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Articles by शेरिडन योयता

दोष और क्षमा

अपनी पुस्तक ह्यूमन यूनिवर्सल्स में, मानवविज्ञानी डोनाल्ड ब्राउन ने चार सौ से अधिक व्यवहारों को सूचीबद्ध किया है जिन्हें वह मानवता के बीच आम मानते हैं l वह खिलौने, चुटकुले, नृत्य, और कहावत,  सांपों की सतर्कता और डंक वाली चीजों को बांधने जैसी चीजें शामिल करता है! इसी तरह,  उनका मानना ​​है कि सभी संस्कृतियों में सही और गलत की अवधारणाएं हैं,  जहाँ उदारता की प्रशंसा की जाती है,  वादों को महत्व दिया जाता है और नीचता और हत्या जैसी चीजों को गलत समझा जाता है l हम जहाँ से भी हैं,  हम सभी में विवेक की भावना है l

प्रेरित पौलुस ने कई शताब्दी पहले एक ऐसा ही बिंदु बताया था l जबकि ईश्वर ने यहूदी लोगों को गलत और सही के बीच स्पष्टीकरण के लिए दस आज्ञाएँ दीं,  पौलुस ने उल्लेख किया कि चूंकि गैरयहूदी लोग अपने विवेक का पालन करके सही कर सकते थे,  इसलिए परमेश्वर के कानून निसंदेश उनके दिलों पर लिखे गए थे (रोमियों 2:14-15) l लेकिन इसका मतलब यह नहीं था कि लोगों ने हमेशा वही किया जो सही था l अन्यजातियों ने अपने विवेक (1:32) के खिलाफ विद्रोह किया,  यहूदियों ने व्यवस्था तोड़ी (2:17–24), जिससे  दोनों दोषी ठहरे l लेकिन यीशु में विश्वास के द्वारा, परमेश्वर मृत्युदंड को हटा देता है जो हमारे सभी नियम-तोड़ने का परिणाम था (3:23-26; 6:23) l

चूंकि परमेश्वर ने सभी मनुष्यों को सही और गलत की भावना के साथ बनाया है,  इसलिए हममें से प्रत्येक को एक बुरी चीज पर कुछ अपराधबोध महसूस होगा जो हमने किया है या एक अच्छी चीज जो हम करने में विफल रहे हैं l जब हम उन पापों को स्वीकार करते हैं,  तो परमेश्वर अपराधबोध मिटा देता है जैसे कि एक सफेद बोर्ड साफ़ कर दिया गया हो l बस इतना करना है कि हम उससे बोलें─चाहे हम जो भी हों, जहाँ से भी हों l

प्रकृति पर ध्यान देना

एक दोस्त और मैंने हाल ही में मेरा एक पसंदीदा घूमने का स्थान गए l  तेज हवा वाली पहाड़ी पर चढ़कर,  हमने जंगली फूलों वाले एक मैदान को पार करके ऊंची चीड़ के पेड वाले जंगल में प्रवेश किए, उसके बाद एक घाटी में उतरकर हम थोड़ा समय के लिए ठहर गए l बादल हमारे ऊपर धीरे-धीरे उड़ रहे थे l पास में एक धारा बह रही थी l ध्वनियाँ केवल पक्षियों की थीं l मैं और मेरा दोस्त पंद्रह मिनट तक चुपचाप खड़े रहकर यह सब गौर से देखते रहे l

जैसा कि पता चला,  उस दिन हमारे कार्य बेहद उपचारात्मक थे l एक अमेरिकी विश्वविद्यालय के शोध के अनुसार,  जो लोग ठहरकर प्रकृति पर चिंतन करते हैं वे उच्च स्तर की खुशी,  चिंता के नीचा स्तर और पृथ्वी की देखभाल की अधिक इच्छा का अनुभव करते हैं l हालांकि,  जंगल से गुजरना पर्याप्त नहीं है l आपको बादलों को देखना होगा,  पक्षियों को सुनना होगा l कुंजी प्रकृति में रहना नहीं है,  लेकिन इसे ध्यान से देखना है l

क्या प्रकृति के फायदों का आध्यात्मिक कारण हो सकता है?  पौलुस ने कहा कि सृष्टि परमेश्वर की सामर्थ्य और प्रकृति को प्रगट करती है (रोमियों 1:20) l परमेश्वर ने अय्यूब से कहा कि वह उसकी उपस्थिति के प्रमाण के लिए समुद्र,  आकाश और तारों को देखे (अय्यूब 38-39) l यीशु ने कहा कि “आकाश के पक्षी” और “जंगली सोसनों” पर ध्यान करना परमेश्वर की देखभाल प्रगट कर सकता है और चिंता कम कर सकता है (मत्ती 6:25-30) l बाइबल में, प्रकृति पर ध्यान देना एक आत्मिक अभ्यास है l

