका को पूरी तरह से निभा सकता है (पद 11), नेतृत्व के बेहतर मानक क्या हो सकता है?

किसी देश का स्वास्थ्य उसके पदाधिकारियों की ईमानदारी से संचालित होता है। आइए अपने राष्ट्रों के लिए “भजन संहिता संहिता 72 में वर्णित नेताओं” की तलाश करें और उनके लिए प्रार्थना करके इस भजन संहिता संहिता में पाए गए गुणों को अपनाने में उनकी मदद करें। शेरीडेन वॉयसे

ईस्टर विरोधाभास

2019 में ईस्टर के दिन, श्रीलंका में आत्मघाती बम विस्फोटों में तीन चर्च और तीन आलीशान होटल निशाना बनाए गए। जैसे ही यह खबर फैली, कुछ चर्चों ने अपनी आराधनाओं को बीच में ही बंद कर दिया। लोग घबराए और डरे हुए घर भागे। उनकी खुशी का जश्न गम में बदल गया।

तब से हर साल, ईस्टर उन प्रियजनों की यादें वापस लाता है जो बेवजह हिंसा में मारे गए थे जिसे अब “ईस्टर बमबारी” के रूप में जाना जाता है। फिर भी, वह त्रासदी, निर्दोष लोगों की हत्या और प्रियजनों को खोने वालों का दुख पुनरुत्थान के विरोधाभास की सरासर याद दिलाता है। यीशु मरा ताकि हम जी सकें। हालाँकि हम एक दिन मरेंगे, हम यह भी जानते हैं कि हम फिर से जी उठेंगे, बशर्ते हम उसके(यीशु के) जीवन को साझा करें। यही पुनरुत्थान की आशा है।

मसीह का पुनरुत्थान हमें विश्वास के साथ पौलुस के प्रश्न पर जोर देता है, “हे मृत्यु, तेरी जय कहाँ रही? हे मृत्यु, तेरा डंक कहाँ रहा?” और बोलने को कहता है, “परमेश्वर का धन्यवाद हो! जो हमारे प्रभु यीशु मसीह के द्वारा हमें जयवंत करता है”(पद..55-57)।

पुनरुत्थान रविवार पाप और मृत्यु पर मसीह की जीत का उत्सव है, और यह हमें सबसे बड़ी आशा देता है। 4वीं शताब्दी के चर्च के पित जॉन ख्रिसोस्तम ने कहा, “मसीह जी उठा है, और तुम(मृत्यु) परास्त हो गयी हो! मसीह जी उठा है, और दुष्टात्माएं गिराए गए हैं! मसीह जी उठा है, और स्वर्गदूत आनन्दित हैं! मसीह जी उठा है, और जीवन राज करता है! मसीह जी उठा है, और कब्र में एक भी मृतक नहीं बचा है!” जब हम अप्रत्याशित या असामयिक नुकसान का अनुभव करते हैं, तो हमारी आशा इस आश्वासन पर केंद्रित हो कि क्योंकि यीशु जीवित है, इसलिए उसके विजयी पुनरुत्थान में आनन्दित होना संभव है। नोएल बर्मन

 

बुनियादी बातों को भूलना

दशकों तक, मैकडॉनल्ड्स ने अपने क्वार्टर पाउंडर (एक चौथाई) बर्गर के साथ फास्ट फूड पर राज किया। 1980 के दशक में, एक प्रतिद्वंद्वी कंपनी ने मैकडॉनल्ड्स कंपनी को शिखर से हटाने का एक बेहतरीन उपाय सोचा। ने थर्ड पाउंड (एक तिहाई) बर्गर की पेशकश की – जो मैकडॉनल्ड्स से भी बड़ा था - और उसे उसी कीमत पर बेचा । इससे भी अधिक, बर्गर ने कई अंध-स्वाद वाले परीक्षण (एक उत्पाद नमूनाकरण विधि जिसमें लोगों को मूल्यांकन किए जा रहे ब्रांड के बारे में जानकारी नहीं होती है) भी जीते। लेकिन बर्गर बुरी तरह असफ़ल रहा उसे किसी ने भी नहीं खरीदा I आख़िरकार, उन्होंने इसे भोजनसूची(मेन्यु) से हटा दिया। खोज करने से पता चला कि उपभोक्ताओं ने हिसाब गलत लगाया और सोचा कि थर्ड पाउंड बर्गर क्वार्टर पाउंडर से छोटा है। एक बहुत ही शानदार विचार विफल हो गया क्योंकि लोग बुनियादी बातों से चूक गए।

