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परमेश्वर का प्रेम

1917 में, वित्तीय घाटे की असफलता से कैलिफ़ोर्निया का एक व्यवसायी, फ्रेडरिक लेहमन ने, “द लव ऑफ़ गॉड(The Love of God)” गीत के शब्द लिखे l उसकी प्रेरणा ने उसे पहले दो अंतरा लिखने के लिए प्रेरित किया, लेकिन वह तीसरे पर अटक गया l उसने एक कविता को याद किया जो वर्षों पहले खोजी गयी थी, जो एक जेल की दीवारों पर लिखी गयी थी l एक कैदी परमेश्वर के प्रेम के बारे में गहरी जागरूकता व्यक्त करते हुए, इसे वहां पत्थर पर कुरेद कर गया था l संयोग से वह कविता और लेहमन के भजन के छंद दोनों समान थे l उसने इसे अपना तीसरा अंतरा बनाया l 

ऐसा समय होता है जब हम लेहमन और जेल की कोठरी से कवि के समान कठिन नाकामयाबियों का सामना करते हैं l निराशा के समय, हम भजनकार दाऊद के शब्दों को प्रतिध्वनित करके बेहतर महसूस करते हैं और “[परमेश्वर के] पंखो तले शरण [लेते हैं]” (भजन 57:1) l अपनी परेशानियों के साथ “परमेश्वर को [पुकारना] (पद.2), उससे अपने  वर्तमान की आजमाइश और “सिंहों के बीच में” होने के अपने डर के बारे में बात करना ठीक है (पद.4) l हमें जल्द ही अतीत में परमेश्वर के प्रावधान की सच्चाई की याद आ जाती है, और दाऊद के साथ जुड़ जाते हैं जो कहता है, “मैं गाऊँगा वरन् कीर्तन करूँगा . . . मैं . . . पौ फटते ही जाग उठूँगा” (पद. 7-8) l 

“द लव ऑफ़ गॉड इज़ ग्रेटर फार(The Love of God is greater far),” यह गीत घोषणा करता है, और उसमें जोड़ता है “इट गोज़ बियॉन्ड द हाईयेस्ट स्टार(it goes beyond the highest star) l” यह वास्तव में हमारी सबसे बड़ी आवश्यकता के समय में है जब हमें गले लगाना है कि वास्तव में परमेश्वर का प्रेम कितना महान है—जो निस्संदेह “आकाशमंडल तक पहुँचता है” (पद.10) l 

छोटी दयालुता

एमांडा एक अतिथि नर्स के रूप में कार्य करती हैं जो कई नर्सिंग होम्स में जाती हैं—अक्सर अपनी ग्यारह वर्षीय बेटी रूबी को अपने साथ ले जाती है l कुछ करने की इच्छा से रूबी ने निवासियों से प्रश्न पूछना शुरू किया, “यदि आपके पास कोई तीन चीजें होतीं, तो आप क्या चाहते?” और उनके उत्तर अपने नोटबुक में दर्ज करती है l हैरानी की बात यह है कि उनकी कई इच्छाएँ छोटी-छोटी चीजों के लिए थीं जैसे —चिकन, चॉकलेट, पनीर, फल l इसलिए रूबी ने उनकी साधारण इच्छाओं को पूरा करने में मदद करने के लिए एक “गो फण्ड मी” (Go Fund Me) की स्थापना की l और वह उपहार देते समय गले भी लगाती है l वह कहती है, “यह आपको उन्नत करता है l यह वास्तव में ऐसा करता है l”

जब आप रूबी की तरह अनुकम्पा और दयालुता दिखाते हैं, तब हम अपने परमेश्वर को प्रतिबिंबित करते हैं जो “अनुग्रहकारी और दयालु . . . और अति करुणामय है” (भजन 145:8) l इसीलिए प्रेरित पौलुस हमसे आग्रह करता है, परमेश्वर के लोग होने कर कारण, “बड़ी करुणा, और भलाई, और दीनता, और नम्रता, और सहनशीलता धारण करो” (कुलुस्सियों 3:12) l इसलिए कि परमेश्वर ने हमलोगों पर बड़ी दया दिखाई है, हम स्वभाविक रूप से दूसरों के साथ उसकी दया साझा करने की इच्छा रखते हैं l और जब हम जानबूझकर ऐसा करते हैं, हम स्वयं उसे “पहन” लेते हैं l 

पौलुस आगे हमसे कहता है : “सब के ऊपर प्रेम को जो सिद्धता का कटिबंध है है बाँध लो” (पद.14) l और वह हमको स्मरण दिलाता है कि हमें “सब प्रभु यीशु के नाम से [करना है]” (पद.17), याद रखते हुए कि सब भलाई परमेश्वर की ओर से आती है l जब हम दूसरों के साथ दयालु होते हैं, हमारी आत्माएं उन्नत होती हैं l 

