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Articles by शेरिडन योयता

मैं उसका हाथ हूँ

जिया हाइक्सिया ने वर्ष 2000 में अपनी दृष्टि खो दी। उनका दोस्त जिया वेन्की ने बचपन में अपनी बाहें खो दीं l लेकिन उन्होंने अपनी अक्षमताओं में एक रास्ता खोज लिया है। "मैं उसका हाथ हूँ और वह मेरी आँखें हैं," हाइक्सिया कहते हैं। दोनों मिलकर चीन में अपने गांव को बदल रहे हैं।

2002 से दोस्त अपने घर के पास एक बंजर भूमि को पुनर्जीवित करने के मिशन पर हैं। साइट तक पहुँचने के लिए हर दिन हाइक्सिया वेन्की की पीठ पर सवार होकर एक नदी पार करता है l वेन्की फिर हाइक्सिया को अपने पैर की सहायता से एक फावड़ा "पकड़ा(hands)" देता है, इससे पहले हाइक्सिया वेन्की के गाल और कंधे के बीच एक लम्बे डंडे पर एक बाल्टी लटकाता है। और जब एक खोदता है और दूसरा पानी देता है, तो दोनों पेड़ लगाते हैं—अब तक 10,000 से अधिक। "एक साथ काम करना, हम बिल्कुल भी अक्षम महसूस नहीं करते हैं," हाइक्सिया कहते हैं। "हम एक टीम हैं।" 

प्रेरित पौलुस कलीसिया की तुलना एक देह से करता है, प्रत्येक अंग को कार्य करने के लिए दूसरे की आवश्यकता होती है। यदि चर्च सभी की आंखें होतीं, तो कोई सुनना नहीं होता; यदि सभी कान होते, तो गंध की कोई अनुभूति नहीं होती (1 कुरिन्थियों 12:14-17)। "आंख हाथ से नहीं कह सकती, 'मुझे तुम्हारी आवश्यकता नहीं है!" पौलुस कहते हैं (पद 21)।

हम में से प्रत्येक अपने आत्मिक वरदानों के आधार पर कलीसिया में एक भूमिका निभाता है (पद 7–11, 18)। जिया हाइक्सिया और जिया वेंकी की तरह, जब हम अपनी ताकत को जोड़ते हैं, तो हम दुनिया में बदलाव ला सकते हैं।

एक बंजर भूमि को पुन: उत्पन्न करने के लिए दो पुरुष अपनी क्षमताओं का संयोजन करते हैं। कार्य में चर्च की क्या ही तस्वीर है!

सुसमाचार

1941 में, जब पूरे यूरोप में हिटलर के शासन का विस्तार हो रहा था, उपन्यासकार जॉन स्टाइनबैक(एक अमरीकी लेखक) को युद्ध के प्रयासों में सहायता करने के लिए कहा गया । उसे अग्रिम पंक्ति पर लड़ने या सैनिकों से मिलने के लिए नहीं कहा गया था, बल्कि एक कहानी लिखने के लिए कहा गया । परिणाम द मून इज़ डाउन(The Moon Is Down), एक शांतिमय भूमि के बारे में एक उपन्यास है जिसपर एक दुष्ट शासक  आक्रमण करता है । भूमिगत प्रेस पर मुद्रित और गुप्त रूप से पूरे कब्जे वाले देशों में वितरित किये गए, उपन्यास ने एक सन्देश भेजा : मित्र राष्ट्र आ रह थे, और उपन्यास के पात्रों की नक़ल करके पाठक अपनी स्वतंत्रता को सुरक्षित रखने में मदद कर सकते थे । द मून इज़ डाउन(The Moon Is Down) के द्वारा, इस लेखक ने जर्मन शासन के तहत लोगों के लिए खुशखबरी लायी──उनकी आज़ादी निकट थी । 

इस कहानी के पात्रों की तरह, पहली शताब्दी में यहूदी लोग क्रूर रोमन शासन के कब्जे में थे । लेकिन सदियों पहले, ईश्वर ने उन्हें मुक्त करने और दुनिया में शांति लाने के लिए एक सहयोगी भेजने का वादा किया था (यशायाह 11) । आनंद तब भड़क उठा जब वह सहयोगी आया! पौलुस कहता है, “हम तुम्हें उस प्रतिज्ञा के विषय में जो बापदादों से की गयी थी, यह सुसमाचार सुनाते हैं, कि परमेश्वर ने यीशु को जिलाकर, वही प्रतिज्ञा हमारी संतान के लिए पूरी की” (प्रेरितों 13:32-33) । यीशु के पुनरुथान और क्षमा की पेशकश के द्वारा, संसार में बहाली शुरू हो गयी थी (पद.38-39; रोमियों 8:21) । 

तब से, यह कहानी संसार भर में फैल गयी है, जिसे जहाँ भी अपनाया गया शांति और स्वतंत्रता लेकर लाती है । यीशु को मरे हुओं में से जिलाया गया है । पाप और बुराई से हमारा छुटकारा शुरू हो गया है । उसी में हम स्वतंत्र हैं!

