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Articles by माँरविन विलियम्स

भाग्य नहीं, लेकिन मसीह

डिस्कवर पत्रिका बताती है कि सृष्टि में लगभग 700 क्विनटिलियन(7 के बाद 20 शून्य) ग्रह हैं, लेकिन पृथ्वी जैसा केवल एक ही है l खगोलभौतिकीविद्(Astrophysicist) एरिक जैक्रिसन ने कहा कि जीवन को बनाए रखने के लिए किसी ग्रह की आवश्यकताओं में से एक “गोल्डीलॉक्स(Goldilocks)” क्षेत्र में परिक्रमा करना है, जहाँ तापमान बिलकुल सही है, और पानी मौजूद हो सकता है l 700 क्विनटिलियन ग्रहों में से, पृथ्वी एक ऐसा ग्रह प्रतीत होता है जहाँ स्थितियाँ बिलकुल सही है l जैक्रिसन ने निष्कर्ष निकाला कि पृथ्वी को किसी तरह “काफी भाग्यशाली सफलता(fairly lucky hand)” मिली है l 

पौलुस ने कुलुस्से के विश्वासियों को निश्चय दिया कि सृष्टि किस्मत के कारण नहीं, बल्कि यीशु के कार्य के कारण अस्तित्व में है l प्रेरित मसीह को संसार के रचयिता के रूप में प्रस्तुत करता है : “क्योंकि उसी में सारी वस्तुओं की सृष्टि हुयी” (कुलुस्सियों 1:16) l न केवल यीशु संसार का शक्तिशाली निर्माता था, बल्कि पौलुस कहता है कि “सब वस्तुएँ उसी में स्थिर रहती हैं” (पद.17)—एक ऐसा संसार जो न बहुत गर्म है और न बहुत ठंडा, बल्कि एक ऐसा संसार जो मानव अस्तित्व के लिए बलकुल सही है l यीशु ने जो बनाया, वह अपनी सम्पूर्ण बुद्धि और अनवरत शक्ति से कायम है l 

जब हम सृष्टि की सुन्दरता में भाग लेते हैं और उसका आनंद लेते हैं, आइए किस्मत की निरुद्देश्य गतिविधि की ओर इशारा न करें, बल्कि उद्देश्यपूर्ण, संप्रभु, शक्तिशाली और प्रेमपूर्ण व्यक्ति की ओर इशारा करें, जिसके पास “[परमेश्वर की] सभी पूर्णता” है (पद.19) l 

विनम्र किया गया

अहंकार पहले आता है और अक्सर अपमान की ओर ले जाता है—कुछ ऐसा जो नॉर्वे के एक व्यक्ति को पता चला l यहाँ तक कि दौड़ने वाले कपड़े के बगैर भी, उस व्यक्ति ने अहंकारपूर्वक 400 मीटर बाधा दौड़ में विश्व रिकॉर्ड धारक कस्टर्न वारहोम, को दौड़ में चुनौती दी l वारहोम, एक इनडोर सार्वजनिक सुविधा/facility में प्रशिक्षण लेते हुए, चुनौती देने वाले से आगे निकल गए l समापन रेखा पर, दो बार का विश्व चैंपियन मुस्कुराया जब उस व्यक्ति ने ज़ोर देकर कहा कि उसका आरम्भ ख़राब रहा है और वह फिर से दौड़ लगाना चाहता है!

नीतिवचन 29:23 में हम पढ़ते हैं, “मनुष्य को गर्व के कारण नीचा देखना पड़ता है, परन्तु नम्र आत्मावाला महिमा का अधिकारी होता है l अभिमानियों के साथ परमेश्वर का व्यवहार इस पुस्तक में सुलैमान के पसंदीदा विषयों में से एक है (1:2; 16:18; 18:12) l इन पदों में अभिमान या अहंकार शब्द का अर्थ है “सूजन” या “फूला हुआ”—जो उचित रूप से ईश्वर का है उसका श्रेय लेना l जब हम अहंकार से भर जाते हैं, तो हम अपने बारे में जरुरत से ज्यादा सोचते हैं l यीशु ने एक बार कहा था, “जो कोई अपने आप को बड़ा बनाएगा, वह छोटा किया जाएगा : और जो कोई अपने आपको छोटा बनाएगा, वह बड़ा किया जाएगा” (मत्ती 23:12) l वह और सुलेमान दोनों हमें नम्रता और दीनता का अनुसरण करने के लिए निर्देशित करते हैं l यह झूठी विनम्रता नहीं है, बल्कि स्वयं को अधिकार देना और यह स्वीकार करना है कि हमारे पास जो कुछ भी है वह ईश्वर से आया है l यह बुद्धिमानी है और अहंकारपूर्वक “बातें करने में उतावली” नहीं करना है (नीतिवचन 29:) l 

