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भय के सात मिनट

जब 18 फरवरी, 2021 को मार्स रोवर पर्सिवेरेंस  उस लाल ग्रह पर उतरा, तो इसके आगमन की निगरानी करने वालों को सात मिनट का  भय   (दहशत) सहना पड़ा। जैसे ही अंतरिक्ष यान ने अपनी 292 मिलियन मील की यात्रा समाप्त की, यह एक जटिल लैंडिंग प्रक्रिया से गुजरा, जिसे इसे स्वयं ही करना था। मंगल ग्रह से पृथ्वी तक सिग्नल आने में कई मिनट लगते हैं, इसलिए नासा लैंडिंग के दौरान पर्सिवेरेंस से कुछ सुन नहीं सका। संपर्क में न होना उस टीम के लिए बहुम डरावना था जिसने इस मिशन में इतना प्रयास और संसाधन लगाया था। 

  

कभी कभी हम अपने स्वयं के डर के समय का अनुभव कर सकते हैं जब हमें लगता है कि हम परमेश्वर से नहीं सुन रहे हैं; हम प्रार्थना करते हैं लेकिन हमें जवाब नहीं मिलता है। पवित्रशास्त्र में हम पाते हैं कि लोगों को उनकी प्रार्थना के उत्तर जल्दी मिल जाते हैं (दानिय्येल 9: 20– 23) और जिन्हें लंबे समय तक उत्तर नहीं मिल रहा था, हन्ना की कहानी (1शमूएल 1:10–20 में) । विलंबित उत्तर का शायद सबसे मार्मिक उदाहरण, जिसने निश्चित रूप से मरियम और मार्था के दिलों में खौफ पैदा कर दिया था– जब उन्होंने यीशु से अपने बीमार भाई लाजर की मदद करने के लिए कहा (यूहन्ना 11:3)। यीशु ने देर की, और उनके भाई की मृत्यु हो गई (पद 6, 7; 14, 15) । फिर भी चार दिन बाद, मसीह ने लाजर को पुनर्जीवित करके उत्तर दिया (पद 43,44)।

हमारी प्रार्थनाओं के उत्तर की प्रतीक्षा करना कठिन हो सकता है। लेकिन परमेश्वर हमें दिलासा दे सकता है और हमारी मदद कर सकता है  जब हम  उसके अनुग्रह के सिंहासन के पास विश्वास के साथ पहुँचते हैं “ कि हम पर दया करें, और उस अनुग्रह को पाएं जो हमारी आवश्यकता के समय हमारी सहायता करे”  इब्रानियों 4:16 ।

गुलाबी कोट

ब्रेंडा मॉल से बाहर निकल रही थी, जब एक प्रदर्शन खिड़की (डिस्पले विन्ड़ो) से गुलाबी रंग की एक चीज ने उसका ध्यान आकर्षित  किया। वह मुड़ी और एक हल्के गुलाबी रंग के कोट को देखा; वह उसके   सामने मंत्रमुग्ध सी होकर खड़ी रही। उसने सोचा कि  हॉली इसे पसंद करेगी! हॉली, उसकी सहकर्मी मित्र के लिए आर्थिक तंगी थी, जो एक अकेली माँ थी, और जब ब्रेंडा जानती थी कि  हॉली को एक गर्म कोट की आवश्यकता है, तो उसे यह भी विश्वास था कि उसकी सहेली अपने लिए ऐसी खरीदारी पर कभी भी  पैसा नहीं खर्च सकती है। थोड़ा सोचने के बादए ब्रेंडा मुस्कुराई, अपना बटुआ निकाला, और कोट को हॉली के घर भेजने की व्यवस्था की। उसने एक गुमनाम कार्ड  लिखकर उसमें रखा “तुम बहुत प्यारी हो।” और फिर  ब्रेंडा खुशी  में भरकर व्यावहारिक रूप से नाचती हुई अपनी कार तक गई ।

