
कॉफी की गन्ध वाली साँस
क्ई साल पहले एक सुबह मैं अपनी कुर्सी पर बैठा था, जब मेरी सबसे छोटी बच्ची नीचे आयी। वह दौडती हुई सीधी मेरे पास आई और उछल कर मेरी गोद में बैठ गई। मैंने एक पिता की तरह उसे चिपटा लिया और सिर पर एक कोमल चुंबन दिया, और वह खुशी से चिल्लायी। लेकिन फिर उसने अपनी भौंह को सिकोड़ लिया, अपनी नाक सिकोड़ ली, और मेरे कॉफी मग पर एक आरोप लगाने वाली नज़र डाली। उसने गंभीरता से घोषणा की “डैडी, मैं आपको प्यार करती हूँ, और आप मुझे अच्छे लगते हैं, लेकिन मुझे आपकी गंध पसंद नहीं है।”
मेरी बेटी यह नहीं जान सकती थी, लेकिन उसने शालीनता और सच्चाई से बात की: वह मेरी भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचाना चाहती थीए लेकिन उसने मुझे कुछ बताने के लिए मजबूर महसूस किया। और कभी कभी हमे अपने रिश्तों में ऐसा करने की ज़रूरत होती है।
इफिसियों 4 में, पौलुस इस बात पर ध्यान देता है कि हम एक दूसरे से कैसे संबंधित हैं,खासकर कठिन सत्य बोलते समय। “अर्थात् सारी दीनता और नम्रता सहित, और धीरज धरकर प्रेम से एक दूसरे की सह लो” (पद 2)। नम्रता, दीनता और धैर्य हमारे संबंध का आधार बनाते हैं। उन चारित्रिक गुणों को विकसित करने से जैसे ईश्वर हमारा मार्गदर्शन करता है, “हमें प्रेम में सच्चाई से चलते हुये” (पद 15) में मदद मिलेगी और उस संवाद को खोजने में मदद होगी /जो आवश्यकता के अनुसार औरों के निर्माण में सहायक हो” (पद 29) ।
अपनी कमजोरियों के बारे में किसी को भी सामना करना पसंद नहीं है। लेकिन जब हमारे बारे में कुछ “गंध” आती है, तो परमेश्वर हमारे जीवन में अनुग्रह, सच्चाई, नम्रता और सभ्यता लाने के वफादार दोस्तों का उपयोग कर सकते हैं।

प्रेम की ज्वाला अग्नि है
कवि, चित्रकार,और प्रिंटमेकर विलियम ब्लेक ने अपनी पत्नी कैथरीन के साथ पैंतालीस साल की शादी का आनंद लिया। उनकी शादी के दिन से लेकर 1827 में उनकी मृत्यु तक, उन्होंने एक साथ मिलकर काम किया। कैथरीन ने विलियम के रेखाचित्रों में रंग डाला, और उनकी भक्ति ने वर्षों की गरीबी और अन्य चुनौतियों का सामना किया। अपने अंतिम हफ्तों में भी जब उनका स्वास्थ्य खराब हो गया तो ब्लेक ने अपनी कला को जारी रखा, और उनका अंतिम स्केच उनकी पत्नी का चेहरा था। चार साल बाद, कैथरीन अपने पति की एक पेंसिल को हाथ में पकड़े हुये मर गई।
ब्लेक का जीवंत प्रेम श्रेष्ठगीत में पाये गए प्रेम का प्रतिबिंब प्रस्तुत करता है। और जबकि श्रेष्ठगीत के प्रेम के विवरण का निश्चित रूप से विवाह के लिए है, यीशु में प्रारंभिक विश्वासियों का मानना था कि यह यीशु के अपने सभी अनुयायियों के लिए कभी न बुझने वाले प्रेम की ओर भी इशारा करता है। श्रेष्ठगीत एक प्रेम का वर्णन करता है “मृत्यु के समान मजबूत है” जो कि एक उल्लेखनीय रूपक है क्योंकि मृत्यु अंतिम और वास्तविकता है जिससे कोई नहीं बचा (8:6) । यह प्रबल प्रेम प्रज्वलित आग की तरह, एक शक्तिशाली लौ की तरह जलता है (पद 6) और जिस आग से हम परिचित हैं, उसके विपरीत, इन लपटों को बुझाया नहीं जा सकता, यहां तक कि एक जलप्रलय से भी नहीं। महानद भी प्रेम को नहीं बुझा सकती (पद 7।
हम में से कौन सच्चा प्यार नहीं चाहता? श्रेष्ठगीत हमें याद दिलाता है कि जब भी हम सच्चे प्रेम का सामना करते हैं, तो ईश्वर ही परम स्रोत है। और यीशु में हम में से प्रत्येक एक गहन और अमर प्रेम को जान सकता है –वह जो एक धधकती आग की तरह जलता है।

