मैंने घंटियाँ सुनी
मुझे पोंडिचेरी में अपना सप्ताहांत बहुत पसंद आया—फ्रेंच क्वार्टर(French Quarter) में परेड पर जाना, संग्रहालय का दौरा करना और ग्रिल्ड(भुनी हुयी) मछली का स्वाद लेना l लेकिन जब मैं अपने मित्र के खाली कमरे में सोया, तो मुझे अपनी पत्नी और बच्चों की याद आने लगी l मैं अन्य शहरों में प्रचार करने के अवसरों का आनंद लेता हूँ, लेकिन मुझे सबसे अधिक आनंद घर पर रहने में आता है l
यीशु के जीवन का एक पहलु जिसे कभी-कभी अनदेखा कर दिया जाता है वह यह है कि उसकी कई विशेष घटनाएं सड़क/मार्ग पर घटित हुयीं l परमेश्वर के पुत्र ने बैतलहम में हमारे संसार में प्रवेश किया, जो उनके स्वर्गिक घर से बहुत दूर और उनके परिवार के गृहनगर नासरत से बहुत दूर था l जनगणना के लिए बैतलहम शहर में बड़ी संख्या में विस्तृत परिवार उमड़ रहे थे, इसलिए लूका का कहना है कि वहाँ एक भी अतिरिक्त कटैलिमा(katalyma), या “अतिथि कक्ष” उपलब्ध नहीं था (लूका 2:7) l
यीशु के जन्म के समय जो कमी थी वह उनकी मृत्यु पर दिखायी दी l जब यीशु अपने शिष्यों को यरूशलेम में ले गया, तो उसने पतरस और यूहन्ना से कहा कि वे उनके फसह के भोज की तैयारी करें l उसे घड़ा ले जाने वाले व्यक्ति का उसके घर तक पीछा करना था और मालिक से थेकटालिमा(thekatalyma)—अतिथि कक्ष, जहाँ यीशु मसीह और उनके शिष्य अंतिम भोज खा सकते थे, के लिए पूछना था(22:10-12) l वहाँ, उधार लिए गए स्थान में यीशु ने जिसे आज प्रभु भोज (Communion) कहा जाता है उसे स्थापित किया, जिसने उसके आसन्न क्रूसीकरण का पूर्वाभास दिया (पद.17-20) l
हम घर से प्यार करते हैं, लेकिन अगर हम यीशु की आत्मा के साथ यात्रा करते हैं, तो एक अतिथि कक्ष भी उसके साथ सहभागिता का स्थान हो सकता है l

जो अच्छा है उससे जुड़े रहो
जब पास्टर तिमोथी यात्रा के दौरान अपना उपदेशक कालर/पट्टा(preacher collar) पहनते हैं, तो उन्हें अक्सर अजनबियों द्वारा रोका जाता है l हवाई अड्डे पर लोग जब याजकीय/पुरोहिती पट्टी को उनके साधारण गहरे रंग के सूट के ऊपर देखते हैं तो कहते हैं, “कृपया मेरे लिए प्रार्थना कीजिये l” हाल ही की एक उड़ान में, एक महिला ने उन्हें देखकर उनकी सीट के निकट घुटनों के बल झुक गयी और विनती करते हुए बोली : “क्या आप पास्टर हैं? क्या आप मेरे लिए प्रार्थना करेंगे?’ और पास्टर टिमोथी ने प्रार्थना की l
यिर्मयाह का एक अंश इस बात पर प्रकाश डालता है कि हम क्यों मानते हैं कि परमेश्वर प्रार्थना सुनता है और उसका उत्तर देता है : परमेश्वर परवाह करता है! उन्होंने अपने प्रिय लेकिन पापी, निर्वासित लोगों को निश्चित किया, “जो कल्पनाएँ मैं तुम्हारे विषय करता हूँ उन्हें मैं जानता हूँ, वे हानि की नहीं, वरन् कुशल ही की हैं, और अंत में तुम्हारी आशा पूरी करूँगा”(29:11) l परमेश्वर ने ऐसे समय की आशा की थी जब वे उसके पास लौटेंगे l उसने कहा, “तब उस समय तुम मुझ को पुकारोगे और आकर मुझसे प्रार्थना करोगे और मैं तुम्हारी सुनूँगा l तुम मुझे ढूँढोगे और पाओगे भी”(पद.12-13) l
