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Articles by लिन्डा वाशिंगटन

एक क्रोधित परमेश्वर?

कॉलेज में ग्रीक और रोमन माइथोलॉजी के अध्ययन से मैं हैरान थी कि कथाओं में कैसे मूडी और तुरंत नाराज़ हो जाने वाले देव थे। उनके क्रोध और कभी-कभी एक सनक पर लोगों के जीवन नष्ट हो जाते थे।

यह सोच कर मुझे हंसी आई कि ऐसे देवताओं पर कोई कैसे विश्वास कर सकता है। तब मैंने अपने आप से पूछा, क्या वास्तविक परमेश्वर के प्रति मेरे विचार भिन्न हैं? जब मैं संदेह करती हूं क्या मैं उन्हें आसानी से क्रोधित हो जाने वाले परमेश्वर के रूप में नहीं देखती? अफसोस है, हाँ।

मैं परमेश्वर से किए मूसा के अनुरोध की सराहना करती हूं कि "मुझे अपना तेज दिखा दे।" (निर्गमन 33:18) उनके विरुद्ध कुडकुडा रहे लोगों की अगुवाई करने के लिए चुने जाने पर, मूसा जानना चाहता था कि इस महान कार्य में क्या परमेश्वर वास्तव में उसकी मदद करेंगे। उत्तर में परमेश्वर ने अपनी महिमा और अपने नाम और विशेषताएं प्रकट कीं। यहोवा, ईश्वर दयालु...। (34:6) वे क्रोध में अचानक घात करने वाले परमेश्वर नहीं हैं। वे मुझे अपने जैसा ही बनाने के लिए लगातार कार्यरत हैं।

परमेश्वर और उनकी महिमा को हमारे प्रति उनके संयम में हम देख सकते हैं, किसी मित्र के प्रोत्साहन भरे शब्द में, सुंदर सूर्यास्त में, या मन में पवित्र आत्मा के धीमे स्वर में।

परमेश्वर की सहायता से

मैं जैसे-जैसे बूढ़ी हो रही हूँ, मैं विशेषकर सर्दियों के मौसम में जोड़ों का दर्द महसूस करती हूँ l मैं खुद को विजेता कम और एक वरिष्ठ नागरिक की चुनौतियों से अधिक पराजित महसूस करती हूँ l

इसलिए मेरा हीरो एक बूढ़ा व्यक्ति कालेब है अर्थात् वह भेदिया जिसे मूसा ने कनान यानि प्रतिज्ञात देश का भेद लेने भेजा था (गिनती 13:-14) l जब दूसरे भेदियों ने बुरा रिपोर्ट दिया, कालेब और यहोशू बारहों में से ऐसे दो भेदिये थे जिनके रिपोर्ट के आधार पर परमेश्वर ने उनको प्रतिज्ञात देश में जाने को कहा l अब, यहोशू 14 में, वह समय आ गया जब देश में कालेब को उसका भाग मिलना है l  किन्तु अभी भी शत्रु हैं जिन्हें देश से बाहर करना है l कालेब ने न  खुद सेवा छोड़ना चाहता था और न ही युद्ध को अपनी युवा पीढ़ी के हाथों में छोड़ना चाहता था l इसलिए उसने कहा, “तू ने तो उस दिन सुना होगा कि उसमें अनाक्वंशी रहते हैं, और बड़े बड़े गढ़वाले नगर भी हैं; परन्तु क्या जाने संभव है कि यहोवा मेरे संग रहे, और उसके कहने के अनुसार मैं उन्हें उनके देश से निकाल दूँ” (यहोशू 14:12) l

“कि यहोवा मेरे संग रहे l” इसी तरह का मनोभाव कालेब को युद्ध के लिए तैयार रखा l वह अपनी सामर्थ्य और अपने बुढ़ापे की बजाए परमेश्वर पर केन्द्रित था l परमेश्वर उसे ज़रूरी काम करने में मदद करनेवाला था l

हममें से अनेक लोग एक ख़ास उम्र के बाद कोई बड़ा काम नहीं करना चाहते हैं l किन्तु चाहे हम कितने भी बूढ़े हो जाएं हम परमेश्वर के लिए महान कार्य कर सकते हैं l जब कालेब की तरह अवसर हमारे सामने आते हैं, हमें उनसे दूर नहीं भागना है l परमेश्वर की सहायता से हम जीत सकते हैं!