यीशु ने चेतावनी दी कि बुनियादी बातों को भूल जाना कितना आसान है। धार्मिक नेताओं ने, जिस सप्ताह उन्हें क्रूस पर चढ़ाने की, और उन्हें फंसाने और बदनाम करने की योजना बनाई, एक महिला के बारे में एक अजीब, काल्पनिक दृश्य प्रस्तुत किया जो सात बार विधवा हो चुकी थी (मत्ती 22:23-28)। यीशु ने, इस बात पर जोर देते हुए उनसे कहा कि यह जटिल दुविधा कोई समस्या नहीं थी। बल्कि, उनकी समस्या यह थी कि वे "पवित्रशास्त्र और परमेश्वर की सामर्थ्य को नहीं जानते”( पद- 29)। यीशु ने ज़ोर देकर कहा कि धर्मग्रंथों का प्राथमिक उद्देश्य तार्किक या दर्शन-शास्‍त्र संबंधी पहेलियों का उत्तर देना नहीं है। बल्कि, उनका प्राथमिक उद्देश्य हमें यीशु को जानने और उनसे प्यार करने और उनमें "अनन्त जीवन पाने" के लिए प्रेरित करना है (यूहन्ना 5:39)। ये वे बुनियादी बातें हैं जिन्हें अगुवे भूल गए। हम भी अक्सर बुनियादी बातें भूल जाते हैं। बाइबल का मुख्य उद्देश्य जीवित यीशु से मुलाकात करना है। इससे चूकना दिल तोड़ देने वाला होगा।विन्न कोल्लियर

 

यीशु में पुनर्जीवन

लियोनार्डो दा विंची को हम अनेक गुणों का, सर्वगुणसंपन्न व्यक्ति के रूप में जानते हैं। उनके बौद्धिक कौशल ने अध्ययन और कला के कई क्षेत्रों में प्रगति की। फिर भी लियोनार्डो ने “हमारे इन दुखद दिनों” का ज़िक्र किया और अफसोस जताया कि हम “लोगों के दिमाग में अपनी कोई भी यादें छोड़े बिना” ही मर जाते हैं।

लियोनार्डो ने कहा, “जब मैंने सोचा कि मैं जीना सीख रहा हूं, मैं मरना सीख रहा था।” उसने जितना सोचा होगा, वह उससे कहीं ज्यादा सच्चाई के करीब था। मरना सीखना ही जीवन का मार्ग है। यरूशलेम में यीशु के विजयी प्रवेश के बाद (जिसे हम अब पाम संडे (खजूरों का इतवार) के रूप में मनाते हैं; यहुन्ना 12:12-19 देखें), उन्होंने कहा, “जब तक गेहूँ का दाना भूमि में पड़कर मर नहीं जाता, वह अकेला रहता है।परन्तु जब मर जाता है, तो बहुत फल लाता है” (पद 24)। उन्होंने यह बात अपनी मृत्यु के बारे में कही, लेकिन हम सभी को शामिल करने के लिए इसका विस्तार किया: “जो अपने प्राण को प्रिय जानता है,वह उसे खो देता;और जो इस जगत में अपने प्राण को अप्रिय जानता है; वह अनंत जीवन के लिए उस की रक्षा करेगा” (पद 25)।

प्रेरित पौलुस ने बपतिस्मा के माध्यम से मसीह के साथ हमारे “गाड़े जाने” के बारे में लिखा, जैसे मसीह पिता की महिमा के द्वारा मृतकों में से जीवित हो गए, हमे भी जीने के लिए एक नया जीवन मिला। क्योंकि अगर उनकी मृत्यु में हम उनके साथ एक हुए हैं, तो निश्चय उनके पुनरुत्थान में भी उनके साथ एक होंगे (रोमियों 6:4-5)।

अपनी मृत्यु के माध्यम से, यीशु हमें पुनर्जन्म प्रदान करते हैं - पुनर्जागरण का वास्तविक अर्थ! उन्होंने अपने पिता के साथ अनन्त जीवन का मार्ग बनाया है। टिम गुस्टाफसन

 

