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Articles by किर्स्टेन होल्मबर्ग

दूसरों की जरूरतों को पूरा करना

फिलिप्प के पिता गंभीर मानसिक बीमारी से पीड़ित थे और सड़कों पर रहने के लिए घर छोड़कर चले गए थे। सिंडी और उसके छोटे बेटे फिलिप्प द्वारा उन्हें  ढूँढ़ते हुए एक दिन बिताने के बाद, फिलिप्प उनकी भलाई के लिए चिंतित हुआ। उसने अपनी मां से पूछा कि क्या उसके पिता और अन्य बेघर लोग ठण्ड से सुरक्षित हैं। जवाब में, उन्होंने क्षेत्र के बेघर लोगों के लिए कंबल और ठंड के मौसम के लिए सामान  इकट्ठा करने और वितरित करने का प्रयास शुरू किया। एक दशक से अधिक समय से, सिंडी ने इसे अपने जीवन का कार्य माना है, सोने के लिए गर्म जगह के नहीं होने की कठिनाई के प्रति जागृत होने का श्रेय अपने बेटे और परमेश्वर में अपने गहरे विश्वास को देती है।

 

बाइबल ने हमें लंबे समय से दूसरों की ज़रूरतों का प्रतिउत्तर देना सिखाया है। निर्गमन के पुस्तक में, मूसा ने उन लोगों के साथ हमारे बातचीत को निर्देशित करने के लिए सिद्धांतों का एक सेट दर्ज किया है जिनके पास प्रचुर संसाधनों की कमी है । जब हम दूसरे के जरूरतों को पूरा करने के लिए प्रेरित होते हैं, हमें "इसे एक व्यापारिक सौदे के तरह नहीं मानना चाहिए" और इससे कोई लाभ या मुनाफा नहीं कमाना चाहिए (निर्गमन 22:25)। यदि किसी का वस्त्र बन्‍धक के रूप में लिया गया था, तो उसे सूर्यास्त तक वापस करना था “क्योंकि वह उसका एक ही ओढ़ना है, उसकी देह का वही अकेला वस्त्र होगा; फिर वह किसे ओढ़कर सोएगा?” (पद.27)।

 

आइए परमेश्वर से कहे कि वह हमारे आँखों और दिल को खोले ताकि हम यह देख सकें कि पीड़ित लोगों का दर्द कैसे कम कर सकते हैं। चाहे हम कई लोगों की ज़रूरतों को पूरा करना चाहते हों—जैसा कि सिंडी और फिलिप्प ने किया है—या किसी एक व्यक्ति का, उनका सम्मान और देखभाल करके हम उनका सम्मान करते हैं।

मैं कौन हूँ?

एक स्थानीय सेवा की नेतृत्व टीम के सदस्य के रूप में, मेरे काम का एक हिस्सा था दूसरों को सामूहिक विचार विमर्श अगुवा के रूप में हमारे साथ शामिल होने के लिए आमंत्रित करना। मेरे निमंत्रण में आवश्यक समय की जरूरत का वर्णन किया गया था और उन तरीकों की रूपरेखा दी गई थी, जिनके लिए अगुवा को अपने छोटे समूह के प्रतिभागियों के साथ बैठकों और नियमित फोन कॉल दोनों में शामिल होने की आवश्यकता थी। मैं अक्सर दूसरे लोगों पर थोपने में अनिच्छुक रहता था, यह जानते हुए कि एक अगुवा बनने के लिए उन्हें कितना बलिदान देना होगा। और फिर भी कभी-कभी उनका उत्तर मुझे पूरी तरह अभिभूत कर देता था: "मुझे सम्मानित महसूस होगा।" अस्वीकार करने के वैध कारणों देने के बजाय, उन्होंने अपने जीवन में किए गए परमेश्वर के सभी कार्यों के लिए अपनी कृतज्ञता को वापस देने के लिए उत्सुक होने के रूप में वर्णित किया।

जब परमेश्वर के लिए मंदिर बनाने के लिए संसाधन देने का समय आया, तो दाऊद की भी ऐसी ही प्रतिक्रिया थी: “मैं क्या हूँ और मेरी प्रजा क्या है कि हम को इस रीति से अपनी इच्छा से तुझे भेंट देने की शक्ति मिले?"( 1 इतिहास 29:14) दाऊद की उदारता उसके और इस्राएल के लोगों के जीवन में परमेश्वर की भागीदारी के प्रति कृतज्ञता से प्रेरित थी। उनकी प्रतिक्रिया उनकी विनम्रता और " पराए और परदेशी" के प्रति उनकी अच्छाई की स्वीकृति को दर्शाती है (पद 15) ।  

