Month: अक्टूबर 2025

एक असंभव उपहार

मैं अपनी सास के जन्मदिन के लिए सही उपहार पाकर बहुत खुश थी: यह एक सुन्दर कंगन था और उस कंगन में उनके जन्म का पत्थर (birth stone) भी जड़ा हुआ था! किसी के लिए सही उपहार ढूँढना हमेशा एक बेहद खुशी की बात होती है। लेकिन क्या होगा अगर किसी व्यक्ति को जिस उपहार की ज़रूरत है वह देना हमारी सामर्थ्य से बाहर है। हममें से बहुत से लोग चाहते हैं कि हम किसी को मानसिक शांति, आराम, या फिर धैर्य भी दे सकें। काश  उन्हें खरीदा जा सकता और रिबन के साथ लपेट कर दिया  जा सकता! 
इस प्रकार के उपहार एक व्यक्ति द्वारा दूसरे व्यक्ति को देना असंभव है। फिर भी यीशु—मानव शरीर में परमेश्वर—उन लोगों को जो उस पर विश्वास करते हैं एक ऐसा "असंभव" उपहार देता है : शांति का उपहार। स्वर्ग में उठाये जाने से पहले और शिष्यों को छोड़ने से पहले, यीशु ने उन्हें पवित्र आत्मा के वादे से सांत्वना दी: वह "तुम्हें सब बातें सिखाएगा, और जो कुछ मैं ने तुम से कहा है, वह सब तुम्हें स्मरण कराएगा" (यूहन्ना 14:26)। उसने उन्हें शांति प्रदान की - अपनी शांति - एक स्थायी, विश्वसनीय उपहार के रूप में, जब उनके ह्रदय परेशान थे या जब वे भय का अनुभव कर रहे थे। वह स्वयं, परमेश्वर के साथ, दूसरों के साथ और हमारे भीतर हमारी शांति है। 
हम अपने प्रियजनों को अतिरिक्त धैर्य या बेहतर स्वास्थ्य देने में सक्षम नहीं हो सकते हैं जो वे चाहते हैं। न ही उन्हें वह शांति देना हमारे वश में है जिसकी हम सभी को जीवन के संघर्षों के दौरान अत्यंत आवश्यकता होती है। लेकिन हम आत्मा के द्वारा प्रेरित होकर उन्हें सच्ची और स्थायी शांति के दाता और प्रतीक यीशु के बारे में बता सकते हैं। 
-कर्स्टन होल्म्बर्ग 

विश्वास के प्रति समर्पण

एक सर्दियों की सुबह जब मैंने पर्दा खोला तो मुझे एक चौंकाने वाले दृश्य का सामना करना पड़ा — कोहरे की एक दीवार I मौसम पूर्वानुमानकर्ता ने इसे "जमने वाला कोहरा" बताया। हमारे स्थान के लिए यह असामान्य था , यह कोहरा और भी बड़े आश्चर्य के साथ आया: थोड़ी ही देर में "एक घंटे में" नीले आकाश और धूप के लिए एक और पूर्वानुमान आया I  "असंभव," मैंने अपने पति से कहा। "हम मुश्किल से एक फुट आगे देख सकते हैं।" परन्तु निश्चित रूप से, एक घंटे से भी कम समय में, कोहरा छंट गया था, और स्पष्ट नीले आकाश और धूप, में बदल चुका था। 
खिड़की के पास खड़े होकर, मैंने अपने भरोसे के स्तर पर विचार किया जब मैं जीवन में केवल कोहरा ही देख सकती हूँ। मैंने अपने पति से पूछा, "क्या मैं केवल उसी चीज़ के लिए परमेश्वर पर भरोसा करती हूँ जिसे मैं पहले से देख सकती हूँ?" 
जब राजा उज्जिय्याह की मृत्यु हो गई और यहूदा में कुछ भ्रष्ट शासक सत्ता में आए, तो यशायाह ने भी ऐसा ही प्रश्न पूछा। हम किस पर भरोसा कर सकते हैं? परमेश्वर ने यशायाह को इतना अद्भुत दर्शन देकर प्रतिक्रिया व्यक्त की कि इससे भविष्यवक्ता को विश्वास हो गया कि आने वाले बेहतर दिनों के लिए वर्तमान में उस पर भरोसा किया जा सकता है। जैसा कि यशायाह ने प्रशंसा की, "जिसका मन तुझ में धीरज धरे हुए है, उसकी तू पूर्ण शांति के साथ रक्षा करता है" (यशायाह 26:3)। भविष्यवक्ता ने आगे कहा, "यहोवा पर सदा भरोसा रख, क्योंकि प्रभु, यहोवा, सनातन चट्टान है" (पद. 4)। 
जब हमारा मन परमेश्वर पर केंद्रित होता है, तो हम धुंधले और भ्रमित करने वाले समय में भी उस पर भरोसा कर सकते हैं। हम अभी स्पष्ट रूप से नहीं देख सकते हैं, लेकिन अगर हम परमेश्वर पर भरोसा करते हैं, तो हम आश्वस्त हो सकते हैं कि उसकी मदद आने वाली है। 
-पैट्रिशिया रेबोन 

