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हम जो कुछ भी करते हैं

यह जानने के बाद कि सुनामी ने श्रीलंका के गांवों को तबाह कर दिया है और सिलाई मशीन को नष्ट कर दिया है जिसे खरीदने के लिए एक महिला ने वर्षों तक काम किया था, मार्गरेट नाम की एक अमेरिकी सीनेवाली स्त्री अमेरिकी को मदद के लिए प्रेरित किया। यह समझते हुए कि उस महिला और उसके जैसे अन्य लोगों ने एक दर्जी के रूप में अपनी आजीविका कमाने का साधन खो दिया है, मार्गरेट ने कई सिलाई मशीनें एकत्र की और उन्हें श्रीलंका और भारत भेज दिया जहां उनका उपयोग सिलाई मशीन प्राप्त करने वालों को सिलाई करना सिखाने के लिए किया जाएगा। इसने उन्हें जीवन भर के कौशल से सक्षम बनाया जिसका उपयोग वे  अपना और अपने परिवार के भरण-पोषण के लिए कर सकती थी 
पौलुस भी जीविकोपार्जन के महत्व को जानता था, और उसने भी इसी तरह की एक हस्तकला का उपयोग किया: जैसे तम्बू बनाने का काम (प्रेरितों के काम  -18:3)। पौलुस ने अपने काम को सेवकाई के रूप में देखा - कई तरीकों में से एक जिससे उसने परमेश्वर की सेवा की - केवल अपने प्रचार सेवकाई के लिये धन अर्जित करने के साधन के रूप में ही नहीं। उसने “किसी का चाँदी या सोना" नहीं माँगा बल्कि "अपनी ज़रूरतों और [अपने] साथियों की ज़रूरतों को पूरा करने" के लिए अपने हाथों का इस्तेमाल किया (20:33-34)। उसने इफिसुस की कलीसिया के प्राचीनों से भी ऐसा ही करने का आग्रह किया कि: कड़ी मेहनत करें ताकि वे अपने समुदाय में "निर्बलों की सहायता” कर सकें (पद-35)।  
पौलुस ने अपनी सेवकाई को अपने काम से अलग नहीं किया। बल्कि उसने अपने जीवन की संपूर्ण गतिविधियों को सेवकाई के रूप में देखा। जब हम केवल अपने लिए नहीं बल्कि दूसरों की भलाई के लिए काम करते हैं - हमारे पास जो भी कौशल हैं - हम यीशु में विश्वासियों के रूप में अपनी नई पहचान के साक्षी बनते हैं और हमारे द्वारा आस-पास के लोग यीशु को जान पाते हैI  

स्तुति के आँसू

वर्षों पहले,  मैंने अपनी माँ की देखभाल की थी क्योंकि वह हास्पिस  (hospice अर्थात् गंभीर रूप से बीमार लोगों के लिए एक विशेष अस्पताल) में थी । मैंने उन चार महीनों के लिए परमेश्वर को धन्यवाद दिया कि उसने मुझे उनकी देखभाल करने वाले के रूप में सेवा करने का मौका दिया और उस दुःखी प्रक्रिया में उससे सहायता मांगी। अपनी मिली-जुली भावनाओं से जूझते हुए मुझे अक्सर परमेश्वर की स्तुति करने में संघर्ष होता था। लेकिन जब मेरी माँ ने अपनी आखिरी सांस ली और मैं बेकाबू होकर रोयी, मैंने धीरे से कहा , “हल्लिलूयाह ।“ कई सालो तक मैं ने खुद को दोषी समझा ऐसे दुख से परिपूर्ण क्षण में परमेश्वर की स्तुति करने के लिए,  जब तक कि मैंने भजन संहिता 30  को करीब से नहीं देखा।  
 
