हमेशा धन्यवाद देना
सत्रहवीं शताब्दी में, मार्टिन रिन्कार्ट ने युद्ध के समय और प्लेग के दौरान तीस से अधिक वर्षों तक जर्मनी के सैक्सोनी(जर्मनी का एक क्षेत्र) में पास्टर के रूप में कार्य किया । एक वर्ष में उन्होंने अपनी पत्नी सहित 4,000 से अधिक अंतिम संस्कार किए, और कई बार भोजन इतना दुर्लभ था कि उनका परिवार भूखा रह जाता था । हालाँकि वह निराश हो सकता था, लेकिन परमेश्वर में उनका विश्वास मज़बूत था और उन्होंने लगातार धन्यवाद दिया । वास्तव में, उन्होंने अंग्रेजी गीत, “Now Thank We All Our God” (अब मन और मुँह और हाथ ईश्वर की ओर उठाओ-हिंदी अनुवाद) के द्वारा अपना आभार व्यक्त किया ।
रिन्कार्ट ने नबी यशायाह के उदाहरण का अनुसरण किया, जिसने परमेश्वर के लोगों को हर समय धन्यवाद देने का निर्देश दिया, जिसमें वह भी समय शामिल था जब उन्होंने परमेश्वर को निराश किया था या जब दुश्मनों ने उन पर अत्याचार किया था । इसके बाद भी उन्हें परमेश्वर के नाम को ऊंचा उठाना था, और “सब जातियों में उसके बड़े कामों का प्रचार [करना था]” (पद.4) l
हम फसल उत्सव के दौरान आसानी से धन्यवाद दे सकते हैं जैसे जब हम मित्रों और परिवार के साथ प्रचुर दावत का आनंद ले रहे होते हैं l लेकिन क्या हम मुश्किल समय में परमेश्वर के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त कर सकते हैं, जैसे कि जब हम अपनी मेज पर किसी को याद कर रहे होते हैं या जब हम अपने वित्त से जूझ रहे होते हैं या जब हम अपने किसी करीबी के साथ संघर्ष करते होते हैं?
हम अपने हृदयों और आवाजों को एक करके पास्टर रिन्कार्ट को प्रतिध्वनित करें जब हम उसकी महिमा करते हैं और उस "शाश्वत परमेश्वर, जिसकी पृथ्वी और स्वर्ग आराधना करते हैं” को धन्यवाद दें l हम "यहोवा का भजन [गाएं], क्योंकि उसने प्रताप्मय काम किये हैं” (पद.5) ।
जब परमेश्वर बोलता है
एक बाइबल अनुवादक, लिली, अपने घर जाने के लिए अपने देश की ओर उड़ान भरी जब उसे हवाई अड्डे पर रोक लिया गया l उसके मोबाइल फोन की तलाशी ली गई, और जब अधिकारियों को इसमें नए नियम की एक ऑडियो/श्रव्य कॉपी मिली, तो उन्होंने फोन को जब्त कर लिया और उससे दो घंटे तक पूछताछ की । एक बिंदु पर उन्होंने उसे बाइबल ऐप चलाने के लिए कहा, जो मत्ती 7: 1–2 पर सेट था : “दोष मत लगाओ कि तुम पर भी दोष न लगाया जाए l क्योंकि जिस प्रकार तुम दोष लगाते हो, उसी प्रकार तुम पर भी दोष लगाया जाएगा l” इन शब्दों को अपनी भाषा में सुनकर, अधिकारियों में से एक पीला पड़ गया । बाद में, उसे छोड़ दिया गया और आगे कोई कार्रवाई नहीं की गई ।
हमें नहीं पता है कि हवाई अड्डे पर उस अधिकारी के दिल में क्या हुआ, लेकिन हम जानते हैं कि "परमेश्वर के मुंह से" जो शब्द निकलता है, वह उसकी इच्छा पूरी करता है जो वह चाहता है (यशायाह 55:11) । यशायाह ने निर्वासन में परमेश्वर के लोगों के लिए आशा के इन शब्दों की नबूवत की, यह अनुमान लगाते हुए कि जैसे बारिश और बर्फ पृथ्वी को अंकुरित करती और बढाती हैं, उसी प्रकार वह उन्हें आश्वस्त करता है कि जो “उसके मुख से निकलता है” वह उसके उद्देश्यों को पूरा करता है (पद.10-11) l
