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यह वह है जिसे आप जानते हैं

2019 की शुरुआत में, चार्ली वेंडरमीयर की अस्सी की उम्र में मृत्यु हो गई l राष्ट्रीय रेडियो प्रसारण चिल्ड्रन बाइबल आवर(Children’s Bible Hour) के इस होस्ट/प्रस्तुतकर्ता को कई दशकों तक,  हजारों हजार लोग अंकल चार्ली के रूप में जानते थे l अंकल चार्ली की मृत्यु से एक दिन पहले, उन्होंने एक अच्छे दोस्त से कहा, "यह वह नहीं है की आप क्या जानते हैं,  पर यह की आप किसे जानते हैं" l बेशक,  मैं यीशु मसीह के बारे में बात कर रहा हूँ l”

जैसे ​​कि जब उन्होंने अपने जीवन के अंत का सामना किया,  तो अंकल चार्ली यीशु के विषय बात करने से और लोगों का उसे अपना उद्धारकर्ता स्वीकार करने की ज़रूरत से खुद को रोक नहीं सके l

प्रेरित पौलुस यीशु को जानना ही सबसे महत्वपूर्ण कार्य समझा : “मैं अपने प्रभु मसीह यीशु की पहिचान की उत्तमता के कारण सब बातों को हानि समझता हूँ l जिसके कारण में ने सब वस्तुओं की हानि उठाई, और उन्हें कूड़ा समझता हूँ, जिससे मैं मसीह को प्राप्त करूं” (फिलिप्पियों 3:8) l और हम यीशु को कैसे जान सकते है? “यदि तू अपने मुंह से यीशु को प्रभु जानकार अंगीकार करे, और अपने मन से विश्वास करे कि परमेश्वर ने उसे मरे हुओं में से जिलाया, तो तू निश्चय उद्धार पाएगा” (रोमियों 10:9) l

हम यीशु के बारे में तथ्यों को जान सकते हैं,  हम चर्च के बारे में सब कुछ जान सकते हैं,  और हम बाइबल से भी परिचित हो सकते हैं l  लेकिन यीशु को उद्धारकर्ता के रूप में जानने का एकमात्र तरीका उसके उद्धार के मुफ्त उपहार को स्वीकार करना है l यही तो वह है जिसे हमें जानना है l

अग्नि द्वारा उर्जित

जब दो अग्निशामक,  थके हुए और कालिख लगे हुए,  नाश्ते के लिए एक रेस्तरां में रुके,  तो वेटर ने समाचार से उन पुरुषों को पहचान लिया और उसे एहसास हुआ कि वे रात को गोदाम की आग से जूझ रहे थे l अपना आभार दिखाने के लिए, उसने अपने बिल पर एक नोट लिखा, “आपका नाश्ता आज मेरी ओर से है l आपको धन्यवाद. . .  दूसरों की सेवा करने और उन स्थानों में जाने के लिए जिनसे सभी भागते हैं . . . अग्नि द्वारा उर्जित और साहस द्वारा प्रेरित, आप कितने बड़े उदाहरण है l”

पुराने नियम में,  हम तीन युवकों : शद्रक,  मेशक, और अबेदनगो के कार्यों में साहस का एक उदाहरण देखते हैं (दानिय्येल 3) l बेबीलोन के राजा की प्रतिमा को नमन करने के हुक्म का पालन करने के बजाय,  इन युवकों ने साहसपूर्वक अपने इनकार के द्वारा परमेश्वर के लिए अपना प्यार दिखाया l उनका दंड उन्हें धधकते भट्टी में फेंकना था l फिर भी वे लोग पीछे नहीं हटे : “हमारा परमेश्वर, जिसकी हम उपासना करते हैं वह हम को उस धधकते हुए भट्ठे की आग से बचाने की शक्ति रखता है; वरन् हे राजा, वह हमें तेरे हाथ से भी छुड़ा सकता है l परन्तु यदि नहीं, तो [भी] . . . हम लोग तेरे देवता की उपासना नहीं करेंगे, और न तेरी कड़ी कराई हुई सोने की मूरत को दण्डवत् करेंगे” (पद.17-18) l

परमेश्वर ने उन्हें सचमुच बचाया और यहाँ तक ​​कि उनके साथ आग में चला भी (पद. 25–27) l आज हमारे अग्निमय आजमाइशों और परेशानियों में,  हमें भी यह निश्चय है कि परमेश्वर  हमारे साथ है l वह सक्षम है l

