देने में/का आनंद
जब केरी का छोटा बेटा मस्क्युलर डिस्ट्रॉफी(muscular dystrophy-एक बीमारी) से सम्बंधित एक और सर्जरी से गुजर रहा था, तो वह किसी और के लिए कुछ करके अपने परिवार की स्थिति से अपना ध्यान हटाना चाहती थी l इसलिए उसने अपने बेटे के छोटे हो चुके लेकिन कम उपयोग किए गए जूतों को इकठ्ठा किया और उन्हें एक सेवकाई को दान कर दिया l उसके योगदान ने मित्रों, परिवार के सदस्यों और यहाँ तक कि पड़ोसियों को भी इसमें शामिल होने के लिए प्रेरित किया और जल्द ही दो सौ से अधिक जोड़ी जूते दान कर दिए गए l
हालाँकि जूती मुहीम(shoe drive) चलाने का उद्देश्य दूसरों को आशीष देना था, केरी को लगता है कि उसके परिवार को अधिक आशीष मिली l “पूरे अनुभव ने वास्तव में हमारा उत्साह बढ़ाया और हमें बाहर की ओर ध्यान केन्द्रित करने में मदद की l”
पौलुस समझ गया था कि यीशु के अनुयायियों के लिए उदारतापूर्वक देना कितना विशेष है l यरूशलेम जाते समय प्रेरित पौलुस इफिसुस में रुका l वह जानता था कि यह संभवतः उस चर्च के लोगों के साथ उसकी आखिरी मुलाकात होगी जिसकी स्थापना उसने वहाँ की थी l चर्च के वृद्धों को अपने विदाई भाषण में, उसने उन्हें याद दिलाया कि कैसे उसने परमेश्वर की सेवा में लगन से काम किया था (प्रेरितों 20:17-20) और उन्हें भी ऐसा करने के लिए उत्साहित किया l फिर उसने यीशु के शब्दों के साथ अंत किया : “लेने से देना धन्य है” (पद.35) l
यीशु चाहता है कि हम स्वतंत्र रूप से और विनम्रतापूर्वक अपने आप को दे दें (लूका 6:38) l जब हम उस पर हमारा मार्गदर्शन करने के लिए भरोसा करते हैं, तो वह हमें ऐसा करने के लिए अवसर प्रदान करेगा l केरी के परिवार की तरह, हम भी इसके फलस्वरूप प्राप्त होने वाले आनंद से आश्चर्यचकित हो सकते हैं l

परमेश्वर को धन्यवाद दें
मेरी सहेली अस्पताल में अपनी तनावपूर्ण नौकरी से यह सोचते हुए जल्दी से निकल गयी, कि उसके पति के समान रूप से कठिन काम से लौटने से पहले वह रात के खाने के लिए क्या तैयार करेगी l उसने रविवार को चिकन बनाया था और सोमवार को बचा हुआ चिकन परोसा था l मंगलवार को उसे फ्रिज में केवल सब्जियां मिलीं, लेकिन वह जानती थी कि शाकाहारी भोजन उसके पति का पसंदीदा नहीं था l जब उसे कुछ और नहीं मिला जिसे वह कुछ ही मिनटों में तैयार कर सकती थी, तो उसने फैसला किया कि उसे सब्जियां बनानी होंगी l
