परमेश्वर की अनंत कलीसिया
“क्या चर्च ख़त्म हो गया है?” जैसे ही रविवारीय सभा समाप्त हो रही थी, एक युवा माँ ने दो बच्चों के साथ हमारे चर्च में आते समय कहा l एक स्वागतकर्ता ने उसे बताया कि निकट के एक चर्च में दो रविवारीय आराधना होती है और दूसरी जल्द ही शुरू होनेवाली है l क्या वह वहां जाना चाहेगी? वह युवा माँ ने हाँ कहा और कुछ दूरी पर उस चर्च में जाने के लिए आभारी थी l बाद में विचार करते हुए, स्वागतकर्ता इस परिणाम पर पहुंचा : “क्या चर्च ख़त्म हो गया है? कभी नहीं l परमेश्वर की कलीसिया सर्वदा चलती रहती है l”
चर्च एक “नाजुक” इमारत नहीं है l पौलुस लिखता है, यह परमेश्वर का विश्वासयोग्य परिवार है जो “परमेश्वर के घराने के [हैं] . . . और प्रेरितों और भविष्यद्वक्ताओं की नींव पर, जिसके कोने का पत्थर मसीह यीशु स्वयं ही है, बनाए गए [हैं] जिसमें सारी रचना एक साथ मिलकर प्रभु में एक पवित्र मंदिर बनती जाती है l जिसमें तुम भी आत्मा के द्वारा परमेश्वर का निवासस्थान होने के लिए एक साथ बनाए जाते हो” (इफिसियों 2:19-22) lआपकी स्थानीय कलीसिया के विषय में कौन सी बात आपको आभारी बनाती है? आप परमेश्वर की विश्वव्यापी कलीसिया को बढ़ने में कैसे मदद कर सकते हैं?
यीशु ने स्वयं ही अपनी कलीसिया को अनंतता के लिए स्थापित किया l उसने घोषणा की कि चुनौतियों या मुसीबतों के बावजूद जिसका सामना कलीसिया करती है, “अधोलोक की फाटक उस पर प्रबल न होंगे” (मत्ती 16:18) l
समर्थ बनाने वाले इस लेंस के द्वारा, हम अपनी स्थानीय कलीसियाओं को—हम सभी—परमेश्वर की विश्वव्यापी कलीसिया के एक हिस्से के रूप में, मसीह यीशु में उसकी महिमा पीढ़ी से पीढ़ी तक युगानुयुग” बनते हुए देख सकते हैं!” (इफिसियों 3:21) l
गहरा पानी
जब बिल पिंकनी ने 1992 में दुनिया भर में अकेले यात्रा किया - खतरनाक महान दक्षिणी कैम्प के चारों ओर कठिन मार्ग लेते हुए - उन्होंने इसे एक उच्च उद्देश्य के लिए किया। उनका यात्रा बच्चों को प्रेरित करने और शिक्षित करने के लिए था। इसमें उनके पूर्व आंतरिक शहर शिकागो प्राथमिक विद्यालय के छात्र शामिल थे। उनका लक्ष्य? यह दिखाना था कि कड़ी मेहनत से अध्ययन करके और समर्पित होकर वे कितना दूर तक जा सकते हैं—वह शब्द जिसे उन्होंने अपनी नाव का नामकरण करने के लिए चुना। जब बिल समर्पित में स्कूली बच्चों को पानी पर ले जाता है, वे कहते हैं, "उनके हाथ में वह टिलर है और वे नियंत्रण, संयम के बारे में सीखते हैं, वे टीम वर्क. .. जीवन में सफल होने के लिए आवश्यक सभी मूल बातों के बारे में सीखते हैं।”
पिंकनी का शब्द सुलेमान के बुद्धि का चित्र चित्रित करता है। “मनुष्य के मन की युक्ति अथाह तो है, तो भी समझवाला मनुष्य उसको निकाल लेता है।” (नीतिवचन 20:5) उन्होंने दूसरों को अपने जीवन के लक्ष्यों का जांच करने के लिए आमंत्रित किया। नहीं तो, यह “फन्दा” है, सुलेमान ने कहा, “जो मनुष्य बिना विचारे किसी वस्तु को पवित्र ठहराए, और जो मन्नत मानकर पूछपाछ करने लगे, वह फंदे में फंसेगा”(25)।