दुःख उठाने में एक उद्देश्य

“तो आप जो कह रहे हैं, यह मेरी गलती नहीं हो सकती l” उस महिला के शब्दों ने मुझे चकित कर दिया l उसके चर्च में एक अतिथि उपदेशक होने के नाते, अब हम विमर्श कर रहे थे कि मैंने उस सुबह क्या साझा किया था l “मुझे एक पुरानी बीमारी है,” उसने समझाया, “और मैं प्रार्थना, उपवास, अपने पापों को कुबूल किया, और बाकी सब कुछ किया जो चंगाई पाने के लिए मुझे करने को कहा गया था l लेकिन मैं अभी भी बीमार हूँ, इसलिए मुझे लगा कि मैं दोषी हूँ l” 

मुझे उस महिला के अंगीकार पर दुःख हुआ l अपनी समस्या को ठीक करने के लिए एक आध्यात्मिक “सूत्र” दिए जाने के बाद, जब सूत्र काम नहीं किया, तो उसने खुद को दोषी माना l इससे भी बुरी बात यह है कि पीड़ा के लिए इस सूत्रात्मक तरीके को पीढ़ियों पहले नामंजूर कर दिया गया था l 

सीधे शब्दों में कहें, तो यह पुराना सूत्र कहता है कि यदि आप पीड़ा सह रहे है, तो इसका अर्थ है कि आपने पाप किया है l जब अय्यूब ने दुखद रूप से अपने पशुधन, बच्चे, और स्वास्थ्य, खो दिया, उसके मित्रों ने उस सूत्र को उस पर उपयोग किया l “क्या तुझे मालूम है कि कोई निर्दोष भी कभी नष्ट हुआ है?” अय्यूब को दोषी समझकर, एलीपज ने कहा (अय्यूब 4:7) l बिलदद ने अय्यूब को यह भी कहा कि उसके बच्चे इसलिए मर गए क्योंकि उन्होंने पाप किये थे (8:4) l अय्यूब के दुःख के वास्तविक कारण से अज्ञान (1:6-2:10), उन्होंने उसको उसकी पीड़ा के लिए एकतरफा कारणों से संतप्त किया, जिसके लिए बाद में उनको परमेश्वर की ताड़ना मिली (42:7) l 

एक पतित संसार में पीड़ा जीवन का एक हिस्सा है l अय्यूब की तरह, यह कई कारणों से हो सकता है जो हम कभी नहीं जान पाएंगे l लेकिन परमेश्वर के पास आपके लिए एक कारण है जो आपके द्वारा सहने वाली पीड़ा के परे जाता है l एकतरफा सूत्रों में पड़कर हताश न हों l 

त्याग कब किया जाए

फरवरी 2020 में, जब कोविड-19 संकट शुरू ही हो रहा था, एक अखबार के स्तम्ब लेखक की चिंता ने मुझे प्रभावित किया l क्या हम स्वेचछा से खुद को अलग रखेंगे, उसने सोचा, अपने काम, यात्रा, और खरीदारी की आदतों को बदलेंगे ताकि दूसरे बीमार नहीं होंगे? “यह केवल कोई क्लिनिकल(clinical) संसाधन का एक जांच नहीं है,” उसने लिखा, “लेकिन दूसरों के लिए खुद को अलग करने की हमारी तत्परता l” अचानक, सदाचार की आवश्यकता प्रथम पृष्ठ की खबर बन गई  l 

