जीवन भर के लिए मित्र
हम खाने की मेज पर बैठे थे जब मेरे नौ वर्षीय नाती ने मुस्कुराते हुए कहा, “मैं बिलकुल नानी की तरह हूँ l मुझे पढ़ना पसंद है!” उसकी बातों से मेरे दिल में ख़ुशी आ गयी, मैंने उस साल के बारे में सोचा जब वह बीमार था और स्कूल न जाकर घर पर ही रहता था l उसके एक लम्बी झपकी लेने के बाद, हम साथ-साथ बैठकर पढ़ने लगे l मैं अपनी माँ से मिली प्रेमपूर्ण पुस्तकों की विरासत को आगे बढ़ाते हुए खुश थी l
लेकिन यह सबसे महत्वपूर्ण विरासत नहीं है जिसे मैं अपने नाती-नातनियों को सौंपना चाहती हूँ l मैं प्रार्थना करती हूँ कि विश्वास की जो विरासत मैंने अपने माता-पिता से प्राप्त की है और जिसे मैं अपने बच्चों को सौंपना चाहती हूँ, उससे मेरे नाती-नातनियों को भी विश्वास की ओर बढ़ने में मदद मिलेगी l
तीमुथियुस के पास एक धर्मनिष्ट माँ और नानी—और एक आध्यात्मिक गुरु, प्रेरित पौलुस की विरासत थी l प्रेरित ने लिखा, “मुझे तेरे उस निष्कपट विश्वास की सुधि आती है, जो पहले तेरी नानी लोइस और तेरी माता यूनीके में था, और मुझे निश्चय है कि तुझ में भी है”(2 तीमुथियुस 1:5) l
शायद हम सोच सकते हैं कि हमारा जीवन दूसरों के लिए एक अच्छा उदाहरण बनने के लिए पर्याप्त रूप से सकारात्मक नहीं है l हो सकता है कि जो विरासत हमें मिली वह अच्छी नहीं थी l लेकिन हमारे बच्चों, पोते-पोतियों/ नाती-नातनियों या किसी भी बच्चे के जीवन में विश्वास की विरासत बनाने में कभी देर नहीं होती है l परमेश्वर की सहायता से, हम विश्वास के बीज बोते हैं l यह वही है जो विश्वास को बढ़ाता है(1 कुरिन्थियों 3:6-9) l


पापियों के लिए एक अस्पताल
यदि आप नेदरलैंड्स के रोएरमंड(Roermond) में प्रोटेस्टेंट और कैथोलिक कब्रिस्तानों के किनारे लम्बी पुरानी ईंट की दीवार के पास टहल रहे हों, तो आपको एक अजीब दृश्य देखने को मिलेगा l दीवार के दोनों ओर दो कब्रों पर समान विशाल हेडस्टोंस(headstones—कब्र के सिरहाने के पत्थर) हैं : एक प्रोटेस्टेंट पति के लिए और एक उसकी कैथोलिक पत्नी के लिए l उन्नीसवीं शताब्दी के दौरान सांस्कृतिक नियमों के अनुसार उन्हें अलग-अलग कब्रिस्तानों में दफनाया जाना आवश्यक था l हालाँकि, वे अपने अन्त/होनी/fate को स्वीकार नहीं करते l उनकी असामान्य हेडस्टोन(headstone) इतने ऊंचे है कि वे दीवार से ऊपर हैं ताकि ऊपर केवल एक या दो फुट की हवा उन्हें अलग कर सके l प्रत्येक के ऊपर, एक गढ़ा हुआ(sculptured) हाथ दूसरे की ओर बढ़ा हुआ है, दोनों ही एक दूसरे का हाथ पकड़े हुए हैं l इस जोड़े ने मौत के बाद भी अलग होने से इनकार कर दिया l
श्रेष्ठगीत प्रेम की सामर्थ्य को समझाता है l सुलैमान कहता है, “प्रेम मृत्यु के तुल्य सामर्थी है”(8:6) l सच्चा प्यार शक्तिशाली, और अनवरत है l “यह ज्वाला अग्नि की दमक है”(पद.6) l सच्चा प्यार कभी समर्पण नहीं करता, शांत नहीं किया जा सकता और नष्ट नहीं होता l सुलैमान लिखता है, “पानी की बाढ़ से भी प्रेम नहीं बुझ सकता”(पद.7) l
“परमेश्वर प्रेम है”(1 यूहन्ना 4:16) l हमारा सबसे मजबूत प्रेम हमारे प्रति उसके अनवरत प्रेम का एक खंडित प्रतिबिम्ब मात्र है वह किसी भी सच्चे प्यार का अंतिम श्रोत है, कोई भी प्यार जो बांधे रहता है l

