भरपूरी आवश्यकता को पूरा करती है
स्कूल के दोपहर के भोजन की कैंटीन, जैसे कोई बड़े खानपान का व्यवसाय, अक्सर खपत से अधिक भोजन तैयार करते हैं, क्योंकि वे पूरी तरह से आवश्यकता का अनुमान नहीं लगा पाते, और बचा हुआ भोजन बर्बाद हो जाता है। फिर भी कई छात्र ऐसे हैं जिनके पास घर पर खाने के लिए पर्याप्त भोजन नहीं होता और जो सप्ताहांत में भूखे रहते हैं। एक स्कूल जिले ने समाधान खोजने के लिए एक स्थानीय गैर-लाभकारी संस्था के साथ भागीदारी की। उन्होंने छात्रों के साथ घर भेजने के लिए बचे हुए खाने को पैक किया, और साथ ही साथ भोजन की बर्बादी और भूख दोनों की समस्याओं का समाधान किया।
जबकि अधिकांश लोग धन की बहुतायत को एक समस्या के रूप में नहीं देखेंगे जिस तरह से हम व्यर्थ भोजन के साथ करते हैं, स्कूल परियोजना के पीछे का सिद्धांत वही है जो पौलुस ने कुरिन्थियों को लिखे अपने पत्र में सुझाया था। वह जानता था कि मैसेडोनिया की कलीसियाएँ कठिनाई का सामना कर रही हैं, इसलिए उसने कुरिन्थ की कलीसिया से कहा कि वह अपनी "बढ़ती" का उपयोग "उनकी आपूर्ति करने के लिए करे (2 कुरिन्थियों 8:14)। उसका उद्देश्य चर्चों के बीच समानता लाना था ताकि किसी के पास बहुत अधिक न हो जबकि अन्य दुःख उठा रहे हो।
पौलुस ऐसा नहीं चाहता था कि कुरिन्थ के विश्वासी उनके देने से गरीब हों, लेकिन मैसेडोनिया के लोगों के साथ सहानुभूति दिखाएं और उदार हों, यह मानते हुए कि भविष्य में किसी समय पर उन्हें भी इसी तरह की मदद की आवश्यकता हो सकती है। जब हम ज़रूरतमंदों को देखते हैं, तो आइए मूल्यांकन करें कि क्या हमारे पास बाँटने के लिए कुछ हो सकता है। हमारा देना — चाहे बड़ा हो या छोटा — कभी भी व्यर्थ नहीं जाएगा!
यीशु में नया डीएनए
अपने अस्थि मज्जा (बोन मेरो) के बदले जाने के चार साल बाद क्रिस ने अपने रक्त का पुन: परीक्षण कराया। बोन मेरो के देने वाले के मज्जा ने उसे ठीक करने के लिए जो आवश्यक था वह प्रदान किया था, लेकिन एक आश्चर्यजनक बात हुई: क्रिस के खून में डीएनए उसके दाता का था, उसका अपना नहीं। यह वास्तव में समझ में आता है: प्रक्रिया का लक्ष्य कमजोर रक्त को दाता के स्वस्थ रक्त से बदलना था। फिर भी क्रिस के गाल, होंठ और जीभ के स्वाब ने दाता के डीएनए को दिखाया। कुछ मायनों में, वह कोई और बन गया - हालाँकि उसने अपनी यादें, बाहरी रूप और अपने कुछ मूल डीएनए को बनाए रखा था।
क्रिस का अनुभव उस व्यक्ति के जीवन के साथ एक आश्चर्यजनक समानता रखता है जिसने यीशु में उद्धार प्राप्त किया है। हमारे आत्मिक परिवर्तन के समय — जब हम यीशु पर भरोसा करते हैं — हम एक नई सृष्टि बन जाते हैं (2 कुरिन्थियों 5:17)। इफिसुस की कलीसिया को पौलुस की पत्री ने उन्हें उस भीतरी परिवर्तन को प्रकट करने के लिए प्रोत्साहित किया, "[अपने] पुराने मनुष्यत्व को उतार दे" और "नए मनुष्यत्व को पहिन ले, जो परमेश्वर के अनुरूप सत्य की धार्मिकता और पवित्रता में सृजा गया है”। (इफिसियों 4:22,24)। मसीह के लिए अलग किये गए।