हम इस परिच्छेद को परमेश्वर में अपना भरोसा संभालने के लिए पढ़ सकते हैं l जब हम हवाई अधिकारियों के साथ लिली जैसी विषम परिस्थितियों का सामना कर रहे होते हैं, तो हम भरोसा करें कि परमेश्वर कार्य कर रहा है - तब भी जब हम अंतिम परिणाम नहीं देखते हैं ।
परदेशी से प्रेम
जब मैं एक नए देश में गया, तो मेरे पहले अनुभवों में से एक ने मुझे अवांछनीय महसूस कराया । उस दिन छोटे से चर्च में एक सीट मिलने के बाद, जहाँ मेरे पति प्रचार कर रहे थे, एक अशिष्ट वृद्ध सज्जन ने मुझे चौंका दिया, जब उन्होंने कहा, “और पीछे की ओर बढ़िए l” उनकी पत्नी ने माफी मांगी क्योंकि उन्होंने बताया कि मैं हमेशा उनके कब्जे वाले बेंच में बैठी थी l वर्षों बाद मुझे पता चला कि मण्डली ने बेंचों को किराए पर दिया करती थी, जिसने चर्च के लिए धन जुटाया जा सके और यह भी सुनिश्चित किया जाए कि कोई भी व्यक्ति दूसरे की सीट नहीं ले सकता । जाहिर है कि वह मानसिकता कुछ दशकों तक चलती रही l
बाद में, मैंने इस बात पर विचार किया कि कैसे परमेश्वर ने इस्राएलियों को परदेशियों का स्वागत करने का निर्देश दिया, सांस्कृतिक प्रथाओं के विपरीत जिसका सामना मैंने किया l उन व्यवस्थाओं को स्थापित करने में जो उनके लोगों को फलने-फूलने देंगे, उसने उन्हें परदेशियों का स्वागत करने के लिए याद दिलाया क्योंकि वे खुद एक समय परदेशी थे (लैव्यव्यवस्था 19:34) । केवल उन्हें परदेशियों के साथ दयालुता (पद.33) ही नहीं बरतनी थी, बल्कि उन्हें उनसे “अपने ही समान प्रेम रखना” था” (पद.34) । परमेश्वर ने उन्हें मिस्र में उत्पीड़न से बचाकर, उन्हें एक देश दिया था जिसमें “दूध और मधु” की धाराएँ बहती हैं (निर्गमन 3:17) । वह उम्मीद करता था कि उसके लोग दूसरों से प्यार करेंगे, जिन्होंने अपना घर वहां बनाया था l
जब आप अपने बीच में अजनबियों से सामना करते हैं, परमेश्वर से किसी भी सांस्कृतिक प्रथाओं को प्रकट करने के लिए कहें जो आपको उनके साथ अपने प्यार को साझा करने से रोक सकते हैं ।
मसीह को प्रतिबिंबित कैसे करें
लिजीयू की थेरेस Thérèse of Lisieux (एक फ़्रांसिसी नन/मठवासिनी जो चर्च की एक प्रमुख सदस्य थी) एक खुशहाल और चिंतामुक्त लड़की थी- जब तक कि उसकी माँ की मृत्यु नहीं हुई जब वह सिर्फ चार साल की थी l वह संकोची हो गयी और आसानी से उत्तेजित हो जाती थी l लेकिन कई साल बाद क्रिसमस की पूर्व संध्या पर, वह सब कुछ बदल गया l अपने चर्च समुदाय के साथ यीशु के जन्म का जश्न मनाने के बाद, उसने परमेश्वर को उसके भय से मुक्त करने और उसे ख़ुशी देने का अनुभव किया l उसने परमेश्वर को जिसने स्वर्ग छोड़ा और एक मनुष्य, यीशु बना, और जिसने उसके अन्दर निवास किया, उसी की सामर्थ्य को कारण बताया l
मसीह का हमारे भीतर बसने का क्या मतलब है? यह एक रहस्य है, पौलुस ने कुलुस्से के चर्च से कहा l यह वह है जिसे परमेश्वर ने “समयों और पीढ़ियों से गुप्त” रखा” (कुलुस्सियों 1:26), लेकिन उसने परमेश्वर के लोगों पर प्रगट किया l परमेश्वर ने “उस भेद की महिमा का मूल्य . . . . . यह है कि मसीह जो महिमा की आशा है तुम में वास करता है” (पद.27) उन पर खुलासा किया l क्योंकि मसीह अब कुलुस्सियों में वास करता था, उन्होंने नए जीवन की ख़ुशी का अनुभव किया l अब वे पाप के पुराने व्यक्तित्व के दास नहीं थे l
