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राज्य के आकार का कार्यस्थल

विक्टोरियन इंग्लैंड की फ़ैक्टरियाँ दुखद और कठिन परिस्तिथियों के स्थान थी। जहाँ कई जाने जाती थी, और मज़दूर अक्सर गरीबी में रहते थे। जॉर्ज कैडबरी ने पूछा, “एक एक श्रमिक व्यक् एक आदर्श चीज़ को कैसे विकसित कर सकता है, जब उसका खुद का घर एक झोपड़ी हो?” और इसलिए उन्होंने अपने विस्तारित चॉकलेट व्यवसाय के लिए एक नई तरह की फैक्ट्री बनाई, जिससे उनके मज़दूरों को लाभ हुआ। इसका नतीजा था बॉर्नविल - एक गांव जहाँ तीन सौ से अधिक घर थे जिसमें कैडबरी के मज़दूरों और उनके परिवारों के लिए खेल के मैदान, स्कूल और चर्च थे। मज़दूरों को अच्छा वेतन दिया गया और चिकित्सा स्थलों की सुविधा भी दी गयी, यह सब इसलिए था क्योंकि कैडबरी का विश्वास यीशु मसीह पर था।

यीशु हमें परमेश्वर की इच्छा “जैसे स्वर्ग में पूरी होती है वैसे पृथ्वी पर” पूरी करने के लिए प्रार्थना करना सिखाते हैं (मत्ती 6:10)। यह प्रार्थना हमें कल्पना करने में मदद कर सकती है, जैसा कि कैडबरी की, कि परमेश्वर के राज्य में हमारे कार्यस्थल कैसे होंगे, जहां हमारी “प्रतिदिन की रोटी” कमाई जाती है और हमारे “कर्ज़दारों” को माफ कर दिया जाता है (पद 11-12)। एक काम करनेवाले के रूप में, इसका अर्थ है “पूरे मन से काम करना . . प्रभु के लिये” (कुलुस्सियों 3:23)। एक स्वामी के रूप में, इसका अर्थ है कर्मचारियों को वह देना जो “यायपूर्ण और सही” हो (4:1)। हमारी भूमिका जो भी हो, चाहे वेतन कमाने वाले हो या स्वयंसेवी हो, इसका मतलब उन लोगों की भलाई के लिए प्रयास करना है जिनकी हम सेवा करते हैं।

जॉर्ज कैडबरी की तरह, आइए कल्पना करें कि अगर परमेश्वर हमारे पड़ोस और कार्यस्थलों को चलाने वाला हो तो चीजें कैसे भिन्न होंगी। क्योंकि जहाँ वो होता है, वहाँ लोग फलते-फूलते हैं। शेरिडेन वोयसी

 

पुनःस्मरण अभ्यास

क्या आप के साथ कभी ऐसा हुआ कि आप कोई कहानी सुना रहे हो और फिर बीच में रुक गए, क्योंकि किसी नाम या तारीख पर अटक गए जो आपको याद नहीं आ रही हो। हम अक्सर इसे उम्र के हिसाब से तय करते हैं, यह मानते हुए कि समय के साथ याददाश्त धुंधली हो जाती है। लेकिन हाल के अध्ययन अब इस दृष्टिकोण का समर्थन नहीं करते। वास्तव में, वे संकेत देते हैं कि हमारी समस्या याददाश्त नहीं है; बल् यह उन यादों को पुनः प्राप्त करने की हमारी क्षमता होती हैं। किसी प्रकार के नियमित अभ्यास के बिना, बीती चीजों को याद रखना कठिन हो जाता है।

कई तरीकों में से एक है जो पुनर्प्राप्ति क्षमता को बेहतर बना सकता है, कि नियमित रूप से निर्धारित क्रियाओं या अनुभवों द्वारा किसी बीती हुई चीज को स्मरण करें। हमारे सृष्टिकर्ता परमेश्वर यह जानते थे, इसलिए उन्होंने इस्राएलियों को सप्ताह में एक दिन आराधना और विश्राम के लिए अलग रखने का निर्देश दिया था। इस तरह की राहत से मिलने वाले शारीरिक विश्राम के अलावा, हमें मानसिक प्रशिक्षण का अवसर मिलता है, यह याद करने के लिए कि “छह दिनों में प्रभु ने आकाश और पृथ्वी, समुद्र और जो कुछ उनमें है, बनाया” (निर्गमन 20:11)। यह हमें यह याद रखने में मदद करता है कि एक परमेश्वर है, और वह हम नहीं हैं।

अपने जीवन की भागदौड़ में, हम कभी-कभी उन बातों को याद करने में अपनी पकड़ खो देते हैं जो परमेश्वर ने हमारे लिए और दूसरों के लिए की है। हम भूल जाते हैं कि कौन हमारे जीवन पर नज़दीकी से नजर रखता है और जब हम भारीपन और अकेलापन महसूस करते हैं तो कौन अपनी उपस्थिति का वादा करता है। हमारी दिनचर्या से एक अंतराल (ब्रेक) उस आवश्यक “पुनःस्मरण अभ्यास” के लिए एक अवसर प्रदान करता है - जहाँ हम अपनी इच्छा से यह निर्णय ले कि हम थोड़ा रुककर परमेश्वर को याद करें और “उसके सभी उपकारों को न भूले” (भजन संहिता 103:2)। जॉन ब्लेज़