दोनों सत्य हैं

तीन दशकों के बाद, फेंग लुलु का अपने परिवार से मिलन हुआ l चीन में अपने घर के बाहर खेलते समय उसे बचपन में अपहृरण कर लिया गया था, लेकिन एक महिला समूह की मदद से, अंततः उसे ढूंढ लिया गया l इसलिए कि उसे बहुत ही बालपन (बचपन) में अपहृरण कर लिया गया था, फेंग लुलु को याद नहीं है l वह यह मानकर बड़ी हुयी कि उसे बेच दिया गया था क्योंकि उसके माता-पिता उस पर खर्च करने में असमर्थ थे, इसलिए सच्चाई जानने पर कई सवाल और भावनाएं सामने आयीं l 

जब युसूफ का अपने भाइयों से पुनःमिलन हुआ, तो यह संभव है कि उसने कुछ मुश्किल और उलझी हुई भावनाओं का अनुभव किया हो l उसके भाइयों ने उसे युवावस्था में मिस्र में गुलामी में बेच दिया था l कई पीड़ादायक घुमावदार मोड़ के बावजूद, परमेश्वर ने युसूफ को अधिकार के पद पर पहुँचाया l जब उसके भाई अकाल के समय अन्न खरीदने के लिए मिस्र आए, तो उन्होंने—अनजाने में—उसी से ही माँगा l 

युसूफ ने माना कि परमेश्वर ने उनके अत्याचार से भलाई उत्पन्न किया, यह कहते हुए कि उसने उसका उपयोग “तुम्हारे प्राणों [ को बचाने के लिए किया]” (उत्पत्ति 45:7) l इसके बाद भी युसूफ ने उसके प्रति उनके हानिकारक कार्यों को पुनः परिभाषित नहीं किया—उसने उन्हें स्पष्ट रूप से “[उसे] बेचने” (पद.5) का वर्णन किया l 

 कभी-कभी हम भावनात्मक संघर्ष को स्वीकार किए बिना, भलाइयों पर केन्द्रित होकर जो परमेश्वर उनसे उत्पन्न करता है उन कठिन परिस्थितियों पर अत्यधिक सकारात्मक घुमाव देने की कोशिश करते हैं l 

इस बात का ध्यान रखें कि किसी गलत को ऐसे ही अच्छा न कहें कि ईश्वर ने उससे भलाई उत्पन्न की थी: हम दर्द के गलत कारणों को पहचानते हुए भी उसमें से अच्छाई लाने के लिए उसकी तलाश कर सकते हैं l दोनों ही सत्य है l 

स्त्रोत

यह 1854 का समय था, और लन्दन में कोई चीज़ हज़ारों लोगों की जान ले रही थी l यह ख़राब हवा होगी, लोगों ने सोचा l और वास्तव में, जैसे ही अत्यधिक गंदगी से भरी हुयी थेम्स नदी पर बेमौसम गर्मी ने प्रभाव डाला, बदबू इतनी बढ़ गयी कि वह “द ग्रेट स्टिंक(The Great Stink) के नाम से जाना जाने लगा l 

लेकिन सबसे बुरी समस्या हवा की नहीं थी l डॉ. जॉन स्नो के शोध से पता चलता है कि दूषित पानी हैज़ा (कॉलरा/cholera) की महामारी का कारण था l 

हम मनुष्य लम्बे समय से एक और संकट से परिचित हैं—एक जिसकी बदबू ऊँचे स्वर्ग तक पहुँचती है l हम एक टूटे संसार में रहते हैं—और हम इस समस्या की गलत पहचान करने की ओर प्रवृत होते हैं, समस्या की जगह इसके लक्षणों का इलाज करते हैं l बुद्धिमान सामाजिक कार्यक्रम और नीतियाँ कुछ अच्छा करती हैं, लेकिन वे समाज की बुराइयों के मूल कारण को रोकने में लाचार हैं—वह है हमारा पापी हृदय!

जब यीशु ने कहा, “ऐसी कोई वस्तु नहीं जो मनुष्य में बाहर से समाकर उसे अशुद्ध करे,”वह शारीरिक बिमारियों का सन्दर्भ नहीं दे रहा था (मरकुस 7:15) l बल्कि, वह हममें से प्रत्येक की आध्यात्मिक स्थिति को प्रकट कर रहा था l हमारे भीतर छिपी हुयी बुराइयों की एक सूची बताते हुए (पद.21-22), उसने कहा “जो वस्तुएँ मनुष्य के भीतर से निकलती हैं, वे ही उसे अशुद्ध करती हैं,” (पद.15) l 

“देख, मैं अधर्म के साथ उत्पन्न हुआ,” दाऊद ने लिखा (भजन 51:5) l उसका विलाप ऐसा है जिसे हम सब आवाज़ दे सकते हैं l हम सब आरम्भ से ही टूटे हुए हैं l इसलिय दाऊद प्रार्थना करता है, “हे परमेश्वर, मेरे अन्दर शुद्ध मन उत्पन्न कर” (पद.10) l प्रतिदिन, हमें यीशु की आत्मा द्वारा सृजित एक नया हृदय चाहिए l 

लक्षणों का इलाज करने के बदले, हम यीशु को स्त्रोत को पवित्र करने दें l