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यीशु को देखना

चार महीने की उम्र तक लिओ ने अपने माता-पिता को कभी नहीं देखा था। वह एक असाधारण स्थिति के साथ पैदा हुआ था जिससे उसकी दृष्टि धुंधली हो गई थी। उसके लिए यह घने कोहरे में जीने जैसा था। लेकिन फिर आंखों के डॉक्टर ने उसे एक ख़ास तरह का चश्मा पहनने को दिया।

लिओ के पिता ने एक विडिओ पोस्ट किया जिसमे लिओ की माँ उसे पहली बार चश्मा पहना रही थीI हम देखते हैं जैसे लिओ की आंखें धीरे-धीरे ध्यान केंद्रित करती हैं। जब वह पहली बार अपनी मां को देखता है तो उसके चेहरे पर मुस्कान फैल जाती है। अमूल्य! उस पल में, नन्हा लिओ स्पष्ट देख सकता था।

यूहन्ना यीशु के अपने शिष्यों के साथ हुई बातचीत के बारे में बताता है। फिलिप्पुस ने उससे पूछा, ''पिता को हमें दिखा'' (यूहन्ना 14:8) इतने समय तक एक साथ रहने के बाद भी, यीशु के शिष्य यह नहीं पहचान सके कि उनके ठीक सामने कौन था। उसने उत्तर दिया, “क्या तू विश्वास नहीं करता, कि मैं पिता में हूँ, और पिता मुझ में है?” (पद. 10) पहले यीशु ने कहा था, "मार्ग और सत्य और जीवन मैं ही हूं" (पद. 6) यीशु के साथ "मैं हूँ" कथनों में से यह छठा है। वह हमें इस "मैं हूँ" के कथन को चश्मा के माध्यम से देखने के लिए कह रहा है ताकि हम यह देख सके कि वास्तव में वह कौन है—स्वयं परमेश्वर।

हम अधिकतर शिष्यों के समान है। कठिन समय में, हम संघर्ष करते हैं और धुंधली दृष्टि विकसित करते हैं। हम इस बात पर ध्यान केन्द्रित करने में विफल रहते हैं कि परमेश्वर ने क्या किया है और क्या कर सकता है। जब छोटे लिओ ने विशेष चश्मा पहना, तो वह अपने माता-पिता को स्पष्ट रूप से देख सकता था। शायद हमें अपना ईश्वरीय -चश्मा पहनने की आवश्यकता है ताकि हम स्पष्ट रूप से देख सकें कि यीशु वास्तव में कौन है।

परमेश्वर की बाँहे खुली हैं

मैंने घृणा से अपने सेलफोन (मोबाइल फ़ोन) को देखा और आहें भरी। चिंता ने मेरे माथे पर शिकन डाल दी। एक मित्र और मेरे बीच में हमारे बच्चों को लेकर एक मुद्दे पर गंभीर असहमति थी, और मुझे पता था कि मुझे उसे फोन करने और क्षमा माँगने की ज़रूरत है। मैं ऐसा नहीं करना चाहती थी क्योंकि हमारे दृष्टिकोण अभी भी संघर्ष में थे, इस पर मैं यह भी जानती थी कि पिछली बार जब हमने इस मामले पर चर्चा की थी तो मैं दयालु या विनम्र नहीं थी।

फ़ोन कॉल (करने)का अनुमान लगाते हुए, मैंने सोचा, क्या होगा अगर उसने मुझे माफ़ नहीं किया? क्या होगाI अगर वह हमारी मित्रता को जारी नहीं रखना चाहती है? तभी, एक गीत के बोल मेरे मस्तिष्क में आए और मुझे उस क्षण में वापस ले गए जब मैंने परमेश्वर के सामने एक परिस्तिथि में अपना पाप स्वीकार किया था। मुझे राहत महसूस हुई क्योंकि मैं जानती थी कि परमेश्वर ने मुझे क्षमा कर दिया है और मुझे अपराधबोध से मुक्त कर दिया है।

हम यह नियंत्रित नहीं कर सकते कि जब हम संबंधपरक समस्याओं को हल करने का प्रयास करेंगे तो लोग हमें कैसी प्रतिक्रिया देंगे। जब तक हम अपने हिस्से को स्वीकार करते हैं, विनम्रतापूर्वक क्षमा मांगते हैं, और आवश्यक परिवर्तन करते हैं, हम परमेश्वर के हाथों में बहाली/चंगाई सौंप सकते है। भले ही हमें अनसुलझे "लोगों की समस्याओं" का दर्द सहना पड़े, उसके साथ भी शांति हमेशा संभव है। परमेश्वर की बाहें खुली हुई हैं, और वह हमें वह अनुग्रह और दया दिखाने के लिए प्रतीक्षा कर रहा है जिसकी हमें आवश्यकता है। " यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह हमारे पापों को क्षमा करने ,और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है" (1 यूहन्ना 1:9)