जिन्दगी का मतलब
मेरी हाई स्कूल वार्षिकी(year book) को देखते हुए, मेरे पोते-पोतियों को तस्वीरों में पुराने हेयर स्टाइल, कपड़े और “पुराने ज़माने” की कारों को देखकर आश्चर्य हुआ l मैंने कुछ अलग देखा—पहले लम्बे समय के मित्रों की मुस्कुराहट, कुछ जो अभी भी मित्र हैं l हालाँकि, इससे भी अधिक, मैंने परमेश्वर की धारण (सुरक्षित रखनेवाली) शक्ति को देखा l उसकी सौम्य उपस्थिति मेरे चारोंओर थी जब मैं स्कूल में अनुकूल(adjust) होने में संघर्ष कर रही थी l उसकी सुरक्षित रखने वाली दयालुता मुझ पर नज़र रखती थी—वह दयालुता जो वह उन सभी को देता है उस उसे खोजते हैं l
दानिय्येल परमेश्वर की उपस्थिति जानता था l बेबीलोन में अपने निर्वासन के दौरान, दानिय्येल राजा की निषेधाज्ञा(पद.7-9) के बावजूद “अपने घर में गया जिसकी उपरौठी कोठरी की खिड़कियाँ यरूशलेम की ओर खुली रहती थीं”(दानिय्येल 6:10) और “प्रार्थना” की l अपने प्रार्थनापूर्ण दृष्टिकोण से, दानिय्येल परमेश्वर को याद करता था जिसकी निरंतर उपस्थिति ने उसे सहारा दिया—उसकी प्रार्थनाओं को सुनना और उत्तर देना l इस प्रकार, परमेश्वर उसे फिर से सुनेगा, उत्तर देगा और उसे बनाए रखेगा l
फिर भी, नए क़ानून के बावजूद, दानिय्येल अभी भी परमेश्वर की उपस्थिति की तलाश करनेवाला था चाहे उसके साथ कुछ भी हो जाए l और इसलिए उसने जैसे पहले भी कई बार की थी प्रार्थना की (पद.10) l शेरों के मांद में रहते हुए, प्रभु के एक दूत ने दानिय्येल को सुरक्षित रखा क्योंकि उसके विश्वासयोग्य परमेश्वर ने उसे बचाया था(पद.22) l
वर्तमान आजमाइशों के दौरान अपने अतीत को देखने से हमें परमेश्वर की विश्वासयोग्यता को याद करने में मदद मिल सकती है l जैसा कि राजा दारा ने भी परमेश्वर के बारे में कहा, “वही बचाने और छुड़ानेवाला है; और स्वर्ग में और पृथ्वी पर चिन्हों और चमत्कारों का प्रगट करनेवाला है”(पद.27) l परमेश्वर तब भी अच्छा था, और अब भी अच्छा है l उसकी उपस्थिति आपको बनाए रखेगी l

मैंने घंटियाँ सुनी
मुझे पोंडिचेरी में अपना सप्ताहांत बहुत पसंद आया—फ्रेंच क्वार्टर(French Quarter) में परेड पर जाना, संग्रहालय का दौरा करना और ग्रिल्ड(भुनी हुयी) मछली का स्वाद लेना l लेकिन जब मैं अपने मित्र के खाली कमरे में सोया, तो मुझे अपनी पत्नी और बच्चों की याद आने लगी l मैं अन्य शहरों में प्रचार करने के अवसरों का आनंद लेता हूँ, लेकिन मुझे सबसे अधिक आनंद घर पर रहने में आता है l
यीशु के जीवन का एक पहलु जिसे कभी-कभी अनदेखा कर दिया जाता है वह यह है कि उसकी कई विशेष घटनाएं सड़क/मार्ग पर घटित हुयीं l परमेश्वर के पुत्र ने बैतलहम में हमारे संसार में प्रवेश किया, जो उनके स्वर्गिक घर से बहुत दूर और उनके परिवार के गृहनगर नासरत से बहुत दूर था l जनगणना के लिए बैतलहम शहर में बड़ी संख्या में विस्तृत परिवार उमड़ रहे थे, इसलिए लूका का कहना है कि वहाँ एक भी अतिरिक्त कटैलिमा(katalyma), या “अतिथि कक्ष” उपलब्ध नहीं था (लूका 2:7) l
यीशु के जन्म के समय जो कमी थी वह उनकी मृत्यु पर दिखायी दी l जब यीशु अपने शिष्यों को यरूशलेम में ले गया, तो उसने पतरस और यूहन्ना से कहा कि वे उनके फसह के भोज की तैयारी करें l उसे घड़ा ले जाने वाले व्यक्ति का उसके घर तक पीछा करना था और मालिक से थेकटालिमा(thekatalyma)—अतिथि कक्ष, जहाँ यीशु मसीह और उनके शिष्य अंतिम भोज खा सकते थे, के लिए पूछना था(22:10-12) l वहाँ, उधार लिए गए स्थान में यीशु ने जिसे आज प्रभु भोज (Communion) कहा जाता है उसे स्थापित किया, जिसने उसके आसन्न क्रूसीकरण का पूर्वाभास दिया (पद.17-20) l
हम घर से प्यार करते हैं, लेकिन अगर हम यीशु की आत्मा के साथ यात्रा करते हैं, तो एक अतिथि कक्ष भी उसके साथ सहभागिता का स्थान हो सकता है l
