
मसीह द्वरा साफ़ किया गया
मेरा पहला थोड़े समय का मिशन, यात्रा ओडिशा के जंगल में नदी के किनारे एक चर्च बनाने में सहायता करने के लिए थी l एक दोपहर, हम उस क्षेत्र के कुछ घरों में से एक में गए जहाँ पानी का फ़िल्टर था l जब हमारे मेजबान ने कुंए का गन्दा पानी फ़िल्टर के ऊपर डाला, तो कुछ ही मिनटों में सारी गन्दगी दूर हो गयी और साफ़. स्वच्छ पीने का पानी दिखाई देने लगा l वहीँ उस आदमी के बैठक कक्ष(living-room) में, मैंने इस बात का आभास हुआ कि मसीह द्वारा शुद्ध किये जाने का क्या अर्थ है l
जब हम पहली बार अपने दोष और शर्म के साथ यीशु के पास आते हैं और उससे हमें क्षमा करने के लिए कहते हैं और हम उन्हें अपने उद्धारकर्ता के रूप में मान लेते हैं, तो वह हमारे पापों से शुद्ध करता है और हमें नया बनाता है l हम ठीक वैसे ही शुद्ध हो जाते हैं जैसे गंदा पानी साफ़ पीने के पानी में बदल गया था l यह जानना कितनी ख़ुशी की बात है कि यीशु के बलिदान के कारण हम परमेश्वर के साथ सही स्थिति में हैं (2 कुरिन्थियों 5:21) और यह जानना कि परमेश्वर हमारे पापों को उतनी ही दूर कर देता है जितना पूर्व पश्चिम से है (भजन संहिता 103:12) l
लेकिन प्रेरित यूहन्ना हमें याद दिलाता है कि इसका अर्थ यह नहीं है कि हम फिर कभी पाप नहीं करेंगे l जब हम पाप करते हैं तो हम पानी के फ़िल्टर की छवि से सुनिश्चित हो सकते हैं और यह जानकर सांत्वना पा सकते हैं कि “यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह हमारे पापों को क्षमा करने और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है” (1 यूहन्ना 1:9) l
आइये यह जानकार आत्मविश्वास से जीएं कि हम लगातार मसीह द्वारा शुद्ध किए जा रहे हैं l नैंसी गेविलेंस
छेददार से पवित्रता तक
बचपन में मेरी बेटी को पनीर के टुकड़ों से खेलना बहुत पसंद था l वह हलके पीले चौकोर टुकड़े को मास्क की तरह अपने चेहरे पर रख कर कहती थी, “देखो माँ,” उसकी चमकदार आँखें पनीर में दो छेदों से बाहर झाँकती थीं l एक युवा माँ के रूप में, उस पनीर मास्क ने मेरे प्रयासों के बारे में मेरी भावनाओं को संक्षेप में प्रस्तुत किया—सचमुच में प्रस्तुत किया, प्यार से पूर्ण, लेकिन बहुत अपूर्ण l छेददार, पवित्र नहीं l
ओह, हम एक पवित्र जीवन जीने के लिए कितने लालायित रहते हैं—एक ऐसा जीवन जो परमेश्वर के लिए अलग किया गया और जो यीशु के समान होने की विशेषता रखता है l लेकिन दिन-ब-दिन पवित्रता पहुँच से बाहर महसूस हो रही है l इसके स्थान पर हमारा “छेददार स्वरूप” बरक़रार है l
2 तीमुथियुस 1:6-7 में, पौलुस अपने शिष्य तीमुथियुस को लिखते हुए, उससे अपने पवित्र बुलाहट के अनुसार जीने का निवेदन करता है l प्रेरित ने तब स्पष्ट किया कि “[परमेश्वर] ने हमें बचाया है और हमें पवित्र जीवन के लिए बुलाया है—हमारे द्वारा किए गए किसी कार्य के कारण नहीं, बल्कि अपने स्वयं के उद्देश्य और अनुग्रह के कारण”(पद.9) l क्या हम परमेश्वर की अनुग्रह को स्वीकार कर सकते हैं और उसके द्वारा प्रदान की जाने वाली सामर्थ्य के मंच से जी सकते हैं?
