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Articles by लिन्डा वाशिंगटन

सफ़ेद बर्फ का जादू

सत्रहवीं शताब्दी में, सर आइजक न्यूटन ने प्रिज्म का उपयोग यह अध्ययन करने के लिए किया था कि प्रकाश हमें विभिन्न रंगों को देखने में कैसे मदद करता है l उन्होंने पाया कि जब प्रकाश किसी वस्तु से गुजरता है, तो वस्तु एक विशिष्ट रंग की होती है l जबकि एकल बर्फ क्रिस्टल पारभासी दिखता है, बर्फ कई बर्फ के क्रिस्टलों से मिलकर बनता है l जब प्रकाश सभी क्रिस्टल से गुजरता है तो बर्फ सफ़ेद दिखाई देता है l 

बाइबल कुछ और का उल्लेख करती है जिसमें एक निश्चित रंग है – पाप l यशायाह नबी के द्वारा, परमेश्वर ने यहूदा के लोगों के पापों का सामना किया और उनके पाप को “लाल रंग की तरह” और “अर्गवानी रंग” के रूप में वर्णित किया, लेकिन परमेश्वर ने वादा किया कि वे “बर्फ की तरह सफ़ेद” होंगे (यशायाह 1:18) l कैसे? यहूदा को गलत कामों से दूर रहने और परमेश्वर की क्षमा मांगने की ज़रूरत थी l 

यीशु को धन्यवाद, हमारे पास परमेश्वर की क्षमा तक स्थायी पहुँच है l यीशु ने खुद को “जगत की ज्योति” संबोधित किया और कहा कि जो कोई भी उसका अनुसरण करता है “वह अंधकार में न चलेगा, परन्तु जीवन की ज्योति पाएगा” (युहन्ना 8:12) l जब हम अपने पापों का अंगीकार करते हैं, परमेश्वर हमें क्षमा करता है और हम क्रूस पर मसीह के बलिदान के प्रकाश के माध्यम से देखे जाते हैं l इसका अर्थ यह है कि परमेश्वर हमें देखता है जैसे वह यीशु को देखता है अर्थात् निर्दोष l 

हमने जो कुछ भी गलत किया है, उसके लिए हमें अपराधबोध और लज्जा की स्थिति में नहीं रहना पड़ेगा l इसके बजाय, हम परमेश्वर की क्षमा के सत्य को थाम सकते हैं, जो हमें बर्फ के समान सफ़ेद” बनाता है l 

कमजोर को बलवन्त देना

जब मैं छोटी लड़की थी, मैंने “उसने मेरी गलती के परे देखा और मेरी ज़रूरत को देखा(He Looked Beyond My Fault and Saw My Need)” गीत सुनी l यह गीत 1967 में अमेरिकी गायिका डॉटी रेम्बो द्वारा लिखी गयी थी l  मैंने इस गीत का गहरा अर्थ तब तक नहीं समझ पायी थी जब तक मैंने जाना नहीं कि डॉटी ने अपने भाई एडी के विशवास के उत्तर में कि वह गलत चीजों के करने के कारण अप्रीतिकर था, परमेश्वर के शर्तहीन प्रेम के बारे में गीत लिखा था l गायिका ने उसे आश्वास्त किया कि परमेश्वर ने उसकी कमजोरी देखी है, लेकिन वह फिर भी उससे प्रेम करता था l 

इस्राएल और यहूदा के लोगों के कई कमजोर क्षणों में परमेश्वर का बिना शर्त प्यार स्पष्ट है l उसने यशायाह जैसे नबियों को अपने निरंकुश लोगों के लिए संदेशों के साथ भेजा l यशायाह 35 में, नबी परमेश्वर की नवीनीकरण की आशा साझा करता है l प्रोत्साहन जो आशा को गले लगाने के परिणामस्वरूप आएगा “ढीले हाथों को दृढ़ करो और थरथराते हुए घुटनों को स्थिर करो” (पद.3) l उन्हें मिले प्रोत्साहन के माध्यम से, परमेश्वर के लोग दूसरों को प्रोत्साहित करने के योग्य होंगे l यही कारण है कि यशायाह ने पद.4 में निर्देश दिया है, “हियाव बांधो, और मत डरो l”