जैसे ही उसने भोजन मेज पर रखा, उसने अपने पति से, जो अभी-अभी घर आया था, क्षमा मांगते हुए कहा : “मुझे पता है कि यह आपका पसंदीदा नहीं है l” उसके पति ने ऊपर देखा और कहा, “प्रिय, मैं बहुत खुश हूँ कि हमारे पास मेज पर खाना है l”
उनका व्यवहार मुझे ईश्वर से हमारे दैनिक प्रबंधों के लिए धन्यवादी और आभारी होने के महत्त्व की याद दिलाता है—चाहे वे कुछ भी हों l हमारी दैनिक रोटी, या भोजन के लिए धन्यवाद देना, यीशु का उदाहरण प्रस्तुत करता है l जब उसने अपने पुनरुत्थान के बाद दो शिष्यों के साथ भोजन किया, तो मसीह ने “रोटी लेकर धन्यवाद किया और उसे [तोड़ा]”(लूका 24:30) l उसने अपने पिता को धन्यवाद दिया जैसे उसने पहले किया था जब उसने पांच हज़ार लोगों को पांच “रोटियाँ और दो छोटी मछलियाँ” खिलाई थीं (यूहन्ना 6:9) l जब हम अपने दैनिक भोजन और अन्य प्रबंधों के लिए धन्यवाद देते हैं, तो हमारी कृतज्ञता यीशु के तरीकों को दर्शाती हैं और हमारे स्वर्गिक पिता का आदर करती है l आइये आज परमेश्वर को धन्यवाद दें l

छेददार से पवित्रता तक
बचपन में मेरी बेटी को पनीर के टुकड़ों से खेलना बहुत पसंद था l वह हलके पीले चौकोर टुकड़े को मास्क की तरह अपने चेहरे पर रख कर कहती थी, “देखो माँ,” उसकी चमकदार आँखें पनीर में दो छेदों से बाहर झाँकती थीं l एक युवा माँ के रूप में, उस पनीर मास्क ने मेरे प्रयासों के बारे में मेरी भावनाओं को संक्षेप में प्रस्तुत किया—सचमुच में प्रस्तुत किया, प्यार से पूर्ण, लेकिन बहुत अपूर्ण l छेददार, पवित्र नहीं l
ओह, हम एक पवित्र जीवन जीने के लिए कितने लालायित रहते हैं—एक ऐसा जीवन जो ईश्वर के लिए अलग किया गया और जो यीशु के समान होने की विशेषता रखता है l लेकिन दिन-ब-दिन पवित्रता पहुँच से बाहर महसूस हो रही है l इसके स्थान पर हमारा “छेददार स्वरूप” बरक़रार है l
2 तीमुथियुस 1:6-7 में, पौलुस अपने शिष्य तीमुथियुस को लिखते हुए, उससे अपने पवित्र बुलाहट के अनुसार जीने का निवेदन करता है l प्रेरित ने तब स्पष्ट किया कि “[परमेश्वर] ने हमें बचाया है और हमें पवित्र जीवन के लिए बुलाया है—हमारे द्वारा किए गए किसी कार्य के कारण नहीं, बल्कि अपने स्वयं के उद्देश्य और अनुग्रह के कारण”(पद.9) l क्या हम परमेश्वर की अनुग्रह को स्वीकार कर सकते हैं और उसके द्वारा प्रदान की जाने वाली सामर्थ्य के मंच से जी सकते हैं?