आनंद, ईश्वर द्वारा दिए गए देने का उप फल  है। जैसा कि पौलुस ने कुरिन्थियों को उदारता की कला में निर्देश दिया थाए उसने कहा, “हर एक जन जैसा मन में ठाने वैसा ही दान करेय न कुढ़ कुढ़ के और न दबाव सेए क्योंकि परमेश्वर हर्ष से देनेवाले से प्रेम रखता है” (2 कुरिन्थियों 9:7)  उसने यह भी कहा, “जो बहुत  बोता है, वह बहुत काटेगा” (पद 6)।

कभी कभी हम भेंट की थाली में नकद रख देते हैं। अन्य समयों में हम एक योग्य सेवकाई को ऑनलाइन दान करते हैं। और फिर ऐसे क्षण आते हैं जब परमेश्वर अपने प्रेम की मूर्त अभिव्यक्ति के साथ एक मित्र की आवश्यकता का प्रत्युत्तर देने के लिए हमारी अगुवाई करता है। हम किराने का सामान, गैस का एक टैंक प्रदान करते हैं। या एक बिल्कुल गुलाबी कोट का उपहार भी।

आप और मुझ पर दया

कोविड—19 महामारी के परिणामों में से एक क्रूज (पर्यटक) जहाजों की डॉकिंग और यात्रियों का क्वारंटाइन (अलग) किया जाना था। द वॉल स्ट्रीट जर्नल में एक लेख छापा गया जिसमें कुछ पर्यटकों के साक्षात्कार शामिल थे। क्वारंटाइन किए जाने पर  कैसे बातचीत के अधिक अवसर मिलते हैं, इस बारे में बताते हुये एक यात्री ने मजाक में कहा कि कैसे उसका जीवनसाथी, जिसके पास एक उत्कृष्ट स्मृति थी, उसके द्वारा किए गए हर अपराध को सामने लाने में सक्षम थी, और उसने महसूस किया कि अभी भी पूरा नहीं बताया है। 

इस तरह के बयान हमें हंसा सकते हैं, हमें हमारी मानवता की याद दिला सकते हैं,  और हमें सचेत करने का काम कर सकते हैं, अगर हम उन चीजों को बहुत कसकर पकड़ने के लिए प्रवृत्त हैं जिन्हें हमें छोड देना चाहिए। फिर भी जो हमें चोट पहुँचाते हैं उनके प्रति कृपालु व्यवहार करने में क्या बात हमारी मदद करती है? हमारे महान परमेश्वर की झलक, जैसा कि उसने भजन संहिता 103:8–12 जैसे अंशों में चित्रित किया है।

8–10 पदों के संदेश का अनुवाद उल्लेखनीय है: “यहोवा दयालु, और अनुग्रहकरी, विलम्ब से कोप करनेवाला, और अति करूणामय है। वह सर्वदा वादविवाद करता न रहेगा, न उसका क्रोध सदा के लिये भड़का रहेगा। उस ने हमारे पापों के अनुसार हम से व्यवहार नहीं किया, और न हमारे अधर्म के कामों के अनुसार हम को बदला दिया है।” जब हम पवित्रशास्त्र को प्रार्थनापूर्वक पढ़ते हैं तो परमेश्वर की सहायता के लिए पूछना हमें गलत तरीके से दुर्भावनापूर्ण बदला लेने या दंडित करने की योजना के बारे में प्रेरित कर सकता है। और यह हमारे लिए और उन लोगों के लिए  जिन्हें   हमें नुकसान पहुँचाने का लालच हो सकता है अनुग्रह, दया और क्षमा को रोक कर प्रार्थनाओं को प्रेरित कर सकता है  

प्यार जो माफ करता है

शादी के अस्सी साल! मेरे पति के परदादा पीट और परदादी रूथ ने 31 मई, 2021 को इस उल्लेखनीय उपलब्धि का जश्न मनाया। 1941 में जब रूथ अभी भी हाई स्कूल में थी, तब संयोग से मिलने के बाद, युवा जोड़ा शादी करने के लिए इतना उत्सुक थे कि रूथ के स्नातक होने के अगले दिन वे भाग गए। पीट और रूथ का मानना है कि परमेश्वर उन्हें एक साथ लाया और उसने इन सभी वर्षों में उनका मार्गदर्शन किया है।