कमजोर महसूस कर रहे हैं? अपने स्वर्गिक पिता से बातें करें l वह पवित्रशास्त्र की सच्चाई और अपनी उपस्थिति की सामर्थ्य से कमजोर को बल देता है l तब आप दूसरों को प्रोत्साहित कर सकेंगे l 

पराजय असम्भव है

“पराजय असम्भव है!” ये शब्द सुज़न बी. एंथोनी (1820-1906) के थे, जो अमेरिका में महिलाओं के अधिकारों के लिए उनके अचल रुख के लिए जाना जाता है l यद्यपि उन्हें लगातार आलोचना का सामना करना पड़ा और बाद में अवैध रूप से मतदान करने के लिए गिरफ्तारी, मुकदमा और दोषी होने के फैसले का सामना करना पड़ा, एन्थोनी ने महिलाओं को वोट देने का अधिकार हासिल करने की लड़ाई कभी नहीं छोड़ने की कसम खायी, विश्वास करते हुए कि उनका कारण जायज़ था l हालाँकि वह अपने श्रम का फल देखने के लिए जीवित नहीं रहीं, लेकिन उनकी घोषणा सही साबित हुयी l 1920 में, संविधान के उन्नीसवें संशोधन ने महिलाओं को मतदान का अधिकार दे दिया l

असफलता नहेम्याह के लिए भी कोई विकल्प नहीं था, खासकर इसलिए कि उसके पास एक शक्तिशाली सहायक था : परमेश्वर l उससे अपने कारण को आशीर्वाद देने के लिए कहने के बाद – यरूशलेम की दीवार का पुनःनिर्माण – नहेम्याह और जो लोग बेबीलोन के निर्वासन से यरूशलेम लौट आए थे, ऐसा करने के लिए काम किया l दुश्मनों से लोगों को सुरक्षित रखने के लिए दीवार की ज़रूरत थी l लेकिन कारण का विरोध धोखे और धमकियों के रूप में सामने आया l नहेम्याह ने विरोध को उसे डराकर रोकने नहीं दिया l उसने उन लोगों को सूचित किया जिन्होंने काम का विरोध किया था, “मैं तो भारी काम में लगा हूँ” (नहेम्याह 6:3) l उसके बाद उसने प्रार्थना की, “तू मुझे हियाव दे” (पद.9) l दृढ़ता के लिए धन्यवाद, काम पूरा हो गया (पद.15) l

परमेश्वर ने नहेम्याह को विरोध के सामने दृढ़ रहने की शक्ति दी l क्या कोई ऐसा कार्य है जिसके समक्ष आप हार मानने के लिए उत्प्रेरित हैं?  आपको जो कुछ भी जारी रखने की ज़रूरत है उसका प्रावधान करने के लिए परमेश्वर से पूछें l

सावधानीपूर्वक बनाया गया

यू ट्यूब विडिओ में, न्यू यॉर्क के गोशेन में एक पनीर किसान (Cheese farmer) एलन ग्लसटोफ ने परिपक्वन(aging) पनीर की अपनी प्रक्रिया का वर्णन किया, एक प्रक्रिया जो पनीर के स्वाद और प्रकृति को बढ़ाती है l इससे पूर्व कि इसे किसी बाज़ार में भेजा जाए, पनीर का प्रयेक खण्ड छह से बारह महीनों के लिए एक भूमिगत गुफा में एक शेल्फ पर रखा रहता है l इस नम वातावरण में पनीर की सावधानी से देखभाल की जाती है l “हम इसे स्वादिष्ट बनाने के लिए सही वातावरण देने का . . . [और] इसे अपनी वास्तविक संभाव्यता तक विकसित करने के लिए पूरा प्रयास करते हैं,” ग्लसटोफ ने समझाया l