जानना और प्रेम करना

खेल लेखक जोनाथन जार्क्स ने अपने सशक्त लेख "क्या मेरा बेटा तुम्हें जानता है?" में टर्मिनल (अंतिम चरण का)  कैंसर से अपनी लड़ाई, और दूसरों द्वारा अपनी पत्नी और छोटे बेटे की अच्छी देखभाल करने की इच्छा के बारे में लिखा। चौंतीस वर्षीय व्यक्ति ने यह लेख अपनी मृत्यु से ठीक छह महीने पहले लिखा था। जार्क्स, यीशु में विश्वास करने वाले, जार्क्स जिसके पिता की मृत्यु तब हो गई थी जब वह एक युवा वयस्क थे, उन्होंने पवित्रशास्त्र से कुछ वचन साझा किये जो विधवाओं और अनाथों की देखभाल के बारे में बताते है (निर्गमन 22:22; यशायाह 1:17; जेम्स 1:27)। और अपने दोस्तों को निर्देश देते हुए उन्होंने लिखा कि, "जब मैं तुम्हें स्वर्ग में देखूंगा, तो केवल एक ही चीज पूछूंगा- क्या तुमने मेरे बेटे और मेरी पत्नी की अच्छी तरह देखभाल करी ? . . . क्या मेरा बेटा तुम्हें जानता है?”  
राजा दाऊद ने सोचा कि “क्या शाऊल के घराने में से कोई अब तक बचा है जिसको मैं [अपने प्रिय मित्र] योनातन के कारण प्रीति दिखाऊँ" (2 शमूएल 9:1)। योनातन का बेटा, मपीबोशेत, जो एक दुर्घटना के कारण "दोनों पैरों से लंगड़ा" था (पद- 3) (देखें 4:4), को राजा के पास लाया गया। दाऊद ने उस से कहा, तेरे पिता योनातान के कारण मैं निश्चय तुझको प्रीति दिखाऊंगा। और तेरे दादा शाऊल की सारी भूमि तुझे फेर दूंगा, और तू मेरी मेज पर नित्य भोजन किया कर” (9:7)। दाऊद ने मपीबोशेत की प्रेमपूर्ण देखभाल दिखाई, और यह संभव है कि समय के साथ वह वास्तव में उसे जान भी गया होगा (देखें 19:24-30)। 
यीशु ने हमें दूसरों से वैसे ही प्रेम करने के लिए बुलाया है जैसे वह हमसे प्रेम करता है (यूहन्ना 13:34)।और जिस तरह वह हमारे अंदर और हमारे माध्यम से कार्य करता है, उसी तरह हम भी दूसरों को सही मायने में अच्छी तरह से जानें और उनसे प्रेम करें। 
-टॉम फेल्टन 

