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“मछली की हांडी” सी गंध

हमारे घर में एक मिट्टी का बर्तन है जिसका इस्तेमाल हम सिर्फ़ मछली की करी (तरकारी) बनाने के लिए करते हैं। यह बर्तन दूसरे बर्तनों से अलग नहीं दिखता। और जब तक हम इसमें मछली बनाना शुरू नहीं किये, तब तक यह किसी भी तरह से अनोखा नहीं था। हालाँकि, अब हम इस बर्तन का इस्तेमाल कोई और व्यंजन बनाने के लिए नहीं कर सकते क्योंकि इसमें हम जो भी पकाते हैं उसका स्वाद थोड़ा “मछली जैसा” होता है। फिर भी, यह समुद्री भोजन के लिए हमारा पसंदीदा बर्तन है क्योंकि हर बार जब हम इसमें पकाते हैं, तो करी (तरकारी) का स्वाद और भी बढ़ जाता है।

पौलुस ने तीमुथियुस को लिखे अपने पत्र में उन अलग-अलग बर्तनों के बारे में बात की है जिनका हम घर में इस्तेमाल करते हैं। वह बताता है कि कुछ बर्तन “ख़ास कामों के लिए” रखे जाते हैं जबकि कुछ “आम उपयोग के लिए” (पद.20) होते हैं। फिर, पौलुस परमेश्वर के लोगों (पद.14) के साथ एक समानता बताता है। वह तीमुथियुस से कहता है कि वह परमेश्वर के लोगों (पद.14) को याद दिलाता रहे कि उन्हें ख़ास कामों के लिए अलग रखा गया है ताकि वे अच्छे काम करने के लिए “स्वामी के काम आ सकें” (पद.21)। अब जब उसने उन्हें विशेष बना दिया है, तो उन्हें तर्क-वितर्क, व्यर्थ चर्, मूर्खता और अविद्या के विवादों से दूर रहने के लिए कहा गया है (पद.14-24)। उन्हें “धार्मिकता, विश्वास, प्रेम और मेलमिलाप का पीछा करने” और “सबके साथ कोमल” होने के लिए “ग्रहण योग्य व्यक्ति के रूप में” अलग रहना था (पद.21-22)।

पौलुस का संदेश हमारे लिए भी है। हम जो मसीह के नाम को स्वीकार करते हैं, वे उसके द्वारा जाने और चुने गए हैं (पद.19)। जब हम यीशु में विश्वास करते हैं, तो हममें से प्रत्येक परमेश्वर के उपयोग के लिए अलग रखा गया एक विशेष पात्र बन जाता है। इसका मतलब है कि हमें भी उन चीजों का त्याग करना चाहिए जो परमेश्वर के चरित्र को नहीं दर्शाती हैं (पद.19)। इसके बजाय, हमें परमेश्वर की इच्छा के अनुसार कार्य करने के लिए खुद को प्रतिबद्ध करना चाहिए ताकि हम “स्वामी के काम” आएँ l आइए हम मिट्टी के वैसे पात्र बनें जिन्हें हमारा स्वामी उपयोग कर सके (1 कुरिन्थियों 4:7)। ऍन हरिकीर्तन

यह जानकर आपको कैसा लगता है कि आपको परमेश्वर ने चुना है?
आप पवित्र बने रहने या उसके लिए अलग रहने के लिए क्या कर सकते हैं?

प्रिय प्रभु, मुझे शुद्ध करें और मुझे अपने लिए अलग करें।
मैं आपका होना चाहता हूँ और केवल वही करना चाहता हूँ जो आप मुझसे करने को कहें।

हमारे घर में एक मिट्टी का बर्तन है जिसका इस्तेमाल हम सिर्फ़ मछली की करी (तरकारी) बनाने के लिए करते हैं। यह बर्तन दूसरे बर्तनों से अलग नहीं दिखता। और जब तक हम इसमें मछली बनाना शुरू नहीं किये, तब तक यह किसी भी तरह से अनोखा नहीं था। हालाँकि, अब हम इस बर्तन का इस्तेमाल कोई और व्यंजन बनाने के लिए नहीं कर सकते क्योंकि इसमें हम जो भी पकाते हैं उसका स्वाद थोड़ा “मछली जैसा” होता है। फिर भी, यह समुद्री भोजन के लिए हमारा पसंदीदा बर्तन है क्योंकि हर बार जब हम इसमें पकाते हैं, तो करी (तरकारी) का स्वाद और भी बढ़ जाता है।