हमें यह दिखाने के लिए डीएनए या रक्त परीक्षण की आवश्यकता नहीं है कि यीशु की परिवर्तनकारी शक्ति हमारे भीतर जीवित है। हमारी भीतर की वास्तविकता इससे प्रमाणित होनी चाहिए की हम अपने आस-पास के संसार के साथ कैसा व्यवहार करते है, यह प्रकट करते हुए कि हम कैसे "एक दूसरे पर कृपालु और करुणामय हों, एक दूसरे को क्षमा करें, जैसे परमेश्वर ने मसीह में (हमारे) अपराध क्षमा किए" (पद 32)।
प्रेम से देना
आयुष हर दिन अपना सुबह का नाश्ता पास की दुकान से खरीदता था। और प्रतिदिन वह चुपचाप किसी ऐसे व्यक्ति के लिए भी भुगतान करता जिसके लिए वह महसूस करता कि उसे इसकी जरूरत है, तथा कैशियर से उस व्यक्ति को अच्छे दिन की शुभकामना देने को कहता। आयुष का उनसे कोई संबंध नहीं था। वह उनकी प्रतिक्रियाओं से अनजान था; उसका केवल यह साधारण सा विश्वास था कि यह छोटा सा भाव "कम से कम है जो वह कर सकता है।" हालाँकि, एक अवसर पर, उसे अपने कार्यों के प्रभाव का पता तब चला जब उसने संपादक को लिखे अपने स्थानीय समाचार में एक गुमनाम पत्र पढ़ा। उसने पाया कि उसके उपहार की दयालुता ने एक व्यक्ति को उस दिन अपनी जान लेने की अपनी योजनाओं पर पुनर्विचार करने के लिए प्रेरित किया था।
आयुष बिना कोई श्रेय लिए रोजाना किसी को नाश्ता देता। केवल इसी अवसर पर उसे अपने छोटे से उपहार के प्रभाव की एक झलक मिली। जब यीशु कहते हैं कि हमें "[हमारे] बाएं हाथ को यह नहीं जानने देना चाहिए कि [हमारा] दाहिना हाथ क्या कर रहा है" (मत्ती 6:3), वह हमसे देने का आग्रह करते है - आयुष की तरह - बिना किसी श्रेय की ज़रूरत के।
जब हम दूसरों की प्रशंसा प्राप्त करने की परवाह किए बिना, परमेश्वर के लिए अपने प्रेम के कारण देते हैं, तो हम भरोसा कर सकते हैं कि हमारे उपहार - बड़े या छोटे - परमेश्वर द्वारा उपयोग किए जाएंगे उनकी ज़रूरतों को पूरी करने में सहायता के लिए जिन्हें यें प्राप्त हुए है।
उजियाला हो
मेरी बेटी के शुरुआती दिनों में, मैं अक्सर उसके सामने आने वाली चीज़ों का नाम लेती थी। मैं वस्तुओं को पहचानती या उसे कुछ अपरिचित चीज छूने देती और उसके नाम को बोलती थी ,और इस तरह जिस विशाल दुनिया की वह खोज कर रही थी उसके लिये समझ और एक शव्दावली उसे दे रही थी। भले ही मैं और मेरे पति ने स्वाभाविक रूप से अपेक्षा (आशा) की थी कि उसका पहला शब्द मम्मा या डैडी होगा, पर उसने पूरी रीति से एक फरक शब्द बोलकर हमें आश्चर्य में डाला, उसके छोट्टेमुंह ने एक दिन बुदबुदाया डाईट जो मैंने अभी–अभी उसके साथ बाँटा था लाईट उसका एक मीठा, गलत उच्चारण वाली गूंज ।
प्रकाश हमारे लिए बाइबल में दर्ज परमेश्वर द्वारा बोले गये पहले शब्दों में से एक है। जब परमेश्वर का आत्मा एक अंधेरी, निराकार और खाली पृथ्वी पर मँडरा रहा था, तो परमेश्वर ने अपनी सृष्टि में यह कहते हुए प्रकाश का परिचय दिया “उजियाला हो” (उत्पत्ति 1:3)। उसने कहा कि प्रकाश अच्छा था, जिसे शेष पवित्रशास्त्र ने दिखाया है, भजनकार समझाता है कि परमेश्वर के वचन हमारी समझ को प्रकाशित करते हैं (भजन संहिता 119:130), और यीशु स्वयं को संसार की ज्योति के रूप में संदर्भित करता है जो प्रकाश का दाता है। जीवन के प्रकाश का देने वाला (यूहन्ना 8:12)।