शादी के आठ दशकों पर विचार करते हुए, पीट और रूथ दोनों सहमत हैं कि उनके रिश्ते को बनाए रखने की एक प्रमुख बात क्षमा को चुनने का निर्णय रहा है। एक स्वस्थ रिश्ते में कोई भी यह समझता है कि हम सभी को नियमित रूप से क्षमा की आवश्यकता होती है, जिस तरह से हम एक दूसरे को दुख पहुँचाते हैं: चाहे वह एक निर्दयी शब्द हो, एक टूटा हुआ वादा हो, या एक भूला हुआ कार्य हो।

यीशु में विश्वासियों को एकता में एक साथ रहने में मदद करने के लिए पवित्रशास्त्र के एक भाग में  पौलुस क्षमा की आवश्यक भूमिका का उल्लेख करता है। अपने पाठकों को करुणा, भलाई, दीनता, और नम्रता,  और सहनशीलता (कुलुस्सियों 3:12) चुनने के लिए आग्रह करने के बाद, पौलुस फिर प्रोत्साहित करता है “यहि किसी को किसी पर दोष देने का कोई कारण हो तो एक दूसरे की सह लो ओर एक दूसरे के अपराध क्षमा करो।” (पद 13)। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रत्येक के साथ उनका सारा व्यवहार प्रेम द्वारा निर्देशित होना था (पद 14)।

रिश्ते जो  पौलुस द्वारा उल्लिखित विशेषताओं को आकार देते हैं,  एक आशीर्वाद हैं। प्यार और क्षमा की विशेषता वाले स्वस्थ संबंधों को विकसित करने के लिए परमेश्वर हम सबकी मदद करे।

“चित्ताकर्षक चीजों” से लड़ना

1960 के दशक की एक टीवी श्रृंखला में, एक आदमी एक नायक से कहता है कि उसे अपने बेटे को यह तय करने देना चाहिए कि वह कैसे जीना चाहता है। नायक जवाब देता है कि हम युवा को उनके  लिए खुद निर्णय नहीं लेने दे सकते। जो भी पहली आकर्षक चीज़ वह देखेगा उसे ही पकड़ लेगा । फिर, जब उसे पता चलता है कि उसमें एक कांटा (गलत बात)  है, तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। गलत विचार इतनी चमक के साथ आते हैं कि उन्हें यह विश्वास दिलाना मुश्किल है कि लंबे समय में अन्य चीजें बेहतर हो सकती हैं। उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि माता–पिता के लिए  अपने बच्चों में सही व्यवहार बनाना  और “ प्रलोभन को दूर रखने”  में उनकी मदद करना महत्वपूर्ण है।

नायक के शब्द नीतिवचन में पाए जाने वाले ज्ञान से संबंधित हैं: “लड़के को उसी मार्ग की शिक्षा दे जिसमें उसको चलना चाहिएए और वह बुढ़ापे में भी उससे न हटेगा” (22:6) । हालाँकि कई लोग इन शब्दों को एक वादे के रूप में पढ़ सकते हैं, वे वास्तव में एक मार्गदर्शक हैं। यीशु में विश्वास करने के लिये हम सभी को  अपना निर्णय स्वयं करने के लिए बुलाया गया है। परन्तु हम परमेश्वर और पवित्रशास्त्र के प्रति अपने प्रेम के द्वारा बाइबल की नींव रखने में मदद कर सकते हैं। और हम प्रार्थना कर सकते हैं कि जैसे जैसे हमारे छोटे बच्चे बड़े होते हैं, वे मसीह को उद्धारकर्ता के रूप में स्वीकार करें और उसके मार्गों पर चलना चुनें, न कि दुष्टों के मार्गों में (पद 5) ।

पवित्र आत्मा की सक्षमता के माध्यम से “चित्ताकर्षक चीजों” चीजेंपर हमारी अपनी जीत भी शक्तिशाली गवाही है। यीशु की आत्मा हमें प्रलोभन का सामना करने में मदद करती है और हमारे जीवन को अनुकरणीय उदाहरणों में ढालती है।