आइए परमेश्वर से प्रार्थना करें कि वह हमें खुद को विनम्र बनाकर उसका सम्मान करने और अपमान से बचने के लिए हृदय और बुद्धि दे l

अब और पक्षपात नहीं

कई साल पहले, जूली लैंड्समैन ने न्यूयॉर्क के मेट्रोपॉलिटन ओपेरा ऑर्केस्ट्रा में मुख्य ट्रम्पेटर की भूमिका के लिए ऑडिशन (नमूना प्रदर्शन) दिया था। एमईटी नामक इस संगीतकंपनी ने न्यायाधीशों के पक्षपात से बचने के लिए अपने ऑडिशन को एक स्क्रीन के पीछे आयोजित किया। लैंड्समैन ने अपने ऑडिशन में अच्छा प्रदर्शन किया और प्रतियोगिता जीत ली। लेकिन जब वह स्क्रीन के पीछे से बाहर निकलीं, तो कुछ पुरुष जज कमरे के पीछे की ओर चले गए और उनसे मुंह मोड़ लिया। जाहिर है, वे किसी और की तलाश में थे।

जब इस्राएलियों ने एक राजा की मांग की, तो परमेश्वर ने लोगों को एक ऐसा व्यक्ति दिया जो अन्य राष्ट्रों की तरह शारीरिक रूप से प्रभावशाली था (1 शमूएल 8:5; 9:2)। लेकिन चूँकि राजा के रूप में शाऊल के पहले वर्ष अविश्वास और अवज्ञा से चिह्नित थे, इसलिए परमेश्वर ने शमूएल को एक नए राजा का अभिषेक करने के लिए बेथलेहेम भेजा (16:1-13)। जब शमूएल ने सबसे बड़े बेटे एलीआब को देखा, तो उसने मान लिया कि परमेश्वर ने उसे राजा बनने के लिए चुना है क्योंकि वह शारीरिक रूप से प्रभावशाली था। लेकिन परमेश्वर ने शमूएल की सोच को चुनौती दी: "लोग बाहरी रूप को देखते हैं, परन्तु यहोवा हृदय को देखता है" (पद7)। परमेश्वर ने अपने लोगों का नेतृत्व करने के लिए दाऊद को चुना था (पद12)।

अपने उद्देश्यों के लिए लोगों की क्षमता और उपयुक्तता का मूल्यांकन करते समय परमेश्वर, चरित्र, इच्छा और उद्देश्यों को देखते हैं। वह हमें दुनिया और लोगों को उसी तरह देखने के लिए तैयार होने के लिए आमंत्रित करता है जैसे वह करता है - लोगों के दिलों पर ध्यान केंद्रित करना, न कि उनके बाहरी स्वरूप या पहचान पर।

गलतियों से सीखना

भविष्य की आर्थिक गलतियों से बचने में मदद करने के लिए, जैसे कि 1929 और 2008 में हुई गलतियाँ, जिन्होंने दुनिया की अर्थव्यवस्था को नीचे ला दिया, लाइब्रेरी ऑफ मिस्टेक की स्थापना एडिनबर्ग, स्कॉटलैंड में की गई थी। इसमें दो हजार से अधिक पुस्तकों का संग्रह है जो अगली पीढ़ी के अर्थशास्त्रियों को शिक्षित करने में मदद कर सकते हैं। और यह इस बात का एक आदर्श उदाहरण है कि कैसे, लाइब्रेरी के क्यूरेटर (अध्यक्ष) के अनुसार, "स्मार्ट लोग मूर्खतापूर्ण काम करते रहते हैं।" क्यूरेटर का मानना है कि एक मजबूत अर्थव्यवस्था बनाने का एकमात्र तरीका पिछली गलतियों से सीखना है।