चाहे पालन-पोषण हो, विवाह हो, काम हो, या अपने पड़ोसी से प्यार करना हो, परमेश्वर हमें एक पवित्र जीवन के लिए बुलाता है—यह हमारे सिद्ध होने के प्रयासों के कारण नहीं बल्कि उसके अनुग्रह के कारण संभव हुआ है l

प्यासा और धन्यवादी
मेरे दो मित्र और मैं हमेशा से एक पहाड़ी रास्ते से पैदल यात्रा करना चाहते थे l आरम्भ करने से पूर्व, हमें आश्चर्य हुआ कि क्या हमारे पास पर्याप्त पानी था क्योंकि हमने अपनी पदयात्रा आरम्भ की थी, और पानी तेजी से खत्म हो गया l हमारे पास पानी नहीं बचा था और किनारे तक पहुँचने के लिए अभी भी कोई रास्ता नहीं बचा था l हाँफते हुए, प्रार्थना करते हुए, चलते गए l फिर हमने एक कोने का चक्कर लगाया और एक चमत्कार घटित हुआ l हमने चट्टान की एक दरार में तीन पानी कि बोतलें दबी हुयी देखीं, जिस पर लिखा था : जानता था कि आपको इसकी ज़रूरत होगी l आनंद लें!” हमें अविश्वास से एक-दूसरे को देखा, परमेश्वर को धन्यवाद कहा, कुछ बेहद ज़रूरी घूँट पीये और फिर आखिरी पड़ाव पर निकर पड़े l मैं अपने जीवन में इतना प्यासा और आभारी कभी नहीं हुआ l
भजनकार के पास पहाड़ी यात्रा का कोई अनुभव नहीं था, लेकिन यह स्पष्ट है कि वह जानता था कि प्यास लगने पर और संभवतः डर लगने पर हरिणी कैसे व्यवहार करती है l हरिणी “हाँफती” है (भजन 42:1), एक ऐसा शब्द जो प्यास और भूख को मन में लाता है, इस हद तक कि अगर कुछ नहीं बदलता है, तो आप डरते हैं कि आप मर सकते हैं l भजनकार ने हरिणी की प्यास की डिग्री को परमेश्वर के लिए उसकी इच्छा के बराबर बताया है : “वैसे ही, हे परमेश्वर, मैं तेरे लिए हाँफता हूँ” (पद.1) l
अति-आवश्यक जल की तरह, परमेश्वर सदैव उपस्थित रहने वाला सहायता है l हम उसके लिए हाँफते हैं क्योंकि वह हमारे थके हुए जीवन में नयी ताकत और ताज़गी लाता है, हमें दिन भर की तैयारी के लिए सुसज्जित करता है l

मसीह द्वरा साफ़ किया गया
मेरा पहला थोड़े समय का मिशन, यात्रा ओडिशा के जंगल में नदी के किनारे एक चर्च बनाने में सहायता करने के लिए थी l एक दोपहर, हम उस क्षेत्र के कुछ घरों में से एक में गए जहाँ पानी का फ़िल्टर था l जब हमारे मेजबान ने कुंए का गन्दा पानी फ़िल्टर के ऊपर डाला, तो कुछ ही मिनटों में सारी गन्दगी दूर हो गयी और साफ़. स्वच्छ पीने का पानी दिखाई देने लगा l वहीँ उस आदमी के बैठक कक्ष(living-room) में, मैंने इस बात का आभास हुआ कि मसीह द्वारा शुद्ध किये जाने का क्या अर्थ है l
जब हम पहली बार अपने दोष और शर्म के साथ यीशु के पास आते हैं और उससे हमें क्षमा करने के लिए कहते हैं और हम उन्हें अपने उद्धारकर्ता के रूप में मान लेते हैं, तो वह हमारे पापों से शुद्ध करता है और हमें नया बनाता है l हम ठीक वैसे ही शुद्ध हो जाते हैं जैसे गंदा पानी साफ़ फीने के पानी में बदल गया था l यह जानना कितनी ख़ुशी की बात है कि यीशु के बलिदान के कारण हम परमेश्वर के साथ सही स्थिति में हैं (2 कुरिन्थियों 5:21) और यह जानना कि परमेश्वर हमारे पापों को उतनी ही दूर कर देता है जितना पूर्व पश्चिम से है (भजन 103:12) l
लेकिन प्रेरित यूहन्ना हमें याद दिलाता है कि इसका अर्थ यह नहीं है कि हम फिर कभी पाप नहीं करेंगे l जब हम पाप करते हैं तो हम पानी के फ़िल्टर की छवि से सुनिश्चित हो सकते हैं और यह जानकर सांत्वना पा सकते हैं कि “यदि हम अपने पापों को मान लें, तो वह हमारे पापों को क्षमा करने और हमें सब अधर्म से शुद्ध करने में विश्वासयोग्य और धर्मी है” (1 यूहन्ना 1:9) l
आइये यह जानकार आत्मविश्वास से जीएं कि हम लगातार मसीह द्वारा शुद्ध किए जा रहे हैं l