नबी ने बंदीगृह में रहते हुए प्रार्थना के बारे में यह और बहुत कुछ सीखा l परमेश्वर ने उसे निश्चय दिया, “मुझ से प्रार्थना कर और मैं तेरी सुनकर तुझे बड़ी-बड़ी और कठिन बातें बताऊंगा जिन्हें तू अभी नहीं समझता”(33:3) l
यीशु हमसे प्रार्थना करने का भी आग्रह करता है l उसने कहा, “तुम्हारा पिता तुम्हारे मांगने से पहले ही जानता है कि तुम्हारी क्या-क्या आवश्यकताएं हैं”(मत्ती 6:8) l इसलिए प्रार्थना में “मांगो,” ढूंढो,” और खटखटाओ”(7:7) l हमारे हर एक निवेदन हमें उत्तर देने वाले के निकट ले जाती है l हमें प्रार्थना में परमेश्वर के लिए अजनबी नहीं बनना है l वह हमें जानता है और हमसे सुनना चाहता है l हम अभी अपनी चिंताओं को उसके पास ले जा सकते हैं l

अपने शरणस्थान की ओर दौड़ना
जब मैं पेरू की एक अल्पकालिक मिशन यात्रा के दौरान सुसमाचार प्रचार कार्य पर थी, एक युवा ने मुझसे पैसे मांगे l सुरक्षा कारणों से, मेरी टीम को पैसे नहीं देने का निर्देश दिया गया था, तो मैं उसकी मदद कैसे कर सकती थी? तब मुझे प्रेरितों के काम 3 में लंगड़े आदमी के प्रति प्रेरित पतरस और यूहन्ना की प्रतिक्रिया याद आई l मैंने उसे समझाया कि मैं उसे पैसे नहीं दे सकती, लेकिन मैं उसके साथ परमेश्वर के प्रेम का सुसमाचार साझा कर सकती हूँ l जब उसने कहा कि वह एक अनाथ है, तो मैंने उससे कहा कि परमेश्वर उसका पिता बनना चाहता है l इससे उसकी आँखों में आंसू आ गए l मैंने सहायता करने के लिए उसे हमारे मेजबान(host) चर्च के एक सदस्य के साथ जोड़ा l
कभी-कभी हमारे शब्द अपर्याप्त लग सकते हैं, लेकिन जब हम दूसरों के साथ यीशु को साझा करते हैं तो पवित्र आत्मा हमें सशक्त बना सकता है l
जब पतरस और यूहन्ना मंदिर के प्रांगन में उस व्यक्ति से मिले, तो उन्हें पता चला कि मसीह को साझा करना अब तक का सबसे बड़ा उपहार था l “तब पतरस ने कहा, “चाँदी और सोना तो मेरे पास है नहीं, परन्तु जो मेरे पास है वह तुझे देता हूँ; यीशु मसीह नासरी के नाम से चल फिर”(पद.6) l उस दिन उस व्यक्ति को उद्धार और चंगाई मिली l परमेश्वर खोए हुए लोगों को अपनी ओर आकर्षित करने के लिए हमारा उपयोग करता रहता है l
जब हम इस क्रिसमस पर देने के लिए सही उपहार खोज रहे हैं, आइये याद रखें कि सच्चा उपहार यीशु को जानना और उसके द्वारा प्रदान किये जाने वाला शाश्वत उद्धार है l आइये हम लोगों को उद्धारकर्ता की ओर ले जाने के लिए परमेश्वर द्वारा उपयोग किये जाने का प्रयास जारी रखें l

भार हल्का करें
अस्पताल में यह एक लंबा दिन था l अभी भी उस बिमारी का कोई जवाब नहीं है जिसने एक प्रतिभाशाली उन्नीस वर्षीय युवक को पीड़ित किया l घर पहुँचकर परिवार को निराशा हुयी l उन्हें आश्चर्य हुआ, जब सीढ़ी पर एक अच्छी तरह से सजाया हुआ बक्सा रखा हुआ था, जिसके सामने यशायाह 43:2 छपा हुआ था l अन्दर, विभिन्न उत्साहजनक बाइबल पद थे जो मित्रों ने हाथ से लिखे थे l अगला एक घंटा पवित्रशास्त्र और परिवार के दोस्तों के विचार शील भाव से प्रोत्साहित करने में व्यतीत हुआ l
