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मसीह के लिए उत्साह साझा करना

पहली बार जब हम अपने पड़ोसी हेनरी से मिले, तो उसने अपने बैग से बाइबल निकाली जो बहुत ज्यादा इस्तेमाल किये जाने के कारण पुरानी हो गई थी। आँखों में चमक के साथ उन्होंने पूछा कि क्या हम पवित्रशास्त्र पर चर्चा करना चाहेंगे। हमने सहमती प्रकट की, और उसने कुछ निशान लगाये हुये हिस्सों के पन्ने पलटे। उसने हमें अपने अवलोकनों (विचारों) से भरी एक नोटबुक दिखाई और कहा कि उसने अन्य संबंधित जानकारी से भरी एक कंप्यूटर प्रस्तुति भी बनाई है।

हेनरी ने हमें बताया कि कैसे वह एक कठिन पारिवारिक स्थिति से आया था और फिर, अकेले और सबसे खराब स्थिति में, उसने यीशु की मृत्यु और पुनरुत्थान को अपने विश्वास की नींव के रूप में स्वीकार किया (प्रेरितों के काम 4:12)। उसका जीवन बदल गया था क्योंकि पवित्र आत्मा ने उसे बाइबल के सिद्धांतों का पालन करने में मदद की थी। हालाँकि हेनरी ने वर्षों पहले अपना जीवन परमेश्वर को समर्पित कर दिया था, उसका उत्साह अभी भी ताज़ा और शक्तिशाली था।

हेनरी के उत्साह ने मेरे आत्मिक जुनून पर विचार करने के लिए मुझे प्रेरित किया— मुझे, एक ऐसे इन्सान को, जो कई वर्षों तक यीशु के साथ चली। प्रेरित पौलुस ने लिखा: “आत्मिक उन्माद में भरे रहो; प्रभु की सेवा करते रहो I” (रोमियों 12:11)। यह एक कठिन आदेश की तरह लगता है, जब तक कि मैं पवित्रशास्त्र को ऐसे दृष्टिकोण को विकसित करने की अनुमति नहीं देता जो निरंतर यीशु के प्रति मेरी कृतज्ञता को दर्शाता है जो उसने मेरे लिए किया है ।

जीवन में हमारे द्वारा अनुभव किए जाने वाले भावनात्मक उतार-चढ़ाव के विपरीत, मसीह के लिए उत्साह उसके साथ निरंतर बढ़ते रिश्ते से आता है। जितना अधिक हम उसके बारे में सीखते हैं, वह उतना ही अधिक मूल्यवान होता जाता है और उतनी ही अधिक उसकी भलाई हमारी आत्माओं में भर जाती है और संसार में फैल जाती है। जेनिफर बेन्सन शुल्त्ज़

 

परमेश्वर जो दे उसका इस्तेमाल करना

ऑस्ट्रेलिया में ब्रिस्बेन सिटी हॉल 1920 के दशक की चकित कर देने वाला एक परियोजना थी। सफ़ेद सीढ़ियाँ उसी खदान के संगमरमर से बनी हैं जिसका उपयोग माइकल एंजेलो ने अपनी डेविड स्कल्पचर (दाउद मूर्ति) के लिए किया था। टावर (मीनार) वेनिस के सेंट मार्क बेसिलिका को प्रतिबिंबित करता था, और तांबे का गुंबद दक्षिणी गोलार्ध में सबसे बड़ा था। बिल्डरों का इरादा शिखर को सजाने के लिए एक विशाल शांति दूत बनाने का था; लेकिन इसमें एक समस्या थी: पैसे नहीं बचे। प्लम्बर फ्रेड जॉनसन बचाव के लिए आए। उन्होंने लगभग एक सौ वर्षों से टॉवर की शोभा बढ़ाने वाले प्रतिष्ठित गोले को तैयार करने के लिए एक टॉयलेट सिसर्न(टंकी), एक पुराने लैंप पोस्ट (बत्ती का खंभा) और स्क्रैप धातु (रद्दी सामान जिसमें प्रयुक्त माल से दोबारा कुछ बनाया जा सके) के टुकड़ों का उपयोग किया।