जबकि हम अपनी आवश्यकता के विषय चिंतित हैं दूसरों की आवश्यकता पर विचार करना कठिन हो सकता है l शुक्र है, हमारे पास आवश्यकता पूरा करने के लिए केवल इच्छाशक्ति नहीं है l हम पवित्र आत्मा से उदासीनता की जगह प्रेम, दुःख का मुकाबला करने के लिए आनंद, हमारी चिंता की जगह शांति, हमारे आवेग को दूर करने के लिए सहनशीलता(धीरज), दूसरो की देखभाल करने के लिए दया, उनकी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए भलाई, अपनी प्रतिज्ञा पूरी करने के लिए विश्वासयोग्यता, कठोरता की जगह नम्रता, आत्म-केन्द्रितता से परे संयम देने के लिए कहें (गलातियों 5:22-23) l जबकि हम इन सारी बातों में सिद्ध नहीं होंगे, हमें निरंतर आत्मा का वरदान सद्गुण को तलाशने को बुलाया गया है (इफिसियों 5:18) l 

एक लिखक ने एक बार पवित्रता का वर्णन जो आवश्यक है उसे करना है जब उसे करने की ज़रूरत है की क्षमता के रूप में किया है l और इस प्रकार की पवित्रता प्रतिदिन आवश्यक है, केवल किसी महामारी में नहीं l क्या दूसरों के लिए त्याग करने की क्षमता हममें है? पवित्र आत्मा जिसे करने की ज़रूरत है उसे करने की सामर्थ्य से हमें भर दे l 

असीमित

मैं यहाँ हूँ, शॉपिंग मॉल फ़ूड कोर्ट में बैठी हूँ, मेरा शरीर तनावग्रस्त है और काम की निर्धारित तिथियों के कारण मेरे पेट में असहज कसाव है l जब मैं अपना भोजन खोलती और एक टुकड़ा खाती हूँ, लोग मेरे चारों ओर भागते हुए नज़र आते हैं, जो अपने ही काम पर झल्ला रहे होते हैं l हम कितने सीमित है, मैं अपने बारे में सोचती हूँ, समय, ऊर्जा, और क्षमता में सीमित l 

मैं एक नई कार्य सूची लिखने और आवश्यक कार्यों को प्राथमिकता देने पर विचार करती हूँ, लेकिन मैं जैसे ही पेन निकालती हूँ एक और विचार मेरे मन में आ जाता है : एक व्यक्तित्व जो अनंत और असीमित है, जो सहजता से सब काम पूरा करता है जिसकी वह इच्छा करता है l 

यह परमेश्वर, यशायाह कहता है, महासागर को चुल्लू से माप सकता है और पृथ्वी के मिटटी को नपुए में भर लेता है (यशायाह 40:12) l वह तारों को गिन गिनकर निकालता, और उन सब को नाम ले लेकर बुलाता है (पद.26), बड़े बड़े हाकिमों को तुच्छ कर देता है, और पृथ्वी के अधिकारियों को शून्य के समान कर देता है (पद.23), वह जातियाँ तो डोल में की एक बूंद या पलड़ों पर की धुल के तुल्य ठहरती [हैं]; [और] वह द्वीपों को धुल के किनकों सरीखे उठाता [है] (पद.15) l “तुम मुझे किसके समान बताओगे?” वह कहता है (पद.25) l “यशायाह उत्तर देता है, “यहोवा जो सनातन परमेश्वर और पृथ्वी भर का सृजनहार है, वह न थकता, न श्रमित होता है” (पद.28) l 

तनाव और घोर परिश्रम हमारे लिए अच्छे नहीं होते, लेकिन आज वे हमें शक्तिशाली सबक देते हैं l असीमित परमेश्वर मेरी तरह नहीं है l वह जो इच्छा करता है उसे पूरा करता है l मैं अपना भोजन ख़त्म करती हूँ और फिर ठहर जाती हूँ l और शांत होकर आराधना करती हूँ l 

परमेश्वर द्वारा ढाले गए वाद्ययंत्र

अब तक के सबसे महान वीडियो गेम में से एक, निनटेन्डोज़ द लेजेंड ऑफ़ ज़ेल्डा : ओकारीना ऑफ़ टाइम(Nintendo’s The Legend of Zelda: Ocarina of Time) ने दुनिया भर में सात मिलियन(सत्तर लाख) से अधिक प्रतियाँ बेची हैं l इसने एक छोटा, प्राचीन, आलू के आकर का मिट्टी से निर्मित वाद्ययंत्र, ओकारीना(ocarina) को भी लोकप्रिय बना दिया l 

ओकारीना एक संगीत वाद्ययंत्र की तरह नहीं दिखता है l हालाँकि, जब इसे बजाया जाता है ──इसके मुँहनाल में फूँककर और इसके बेआकार मुख्यभाग के चारों ओर के छिद्रों को ढँककर──इससे आश्चर्यजनक रूप से धीमा और आशाजनक ध्वनि निकलती है l 

