आनंद चुनें
सामान खरीदते हुये कीथ अच्छा महसूस नही कर रहा था। उनके हाथ पार्किंसंस रोग के पहले लक्षणों से कांप रहे थे। उसके जीवन की गुणवत्ता कितनी जल्दी कम होने लगी? उसकी पत्नी और बच्चों के लिए इसका क्या अर्थ होगा? कीथ की उदासी, हँसी से टूट गई—व्हीलचेयर में बैठे, हंसते हुए अपने बेटे को एक आदमी ने आलू के ऊपर धकेल दिया। उस आदमी ने झुक कर अपने बेटे से धीमी आवाज में कुछ कहा जो अपना मुस्कुराना बंद नहीं कर सका। उसकी हालत कीथ की तुलना में काफी खराब थी फिर भी वह और उसके पिता,जहां भी हो सकता था खुशी पा रहे थे ।
अपने मुकदमे के परिणाम की प्रतीक्षा करते हुये, जब प्रेरित पौलुस जेल से या घर में नजरबंद होकर लिख रहा था, तो लगता था कि प्रेरित पौलुस को आनन्दित होने का कोई अधिकार नहीं था (फिलिप्पियों 1 12–13)। उस समय सम्राट नीरो था, जो एक दुष्ट व्यक्ति था, जो हिंसा और क्रूरता के लिए बहुत अधिक प्रसिद्ध था, इसलिए पौलूस के चिंतित होने का कारण था। वह यह भी जानता था कि ऐसे उपदेशक थे जो उसकी अनुपस्थिति का फायदा उठाकर अपने लिए गौरव हासिल कर रहे थे। उन्होंने सोचा था कि वे पौलुस के लिए “ मुसीबत खड़ी कर सकते हैं” जब वह कैद में था (पद 17)।
तौभी पौलुस ने आनन्दित होना चुना (पद 18–21), और उसने फिलिप्पियों से उसके उदाहरण का अनुसरण करने के लिए कहा: “प्रभु में सदा आनन्दित रहो। मैं फिर कहता हूंरू आनन्दित रहो!” (4:4) । हमारी स्थिति अंधकारमय लग सकती है, फिर भी यीशु इस समय हमारे साथ है, और उसने हमारे गौरवशाली भविष्य की गारंटी दी है। मसीह, जो अपनी कब्र से बाहर निकल आया, अपने अनुयायियों को अपने साथ रहने के लिए, उठाने के लिए वापस आएगा। जब हम इस नए साल की शुरुआत करते हैं, हम आनन्दित हों!

एक छोटी शुरुआत
1883 में पूरा होने पर ब्रुकलिन ब्रिज को “दुनिया का आठवां आश्चर्य” माना जाता था। लेकिन ढांचे की सफलता के लिए पुल की एक टावर से दूसरी तक एक एकल, पतला तार बांधा जाना जरूरी था। इसलिये पहले तार में अतिरिक्त तार, तीन दूसरे केबलों के साथ, तब तक जोड़े गए जब तक ये एक साथ बुन कर एक बडा केबल तैयार नहीं हुआ। समाप्त होने पर प्रत्येक केबल ने, जो पांच हजार से अधिक गैल्वेनाइज्ड तारों से बना था, अपने समय के सबसे लंबे सस्पैन्शन (लटकते हुये) पुल को सहारा देने में मदद करी। जिसकी शुरूआत कुछ छोटे से हुई वह ब्रुकलिन ब्रिज के एक बड़े हिस्से में बदल गया।
यीशु का जीवन की शुरूआत भी एक छोटे ढ़ंग से हुई। एक छोटे से शहर में एक बच्चे का जन्म हुआ और उसे एक चरनी में (जानवरों को खिलाने वाली कुंड) रखा गया (लूका 2:7) । भविष्यद्वक्ता मीका ने उसके दीन जन्म की भविष्यवाणी करते हुए लिखा, “हे बेतलेहेम, प्राताए यदि तू ऐसा छोटा है कि यहूदा के हजारों में गिना नहीं जाता, तौभी तुझ में से मेरे लिये एक पुरूष निकलेगा, जो इस्राएलियों में प्रभुता करने वाला होगा” (मीका 5:2; मत्ती 2:6) भी देखें। एक छोटी सी शुरुआत, लेकिन यह शासक और चरवाहा अपनी प्रसिद्धि और मिशन को “पृथ्वी की छोर तक देखेगा” (मीका 5:4)।