परमेश्वर के कार्य के लिए हमारा योगदान - चाहे समय, प्रतिभा, या खजाने से - उनके प्रति हमारी कृतज्ञता को दर्शाता है जिसने शुरुआत में हमें दिया। हमारे पास जो कुछ भी है वह उनके हाथ से आया है (पद 14); जवाब में, हम उसे कृतज्ञता पूर्वक दे सकते हैं।

एक असंभव उपहार

मैं अपनी सास के जन्मदिन के लिए सही उपहार पाकर बहुत खुश थी: यह एक सुन्दर कंगन था और उस कंगन में उनके जन्म का पत्थर (birth stone) भी जड़ा हुआ था! किसी के लिए सही उपहार ढूँढना हमेशा एक बेहद खुशी की बात होती है। लेकिन क्या होगा अगर किसी व्यक्ति को जिस उपहार की ज़रूरत है वह देना हमारी सामर्थ्य से बाहर है। हममें से बहुत से लोग चाहते हैं कि हम किसी को मानसिक शांति, आराम, या फिर धैर्य भी दे सकें। काश  उन्हें खरीदा जा सकता और रिबन के साथ लपेट कर दिया  जा सकता!

इस प्रकार के उपहार एक व्यक्ति द्वारा दूसरे व्यक्ति को देना असंभव है। फिर भी यीशु—मानव शरीर में परमेश्वर—उन लोगों को जो उस पर विश्वास करते हैं एक ऐसा "असंभव" उपहार देता है : शांति का उपहार। स्वर्ग में उठाये जाने से पहले और शिष्यों को छोड़ने से पहले, यीशु ने उन्हें पवित्र आत्मा के वादे से सांत्वना दी: वह "तुम्हें सब बातें सिखाएगा, और जो कुछ मैं ने तुम से कहा है, वह सब तुम्हें स्मरण कराएगा" (यूहन्ना 14:26)। उसने उन्हें शांति प्रदान की - अपनी शांति - एक स्थायी, विश्वसनीय उपहार के रूप में, जब उनके ह्रदय परेशान थे या जब वे भय का अनुभव कर रहे थे। वह स्वयं, परमेश्वर के साथ, दूसरों के साथ और हमारे भीतर हमारी शांति है।

हम अपने प्रियजनों को अतिरिक्त धैर्य या बेहतर स्वास्थ्य देने में सक्षम नहीं हो सकते हैं जो वे चाहते हैं। न ही उन्हें वह शांति देना हमारे वश में है जिसकी हम सभी को जीवन के संघर्षों के दौरान अत्यंत आवश्यकता होती है। लेकिन हम आत्मा के द्वारा प्रेरित होकर उन्हें सच्ची और स्थायी शांति के दाता और प्रतीक यीशु के बारे में बता सकते हैं।

लाल पोशाक परियोजना

रेड ड्रेस(लाल पोशाक) परियोजना की कल्पना ब्रिटिश कलाकार किर्स्टी मैकलेओड ने की थी और यह दुनिया भर के संग्रहालयों और प्रदर्शन लगाने के स्थानों में एक प्रदर्शनी बन गई है। तेरह वर्षों तक, बरगंडी रेशम के चौरासी टुकड़े दुनिया भर में घूमते रहे   जिस पर तीन सौ से अधिक महिलाओं (और मुट्ठी भर पुरुषों) द्वारा कढ़ाई की गई। फिर इन टुकड़ों का एक गाउन बनाया गया जो प्रत्येक योगदान देने वाले कलाकार की कहानियों को बताता है  जिनमें से कई अधिकारहीन हैं और गरीब हैं।

लाल पोशाक की तरह हारून और उसके वंशजों द्वारा पहने गए वस्त्र कई कुशल श्रमिकों द्वारा बनाए गए थे (निर्गमन 28:3)। याजक (पुजारी) के वस्त्र बनाने के लिए परमेश्वर के निर्देशों में वे विवरण शामिल थे जो इस्राएल की सामूहिक कहानी बताते थे जिसमें गोमेद पत्थरों पर इस्राएल के पुत्रों के नाम खुदवाना शामिल था जो कि प्रभु के सामने एक स्मारक के रूप में पुजारियों के कंधों पर लगे रहेगें (पद 12) । अंगरखे, कमरबन्द और टोपियाँ याजकों को वैभव और शोभा देती थीं क्योंकि वे परमेश्वर की सेवा करते थे और लोगों को आराधना करने में कदद करते थे।

