एक प्रसिद्ध अंग्रेजी फिल्म में, एक उम्रदराज संगीतकार मुलाकात करने आए एक पुराहित के लिए पियानो पर अपना कुछ संगीत बजाता है l लज्जित पुरोहित कबूल करता है कि वह धुन को नहीं पहचानता है l तुरंत ही एक परिचित धुन बजाते हुए संगीतकार कहता है, “और इसका क्या?” “मुझे नहीं पता था कि उसे आपने लिखा था,” वह पुरोहित कहता है l “मैंने नहीं” उसने जबाब दिया l “वह मोजार्ट था!” जब दर्शकों को पता चलता है, मोजार्ट की सफलता ने इस संगीतकार में एक गहरी ईर्ष्या उत्पन्न कर दी थी──यहाँ तक कि मोजार्ट की मृत्यु में एक भूमिका निभाने में अग्रणी l 

एक और ईर्ष्या की कहानी के केंद्र में एक गीत निहित है l गोलियत पर दाऊद की जीत के बाद, इस्राएलियों ने दिल से गाया “शाऊल ने तो हजारों को, परन्तु दाऊद ने लाखों को मारा है” (1 शमूएल 18:7) l यह तुलना राजा शाऊल के साथ अच्छी तरह नहीं बैठती l दाऊद की सफलता से डाह रखकर और अपना सिंहासन खोने के डर से (पद. 8-9), शाऊल दाऊद को मारने के लिए, लम्बे समय तक उसका पीछा करता है l 

संगीत के साथ इस संगीतकार या शक्ति के साथ शाऊल की तरह, हम आमतौर पर उन लोगों से ईर्ष्या करने के लिए ललचाते हैं जिनके पास हमारे पास समान लेकिन अधिक वरदान हैं l और चाहे उनके काम में गलती निकालनी हो या उनके काम को कम करना हो, हम भी अपने “प्रतिद्वंदियों” को नुक्सान पहुँचाने की कोशिश कर सकते हैं l 

शाऊल को दिव्य रूप से उसके कार्य के लिए चुना गया था (10:6-7,24), एक स्थिति जिसे  ईर्ष्या के बजाय उसके अंदर सुरक्षा को बढ़ावा देना चाहिए था l चूँकि हम में से प्रत्येक के पास भी अद्वितीय बुलाहट है (इफिसियों 2:10) ईर्ष्या पर विजय पाने का शायद सर्वोत्तम तरीका तुलना करना बंद करना है l इसके बदले आइये हम परस्पर सफलताओं का उत्सव मनाएँ l