इसके विपरीत, विलियम पिंकनी का एक स्पष्ट उद्देश्य था जिसने अंततः पूरे अमेरिका में तीस हजार छात्रों को उनकी यात्रा से सीखने के लिए प्रेरित किया। वह नेशनल सेलिंग हॉल ऑफ फ़ेम में शामिल होने वाले पहले अफ्रीकी अमेरिकी बने। उन्होंने कहा, "बच्चे देख रहे थे। इसी तरह के उद्देश्य के साथ, आइए हम परमेश्वर के निर्देशों के गहरे सलाह के द्वारा अपना मार्ग निर्धारित करें।
वह हमें नया बनाता है
एक यात्रा अधिकारी के रूप में, शॉन सेप्लर एक अजीब सवाल से जूझ रहे थे — होटल के कमरों में बचे हुये साबुन का क्या होता है? सेप्लर का मानना था कि जमीन के भराव (लैंडफिल) के लिए कचरे के रूप में फेंके जाने के बजाय लाखों साबुन के टुकड़ों को नया बनाया जा सकता है। इसलिए उन्होंने एक रीसाइक्लिंग (पुनरावर्तन) कार्य— क्लीन द वर्ल्ड आरम्भ किया, जिसने आठ हजार से अधिक होटलों, क्रूज लाइनों, और रिसॉर्ट्स को लाखों पाउंड के बेकार साबुन को कीटाणुरहित, नए ढाले हुए साबुन बार में बदलने में मदद की है। यह साबुन सौ से अधिक देशों में जरूरतमंद लोगों को भेजा गया। फिर से नया बना यह साबुन अनगिनत स्वच्छता संबंधी बीमारियों और मौतों को रोकने में मदद करता है।
जैसा कि सेप्लर ने कहा, “मुझे पता है कि यह अजीब लगता है, लेकिन आपके होटल के कमरे में काउंटर पर साबुन की वह छोटी सी टिक्की सचमुच एक जीवन बचा सकती है।”
किसी इस्तेमाल की गई या गंदी वस्तु को नया जीवन देने के लिए एकत्र करना हमारे उद्धारकर्ता, यीशु के सबसे प्यारे गुणों में से एक है। इस रीति से, जब उस ने पांच हजार की भीड़ को जौ की पांच छोटी रोटियां और दो छोटी मछिलयां खिलाईं, उसने तब भी अपने शिष्यों से कहा, “बचे हुए टुकड़ों को इकट्ठा करो। कुछ भी फेंका न जाये (व्यर्थ न जाए) यूहन्ना 6:12।
हमारे जीवन में, जब हम असफल महसूस करते हैं, तो परमेश्वर हमें बेकार जीवन के रूप में नहीं बल्कि अपने चमत्कारों के रूप में देखता है। उसकी दृष्टि में हम कभी फेंके हुये नहीं हैं, हमारे पास नए राज्य के कार्य के लिए ईश्वरीय क्षमता है। “इसलिये यदि कोई मसीह में है, तो वह नई सृष्टि है, पुरानी बातें बीत गई हैं, देखो सब बातें नई हो गई हैं।” (2कुरिन्थियों 5:17)। हमें नया क्या बनाता है? – हमारे भीतर मसीह।
छोटा लेकिन महान
क्या मैं ओलंपिक जा पाऊंगा? कॉलेज तैराक चिंतित था कि उसकी गति बहुत धीमी थी। लेकिन जब गणित के प्रोफेसर केन ओनो ने उनकी तैरने की तकनीक का अध्ययन किया, तो उन्होंने देखा कि कैसे उनके समय को छह पूर्ण सेकंड तक बढ़ाया जा सकता है - प्रतियोगिता के उस स्तर पर पर्याप्त अंतर। तैराक की पीठ पर सेंसर लगाते हुए, उसने उसके समय को बेहतर बनाने के लिए बड़े बदलावों की पहचान नहीं की। इसके बजाय, ओनो ने छोटे सुधारात्मक कार्यों की पहचान की, जो लागू होने पर तैराक को पानी में अधिक कुशल बना सकते हैं, जिससे जीत का अंतर आ सकता है।
