परमेश्वर का बगीचा
जीवन की सुंदरता और संक्षिप्तता (छोटापन) की याद दिलाने वाला एक पौधा मेरे सामने के दरवाजे के बाहर उगता है। पिछले वसंत में, मेरी पत्नी ने मूनफ्लावर बेलें लगाईं, उनके बड़े और गोल सफेद फूलों के खिलने के कारण उनका नाम मूनफ्लॉवर दिया गया है जो एक पूरे चांद जैसा दिखाई देता है। प्रत्येक फूल एक रात के लिए खिलता है और फिर अगली सुबह तेज धूप में मुरझा जाता है, फिर कभी नहीं खिलता। लेकिन पौधा हरा भरा रहता है, और हर शाम यह ताजे फूलों से भर जाता है। हर दिन आते जाते हम इसे देखना पसंद करते हैं और सोचते हैं कि जब हम लौटेंगे तो कौन सी नई सुंदरता हमारा स्वागत करेगी।
ये नाजुक फूल पवित्रशास्त्र से एक महत्वपूर्ण सत्य को याद दिलाते हैं। प्रेरित पतरस ने भविष्यवक्ता यशायाह के शब्दों को याद करते हुए लिखा, “क्योंकि तुम ने नाशमान नहीं पर अविनाशी बीज से परमेश्वर के जीवते और सदा ठहरनेवाले वचन के द्वारा नया जन्म पाया है। क्योंकि हर एक प्राणी घास की नाईं है, और उस की सारी शोभा घास के फूल की नाईं है: घास सूख जाती है, और फूल झड़ जाता है।" (1 पतरस 1:23–24)। लेकिन वह हमें विश्वास दिलाता है कि परमेश्वर अपने वादों को हमेशा के लिए पूरा करता है! (पद 25)। ।
एक बगीचे में फूलों की तरह, अनंत काल की तुलना में पृथ्वी पर हमारा जीवन संक्षिप्त (छोटा) है। लेकिन परमेश्वर ने हमारी संक्षिप्तता में सुंदरता को बताया है। यीशु के सुसमाचार के द्वारा, हम परमेश्वर के साथ एक नई शुरुआत करते हैं और उनकी प्रेमपूर्ण उपस्थिति में असीमित जीवन के उसके वादे पर भरोसा करते हैं। जब पृथ्वी के सूर्य और चंद्रमा केवल एक यादगार (स्मृति) होंगे, तब भी हम उसकी स्तुति करेंगे।

विश्वास की छलांग
जैसे ही मैं रेन फारस्ट (वर्षा वन) के सबसे ऊंचे स्थान से जिप लाइन पर चढ़ने को तैयार हुआ तो मेरे अंदर भय समा गया। मंच से कूदने से कुछ क्षण पहले, मेरे मन में हर उस बात के बारे में विचार आने लगे, जो गलत हो सकती है। परन्तु उस पूरे साहस के साथ जो मैं जुटा सकता था (और वापस मुड़ने के कुछ विकल्पों के साथ), मैंने मंच छोड दिया। जंगल की ऊंचाईयों से गिरते हुये हरे भरे पेड़ों से होकर मैं नीचे आ रहा था। हवा मेरे बालों से लग कर बह रही थी और धीरे धीरे मेरी चिन्ता लुप्त होने लगी; जैसे जैसे हवा में ग्रैविटी से मैं नीचे आ रहा था, अगला मंच मुझे साफ नज़र आने लगा और धीरे से रुकने के बाद, मुझे पता चल गया कि मैं सुरक्षित पहुँच गया हूँ।
ज़िप लाइन पर बिताया गया मेरा समय मेरे लिए ऐसे समय के रूप चित्रित किया गया है जिसमें परमेश्वर हमसे नये और चुनौतीपूर्ण प्रयास करवाता है। जब हम संदेह और अनिश्चितता को महसूस करते हैं तो पवित्रशास्त्र हमें परमेश्वर पर अपना भरोसा रखने और “अपनी समझ का सहारा न लेने” की शिक्षा देता है (नीतिवचन 3:5)। जब हमारा मन भय और शंकाओं से भरा होता है, तो हमारे मार्ग अस्पष्ट और विकृत हो सकते हैं। परन्तु एक बार जब हमने परमेश्वर को अपना मार्ग सौंपने के द्वारा विश्वास में कदम उठाने का निर्णय ले लिया, तो “वह हमारे लिए सीधा मार्ग निकालेगा” (पद 6)। प्रार्थना और पवित्रशास्त्र में समय व्यतीत करने के द्वारा यह सीखकर कि परमेश्वर कौन है, हम विश्वास की छलांग लगाने के लिए और अधिक आश्वस्त हो जाते हैं।