 

आशा के रंग

11 सितंबर, 2023 को - संयुक्त राज्य अमेरिका के खिलाफ हुए हमलों की बाईसवीं वर्षगांठ के दिन- एक दोहरे बेहद सुंदर इंद्रधनुष ने न्यूयॉर्क शहर के ऊपर आसमान को सुशोभित किया। यह शहर जो पूर्व ट्विन टावर्स का घर था, इसे हमलों में सबसे अधिक नुकसान हुआ। दो दशक से भी अधिक समय के बाद, दोहरा इंद्रधनुष उन लोगों के लिए आशा और चंगाई की भावना लेकर आया जिन्होंने इसे साक्षात् देखा था। उस क्षण की एक वीडियो क्लिप में मानों इंद्रधनुषों को वर्ल्ड ट्रेड सेंटर ही के स्थल से निकलते हुए कैद किया गया है।

नूह के दिनों से ही आकाश में इंद्रधनुष परमेश्वर की विश्वासयोग्यता का आश्वासन लेकर आते हैं। पाप पर परमेश्वर के न्याय को यान में रखते हुए, जिसके परिणामस्वरूप अकल्पनीय विनाश हुआ, उन्होंने रंगीन प्रकाशस्तंभ न को “[स्वयं] और सभी जीवित प्राणियों के बीच अनन्त वाचा” के दृश्य अनुस्मारक के रूप में स्थापित किया। (उत्पत्ति 9:16)। बारिश के चालीस अंधेरे दिनों और जलप्रलय के महीनों (7:17-24) के बाद, कोई केवल कल्पना ही कर सकता है कि इंद्रधनुष - “वाचा का संकेत” - नूह और उसके परिवार के लिए कितना स्वागत योग्य रहा होगा (9:12-13) । यह परमेश्वर की विश्वासयोग्यता को याद दिलाने वाला था कि “पृथ्वी को नष्ट करने के लिए फिर कभी जलप्रलय न होगा” (पद 11)

जब हम अंधकारमय दिनों और दुखद नुकसान का सामना करते हैं - चाहे प्राकृतिक आपदा के कारण, शारीरिक या भावनात्मक दर्द के कारण, या बीमारी की दुर्दशा के कारण - तब आइए इसके बीच में आशा के लिए परमेश्वर की ओर देखें। भले ही हम उन क्षणों में उनके इंद्रधनुष की झलक न देख पाएं, फिर भी हम उनके वादों के प्रति उनकी विश्वासयोग्यता से आश्वस्त हो सकते हैं। कर्स्टन होल्म्बर्ग

 

आत्मिक राजघराना

जब अमेरिका में रॉकविल,मेरिलैंड के निवासी, जे.स्पाईट ने अपना डी.एन.ए.परीक्षण कराया, तो उन्हें जो परिणाम मिले, उसके लिए उन्हें कोई भी चीज़ तैयार नहीं कर सकती थी। एक बहुत बड़ी आश्चर्य कर देने वाली बात पता चली—वह पश्चिमी अफ़्रीकी देश बेनिन के राजकुमार थे! जल्द ही वह एक विमान में बैठे और देश का दौरा किया। जब वह वहाँ पहुंचे, तो शाही परिवार ने उनका स्वागत किया और घर वापसी पर जश्न मनाया गया - नाच, गाना, झंडे फहराना और एक परेड भी हुई।

यीशु, परमेश्वर की खुशखबरी के एलान के रूप में पृथ्वी पर आये। वह अपनी प्रजा, इस्राएलियों के पास गए, ताकि उन्हें सुसमाचार दे सके और उन्हें अंधकार से बाहर निकलने का रास्ता दिखा सके। कई लोगों ने बेपरवाही के साथ संदेश लिया, “सच्ची ज्योति” (यूहन्ना 1:9) को अस्वीकार कर दिया और उन्हें मसीहा के रूप में स्वीकार करने से इनकार किया (पद 11)। लेकिन सभी अविश्वासी और बेपरवाह नहीं थे। कुछ लोगों ने ख़ुशी और विनम्रता से मसीह के निमंत्रण को स्वीकार किया, यीशु को पाप के लिए परमेश्वर के अंतिम बलिदान के रूप में स्वीकार करके, उनके नाम पर विश्वास किया। और इन शेष विश्वासयोग्य लोगों के लिए एक आश्चर्य इंतज़ार कर रहा था। उसने “उन्हें परमेश्वर की संतान होने का अधिकार दिया” (पद 12) - नए आत्मिक जन्म द्वारा उसके राजकीय संतान बन जाए।

जब हम पाप और अंधकार से फिरते हैं, यीशु को स्वीकार करते हैं, और उनके नाम पर विश्वास करते हैं, तो हम जान पाते है कि हम परमेश्वर की संतान हैं, जिन्हें उनके परिवार में राजघराने के रूप में अपनाया गया है। राजा की संतान होने की ज़िम्मेदारीयों को निभाते हुए इस आशीष का आनंद लें। मार्विन विलियम्स