वैज्ञानिक सोचते हैं कि प्रकृति हमें सकारात्मक रूप से क्यों प्रभावित करती है? शायद एक कारण यह है कि प्रकृति पर ध्यान करने से हम परमेश्वर की एक झलक प्राप्त कर सकते हैं जिसने इसे बनाया और जो हमें ध्यान से देखता है l

पहले दूध

सातवीं शताब्दी में, जिसे अब यूनाइटेड किंगडम कहा जाता है, अक्सर कई राज्य युद्ध में संलग्न होते थे l जब एक राजा, नॉर्थम्ब्रिया का ऑस्वाल्ड, यीशु में विश्वास करने वाला बन गया, तो उसने अपने क्षेत्र में सुसमाचार लाने के लिए एक मिशनरी को बुलाया l कॉर्मन नाम का एक आदमी भेजा गया, लेकिन बात नहीं बनी l अंग्रेजों को अपने उपदेश में “जिद्दी,” “बर्बर,” और अरुचिकर पाकर वह निराश होकर घर लौट आया l

“मेरी यह राय है,” एडन नाम के एक भिक्षु ने कॉर्मन से कहा, “ जितना आपको अपने अनजान श्रोताओं के लिए गंभीर होना था आप उससे अधिक गंभीर थे l” नॉर्थम्ब्रिया के लोगों को “अधिक आसान सिद्धांत का दूध” देने के बजाय, कॉर्मैन ने उन्हें शिक्षण दिया जिन्हें वे अभी समझ नहीं सकते थे l एडन नॉर्थम्ब्रिया गया, लोगों के समझ के अनुसार अपने उपदेश को अनुकूलित किया, और हजारों यीशु में विश्वास करने वाले बन गए l

एडन को मिशन के लिए यह संवेदनशील दृष्टिकोण पवित्र शास्त्र से मिला l पौलुस ने कुरिन्थियों से कहा, “मैंने तुम्हें दूध पिलाया, अन्न न खिलाया; क्योंकि तुम उसको नहीं खा सकते थे” (1 कुरिन्थियों 3:2) l लोगों से सही जीवनयापन की उम्मीद करने से पूर्व, इब्रानियों का कहना है, यीशु के बारे में बुनियादी शिक्षा, पश्चाताप और बपतिस्मा को समझ लेना चाहिए (इब्रानियों 5:13-6:2) l जबकि उसके बाद परिपक्वता का पालन जरूरी है (5:14), क्रम को न भूलें l ठोस भोजन से पहले दूध आता है l लोग उस शिक्षा को नहीं मान सकते हैं जिन्हें वे नहीं समझते हैं l

नॉर्थम्ब्रिया के लोगों का विश्वास आखिरकार देश के बाकी हिस्सों और उससे बाहर तक फैल गया l एडन की तरह, दूसरों के साथ सुसमाचार को साझा करते समय, हम उन लोगों से वहां मिलते हैं जहां वे हैं l

कठिन लोग

लूसी वोर्स्ले एक ब्रिटिश इतिहासकार और टीवी प्रस्तुतकर्ता हैं l जनता की नज़र में ज्यादातर लोगों की तरह, वह कभी-कभी एक बुरा मेल प्राप्त करती है─उसके मामले में, एक हलकी भाषण शक्ति बाधा पर, जिसमें उसके r,  w की तरह सुनाई देते हैं l एक व्यक्ति ने यह लिखा : लूसी,  मैं क्रुद्ध हो जाऊंगा : कृपया अपने मंद भाषण को सही करने या अपने आलेख से r हटाने के लिए अधिक प्रयास करें─मैं आपकी टीवी श्रृंखला में पूरे समय बैठ न सका क्योंकि इससे मुझे बहुत नाराजगी हुई l शुभकामनाएँ, डैरेन l”

कुछ लोगों के लिए,  इस तरह की असंवेदनशील टिप्पणी समान रूप से असभ्य जवाब को सक्रिय कर सकती है l लेकिन यहाँ लूसी ने इस तरह जवाब दिया : “ओह डैरेन,  मुझे लगता है कि आपने इंटरनेट के गुमनामी का इस्तेमाल कुछ कहने के लिए किया है, जो शायद आप मेरे सामने नहीं कहते l कृपया अपने निर्दयी शब्दों पर पुनर्विचार करें! लूसी l”