आध्यात्मिक मामलों में छोटे-छोटे सुधारात्मक कार्य हमारे लिए भी बड़ा अंतर ला सकते हैं। भविष्यद्वक्ता जकर्याह ने अपने निर्माता जरूब्बाबेल के साथ निराश यहूदियों के एक शेष भाग को उनके बंधुआई के बाद परमेश्वर के मंदिर के पुनर्निर्माण के लिए समान सिद्धांत सिखाया। लेकिन "न तो बल से और न शक्ति से, परन्तु मेरे आत्मा के द्वारा," सर्वशक्तिमान यहोवा ने जरूब्बाबेल से कहा (जकर्याह 4:6)।
जैसा कि जकर्याह ने घोषित किया, " क्योंकि किस ने छोटी बातों के दिन तुच्छ जाना है?" (पद 10)। निर्वासितों को चिंता थी कि मंदिर राजा सुलैमान के शासनकाल के दौरान बनाए गए मंदिर से मेल नहीं खाएगा। लेकिन जिस तरह ओनो के तैराक ने ओलंपिक बनाया—छोटे-छोटे सुधारों के सामने आत्मसमर्पण करने के बाद पदक जीता—यरुब्बाबेल के बनानेवालों के समुह ने सीखा कि परमेश्वर की मदद से किया गया एक छोटा, सही प्रयास भी विजयी आनंद ला सकता है यदि हमारे छोटे-छोटे कार्य उसकी महिमा करते हैं। ईश्वर में, छोटा बड़ा हो जाता है।
प्रभु द्वारा जाना जाता है
गोद लेने के बाद दो भाइयों के अलग होने के बाद, लगभग बीस साल बाद एक डीएनए परीक्षण ने उन्हें फिर से मिलाने में मदद की। जब कीरोन ने विन्सेंट को संदेश भेजा, तो जिस आदमी को वह अपना भाई मानता था, विन्सेंट ने सोचा, यह अजनबी कौन है? जब कीरोन ने उससे पूछा कि उसे जन्म के समय क्या नाम दिया गया था, तो उसने तुरंत उत्तर दिया, "टायलर।" तब उन्हें पता चला कि वे भाई हैं। उनके नाम से ही उनकी पहचान हो गई थी!
विचार करें कि ईस्टर कहानी में एक नाम कैसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। जैसा कि यह प्रकट होता है, मरियम मगदलीनी मसीह की कब्र पर आती है, और जब वह उसके शरीर को गायब पाती है तो वह रोती है। "महिला, तुम क्यों रो रही हो?" यीशु पूछता है (यूहन्ना 20:15)। हालाँकि, उसने उसे तब तक नहीं पहचाना, जब तक कि उसने उसका नाम नहीं बताया: "मरियम" (पद. 16)।
उसे यह कहते सुनकर, वह "अरामी भाषा में चिल्लाई, 'रब्बोनी!' (जिसका अर्थ है 'गुरु')" (पद. 16)। उसकी प्रतिक्रिया यीशु में विश्वासियों को ईस्टर की सुबह महसूस होने वाली खुशी को व्यक्त करती है, यह पहचानते हुए कि हमारे पुनर्जीवित मसीह ने सभी के लिए मृत्यु पर विजय प्राप्त की, हम में से प्रत्येक को अपने बच्चों के रूप में जानते हुए। जैसा कि उसने मरियम से कहा, "मैं अपने पिता और तुम्हारे पिता, अपने परमेश्वर और तुम्हारे परमेश्वर के पास ऊपर जाता हूं" (पद. 17)।
जॉर्जिया में, दो पुनर्मिलित भाई नाम से बंध गए, "इस रिश्ते को अगले स्तर पर ले जाने" की प्रतिज्ञा ली। ईस्टर पर, हम यीशु की स्तुति करते हैं कि उसने उन लोगों के लिए त्यागपूर्ण प्रेम में उठने के लिए सबसे बड़ा कदम उठा लिया है जिन्हें वह अपना मानता है। आपके और मेरे लिए, वास्तव में, वह जीवित है!