यीशु के अलोकप्रिय विचार

पंद्रह वर्षों तक,  माइक बर्डन ने अपने छोटे से शहर में स्मरणीय वस्तुओं की दुकान में घृणा से भरी बैठकें कीं l लेकिन 2012 में जब उसकी पत्नी ने उसकी भागीदारी पर सवाल उठाना शुरू किया,  तो उनका हृदय नरम हो गया l उसने महसूस किया कि उसके जातिवादी विचार कितने गलत थे और वह अब वह व्यक्ति नहीं होना चाहता था l उग्रवादी समूह ने उसके परिवार को उस अपार्टमेंट से बाहर निकाल कर बदला लिया जो वे उनमें से एक सदस्य से किराये पर ले रखा था l

वह मदद के लिए कहाँ गया?  हैरानी की बात है,  वह एक स्थानीय काले पास्टर के पास गया, जिसके साथ उसका संघर्ष हुआ था l पास्टर और उनके चर्च ने कुछ समय के लिए माइक के परिवार के लिए आवास और किराने के सामान का प्रबंध किया l जब उनसे पूछा गया कि वह मदद करने के लिए क्यों सहमत थे, तो पास्टर कैनेडी ने समझाया, “यीशु मसीह ने कुछ बहुत ही अलोकप्रिय काम किये l जब मदद करने का समय आता है,  तो आप वही करते हैं जो परमेश्वर  चाहता है कि आप करें l” बाद में माइक ने कैनेडी के चर्च में बोला और नफरत फैलाने में अपने हिस्से के लिए अश्वेत समुदाय से माफी मांगी l

यीशु ने पहाड़ी उपदेश में कुछ अलोकप्रिय विचारों की शिक्षा दी : “जो कोई तुझ से मांगे, उसे दे ... अपने बैरियों से प्रेम रखो और अपने सतानेवालों के लिए प्रार्थना करो” (मत्ती 5:42,44) l यह सोचने का उल्टा तरीका है परमेश्वर जिसका अनुसरण करने के लिए हमें बुलाता है l यद्यपि यह कमजोरी की तरह दिखता है,  यह वास्तव में परमेश्वर की सामर्थ्य को कार्य्वान्वित करना है l

वह जो हमें सिखाता है ही वह है जो यह उल्टा जीवन के लिए जैसे वह हमसे मांग करता है हमें जीने की शक्ति देता है l

क्या नहीं देखा जा सकता?

इतिहासकारों का कहना है कि परमाणु युग 16 जुलाई, 1945 को शुरू हुआ था,  जब न्यू मैक्सिको के दूरदराज के रेगिस्तान में पहला परमाणु आयुध विस्फोटित किया गया था l लेकिन यूनानी दार्शनिक डेमोक्रिटस (सी. 460–370 ई.पू.) किसी भी चीज़ के आविष्कार से बहुत पहले परमाणु के अस्तित्व और शक्ति की खोज कर रहा था जो कायनात/सृष्टि के इन छोटे निर्माण खण्डों को भी देख सकता था l डेमोक्रिटस जितना देख सकता था उससे अधिक समझता था और उसका परिणाम परमाणु सिद्धांत था l

पवित्रशास्त्र हमें बताता है कि विश्वास का सार जो नहीं देखा जा सकता उसे मजबूती से पकड़ना है l इब्रानियों 11:1 पुष्टि करता है, “अब विश्वास आशा की हुई वस्तुओं का निश्चय, और अनदेखी वस्तुओं का प्रमाण है l” यह अभिलाषी या सकारात्मक सोच का परिणाम नहीं है l यह उस परमेश्वर में विश्वास है जिसे हम देख नहीं सकते हैं लेकिन जिसका अस्तित्व कायनात/सृष्टि में सबसे सच्ची वास्तविकता है l उसकी वास्तविकता उसके रचनात्मक कार्यों में प्रदर्शित किया गया है (भजन 19:1) और उसका अदृश्य चरित्र और तरीके उसके पुत्र, यीशु  में दिखाई देता है, जो हमें पिता का प्यार दिखाने के लिए आया था (यूहन्ना 1:18) l

यह वह परमेश्वर है जिसमें हम “जीवित रहते, और चलते-फिरते, और स्थिर रहते हैं,” जैसे प्रेरित पौलुस कहता है (प्रेरितों 17:28) l उसी तरह, “हम रूप को देखकर नहीं, पर विश्वास से चलते हैं (2 कुरिन्थियों 5: 7) l फिर भी हम अकेले नहीं चलते है l अनदेखा परमेश्वर हर कदम पर हमारे साथ चलता है l