परमेश्वर ने अपने सृष्टि के निर्माण के काम में सबसे पहले जो बोला वह ज्योति देने के लिए था। यह इसलिए नहीं था की उसे अपने काम करने के लिए ज्योति चाहिए, नहीं, वह ज्योति हमारे लिए थी। ज्योति हमें उसे देखने और हमारे चारों तरफ उसकी सृष्टी में उसके उँगलियों के निशान पहचानने में, क्या अच्छा है और क्या नहीं पर भेद करने में, और इस विशाल संसार में यीशु का एक बार में एक कदम अनुसरण करने के लिये सक्षम बनाता है।
क्या मायने रखता है
मेरे मित्र ने याद किया कि कैसे एक सह-विश्वासी व सहयोगी ने उससे स्पष्ट रूप से पूछा कि वह किस राजनीतिक दल से संबंध रखती है। प्रश्न को पूछने का उनका कारण यह अनुमान लगाना था कि क्या वह उनके साथ वर्तमान में अपने समुदाय को विभाजित करनेवाले किसी भी मुद्दे पर सहमत हैं l दोनों पक्षों के बीच सामान्य आधार खोजने के प्रयास में, उसने बस उत्तर दिया, “इसलिए कि हम दोनों विश्वासी हैं, इसलिए मैं निसंदेह ही मसीह में अपनी एकता पर ध्यान देना पसंद करूंगी l”
पौलुस के दिनों में भी लोग विभाजित थे, यद्यपि विभिन्न मुद्दों पर l रोम में मसीहियों के बीच किन खाद्य पदार्थों को खाने की अनुमति थी और किन दिनों को पवित्र माना जाता था, जैसे विषयों पर असहमति थी l जिस भी मत पर वे थे, उसके विषय “अपने मन में पूरी तरह आश्वस्त” होने के बावजूद, पौलुस उन्हें उनके सामान्य आधार की याद दिलाता है : यीशु के लिए जीना (रोमियों 14:5-9) l एक दूसरे पर फैसला सुनाने के स्थान पर, उसने उन्हें “मेल-मिलाप और एक दूसरे का सुधार” करने के लिए उत्साहित किया (पद.19) l
ऐसे युग में जब अनेक देश, कलीसिया, और समुदाय बड़े और छोटे मुद्दों पर विभाजित हैं, हम अपने जीवन को मसीह के साथ अनंत काल तक सुरक्षित करने के लिए क्रूस पर मसीह के कार्य के एक करने वाली सच्चाई की ओर एक दुसरे को इंगित कर सकते हैं l पौलुस की ताकीद कि हमें अपने व्यक्तिगत दृष्टिकोण के द्वारा “परमेश्वर का काम [नहीं बिगड़ना है] (पद.20) जैसे कि 2,000 वर्ष पूर्व था l एक दूसरे का न्याय करने की अपेक्षा, हम प्रेम के साथ आचरण कर सकते हैं और ऐसा जीवन जी सकते हैं जिससे हमारे भाई और बहन को आदर मिले।
हमारी तरह, हमारे लिए
प्रीति ने देखा कि उसकी बेटी मॉल में अपनी टोपी नहीं उतारना चाह रही थी और समझ गयी कि इलाज के एक हिस्से के अंतर्गत अत्यधिक कीमोथेरेपी से उत्पन्न गंजेपन के विषय संकोची थी l अपनी बेटी की मदद करने के लिए कृतसंकल्प, उसने अपने लम्बे, शोभायमान बालों को मुंडवाने का पीड़ादायक चुनाव किया ताकि वह अपनी बेटी के साथ तादात्म्य स्थापित कर सके l