पनीर की क्षमता विकसित करने के लिए ग्लसटोफ के उत्साह ने मुझे अपने बच्चों की “सबसे अधिक क्षमता” विकसित करने के लिए परमेश्वर की अभिलाषा की याद दिलाई, ताकि वे फलदायी और परिपक्व हो जाएँ l इफिसियों 4 में, प्रेरित पौलुस इस प्रक्रिया में शामिल लोगों का वर्णन करता है : प्रेरित, भविष्यद्वक्ता, सुसमाचार प्रचारक, रखवाले, और उपदेशक (पद.11) l इन वरदानों के साथ लोग प्रत्येक विश्वासी की उन्नति को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ सेवा के कार्यों (पद 12 में वर्णित “काम”) को प्रोत्साहित करने में सहायता करते हैं l लक्ष्य यह है कि हम सिद्ध बन जाएँ, और मसीह के पूरे डील=डौल तक बढ़ जाएँ (पद.13) l

आध्यात्मिक उन्नति पवित्र आत्मा की सामर्थ्य के द्वारा होती है जब हम परिपक्व होने की उसकी परिक्रिया में खुद को समर्पित कर देते हैं l जब हम उन लोगों के मार्गदर्शन का अनुसरण करते हैं जिनको वह हमारे जीवनों में लाता है, हम और अधिक प्रभावशाली हो जाते हैं जब वह हमें सेवा करने के लिए भेजता है l

अंधकार में ज्योति

दीज़ आर द जेनेरेशंस (These Are the Generations) पुस्तक में, मिस्टर बे परमेश्वर की विश्वासयोग्यता और सुसमाचार के सामर्थ्य का वर्णन करते हैं जो अंधकार में प्रवेश कर सकता है l उनके दादा, माता-पिता, और उनके अपने परिवार को मसीह में अपने विश्वास को साझा करने के कारण सताया गया l परन्तु मिस्टर बे के साथ एक रुचिकर घटना हुयी जब एक मित्र को परमेश्वर के विषय बताने के कारण उन्हें जेल में डाला गया : उसका विश्वास बढ़ गया l यही बात उनके माता पिता के लिए भी सच थी जब उन्हें एक बंदी शिविर में भेज दिया गया था – उन्होंने वहाँ भी लगातार मसीह का प्रेम साझा किया l मिस्टर बे ने युहन्ना 1:5 की प्रतिज्ञा को सच पाया : “ज्योति अंधकार में चमकती है, और अन्धकार ने उसे ग्रहण न किया l”

अपनी गिरफ्तारी और क्रूसीकरण से पहले, यीशु ने अपने शिष्यों को उनके सामने आनेवाली मुसीबत के विषय चेतावनी दी l वे लोगों द्वारा त्यागा जाने वाला था जो “ऐसा . . . इसलिए करेंगे कि उन्होंने न पिता को जाना है और न मुझे जानते हैं” (16:3) परन्तु उन्होंने तस्सली के शब्द कहे : “संसार में तुम्हें क्लेश होता है, परन्तु ढाढ़स बांधो, मैं ने संसार को जीत लिया  है” (पद.33) l

जबकि यीशु के कई विश्वासियों ने मिस्टर बे के परिवार की तरह उनके स्तर तक के सताव का अनुभव नहीं किया है, हम मुसीबत का सामना करने की अपेक्षा कर सकते हैं l परन्तु हमें निराश या आक्रोशित नहीं होना चाहिए l हमारे पास एक सहायक है – पवित्र आत्मा जिसे यीशु ने भेजने का वादा किया था l हम मार्गदर्शन और तसल्ली के लिए उसकी ओर मुड़ सकते हैं (पद.7) l परमेश्वर की उपस्थिति की सामर्थ्य हमें अंधकारमय समय में दृढ़ता से थामे रहेगा l

जीभ को नियंत्रित करने वाले

वेस्ट विथ द नाईट(West with the Night) पुस्तक में लेखिका बेरिल मार्खैम एक अत्यंत शक्तिशाली घोडा, कैमसिसकैन के विषय विस्तार से बताती है जिसे उसे प्रशिक्षित करने की जिम्मेदारी मिली थी l उसे उसकी ही तरह जोड़ीदार कैमसिसकैन मिल गया था l हर प्रकार की रणनीति अपनाने के बावजूद भी, वह उस अक्खड़ घोड़े को पूरी तौर से वश में न कर सकी, और केवल उसकी अड़ियल इच्छा पर विजय पा सकी l