जयजयकार करें

पिछले दिनों जब मैं निरंतर उपासना में जाने के लिए एक चर्च खोज रही थी, मेरी सहेली ने मुझे अपने चर्च में बुलाया l आराधना अगुओं ने एक गीत के साथ मण्डली की अगवाई की जो ख़ास तौर पर मैं पसंद करती थी l मैंने अपने कॉलेज के संगीत-मण्डली निदेशक के  “खुल कर गाने!” की सलाह याद करते हुए मन से गाया l

गीत के बाद, मेरी सहेली के पति ने मुझ से कहा, “तुमने ऊँची आवाज में गया l” यह टिप्पणी प्रशंसा की नहीं थी! उसके बाद, मैंने खुद जानबूझकर अपने गाने पर ध्यान दिया, और अपने आस-पास के लोगों से धीमे गाया, और विचार करती रही कि कोई मेरे गाने की आलोचना तो नहीं करेगा l

किन्तु एक रविवार, मैंने अपने निकट एक स्त्री को श्रद्धा के साथ बिना किसी संकोच के गाते सुना l उसकी आराधना से मैंने दाऊद के जीवन का उस्ताही, सहज आराधना याद किया l भजन 98 में, वास्तव में, दाऊद सलाह देता है कि “सारी पृथ्वी” “जयजयकार” के साथ आराधना करे (पद.4) l

भजन 98 का पहला पद हमें बताता है कि यह याद करके कि “[परमेश्वर] ने आश्चर्यकर्म किये है” हमें आनंदपूर्वक आराधना करनी चाहिए l पूरे भजन में, दाऊद सभी राष्ट्रों के प्रति उसकी विश्वासयोग्यता और न्याय, करुणा, और उद्धार के इन अद्भुत कामों को याद करता है l परमेश्वर कौन है और उसने क्या किया है में दृढ़ रहना हमारे हृदयों को प्रशसा से भर देता है l

परमेश्वर ने आपके जीवनों में कौन-कौन से “अद्भुत काम” किये हैं? कृतज्ञता परमेश्वर के अद्भुत कार्यों को याद करके उसको धन्यवाद देने का सम्पूर्ण समय है l अपनी आवाज़ ऊंची करें और गाएँ!

अलग किन्तु त्यागा हुआ नहीं

अपनी भांजी को उस शाम अलविदा कहते हुए मुझे बहुत दुःख हुआ जब वह मेसाच्युसेट्स में बोस्टन विश्वविद्यालय के स्नातक स्कूल में जा रही थी l यद्यपि पूर्वस्नातक होकर वह चार वर्ष तक दूर थी, वह राज्य के बाहर नहीं गयी थी l हम वाहन से ढाई घंटे की यात्रा करके आसानी से उससे मुलाकात कर लेते थे l अब वह 800 मील दूर जानेवाली थी l बात करने के लिए लगातार मिलना कठिन था l मुझे उसके देखभाल हेतु परमेश्वर पर भरोसा करना था l

इफिसुस के प्राचीनों को अलविदा कहते समय पौलुस ने भी ऐसा ही महसूस किया l चर्च स्थापना और उनको तीन वर्षों तक सिखाने के बाद, पौलुस ने उन प्राचीनों से उसके निकट परिवार की तरह रहने को कहा l अब यरूशलेम पहुंचने पर, उनसे उसकी मुलाकात होनेवाली नहीं थी l  

किन्तु पौलुस ने इफिसियों को सलाह दिया l यद्यपि अब पौलुस उनका शिक्षक नहीं होगा, वे खुद को त्यागा हुआ न समझें l परमेश्वर निरंतर उनको कलीसिया की अगुवाई में अपने “अनुग्रह के वचन” द्वारा सिखाता रहेगा (प्रेरितों 20:32) l पौलुस के विपरीत, परमेश्वर हमेशा उनके साथ रहेगा l

बच्चों को घोंसले से बाहर करना हो या दूर जानेवाले परिवार के सदस्य और मित्रगण-विदाई बहुत कठिन हो सकती है l वे हमारे प्रभाव से दूर अपने नए जीवन में जाते हैं l हम भरोसा करें कि वे परमेश्वर के हाथों में हैं l वह उनके जीवन को निरंतर बनाएगा और हमसे भी अधिक उनकी वास्तविक ज़रूरतें पूरी करेगा l

क्रोध प्रबंधन

जब मैं एक सहेली के संग रात्री भोजन कर रही थी, उसने बताया कि वह परिवार के एक ख़ास सदस्य से ऊब चुकी है l किन्तु वह अनदेखा करने अथवा उपहास करने की उसकी कष्टकर आदत के विषय उससे कुछ कहने में हिचकिचाती थी l समस्या के विषय जब उसने उसका सामना करना चाहा, उसने निन्दापूर्ण आलोचना की l वह उससे अत्यधिक क्रोधित हुई l दोनों पक्षों के एक दूसरे के विरुद्ध बोलने से, पारिवारिक फूट बढ़ गयी l

मैं भी ऐसी हूँ, क्योंकि मैं भी क्रोध से ऐसे ही पेश आती हूँ l मैं भी लोगों का सामना करने में कठिनाई महसूस करती हूँ l यदि कोई मित्र या परिवार का कोई सदस्य कुछ गन्दी बातें बोलता है, मैं अक्सर अपनी भावनाओं को दबा देती हूँ जब तक कि वह व्यक्ति या कोई और आकर कुछ और गन्दी बातें कहता या बोलता नहीं है l थोड़े समय बाद मैं, अधिक क्रोधित हो जाती हूँ l