परमेश्वर की अब से सर्वदा तक मौजूदगी

मृणालिनी संघर्ष कर रही थी। उसके मित्र जो यीशु में विश्वास करते थे, और वह उनके जीवन के संघर्षों को संभालने के तरीके का सम्मान करती थी। उसे उनसे थोड़ी ईर्ष्या भी हो रही थी। लेकिन मृणालिनी ने नहीं सोचा था कि वह उनकी तरह जीवन जी सकती है; उसने सोचा कि मसीह में विश्वास रखने का मतलब नियमों का पालन करना है। अंततः, कॉलेज के एक साथी छात्र ने उसे यह देखने में मदद की कि परमेश्वर उसका जीवन खराब नहीं करना चाहता था; अपितु वह उसके उतार-चढ़ाव के बीच उसके लिए सर्वोत्तम चाहता था। एक बार जब उसे यह समझ में आ गया, तो मृणालिनी यीशु पर अपने उद्धारकर्ता के रूप में भरोसा करने के लिए तैयार हो गई और उसने अपने प्रति परमेश्वर के प्रेम के बारे में शानदार सच्चाई को अपना लिया।

राजा सुलैमान मृणालिनी को ऐसी ही सलाह दे सकते थे। उन्होंने स्वीकार किया कि इस दुनिया में दुख हैं। वास्तव में, “हर चीज़ का एक समय होता है” (सभोपदेशक 3:1) - “रोने का समय और हंसने का भी समय; छाती पीटने का समय, और नाचने का भी समय है” (पद 4)। लेकिन और भी बहुत कुछ है। परमेश्वर ने “मानव हृदय में अनादि-अनन्त काल का ज्ञान भी उत्पन्न किया है” (पद 11)। अनन्त काल का अर्थ उसकी उपस्थिति में जीना है।

जैसा कि यीशु ने कहा था (यूहन्ना 10:10), मृणालिनी ने “पूरी तरह से” जीवन प्राप्त किया, जब उसने उस पर भरोसा किया। लेकिन उसे और भी बहुत कुछ हासिल हुआ! विश्वास के माध्यम से, “[उसके] हृदय में अनंत काल” (सभोपदेशक 3:11) एक भविष्य का वादा बन गया जब जीवन के संघर्षों को भुला दिया जाएगा (यशायाह 65:17) और परमेश्वर की गौरवशाली उपस्थिति एक शाश्वत वास्तविकता होगी। डेव ब्रैनन

 

मैं आपको सुन रहा हूँ, परमेश्वर!

जब डॉक्टरों ने पहली बार श्रवण उपकरण उसके कान में लगाया तो शिशु ग्राहम को उसकी माँ ने अपनी गोद में पकड़ रखा था और वह छटपटा रहा था और लड़खड़ा रहा था। डॉक्टर द्वारा उपकरण चालू करने के कुछ क्षण बाद, ग्राहम ने रोना बंद कर दिया। उसकी आँखें चौड़ी हो गईं, वो हंसा। वह अपनी माँ की आवाज़ सुन सकता था जो उसे सांत्वना दे रही थी, उसे प्रोत्साहित कर रही थी और उसका नाम पुकार रही थी।

बेबी ग्राहम ने अपनी माँ को बोलते हुए सुना, लेकिन उसे उसकी आवाज़ को पहचानने और उसके शब्दों के अर्थ को समझने में मदद की ज़रूरत थी। यीशु लोगों को इसी तरह की सीखने की प्रक्रिया में आमंत्रित करते हैं। एक बार जब हम मसीह को अपने उद्धारकर्ता के रूप में स्वीकार कर लेते हैं, तो हम वह भेड़ बन जाते हैं जिसे वह गहराई से जानता है और व्यक्तिगत रूप से मार्गदर्शन करता है (यूहन्ना 10:3)। जैसे-जैसे हम उसकी आवाज को सुनने और उस पर ध्यान देने का अभ्यास करते हैं, हम उस पर भरोसा करने और उसकी आज्ञा मानने के लिए अपने आप को तैयार कर सकते हैं (पद 4)।