हममें से कितने लोग अपने जीभ को वश में करने के लिए संघर्ष करते हुए ऐसा अनुभव करते हैं? जबकि याकूब जीभ को घोड़े के मुँह में लगाम या जहाज के पतवार से तुलना करता हैं (याकूब 3:3-5), और वह खेद प्रगट करते हुए कहता है, “एक ही मुँह से धन्यवाद और शाप दोनों निकलते हैं l हे मेरे भाइयों, ऐसा नहीं होना चाहिए” (पद.10) l

इसलिए, किस प्रकार हम जीभ पर विजय प्राप्त कर सकते हैं? प्रेरित पौलुस जीभ पर नियंत्रण प्राप्त करने की सलाह देता है l पहली बात केवल सच बोलना है (इफिसियों 4:25) l हालाँकि, यह कष्टपूर्वक कुंठित होना नहीं है l पौलुस आगे कहता है, “कोई गन्दी बात तुम्हारे मुँह से न निकले, पर आवश्यकता के अनुसार वह निकले जो उन्नति के लिए उत्तम हो” (पद.29) l हम कूड़े को भी हटा सकते हैं : “सब प्रकार की कड़वाहट, और प्रकोप और क्रोध, और कलह, और निंदा, सब बैरभाव समेत तुम से दूर की जाए” (पद.31) l क्या यह सरल है? यदि हम अपने बल पर करें तो यह संभव नहीं है l हम धन्यवादी हैं, हमारे पास पवित्र आत्मा है जो हमारी मदद करता है यदि हम उस पर निर्भर होते हैं l

जिस प्रकार मार्खैम ने सीखा, इच्छा की लड़ाई में कैमसिसकैन के साथ सामंजस्य की ज़रूरत थी l इसी प्रकार जीभ के नियंत्रण में भी होता है l

बच्चों के मूँह से

दस वर्ष की विओला को एक पेड़ की शाखा को एक माइक्रोफोन की तरह इस्तेमाल करके एक प्रचारक की नक्ल करते हुए देखने के बाद, मिशेल ने विओला को एक गाँव में प्रचार के दौरान “प्रचार करने” का मौका देने का निर्णय किया। विओला ने स्वीकार कर लिया। दक्षिण सूडान में एक मिशनरी, मिशेल ने लिखा, “भीड़ भावविभोर हो गई...एक छोटी बच्ची जिसे छोड़ दिया गया था, उनके सामने राजाओं के राजा की बेटी के रूप में अधिकार के साथ खड़ी हुई और सामर्थ के साथ परमेश्वर के राज्य के बारे में बताया। आधी भीड़ यीशु को स्वीकार करने के लिए आगे आई” (मिशेल पैरी, लव हैज़ ए फेस ) ।

उस दिन उस भीड़ ने एक बच्चे को प्रचार करते हुए सुनने की आशा नहीं की थी। यह घटना मन में एक ही वाक्य ले कर आती है, “बच्चों और दूध पिउवों के मुँह से” जो भजन संहिता 8 में पाया जाता है दाऊद ने लिखा, “तू ने अपने बैरियों के कारण बच्‍चों और दूध पिउवों के द्वारा सामर्थ्य की नींव डाली है, ताकि तू शत्रु और पलटा लेनेवालों को रोक रखे” (पद 2)। बाद में मत्ती 21:16 में यीशु ने इस पद का सन्दर्भ दिया, जब महायाजकों और शास्त्रियों ने यरूशालेम के मन्दिर में बच्चों के यीशु की प्रशंसा करने की आलोचना की। इन अगुवों के लिए बच्चे एक सरदर्द थे। इस पवित्रशास्त्र के अंश का सन्दर्भ देने के द्वारा यीशु ने दर्शाया कि परमेश्वर ने इन बच्चों की प्रशंसा को गम्भीरता से लिया। उन्होंने वही किया जो वे अगुवे करने के लिए अनिच्छुक थे: इच्छित मसीह को महिमा देना। 

 जैसे विओला और मन्दिर के बच्चों ने दर्शाया, परमेश्वर एक बच्चे को भी अपनी महिमा करवाले के लिए इस्तेमाल कर सकता है। उनके इच्छित हृदयों से प्रशंसा का एक झरना बह निकला।