मेरे मन की आँखे खोलो

2001 में, क्रिस्टोफर डफ़ल नाम के, समय से पहले जन्मे एक बच्चे ने जीवित बचकर डॉक्टरों को आश्चर्यचकित कर दिया। पाँच महीने की उम्र में, उसे पालक देखभाल व्यवस्था (foster care system) में भेज दिया गया जब तक कि उसकी मौसी के परिवार ने उसे गोद नहीं लिया। एक शिक्षक को एहसास हुआ कि चार वर्षीय क्रिस्टोफर, हालांकि अंधा था और ऑटिज्म से पीड़ित था, लेकिन उसकी आवाज़ का उतार- चढ़ाव एकदम सही था। छह साल के बाद, क्रिस्टोफर ने चर्च के मंच पर खड़े होकर गाया, "ओपन द आईज़ ऑफ़ माय हार्ट।" (मेरे मन की आँखे खोलो) यह वीडियो लाखों लोगों तक ऑनलाइन पहुंचा। 2020 में, क्रिस्टोफर ने विकलांगता वकील के रूप में सेवा करने के अपने लक्ष्यों को साझा किया। वह यह साबित करना जारी रखता है कि परमेश्वर की योजना के प्रति उसके  मन  की आँखें खुली होने से संभावनाएँ असीमित हो जाती हैं । 
प्रेरित पौलुस ने इफिसुस में कलीसिया की उनके साहसिक विश्वास के लिए सराहना की (1:15-16)। उन्होंने परमेश्वर से उन्हें “ज्ञान और प्रकाश की आत्मा” देने के लिए कहा, ताकि वे "उसे बेहतर जान सकें" (पद 17)। उन्होंने प्रार्थना की कि उनकी आंखें " ज्योतिमान " हो जाएं या खुल जाएं, ताकि वे उस आशा और विरासत को समझ सकें जिसका वादा परमेश्वर ने अपने लोगों से किया था (पद 18)। 
जब हम परमेश्वर से स्वयं को हमारे सामने प्रकट करने के लिए कहते हैं, हम उसे और अधिक जान सकते हैं और विश्वास के साथ उसके नाम, शक्ति और अधिकार की घोषणा कर सकते हैं (पद 19-23)। यीशु में विश्वास और परमेश्वर के सभी लोगों के प्रति प्रेम के साथ, परमेशवर से हमारे मन की आँखें खुली रखने के लिए कहते हुये हम उन तरीकों से जी सकते हैं जो उसकी असीमित संभावनाओं को प्रमाणित करते हैं, । 
-सोचील डिक्सन 

दुखियों के लिए आशा

"ज्यादातर लोगों के मन में ऐसे घाव के निशान होते हैं जिन्हें दूसरे लोग देख या समझ नहीं सकते।" यह बेहद ईमानदार शब्द, मेजर लीग बेसबॉल खिलाड़ी एंड्रेल्टन सिमंस की ओर से आए, जिन्होंने मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के कारण 2020 के नियमित सीज़न के अंत से बाहर होने का विकल्प चुना। अपने निर्णय पर विचार करते हुए, सिमंस ने महसूस किया कि उन्हें उनकी तरह समान चुनौतियों का सामना करने वाले अन्य लोगों को प्रोत्साहित करने और दूसरों को दया दिखाने के लिए याद दिलाने के लिए अपनी कहानी साझा करने की आवश्यकता है। 
अदृश्य निशान वे गहरी चोटें और घाव हैं जिन्हें देखा नहीं जा सकता है लेकिन फिर भी वे बहुत वास्तविक दर्द और पीड़ा का कारण बनते हैं। भजन संहिता 6 में, दाऊद ने अपने स्वयं के गहन संघर्ष के बारे में लिखा - दर्दनाक रूप से  सच्चे शब्द लिखे। वह "पीड़ा में" (पद- 2) और "बहुत संताप" (पद- 3) में था। वह कराहते-कराहते "थक गया" था, और उसका बिस्तर आँसुओं से भीग गया था (पद- 6)। हालाँकि दाऊद अपने दुख का कारण साझा नहीं करता, फ़िर भी हममें से कई लोग उसके दर्द से जुड़ सकते हैं। 
जिस तरह से दाऊद ने अपने दर्द पर प्रतिक्रिया दी उससे हम भी प्रोत्साहित हो सकते हैं। अपनी अत्यधिक पीड़ा के बीच, दाऊद ने परमेश्वर को पुकारा और सच्चाई से अपना हृदय खोलकर, उसने चंगाई (पद- 2), बचाव (पद 4), और दया (पद- 9) के लिए प्रार्थना की। यहाँ तक कि इस प्रश्न के साथ भी कि "कब तक?" पद- 3) लम्बे समय से अपनी स्थिति को न बदलते हुए देखने पर भी, दाऊद ने आश्वस्त रह कर कहा कि परमेश्वर ने "दया के लिए [उसकी] पुकार सुनी" (पद- 9) और [वह] अपने समय में कार्य करेगा (पद- 10)। 
हमारा परमेश्वर कौन है, इस कारण हमें सदैव आशा बनी रहती है। 
-लीसा एम. सामरा