Month: मार्च 2020

परमेश्वर की देखभाल में

हमारे छोटे पोते ने अलविदा कहा, फिर एक प्रश्न के साथ लौटा l “दादी, आप बरामदा पर क्यों खड़ी हैं और जब तक हम चले नहीं जाते, तब तक आप देखती हैं l” बहुत छोटा होने के कारण उसका प्रश्न “अति सुन्दर” था और मैं मुस्कुरायी l हालाँकि, उसकी चिंता को देखते हुए, मैंने एक अच्छा जवाब देने की कोशिश की l “इसलिए कि, यह शिष्टाचार है,” मैंने उससे कहा l “यदि तुम मेरे अतिथि हो तो जब तक तुम चले नहीं जाते, देखना यह प्रगट करता है  कि मुझे तुम्हारी परवाह है l” उसने मेरे उत्तर को तौला, लेकिन उसके बाद भी हैरान दिखाई दिया l इसलिए, मैंने उसे सरल सत्य बता दिया l “मैं देखती हूँ,” मैंने कहा, “क्योंकि मैं तुमसे प्यार करती हूँ l जब मैं तुम्हारे कार को दूर जाते हुए देखती हूँ, तो मैं जानती हूँ कि तुम सुरक्षित घर जा रहे हो l” वह मुस्कुराया, और कोमलता से मुझे प्यार किया l अंत में, वह समझ गया l 

उसकी बच्चे की सी समझ ने मुझे याद दिलाया कि हम सभी को क्या याद रखना चाहिए – कि हमारे स्वर्गिक पिता हम में से प्रत्येक, जो उसके अनमोल बच्चे हैं पर लगातार नज़र रखता है l जैसा कि भजन 121 कहता है, “यहोवा तेरा रक्षक है; यहोवा तेरी दाहिनी ओर तेरी आड़ है” (पद.5) l 

इस्राएल के तीर्थयात्रियों के लिए कितना सुन्दर आश्वासन है क्योंकि वे यरूशलेम में  आराधना करने के लिए जाते समय खतरनाक मार्गों पर चढ़कर जाते थे l “न तो दिन को धूप से, और न रात को चांदनी से तेरी कुछ हानि होगी l यहोवा सारी विपत्ति से तेरी रक्षा करेगा; वह तेरे प्राण की रक्षा करेगा” (पद.6-7) l इसी तरह, जैसा कि हम प्रत्येक अपने जीवन के मार्ग में आगे बढ़ते हैं, कभी-कभी आध्यात्मिक खतरा या नुक्सान का सामना करते हैं, “यहोवा तेरे आने जाने में तेरी रक्षा अब से लेकर सदा तक करता रहेगा” (पद.8) l 

पवित्र आराधना

जोसफ ने एक चर्च की पासबानी की जो अपने कार्यक्रमों और मंचीय प्रस्तुतियों के लिए जाना जाता था l वे बहुत अच्छे तरीके से किये जाते थे, फिर भी उन्हें चिंता थी कि चर्च की व्यस्तता एक व्यवसाय में बदल गयी थी l क्या चर्च सही कारणों से या अपनी गतिविधियों के कारण बढ़ रहा था? जोसफ पता लगाना चाहता था, इसलिए उसने एक साल के लिए सभी अतिरिक्त चर्च कार्यक्रमों को रद्द कर दिया l उनकी मण्डली एक जीवित मंदिर होने पर ध्यान केन्द्रित करने वाली थी जहाँ लोग परमेश्वर की आराधना करते हैं l 

जोसफ का निर्णय अति लगता है, जब तक कि आपने ध्यान नहीं देते हैं कि यीशु मंदिर के बाहरी आंगन में प्रवेश किया l पवित्र स्थान जिसे साधारण प्रार्थनाओं से भरा होना चाहिए था, आराधना व्यवसाय का भंवर बन गया था l यहाँ से अपने कबूतर ले जाओ! परमेश्वर की आवश्यकता के अनुसार सफ़ेद सोसन!” यीशु ने व्यापारियों के चौकियाँ उलट दी और उन लोगों को रोक दिया जिन्होंने उनसे सामान ख़रीदा था l जो कुछ वे कर रहे थे, उस पर क्रोधित होकर, उसने यशायाह 56 और यिर्मयाह 7 को उद्धरित किया : “मेरा घर सब जातियों के लिए प्रार्थना का घर कहलाएगा पर तुम ने इसे डाकुओं की खोह बना दी है” (मरकुस 11:17) l अन्यजातियों का आँगन, बाहरी लोगों के लिए आराधना करने का स्थान, पैसे कमाने के लिए एक सांसारिक बाज़ार में बदल गया था l 

व्यापार में या व्यस्त रहने में कुछ गलत नहीं है l परन्तु यह चर्च का आशय नहीं है l हम परमेश्वर के जीवित मंदिर हैं, और हमारा मुख्य काम यीशु की आराधना करना है l जैसा कि यीशु ने किया था, हमें सभवतः किसी भी चौकी को उलटना ज़रूरी नहीं है, लेकिन वह हमें समान रूप से कुछ कठोर कार्य करने के लिए बुला रहा हो l 

