
परमेश्वर और बहुमूल्य है
पिछले दिनों में यीशु के विश्वासियों द्वारा आहात होने के बाद, मेरी माँ ने क्रोध में जवाब दिया जब मैंने अपना जीवन उसे समर्पित किया l “तो, अब आप मेरा न्याय करने जा रहीं हैं?” मैं ऐसा नहीं सोचती हूँ l” उन्होंने फोन रख दिया और पूरे एक वर्ष तक मुझसे बात करने से मना कर दिया l मैं दुखित हुयी, लेकिन अंततः अहसास हुआ कि परमेश्वर के साथ एक रिश्ता मेरे सबसे कीमती रिश्तों में से एक से भी अधिक महत्वपर्ण था l मैंने हर बार उनके लिए प्रार्थना की जब उन्होंने मेरे कॉल्स को अस्वीकार किया और परमेश्वर से आग्रह किया कि मेरी माँ से अधिक प्रेम करने में वह मेरी मदद करे l
अंततः, हमने सुलह कर ली l कुछ महीने बाद उन्होंने कहा, “तुम बदल गयी हो l मुझे लगता है कि मैं यीशु के बारे में अधिक सुनने के लिए तैयार हूँ l” इसके तुरंत बाद, उन्होंने मसीह को स्वीकार कर लिया और अपने बाकी दिनों में परमेश्वर और दूसरों से प्रेम किया l
उस व्यक्ति की तरह, जो यीशु के पास यह पूछने गया था कि वह अनंत जीवन कैसे प्राप्त कर सकता था, लेकिन उदास होकर लौट गया क्योंकि वह अपनी धन से अलग नहीं होना चाहता था (मरकुस 10:17-22), मैंने उसका अनुसरण करने के लिए सब कुछ त्यागने के विचार के साथ संघर्ष किया l
चीजों या लोगों को त्यागना सरल नहीं है जिन पर हम परमेश्वर से अधिक भरोसा रखने का विचार रखते हैं (पद.23-25) l लेकिन हम इस संसार में जो कुछ भी त्यागते हैं या खो देते हैं उसका मूल्य यीशु के साथ अनंत जीवन के उपहार से अधिक नहीं होगा l हमारे प्रेमी परमेश्वर ने सभी लोगों को बचाने के लिए स्वेच्छा से खुद को बलिदान किया l वह हमें शांति से ढकता है और हमें अनमोल और सतत प्यार से प्रेम करता है l

अत्यधिक विशेषता होना
फिल्म देखनेवालों ने एमिली ब्लंट (एक अमेरिकी अभिनेत्री) की खूबसूरत आवाज़ को मैरी पॉपिंस रिटर्न्स(Mary Poppins Returns) में मुख्य कलाकार की भूमिका में सुना l आश्चर्यजनक रूप से, उसके विवाह के चार साल बीतने पर ही उसके पति को उसके मुखर प्रतिभा का पता चला l एक साक्षात्कार में, उसने पहली बार उसको गाते हुए सुनकर, यह सोचते हुए अपने आश्चर्य का खुलासा किया, “तुम मुझे यह कब बताने जा रही थी?”
रिश्तों में हमें अक्सर नयी, कभी-कभी अप्रत्याशित, बारीकियों की जानकारी मिलती है, जो हमें आश्चर्यचकित करते हैं l मरकुस के सुसमाचार में, मसीह के शिष्यों ने आरम्भ में यीशु की अधूरी तस्वीर के साथ शुरुआत की और संघर्ष किया कि वह कौन है l हालाँकि, गलील के झील में आमना-सामना होने पर,यीशु से अपने को और अधिक प्रकट किया – इस समय प्रकृति की शक्ति के ऊपर उसकी सामर्थ्य का विस्तार l
5,000 से अधिक लोगों की भीड़ को खिलाने के बाद, यीशु ने अपने शिष्यों को गलील के झील में भेजा, जहाँ वे एक भयंकर अंधी में फंस गए l भोर होने से ठीक पहले, शिष्य किसी को पानी पर चलते देख कर घबरा गए l मसीह की परिचित आवाज़ ने शांति के शब्द बोले, “ढाढ़स बांधो : मैं हूँ; डरो मत!” (मरकुस 6:50) l उसके बाद उसने उग्र आंधी को शांत किया l ऐसी महान शक्ति को देखने के बाद, शिष्य “आश्चर्य करने लगे” (6”51) जब वे मसीह की सामर्थ्य के इस अनुभव को पूरी तरह से समझने में संघर्ष करते रहे l
जब हम अपने जीवन की आँधियों के विषय यीशु और उसकी शक्ति का अनुभव करते हैं, तो हम एक और पूरी तस्वीर प्राप्त करते हैं कि वह कौन है l और हम चकित होते हैं l