प्रीति का अपनी बेटी से प्रेम परमेश्वर का उसके पुत्र और पुत्रियाँ के लिए प्रेम को प्रदर्शित करता है l क्योंकि हम, उसकी संतान, “मांस और लहू के भागी हैं (इब्रानियों 2:14), यीशु हमारी तरह बन गया और मानव देह धारण किया और [हमारा] “सहभागी” हो गया, ताकि मृत्यु . . . को निकम्मा कर दे (पद.14) l “उसको चाहिए था, कि सब बातों में [हमारे] . . . समान बने” (पद.17) ताकि हमारे लिए परमेश्वर के साथ सब बातों को सही कर दे l
प्रीति अपनी बेटी को उसके संकोच पर जीत दिलाने में मदद करना चाहती थी और इसलिए खुद को अपनी बेटी की “तरह” बना डाली l यीशु ने हमें हमारी अत्यधिक बड़ी समस्या पर जीत दिलाने में मदद की─दासत्व से मृत्यु l उसने खुद को हमारे समान बनाकर, हमारे पाप का परिणाम अपने ऊपर उठाकर हमारे स्थान पर मृत्यु सहकर हमारे लिए जीत हासिल की l
यीशु का हमारे मनुष्यत्व को स्वेच्छा से साझा करने की इच्छा न केवल परमेश्वर के साथ सही सम्बन्ध सुनिश्चित किया लेकिन संघर्ष के हमारे क्षणों में उस पर भरोसा करने में योग्य बनाता है l जब हम आजमाइश और कठिनाई का सामना करते हैं, तो हम सामर्थ और सहयोग के लिए उस पर टिक सकते हैं क्योंकि वह “सहायता कर सकता है” (पद.18) l एक प्रेमी पिता की तरह, वह हमें समझता और हमारी चिंता करता है।
स्थाई पता
अभी हाल ही में हम अपने पुराने घर से कुछ दूर अपने अन्य घर में आए हैं l निकट होने के बावजूद भी, हमें आर्थिक लेन-देन के समय के कारण एक सामान ले जानेवाले ट्रक में अपना सारा सामान लोड करना पड़ा l पुराने घर के बेचने और नया घर खरीदने के बीच, हमारा साज-सामान ट्रक पर ही रखा रहा और हमारे परिवार ने अस्थायी निवास ढूंढ लिया l उस समय के दौरान, मैं यह जानकार चकित हुयी कि किस प्रकार “घर में” हमने हमारे भौतिक घर से विस्स्थापन महसूस की─केवल इसलिए क्योंकि मैं अपने सबसे प्रियों के साथ थी : मेरा परिवार l
अपने जीवन में कुछ समय, दाऊद के पास एक भौतिक घर नहीं था l उसने राजा शाऊल के कारण भगोड़ा का जीवन जीया l सिंहासन पर परमेश्वर के नियुक्त उत्तराधिकारी के रूप में, शाऊल, दाऊद को ख़तरा के रूप में देखता था और उसकी हत्या करने की कोशिश की l दाऊद अपने घर से भाग गया और जहां भी उसे आश्रय मिला वह सो गया l यद्यपि उसके साथ साथी थे, दाऊद की दिली इच्छा “यहोवा के भवन में” रहने की थी─उसके साथ स्थायी सहभागिता का आनंद लेने के लिए (भजन 27:4) l
चाहे हम कहीं भी हैं, यीशु हमारा निरंतर साथी है, हमारे “घर” का अहसास है l वह हमारे वर्तमान परेशानियों में है और वह उसके साथ रहने के लिए हमारे लिए घर भी तैयार कर रहा है (यूहन्ना 14:3) l इस पृथ्वी के नागरिक होकर अनिश्चितता और परिवर्तन का अनुभव के बावजूद, हम प्रति दिन और हर जगह उसके साथ अपनी संगति में स्थायी रूप से निवास कर सकते हैं l
परमेश्वर की अच्छी गोंद
एक अमेरिकी विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने हाल ही में एक नए प्रकार का गोंद तैयार किया है जो बेहद मजबूत भी है और हटाई भी जा सकती है। उनका डिज़ाइन एक घोंघे से प्रेरित है जिसका चिपचिपा पदार्थ(slime) शुष्क परिस्थितियों में सख्त हो जाता है और गीला होने पर फिर से ढीला हो जाता है। घोंघे के चिपचिपा पदार्थ की प्रतिवर्ती/उलट्नीय प्रकृति इसे अधिक आर्द्र परिस्थितियों में स्वतंत्र रूप से स्थानांतरित होने की अनुमति देती है─घोंघे के लिए सुरक्षित─जबकि इसे अपने वातावरण में सुरक्षित रूप से स्थापित रखना जब गति हो।