पुराने नियम में, परमेश्वर ने भविष्यवक्ताओं के माध्यम से बात की। नये नियम में, यीशु—देहधारी परमेश्वर —लोगों से सीधे बात करते थे। आज, यीशु में विश्वासियों के पास पवित्र आत्मा की शक्ति तक पहुंच है, जो हमें परमेश्वर के शब्दों को समझने और उनका पालन करने में मदद करती है जिनसे उन्होंने प्रेरित किया और बाइबल में संरक्षित किया। हम अपनी प्रार्थनाओं के माध्यम से यीशु से सीधे संवाद कर सकते हैं क्योंकि वह पवित्रशास्त्र और अपने लोगों के माध्यम से हमसे बात करता है। जैसे ही हम परमेश्वर की आवाज़ को पहचानते हैं, जो हमेशा बाइबल में उनके शब्दों के अनुरूप होती है, हम आभार और प्रशंसा के साथ चिल्ला सकते हैं, "मैं आपको सुन रहा हूँ परमेश्वर!"सोची डिक्सन

 

कार्य और सत्य

मेरे पति और मेरी शादी के बाद, मेरे मामा ने हमें मेरे परिवार का इतिहास बताया। उन्होंने बताया कि भले ही मेरे दादा एक स्कूल के प्रिंसिपल थे, लेकिन उनकी आय उनके सात बच्चों का भरण-पोषण करने के लिए पर्याप्त नहीं थी। फिर भी, उन्होंने अपने बड़े बच्चों की उच्च शिक्षा में निवेश किया, जो कॉलेज जाने पर अक्सर अपने चाचा या चाची के साथ रहते थे। जब ये बड़े बच्चे कमाने लगे, तो उन्होंने अपने छोटे भाई-बहनों की शिक्षा का खर्च उठाना शुरू कर दिया। उन्होंने प्रोत्साहित करते हुए कहा, “हम एक-दूसरे की मदद करते हैं, याद रखें कि अगर तुम लोगों को किसी चीज़ की ज़रूरत है तो हमारे पास आ सकते हो। साथ ही, जब दूसरों को ज़रूरत हो तो उनकी मदद करने के लिए तैयार रहो।”

अपनी पत्री में, यूहन्ना ने उन लोगों को भी ऐसी ही सलाह दी जिन्हें उसने “बालकों” कहा था। वह लिखता हैं, “हे बालकों, हम वचन और जीभ ही से नहीं, पर काम और सत्य के द्वारा भी प्रेम करे”(पद.18)। वह हमें उस प्रेम की याद दिलाता हैं जो यीशु का हमसे था जब उसने कुछ भी नहीं रोका और हमारे लिए अपना जीवन दे दिया (पद.16)। वास्तव में, यूहन्ना कहता है कि यीशु ने वास्तविक प्रेम को दर्शाया (पद.16)। इस बात को ध्यान में रखते हुए, यूहन्ना ने विश्वासियों को एक दूसरे के साथ अपनी “भौतिक संपत्ति” साझा करने के लिए कहा (पद.17)। क्योंकि यदि कोई विश्वासी “अपने भाई [या बहन] को कंगाल देखकर उस पर तरस खाना न चाहे,” तो यूहन्ना पूछता है, “तो उसमें परमेश्वर का प्रेम कैसे बना रह सकता है?”

संसार हमें बताती है कि अपने संसाधनों को जमा करना समझदारी है। लेकिन बाइबल हमें बताती है कि ये वरदान दूसरों की सेवा करने के लिए दिए गए हैं (1 पतरस 4:10)। यदि हम किसी को ज़रूरत में देखते हैं, चाहे वह रिश्तेदार हो, दोस्त हो, साथी शिष्य हो या अजनबी हो, तो आइए हम उनसे काम और सत्य से प्रेम करें। ऐसा करके, हम दूसरों के सामने परमेश्वर के प्रेम का प्रदर्शन करते हैं जो हमारे अंदर है। —ऍन हरिकीर्तन

दूसरों से प्रेम करके परमेश्वर से प्रेम करना

अल्बा परिवार ने केवल तेरह महीने के अंतर पर एक जैसे जुड़वां बच्चों के दो जोड़े को जन्म देने की दुर्लभ घटना का अनुभव किया । उन्होंने अपनी माता-पिता की जिम्मेदारियों के साथ-साथ अपनी नौकरी को कैसे निभाया? उनके दोस्तों और परिवार के समुदाय ने आगे बढ़कर उनकी मदद की। दोनों तरफ से नाना–नानी और दादा-दादी दिन के दौरान जुड़वा बच्चों की एक जोड़ी ले जाते थे ताकि बच्चों के माता-पिता काम कर सकें और स्वास्थ्य बीमा के लिए भुगतान कर सकें। एक कंपनी ने डायपर की एक साल की आपूर्ति दी। दंपत्ति के सहकर्मियों ने अपने निजी बीमारी की छुट्टियों का दान दिया। दंपत्ति ने सहमती में कहा “हम अपने समुदाय के बिना यह नहीं कर सकते थे,”। वास्तव में, एक लाइव इंटरव्यू (साक्षात्कार) के दौरान, सह-मेजबान ने अपना माइक हटा दिया और भटकते हुए उनके एक नन्हे बच्चे को पकड़ने के लिए उसके पीछे भागी और इस प्रकार उसने भी अपना सामुदायिक योगदान दिया!