फ्रेड जॉनसन के पास जो कुछ भी था उन्होंने उसका उपयोग किया हम भी उन्ही की तरह, जो कुछ भी हमारे पास है - बड़ा या छोटा—उसके साथ परमेश्वर के काम में शामिल हो सकते हैं। जब परमेश्वर ने मूसा से इस्राएल को मिस्र से बाहर निकालने के लिए कहा, तो मूसा ने यह कह कर टालना चाहा कि : “यदि वे मेरा विश्वास नहीं करेंगे .......और न मेरी सुनेंगे?” (4:1) तब परमेश्वर ने एक सरल प्रश्न के साथ उत्तर दिया : “तेरे हाथ में वह क्या है?” (पद- 2)I मूसा के पास एक लाठी, एक साधारण लकड़ी थी। परमेश्वर ने उससे लाठी को ज़मीन पर फेंकने के लिए कहा, “तब वह सर्प बन गयी” (पद-3)। तब उन्होंने मूसा को सर्प को उठाने का आदेश दिया, और वह फिर से लाठी बन गयी। परमेश्वर ने मूसा को समझाया कि, उसे बस इतना ही करना था कि वह लाठी उठाए और बाकी काम करने के लिए उन पर भरोसा करे। वह उल्लेखनीय रूप से इस्राएल को मिस्रियों से बचाने के लिए मूसा के हाथ में मौजूद उस लाठी का उपयोग करेंगे (7:10–12; 17:5–7)।

हमारे पास जो कुछ है वह शायद हमें काफी न लगे, लेकिन परमेश्वर के लिए, हमारे पास जो कुछ भी है वह काफी होगा। वह हमारे सामान्य संसाधन लेता है और उन्हें अपने कार्य के लिए उपयोग करता है। विन्न कोल्लियर

परमेश्वर हमारा शरणस्थान है

2019 की उल्लेखनीय (अपूर्व) फिल्म लिटिल वुमन ने मुझे मेरी पुरानी उपन्यास की प्रति में वापस भेज दिया, विशेष रूप से मार्मी के सांत्वना देने वाले शब्दों ने जो एक बुद्धिमान और विनम्र मां थी। मैं उपन्यास में उनके अडिग विश्वास के चित्रण की ओर आकर्षित हुई हूँ, जो उनकी बेटियों के लिए प्रोत्साहन के उनके कई शब्दों का आधार है। जो बात मेरे सामने उभरकर सामने आई वह यह थी : “परेशानियाँ और प्रलोभन....बहुत सारे हो सकते हैं, लेकिन यदि आप अपने स्वर्गीय पिता सामर्थ्य और दयालुता को महसूस करना सीख जाते हैं तो आप उन सभी पर काबू पा सकते हैं और जीवित रह सकते हैं।

मार्मी के शब्द नीतिवचन में पाए गए सत्य को दोहराते हैं कि “यहोवा का नाम दृढ़ गढ़ है; धर्मी उसमें भागकर दुर्घटनाओं से बचता हैं।” (18:10)। प्राचीन समय के शहरों में टावरों (दुर्ग) को खतरे के दौरान सुरक्षा के स्थान के रूप में बनाया गया था, शायद दुश्मन के हमले के कारण। उसी तरह, परमेश्वर के पास दौड़ने के द्वारा यीशु में विश्वास करने वाले उसकी देखभाल में शांति का अनुभव कर सकते हैं जो “हमारा शरणस्थान और बल “है। (भजन संहिता संहिता 46:1)।

नीतिवचन 18:10 हमें बताता है कि सुरक्षा परमेश्वर के “नाम” से मिलती है - जो उन सभी को सूचित करता है जो वह है। बाइबल परमेश्वर को “दयालु और अनुग्रहकारी, कोप करने में धीरजवन्त, और अति करूणामय और सत्य,” के रूप में वर्णित करती है (निर्गमन 34:6)। परमेश्वर की सुरक्षा उसकी पराक्रमी सामर्थ के साथ-साथ उसकी दयालुता और प्रेम से आती है, जिसके कारण वह पीड़ितों को आश्रय प्रदान करने के लिए लालायित रहता है। उन सभी के लिए जो संघर्ष कर रहे हैं, हमारे स्वर्गीय पिता अपने सामर्थ्य और कोमलता में शरणस्थान प्रदान करता है । लीसा एम. सामरा