ओकारीना के बनानेवाले ने मिट्टी का एक गोला लिया, उस पर दबाव डालकर उसे पका दिया, और उसे एक अद्भुत वाद्ययंत्र में परिवर्तित कर दिया l मैं यहाँ पर परमेश्वर और अपना तस्वीर देखता हूँ l यशायाह 64:6, 8-9 हमें बताता है : “हम तो सब के सब अशुद्ध मनुष्य के से हैं . . . तौभी, हे यहोवा, तू हमारा पिता है; देख हम तो मिट्टी हैं, और तू हमारा कुम्हार है . . . अत्यंत क्रोधित न हो l” नबी कह रहा था : हे परमेश्वर, तेरे नियंत्रण में सब कुछ है l हम पापी हैं l हमें अपने लिए खूबसूरत वाद्ययंत्र में बदल दीजिये l 

परमेश्वर ठीक ऐसा ही करता है! अपनी करुणा में, उसने अपने पुत्र, यीशु को, हमारे पापों के लिए मरने के लिए भेजा, और अब जब हम प्रतिदिन उसकी आत्मा के साथ चलते हैं वह हमें आकार दे रहा हैं और रूपांतरित कर रहा है l जैसे ओकारीना के बनानेवाले की साँस उस वाद्ययंत्र से होकर एक सुन्दर संगीत उत्पन्न करता है, परमेश्वर हमारे──उसके ढाले गए वाद्ययंत्र──अन्दर काम करता है अपनी खूबसूरत इच्छा को पूरी करने के लिए : यीशु के समान अधिकाधिक बनाते जाने में (रोमियों 8:29) l 

मसीह में सम्पूर्ण

एक लोकप्रिय फिल्म में, एक अभिनेता एक सफलता-चालित स्पोर्ट्स एजेंट की भूमिका निभाता है, जिसका विवाह टूटना आरम्भ हो जाता है l अपनी पत्नी को वापस जीतने का प्रयास करते हुए, वह उसकी आँखों में देखता है और कहता है, “तुम मुझे पूरा करो l” यह एक हृदय को छू लेनेवाला सन्देश है जो एक लोक कहानी को प्रतिध्वनित करता है l उस कल्पित के अनुसार, हममें से हर एक “आधा” हैं जिसे पूर्ण होने के लिए अपने “दूसरे आधा” भाग को खोजना है l 

यह विश्वास कि एक रोमांटिक पार्टनर हमें पूरा करता है अब एक लोकप्रिय संस्कृति बन गयी है l लेकिन क्या यह सच है? मैं कई विवाहित जोड़ों से बात करता हूँ जो अभी भी अधूरा महसूस करते हैं क्योंकि उनके बच्चे उत्पन्न नहीं हुए हैं और दूसरे जिनके पास बच्चे हैं उपरान्त महसूस करते हैं कि कुछ कमी है l आख़िरकार, कोई मानव हमें पूरी तौर से सम्पूर्ण नहीं कर सकता है l 

प्रेरित पौलुस एक और समाधान देता है l “और तुम उसी में भरपूर हो गए हो” (कुलुस्सियों 2:9-10) l यीशु हमें केवल क्षमा और स्वतंत्र ही नहीं करता है l वह हमारे जीवनों में परमेश्वर को लाकर हमें सम्पूर्ण भी करता है (पद.13-15) l 

विवाह अच्छा है, लेकिन वह हमें सम्पूर्ण नहीं कर सकता है l केवल यीशु ही वह कर सकता है l किसी व्यक्ति, आजीविका, या किसी और चीज़ से हमें सम्पूर्ण करने की अपेक्षा करने के बजाए, हम परमेश्वर के निमंत्रण को स्वीकार करें ताकि उसकी परिपूर्णता हमारे जीवनों में अधिकधिक भर सके l  

बदला नहीं लेना

किसान अपने ट्रक में चढ़कर सुबह अपने फसल का निरीक्षण करने गया l जब वह अपनी सम्पत्ति के अंतिम छोर पर पहुँचा, उसका खून खौलने लगा l किसी ने उसके फार्म के एकान्तता का उपयोग──फिर से── अवैध रूप से अपना कूड़ा फेंकने के लिए किया था l 

जब वह अपने ट्रक में बचे हुए भोजन के बैग्स भर रहा था, किसान को एक लिफाफा मिला l उसके ऊपर दोषी का पता अंकित था l यहाँ एक अवसर था जिसे नज़रंदाज़ नहीं किया जा सकता था l उस रात वह दोषी के घर तक अपना ट्रक लेकर गया और केवल उसका नहीं अपना कूड़ा भी वहां फेंक कर आया!