 

यीशु में नई वाचा के विश्वासियों के रूप में हम एक चुना हुआ वंश और राज पदधारी याजकों का समाज और पवित्र लोग और  परमेश्वर की निज प्रजा हैं और आराधना में एक दूसरे का नेतृत्व करते हैं (1 पतरस 2:4,5, 9)  यीशु हमारा महायाजक है (इब्रानियों 4:14)। हालाँकि हम खुद को याजकों के रूप में पहचानने के लिए कोई विशेष पोशाक नहीं पहनते हैं, उसकी मदद से हम बड़ी करूणा, और भलाई, और दीनता, और नम्रता और सहनशीलता के वस्त्र  धारण करते हैं (कुलुस्सियों 3:12) ।

आराधना के त्यौहार

किसी बड़े कार्यक्रम में भाग लेना आपको आश्चर्यजनक तरीके से बदल सकता है l यूके और यूएस में अनेक दिनों की सभाओं में 1,200 से अधिक लोगों के साथ बातचीत करने के बाद, शोधकर्ता डेनियल युद्किन और उनके सहयोगियों ने सीखा कि बड़े त्यौहार हमारे नैतिक सीमा को प्रभावित कर सकते हैं और दूसरों के साथ संसाधन साझा करने की हमारी इच्छा को भी प्रभावित कर सकते हैं l उनके शोध में पाया गया कि 63 फीसदी उपस्थित लोगों को त्यौहार में “परिवर्तनकारी” अनुभव मिला, जिसने उन्हें मानवता से अधिक जुड़ा हुआ और मित्रों, परिवार और पूर्ण अजनबियों के प्रति भी अधिक उदार महसूस कराया l

जब हम दूसरों के साथ परमेश्वर की आराधना करने के लिए एकत्रित होते हैं, हालाँकि, हम एक लौकिक त्यौहार के मात्र सामाजिक “रूपांतरण” से अधिक अनुभव कर सकते हैं; हम स्वयं ईश्वर के साथ बातचीत करते हैं l परमेश्वर के लोगों ने बेशक परमेश्वर के साथ उस सम्बन्ध का अनुभव किया जब वे प्राचीन काल में पूरे वर्ष अपने पवित्र पर्वों के लिए यरूशलेम में एकत्रित होते थे l उन्होंने—बगैर आधुनिक सुविधाओं के—अखमीरी रोटी का पर्व, सप्ताहों का पर्व, और झोपड़ियों के पर्व के लिए मंदिर में उपस्थित होने के लिए वर्ष में तीन बार यात्राएँ की (व्यवस्थाविवरण 16:16) l ये समारोह परिवार, सेवकों, विदेशियों, और दूसरों के साथ “परमेश्वर यहोवा के सामने” (पद.11) पवित्र स्मरण, उपासना, और आनंद करने के समय थे l  

आइए हम दूसरों के साथ आराधना के लिए एकत्रित हों ताकि परस्पर सहायता कर सकें ताकि उसका आनंद लेते रहें और उसकी विश्वासयोग्यता पर भरोसा रखें l

चॉकलेट बर्फ के टुकड़े

स्विट्ज़रलैंड के ओल्टेन के निवासी, पूरे शहर को चॉकलेट के टुकड़े के बौछार से ढंके हुए देखकर चकित थे। पास के एक चॉकलेट फैक्ट्री में वेंटिलेशन सिस्टम खराब हो गया था, जिससे कोको को हवा में हवा में गया और उस क्षेत्र को मिष्ठान्न अच्छाई से भर दिया। चॉकलेट कोटिंग चॉकलेट प्रेमियों के लिए एक सपने का सच होने जैसा लगता है!