 

परमेश्वर के लिए अच्छा करना

हालाँकि वह आम तौर पर अपने साथ पैसे नहीं रखता था, लेकिन पैट्रिक को महसूस हुआ कि परमेश्वर घर से बाहर निकलने से पहले उसे जेब में पाँच डॉलर (लगभग ₹400) रखने के लिए प्रेरित कर सुने है। उसे समझ आया कि जिस स्कूल में वह काम करता था, वहाँ दोपहर के भोजन के दौरान कैसे परमेश्वर ने उसे एक बेहद ज़रुरी काम को पूरा करने के लिए तैयार किया है। लंचरूम की चहलपहल के बीच, उसने ये शब्द सुने: “स्कॉटी [एक जरूरतमंद बच्चे] को अपने खाते में 5 डॉलर डालने की जरूरत है ताकि वह सप्ताह के बाकी दिनों में दोपहर का खाना खा सके।” कल्पना कीजिए कि पैट्रिक ने स्कॉटी की मदद के लिए अपना पैसा देते समय क्या भावनाएँ अनुभव की होंगी!

तीतुस में, पौलुस ने यीशु में विश्वासियों को याद दिलाया कि वे “अपने धर्म के कामों के कारण उद्धार नहीं पाए थे” (3:5) “जिन्हों ने परमेश्वर की प्रतीति की है, वे भले- भले कामों मे लगे रहना सीखें ” (पद- 8; पद- 14) जीवन भरा हुआ, अत्यधिक व्यस्त और चहल-पहल भरा हो सकता है। अपने हित का ख्याल रखना पराजित कर सकता है; और फिर भी, यीशु में विश्वासियों के रूप में, हमें “अच्छे कामों के लिए तैयार” रहना है। जो हमारे पास नहीं है और जो हम नहीं कर सकते उससे अभिभूत होने के बजाय, आइए इस बारे में सोचें कि हमारे पास क्या है और हम क्या कर सकते हैं क्योंकि परमेश्वर हमारी मदद करता है । ऐसा करने से, हम दूसरों की ज़रूरत के समय में उनकी मदद कर सकते है, और परमेश्वर का आदर होता है। “तुम्हारा उजियाला मनुष्यों के सामने चमके, कि वे तुम्हारे भले कामों को देखकर तुम्हारे पिता की जो स्वर्ग में है, बड़ाई करें” (मत्ती 5:16)। आर्थर जैक्सन

 

दूसरों की सेवा में

एस्तेर “बेन” खिमचंद 20वीं सदी की एक लेखिका थीं, जिनका जन्म गुजरात के एक साधारण परिवार में हुआ था। अपने लेखन के ज़रिए, उन्होंने राज्य में महिलाओं के अधिकारों की वकालत की। उन्होंने लिखा कि अच्छी शिक्षा महिलाओं को उनके परिवारों और समुदायों में सम्मानजनक पदों पर रखने में मदद कर सकती है। एस्तेर ने अपनी प्रतिभा को अपने पास नहीं रखा या अपने फ़ायदे के लिए उसका इस्तेमाल नहीं किया। इसके बजाय, उसने अपने आस-पास के लोगों को सशक्त बनाने के लिए उनका इस्तेमाल किया।