मन:स्थिति बनाने वाला

जब मैं अपने सप्ताह भर के आने-जाने के समय में एक बार ट्रेन के स्टेशन पर प्रतीक्षा कर रहा था, तो कुछ नकारात्मक विचारों से मेरा मस्तिष्क भर गया, जैसे की यात्री ट्रेन में चढ़ने के लिए लाईन में खड़े हैं-ऋण के तनाव में, मुझे कहे गए बुरे शब्द, निसहायता में या परिवार के किसी सदस्य के साथ हाल ही में हुए अन्याय का सामना करते हुए। जब तक ट्रेन आई, मैं बहुत ही विचलित मन:स्थिति में थी।

ट्रेन में, एक दूसरा विचार मेरे मन में आया: परमेश्वर को एक नोट लिखूँ और उसे मेरे दुःख के बारे में बताऊँ। जल्द ही जब मैंने अपने विचारों को अपने जनरल में लिख डाला, तो उसके बाद मैंने अपना फोन निकाला और उसमें स्तुति के गीतों को सुनना शुरू कर दिया। और कुछ ही समय में बुरी मन:स्थिति पूरी तरह से बदल गई। 

मुझे नहीं पता था कि मैं भजनकार 94 के नमूने का पालन कर रही थी। भजनकार ने पहले अपनी शिकायतों को उंडेल डाला: “हे पृथ्वी के न्यायी, उठ; और घमण्डियों को बदला दे... कुकर्मियों के विरुद्ध मेरी ओर कौन खड़ा होगा? मेरी ओर से अनर्थकारियों का कौन सामना करेगा?” (भजन संहिता 94:2, 16)। जब उसने परमेश्वर से बात की तो उसने विधवाओं और अनाथों के साथ हुए अन्याय के बारे में कुछ बचाकर नहीं रखा। एकबार जब उसने परमेश्वर को अपना दुःख बता दिया, तो वह भजन स्तुति की ओर चला गया: “परन्तु यहोवा मेरा गढ़, और मेरा परमेश्‍वर मेरी शरण की चट्टान ठहरा है” (पद 22)।

परमेश्वर हमें अपने दुःख उसे बताने के लिए बुलाता है। वह हमारे भय, उदासी और निस्सहायता को स्तुति में बदल सकता है।

प्रार्थना

मैंअपनी आंटी ग्लैडिस की बेबाक़ स्वाभाव का आदर करती हूँ यद्यपि कभी-कभी वह मेरे विषय होता है l आंटी ने ई-मेल भेजा, “कल मैंने अखरोट का पेड़ काट दिया” जिससे मैं चिंतित हुयी l
प्रार्थना का सदैव उपयोग करनेवाली मेरी आंटी छिहत्तर वर्ष की हैं! अखरोट का वह पेड़ उनके गेराज के पीछे उग गया था l जब उसके जड़ से गेराज की कंक्रीट के फटने का डर उत्पन्न हो गया, उन्होंने उसे काटने का निर्णय किया l किन्तु उन्होंने हमें बताया, “मैं उस तरह का काम करने से पूर्व प्रार्थना करती हूँ l”
इस्राएल के निर्वासन के समय फारस के राजा का पियाऊ होकर सेवा करते हुए, नहेम्याह को  यरूशलेम लौट आए लोगों के विषय खबर मिली l कुछ काम होना ज़रूरी था l “यरूशलेम की शहरपनाह टूटी हुयी, और उसके फाटक जले हुए हैं” (नहेम्याह 1:3) l टूटी दीवारों के कारण वे दुश्मनों के आक्रमण की संभावनाओं से असुरक्षित थे l नहेम्याह अपने लोगों पर तरह खाकर भागीदारी करने का मन बनाया l किन्तु प्रार्थना प्राथमिक बात थी, क्योंकि नए राजा ने पत्र भेजकर यरूशलेम के निर्माण प्रयास को रोकना चाहा था (देखें एज्रा 4) l नहेम्याह ने अपने लोगों के लिए प्रार्थना की(नहेम्याह 1:5-10), और राजा से अनुमति माँगने से पूर्व परमेश्वर से सहायता मांगी (पद.11) l
क्या प्रार्थना आपका प्रतिउत्तर है? जीवन में किसी कार्य या परीक्षा का सामना करते समय यह हमेशा सबसे अच्छा तरीका है l