यदि हमने यीशु को अपना उद्धारकर्ता माना है, तो हम भी उसके हमारे अन्दर निवास के इस रहस्य को जीते हैं l उसकी आत्मा के द्वारा, वह हमें भय से मुक्त कर सकता है, जैसा कि उसने थेरेस को किया था, और हमारे भीतर अपनी आत्मा का फल, जैसे आनंद, शांति और आत्म-नियंत्रण विकलित कर सकता है (गलातियों 5:22-23) l
आइये हम अपने भीतर मसीह के अद्भुत रहस्य के लिए धन्यवाद दें l
अफवाहों को रोकना
चार्ल्स सिमियन (1759-1836) को इंग्लैंड के कैम्ब्रिज में होली ट्रिनिटी चर्च का पास्टर नामित किए जाने के बाद उन्हें कई वर्षों तक विरोध का सामना करना पड़ा । जैसा कि मंडली में ज़्यादातर चाहते थे कि सहयोगी पास्टर को सिमियन के बजाय नियुक्त किया जाए, उन्होंने उसके बारे में अफवाहें फैलाईं और उनकी सेवा को अस्वीकार कर दिया - यहाँ तक कि कई बार उन्हें चर्च से बाहर कर दिया । लेकिन सिमियन, जो परमेश्वर की आत्मा से भरा होना चाहते थे, ने जीने के लिए कुछ सिद्धांत बनाकर बकवाद का सामना करना चाहा । किसी का अफवाहों पर विश्वास करना कभी नहीं था जब तक कि वे बिल्कुल सच नहीं थे और दूसरा "हमेशा विश्वास करना था, कि अगर दूसरे पक्ष को सुना जाता है, तो मामले का एक बहुत अलग विवरण दिया जाएगा ।"
इस अभ्यास में, सिमियन ने परमेश्वर के निर्देशों का पालन करके अपने लोगों के बकवाद और दुर्भावनापूर्ण बातचीत को रोका जो वह जानता था कि इससे वे एक-दूसरे के लिए अपने प्यार को मिटा देंगे । परमेश्वर के दस आज्ञाओं में से एक उनके सच्चाई से जीने की उसकी इच्छा को दर्शाता है : “तू किसी के विरुद्ध झूठी साक्षी न देना” (निर्गमन 20:16) । निर्गमन में एक और निर्देश इस आज्ञा को पुष्ट करता है : “झूठी बात न फैलाना” (23:1) ।
यह सोचें कि अगर हममें से प्रत्येक ने कभी भी अफवाहें और झूठी खबरें नहीं फैलाते हैं और अगर हम उन्हें सुनते ही उन्हें रोक देते हैं तो दुनिया कितनी अलग होगी l हम पवित्र आत्मा पर भरोसा करें कि वह हमें प्रेम में सच्चाई बोलने में मदद करे जब हम अपने शब्दों का उपयोग परमेश्वर की महिमा के लिए करते हैं ।
मछली पकड़ना मना है
प्रलय उत्तरजीवी(Holocaust Surviver) कोरी टेन बूम को क्षमा का महत्व पता था l अपनी किताब में, वह कहती है कि उसकी पसंदीदा मानसिक तस्वीर समुद्र में फेंके गए पापों की थी l “जब हम अपने पापों को मान लेते हैं, परमेश्वर उनको गहरे समुद्र में फेंक देता है, पाप हमेशा के लिए चले गए . . . मेरा मानना है कि उसके बाद परमेश्वर एक संकेत लगा देता है जो कहता है कि वहाँ मछली पकड़ने की अनुमति नहीं है l”
वह एक महत्वपूर्ण सत्य की ओर इशारा करता है जो यीशु में विश्वासी कभी-कभी समझ नहीं पाते हैं - जब परमेश्वर हमारे अधर्म को क्षमा कर देता है, तो हम पूरी तरह से क्षमा कर दिए जाते हैं! हमें अपने शर्मनाक कामों को उखाड़ते नहीं रहना है, गंदी भावनाओं के कीचड़ में लोटना l इसके बदले हम उसके अनुग्रह और क्षमा को स्वीकार कर सकते हैं, स्वतंत्रता में उसका अनुसरण करते जाएँ l
