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अपने बगीचे की देखभाल करें

 
मैं अपने  मकान के पीछे के आंगन में फल और सब्जियों का बगीचा लगाने के लिए बहुत उत्साहित था। फिर मुझे मिट्टी में छोटे छोटे छेद नज़र आने लगे। इससे पहले कि उसे पकने का समय मिलता, हमारा पहला फल रहस्यमय तरीके से गायब हो गया। एक दिन मैं यह देखकर निराश हो गया कि हमारा सबसे बड़ा स्ट्रॉबेरी का पौधा एक घोंसला बनाने वाले खरगोश द्वारा पूरी तरह से उखाड़ दिया गया था और सूरज की रोशनी में झुलस गया था। काश मैंने चेतावनी के संकेतों पर गहरा ध्यान दिया होता! 
श्रेष्ठगीत की खूबसूरत प्रेम कविता में एक युवक और युवती के बीच बातचीत को दर्ज किया गया है। अपने प्रिय को बुलाते समय, युवक ने उन जानवरों के प्रति कड़ी चेतावनी दी जो प्रेमियों के बगीचे को उजाड़ देंगे, जो उनके रिश्ते का एक रूपक है। उसने कहा, “जो छोटी लोमड़ियां दाख की बारियों को बिगाड़ती हैं, उन्हें पकड़ ले।” (श्रेष्ठगीत 2:15)। शायद उसने लोमडि़यों के संकेत देखे जो उनके प्रेम लीला को बर्बाद कर सकते थे, जैसे ईर्ष्या, क्रोध, छल या उदासीनता। क्योंकि वह अपनी दुल्हन की सुंदरता से प्रसन्न था (पद 14) वह किसी भी अस्वास्थ्यकर (बेकार) वस्तु की उपस्थिति को बर्दाश्त नहीं कर सकता था। वह उसके लिए कांटों के बीच एक सोसन (lily) के फूल के समान कीमती थी (पद 2)। वह उनके रिश्ते की रक्षा के लिए कार्यरत था।  
हमारे लिए परमेश्वर के सबसे अनमोल उपहारों में से कुछ परिवार और दोस्त हैं, हालाँकि उन रिश्तों को बनाए रखना हमेशा आसान नहीं होता है। धैर्य, देखभाल और छोटी लोमड़ियों से सुरक्षा के साथ, हमें भरोसा है कि परमेश्वर सुंदर फल उगाएंगे। 
केरन पिम्पो 

परमेश्वर आपको नाम से बुलाते हैं

नतालिया शिक्षा प्राप्त करने के वादे के साथ एक अलग देश में गई। लेकिन जल्द ही उसके नए घर में पिता ने उसका शारीरिक और यौन शोषण करना शुरू कर दिया। उसने उसे बिना वेतन के अपने घर और बच्चों की देखभाल करने के लिए मजबूर किया। उसने उसे बाहर जाने या फोन का इस्तेमाल करने से मना कर दिया। वह उसकी गुलाम बन गयी थी । 
हाजिरा अब्राम और सारै की मिस्री दासी था। किसी ने भी उसका नाम नहीं लिया, उन्होंने उसे  “मेरी दासी” या “तेरी दासी” कहा (उत्पत्ति 16:2, 5–6)। वे केवल उसका उपयोग करना चाहते थे ताकि उन्हें एक उत्तराधिकारी मिल सके। 
परमेश्वर कितना अलग है! प्रभु का दूत पवित्रशास्त्र में पहली बार प्रकट होता है जब वह रेगिस्तान में  गर्भवती हाजिरा से बात करता है। दूत या तो परमेश्वर का दूत है या स्वयं परमेश्वर  है। हाजिरा का मानना है कि वह परमेश्वर है, क्योंकि वह कहती है, “मैंने अब उसे देखा है जो मुझे देखता है” (पद 13)। यदि दूत परमेश्वर है, तो वह संभवतः पुत्र भी हो सकता है, वह जो परमेश्वर को हमारे सामने प्रकट करता है, प्रारंभिक पूर्व–अवतार रूप में प्रकट होता है। वह उसका नाम बताता है, “सारै की दासी हाजिरा तू कहां से आई है, और कहां को जाती है? (पद 8) 
परमेश्वर ने नतालिया को देखा और उसके जीवन में देखभाल करने वाले लोगों को लाया जिन्होंने उसे बचाया। वह अब नर्स बनने के लिए पढ़ाई कर रही है। परमेश्वर ने हाजिरा को देखा और उसका नाम लेकर बुलाया। और परमेश्वर आपको देखता है, आपको नज़रअंदाज़ किया जा सकता है या इससे भी बदतर, आपके साथ दुर्व्यवहार किया जा सकता है। पर यीशु आपको नाम से बुलाते हैं। उसके पास दौड़ कर जाओ। 
माइक विट्मर 