लूसी का नपा-तुला जवाब काम कर गया l डैरेन ने माफी मांगी और किसी को भी दोबारा ऐसा ई-मेल न भेजने का संकल्प किया l 

नीतिवचन कहता है, “कोमल उत्तर सुनने से गुस्सा ठंडा हो जाता है, परन्तु कटुवचन से क्रोध भड़क उठता है” (15:1) l जबकि क्रोधी व्यक्ति झगड़ा मचाता है, धीरजवंत व्यक्ति उसे शांत करता है (पद.18) l जब हमें किसी सहकर्मी से आलोचनात्मक टिप्पणी,  परिवार के किसी सदस्य से एक भद्दी टिप्पणी या किसी अजनबी से बुरा जवाब मिलता है,  तो हमारे पास एक विकल्प होता है : क्रोधी शब्दों को बोलने के लिए  जो आग की लपटों को भड़का दें या कोमल शब्द जो उन्हें बुझा दें l

ईश्वर हमें ऐसे शब्द बोलने में मदद करे जो क्रोध को दूर करते हैं—और शायद कठिन लोगों को बदलने में भी मदद कर सकें l

झुग्गी झोपड़ी के गीत

दक्षिण अमेरिका के पैराग्वे के एक छोटी सी झुग्गी में l इसके अत्यंत निर्धन ग्रामीण, वहाँ के कचरे के ढेर से वस्तुओं को पुनर्चक्रण करके गुजारा करते हैं l लेकिन इन निराशाजनक परिस्थितियों से कुछ सुंदर उभर कर सामने आया है─एक ऑर्केस्ट्रा(वादक समूह) l
एक वायलिन जिसकी लागत झुग्गी के एक घर से अधिक है, इस ऑर्केस्ट्रा को अपनी कचरा आपूर्ति से अपने वाद्य-यंत्र निर्मित करके, रचनात्मक बनना था l टेलपीस(पिछला भाग) के रूप में मुड़े हुए कांटे के साथ तेल के डिब्बे से वायलिन बनाया जाता है l सैक्सोफोन ड्रेनपाइप्स(निकास नली) से और उसकी चाबी बोतल के ढक्कनों के साथ बनाए गए हैं। ग्नोची रोलर्स(बेलन) से बनी समस्वरण खूटियों(tuning pegs) के साथ सेलो(एक वाद्ययंत्र) को टिन ड्रम से बनाया गया है l इन जुगतों पर बजाया गया मोजार्ट(विशेष प्रकार का संगीत) सुनना एक सुंदर बात है l ऑर्केस्ट्रा अपने युवा सदस्यों के विलक्षणता को ऊँचा करते हुए कई देशों के दौरे कर चुका है l
कचरा भराव क्षेत्र(landfill) से वायलिन l झुग्गियों से संगीत l परमेश्वर जो करता है उसका वह प्रतीक है l जब यशायाह भविष्यवक्ता ईश्वर की नई रचना की कल्पना करता है, तो दरिद्रता-से-सुन्दरता की एक ऐसी ही तस्वीर उभरती है, जिसमें बंजर भूमि खिलते हुए फूलों से भर जाएंगी (यशायाह 35:1-2), मरुभूमि में नदियाँ बहने लगेंगी (पद. 6–7), तलवारें हल के फाल और भाले हँसिया बनेंगी (2:4), और साधनहीन/निर्धन लोग हर्षित गीतों की ध्वनियों पर सम्पूर्ण किये जाएंगे (35:5–6, 10) l
ऑर्केस्ट्रा निदेशक कहते हैं, “दुनिया हमें कचरा भेजती है l” “हम संगीत वापस भेजते हैं l” और जैसा कि वे करते हैं, वे संसार को भविष्य की एक झलक देते हैं, जब परमेश्वर हर आंख से आँसू पोछेगा और गरीबी कभी नहीं रहेगी l