हम भजन 130 में “मछली पकड़ना मना है” के विचार को देखते हैं l भजनकार घोषणा करता है कि यद्यपि परमेश्वर न्यायी है, वह पश्चाताप करने वालों के पाप को क्षमा करता है : “परन्तु तू क्षमा करनेवाला है” (पद.4) l जब कि भजनकार परमेश्वर में अपना भरोसा रखते हुए उसकी प्रतीक्षा करता है (पद.5), वह विश्वास में बोलता है कि “इस्राएल को उसके सारे अधर्म के कामों से वही छुटकारा देगा” (पद.8) l उस पर विशवास करनेवाले “पूरा छुटकारा” प्राप्त करेंगे (पद.7) l
जब हम शर्म और अयोग्यता की भावनाओं में फंस जाते हैं, तो हम अपने पूरे दिल से परमेश्वर की सेवा नहीं कर सकते l इसके बजाय, हम अपने अतीत से प्रतिबंधित होते हैं l यदि आप अपने द्वारा किए गए गलत कार्य से निरुपाय महसूस करते हैं, तो परमेश्वर से क्षमा याचना और नए जीवन के उपहार में पूरी तरह से विश्वास करने में आपकी सहायता करने के लिए कहें l उसने आपके पापों को समुद्र में डाल दिया है!
दुःख में परमेश्वर पर भरोसा
जब “पापा जॉन” नाम से पहचाने जाने वाले व्यक्ति को पता चला कि उसे जीवघातक कैंसर है, तो उसने और उसकी पत्नी, कैरल ने, महसूस किया कि परमेश्वर चाहता है कि वह और उसकी पत्नी अपनी जीवनघातक बिमारी को ऑनलाइन साझा करें l यह मानते हुए कि परमेश्वर उनकी दुर्बलता/भेद्यता के द्वारा सेवा करेगा, उन्होंने दो वर्षों तक ख़ुशी के क्षण और अपने दुःख और पीड़ा को पोस्ट किये l
जब कैरल ने लिखा कि उसके पति “यीशु की खुली बाहों में चले गए,” सैंकड़ों लोगों ने प्रत्युत्तर दिया, कईयों ने कैरल को उनके खुलेपन के लिए धन्यवाद किया l एक व्यक्ति ने प्रतिक्रिया किया कि एक मसीही दृष्टिकोण से मृत्यु के विषय सुनना स्वास्थ्यप्रद था, क्योंकि एक दिन “हम सबों को मरना है l” किसी और ने कहा कि यद्यपि व्यक्तिगत रूप से उस जोड़े से उसकी मुलाकात कभी नहीं होगी, वह प्रगट नहीं कर सकती कि उसने परमेश्वर पर उनके भरोसे की साक्षी के द्वारा कितना प्रोत्साहन प्राप्त की l
यद्यपि पापा जॉन ने कभी-कभी अत्यधिक दर्द का सामना किया, फिर भी उन्होंने और कैरल ने अपनी कहानी को साझा किया ताकि वे दर्शा सकें कि परमेश्वर ने उनको कैसे संभाला था l वे जानते थे कि उनकी साक्षी परमेश्वर के लिए फलदायी होगी, दुःख सहते समय पौलुस ने जो तीमुथियुस को लिखा उसको प्रतिध्वनित किया : “मुझे निश्चय है कि वह मेरी धरोहर की उस दिन तक रखवाली कर सकता है” (2 तीमुथियुस 1:12) l
मसीह यीशु में हमें प्राप्त होने वाले अनुग्रह के द्वारा (पद.9) से परमेश्वर हमारे (और दूसरों के विश्वास) को मजबूत करने के लिए किसी प्रियजन की मृत्यु का भी उपयोग कर सकता है l यदि आप पीड़ा और कठिनाई का सामना कर रहे हैं, तो जान लें कि वह आराम और शांति ला सकता है l
उसने मुझे बदल दिया