मत्ती 25:31-46 में, यीशु इस बात को स्पष्ट करने के लिए एक दृष्टांत बताते हैं कि जब हम दूसरों की सेवा करते हैं, तो हम परमेश्वर की सेवा करते हैं। सेवा के कार्यों को सूचीबद्ध करने के बाद, जिसमें भूखे को भोजन देना, प्यासे को पानी देना, बेघरों को घर देना, नग्न लोगों को कपड़े देना और बीमारों का इलाज करना शामिल है (पद- 35-36), यीशु ने दृष्टांत इस तरह पूरा किया, “मैं तुम से सच कहता हूं, कि तुम ने जो मेरे इन छोटे से छोटे भाइयों में से किसी एक के साथ किया,वह मेरे ही साथ किया” (पद 40)।

हमारी दयालुता के अंतिम प्राप्तकर्ता के रूप में यीशु की कल्पना करना हमारे पड़ोस, परिवारों, चर्चों और दुनिया में सेवा करने के लिए सच्ची प्रेरणा है। जब वे हमें दूसरों की जरूरतों में त्यागपूर्वक योगदान देने के लिए प्रेरित करते है, तब हम उनकी सेवा करते हैं। जब हम दूसरों से प्रेम करते हैं, तब हम परमेश्वर से प्रेम करते हैं। एलिसा मॉर्गन

 

परमेश्वर की बाँहों में

ड्रिल की आवाज से पांच साल की सारा घबरा गई। वह दंत चिकित्सक की कुर्सी से उछल पड़ी और वापस बैठने से इन्कार कर दिया। दंत चिकित्सक ने समझदारी से सिर हिलाते हुए उसके पिता से कहा, “पिताजी, कुर्सी पर बैठ जाइए।” जेसन ने सोचा कि वह अपनी बेटी को यह दिखाना चाहता था कि यह कितना आसान है। लेकिन तभी दंत चिकित्सक छोटी लड़की की ओर मुड़ा और कहा, “अब, ऊपर चढ़ो और पिताजी की गोद में बैठो।” अब उसके पिता ने उसे अपनी आश्वस्त करने वाली बाहों में भर लिया, सारा पूरी तरह से शांत हो गई, और दंत चिकित्सक अपना काम जारी रखने में सक्षम हो गया।

उस दिन, जेसन ने अपने स्वर्गीय पिता की उपस्थिति से मिलने वाले आश्वासन और शांति के बारे में एक बड़ा सबक सीखा। उन्होंने कहा, “कभी-कभी, परमेश्वर हमें जिस चीज़ से गुजरना पड़ता है, उसे अपने ऊपर नहीं ले लेता।” “लेकिन परमेश्वर मुझे दिखा रहे थे, ‘मैं वहां तुम्हारे साथ रहूंगा।’”

भजन संहिता संहिता 91 परमेश्वर की शांति देने वाली उपस्थिति और शक्ति की बात करता है जो हमें अपने परीक्षाओं का सामना करने की शक्ति देता है। यह जान कर कि हम उसकी शक्तिशाली भुजाओं में आराम कर सकते हैं, हमें बहुत आश्वासन देता है, जैसा कि उससे प्यार करने वालों से उसका वादा है: “जब वह मुझ को पुकारे, तब मैं उसकी सुनुंगा; संकट में मैं उसके संग रहूँगा।” (पद् 15)।

जीवन में कई अपरिहार्य चुनौतियाँ और परीक्षाएं हैं, और हमें अनिवार्य रूप से दर्द और पीड़ा से गुजरना होगा। लेकिन हमारे चारों ओर परमेश्वर की आश्वस्त भुजाओं के साथ, हम अपने संकटों और परिस्थितियों को सहन करने में सक्षम होंगे, और जैसे-जैसे हम उनके माध्यम से आगे बढ़ेंगे, वह हमारे विश्वास को मजबूत करेगा। लेस्ली कोह