भय का सामना

वारेन एक छोटे शहर में चर्च की पासबानी करने चला गया l उसकी सेवा में कुछ शुरूआती सफलता के बाद, एक स्थानीय व्यक्ति उसके विरुद्ध हो गया l एक कहानी गढ़कर वॉरेन पर भयावह कृत्यों का आरोप लगाते हुए, कहानी को स्थानीय अखबार तक ले गया और यहाँ तक कि स्थानीय निवासियों को वितरित करने हेतु आरोपों को पर्चों पर छपवा दिये l वारेन और उसकी पत्नी अत्यधिक प्रार्थना करने लगे l अगर झूठ पर विश्वास कर लिया गया होता, तो उनके जीवन का अंत हो जाता l
राजा दाऊद ने एक बार कुछ ऐसा ही अनुभव किया l उसे एक दुश्मन द्वारा बदनामी के हमले का सामना किया l “वे दिन भर मेरे वचनों को, उलटा अर्थ लगा लगाकर मरोड़ते रहते हैं, उनकी सारी कल्पनाएँ मेरी ही बुराई करने की होती है,” उसने कहा (भजन 56:5) l इस निरंतर हमले ने उसे भयभीत और अशांत कर दिया (पद.8) l लेकिन लड़ाई के मध्य, उसने यह शक्तिशाली प्रार्थना की : “जिस समय मुझे डर लगेगा, मैं तुझ पर भरोसा रखूँगा . . . कोई प्राणी मेरा क्या कर सकता है” (पद.3-4) l
दाऊद की प्रार्थना आज हमारे लिए एक आदर्श हो सकती है l जब मैं भयभीत होता हूँ - भय या आरोप के समय में, हम परमेश्वर की ओर मुड़ते हैं l मैं तुझ पर भरोसा रखूँगा - हम अपनी लड़ाई परमेश्वर के शक्तिशाली हाथों में रख देते हैं l कोई प्राणी मेरा क्या कर सकता है – उसके साथ स्थिति का सामना करते हुए, हम याद रखते हैं कि वास्तव में हमारे खिलाफ शक्तियां कितनी सीमित हैं l
अखबार ने वॉरेन के बारे में कहानी को नजरअंदाज कर दिया l किसी कारण से, पर्चे कभी वितरित नहीं हुए l आज आप किस लड़ाई से डरते हैं? परमेश्वर से बात करें l वह आपके साथ मिलकर लड़ने के लिए तैयार है l

हांफना (Out of Breath)

मेरे घर के निकट एक गृह-सुधार स्टोर(home-improvement store) है,  जिसके एक विभाग में एक बड़ा हरा बटन है l यदि कोई सहायक मौजूद नहीं है,  तो आप बटन को दबा दें,  जो एक टाइमर को शुरू कर देता है l  यदि आपको एक मिनट के भीतर सेवा नहीं मिलती है,  तो आपको अपनी खरीद पर छूट मिलती है l

हमें इस परिदृश्य में ग्राहक बनना पसंद है जो शीघ्र सेवा प्राप्त करता है l लेकिन त्वरित सेवा की मांग अक्सर कीमत मांगता है जिसे प्रदान करने की हमसे अपेक्षा की जाती है l इसलिए हममें से कई आज महसूस करते हैं कि हमारे काम शीध्र पूरे हों, लम्बे समय तक काम करना, कई बार अपने ईमेल देखना, और निर्धारित समय में काम समाप्त करने का अत्यधित तनाव महसूस करते हैं l गृह-सुधार की दुकान की ग्राहक सेवा संबंधी रणनीति ने हम सभों के जीवन में घुस कर, उतावलापन की संस्कृति उत्पन्न कर दी है l

जब परमेश्वर ने इस्राएलियों को सब्त रखने के लिए कहा,  तो उसने एक महत्वपूर्ण कारण जोड़ा : “याद रखना कि मिस्र देश में तू आप दास था” (व्यवस्थाविवरण 5:15) l वहाँ उन्हें फिरौन के अत्यधिक समय की बाध्यता (निर्गमन 5: 6–9) के तहत लगातार काम करने के लिए मजबूर किया गया (निर्गमन 5:6-9) l अब स्वतंत्र होने के बाद,  उन्हें सुनिश्चित करने के लिए कि वे और अन्य जो उनकी सेवा करते थे प्रत्येक सप्ताह खुद को एक पूरा दिन देकर आराम करेंगे (व्यवस्थाविवरण 5:14) l ईश्वर के शासन के तहत, किसी के चेहरे पर उत्तेजना या श्वास लें में कठिनाई नहीं होनी थी l

कितनी बार आप थकावट के बिंदु तक काम करते हैं या उन लोगों के साथ अधीर हो जाते हैं जो आपको इंतजार करवाते हैं?  खुद को और एक-दूसरे को अवकाश दें l उतावलापन की संस्कृति फिरौंन की है, परमेश्वर की नहीं l

अनदेखी परिस्थितियाँ

गेंद न्यूयॉर्क के टाइम्स स्क्वायर में गिरती है । भीड़ बिग बेन(घंटा घर) की मधुर झंकार की उलटी गिनती बोलती है l सिडनी बंदरगाह में आतिशबाजी होती है l जैसे भी, आपका शहर इसे चिह्नित करता है,  नए साल में स्वागत के विषय कुछ नया होता है और तरोताज़ा आरंभ में कुछ रोमांचक है जो वह लेकर आता है । नए साल के दिन हम नई परिस्थितियों में कदम रखते हैं l हमें कैसी मित्रता और अवसर मिल सकते हैं?