कुछ लोगों का कहना है, बदला लेना मीठा होता है, लेकिन क्या यह सही है? 1 शमूएल 24 में, दाऊद और उसके लोग हत्यारा राजा शाऊल से बचने के लिए एक गुफा में छिपे हुए थे l जब शाऊल भी उसी गुफा में शौच करने गया, तो दाऊद के लोगों ने देखा कि यह अवसर बदला लेने के लिए इतना अच्छा था कि इसे जाने नहीं दिया जाना चाहिए (पद.3-4) l लेकिन दाऊद इस इच्छा के विरुद्ध बदला लेना न चाहा l वह . . . कहने लगा, “यहोवा न करे कि मैं अपने प्रभु से जो यहोवा का अभिषिक्त है, ऐसा काम करूँ” (पद.6) l जब शाऊल को पता चला कि दाऊद ने उसके जीवन को बक्श दिया है, वह शक्की हो गया l “तू मुझ से अधिक धर्मी है,” वह चिल्लाया (पद.17-18) l 

जब हम या हमारे प्रिय लोग अन्याय का सामना करते हैं, दोषी से बदला लेने के अवसर आ सकते हैं l क्या हम ऐसी इच्छा के सामने घुटने टेक देंगे, जैसा कि उस किसान ने किया या दाऊद की तरह उसके विरुद्ध जाएंगे? क्या हम बदला लेने के स्थान पर धार्मिकता का चुनाव करेंगे?

महानता

कथबर्ट उत्तरी इंग्लैंड में अति-प्रिय व्यक्तिव है l सातवीं शताब्दी में इस क्षेत्र के अधिकाँश हिस्से में सुसमाचार प्रचार के लिए जिम्मेदार, कथबर्ट ने सम्राटों को सलाह दिया और राज्य को प्रभावित किया; और उनकी मृत्यु के बाद, उनके आदर में डरहम शहर बनाया गया l लेकिन इन से अधिक तरीकों से कथबर्ट की विरासत महान है l 

एक महामारी(plague) द्वारा उस क्षेत्र को उजाड़ने के बाद, कथबर्ट ने एक बार प्रभावित इलाके का दौरा करते हुए दिलासा दी l एक गाँव को छोड़ते समय, उन्होंने पता लगाया कि क्या प्रार्थना करने के लिए कोई बचा है l हाँ एक बची थी──एक महिला, एक बच्चे को पकड़ी हुई l उसने पहले ही एक बेटे को खो दिया था, और जिस बच्चे को पकड़ी हुई थी वह भी मरने पर था l कथबर्ट ने बुखार से पीड़ित बच्चे को अपने बाहों में उठा लिया, उसके लिए प्रार्थना की, और उसके माथे को चूमा l उन्होंने उससे कहा, “डरो मत, क्योंकि तुम्हारे घर में और किसी की भी मृत्यु नही होगी l” बताते हैं कि बच्चा जीवित रहा l 

यीशु ने महानता का सबक देने के लिए एक छोटे बच्चे को गोद में लेकर, कहा, “जो कोई मेरे नाम से ऐसे बालकों में से किसी एक को भी ग्रहण करता है, वह मुझे ग्रहण करता है” (मरकुस 9:37) l यहूदी संस्कृत में किसी का “स्वागत” करने का अर्थ उसकी सेवा करना था, जिस प्रकार एक मेजबान एक अतिथि की करता है l चूकिं बच्चे वयस्कों की सेवा करते थे और उनकी सेवा नहीं की जाती थी, इसलिए यह विचार चौंकाने वाला था l यीशु के बोलने का मतलब? सबसे छोटे और निम्नतम की सेवा में ही सच्ची महानता निवास करती है l 

सम्राटों का सलाहकार l इतिहास को प्रभावित करने वाला l उसके सम्मान में एक शहर का बनाया जाना l लेकिन शायद स्वर्ग कथबर्ट की विरासत को इस तरह अधिक लिपिबद्ध करता है : एक माँ पर ध्यान दिया गया l एक माथे को चूमा गया l एक नम्र जीवन अपने स्वामी को प्रतिबिंबित किया l