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फिर . . . प्रार्थना करने का समय

मैं अपने पड़ोसी मिरियम और उसकी छोटी लड़की एलिज़बेथ की ओर हाथ हिलाते हुए अपनी कार को अपने घर के आगे सड़क पर बढ़ाया l इन वर्षों में, एलिज़बेथ वादा किये गए “कुछ मिनटों” की तुलना में लम्बे समय तक चलने वाली हमारी सहज चैट की आदि हो गयी थी और प्रार्थना सभाओं में भाग लेने लगी थी l वह अपने सामने के अहाते के बीच में लगे हुए पेड़ पर चढ़ गयी, एक डाली से अपने पैरों को हिलाने लगी, और व्यस्त हो गयी जब उसकी माँ और मैं बातचीत करते रहे l कुछ समय के बाद, एलिज़बेथ अपनी डाली से नीचे कूदकर  वहाँ आ गयी जहाँ हम दोनों खड़े थे l वह हमारे हाथों को पकड़कर, मुस्कुराई और लगभग गाने लगी, फिर . . . प्रार्थना करने का समय है l” छोटी उम्र में भी, एलिज़बेथ समझने लगी थी कि हमारी मित्रता में प्रार्थना कितना प्रमुख था l 

विश्वासियों को “प्रभु में और उसकी शक्ति के प्रभाव में बलवंत” बनने के लिए उत्साहित करने के बाद (इफिसियों 6:10), प्रेरित पौलुस ने निरंतर प्रार्थना की महत्वपूर्ण भूमिका पर विशेष अंतर्दृष्टि प्रदान की l उसने उस आवश्यक हथियारबंदी का वर्णन किया जिसकी ज़रूरत परमेश्वर के लोगों को प्रभु के साथ उनके आत्मिक राह में चाहिए, जो अपनी सच्चाई में सुरक्षा, विवेक और भरोसा देता है (पद.11-17) l हालाँकि, प्रेरित ने जोर देकर कहा कि परमेश्वर प्रदत्त यह सामर्थ्य प्रार्थना के जीवन-दायक उपहार में संकल्पित तन्मयता से बढ़ता है (पद.18-20) l 

परमेश्वर हमारी चिंताओं के विषय सुनता है और फ़िक्र करता है, चाहे उनके विषय दृढ़ता से बोली जाए, सिसकते हुए कहा जाए, या एक दुखते हुए हृदय में छिपा कर रखा जाए l वह सदा हमें अपनी सामर्थ्य में शक्तिशाली बनाने के तैयार रहता है, जब वह वह हमें बार-बार प्रार्थना करने को आमंत्रित करता है l

घंटी

जॉनसन ने बचपन से एक नौसेना कमांडो बनने का सपना देखा था – एक महत्वकांक्षा जिसने वर्षों तक शारीरिक अनुशासन और आत्म-बलिदान का नेतृत्व किया l अंततः उसने ताकत और धीरज के भीषण परीक्षणों का सामना किया, जिसमें प्रशिक्षुओं द्वारा संदर्भित “नरक सप्ताह” भी शामिल था l 

जॉनसन शारीरिक रूप से थकानेवाले प्रशिक्षण को पूरा करने में असमर्थ रहा, और कमांडर और अन्य प्रशिक्षुओं को कार्यक्रम छोड़ने के अपने चुनाव के विषय सूचित करने के लिए अनिच्छा से एक घंटी बजा दी l ज्यादातर के लिए, यह एक विफलता की तरह महसूस होता l लेकिन अत्यधिक निराशा के बावजूद, जॉनसन ने बाद में अपने सैन्य विफलता को अपने जीवन के काम की तैयारी के रूप में देख पाया l  

प्रेरित पतरस ने असफलता के अपने रूप का अनुभव किया l उसने साहसपूर्वक यह घोषणा की कि वह जेल या मृत्यु तक भी यीशु के प्रति वफादार रहेगा (लूका 22:33) l फिर भी बाद में वह फूट-फूट कर रोने लगा जब उसने इनकार किया कि वह यीशु को जानता था (60-62)  l लेकिन परमेश्वर के पास उसकी असफलता से परे योजनाएँ थीं l पतरस के इनकार करने से पहले, यीशु ने उसे सूचित किया, “मैं तुझ से सच कहता हूँ कि तू पतरस है, और मैं इस पत्थर पर अपनी कलीसिया बनाऊँगा, और अधोलोक के फाटक उस पर प्रबल नहीं होंगे” (मत्ती 16:18; लूका 22:31-32 को भी देखें) l 