चाहे पालन-पोषण हो, विवाह हो, काम हो, या अपने पड़ोसी से प्यार करना हो, परमेश्वर हमें एक पवित्र जीवन के लिए बुलाता है—यह हमारे सिद्ध होने के प्रयासों के कारण नहीं बल्कि उसके अनुग्रह के कारण संभव हुआ है l एलिसा मॉर्गन

उदारतापूर्वक दिया गया एवं साझा किया गया
जब मेरी पत्नी और मैंने अपनी उच्च शिक्षा पूरी की, हम पर बहुत अधिक कर्ज था जिसे हमें कम ब्याज दर के साथ देना ज़रूरी था l हमने स्थानीय बैंक में ऋण के लिए आवेदन किया था लेकिन हमें अस्वीकार कर दिया गया क्योंकि हम लम्बे समय से उस शहर में नहीं रहे थे या काम नहीं किये थे l कुछ दिनों बाद, जो कुछ मेरे साथ हुआ था मैंने अपने मित्र के साथ साझा किया जो हमारे चर्च में एक वृद्ध व्यक्ति था l “मैं यह बात अपनी पत्नी से कहना चाहूँगा,” उसने कहा l
कुछ घंटो बाद फोन की घंटी बजी l यह मेरा मित्र था: “मेरी पत्नी और मैं आपको व्याज मुक्त, आपकी ज़रूरत का पैसा उधार देना चाहेंगे,” उन्होंने प्रस्ताव रखा l मुझे नहीं पता था कि क्या कहूँ, इसलिए मैंने उत्तर दिया, “मैं आपसे यह नहीं मांग सकता l” “आप नहीं मांग रहे हैं!” मेरे मित्र ने ख़ुशी से उत्तर दिया l उन्होंने सहजता से हमें ऋण दिया, और मैंने और मेरी पत्नी ने जितनी जल्दी हो सकता था उसे वापस कर दिया l
मेरा मानना है कि ये मित्र परमेश्वर के प्रति अपने प्रेम के कारण उदार थे l जैसा कि पवित्रशास्त्र हमें बताता है, “जो पुरुष अनुग्रह करता और उधार देता है, उसका कल्याण होता है, वह न्याय में अपने मुकदमे को जीतेगा” (भजन संहिता 112:5) l जो लोग परमेश्वर पर भरोसा करते हैं उनके पास “भरोसा रखने वाला” और “संभला हुआ” हृदय होता है (पद.7-8), यह समझते हुए कि वह उनके जीवन में हर अच्छी चीज़ का श्रोत है l
परमेश्वर हमारे प्रति उदार रहा है, उसने हमें जीवन और क्षमा दी है l आइये ज़रूरतमंद लोगों के साथ उनके प्यार और हमारे संसाधनों को साझा करने में उदार बने l जेम्स बैंक्स
पिज़्ज़ा के माध्यम से दया
मेरे चर्च के अगुवे हेरोल्ड और उनकी पत्नी, पाम के रात्रि भोज के निमंत्रण ने मेरे दिल को प्रसन्न किया, लेकिन साथ ही मुझे घबराहट भी हुई। मैं एक कॉलेज बाइबल अध्ययन समूह में शामिल हो गई थी जो ऐसे विचार सिखाता था जो बाइबल की कुछ शिक्षाओं के विपरीत थे। क्या वे मुझे इस बारे में व्याख्यान देंगे?