दुःख में सामर्थ्य
1948 में, एक भूमिगत चर्च के पादरी, हार्लेन पोपोव को उनके घर से “थोड़ी पूछताछ” के लिए ले जाया गया l दो सप्ताह बाद, उससे चौबीसों घंटे पूछताछ की गयी और दस दिनों तक भोजन नहीं दिया गया l हर बार उसने जासूस होने से इनकार किया, तो उसे पीटा गया l पोपोव न केवल अपने कठोर बर्ताव से बचे, बल्कि अपने साथी कैदियों को भी यीशु के पास ले आए l अंत में, ग्यारह साल बाद, उन्हें रिहा कर दिया गया और उन्होंने अपने विश्वास को साझा करना जारी रखा जब तक कि, दो साल बाद, वह उस देश को छोड़ कर पुनः अपने परिवार से जुड़ नहीं गए l वे आनेवाले वषों में बंद देशों में बाइबल वितरित करने हेतु प्रचार करते रहे और धन इकठ्ठा करते रहे l
यूगों से यीशु में अनगिनत विश्वासियों की तरह, पोपोव को उनके विश्वास के कारण सताया गया था l मसीह, अपनी खुद की यातना और मृत्यु और उसके अनुयायियों के समक्ष बाद में आने वाले उत्पीडन से बहुत पहले कहा था, “धन्य हैं वे, जो धर्म के कारण सताए जाते हैं, क्योंकि स्वर्ग का राज्य उन्हीं का है” (मत्ती 5:10) l वह आगे कहता है, “धन्य हो तुम जब मनुष्य मेरे कारण तुम्हारी निंदा करें, और सताएं और झूठ बोल बोलकर तुम्हारे विरोध में सब प्रकार की बुरी बातें कहें” (पद.11) l
“धन्य”? यीशु का क्या मतलब हो सकता है? वह उसके साथ रिश्ते में मिलनेवाली पूर्णता, आनंद और आराम का जिक्र कर रहा था (पद. 4, 8-10) l पोपोव दृढ़ रहा क्योंकि उसने महसूस किया कि परमेश्वर की उपस्थिति उसके कष्ट में भी शक्ति प्रदान कर रही थी l जब हम परमेश्वर के साथ चलते हैं, तो हमारी परिस्थितिचाहे कुछ भी हो, हम भी उसकी शांति का अनुभव कर सकते हैं l वह हमारे साथ है l

वह जो बचाता है
डेस्मंड को “सबसे बहादुर व्यक्तिजो जीवित है” संबोधित किया गया, लेकिन वह वो नहीं था जो दूसरे अपेक्षा करते थे l वह एक सैनिक था जिसने बन्दुक चलाने से माना कर दिया l एक डॉक्टर के रूप में, उसने एक ही लड़ाई में पचहत्तर घायल सैनिकों को हानि से बचाया, जिनमें से कुछ ने एक बार उन्हें कायर कहा और उनके विश्वास के लिए उनका उपहास किया l भरी गोलाबारी में भागते हुए, इस सैनिक ने लगातार प्रार्थना की, “परमेश्वर, कृपया मुझे एक और मदद करें l” उनकी वीरता के लिए उन्हें मैडल ऑफ़ ऑनर से सम्मानित किया गया l
शास्त्र हमें बताता है कि यीशु को बहुत गलत समझा गया था l जकर्याह नबी द्वारा नबूवत किया गया था (9:9), कि एक दिन, यीशु एक गधे पर सवार होकर यरूशलेम में प्रवेश किया और भीड़ ने “होशाना!” चिलाते हुए डालियों को लहराया (प्रशंसा का एक विस्म्योदगार जिसका अर्थ है “बचाओ!”) l भजन 118:26 का सन्दर्भ देते हुए, वे चिल्लाए : “धन्य है वह जो प्रभु के नाम से आता है!” (यूहन्ना 12:13) l लेकिन उस भजन में दूसरा पद “यज्ञपशु को वेदी के सींगों से रस्सियों से बांधो” अर्थात् एक बलिदान लाने की बात करता है (भजन 118:27) l जबकि यूहन्ना 12 में भीड़ एक ऐसे सांसारिक राजा की उम्मीद लगायी थी जो उनको रोमी शासन से स्वतंत्र करेगा, लेकिन यीशु उससे कहीं अधिक था l वह राजाओं का राजा था और हमारा बलिदान – देह में परमेश्वर, स्वेच्छा से हमें हमारे पापों से बचाने के लिए क्रूस को गले लगाने वाला – एक उद्देश्य जिसकी नबूवत सदियों पूर्व की गयी थी l
यूहन्ना लिखता है, “उसके चेले ये बातें पहले न समझे थे l” केवल बाद में “उनको स्मरण आया कि ये बातें उसके विषय में लिखी हुयी थीं” (यूहन्ना 12:16) l उसके वचन से आलोकित, परमेश्वर के शाश्वत उद्देश्य स्पष्ट हो गए l वह हमें एक शक्तिशाली उद्धारकर्ता भेजने के लिए पर्याप्त प्यार करता है!