पौलुस ने तीमुथियुस को लिखे अपने पत्र में उन अलग-अलग बर्तनों के बारे में बात की है जिनका हम घर में इस्तेमाल करते हैं। वह बताता है कि कुछ बर्तन “ख़ास कामों के लिए” रखे जाते हैं जबकि कुछ “आम उपयोग के लिए” (पद.20) होते हैं। फिर, पौलुस परमेश्वर के लोगों (पद.14) के साथ एक समानता बताता है। वह तीमुथियुस से कहता है कि वह परमेश्वर के लोगों (पद.14) को याद दिलाता रहे कि उन्हें ख़ास कामों के लिए अलग रखा गया है ताकि वे अच्छे काम करने के लिए “स्वामी के काम आ सकें” (पद.21)। अब जब उसने उन्हें विशेष बना दिया है, तो उन्हें तर्क-वितर्क, व्यर्थ चर्, मूर्खता और अविद्या के विवादों से दूर रहने के लिए कहा गया है (पद.14-24)। उन्हें “धार्मिकता, विश्वास, प्रेम और मेलमिलाप का पीछा करने” और “सबके साथ कोमल” होने के लिए “ग्रहण योग्य व्यक्ति के रूप में” अलग रहना था (पद.21-22)।

पौलुस का संदेश हमारे लिए भी है। हम जो मसीह के नाम को स्वीकार करते हैं, वे उसके द्वारा जाने और चुने गए हैं (पद.19)। जब हम यीशु में विश्वास करते हैं, तो हममें से प्रत्येक परमेश्वर के उपयोग के लिए अलग रखा गया एक विशेष पात्र बन जाता है। इसका मतलब है कि हमें भी उन चीजों का त्याग करना चाहिए जो परमेश्वर के चरित्र को नहीं दर्शाती हैं (पद.19)। इसके बजाय, हमें परमेश्वर की इच्छा के अनुसार कार्य करने के लिए खुद को प्रतिबद्ध करना चाहिए ताकि हम “स्वामी के काम” आएँ l आइए हम मिट्टी के वैसे पात्र बनें जिन्हें हमारा स्वामी उपयोग कर सके (1 कुरिन्थियों 4:7)। ऍन हरिकीर्तन

 

तुझे इससे क्या?

“जब उसके पास अंगूर है तो मुझे स्ट्रॉबेरी लॉलीपॉप क्यों मिलना चाहिए?” मेरी छह वर्षीय भतीजी ने पुछा l मेरी भांजियों और भांजे ने मुझे शुरू से ही सिखाया था कि बच्चे अक्सर जो उन्हें दिया जाता है उसकी तुलना दूसरों को जो मिलता है उससे करते हैं l इसका मतलब यह है कि दयालु मौसी के रूप में, मेरे लिए अच्छा निर्णय लेना होगा!

मैं भी कभी-कभी उन चीज़ों की तुलना करती हूँ जो परमेश्वर ने मुझे दी हैं और जो उसने दूसरों को दी हैं l “मेरे पास यह क्यों है, और उसके पास वह है?” मैं परमेश्वर से पूछती हूँ l मेरा प्रश्न मुझे याद दिलाता है कि शमौन पतरस ने गलील के झील के पास यीशु से क्या पूछा था l यीशु ने अभी-अभी पतरस को उसके पिछले इनकार के लिए पुनर्स्थापना और क्षमा दी थी और अब वह उससे कह रहा था कि वह शहीद की मृत्यु मरकर परमेश्वर की महिमा करेगा (यूहन्ना 21:15-19) l हालाँकि, अपने पीछे चलने के यीशु के निमंत्रण का हाँ में उत्तर देने के बजाय, पतरस ने पुछा, “हे प्रभु, इसका [यूहन्ना का] क्या?”(पद.21) l

यीशु ने उत्तर दिया, “तुझे इससे क्या?” और कहा, “तू मेरे पीछे हो ले”(पद.22) l मेरा मानना है कि यीशु भी हमसे यही कहेगा l जब वह पहले से ही हमें हमारे जीवन के किसी क्षेत्र में दिशा दे चुका है, तो वह हमारा विश्वास चाहता है l हमें अपने मार्ग की तुलना दूसरों के मार्ग से नहीं करनी चाहिए, बल्कि हमें बस उसका अनुसरण करना है l

तीस से अधिक वर्षों तक, प्रेरित पतरस ने आरंभिक चर्च के एक साहसी अगुआ के रूप में परमेश्वर का अनुसरण किया l ऐतिहासिक अभिलेखों से यह भी पता चलता है कि उसने दुष्ट सम्राट नीरो के अधीन निडर होकर मृत्यु को गले लगा लिया l हम भी परमेश्वर का अनुसरण करने, उसके प्रेम और दिशा-निर्देश पर भरोसा करने में दृढ़ और निर्विवाद रहें l केरेन हुआंग

 

आप अतिप्रिय हैं

अपना दुःख व्यक्त करने के लिए, ऐली नाम की एक युवा लड़की ने लकड़ी के एक टुकड़े पर लिखा और उसे एक पार्क में रख दिया : “ईमानदारी से कहूँ तो, मैं दुखी हूँ l कोई भी कभी भी मेरे साथ घूमना नहीं चाहता, और मैंने उस एकमात्र व्यक्ति को खो दिया है जो मेरी बात सुनता है l मैं हर दिन रोती हूँ l” 