इसलिए इफिसियों 4:26 में प्रेरित पौलुस ने कहा, “सूर्य अस्त होने तक तुम्हारा क्रोध न रहे l” अनसुलझी बातों के लिए समय सीमा निर्धारित करने पर क्रोध नियंत्रित रहता है l किसी गलती को बढ़ाने की अपेक्षा, जो कड़वाहट का घर है, हम परमेश्वर के “प्रेम में सच्चाई [बोलें]” (इफि.4:15) l

क्या किसी के साथ समस्या है? उसे पकड़े रहने की अपेक्षा परमेश्वर को प्रथम रखें l वह क्षमा और प्रेम की सामर्थ्य से क्रोध की आग बुझा सकता है l

लालच

2016 की गर्मी में, मेरी भांजी ने मुझे स्मार्ट फोन में फोन के कैमरा द्वारा खेला जानेवाला खेल पोकेमोन गो खेलने को मजबूर किया l इस खेल का लक्ष्य पोकेमोन नामक छोटे प्राणियों को पकड़ना होता है l जो कोई खेल शुरु करता हैं, एक लाल और सफ़ेद बॉल फोन की स्क्रीन पर दिखाई देता है l किसी पोकेमोन के पकड़ने के लिए ऊँगली से बॉल को पोकेमोन की ओर करना होता है l पोकेमोन को, हालाँकि, लालच देकर भी पकड़ा जा सकता है l

केवल पोकेमोन के चरित्रों को ही लालच नहीं दिया जा सकता है l नये नियम में विश्वासियों को लिखते हुए यीशु का भाई, याकूब, हमें याद दिलाता है कि हम “अपनी ही अभिलाषा से खिंचकर और फँसकर परीक्षा में” पड़ते हैं (1:14, पर महत्व दिया गया है) l अर्थात्, हमारी इच्छाएँ परीक्षाओं के साथ मिलकर हमें गलत मार्ग में जाने की लालच देते हैं l हमारे पास अपनी समस्याओं के लिए परमेश्वर अथवा शैतान को दोषी ठहराने की परीक्षा आ सकती है, किन्तु वास्तविक खतरा हमारे अन्दर है l

किन्तु अच्छा समाचार है l यदि हम हमें परीक्षाओं में ले जानेवाली बातों के विषय परमेश्वर से बातचीत करते हैं हम उनसे बच सकते हैं l यद्यपि, “न तो बुरी बातों से परमेश्वर की परीक्षा हो सकती है, और न वह किसी की परीक्षा आप करता है,” जिस तरह याकूब 1:13 में समझाता है, वह गलत करने की हमारी मानवीय इच्छा समझता है l हमें केवल उस बुद्धि को माँगना है जिसे परमेश्वर ने देने की प्रतिज्ञा की है (1:1-6) l

उसके पंखों की आड़ में

सुरक्षा के विषय सोचते हुए, मैं अपने आप से चिड़ियों के पंखों के विषय नहीं सोचता हूँ l यद्यपि किसी चिड़िया के पंख एक कमज़ोर सुरक्षा की तरह दिखाई देते हैं, उनमें और भी है जो हमारी आँखें नहीं देखती हैं l

चिड़ियों के पंख परमेश्वर की रचना का अद्भुत उदाहरण है l पंखों में कोमल और रोयेंदार, दोनों भाग होते हैं l पंख के कोमल भाग में कठोर कांटें होते हैं जिसमें हुक होते हैं जो जिपर के दांतों की तरह आपस में बंद हो जाते हैं l रोयेंदार भाग चिड़िया को गरम रखता है l पंख के दोनों भाग चिड़िया को हवा और बारिश से बचाते हैं l किन्तु शिशु पक्षी रोयें से ढके होते हैं और उनके पंख अभी पूरे विकसित नहीं हुए हैं l इसलिए माँ पक्षी उन्हें अपने पंखों से ढांक कर हवा और बारिश से बचाती है l

भजन 91:4 और बाइबिल के दूसरे परिच्छेदों में(देखें भजन 17:8) “अपने पंखों से [हमें] अपने आड़ में” लेने की परमेश्वर की तस्वीर आराम और सुरक्षा की है l हमारे मनों में एक माँ चिड़िया द्वारा अपने बच्चों को अपने पंखों से ढकने की तस्वीर दिखायी देती है l जिस तरह माता-पिता की बाहें एक डरावने तूफ़ान या एक हानि में एक सुरक्षित स्थान है, उसी तरह आराम देनेवाली परमेश्वर की उपस्थिति जीवन की भावनात्मक तूफानों में सुरक्षा और बचाव है l

यद्यपि हम परेशानी और दुःख से होकर निकलते हैं, हम उनका सामना भय के बिना कर सकते हैं जब तक हमारे चेहरे परमेश्वर की ओर हैं l वह हमारा “शरणस्थान” है (91:2, 4, 9) l