जब हम परमेश्वर से जुड़े रहते हैं और उसे हमारे जीवन में बदलावों के माध्यम से हमारा मार्गदर्शन करने की अनुमति देते हैं,तो हम जीवन की चुनौतियों में भी स्वतंत्रता और शांति प्राप्त कर सकते हैं।

हमारी सुरक्षा का स्थान
सेवानिवृत्त शिक्षिका डेबी स्टीफेंस ब्राउडर अधिक से अधिक लोगों को पेड़ लगाने के लिए राजी करने के मिशन पर हैं। और इसका कारण क्या है? गर्मी। संयुक्त राज्य अमेरिका में अत्यधिक गर्मी, मौसम सम्बन्धी मृत्यु होने का नम्बर एक कारण है। इसके उत्तर में वह कहती हैं, “मैं पेड़ों से आरम्भ कर रही हूँ।” समुदायों की रक्षा करने का एक महत्वपूर्ण तरीका गर्मी से बचाव का एक आवरण है जो पेड़ प्रदान करते हैं। "यह केवल समुदाय को सुंदर बनाने के बारे में नहीं है। यह जीवन या मृत्यु है।"
सच्चाई यह है कि छाया न केवल ताज़ा करती है, बल्कि संभावित रूप से जीवन रक्षक भी है, जिसके विषय में उस भजनकार को अच्छी रीति से मालूम होगा जिसने भजन संहिता 121 लिखा था; मध्य पूर्व में लू लगने का खतरा लगातार बना रहता है। यह वास्तविकता हमारी सुरक्षा के निश्चित स्थान के रूप में परमेश्वर के उस भजन के स्पष्ट वर्णन में गहराई को जोड़ती है, जिसकी देखभाल में “न तो दिन को धूप से, और न रात को चाँदनी से [हमारी] कुछ हानि होगी” (पद 6)।
इस वचन का अर्थ यह नहीं हो सकता कि यीशु पर विश्वास करने वाले लोग इस जीवन में पीड़ा या नुकसान से किसी भी रीति से मुक्त हैं (या उनके लिए गर्मी खतरनाक नहीं है!)। आखिरकार, मसीह स्वयं ही हमसे कहता है, “इस संसार में तुम्हें क्लेश होता है” (यूहन्ना 16:33)। लेकिन ईश्वर को हमारी छाया के रूप में दर्शाने वाला यह रूपक हमें यह भरोसा दिलाता है कि चाहे जो भी हमारे सामने आए, हमारा जीवन उसकी सतर्क देखभाल में है (भजन 121:7–8)। वहाँ हम उस पर भरोसा करके आराम पा सकते हैं, यह जानते हुए कि कोई भी चीज़ हमें उसके प्यार से अलग नहीं कर सकती (यूहन्ना 10:28; रोमियों 8:39)।

परीक्षाओं से बल पाना
जब मैंने कुछ लिफाफों में एक स्टिकर को देखा, जिस पर लिखा था, “मैंने आँखों की जाँच कराई है”, तो मेरी यादें फिर से ताजा हो गईं। अपने मन में मुझे अपने चार साल के बेटे का ध्यान आया जिसने अपनी आंखों में चुभने वाली दवा को सहन करने के बाद गर्व से यह स्टिकर लगा रखा था। आँख की कमजोर मांसपेशियों के कारण, उसे सही और शक्तिशाली आंख पर हर दिन घंटों तक पट्टी बांध कर रखना पड़ता था ताकि कमजोर आँख विकसित हो सके। उसे सर्जरी की भी आवश्यकता थी। उसने सांत्वना के लिए अपने माता-पिता के रूप में हमारी ओर देखते हुए, और बच्चों के समान विश्वास के साथ परमेश्वर पर निर्भर रहते हुए, एक-एक करके इन चुनौतियों का सामना किया। इन चुनौतियों के माध्यम से उसमें बहुत मजबूती (प्रतिरोध क्षमता) आ गई थी।
