
स्वागतम बालक यीशु
ऐसा लगा जैसे हम हमेशा से इस खबर का इन्तजार कर रहे थे कि हमारी गर्भवती पड़ोसन ने अपने पहले बच्चे का स्वगत किया है l जब एक घोषणा करने वाला संकेत, “यह एक लड़की है!” अंततः उनके सामने वाले लॉन में दिखायी दिया, हमने उनकी बेटी के जन्म का जश्न मनाया और उन मित्रों को सन्देश भेजा जिन्होंने शायद बाहरी प्रदर्शन नहीं देखा हो l
बच्चे के आगमन की प्रतीक्षा में बहुत उत्साह है l यीशु के जन्म से पहले, यहूदी लोग केवल कुछ महीनों तक ही प्रतीक्षा नहीं कर रहे थे, वे पीढ़ियों से, इस्राएल के अपेक्षित बचानेवाले, मसीहा/अभिषिक्त/Messiah के जन्म की प्रतीक्षा कर रहे थे l मैं कल्पना करता हूँ कि वर्षों तक विश्वासयोग्य यहूदी सोचते रहे कि क्या वे अपने जीवनकाल में इस प्रतिज्ञा को पूरा होते देखेंगे l
एक रात लम्बे समय से प्रतीक्षित समाचार स्वर्ग में प्रदर्शित हुआ जब एक स्वर्गदूत बैतलहम में चरवाहों के सामने प्रकट हुआ और घोषणा की कि मसीहा/Messiah का आखिरकार जन्म हो गया है l उसने उनसे कहा, “तुम्हारे लिए यह पता है कि तुम एक बालक को कपड़े में लिपटा हुआ और चरनी में पड़ा पाओगे”(लूका 2:12) l चरवाहों ने यीशु को देखने के बाद, परमेश्वर की स्तुति की और बच्चे के बारे में “वह बात . . . प्रगट की”(पद.17) l
परमेश्वर चाहता था कि चरवाहों को पता चले कि लम्बे समय से प्रतीक्षित बालक आ गया है ताकि वे दूसरों को यीशु के जन्म के बारे में बता सकें l हम अभी भी उनके जन्म का जश्न मनाते हैं क्योंकि उनका जीवन विश्वास करने वाले किसी भी व्यक्ति को संसार के टूटेपन से मुक्ति/छुटकारा प्रदान करता है l हमें अब शांति प्राप्त करने और आनंद का अनुभव करने के लिए इंतज़ार नहीं करना पड़ेगा, जो घोषणा करने लायक अच्छी खबर है!

मसीह का प्रकाश
मेरे पति और मैंने हमेशा हमारे चर्च में क्रिसमस की पूर्व संध्या की सेवा में भाग लेने का आनंद लिया है l हमारे विवाह के आरंभिक वर्षों में, हमारे पास सेवा के बाद गर्म कपड़े पहनने की एक विशेष परंपरा थी, जिसके बाद हम पास की पहाड़ी पर जाते थे, जहां एक तारे के आकार में ऊंचे खम्भों से 350 चमकती रोशनी/लाइट्स लटकती थी l वहाँ—अक्सर बर्फ में—हम शहर को देखते हुए यीशु के आश्चर्जनक जन्म पर अपने विचार फुसफुसाते थे l इस बीच, शहर के कई लोग नीचे घाटी से चमकीले, तारे को देखते थे l
वह सितारा हमारे उद्धारकर्ता के जन्म की याद दिलाता है l बाइबल “पूर्व से” ज्योतिषियों के बारे में बताती है जो “यहूदियों का राजा जिसका जन्म हुआ है” की तलाश में यरूशलेम पहुंचे थे(मत्ती 2:1-2) l वे आकाश को देख रहे थे और उन्होंने तारे को “देखा” था(पद.2) l उनकी यात्रा उन्हें यरूशलेम से बैतलहम तक ले गयी, तारा “उनके आगे-आगे चला; और जहाँ बालक था, उस जगह के ऊपर पहुँचकर ठहर गया”(पद.9) l वहाँ, उन्होंने “मुँह के बल गिरकर बालक को प्रणाम किया’(पद.11) l
मसीह हमारे जीवन में प्रकाश का श्रोत है, लाक्षणिक रूप से (हमें मार्गदर्शन देने वाले के रूप में) और शाब्दिक रूप से भी जिसने आकाश में सूर्य, चंद्रमा और तारों को बनाया(कुलुस्सियों 1:15-16) l ज्योतिषियों की तरह, जब उन्होंने उसके तारे को देखा तो “अति आनंदित हुए” (मत्ती 2:10), हमारी सबसे बड़ी ख़ुशी उसे उद्धारकर्ता के रूप में जानने में है जो हमारे बीच रहने के लिए स्वर्ग से आया था l “हमने उसकी महिमा देखी [है]”(यूहन्ना 1;14)!