पिज़्ज़ा खाने के दौरान, उन्होंने अपने परिवार के बारे में बताया और मेरे परिवार के बारे में पूछा। जब मैं घर के कामों, अपने कुत्ते और उस लड़के के बारे में बात कर रही थी जिस पर मुझे क्रश था, तो वे मेरी बात सुनते रहे। बाद में ही उन्होंने धीरे से मुझे उस समूह के बारे में सावधान किया जिसमें मैं जा रही थी और बताया कि उसकी शिक्षाओं में क्या गलत है।
उनकी चेतावनी मुझे बाइबल अध्ययन में प्रस्तुत झूठ से दूर और पवित्रशास्त्र की सच्चाइयों के करीब ले गई। अपने पत्र में, यहूदा ने झूठे शिक्षकों के बारे में कड़ी भाषा का उपयोग किया है, विश्वासियों से "विश्वास के लिए संघर्ष करने" का आग्रह किया है (यहूदा 1:3)। उसने उन्हें स्मरण दिलाया कि अन्तिम समय में ठट्ठा करनेवाले होंगे। ये वे है जो फूट डालते है . . . और उनमें आत्मा नहीं है” (पद 18-19)। हालाँकि, यहूदा विश्वासियों से "संदेह करने वालों के प्रति दयालु होने" (पद 22) का भी आह्वान करता है, उनके साथ आकर, सच्चाई से समझौता किए बिना दया दिखाएँ।
हेरोल्ड और पाम को पता था कि मैं अपने विश्वास पर दृढ़ नहीं हूं, लेकिन मुझे आंकने के बजाय, उन्होंने पहले अपनी दोस्ती और फिर अपनी बुद्धिमत्ता प्रदान की। परमेश्वर हमें भी ऐसा ही प्रेम और धैर्य दे, ज्ञान और करुणा का उपयोग करते हुए हम उन लोगों के साथ बातचीत करें जो संदेह में है।करेन हुआंग
शब्द हमारे मन को दर्शाते हैं
आप अभद्र भाषा को कैसे ख़त्म करते हैं? एक हाई स्कूल ने “कोई गलत भाषा नहीं” का वादा करने का फैसला किया। छात्रों ने शपथ लेते हुए कहा: “मैं गंभीरता से वादा करता हूं कि [हमारे स्कूल] की दीवारों और संपत्तियों के भीतर किसी भी प्रकार की अभद्र भाषा का उपयोग नहीं करेंगे।” यह एक नेक प्रयास था, लेकिन, यीशु के अनुसार, कोई भी बाहरी नियम या प्रतिज्ञा कभी भी अभद्र भाषा की गंध को छुपा नहीं सकती।
हमारे मुँह से निकलने वाले शब्दों की दुर्गंध को दूर करने की शुरुआत हमारे हृदयों को नवीनीकृत करने से होती है। जिस प्रकार लोग वृक्ष के प्रकार को उसके फल से पहचानते हैं (लूका 6:43-44), यीशु ने कहा कि हमारी वाणी इस बात का एक ठोस संकेतक है कि हमारे दिल उसके और उसके तरीकों के अनुरूप हैं या नहीं। फल एक व्यक्ति की वाणी को दर्शाता है, “क्योंकि मुँह वही बोलता है जो हृदय में भरा होता है” (पद 45)। मसीह इस ओर इशारा कर रहे थे कि यदि हम वास्तव में हमारे मुँह से निकलने वाली बातों को बदलना चाहते हैं, तो हमें सबसे पहले अपने हृदयों को बदलने पर ध्यान केंद्रित करना होगा, और वह हमारी मदद करता है।
अपरिवर्तित हृदय से निकलने वाली गंदी भाषा को रोकने के लिए बाहरी वादे बेकार हैं। हम केवल पहले यीशु पर विश्वास करके (1 कुरिन्थियों 12:3) और फिर पवित्र आत्मा को हममें भरने के लिए आमंत्रित करके ही गंदी वाणी को समाप्त कर सकते हैं (इफिसियों 5:18)। वह हमें लगातार परमेश्वर को धन्यवाद देने के लिए प्रेरित करने और मदद करने के लिए हमारे भीतर काम करता है (पद 20) और दूसरों को उत्साहित और उनकी उन्नति के लिए (4:15, 29; कुलुस्सियों 4:6)। मर्विन विल्लियम्
एक बुजुर्ग की सलाह