पतरस की पत्री पहली सदी के उन मसीहियों को संबोधित है जो शरणार्थियों की तरह एशिया माइनर में बिखरे हुए थे(1 पतरस 1:1)। उसने उन्हें “एक-दूसरे से अधिक प्रेम रखने” और “जो वरदान” उन्हें मिला है उसका उपयोग “एक दूसरे की सेवा” करने में लगाने के लिए प्रेरित किया (पद.8,10)। इन वरदानों का श्रेय लेने के बजाय, पतरस ने उनसे आग्रह किया कि वे अपने आध्यात्मिक वरदानों को “परमेश्वर के अनुग्रह” के रूप में मानें। उसने उन्हें “विश्वासयोग्य भंडारी” बनने के लिए प्रोत्साहित किया जो परिश्रमपूर्वक परमेश्वर के अधिकार में की बातों का प्रबंधन करते हैं l उसने उनसे यह भी आग्रह किया कि वे इस समझ के साथ बोलें कि वे “मानो परमेश्वर के ही वचन” बोल रहे हैं और “[परमेश्वर] की शक्ति से” लोगों की सेवा करें ताकि उनके कार्यों में और उनके द्वारा परमेश्वर की स्तुति हो सके (पद.11)। इस तरह, हम अपने हर काम में परमेश्वर को महिमा देते हैं। एस्तेर और प्रारंभिक कलीसिया की तरह, हमें भी वरदान दिये गए हैं। ये वरदान, हालाँकि हमें सरल लगते हैं, परमेश्वर के राज्य को बढ़ाने में मदद कर सकते हैं। यह भोजन तैयार करना, सवालों के जवाब देना या किसी ज़रूरतमंद के लिए अपना घर खोलना हो सकता है। जब भी हमें बोलने या कार्य करने के लिए कहा जाता है, तो हमें एक-दूसरे की सेवा में और परमेश्वर को महिमा देने के लिए ऐसा करना चाहिए (पद.11)। इस तरह, हमारे पास जो भी वरदान हैं, आइए उनका उपयोग दूसरों को ऊपर उठाने के लिए करें। कैरल मैकवॉन

 

यीशु हमारे भीतर रहता है ।

जैसे ही पश्चिमी संयुक्त राज्य अमेरिका में मेरे राज्य पर बर्फ़ीला तूफ़ान प्रबल हुआ, मेरी विधवा माँ तूफ़ान से “निपटने” के लिए मेरे परिवार के साथ रहने के लिए सहमत हो गई। हालाँकि, बर्फ़ीले तूफ़ान के बाद, वह कभी अपने घर वापस नहीं लौटी। वह जीवन भर के लिए हमारे पास आकर हमारे साथ रहने लगी। उनकी उपस्थिति ने हमारे घर को कई सकारात्मक तरीकों से बदल दिया। वह परिवार के सदस्यों को ज्ञान प्रदान करने, सलाह देने और पैतृक कहानियाँ साझा करने के लिए प्रतिदिन मौजूद रहती थीं। वह और मेरे पति सबसे अच्छे दोस्त बन गए, क्योंकि वे खेलों के लिये हास्य और प्रेम की समान भावना साझा करते थे। वह अब कोई मेहमान नहीं थीं। वह एक स्थायी और महत्वपूर्ण निवासी थी- जो अपनी मृत्यु के बाद भी हमारे हृदयों को बदल रही थी।

यह अनुभव यहुन्ना के यीशु के वर्णन को याद दिलाता है - कि वह “हमारे बीच में रहता था” (यहुन्ना 1:14 KJV)। यह एक प्रबल प्रेरक (दमदार)वर्णन है क्योंकि मूल ग्रीक में डेल्ट शब्द का अर्थ है “तम्बू (डेरा) गाड़ना।” एक अन्य अनुवाद कहता है — “उसने हमारे बीच निवास किया।” “हमारे बीच अपना घर बनाया”।

विश्वास के द्वारा, हम यीशु को भी अपने हृदय में वास करने वाले के रूप में प्राप्त करते हैं। जैसा कि पौलुस ने लिखा, “कि वह अपनी महिमा के धन के अनुसार तुम्हें यह दान दे, कि तुम उसके आत्मा से अपने भीतरी मनुष्यत्व में सामर्थ पाकर बलवन्त होते जाओ। और विश्वास के द्वारा मसीह तुम्हारे हृदय में बसे कि तुम प्रेम में जड़ पकड़कर और नेव डाल कर सब पवित्र लोगों के साथ भली भांति समझने की शक्ति पाओ । (इफ़िसियो 3:16-17)।