यीशु का जन्म बहुत सादगी और दीनता से एक छोटे से स्थान में हुआ था, और पृथ्वी पर उसका जीवन अपने आप को दीन बनने में समाप्त हुआ, और एक क्रूस पर एक अपराधी की मृत्यु सही (फिलिप्पियों 2:8)। लेकिन अपने अपार बलिदान से उसने हमारे और परमेश्वर के बीच की दूरी को दूर किया और सभी विश्वास करने वालों को उद्धार दिया। इस समय में, आप विश्वास के द्वारा यीशु में परमेश्वर का महान उपहार प्राप्त कर सकते हैं। और यदि आप विश्वास करते हैं, तो जो उसने आपके लिए किया है उसके लिये, आप नए सिरे से नम्रतापूर्वक उसकी स्तुति करें।

परमेश्वर का हाथ
1939 में, हाल ही के ब्रिटेन के लिए युद्ध छिड़ने के साथ, किंग जॉर्ज VI ने अपने क्रिसमस दिवस रेडियो प्रसारण में यूनाइटेड किंगडम और राष्ट्रमण्डल के नागरिकों को परमेश्वर पर भरोसा रखने के लिए प्रोत्साहित करना चाहा l एक कविता का हवाला देते हुए जो उनकी माँ को अनमोल लगी, उन्होंने कहा : “अँधेरे में बाहर जाओ, और अपना हाथ परमेश्वर के हाथ में रखो l / वही तुम्हारे लिए उजियाले से उत्तम, और ज्ञात मार्ग से अधिक सुरक्षित होगा l” वह नहीं जानता था कि नया साल क्या लेकर आएगा, लेकिन उसने आने वाले चिंताजनक दिनों में उन्हें “मार्गदर्शन और समर्थन” देने के लिए परमेश्वर पर भरोसा किया l
परमेश्वर के हाथ की छवि बाइबल में कई स्थानों पर दिखायी देती है, जिसमें यशायाह की पुस्तक भी शामिल है l इस भविष्यद्वक्ता के द्वारा, परमेश्वर ने अपने लोगों को यह विश्वास करने के लिए बुलाया कि वह उनका सृष्टिकर्ता है, “आदि और . . . अंत”(यशायाह 48:12), उनके साथ शामिल रहेगा l जैसा कि वह कहता है, “मेरे ही हाथ ने पृथ्वी की नींव डाली, और मेरे ही दाहिने हाथ ने आकाश फैलाया”(पद.13) l उन्हें उस पर भरोसा करना चाहिए और कम शक्तिशाली लोगों की ओर नहीं देखना चाहिए l आखिरकार, वह उनका “छुड़ानेवाला और इस्राएल का पवित्र है”(पद.17) l
नये वर्ष की ओर देखते हुए हमें चाहे जिसका भी सामना करना पड़े, हम किंग जॉर्ज और भविष्यद्वक्ता यशायाह के प्रोत्साहन का अनुसरण कर सकते हैं और परमेश्वर पर अपनी आशा और भरोसा रख सकते हैं l तब, हमारे लिए भी, हमारी शांति नदी की तरह होगी, हमारा ‘धर्म(खुशहाली) समुद्र की लहरों के समान” होगा(पद.18) l

परमेश्वर, मैं ही क्यों?
जिम एक साल से अधिक समय से मोटर न्यूरॉन(motor neuron/प्रेरक तंत्रिकोशिका) बीमारी से जूझ रहा है l उसकी मांसपेशियों में न्यूरॉन्स(neurons) टूट रहे हैं, और उसकी मांसपेशियां बेकार हो रही हैं l उसने अपना बढ़िया मोटर कौशल(motor skills-काम करने की क्षमता) खो दिया है और अपने अंगों को नियंत्रित करने की क्षमता खो रहा है l वह अब अपनी शर्ट के बटन नहीं लगा सकता या जूते के फीते नहीं बाँध सकता, और चॉपस्टिक्स(chopsticks) का उपयोग करना असंभव हो गया है l जिम अपनी स्थिति से जुझता है और पूछता है, परमेश्वर ऐसा क्यों होने दे रहा है? मैं ही क्यों?