जो लोग परीक्षाओं और कष्टों को सहन करते हैं, वे अक्सर उस अनुभव के द्वारा परिवर्तित हो जाते हैं। परन्तु प्रेरित पौलुस ने और आगे बढ़कर कहा कि “हम अपने क्लेशों में भी घमंड करें” क्योंकि उन्हीं के द्वारा हम धीरज को विकसित करते हैं। धीरज से खरा निकलना उत्पन्न होता है; और खरे निकलने से, आशा उत्पन्न होती है (रोमियों 5:3-4)। पौलुस निश्चय ही उन परीक्षाओं को जानता था, जिसमें न केवल जहाज़ों का टूटना था, बल्कि कारावास भी जो उसके विश्वास के लिए था। फिर भी उसने रोम के विश्वासियों को लिखा कि “आशा से लज्जा नहीं होती, क्योंकि पवित्र आत्मा जो हमें दिया गया है उसके द्वारा परमेश्वर का प्रेम हमारे मन में डाला गया है” (पद 5)। इस प्रेरित ने पहचान लिया कि जब हम परमेश्वर पर अपना भरोसा रखते हैं तो परमेश्वर का आत्मा यीशु में हमारी आशा को जीवित रखता है।
आप चाहे किसी भी कठिनाई का सामना करें, परन्तु यह जान लें कि परमेश्वर आप पर अपना अनुग्रह और दया उंडेलेगा। वह आप से प्रेम करता है।

एक प्रेम भरी चेतावनी
2010 में इंडोनेशिया के सुमात्रा द्वीप पर सुनामी आई थी, जिसमें चार सौ से ज़्यादा लोग मारे गए थे। लेकिन अगर सुनामी चेतावनी प्रणाली ठीक से काम कर रही होती तो मौतों को रोका जा सकता था या कम किया जा सकता था। सुनामी का पता लगाने वाले नेटवर्क (ब्यूय) अलग हो गए थे और और बहकर दूर चले गए थे।
यीशु ने कहा कि उसके चेलों की यह जिम्मेदारी है कि वे अपने साथी चेलों को उन बातों के बारे में चेतावनी दें जो उन्हें आत्मिक रूप से हानि पहुँचा सकती हैं, जिसमें वह पाप भी शामिल है जिसका पश्चाताप नहीं किया गया है। किसी अन्य व्यक्ति द्वारा किए गए अपराध के विरुद्ध, विनम्रतापूर्वक, निजी तौर पर, और प्रार्थनापूर्वक अपराधी विश्वासी को पाप के बारे में “बताया” जा सकता है (मत्ती 18:15)। यदि व्यक्ति पश्चाताप करता है, तो संघर्ष को सुलझाया जा सकता है और संबंध बहाल किया जा सकता है । यदि वह विश्वासी पश्चाताप करने से इन्कार करता है, तो “एक या दो अन्य लोग” उस संघर्ष को सुलझाने में सहायता कर सकते हैं (पद 16)। यदि वह पापी व्यक्ति फिर भी पश्चाताप नहीं करता, तो इस मुद्दे को “कलीसिया” के सामने लाया जाना चाहिए (पद 17)। यदि वह अपराधी फिर भी पश्चाताप न करे, तो उस व्यक्ति को मंडली की संगति से निकाल देना चाहिए, परन्तु निश्चित रूप से उसके लिए अब भी प्रार्थना की जा सकती है और उस पर मसीह का प्रेम प्रकट किया जा सकता है।
आइए हम उस ज्ञान और साहस के लिए प्रार्थना करें जिसकी हमें आवश्यकता है, अपश्चातापी पाप के खतरों के बारे में एक दूसरे को प्यार से चेतावनी देने के लिए और हमारे स्वर्गीय पिता और अन्य विश्वासियों के लिए पुनःस्थापन की खुशियों के बारे में बताने के लिए। जब हम ऐसा करेंगे तो यीशु “ वहां मैं उन के बीच में होता हूं” (पद 20)।