अच्छा चारवाहा

जब पास्टर वॉरेन ने सुना कि उनके चर्च में एक व्यक्ति ने अपनी पत्नी और परिवार को छोड़ दिया है, तो उन्होंने परमेश्वर से प्रार्थना की कि वह उस व्यक्ति से कही पर अचानक से मिलने में उसकी मदद करें ताकि उन्हें उस व्यक्ति से बात-चीत करने का मौका मिल जाए। और परमेश्वर ने ऐसा ही किया! जब वारेन एक रेस्टोरेंट में गए तो उन्होंने उस सज्जन को पास ही में एक टेबल/मेज़ पर बैठे देखा। "क्या इस मेज़ पर दूसरे भूखे व्यक्ति के लिए कुछ जगह है?" उन्होंने पूछा, और जल्द ही,कुछ ही पलों में वे गहराई से अपनी भावनाए साझा कर रहे थे और एक साथ प्रार्थना कर रहे थे।

एक पास्टर के रूप में, वॉरेन अपने चर्च समुदाय के लोगों के लिए एक चरवाहे के रूप में कार्य कर रहे थे, यहाँ तक कि परमेश्वर ने भविष्यवक्ता यहेजकेल के माध्यम से कहा कि वह अपने झुंड की देखभाल करेगा। परमेश्वर ने अपनी बिखरी हुई भेड़ों की देखभाल करने, उन्हें बचाने और उन्हें एक साथ इकट्ठा करने की प्रतिज्ञा की (यहेजकेल 34:12-13) वह “उन्हें अच्छे चरागाह में चराएगा” और “खोई हुई को ढूँढ़ेगा और भटकी हुई को लौटा लाएगा”; वह "घायलों पर पट्टी बांधेगा, और निर्बलों को बलवन्त करेगा" (पद. 14-16) इनमें से प्रत्येक चित्र के माध्यम से अपने लोगों के लिए परमेश्वर का प्रेम प्रतिध्वनित होता है। यद्यपि यहेजकेल के शब्द परमेश्वर के भविष्य के कार्यों का अनुमान लगाते हैं, वे परमेश्वर और चरवाहे के अनंत हृदय को दर्शाते हैं जो एक दिन स्वयं को यीशु में प्रकट करेंगे।

चाहे हमारी स्थिति कुछ भी हो, परमेश्वर हम में से प्रत्येक के पास पहुँचता है, हमें बचाने की कोशिश करता है और हमें एक समृद्ध चरागाह में शरण देता है। वह चाहता है कि हम अच्छे चरवाहे का अनुसरण करें, वह जो अपनी भेड़ों के लिए अपना प्राण देता हैI (देखें यूहन्ना 10:14-15)

सबसे अकेला आदमी

20 जुलाई, 1969 को नील आर्मस्ट्रांग और बज़ एल्ड्रिन अपने चंद्र लैंडिंग मॉड्यूल(लूनर लैंडिंग मॉड्यूल/Lunar Module Landing ) से बाहर निकले और चंद्रमा की सतह पर चलने वाले पहले इंसान बने। लेकिन हम अक्सर उनकी टीम के तीसरे व्यक्ति माइकल कोलिन्स के बारे में नहीं सोचते हैं, जो अपोलो 11 के लिए कमांड मॉड्यूल उड़ा रहे थे।

चांद की सतह का परीक्षण करने के लिए उनके साथियों के सीढ़ी से नीचे उतरने के बाद, कोलिन्स चंद्रमा से दूर की ओर अकेले इंतजार कर रहे थे। वह नील, बज़ और पृथ्वी पर सभी के संपर्क से बाहर हो गये थे। नासा के मिशन नियंत्रण ने टिप्पणी की, "आदम के बाद से माइक कोलिन्स के रूप में किसी भी मानव ने इस तरह के अकेलापन नहीं जाना।"

ऐसे समय होते हैं जब हम पूरी तरह से अकेला महसूस करते हैं। उदाहरण के लिए, कल्पना कीजिए, याकूब के पुत्र यूसुफ को कैसा लगा होगा जब उसके भाइयों द्वारा उसे बेच दिए जाने के बाद उसे इस्राएल से मिस्र ले जाया गया था (उत्पत्ति 37:23-28) फिर उसे झूठे आरोपों में जेल में डाल कर और भी अलग-थलग कर दिया गया (39:19-20)

युसूफ एक विदेशी भूमि में जेल में बिना किसी परिवार के कहीं भी कैसे जीवित रहा होगा? इसे सुनें: जब तक यूसुफ बन्दीगृह में था,“पर यहोवा युसुफ़ के संग संग रहा" (पद. 20-21) उत्पत्ति 39 में हमें इस सांत्वनादायक सत्य की चार बार याद दिलाई गई है।

क्या आप अकेला या दूसरों से अलग-थलग महसूस करते हैं? परमेश्वर की उपस्थिति की सच्चाई को थामे रहें, जिसका वादा स्वयं यीशु ने किया था: "और देखो मैं जगत के अंत तक सदा तुम्हारे संग हूं" (मत्ती 28:20) अपने उद्धारकर्ता के रूप में यीशु के साथ, आप कभी अकेले नहीं होते।