यीशु, समान्य तौर पर कभी-कभार आने वाला मेहमान नहीं है, बल्कि उन सभी के लिए एक सशक्त स्थायी निवासी है जो उसका अनुसरण करते हैं। क्या हम अपने हृदय के द्वार खोलकर उसका स्वागत कर सकते हैं। पैट्रिशिया रेबॉन

मसीह के लिए हृदय

मैंने खुद से कहा, जब तक मैं अपना मुंह बंद रखूंगी, मैं कुछ भी गलत नहीं करूंगी। एक सहकर्मी द्वारा कही गई बातों की गलत व्याख्या करने के बाद मैं बाहरी तौर पर उसके प्रति अपना गुस्सा दबा रहा थी । चूँकि हमें हर दिन एक-दूसरे से मिलना होता था, इसलिए मैंने अपनी बातचीत को केवल उसी तक सीमित रखने का निर्णय लिया जो आवश्यक था (और अपने मौन व्यवहार से प्रतिशोध लेता थी)। शांत आचरण गलत कैसे हो सकता है?

यीशु ने कहा कि पाप हृदय से शुरू होता है (मत्ती 15:18-20)। मेरी चुप्पी ने लोगों को मूर्ख बनाया होगा कि सब कुछ ठीक है, परन्तु परमेश्वर को मूर्ख नहीं बना रहा था। वह जानते थे । कि मैं क्रोध से भरा हृदय छिपा रही हूँ। मैं उन फरीसियों के समान थी जो होठों से तो परमेश्वर का आदर करते थे, परन्तु उनके हृदय परमेश्वर से दूर थे (पद 8)। भले ही मेरा बाहरी रूप मेरी सच्ची भावनाओं को नहीं दर्शाता था, लेकिन मेरे अंदर कड़वाहट पनप रही थी। अपने स्वर्गीय पिता के साथ जो आनंद और निकटता मुझे हमेशा महसूस होती थी, वह ख़त्म हो गई। पाप को पालना और छुपाना यही यह सब उत्पन्न करता है।

परमेश्वर की कृपा से, मैंने अपने सहकर्मी को बताया कि मैं कैसा महसूस कर रही हूं और माफी मांगी। उसने बड़ी दयालुता से मुझे माफ कर दिया और अंततः हम अच्छे मित्र बन गये। यीशु कहता है, “बुरे विचार मन से निकलते हैं” (पद 19)। हमारे हृदय की स्थिति मायने रखती है क्योंकि वहाँ रहने वाली बुराई हमारे जीवन में प्रवेश कर सकती है। हमारा बाहरी और आंतरिक दोनों ही मायने रखता है। केरेन हुआंग

 

स्वामी या प्रबंधक (अधिकारी) ?

“क्या मैं स्वामी हूं या प्रबंधक?” एक अरबों डॉलर की कंपनी के सी.ई.ओ ने स्वयं से यह सवाल पूछा क्योंकि उन्होंने सोचा कि उनके परिवार के लिए सबसे बेहतर क्या है। बहुत अधिक धन के साथ आने वाले प्रलोभनों के बारे में चिंतित होकर, वह अपने उत्तराधिकारियों पर उस चुनौती का बोझ नहीं डालना चाहते थे। इसलिए उन्होंने अपनी कंपनी का स्वामित्व(मालिकाना हक़) छोड़ दिया और 100 प्रतिशत वोटिंग स्टॉक (मताधिकार वाले शेयर) एक ट्रस्ट (किसी अन्‍य व्‍यक्ति की संपति की देखभाल के लिए, की गई वैधानिक व्‍यवस्‍था) में रख दिया। यह मानते हुए कि उनके पास जो कुछ भी है वह परमेश्वर का है, जिन्होंने उनको यह निर्णय लेने में मदद की है, कि उनका परिवार वहाँ काम करके अपनी जीविका कमा सकें और साथ ही भविष्य में मिले मुनाफ़े द्वारा मसीही सेवकाई में भी मदद कर सकें।