मैत्रीपूर्ण महत्वाकांक्षा
नाज़ियानज़स के ग्रिगरी(Gregory of Nazianzus) और कैसरिया के बेसिल(Basil of Caesarea) चौथी शताब्दी के चर्च में प्रसिद्ध अगुआ और करीबी मित्र थे l वे पहली बार दर्शनशास्त्र के विद्यार्थियों के रूप में मिले थे, और ग्रिगरी ने बाद में कहा कि वे “एक आत्मा वाले दो शरीर” की तरह बन गए l
उनके आजीविका पथ(career paths) इतने समान होने के कारण, ग्रिगरी और बेसिल के बीच प्रतिद्वंद्विता पैदा हो सकती थी l लेकिन ग्रिगरी ने समझाया कि उन्होंने विश्वास, आशा और अच्छे कर्मों के जीवन को अपनी “एकल महत्वाकांक्षा/single ambition” बनाकर एक दूसरे को इस प्रलोभन से बचा लिया, फिर व्यक्तिगत रूप से इस लक्ष्य में दूसरे को अपने से अधिक सफल बनाने के लिए “एक-दूसरे को प्रेरित किया l” परिणामस्वरूप, दोनों में विश्वास बढ़ा और बिना प्रतिद्वंद्विता के नेतृत्व के उच्च सत्र तक पहुँच गए l
इब्रानियों की पुस्तक हमें विश्वास में मजबूत बने रहने में मदद करने के लिए लिखी गयी है(इब्रानियों 2:1), जो हमें “अपनी आशा के अंगीकार को दृढ़ता से थामे [रहने]” और “प्रेम, और भले कामों में उस्काने के लिए एक दूसरे की चिंता [करने के लिए]” प्रोत्साहित करती है(इब्रानियों 10:23-24) l जबकि यह आदेश एक मण्डली के सन्दर्भ में दिया गया है(पद.25), इसे अपनी मित्रता पर लागू करके, ग्रिगरी और बेसिल ने दिखाया कि कैसे मित्र एक-दूसरे को बढ़ने के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं और किसी भी “कड़वी जड़” से बच सकते हैं, जैसे कि प्रतिद्वंद्विता जो उनके बीच बढ़ सकती है(12:15) l
क्या होगा यदि हमने विश्वास, आशा और अच्छे कर्मों को अपनी मित्रता की महत्वाकांक्षा बना लिया, फिर अपने मित्रों को इस लक्ष्य में व्यक्तिगत रूप से हमसे अधिक सफल होने के लिए प्रोत्साहित किया? पवित्र आत्मा हम दोनों को करने में मदद करने के लिए तैयार है l
मैत्रीपूर्ण महत्वाकांक्षा
नाज़ियानज़स के ग्रिगरी(Gregory of Nazianzus) और कैसरिया के बेसिल(Basil of Caesarea) चौथी शताब्दी के चर्च में प्रसिद्ध अगुआ और करीबी मित्र थे l वे पहली बार दर्शनशास्त्र के विद्यार्थियों के रूप में मिले थे, और ग्रिगरी ने बाद में कहा कि वे “एक आत्मा वाले दो शरीर” की तरह बन गए l
उनके आजीविका पथ(career paths) इतने समान होने के कारण, ग्रिगरी और बेसिल के बीच प्रतिद्वंद्विता पैदा हो सकती थी l लेकिन ग्रिगरी ने समझाया कि उन्होंने विश्वास, आशा और अच्छे कर्मों के जीवन को अपनी “एकल महत्वाकांक्षा/single ambition” बनाकर एक दूसरे को इस प्रलोभन से बचा लिया, फिर व्यक्तिगत रूप से इस लक्ष्य में दूसरे को अपने से अधिक सफल बनाने के लिए “एक-दूसरे को प्रेरित किया l” परिणामस्वरूप, दोनों में विश्वास बढ़ा और बिना प्रतिद्वंद्विता के नेतृत्व के उच्च सत्र तक पहुँच गए l