एक विशिष्ट रोना

 
जब कोई बच्चा रोता है, तो यह संकेत है कि वह थका हुआ है या भूखा है, है ना! ब्राउन यूनिवर्सिटी के डॉक्टरों के अनुसार, नवजात शिशु के रोने में हल्का सा अंतर भी अन्य समस्याओं के लिए महत्वपूर्ण संकेत दे सकता है। डॉक्टरों ने एक कंप्यूटर प्रोग्राम तैयार किया है जो रोने के कारकों जैसे पिच (उतार चढ़ाव), तीव्रता, और रोने की आवाज में स्पष्टता को मापता है ताकि यह निर्धारित किया जा सके कि बच्चे के केंद्रीय तंत्रिका तंत्र ( central nervous system) में कुछ गड़बड़ है या नहीं। 
यशायाह ने भविष्यवाणी करी कि परमेश्वर अपने लोगों की स्पष्ट पुकार सुनेंगे, उनके दिलों की हालत समझेंगे, और अनुग्रह के साथ जवाब देंगे। यहूदा ने, परमेश्वर से परामर्श करने के बजाय, उसके भविष्यवक्ता की उपेक्षा की थी और मिस्र के साथ गठबंधन में मदद मांगी थी (यशायाह 30:1–7)। परमेश्वर ने उनसे कहा कि यदि उन्होंने अपना विद्रोह जारी रखा, तो वह उनके सामने उनकी हार और अपमान लाएगा। हालाँकि वह उन पर “अनुग्रह करने की भी और उन पर दया दिखाने की इच्छा रखता था” (पद 18)। बचाव आएगा, लेकिन केवल उनके पश्चाताप और विश्वास के रोने से। यदि परमेश्वर के लोग उसे पुकारते, तो वह उनके पापों को क्षमा कर देता और उनकी आत्मिक शक्ति और जीवन शक्ति को नया कर देता (पद 8–26)। 
यही बात आज यीशु में विश्वास करने वालों के लिए भी सच है। जब पश्चाताप और विश्वास की हमारी  स्पष्ट पुकारें (दोहाई) हमारे स्वर्गीय पिता के कानों तक पहुँचती हैं, तो वह उन्हें सुनता है, हमें क्षमा करता है, और उसमें हमारे आनंद और आशा को नया करता है। 
मार्विन विलियम्स 