लेकिन मैं तुम से कह रहh हूँ
“मुझे पता है कि वे क्या कह रहे हैं। लेकिन मैं तुम से कह रही हूं . . .।” एक लड़के के रूप में, मैंने अपनी माँ को एक हज़ार बार यह कहते सुना है। परिस्थिति हमेशा सथीयों का दबाव था, और वह मुझे समूह का पालन न करना सिखाने की कोशिश कर रही थी। मैं अब लड़का नहीं रहा, लेकिन समूह की मानसिकता अभी भी जीवित है और रोमांचित कर रही है। एक वर्तमान उदाहरण यह वाक्यांश है: “अपने आप को केवल सकारात्मक लोगों से घेरें।” अब जबकि यह वाक्यांश आम तौर से सुना जा सकता है, हमें जो प्रश्न पूछना चाहिए वह है, “क्या वह मसीह के समान है?”
“लेकिन मैं तुम से कह रही हूँ . . .।” मत्ती 5 में यीशु इसका उपयोग कई बार करता है। वह अच्छी तरह जानता है कि दुनिया हमें लगातार क्या बता रही है। लेकिन उसकी इच्छा है कि हम अलग तरह से जिएं। इस मामले में, वह कहता है, अपने बैरियों से प्रेम रखो और उनके लिए प्रार्थना करो जो तुम्हें सताते हैं (पद 44)। बाद में नए नियम में, प्रेरित पौलुस अनुमान लगाने के लिए उसी शब्द का उपयोग करता है; अनुमान लगायें किस के लिये ?सही है: हम — “जबकि हम परमेश्वर के बैरी थे“ (रोमियों 5:10)। और “जैसा मैं कहता हूँ वैसा करो, न कि जैसा मैं करता हूँ,” यीशु ने कार्यों के साथ अपने शब्दों का समर्थन किया। उसने हम से प्रेम किया, और हमारे लिए अपना जीवन दे दिया।
क्या होता यदि मसीह ने अपने जीवन में केवल “सकारात्मक लोगों” के लिए ही जगह बनाई होती? फिर हमारा क्या होता? परमेश्वर का शुक्र है कि उसका प्यार व्यक्तियों का आदर करना नहीं है। क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा है और उसी के बल से हम भी ऐसा ही करने के लिये बुलाए गए हैं।

हृदय परेशानी
“क्या आप इसे देखते हैं, भाई टिम?” मेरे मित्र, घाना के एक पादरी ने मिट्टी की झोपड़ी की ओर झुकी हुई एक नक्काशीदार वस्तु पर अपनी टार्च की रोशनी डाली। उसने चुपचाप कहा, “वह गाँव की मूर्ति है।”प्रत्येक मंगलवार की शाम, पादरी सैम, इस सुदूर गाँव में बाइबल साझा करने के लिए इस झाड़ी में जाता था।
यहेजकेल की पुस्तक में, हम देखते हैं कि कैसे मूर्तिपूजा ने यहूदा के लोगों को नष्ट किया। जब यरूशलेम के अगुवे यहेजकेल भविष्यद्वक्ता से मिलने आएए तो परमेश्वर ने उससे कहा, “इन लोगों ने अपने मन में मूरतें गढ़ी हैं” (14:3)। परमेश्वर उन्हें केवल लकड़ी और पत्थर से तराशी गई मूर्तियों के विरुद्ध चेतावनी नहीं दे रहा था। वह उन्हें बता रहा था कि मूर्तिपूजा दिल की समस्या है। हम सब इससे जूझते हैं।
बाइबिल शिक्षक एलिस्टेयर बेग एक मूर्ति का वर्णन इस प्रकार करते हैं— “परमेश्वर के अलावा और कुछ भी, जिसे हम अपनी शांति, अपनी आत्म–छवि, अपनी संतुष्टि, या अपनी स्वीकार्यता के लिए आवश्यक मानते हैं।” यहां तक कि जो चीजें देखने में भली लगती हैं वे भी हमारे लिए मूर्ति बन सकती हैं। जब हम जीवित परमेश्वर के अलावा किसी और चीज में आराम या आत्म सम्मान की तलाश करते हैं, तो हम मूर्तिपूजा करते हैं।
“पश्चाताप!” परमेश्वर ने कहा। “अपनी मूरतों से फिरो और अपने सब घिनौने कामों को त्याग दो!” (पद 6)। इस्राइल ऐसा करने में असमर्थ साबित हुआ। शुक्र है, परमेश्वर के पास इसका समाधान था। मसीह के आने और पवित्र आत्मा के उपहार की प्रतीक्षा करते हुए, उसने प्रतिज्ञा की, “मैं तुम्हें नया मन दूंगा, और तुम में नई आत्मा डालूंगा” (36:26) । यह हम अकेले नहीं कर सकते।
