लोग मुझसे पूछते हैं कि क्या मेरे पास पंचवर्षीय योजना है l जिस सड़क पर मैंने कभी यात्रा नहीं की है, मैं पांच साल “आगे” की योजना कैसे बना सकता हूँ?

मैं मुड़कर 1960 के दशक में देखता हूँ जब मैं सैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में विद्यार्थी के मध्य पासबान था l मैं कॉलेज में भौतिक शिक्षा में विशेषता प्राप्त करने गया था और बहुत आनंद किया था, परन्तु मैं विद्वता हासिल नहीं कर सका l अपनी नयी जिम्मेदारी में मैंने खुद को अयोग्य महसूस किया l अधिकाँश दिन मैं परिसर में घूमता रहा, अँधेरे में एक अंधे आदमी की तरह टटोलते हुए, परमेश्वर से पूछता रहा कि मुझे क्या करना है l एक दिन एक विद्यार्थी “अनपेक्षित रूप से” मुझ से अपनी बिरादरी में एक बाइबल अध्ययन में अगुवाई करने को कहा l यही आरम्भ था l

परमेश्वर एक मोड़ पर खड़े होकर रास्ता नहीं बताता है : वह मार्गदर्शक हैं, कोई संकेतचिन्ह नहीं l वह हमारे साथ चलता है, उन रास्तों पर ले चलता है जिसकी हमने कभी कल्पना भी नहीं की थी l केवल हमें उसके साथ-साथ चलना है l

मार्ग सरल नहीं होगा; मार्ग में “कठिन स्थान” भी होंगे l  किन्तु परमेश्वर ने वादा किया है कि वह “अंधियारे को उजियाला” में बदल देगा और हमें “कभी न [त्यागेगा]” (यशायाह 42:16) l वह पूरे रास्ते हमारे साथ रहेगा l

पौलुस कहता है कि परमेश्वर “हमारी विनती और समझ से कहीं अधिक काम कर सकता हैं” (इफिसियों 3:20) l हम योजना बना सकते हैं और कल्पना कर सकते हैं, परन्तु हमारे प्रभु की कल्पना हमारी योजनाओं से परे है l हमें उन्हें बंधनमुक्त रखना चाहिए और देखना चाहिए कि परमेश्वर के मन में क्या है l