डर का कारण

जब मैं छोटा लड़का था, तो स्कूल का मैदान वह जगह थी जहां दबंग लड़के अपना दबदबा रखते थे और मेरे जैसे बच्चों को  कम से कम  विरोध के साथ उस दादागिरी का सामना करना पड़ता था। जब हम अपने सताने वालों के सामने डर के मारे झुकते थे तब कुछ और भी बुरा  होता था – उनके ताने कि “क्या तुम डर गये हो? तुम मुझसे डरते हो? है ना? यहाँ तुम्हें मुझसे बचाने वाला कोई नहीं है।” 
वास्तव में उस समय मैं ज्यादातर ड़रा हुआ होता था। और इसका एक कारण था। अतीत में उसके मुक्के खाने के बाद, मुझे पता था कि मैं दोबारा ऐसा अनुभव नहीं करना चाहता। मैं डर का शिकार था, मैं क्या कर सकता था और किस पर भरोसा कर सकता था? जब आप केवल आठ साल के होते हैं और आपको आपसे आयु में बड़े विशालकाय और शक्तिशाली बच्चे द्वारा परेशान किया जाता है तो डरना जायज़ है। 
जब दाउद को हमले का सामना करना पड़ा, तो उसने डर के बजाय आत्मविश्वास के साथ जवाब दिया, क्योंकि वह जानता था कि वह अकेले उन खतरों का सामना नहीं करेगा। उसने लिखा, “यहोवा मेरी ओर है मैं न डरू्रगा; मनुष्य मेरा क्या कर सकते हैं?” (भजन 118:6) एक लड़के के रूप में, मुझे यकीन नहीं था कि मैं दाउद के आत्मविश्वास के स्तर को समझ पाऊंगा। लेकिन एक वयस्क के रूप में, मैंने मसीह के साथ वर्षों तक चलने के द्वारा सीखा है कि वह किसी भी डर पैदा करने वाले खतरे से बड़ा है। 
जीवन में हम जिन खतरों का सामना करते हैं वे वास्तविक हैं। फिर भी हमें डरने की जरूरत नहीं है, संसार का बनाने वाला हमारे साथ है और वह पर्याप्त से भी कही अधिक है। 
-बिल क्राउडर 

कार्य में करुणा

बेंच बनाना जेम्स वॉरेन का काम नहीं है। हालांकि जब से उन्होंने डेनवर में एक महिला को बस के इंतज़ार में गंदगी में बैठे हुए देखा तब से उन्होंने बेंच बनाना शुरू किया था । उस औरत को देखकर वह चिेतित हो गये थे और उन्होंने सोचा कि यह अपमानजनक है। तो, इस अट्ठाईस वर्षीय कर्मचारी सलाहकार को कुछ बेकार (स्क्रैप) लकड़ी मिली, उसने एक बेंच बनाई और उसे बस स्टॉप पर रख दिया। जल्दी ही लोगों ने इसका उपयोग करना शुरू कर दिया। यह महसूस करते हुए कि उनके शहर के नौ हजार बस स्टॉपों में से कई में बैठने की जगह की कमी है,उसने एक और बेंच बनाई, फिर कई और बेंचें बनाईं, और प्रत्येक पर “दयालु बनें” लिखा। वॉरेन ने कहा, “उसका लक्ष्य किसी भी तरह से लोगों के जीवन को थोड़ा सा बेहतर बनाना है ।” 
ऐसे काम का वर्णन करने का एक और तरीका है — वह है करुणा । जैसा कि यीशु किया करते थे, करुणा एक भावना है जो इतनी शक्तिशाली है कि यह हमें दूसरे की ज़रूरत को पूरा करने के लिए कुछ करने के लिए प्रेरित करती है। जब निराश लोगों की भीड़ ने यीशु का पीछा किया तो उसे उन पर दया आई, क्योंकि वे उन भेड़ों के समान थे जिनका कोई रखवाला न हो (मरकुस 6:34)। उसने उनके बीमारों को चंगा करके उस करुणा को कार्य में बदल दिया (मत्ती 14:14)। हमें भी अपने “आप को करुणा से ढक लेना चाहिए” पौलुस ने आग्रह किया (कुलुस्सियों 3:12)। इसका क्या लाभ है ? जैसा कि वॉरेन कहते हैं, “यह टायरों में हवा के समान है; यह मुझे भर देता है (मुझे संतुष्टि देता है) ।” 
हमारे चारों ओर जरूरतें हैं, और परमेश्वर उनकी तरफ हमारा ध्यान खीचेंगे । वे ज़रूरतें हमें अपनी करुणा को क्रियान्वित (कार्य में लाने) करने के लिए प्रेरित कर सकती हैं, और वे कार्य दूसरों को प्रोत्साहित करेंगे क्योंकि हम उन्हें मसीह का प्रेम दिखाएंगे। 
-पेट्रीशिया रेबोन