शोधकर्ताओं के प्रकृति में पाए जाने वाली गोंद की नकल करने के तरीका ने वैज्ञानिक जोहान्स केप्लर की उनकी खोजों के विवरण की याद दिलाई। उन्होंने कहा था कि वह "केवल उसके पीछे परमेश्वर के विचार सोच रहे थे।" बाइबल हमें बताती है कि परमेश्वर ने पृथ्वी और उसमें जो कुछ भी है, उसे बनाया : भूमि पर वनस्पति (उत्पत्ति 1:12); "समुद्र के जीव" और "हर पंख वाले पक्षी" (पद. 21); "जन्तु जो भूमि पर रेंगते हैं" (पद. 25); और "मनुष्य को अपने स्वरूप में" (पद. 27)। जब मानवजाति किसी पौधे या जानवर के विशेष गुण की खोज या पहचान करती है, तो हम बस परमेश्वर के रचनात्मक नक्शेकदम पर चल रहे होते हैं, अपनी आँखे खोलकर उसके डिजाइन/अभिकल्पना करने के तरीके को देखते है।
सृष्टि की रचना के प्रत्येक दिन के अंत में, परमेश्वर ने अपने कार्य के परिणाम का सर्वेक्षण किया और इसे "अच्छा" बताया। जैसे-जैसे हम परमेश्वर की सृष्टि के बारे में अधिक सीखते और खोजते हैं, हम भी उसके शानदार कार्य को पहचानें, उसकी अच्छी तरह से देखभाल करें, और स्वीकारें कि यह कितना अच्छा है!
सुंदर पाँव
जॉन नैश को गणित में उनके अग्रणी कार्य को मान्यता देते हुए 1994 में, अर्थशास्त्र के नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। उसके समीकरणों का उपयोग दुनिया भर के व्यवसायों द्वारा प्रतिस्पर्धा और प्रतिद्वंद्विता की गतिशीलता को समझने के लिए किया गया है। एक किताब और एक पूरी फिल्म ने उनके जीवन का दस्तावेजीकरण किया है और उन्हें "एक सुंदर दिमाग" वाले के रूप में संदर्भित किया है─इसलिए नहीं कि उनके मस्तिष्क में कोई विशेष कलात्मक अपील थी, बल्कि उन्होंने जो किया था उसके कारण।
पुराने नियम के भविष्यवक्ता यशायाह सुंदर शब्द का उपयोग पैरों का वर्णन करने के लिए करते हैं─यह किसी भी दृश्य शारीरिक विशेषता के कारण नहीं, बल्कि इसलिए कि उनके द्वारा जो किया गया उसमें उन्होंने सुंदरता देखी। "पहाड़ों पर उनके पांव क्या ही सुहावने हैं जो शुभ सुसमाचार लाते हैं" (यशायाह 52:7)। परमेश्वर के प्रति विश्वासघाती होने के परिणामस्वरूप, बाबुल में सत्तर वर्षों की बन्धुवाई के बाद, संदेशवाहक उत्साहजनक शब्दों के साथ आए कि परमेश्वर के लोग जल्द ही घर लौट आएंगे क्योंकि “यहोवा ने . . . यरूशलेम को छुड़ा लिया" (पद. 9)।
खुशखबरी का श्रेय इस्राएलियों की सैन्य शक्ति या किसी अन्य मानवीय प्रयास को नहीं दिया गया। बल्कि यह उनकी ओर से परमेश्वर की "पवित्र भुजा" का कार्य था (पद.10)। आज भी यह सत्य है, जैसे हमारे लिए मसीह के बलिदान के द्वारा हमारे आत्मिक शत्रु पर विजय प्राप्त होती है। जवाब में, हम खुशखबरी के दूत बन जाते हैं, हमारे आसपास के लोगों के लिए शांति, खुशखबरी और उद्धार का प्रचार करते हैं। और हम ऐसा सुंदर पैरों के साथ करते हैं।