भजन संहिता संहिता 50:10 में, परमेश्वर अपने लोगों से कहते हैं “वन के सारे जीव-जन्तु और हज़ारों पहाड़ों के जानवर मेरे ही हैI” सभी चीज़ों के सृष्टिकर्ता के रूप में, परमेश्वर को हमसे कुछ भी नहीं चाहिए और न ही उन्हें कोई ज़रुरत ही है। वह कहते हैं। “मैं न तो तेरे घर से बैल न तेरे पशुशाला से बकरे लूँगा” (पद 9)। वे उदारतापूर्वक वह सब कुछ प्रदान करते है जो हमारे पास है और उनका उपयोग भी करते है, साथ ही जीविका कमाने के लिए शक्ति और क्षमता भी प्रदान करते है। क्योंकि वह करता है, जैसा कि भजन संहिता हमें दिखाता है, वह हमारी हार्दिक आराधना के योग्य है। परमेश्वर सभी चीज़ों के स्वामी है लेकिन अपनी भलाई के कारण जब भी कोई उनके पास आता है तब उसके साथ रिश्ते में जुड़ने के लिए परमेश्वर स्वयं को भी समर्पित करने का निर्णय लेते है । “क्योंकि मनुष्य का पुत्र इसलिये नहीं आया, कि उस की सेवा टहल की जाए, पर इसलिये आया, कि आप सेवा टहल करे, और बहुतों की छुड़ौती के लिये अपना प्राण दे।” (मरकुस 10:45) जब हम उपहारों से अधिक महत्व उपहार देने वाले को देते हैं और उन उपहारों से उसकी सेवा करते हैं, तो हम उसमें सदैव आनंदित रह कर धन्य हो जाते हैं। जेम्स बैंक्स

 

जिस तरह परमेश्वर हमारी सहायता करता है वैसे बोलना

आम तौर पर कोई तितलियों को ज़ोर से बोलने वाला जीव नहीं समझेगा: आख़िरकार, एक राजा या रानी (मोनार्क) तितली के पंखों का फड़फड़ाना व्यावहारिक रूप से सुनाई नहीं पड़ता है। लेकिन मैक्सिकन वर्षावन में, जहां उनमें से कई अपना छोटा जीवन शुरू करते हैं, उनकी सामूहिक फड़फड़ाहट आश्चर्यजनक रूप से तेज़ होती है। जब लाखों राजा या रानी तितलियां एक ही समय में अपने पंख फड़फड़ाते हैं, तो यह एक तेज़ झरने की तरह लगता है।

यही वर्णन तब होता है जब चार बहुत अलग पंख वाले जीव यहेजकेल के दर्शन में दिखाई देते हैं। यद्यपि वे तितलियों की संख्या से कम थे, वह उनके फड़फड़ाते पंखों की ध्वनि की तुलना “बहुत से तेज जल की गर्जना” से करता है (यहेजकेल 1:24)। जब प्राणी शांत खड़े रहे और अपने पंख नीचे कर लिए, तो यहेजकेल ने परमेश्वर की आवाज़ सुनी जो उसे “[इस्राएलियों को] [परमेश्वर के] वचन सुनाने” के लिए बुला रही थी (2:7)।

पुराने नियम के अन्य भविष्यवक्ताओं की तरह, यहेजकेल को, परमेश्वर के लोगों से सच बोलने का कार्य सौंपा गया था। आज, परमेश्वर हम सभी से अपने जीवन में उसके अच्छे कार्यों की सच्चाई को उन लोगों के साथ साझा करने के लिए कहता है जिन्हें वह हमारे आस-पास रखता है (1 पतरस 3:15)। कभी-कभी हमसे एक सीधा सवाल पूछा जाएगा - साझा करने का निमंत्रण जो झरने की तरह “ऊँचे स्वर वाला” होता है। अन्य समय में, निमंत्रण मन्द आवाज़ की तरह हो सकता है, जैसे किसी अनकही आवश्यकता को देखना। चाहे परमेश्वर के प्रेम को साझा करने का निमंत्रण लाखों तितलियों जितना ज़ोरदार है या केवल एक तितली की तरह शांत, हमें यहेजकेल की तरह सुनना चाहिए, कानों को यह सुनने के लिए तैयार रखना चाहिए कि परमेश्वर हमसे क्या कहना चाहता है। कर्स्टन होल्म्बर्ग