“मुझे किस बात का पछतावा है?” यही वह प्रश्न था जिसका उत्तर न्यूयॉर्क टाइम्स के बेस्टसेलिंग लेखक जॉर्ज सॉन्डर्स ने 2013 में सिरैक्यूज़ विश्वविद्यालय में अपने शुरुआती भाषण में दिया था। उनका दृष्टिकोण एक वृद्ध व्यक्ति (सॉन्डर्स) का था, जिन्होंने अपने जीवन में हुए एक या दो पछतावे को युवा लोगों (स्नातकों) के साथ साझा किया था, जो उनके उदाहरणों से कुछ सीख सकते थे। उन्होंने कुछ ऐसी बातों की सूची दी कीं जिनके बारे में लोग मान सकते हैं कि शायद ये उनके पछतावे होंगे, जैसे गरीब होना और कठोर नौकरियां करना। लेकिन सॉन्डर्स ने कहा कि उन्हें वास्तव में यह बिल्कुल उनके पछतावे नहीं थे। परन्तु, उन्हें जिस बात का पछतावा था, वह दयालुता की विफलता थी - वे अवसर जो उन्हें किसी के प्रति दयालु होने के लिए मिले, और उन्होंने उन्हें जाने दिया।
प्रेरित पौलुस ने इफिसुस के विश्वासियों को इस प्रश्न का उत्तर देते हुए लिखा: मसीही जीवन कैसा दिखता है? हमारे उत्तरों में जल्दबाजी करना हो सकता है, जैसे एक विशेष राजनीतिक दृष्टिकोण रखना, कुछ पुस्तकों या फिल्मों से बचना, एक विशेष तरीके से आराधना करना। लेकिन पौलुस का दृष्टिकोण उन्हें समसामयिक मुद्दों तक सीमित नहीं रखता था। वह “बुरी बात” (इफिसियों 4:29) से दूर रहने और कड़वाहट और क्रोध जैसी चीजों से छुटकारा पाने का उल्लेख करता है (पद 31)। फिर अपनी “बात” को समाप्त करने के लिए, संक्षेप में, वह इफिसियों के साथ-साथ हमसे भी कहते हैं, “दयालु बनने से मत चूको” (पद 32)। और उसके पीछे का कारण यह है कि मसीह में परमेश्वर तुम्हारे प्रति दयालु रहा है।
उन सभी चीज़ों में से जिनका हम विश्वास करते हैं कि यीशु में जीवन है, उनमें से एक, निश्चित रूप से, दयालु होना है। जॉन ब्लेज़
बिना तैयारी किए हुए स्तुति करना
इथियोपिया की एक अल्पकालिक मिशन यात्रा के दौरान, हमारी टीम एक स्थानीय मंत्रालय की एक अन्य टीम के साथ उन युवाओं के एक समूह तक पहुंच रही थी, जो कठिन समय से जूझ रहे थे और वस्तुतः कबाड़खाने में झोंपड़ियों में रह रहे थे। कैसा अद्भुत आनंद था उनसे मिलना! हमने एक साथ अपनी गवाहियाँ, प्रोत्साहन के शब्द और प्रार्थनाएँ साझा कीं। उस शाम मेरे पसंदीदा क्षणों में से एक वह था जब एक स्थानीय टीम के सदस्य ने अपना गिटार बजाया और हमें रोशन चाँद के नीचे अपने नए दोस्तों के साथ आराधना करने का मौका मिला। कितना पवित्र क्षण! अपनी निराशाजनक स्थिति के बावजूद, इन लोगों के पास आशा और खुशी थी जो केवल यीशु में ही पाई जा सकती है।
प्रेरितों के काम 16 में, हम एक और अचानक रूप से की गयी प्रशंसा के समय के बारे में पढ़ते हैं। यह फिलिप्पी शहर की एक जेल में हुआ। यीशु की सेवा करते समय पौलुस और सीलास को गिरफ्तार कर लिया गया, पीटा गया, कोड़े मारे गए और कैद में डाला गया। निराशा में पड़ने के बजाय, उन्होंने जेल की कोठरी में “प्रार्थना और गायन” करके परमेश्वर की आराधना की। “अचानक इतना भयंकर भूकंप आया कि जेल की नींव हिल गई। एक ही बार में सभी जेल के दरवाजे खुल गए, और सभी की जंजीरें खुल गईं” (पद 25-26)।
जेलर का पहला विचार अपना जीवन समाप्त करने का आया, लेकिन जब उसे एहसास हुआ कि कैदी भागे नहीं, उसमे परमेश्वर के प्रति भयपूर्वक आदर उत्पन हुआ, और उसके परिवार में उद्धार आया(पद 27-34)।
परमेश्वर प्रसन्न होता है जब हमें उसकी स्तुति करते है। आइए जीवन के उतार-चढ़ाव दोनों के दौरान उसकी आराधना करें। नैन्सी गैविलेन्स