क्या आप असफलता से जूझ रहे हैं जिससे आप आगे बढ़ने के लिए अयोग्य या अपात्र महसूस कर रहे हैं? असफलता की बजती हुयी घंटी को आप के लिए परमेश्वर के बड़े उद्देश्यों को छोड़ने का कारण न बनने दें l

पुनर्मिलन

छोटे लड़के ने उत्साह से सेना में कार्यरत पिता से प्राप्त एक डिब्बा खोला, जिनके बारे में उसका मानना था कि वे उसका जन्मदिन मनाने घर नहीं आ पाएँगे l उस डिब्बे के अन्दर लिपटा हुआ एक और उपहार था, और उस डिब्बे के अन्दर एक और जिसमें एक कागज़ के टुकड़े पर लिखा था, “आश्चर्य!” l उलझन में, उस लड़के ने ऊपर देखा – जब तुरंत ही उसका पिता कमरे में प्रवेश किया l आंसुओं के साथ वह बेटा चिल्लाते हुए अपने पिता की बाहों में कूद पड़ा, “डैडी, आई मिस्ड यू” और “आई लव यू!”

वह आश्रुपुरित लेकिन आनंदित पुनर्मिलन मेरे लिए प्रकाशितवाक्य 21 के हृदय के महिमामय क्षण के वर्णन को अधिकार में कर लेता है जब परमेश्वर की संतान अपने प्रेमी पिता को आमने-सामने देखते है – पूरी तरह नवीनीकृत और बहाल सृष्टि में l वहाँ “[परमेश्वर हमारी] आँखों से सब आँसू पोंछ डालेगा l” फिर हम कभी दर्द या दुःख का अनुभव नहीं करेंगे, क्योंकि हम अपने स्वर्गिक पिता के साथ होंगे l जिस प्रकार प्रकाशितवाक्य 21 में “ऊँचे शब्द” द्वारा घोषणा होती है, “देख, परमेश्वर का डेरा मनुष्यों के बीच में है l वह उनके साथ डेरा करेगा . . . “ (पद.3-4) l 

एक कोमल प्रेम और आनंद है जिसका यीशु के अनुयायी पहले से ही परमेश्वर के साथ आनंद लेते हैं, जैसा कि 1 पतरस 1:8 वर्णन करता है : “उससे तुम बिन देखे प्रेम रखते हो, और अब तो उस पर बिन देखे भी विश्वास करके ऐसे आनंदित और मगन होते हो जो वर्णन से बाहर और महिमा से भरा हुआ है l” फिर भी हमारे अविश्वसनीय, उमड़ते आनंद की कल्पना करें जब हम उसे देखेंगे जिसे हम प्यार करते थे और लालसा करते थे कि उसकी खुली बाहें हमारा स्वागत करेंगी!

निराशा की तस्वीर

हाल के वर्षों में, एक फोटोग्राफर ने एक किसान की दिल दहला देने वाली तस्वीर ली जिसमें वह उदास और अकेले अपने बर्बाद, सूखे खेत में बैठा था l सूखा और फसल खराब होने के मद्देनज़र किसानों और उनके परिवारों की हताश दुर्दशा से लोगों को अवगत कराने के लिए इस तस्वीर को कई प्रथम पन्नों पर छापा गया था l 

विलापगीत की पुस्तक निराशा की एक और तस्वीर प्रस्तुत करती है – यरूशलेम के विनाश के परिणामस्वरूप यहूदा की l इससे पूर्व कि नबूकदनेस्सर की सेना शहर में घुसकर उसको बर्बाद करती, लोग भुखमरी के कारण पीड़ित थे एक घेराबंदी के लिए धन्यवाद (2 राजा 24:10-11) l यद्यपि उनका कष्ट वर्षों तक परमेश्वर की अवज्ञा का परिणाम था, लेकिन विलापगीत के लेखक ने अपने लोगों की ओर से परमेश्वर को पुकारा (विलापगीत 2:11-12) l 

जबकि भजन 107 का लेखक भी इस्राएल के इतिहास में एक निराशाजनक समय का वर्णन करता है (जंगल में इस्राएल के भटकने के दौरान, पद.4-5), केंद्र-बिंदु कठिन समय में उठाए गए कदम की ओर खिसक जाता है : “तब उन्होंने संकट में यहोवा की दोहाई दी” (पद.6) l और क्या ही अद्भुत परिणाम : “और उसने उनको सकेती से छुड़ाया l”

निराशा में हैं? चुप न रहें l परमेश्वर को पुकारें l वह सुनता है और आपकी आशा को बहाल करने के लिए इंतज़ार करता है l हालांकि वह हमेशा हमें कठिन परिस्थितियों से बाहर नहीं निकालता, लेकिन वह हमेशा हमारे साथ रहने की प्रतिज्ञा करता है l