पौलुस ने कुरिन्थियों को याद दिलाया कि प्रलोभन से बचने और एक मजबूत आत्मिक जीवन जीने का एक तरीका अतीत में परमेश्वर के लोगों की गलतियों से सीखना है। इसलिए यह सुनिश्चित करने के लिए कि वे अपने आत्मिक विशेषाधिकार के प्रति अति आत्मविश्वासी न हो जाएँए प्रेरित ने ज्ञान प्राप्त करने के लिए प्राचीन इस्राएल की विफलताओं को एक उदाहरण के रूप में इस्तेमाल किया। मूर्तिपूजा में लगे इस्राएलियों ने "यौन अनैतिकता करना" चुना, परमेश्वर की योजनाओं और उद्देश्यों के बारे में बड़बड़ाया, और उसके अगुवों  के खिलाफ विद्रोह किया। अपने पाप के कारण, उन्होंने उसके अनुशासन का अनुभव किया (1 कुरिन्थियों 10:7-10)। पौलुस ने यीशु में विश्वासियों को इस्राएल की गलतियों को दोहराने से बचने में मदद करने के लिए पवित्रशास्त्र से ये ऐतिहासिक "उदाहरण" प्रस्तुत किए (पद 11)।

जब कि परमेश्वर हमारी सहायता करता है, आइए हम अपनी और दूसरों द्वारा की गई गलतियों से सीखें ताकि हम उसके प्रति आज्ञाकारी हृदय प्राप्त कर सकें।

जीवन का मुकुट

बारह वर्षीय लीएडियानेज़ रोड्रिग्ज-एस्पाडा चिंतित थी कि उसे 5 किमी (3 मील से थोड़ा अधिक) दौड़ में देर हो जाएगी। उसकी उत्सुकता ने उसे अपने प्रारंभ समय से पंद्रह मिनट पहले हाफ-मैराथन (13 मील से अधिक!) के प्रतिभागियों के धावकों के साथ दौड़ शुरू करने को प्रेरित किया । लीएडियानेज़ अन्य धावकों की गति में गई और एक पैर दूसरे के सामने रखते गई। चार मील पर, जब समापन रेखा कहीं दिखाई नहीं दी, तब उसे एहसास हुआ कि वह एक लंबी और अधिक कठिन दौड़ में थी। बाहर निकलने के बजाय, वह बस दौड़ती रही। आकस्मिक हाफ मैराथन धावक ने अपने 13.1 मील का दौड़ पूरा किया और 2,111 धावको में से 1,885वें स्थान पर रही। अब यह है दृढ़ता!

 

यीशु में पहली सदी के कई विश्वासी सताव सहते हुए, मसीह की दौड़ से बाहर होना चाहते थे, लेकिन याकूब ने उन्हें दौड़ते रहने के लिए प्रोत्साहित किया। यदि उन्होंने धैर्य पूर्वक परीक्षा सहा, तो परमेश्वर उन्हें दोगुना इनाम देने का वादा किया (याकूब 1:4, 12)। पहला, “धीरज को अपना पूरा काम करने दो, कि तुम पूरे और सिद्ध हो जाओ और तुम में किसी बात की घटी न रहे” (पद.4)। दूसरा, परमेश्वर उन्हें  "जीवन का वह मुकुट" देगा—पृथ्वी पर यीशु में जीवन और आने वाले जीवन में उसकी उपस्थिति में रहने का वादा (पद.12) ।

 

कभी-कभी  मसीही दौड़ ऐसा महसूस होता है कि यह वह नहीं है जो मैं इंगित किया था—यह हमारी उम्मीद से अधिक लंबा और कठिन है। लेकिन जैसे परमेश्वर हमारी ज़रूरतों को पूरी करता है, हम दृढ़ रह सकते और दौड़ते रह सकते हैं। आप इस समय कौन सा कठिनाई सह रहे हैं?

परमेश्वर का छुटकारा

एक करुणामय स्वयंसेवक को उसके बहादुरी के कार्य हेतु उसे एक “संरक्षक दूत” (guardian angel) कहके संबोधित किया गया। जेक मन्ना अपने काम के स्थान पर सोलर पैनल लगा रहा था जब वह एक लापता पांच वर्षीय लड़की को ढूंढने के लिए तत्काल खोज में शामिल हो गया। जब पड़ोसियों ने अपनी गराजों और आंगनों में ढूंढा । मन्ना भी लड़की को ढूंढने के लिए एक नजदीकी मार्ग पर सीधा निकल गया जब वह एक जंगली क्षेत्र पर पहुंचा तो उसने वहां पर लड़की को कमर तक कीचड़ में फंसे हुए देखा उसने बड़ी ही सावधानी से उस गंदी दलदल से उसे बाहर निकाला और उसे किसी भी क्षति के बिना उसकी धन्यवादी माँ को लौटा दिया।