इसके समस्त उत्साह के साथ, हालांकि, एक नया साल अनिश्चित हो सकता है । हममें से कोई भी भविष्य को नहीं जानता है या इसमें कौन सा तूफान हो सकता है l नए साल की कई परंपराएं इस बात को दर्शाती हैं : आतिशबाजी का आविष्कार चीन में बुरी आत्माओं को दूर भगाने और नए मौसम को समृद्ध बनाने के लिए किया गया था । और नए साल के संकल्प बेबीलोन निवासियों के समय की हैं जो अपने देवताओं को खुश करने के लिए मन्नत मानते थे l इस तरह के कृत्य एक अज्ञात भविष्य को सुरक्षित बनाने का एक प्रयास था ।

जब बेबीलोन के लोग मन्नतें नहीं मान रहे होते थे, उस समय वे विजय प्राप्त करने में लगे होते थे - इस्राएल पर भी l समय पर, परमेश्वर ने दासत्व में पड़े यहूदियों को यह संदेश भेजा : “मत डर _______ जब तू जल में होकर जाए, मैं तेरे संग संग रहूँगा” (यशायाह 43:1-2) । बाद में, यीशु ने कुछ वैसा ही कहा जब वह और शिष्य नौकायन करते हुए एक प्रचंड तूफान में फंस गए थे । “क्यों डरते हो?” तूफ़ान को शांत करने से पहले उसने उनसे कहा था (मत्ती 8:23-27) l

आज हम किनारे से नई, अनदेखी परिस्थियों में कदम रख रहे हैं l हम जिसका भी सामना करते हैं, वह हमारे साथ है - और वह लहरों को शांत करने की शक्ति रखता है ।

सच्ची सफलता

मेरे साक्षात्कार के अतिथि ने विनम्रता से मेरे सवालों का जवाब दिया । हालाँकि,  मुझे लग रहा था कि हमारी बातचीत के पीछे कुछ छुपी हुई है l एक गुजरती टिप्पणी ने इसे बाहर ला दिया l

"आप हजारों लोगों को प्रेरित कर रहे हैं," मैंने कहा ।

"हजारों नहीं," उन्होंने कहा । "लाखों ।"

और जैसे कि मेरी अज्ञानता पर तरस खाते हुए,  मेरे अतिथि ने मुझे अपनी साख/प्रत्यायक याद दिलायी – उपाधियाँ जो उनके पास थीं, चीजें  जो उन्होंने हासिल की थीं,  वह पत्रिका जो उन्होंने गढ़ी/सजाई थी । यह एक अजीब क्षण था ।

उस अनुभव के बाद से,  मैं इस बात से प्रभावित हुआ कि परमेश्वर ने सीनै पर्वत पर खुद को मूसा के सामने कैसे प्रकट किया (निर्गमन 34:5-7) । यहाँ पर कायनात और मानवता का न्यायी था, लेकिन परमेश्वर ने अपनी संज्ञा, अपने नाम का उपयोग नहीं किया । यहां 100 बिलियन/असंख्य आकाशगंगाओं का रचयिता था, लेकिन इस तरह की योग्यताओं का उल्लेख भी नहीं किया गया था । इसके बजाय, परमेश्वर ने स्वयं को “दयालु और अनुग्रहकारी, कोप करने में धीरजवंत, और अति करुणामय और सत्य” के रूप में पेश किया (पद.6) l जब वह प्रगट करता है कि वह कौन है,  तो वह अपनी उपाधियों या उपलब्धियों को सूचीबद्ध नहीं करता है लेकिन उसके पास जिस तरह का चरित्र है ।

परमेश्वर की छवि में बनाए हुए और उसके उदाहरण का पालन करने के लिए बुलाए गए लोगों के रूप में (उत्पत्ति 1:27;  इफिसियों 5:1-2), यह गंभीर है । उपलब्धि अच्छी है, उपाधियों का  अपना स्थान है,  लेकिन वास्तव में यह महत्वपूर्ण है कि हम कितने दयालु, अनुग्रहकारी, और प्रेमी बन रहे हैं l

उस साक्षात्कार अतिथि की तरह,  हम भी अपने महत्व को उपलब्धियों पर आधारित कर सकते हैं l मैंने किया है l लेकिन हमारे परमेश्वर ने प्रतिमान बनाया है कि सच्ची सफलता क्या है – वह नहीं जो हमारे व्यवसाय कार्ड और रिज्युमे(resume) पर लिखा है,  लेकिन हम उनके जैसे कैसे बन रहे हैं ।