जबकि चॉकलेट किसी के पोषण संबंधी आवश्यकताओं को पूरा नहीं करता, परमेश्वर ने इस्राएलियों को स्वर्गीय वर्षा प्रदान किया जिसने पोषण प्रदान किया। जब वे रेगिस्तान से यात्रा कर रहे थे, वे मिस्र में अपने पीछे छोड़े गए भोजन के बारे में कुड़कुड़ाने लगे। इसके उत्तर में, परमेश्वर ने उन्हें बनाये रखने के लिए कहा "देखो, मैं तुम लोगों के लिये आकाश से भोजन वस्तु बरसाऊँगा;" (निर्गमन 16:4)। हर दिन जब सुबह ओस सूखता था, तो भोजन का एक पतला टुकड़ा रह जाता था। लगभग बीस लाख इस्राएलियों को निर्देश दिया गया था कि जितना जरूरत हो वे उस दिन उतना ही इकट्ठा करें। चालीस वर्षों तक रेगिस्तान में भटकने के दौरान, वे मन्ना में परमेश्वर के अलौकिक प्रावधान द्वारा पोषित हुए। 

हम मन्ना के बारे में थोडा जानते हैं इसके अलावा की “... वह धनिया के समान श्वेत था, और उसका स्वाद मधु के बने हुए पूए का सा था।” (पद 31)। भले ही मन्ना चॉकलेट के एक स्थिर आहार के रूप में आकर्षक न लगता हो, परमेश्वर का अपने लोगों के लिए व्यवस्था का मिठास स्पष्ट है। मन्ना हमें यीशु की ओर केन्द्रित करता है जिन्होंने खुद को “जीवन की रोटी” (युहन्ना 6:48) के रूप में वर्णित किया जो हमें प्रतिदिन सम्भालता है और अनन्त जीवन का आश्वासन देता है (पद. 51)।

परमेश्वर के हाथों में

अट्ठारह वर्ष की आयु की होने पर मेरी बेटी के जीवन में एक नये युग का आरम्भ हुआ: अर्थात् वह कानूनी रूप से वयस्क हो गई थी, और अब उसके पास भविष्य में होने वाले चुनावों में अपना वोट डालने का अधिकार भी था और शीघ्र ही वह हाई स्कूल से ग्रेजूएट होने के बाद अपने जीवन को प्रारम्भ करेगी। इस परिवर्तन ने मेरे भीतर अत्यावश्यकता की भावना को जन्म दिया — अर्थात् अपनी छत तले अब मेरे पास उसके साथबिताने के लिए बहुत कम ऐसासमय होगा जिसमें मैं उसे वह ज्ञान दे पाऊँ जिसकी उसे अपने दम पर इस संसार का सामना करने के लिए आवश्यकता पड़ेगी, जैसे कि पैसों का रखरखाव कैसे करें, सांसारिक मुद्दों के प्रति सतर्क कैसे रहें, और ठोस निर्णय कैसे लें।

अपनी बेटी को उसका जीवन सम्भालने के लिए तैयार करने की मेरी यह कर्तव्यशील भावना समझने योग्य थी। आखिरकार, मैं उससे प्रेम करता था और चाहता था कि वह फले-फूले। परन्तु मुझे इस बात का भी अहसास हुआ कि जबकि इसमें मेरी भूमिका महत्वपूर्ण तो थी, परन्तु यह अकेले, या ऐसे कहें कि प्राथमिक रूप से, मेरा काम नहीं था। थिस्सलुनीकियों के लिए पौलुस के शब्दों में, वह ऐसे लोगों का एक समूह था जिनको उसने विश्वास में अपनी संतान माना क्योंकि उसने उन्हें यीशु के बारे में सिखाया था और इसलिए उसने उनसे एक दूसरे की सहायता करने का आग्रह किया (1 थिस्सलुनीकियों 5:14-15), परन्तु अंत में उसने उनकी उन्नति के लिए परमेश्वर पर भरोसा किया। उसने इस बात को स्वीकार किया कि परमेश्वर ही“[उन्हें] पूरी रीति से पवित्र करेगा” (पद 23)।

पौलुस ने परमेश्वर पर उस काम को करने का भरोसा किया जिसे वह नहीं कर पाया: अर्थात् “आत्मा, प्राण और देह” में यीशु के अन्तिम आगमन के लिए उन्हें तैयार करना (पद 23)। यद्यपि थिस्सलुनीकियों को लिखी गई पौलुस की पत्रियों में बहुत से निर्देश थे, परन्तु उनकी भलाई और तैयारी के लिए परमेश्वर पर पौलुस का भरोसा हमें यह सिखाता है कि जिनकी हम परवाह करते हैं,अंत में उनके जीवन की उन्नति परमेश्वर के हाथों में हीहोती है (1 कुरिन्थियों 3:6)।

विश्वास के बीज

पिछले वसंत में, हमारे बगीचा में जोतने से पहले की रात एक तेज़ आँधी ने हमारे मेपल के पेड़ से बीजों को एक झटके में उड़ा दिया। तो जब मशीन ने जमीन को जोता तो उसने मेरे बगीचा में सैकड़ों मेपल के बीज लगाए। ठीक दो हफ्ते बाद, मेरे बगीचे में मेपल के जंगल बढ़ने की शुरुआत हुई!