उस छोटी बच्ची की तरह, दाऊद ने भी छुटकारे का अनुभव किया। भजनकार भी अपनी पीड़ा में परमेश्वर को पुकार कर उसकी करुणा के लिए "धैर्यपूर्वक प्रतीक्षा की" (भजन संहिता 40:1)। और परमेश्वर ने किया, उसने उसकी पुकार की ओर अपनी दृष्टि की और सहायता देते हुए उसे उस कीचड़ रूपी परिस्थिति से बाहर निकाला (पद 2)—दाऊद के जीवन को स्थिर किया। बीते समय की दलदल से जब परमेश्वर ने उसे बचा निकाला तब उसके हृदय में स्तुति के भजन गाने लगा, जिससे भविष्य की परिस्थितियों में परमेश्वर को अपना भरोसा बनाए और अपनी कहानी दूसरों के साथ साझा कर सके (पद 3-4)।

जब हम स्वयं को जीवन की चुनौतियों जैसे आर्थिक मंदी, विवाहित परेशानियां और अयोग्य महसूस करने जैसी परिस्थितियों से घिरा हुआ पाते हैं, तो हम परमेश्वर की ओर अपनी आवाज को उठाएं और बड़े धीरज के साथ उसके प्रत्युत्तर की अपेक्षा करें (पद 1)। वह वहाँ है, हमारी ज़रूरत के समय में हमारी मदद करने और हमें खड़े होने के लिए एक स्थाई जगह देने के लिए तैयार है।।

परमेश्वर के प्रति समर्पण

परमेश्वर उनकी मदद नहीं करते जो अपनी मदद खुद करते हैं; वह उन लोगों की मदद करते है जो उस पर भरोसा करते हैं । सुसमाचार पर आधारित सफल टीवी श्रृंखला द चोज़ेन (The Chosen) में यीशु की भूमिका निभाने वाले अभिनेता जोनाथन रूमी को  मई 2018 में इस बात का एहसास हुआ। रूमी आठ साल से लॉस एंजिल्स में रह रहे थे, लगभग टूट चुके थे, उनके पास खाने के लिए बस दिन भर का ही भोजन था और कोई काम नज़र नहीं आ रहा था। यह नहीं जानते हुए कि वह इसे कैसे गुज़ारा कर पाएंगे, उस अभिनेता ने अपना ह्रदय परमेश्वर के सामने खोल दिया और अपना करियर (व्यवसाय) परमेश्वर को सौंप दिया। "मैंने वस्तुतः इन शब्दों से प्रार्थना की, 'मैं आत्मसमर्पण करता हूँ। मैं आत्मसमर्पण करता हूं।'' उस दिन बाद में, उन्हें ड़ाक  में चार चेक मिले और तीन महीने बाद, उन्हें “द चोज़ेन” में यीशु की भूमिका के लिए चुना गया। रूमी ने जाना कि परमेश्वर उन लोगों की मदद करते है जो उस पर भरोसा करते हैं।

"जो कुकर्मी हैं" (भजन संहिता 37:1) उनसे ईर्ष्या करने और उन पर क्रोधित होने के बजाय, भजनकार हमें सब कुछ परमेश्वर को समर्पित करने के लिए आमंत्रित करता है। जब हम अपने जीवन को उस पर केन्द्रित करते हैं, "उस पर भरोसा रखते और अच्छा करते," "उसमें प्रसन्न रहते" है (पद 3-4) और अपनी सभी इच्छाओं, समस्याओं, चिंताओं और अपने जीवन की दैनिक घटनाओं को उसे समर्पित करते हैं तब परमेश्वर हमारे जीवन को निर्देशित करेगा और हमें शांति देगा (पद- 5-6)। यीशु में विश्वासियों के रूप में, हमारे लिए यह महत्वपूर्ण है कि हम उसे यह निर्धारित करने दें कि हमारा जीवन कैसा होना चाहिए।

आइए समर्पण करें और परमेश्वर पर भरोसा रखें। जैसे हम समर्पण करेंगे, वह कार्य करेगा और वही करेगा जो आवश्यक और सर्वोत्तम होगा।