कठिन समय या पारिवारिक चुनौतियों से गुजर रहे लोग हमेशा हृदय को छू जाने वाले प्रोत्साहन का उपयोग कर सकते हैं l पवित्रशास्त्र(बाइबल)—या तो एक बड़ा भाग या सिर्फ एक पद—आपको, किसी मित्र या परिवार के सदस्य को प्रोत्साहित कर सकता है l यशायाह 43 छोटे-छोटे प्रोत्साहनों से भरा है—जो या तो व्यक्तिगत रूप से या पूर्णरूपेण प्राप्त हुआ हो l कुछ चुनिन्दा विचारों पर विचार करें : परमेश्वर तेरा “रचनेवाला,” “सृजनहार,” “तुझे छुड़ा लिया है,” और तुम्हें “नाम लेकर बुलाया है”(पद.1) l परमेश्वर तेरे “संग” रहेगा(पद.2), वह “इस्राएल का पवित्र [है]” और वह हमारा “उद्धारकर्ता” है(पद.3) l
जब आप परमेश्वर की प्रतिज्ञाओं पर विचार करते हैं, वे आपको प्रोत्साहित करें l और चूँकि वह आपको वह देता है जिसकी आपको ज़रूरत है, आप किसी और को प्रोत्साहित कर सकते हैं l पद का डिब्बा(verse box) की कीमत बहुत अधिक नहीं थी, लेकिन इसका प्रभाव अमूल्य था l पांच साल बाद भी, उनमें से कुछ पद कार्ड(verse cards) अभी भी उस परिवार द्वारा संजोए हुए हैं l

फास्ट-फूड प्रोत्साहन
मध्य एशिया में एक साथ पले-बढ़े बहीर(Baheer) और मेडेट(Medet) सबसे अच्छे मित्र थे l लेकिन जब बहीर यीशु में विश्वास करने लगा, तो सब कुछ बदल गया l मेडेट द्वारा सरकारी अधिकारियों को इसकी सूचना देने के बाद, बहीर को असहनीय यातना सहनी पड़ी l गार्ड गुर्राया, “यह मुँह फिर कभी यीशु का नाम नहीं बोलेगा l” बूरी तरह लहूलुहान होने के बावजूद, बहीर यह कहने में सफल रहा कि वे उसे मसीह के बारे में बोलना बन्द करवा सकते हैं, लेकिन वे “उसने मेरे दिल में जो किया है उसे कभी नहीं बदल सकते l”
वे शब्द मेडेट के मन में बने रहे l कुछ महीनों बाद, बीमारी और हानि का सामना करने के बाद, मेडेट बहीर को खोजने निकला, जो जेल से रिहा हो गया था l अपने घमण्ड से हटकर उसने अपने मित्र से उसे अपने यीशु से मिलवाने के लिए कहा l
मेडेट ने पवित्र आत्मा के दृढ़ विश्वास पर उसी तरह कार्य किया जैसे कि जो लोग पिन्तेकुस्त के पर्व पर पतरस के आसपास एकत्र हुए थे, जब उन्होंने परमेश्वर के अनुग्रह का प्रवाह देखा और मसीह के बारे में पतरस की साक्षी सुने तो उनके “हृदय छिद [गए थे]”(प्रेरितों के काम 2:37) l पतरस ने लोगों को मन फिराने और यीशु के नाम से बप्तिस्मा लेने के लिए बुलाया, और लगभग तीन हज़ार लोगों ने ऐसा किया l जिस प्रकार उन्होंने जीवन के अपने पुराने तरीकों को पीछे छोड़ दिया, उसी प्रकार मेडेट ने भी मन फिराया और उद्धारकर्ता का अनुसरण किया l
यीशु में नए जीवन का उपहार उन सभी के लिए उपलब्ध है जो उस पर विश्वास करते हैं l हमने जो कुछ भी किया है, जब हम उस पर भरोसा करते हैं तो हम अपने पापों की क्षमा का आनंद ले सकते हैं l