इब्रानियों की पुस्तक हमें विश्वास में मजबूत बने रहने में मदद करने के लिए लिखी गयी है(इब्रानियों 2:1), जो हमें “अपनी आशा के अंगीकार को दृढ़ता से थामे [रहने]” और “प्रेम, और भले कामों में उस्काने के लिए एक दूसरे की चिंता [करने के लिए]” प्रोत्साहित करती है(इब्रानियों 10:23-24) l जबकि यह आदेश एक मण्डली के सन्दर्भ में दिया गया है(पद.25), इसे अपनी मित्रता पर लागू करके, ग्रिगरी और बेसिल ने दिखाया कि कैसे मित्र एक-दूसरे को बढ़ने के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं और किसी भी “कड़वी जड़” से बच सकते हैं, जैसे कि प्रतिद्वंद्विता जो उनके बीच बढ़ सकती है(12:15) l
क्या होगा यदि हमने विश्वास, आशा और अच्छे कर्मों को अपनी मित्रता की महत्वाकांक्षा बना लिया, फिर अपने मित्रों को इस लक्ष्य में व्यक्तिगत रूप से हमसे अधिक सफल होने के लिए प्रोत्साहित किया? पवित्र आत्मा हम दोनों को करने में मदद करने के लिए तैयार है l
वास्तविक प्रेम
जैसे ही मैं अपनी सहेली मार्गरेट के पास बैठी, जो अस्पताल में अपने बिस्तर पर लेती हुयी थी, मैंने अन्य रोगियों, चिकित्सा कर्मचारियों और आगंतुकों की हलचल और गतिविधि का ध्यान रखी l पास ही अपनी बीमार माँ के साथ बैठी एक युवती ने मार्गरेट से पुछा, “वे सभी लोग कौन हैं जो आपसे मिलने आते रहते हैं?” उसने उत्तर दिया, “वे मेरे चर्च परिवार के सदस्य हैं!” युवती ने टिप्पणी की कि उसने ऐसा कभी नहीं देखा; उसे ऐसा महसूस हुआ जैसे कई आगंतुक “वास्तिक प्यार की तरह उमड़ पड़े हों l” मार्गरेट ने मुस्कुराते हुए उत्तर दिया, “यह सब परमेश्वर के पुत्र यीशु मसीह के द्वारा परमेश्वर के प्रति हमारे प्रेम पर निर्भर करता है!”
अपनी प्रतिक्रया में, मार्गरेट ने शिष्य यूहन्ना की बात दोहराई, जिसने अपने अंतिम वर्षों में प्रेम से भरे तीन पत्र लिखे थे l अपने पहले पत्र में उसने कहा, “परमेश्वर प्रेम है, और जो प्रेम में बना रहता है वह परमेश्वर में बना रहता है, और परमेश्वर उसमें बना रहता है”(1 यूहन्ना 4:16) l अर्थात्, जो लोग स्वीकार करते हैं कि “यीशु परमेश्वर का पुत्र है”(पद.15) उनमें परमेश्वर “अपनी आत्मा” के द्वारा वास करता है(पद.13 l हम प्रेमपूर्वक दूसरों की देखभाल कैसे कर सकते हैं? “हम इसलिए प्रेम करते हैं, कि पहले उसने हम से प्रेम किया”(पद.19) l
परमेश्वर के प्रेम के उपहार के कारण, मार्गरेट से मिलना मेरे लिए या हमारे चर्च के अन्य लोगों के लिए किसी कठिनाई जैसा महसूस नहीं हुआ l मैंने जितना दिया उससे कहीं अधिक पाया, न केवल मार्गरेट से, बल्कि उसके उद्धारकर्ता, यीशु के बारे में उसकी सौम्य गवाही को देखकर l आज परमेश्वर आपके द्वारा दूसरों से कैसे प्रेम कर सकता है?