अत्यधिक विशेषता होना

मशीन ऑपरेटर्स के पास एक सामान्य खतरा होता है जो उनके विभाग के जुड़ा होता है – दुर्घटनाओं का खतरा l एक सामान्य चोट उँगलियों का भारी मशीनों के पहियों के बीच आ जाना होता है; खासतौर पर अंगूठे की हानि बहुत कठिन हो सकती है l यह जीविका का अंत करने वाली चोट नहीं है, परन्तु अंगूठे का नहीं होना चीजों को बदल देती है l अपने अंगूठे का उपयोग किये बिना, अपने दांतों को ब्रश करने या शर्ट का बटन लगाने या अपने बालों को कंघी करने या अपने जूते बाधने या यहाँ तक कि खाने की कोशिश करें l आपके शरीर के उस छोटे से अनदेखे सदस्य की महत्वपूर्ण भूमिका होती है l

प्रेरित पौलुस चर्च में एक समान परिदृश्य को इंगित करता है l जो अक्सर कम दिखाई देते हैं और अक्सर कम मुखर सदस्य कभी-कभी दूसरों से “मुझे आपकी ज़रूरत नहीं है” की प्रतिक्रिया अनुभव करते हैं (1 कुरिन्थियों `12:21) l आमतौर पर यह अव्यक्त होता है, परन्तु कई बार ऐसा प्रगट रूप में कहा जाता है l 

परमेश्वर हमें एक दूसरे के लिए समान चिंता और सम्मान करने के लिए कहता है (पद.25) l  हम में से हर एक मसीह के शरीर का अंग है (पद.27), प्राप्त वरदान के बावजूद, और हमें एक दूसरे की ज़रूरत है l एक प्रकार से हम में से कुछ आखें और कान हैं, और हम में से कुछ अंगूठे हैं l लेकिन हम में से प्रत्येक मसीह की देह में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, कभी-कभी जो आँखों से जितना दिखाई देता है उससे कहीं अधिक l 

दो अच्छे हैं

हवाई में,1997 के आयरनमैंन ट्रायथलॉन (एक ऐसा खेल जिसमें साइकिल चलाना, तैराकी और लम्बी दूरी दौड़ना शामिल है) में, दो महिलाएँ समापन रेखा तक पहुँचने के लिए लड़खड़ाते हुए संघर्ष करती रहीं l जब तक सियन वेल्च वेंडी इंग्राहम से टकराई नहीं, तब तक थकीं हुई, धाविकाएँ अपने डगमगाते पैरों पर डटी रहीं l दोनों ज़मीं पर गिर गयीं l खड़े होने के लिए संघर्ष करते हुए, वे आगे को लड़खड़ा गयीं, और समापन रेखा से लगभग बीस मीटर पहले फिर गिर पड़ीं l जब वेंडी अत्यंत धीमी गति से आगे बढ़ने लगी, तो भीड़ ने तालियाँ बजाईं l जब उसकी प्रतियोगी ने पीछा किया, तो उन्होंने जोर से शाबाशी दी l वेंडी ने चौथे स्थान पर समापन रेखा पार की, और वह अपने समर्थकों की खुली बाहों में गिरी l फिर वह मुड़कर अपनी गिरी हुयी बहन के पास पहुँचीं l सियन आगे की ओर झुककर, अपनी थकी हुए भुजा वेंडी के हाथों की ओर और समापन रेखा कि ओर बढ़ाया l जैसे ही उसने पांचवें स्थान पर दौड़ पूरी की, भीड़ ने ऊँची आवाज़ में उनको अनुमोदित किया l 

इस जोड़े द्वारा 140 मील की दौड़ पूरी करने से बहुत लोग प्रेरित हुए l परन्तु थके प्रतियोगी के एक साथ धीरज से दौड़ने की छवि मेरे मन में अंकित है, और सभोपदेशक 4:9-11 में जीवन को समर्थ बनानेवाली सच्चाई को दृढ़ करता है l 

जीवन में हम सभी को सहायता चाहिए इस बात को स्वीकार करने में कोई शर्म की बात नहीं है (पद.9), विशेषकर इसलिए कि हम ईमानदारी  से अपनी आवश्यकताओं से इन्कार नहीं कर सकते हैं या सर्वज्ञानी परमेश्वर से उसे छिपा नहीं सकते हैं l एक समय या किसी अन्य समय पर, चाहे वह शारीरिक या भावनात्मक रूप से हो, हम सभी गिरते हैं l जब हम दृढ़ रहते हैं यह जानना कि हम अकेले नहीं हैं हमें आराम पहुंचाता है l जब हमारा स्वर्गिक पिता हमारी मदद करता है, वह हमें दूसरे ज़रुरतमंदों तक पहुँचने में समर्थ बनाते हुए, यह निश्चय देता है कि वे भी अकेले नहीं हैं l