“मंदिर के समर्पण के लिए” दाऊद के गीत में,  उसने परमेश्वर की विश्वासयोग्यता और दया के लिए उसकी आराधना की (पद. 1-3) । उसने दूसरों को “उसके पवित्र नाम की स्तुति” करने के लिए प्रोत्साहित किया (पद. 4) । तब दाऊद पाता है कि परमेश्वर कठिनाई और आशा को कितनी घनिष्ठता से जोड़ता है (पद. 5) । उसने दुःख और आनन्द के समय को स्वीकार किया,  सुरक्षित महसूस करने और निराश होने के समय को स्वीकार किया (पद. 6-7) । मदद के लिए उसकी पुकार परमेश्वर पर भरोसे के साथ बनी रही (पद. 7-10) । दाऊद के रोने और नाचने,  शोक और आनंद के क्षणों में उसकी स्तुति की प्रतिध्वनि सुनाई देती है (पद. 11) । मानो कष्ट सहने के रहस्य और जटिलता को स्वीकार करते हुए और परमेश्वर की विश्वासयोग्यता पर आशा रखते हुए,  दाऊद ने परमेश्वर के प्रति अपनी अंतहीन भक्ति को प्रकट किया (पद. 12) । दाऊद की तरह,  हम गा सकते हैं,  “हे मेरे परमेश्वर यहोवा,  मैं सर्वदा तेरा धन्यवाद करता रहूँगा” (पद.12) । चाहे हम खुश हों या आहत,  परमेश्वर हमें उस पर अपना भरोसा रखने में मदद कर सकता है और खुशी के नारे और स्तुति के आँसुओं के साथ उसकी आराधना करने में हमारी अगुवाई कर सकता है । 

पीड़ितों का बोझ उठाना

जहाँ दिशा निर्देश सूचक हमें चेतावनी दे रहे थे कि ऊपर चलना बहुत कठिन होगा। सीढ़ियों के नीचे, हमारी पैदल यात्रा में एक नाटकीय मोड़ आया जब हमने पाया कि एक युवती को आपातकालीन चिकित्सा की ज़रुरत पड़ गयी है। राहत कर्मियों ने पहले एक स्ट्रेचर प्रदान किया, लेकिन उस युवती को सुरक्षित रूप से गड्ढे (घाटी) से बाहर ले जाने के लिए उन्हें मदद की ज़रूरत थी। बचाव दल में शामिल होकर, हम आभारी थे कि उनके साथ मिलकर काम करके हम उस युवती को ऐसी जगह पहुंचा सकें जहां पर उसे मदद मिल सके।   
 

परमेश्वर में आश्वस्त विश्राम

फ़ुजियान, चीन में शोधकर्ता गहन देखभाल इकाई(ICU) के मरीजों को अधिक अच्छी तरह से सोने में मदद करना चाहते थे l उन्होंने सिमुलेटेड/simulated ICU वातावरण (किसी वास्तविक चीज़,प्रक्रम या कार्यकलाप का किसी अन्य विधि से नक़ल करना)में परीक्षण मरीजों पर नींद में सहायक(sleep aids) के प्रभावों को मापा, तेज/साफ़, अस्पताल-ग्रेड प्रकाश व्यवस्था और मशीनों की बीप की आवाज़ और नर्सों की बातचीत की ऑडियो रिकॉर्डिंग की l उनके शोध से पता चला कि स्लीप मास्क(sleep mask) और ईयर प्लग(ear plug) जैसे उपकरणों ने उनके मरीजों के आराम में सुधार किया l लेकिन उन्होंने स्वीकार किया कि वास्विक ICU में वास्तव में बीमार मरीजों के लिए, शांतिपूर्ण नींद अभी भी मुश्किल होगी l 

जब हमारा संसार संकट में है, तो हम विश्राम कैसे पा सकते हैं? बाइबल स्पष्ट है : उनके लिए शांति है जो परमेश्वर पर भरोसा करते हैं, चाहे उनकी परिस्थितियाँ कैसी भी हों l नबी यशायाह ने भविष्य के समय के बारे में लिखा जब प्राचीन इस्राएलियों को कठिनाई के बाद पुनर्स्थापित किया जाएगा l वे नगर में निडर बसे रहेंगे, क्योंकि वे जानते थे, कि परमेश्वर ने उसे सुरक्षित किया है (यशायाह 26:1)  वे भरोसा करेंगे कि वह उनके चारों ओर के संसार में भलाई लाने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहा था—“वह ऊँचे पदवाले को झुका देता [है],” उत्पीड़ितों को ऊँचा  उठाता है, और न्याय लाता है (पद.5-6) वे जानेंगे कि “यहोवा सनातन चट्टान है,” और वे हमेशा के लिए उस पर भरोसा रख सकते थे (पद.4) 

यशायाह ने लिखा, “जिसका मन तुझ में धीरज धरे हुए है, उसकी तू पूर्ण शांति के साथ रक्षा करता है, क्योंकि वह तुझ पर भरोसा रखता है” (पद.3) परमेश्वर आज भी हमें शांति और विश्राम प्रदान कर सकता है l हम उसके प्रेम और शक्ति की निश्चयता में आराम कर सकते हैं, चाहे हमारे आसपास कुछ भी हो रहा हो l