जब किसी को वह लकड़ी का टुकड़ा मिला, तो वह पार्क में फुटपाथ पर लिखने वाले चौक ले आयी और लोगों से ऐली के लिए अपने विचार लिखने के लिए कहा l पास के स्कूल के छात्रों द्वारा समर्थन के दर्जनों शब्द छोड़े गए : “हम आपसे प्रेम करते हैं l” “परमेश्वर आपसे प्यार करता है l” “तुम प्रिय हो l” स्कूल के प्राचार्य ने कहा, “यह एक छोटा सा तरीका है जिससे हम पहुँच सकते हैं और शायद [उसकी कमी] को भरने में मदद कर सकते हैं l वह हम सभी का प्रतिनिधित्व करती है क्योंकि किसी न किसी समय हम सभी को दुःख और पीड़ा का अनुभव होता है या होगा l”

वाक्यांश “तू प्रिय है” मुझे मूसा द्वारा अपने मरने से ठीक पहले बिन्यामीन के इस्राएली गोत्र को दिए गए एक सुन्दर आशीष की याद दिलाता है : “यहोवा के प्रिय को उस में सुरक्षित रहने दो” (व्यवस्थाविवरण 33:12) l मूसा परमेश्वर के लिए एक मजबूत अगुआ था, उसने शत्रु राष्ट्रों को हराया, दस आज्ञाएँ प्राप्त कीं और उन्हें परमेश्वर का अनुसरण करने के लिए चुनौती दी l उसने उन्हें परमेश्वर के दृष्टिकोण के साथ छोड़ दिया l प्रिय शब्द का प्रयोग हमारे लिए भी किया जा सकता है, क्योंकि यीश ने कहा, “परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उस ने अपना एकलौता पुत्र दे दिया” (यूहन्ना 3:16) l 

जैसा कि परमेश्वर हमें इस सच्चाई पर सुरक्षित रूप से भरोसा करने में सहायता करता है कि यीशु में प्रत्येक विश्वासी “प्रिय” है, हम दूसरों से प्यार करने के लिए आगे बढ़ सकते हैं जैसा कि ऐली के दोस्तों ने किया l एनी सिटास

 

डोनावुर में प्रेम

“अम्मा,” तमिल में माँ के लिए उपयोग होने वाला शब्द, एमी कारमाइकल की कब्र के पास एक पक्षी स्नानघर पर उकेरा गया है। तमिलनाडु के डोहनावुर में उनका मिशन स्कूल, मंदिर वेश्यावृत्ति में फंसी हज़ारों लड़कियों के लिए एक शरणस्थली बन गया। ऐसा कहा जाता है कि अपने शुरुआती वर्षों में, कई रातें वह साड़ी धारण करके, साइकिल चलाकर, सिर्फ़ एक छोटी लड़की को बचाने के लिए ढूंढती थी l 1931 में गिरने की एक गंभीर घटना के बाद जब वह बिस्तर पर ही सीमित हो गईं, तब भी उन्होंने दूसरों के ज़रिए इन बच्चों को बचाना जारी रखा। उन्होंने कई पत्र और किताबें लिखीं, जिनसे काम चलता रहा और स्कूल को वित्तीय सहायता मिली। जब बच्चों से पूछा गया कि उन्हें एमी की ओर क्या आकर्षित करता है, तो उन्होंने बस इतना कहा, “यह प्यार था। अम्मा हमसे प्यार करती थीं।”

कभी-कभी हमें याद दिलाने की ज़रूरत होती है कि प्यार सभी गुणों की जननी है। सच्चे प्यार का अनुभव मसीह में किया जा सकता है, क्योंकि वह प्यार का वास्तविक देह धारित रूप है (पद.8)। मसीह की मृत्यु और पुनरुत्थान में और उसके ज़रिए, हमारे लिए सच्चे प्यार का प्रदर्शन है। यीशु का प्यार शर्त के साथ नहीं था। उसने अयोग्य लोगों से भी प्रेम किया (पद.11)। जब हम प्रेम को उस तरह से देखते हैं जिस तरह से परमेश्वर हमसे प्रेम करता है, तो यह इसे प्रकट करने के तरीके के बारे में हमारा दृष्टिकोण बदल देता है। यह हमें यह समझने में मदद करता है कि जब तक हम यीशु की तरह प्रेम नहीं करते हैं, हम परमेश्वर को सही मायने में नहीं जान सकते हैं (पद.7-8)।

पृथ्वी पर प्रत्येक व्यक्ति परमेश्वर की स्वरूप में बनाया गया है (उत्पत्ति 1:27) और हम जिस किसी से भी मिलते हैं, उसे प्रेम की आवश्यकता होती है। हम, परमेश्वर की संतान के रूप में, उन लोगों को सच्चे, बेदाग प्रेम का अर्थ दिखाने के लिए सबसे अच्छी जगह पर हैं जो इसके लिए भूखे हैं। एमी की तरह जो डोहनावुर की दासी लड़कियों के लिए प्रेम की प्रतिमूर्ति बन गई, हम भी अपने हर कार्य, शब्द और कर्म में यीशु के वास्तविक प्रेम को मूर्त रूप दें सके। —रेबेका विजयन