वह यीशु में कई अन्य विश्वासियों के साथ अच्छी संगति में है, जिन्होंने अपने प्रश्न परमेश्वर के पास लाए हैं l भजन 13 में, दाऊद चिल्लाकर कहता है, “हे परमेश्वर, कब तक ! क्या तू सदैव मुझे भूला रहेगा? तू कब तक अपना मुखड़ा मुझसे छिपाए रहेगा? मैं कब तक अपने मन ही मन में युक्तियाँ करता रहूँ, और दिन भर अपने हृदय में दुखित रहा करूँ?(पद.1-2) l
हम भी अपनी उलझन और सवाल परमेश्वर के पास ले जा सकते हैं l जब हम चिल्लाते हैं “कब तक?” और क्यों?” तो वह समझता है l हमें उसका अंतिम उत्तर यीशु में और पाप तथा मृत्यु पर उसकी विजय में दिया गया है l
जैसे ही हम क्रूस और खाली कब्र को देखते हैं, हमें परमेश्वर की “करुणा(unfailing love)” पर भरोसा करने और उसके उद्धार में ख़ुशी मनाने का विश्वास मिलता है l यहाँ तक कि सबसे अँधेरी रातों में भी, हम “परमेश्वर के नाम का भजन [गा सकते हैं], क्योंकि उसने [हमारे लिए] भलाई की है”(पद.6) l मसीह में हमारे विश्वास के द्वारा, उसने हमारे पापों को माफ़ कर दिया है, हमें अपने बच्चों के रूप में अपनाया है, और हमारे जीवन में अपने शाश्वत अच्छे उद्देश्य को पूरा कर रहा है l

टिकाऊ निर्माण करना
जब मैं ओहायो में एक छोटा लड़का था, हम कई निर्माण स्थलों के पास रहते थे l उनसे प्रेरित होकर, मैंने और मेरे मित्रों ने एक किला बनाने के लिए बचे हुए स्क्रैप/रद्दी चीजों को इकठ्ठा किया l अपने माता-पिता से उपकरण मांग कर, हमने लकड़ी ढोए और अपनी सामग्री को हमारे उद्देश्यों के लिए उपयुक्त बनाने के प्रयास में कई दिन बिताए l यह मजेदार था, लेकिन हमारे प्रयास हमारे आस-पास की अच्छी तरह से निर्मित इमारतों का खराब प्रतिबिम्ब थे l वे लम्बे समय तक नहीं टिके l
उत्पत्ति 11 में, हमारा सामना एक प्रमुख भवन निर्माण परियोजना से होता है l “आओ, हम एक नगर . . . बना लें,” लोगों ने कहा, “एक गुम्मट बना लें, जिसकी चोटी आकाश से बातें करे”(पद.4) l इस प्रयास के साथ एक बड़ी समस्या यह थी कि लोगों ने इसे “अपना नाम [करने]” के लिए किया था(पद.4 l
यह मनुष्यों के लिए बार-बार का मुद्दा रहा है; हम अपने और अपनी उपलब्द्धियों के स्मारक बनाते हैं l बाद में बाइबल की कथा में, इस कहानी की तुलना परमेश्वर के मंदिर के निर्माण के लिए सुलैमान की प्रेरणा से की गयी है : “मैं ने अपने परमेश्वर यहोवा के नाम का एक भवन बनवाने की ठान रखी है”(1 राजा 5:5) l
सुलैमान ने समझा कि उसने जो कुछ भी बनाया है उसे परमेश्वर की ओर इशारा करना है न कि स्वयं की ओर l यह इतना महत्वपूर्ण सबक था कि उसने इसके बारे में एक भजन भी लिखा l भजन 127 की शुरुआत “यदि घर को यहोवा न बनाए, तो उसके बनानेवालों का परिश्रम व्यर्थ होगा”(पद.1) l मेरे बचपन के किले-निर्माण की तरह, हम जो बनाते हैं वह टिकेगा नहीं, लेकिन परमेश्वर का नाम और हम उसके लिए जो करते हैं उसका स्थायी महत्व है l