मजबूत और अच्छा
युवा कैंपस मंत्री परेशान थे। लेकिन जब मैंने यह पूछने की हिम्मत की कि क्या वह प्रार्थना करते है तो वह विवादित दिखाई दिए। . . परमेश्वर के मार्गदर्शन के लिए। . . उसकी मदद के लिए। प्रार्थना करो, जैसा कि पौलुस ने आग्रह किया, निरंतर। जवाब में, युवक ने कबूल किया, "मुझे यकीन नहीं है कि मैं अब प्रार्थना में विश्वास करता हूं।" उनकी भौंहों पर बल पड़े। "या विश्वास करूँ कि परमेश्वर सुन रहा है। जरा दुनिया को देखो। वह युवा अगुवा अपनी शक्ति से एक सेवकाई का “निर्माण” कर रहा था और दुख की बात है कि वह असफल हो रहा था। क्यों? क्युँकि वह परमेश्वर को नकार रहा था।
यीशु, कलीसिया के सिरे के पत्थर के रूप में, हमेशा अस्वीकार किया गया है- वास्तव में, अस्वीकार करना उसके अपने ही लोगों के साथ शुरू हुआ (यूहन्ना 1:11)। बहुत से लोग आज भी उसे अस्वीकार करते हैं, संघर्ष कर रहे है अपने जीवन, कार्य, यहां तक कि कलीसियाओं को एक हलकी नीव पर बनाने के लिए - उनकी अपनी योजनाएं, सपने और अन्य अस्थिर भूमि। फिर भी, केवल हमारा अच्छा उद्धारकर्ता ही हमारी शक्ति और रक्षा है (भजन संहिता 118:14)। वास्तव में, "जिस पत्थर को राजमिस्त्रियों ने निकम्मा ठहराया था, वही कोने का पत्थर हो गया" (पद 22)।
हमारे जीवन के महत्वपूर्ण कोने में स्थित, उसमें जो विश्वासी है जो उसके लिए कुछ भी करना चाहते है उन्हें केवल वही सही संरेखण देता है। इसलिए, हम उससे प्रार्थना करते हैं, “हे यहोवा, हमें बचा! हे यहोवा, हमें सफलता प्रदान कर!” (वि. 25)। परिणाम? "धन्य है वह जो यहोवा के नाम से आता है" (पद 26)। हम उसे धन्यवाद दें क्योंकि वह मजबूत और अच्छा है।
जैसे मैं हूँ
युवती सो नहीं पा रही थी। आजीवन शारीरिक रूप से विकलांग, अपनी उच्च शिक्षा के भुगतान का दान प्राप्त करने के लिए, अगले दिन वह चर्च बाज़ार में मुख्य मंच पर होगी। लेकिन मैं योग्य नहीं हूं, शार्लोट इलियट ने तर्क दिया।, पलटते और मुड़ते हुए, उसने अपनी साख पर संदेह किया, अपने आत्मिक जीवन के हर पहलू पर सवाल उठाया। अगले दिन फिर भी बेचैन, अंत में वह उत्कृष्ट भजन “जैसे मैं हूँ” के शब्दों को लिखने के लिए कलम और कागज उठाने के लिए टेबल पर गई।
“जैसे मैं हूँ, बगैर एक दलील,/पर तेरा लहू मेरे लिए बहाया गया,/ और यह कि तूने मुझे अपने पास बुलाया,/ मसीह, मसीह मैं आती हूँ। ”
1835 में लिखे गये, उसके शब्द, व्यक्त करते है कि यीशु ने कैसे अपने चेलों को बुलाया कि वें आए और उसकी सेवा करें। इसलिये नहीं क्योंकि वे तैयार थे। वे तैयार नहीं थे। परन्तु क्योंकि उन्होंने उन लोगों को-जैसे वे थे अधिकृत किया। एक असंगत समूह, उनके बारह के समूह में एक चुंगी लेने वाला, कट्टरपंथी, दो अति महत्वाकांक्षी भाई शामिल थे (मरकुस 10:35-37), और यहूदा इस्करियोती “जिसने उसे पकड़वा दिया” (मत्ती 10:4)। फिर भी, उन्होंने यह कहकर अधिकार दिया “बीमारों को चंगा करो, मरे हुओं को जिलाओ, कोढ़ियों को शुद्ध करो, दुष्टात्माओं को निकालो। ” (पद 8) और वह भी बिना पटुका, रूपा, ताँबा, झोली, न दो कुरते, न जूते और न लाठी (9-10)।
उन्होंने कहा “..मैं तुम्हें ... भेजता हूँ,” (पद 16), और वह पर्याप्त था। हम में से प्रत्येक के लिए जो उसे हाँ कहते हैं, वह अभी भी है।
बड़ी अपेक्षाएं