आपके पास जो है उसे मसीह के लिए उपयोग करें

क्या आपने कभी द सोइंग हॉल ऑफ फ़ेम (The Sewing Hall of Fame) के बारे में सुना है? 2001 में स्थापित, यह उन लोगों को मान्यता देता है जिन्होंने "सिलाई शिक्षा और उत्पाद विकास के माध्यम से अनोखे और परिवर्तनात्मक योगदान के साथ घरेलू सिलाई उद्योग पर अपना स्थायी प्रभाव डाला है।" इसमें मार्था पुलेन जैसी महिला हैं, जिन्हें 2005 में हॉल में शामिल किया गया था, जिन्हें "नीतिवचन 31 महिला के रूप में वर्णित किया गया है। अपनी शक्ति, प्रेरणा और आशीष के स्रोत को सार्वजनिक रूप से स्वीकार करने में कभी असफल नहीं हुई।''

सोइंग हॉल ऑफ फ़ेम इक्कीसवीं सदी का आविष्कार है, लेकिन अगर यह इज़राइल में पहली सदी के आसपास होता, तो तबीता  नाम की एक महिला प्रेरणा का कारण होती।  तबीता यीशु में विश्वास करने वाली और सीनेवाली स्त्री थी जो अपने समुदाय की गरीब विधवाओं के लिए सिलाई करके अपना समय बिताती थी (प्रेरितों 9:36, 39)। जब वह बीमार हो गई और मर गई, तो शिष्यों ने पतरस को यह देखने के लिए बुलाया कि क्या परमेश्वर उनके माध्यम से कोई चमत्कार करेंगे। जब वह पहुंचे, तो रोती हुई विधवाओं ने उन्हें वस्त्र और अन्य कपड़े दिखाए जो तबीता ने उनके लिए बनाए थे (पद- 39)। ये कपड़े उसके शहर में गरीबों के लिए "हमेशा भला करने" का सबूत थे (पद- 36)। परमेश्वर की शक्ति से, तबीता  को एक बार फिर से जीवन मिल गया।

परमेश्वर हमें बुलाते हैं और हमें हमारे समुदाय और दुनिया में मौजूद जरूरतों को पूरा करने के लिए हमारे कौशल का उपयोग करने के लिए तैयार करते हैं। आइए हम अपने कौशल को यीशु की सेवा में दे और देखें कि वह ह्रदयों और जीवन को एक साथ जोड़ने के लिए हमारे प्रेम के कार्यों का उपयोग कैसे करेगा (इफिसियों 4:16)।

स्पष्ट रोना

जब कोई बच्चा रोता है, तो यह संकेत है कि वह थका हुआ है या भूखा है, है ना! ब्राउन यूनिवर्सिटी के डॉक्टरों के अनुसार, नवजात शिशु के रोने में हल्का सा अंतर भी अन्य समस्याओं के लिए महत्वपूर्ण संकेत दे सकता है। डॉक्टरों ने एक कंप्यूटर प्रोग्राम तैयार किया है जो रोने के कारकों जैसे पिच (उतार चढ़ाव), तीव्रता, और रोने की आवाज में स्पष्टता को मापता है ताकि यह निर्धारित किया जा सके कि बच्चे के केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (baby’s central nervous system) में कुछ गड़बड़ है या नहीं।

यशायाह ने भविष्यवाणी करी कि परमेश्वर अपने लोगों की स्पष्ट पुकार सुनेंगे, उनके दिलों की हालत समझेंगे, और अनुग्रह के साथ जवाब देंगे। यहूदा ने, परमेश्वर से परामर्श करने के बजाय, उसके भविष्यवक्ता की उपेक्षा की थी और मिस्र के साथ गठबंधन में मदद मांगी थी (यशायाह 30:1–7)। परमेश्वर ने उनसे कहा कि यदि उन्होंने अपना विद्रोह जारी रखा, तो वह उनके सामने उनकी हार और अपमान लाएगा। हालाँकि वह उन पर “अनुग्रह करने की भी और उन पर दया दिखाने की इच्छा रखता था” (पद 18)। बचाव आएगा, लेकिन केवल उनके पश्चाताप और विश्वास के रोने से। यदि परमेश्वर के लोग उसे पुकारते, तो वह उनके पापों को क्षमा कर देता और उनकी आत्मिक शक्ति और जीवन शक्ति को नया कर देता (पद 8–26)।

यही बात आज यीशु में विश्वास करने वालों के लिए भी सच है। जब पश्चाताप और विश्वास की हमारी  स्पष्ट पुकारें (दोहाई) हमारे स्वर्गीय पिता के कानों तक पहुँचती हैं, तो वह उन्हें सुनता है, हमें क्षमा करता है, और उसमें हमारे आनंद और आशा को नया करता है।