जब जॉन, जो लन्दन में सबसे बड़ा वैश्यालय चलाता था, को जेल भेज दिया गया, वह झूठे तौर पर विश्वास करता था कि मैं एक अच्छा आदमी हूँ l वहाँ रहते हुए, उसने जेल में बाइबल अध्ययन में भाग लेने का फैसला किया क्योंकि वहां केक और कॉफ़ी मिलती थी, लेकिन वह इस बात से चकित था कि दूसरे कैदी कितने खुश लगते थे l उसने पहले गाने के दौरान रोने लगा और बाद में एक बाइबल प्राप्त की l नबी यहेजकेल की पुस्तक से पढ़ने के कारण वह बदल गया, मानों “उस पर बिजली गिर गयी हो l” उसने पढ़ा, “फिर जब दुष्ट अपने दुष्ट कामों से फिरकर, न्याय और धर्म के काम करने लगे, तो वह . . . इस कारण न मरेगा, जीवित ही रहेगा” (18:27-28) l परमेश्वर का वचन उसके लिए जीवित हो गया और उसने महसूस किया, “मैं एक अच्छा व्यक्ति नहीं था . . . मैं दुष्ट था और मुझे बदलने की ज़रूरत थी l” पास्टर के साथ प्रार्थना करते समय, उसने कहा, “मैंने यीशु मसीह को पाया और उसने मुझे बदल दिया l”
यहेजकेल के ये शब्द परमेश्वर के लोगों से कहे गए थे जब वे निर्वासन में थे l यद्यपि वे लोग परमेश्वर से विमुख हो गए थे, उसकी यह इच्छा थी कि वे अपने अपराध को त्याग दें और “अपने मन और अपनी आत्मा बदल [डालें]” (पद..31) l उन शब्दों ने जॉन को “पश्चाताप [करने]” और “जीवित [रहने दिया]”, जब उसने यीशु का अनुसरण किया, जिसने पापियों को मन फिराने के लिए बुलाया (लूका 5:32) l
हम भी पवित्र आत्मा द्वारा पाप के प्रति कायल किये जाने का प्रत्युत्तर दें, ताकि हम भी क्षमा और छुटकारा का आनंद ले सकें l
यात्रा के लिए सामर्थ्य
गर्मी के एक मौसम में, जो मुझे सामना करना पड़ा वह एक असंभव काम लग रहा था – एक संकट भरा निर्धारित समय के साथ लेखन का बड़ा प्रोजेक्ट। अपने बल पर एक दिन के बाद दूसरा दिन बिताने के बाद, शब्दों को ढूढ़कर पन्नों पर लिखने का प्रयास करते हुए, मैं थका हुआ और हतोत्साहित महसूस किया, और मैं हार मान लेना चाहता था। एक बुद्धिमान मित्र ने मुझसे पूछा, “पिछली बार आप कब तरोताजा महसूस किये थे? शायद आपको खुद को आराम देना चाहिये और आपको अच्छा भोजन खाना चाहिये।"
मुझे तुरंत पता चल गया कि वह सही थी। उसकी सलाह ने मुझे एलिय्याह और उस भयानक सन्देश के विषय जो ईज़ेबेल से उसे प्राप्त हुआ था पर सोचने को मजबूर किया (1 राजा 19:2) – हालाँकि, निश्चित रूप से नबी के अनुभव के लौकिक पैमाने के बराबर मेरा लेखन प्रोजेक्ट कहीं भी नहीं था। कर्मेल पहाड़ पर झूठे नबियों पर एलिय्याह की जीत के बाद, ईज़ेबेल ने सन्देश भेजी कि वह उसे गिरफ्तार करके मरवा देगी, और वह निराश हो कर, मृत्यु मांगने लगा। परन्तु उसके बाद वह अच्छी नींद से सोया और दो बार एक स्वर्गदूत उससे मिलने आया और उसको खाने के लिए भोजन दिया। परमेश्वर द्वारा उसकी शारीरिक शक्ति लौटने के बाद, वह अपनी यात्रा को जारी रख सका l
जब हमें “लम्बी यात्रा” करनी हो (पद.7), हमें आराम करना चाहिये और स्वास्थ्यप्रद और तृप्त करनेवाला भोजन का आनंद लेना चाहिये। क्योंकि जब हम थके हुए और भूखे होते हैं, हम आसानी से निराशा या भय के अधीन हो सकते हैं। परन्तु जब परमेश्वर अपने श्रोतों के द्वारा हमारे भौतिक ज़रूरतों को पूरा करता है, इस पतित संसार में जितना संभव हो, हम उसकी सेवा में अगला कदम बढ़ा सकते हैं।