जैसा कि मैंने (निराशा से) बिखरे पत्ते का सर्वेक्षण किया, मैं एक उगे हुए पेड़ के नए जीवन की विपुल बहुतायत से आश्चर्यचकित हुआ था। प्रत्येक लघु वृक्ष मेरे लिए मसीह में नए जीवन का एक चित्र बन गया जिसे मैं—केवल एक व्यक्ति के रूप में—दूसरों के साथ साझा कर सकता हूं। हम में से प्रत्येक के पास अपने जीवन के दौरान "आशा का कारण देने के लिए" (1 पतरस 3:15) अनगिनत अवसर होंगे।

जब हम यीशु की आशा के साथ "सही के लिए दुख उठाते हैं" (पद 14), तो यह हमारे आस-पास के लोगों को दिखाई देता है और यह उन लोगों के लिए जिज्ञासा का विषय बन सकता है जो अभी तक व्यक्तिगत रूप से परमेश्वर को नहीं जानते हैं। यदि हम उनके पूछने पर तैयार हैं, तो हम उस बीज को साझा कर सकते हैं जिसके द्वारा परमेश्वर नया जीवन लाता है। हमें इसे सभी के साथ एक साथ साझा करने की आवश्यकता नहीं है - किसी प्रकार के आध्यात्मिक तूफान में। इसके बजाय, हम धीरे-धीरे और सम्मानपूर्वक विश्वास के बीज को एक ऐसे हृदय में डाले जो इसे प्राप्त करने के लिए तैयार है।

सृष्टि को खोजना

क्रुबेरा-वोरोंजा, जॉर्जिया के यूरेशियन देश में, पृथ्वी ग्रह पर अभी तक खोजी गई सबसे गहरी गुफाओं में से एक है। खोजकर्ताओं की एक टीम ने इसकी ज्यादातर ऊर्ध्वाधर गुफाओं की अंधेरी और डरावनी गहराई को 2,197 मीटर तक खोजा है - जो कि पृथ्वी के अंदर में 7,208 फीट है! इसी तरह की गुफाएँ, उनमें से लगभग चार सौ, देश के अन्य भागों और दुनिया भर में मौजूद हैं। हर समय अधिक गुफाओं की खोज की जा रही है और गहराई के नए रिकॉर्ड स्थापित किए जा रहे हैं।

सृष्टि के रहस्य प्रकट होते रहते हैं, हम जिस ब्रह्माण्ड में रहते हैं, उसके बारे में हमारी समझ को बढ़ाते हैं और पृथ्वी पर परमेश्वर की हस्तकला की अतुलनीय रचनात्मकता पर हमें आश्चर्य करते हैं जिसकी देखभाल करने के लिए हमें परमेश्वर ने बुलाया है (उत्पत्ति 1:26-28) . भजनकार हम सभी को उसकी महानता के कारण "आनन्द के गीत गाने" और "ऊँचे स्वर से जयजयकार करने" के लिए आमंत्रित करता है (पद. 1)। जैसा कि हम कल पृथ्वी दिवस मनाते हैं, आइए हम ईश्वर के सृजन के अविश्वसनीय कार्य पर विचार करें। इसमें जो कुछ भी है—चाहे हमने इसे अभी तक खोजा हो या नहीं—वह हमारे लिए उसकी आराधना में झुकने का कारण है (पद. 6)।

वह न केवल अपनी सृष्टि के विशाल, भौतिक स्थानों को जानता है; वह हमारे हृदय की अत्यंत गहराइयों को भी जानता है। और जॉर्जिया की गुफाओं के विपरीत नहीं, हम जीवन में अंधेरे और शायद डरावने मौसमों से गुजरेंगे। फिर भी हम जानते हैं कि परमेश्वर उन समयों को भी अपने शक्तिशाली साथ -साथ कोमल देखभाल में रखता है। भजनहार के शब्दों में, हम उसके लोग हैं, "उसकी देखरेख में झुण्ड" (पद. 7)।