क्रिसमस से पहले एक व्यस्त दिन, एक बूढ़ी औरत मेरे भीड़-भाड़ वाले पड़ोस के डाकघर के मेल काउंटर पर पहुंची। उसकी धीमी गति को देखकर, धैर्यवान डाक क्लर्क ने उसका अभिवादन किया, “अच्छा नमस्ते, जवान महिला!” उसका शब्द मित्रवत था, लेकिन कुछ लोग उन्हें इस तरह सुन सकते हैं कि “युवा होना” बेहतर है।
बाइबल हमें यह देखने के लिए प्रेरित करती है कि उन्नत आयु हमारी आशा को प्रेरित कर सकता है। शिशु यीशु को जब पवित्र ठहराने के लिए युसूफ और मरियम के द्वारा मन्दिर में लाया जाता है(लुका 2:23; देखें निर्गमन 13:2, 12), दो बुज़ुर्ग विश्वासी बीच में अचानक अहम् स्थान लेते है।
पहला, सिमोन—जो वर्षों से मसीहा को देखने का इंतजार कर रहा था-“ .. उसे अपनी गोद में लिया और परमेश्वर का धन्यवाद करके कहा : “हे स्वामी, अब तू अपने दास को अपने वचन के अनुसार शान्ति से विदा करता है, क्योंकि मेरी आँखों ने तेरे उद्धार को देख लिया है, जिसे तू ने सब देशों के लोगों के सामने तैयार किया है,”
फिर जैसे शिमोन मरियम और यूसुफ से बातें कर रहा था हन्नाह, एक “बहुत बूढ़ी” भविष्यद्वक्तिन आती है (v.36)। एक विधवा जो सिर्फ सात साल विवाहित रही, वह चौरासी साल की उम्र तक मंदिर में ही थी, मंदिर को कभी नहीं छोड़ा, वह “उपवास और प्रार्थना कर करके रात–दिन उपासना किया करती थी।” जब उसने यीशु को देखा, वह “उन सभों से, जो यरूशलेम के छुटकारे की बाट जोहते थे, उस बालक के विषय में बातें करने लगी।” (vv.37-38) और प्रभु की स्तुति करने लगी।
ये दो आशा से भरपूर दास हमें याद दिलाते है की हमें बड़ी आशा के साथ- परमेश्वर की प्रतीक्षा करना कभी बंद नहीं करनी चाहिए- भले ही हमारी उम्र कुछ भी क्यों न हो।
मसीह को सुनना, अव्यवस्था को नहीं
प्रतिदिन कई घंटों तक टीवी पर समाचार देखने के बाद, वह बुज़ुर्ग व्यक्ति घबरा गया और चिंतित हो गया—चिंतित इसलिए कि दुनिया बिखर रही है और उसे अपने साथ ले जा रही है l “कृपया टीवी बंद कर दें,” उसकी व्यस्क बेटी ने उनसे आग्रह किया l “सुनना तुरंत बंद कर दीजिए l” लेकिन वह व्यक्ति सोशल मीडिया और दूसरे समाचार स्त्रोतों में अधिकाधिक समय बिताता रहा l
जो हम सुनते हैं वह गहराई से मायने रखता है l हम इसे यीशु का पिलातुस के साथ सामना करने में देखते हैं l धार्मिक अगुओं द्वारा उसके विरुद्ध अपराधिक अभियोग का उत्तर देते हुए, पिलातुस ने उसे बुलवाकर उससे पूछा, “क्या तू यहूदियों का राजा है?” (यूहन्ना 18:33) l यीशु ने हक्का-बक्काकर देनेवाला (चौकाने वाले) प्रश्न के साथ उत्तर दिया : “क्या तू यह बात अपनी ओर से कहता है या दूसरों ने मेरे विषय में तुझ से यह कहा है?” (पद.34) l
वही प्रश्न हमें भी जाँचता हैl घबराहट के संसार में, हम अव्यवस्था या अराजकता को सुन रहे हैं या मसीह को? निश्चित रूप से,उसने कहा “मेरी भेड़ें मेरा शब्द सुनती हैं,” l “मैं उन्हें जानता हूँ, और वे मेरे पीछे पीछे चलती हैं” (10:27) l यीशु ने उस पर संदेह करनेवाले धार्मिक अगुओं को समझाने के लिए “यह दृष्टान्त कहा” (पद.6) l उसने कहा कि एक अच्छे चरवाहे की तरह, उसकी “भेड़ें उसके पीछे पीछे हो लेती हैं, क्योंकि वे उसका शब्द पहचानती हैं l परन्तु वे पराए के पीछे नहीं जाएंगी, परन्तु उससे भागेंगी, क्योंकि वे परायों का शब्द नहीं पहचानतीं” (पद.4-5) l
अच्छे चरवाहे के रूप में, यीशु हमें सभी बातों के ऊपर उसे सुनने के लिए कहता है l संभवतः हम उसे अच्छी तरह से सुने और उसकी शांति पाए l